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वाशिंगटन। अमेरिका ने द्विपक्षीय असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के लिये भारत में छह परमाणु संयंत्र बनाने के लिए सहमति व्यक्त की है। एक संयुक्त बयान में बुधवार को इसकी जानकारी दी गयी। भारत-अमेरिका रणनीतिक सुरक्षा वार्ता के नौवें दौर के पूरा होने के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा, ‘‘हम द्विपक्षीय सुरक्षा और असैन्य परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। इसमें भारत में छह अमेरिकी परमाणु संयंत्र का निर्माण भी शामिल है।’’

अमेरिका की उप विदेश मंत्री आंद्रिया थॉम्पसन और विदेश सचिव विजय गोखले ने इस संयुक्त बैठक की सह अध्यक्षता की। दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर 2008 में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। अमेरिका ने बुधवार को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत को शीघ्र सदस्य बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहरायी।

 

एनएसजी में भारत की सदस्यता की राह में चीन रोड़े अटकाता आया है। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने वैश्विक सुरक्षा, अप्रसार की चुनौतियों समेत विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। 

जिनेवा। अमेरिका ने शिनजियांग प्रांत में उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ चीन के आचरण के खिलाफ संयुक्त रूप से कदम उठाने में मुस्लिम राष्ट्रों की विफलता पर निराशा व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के ऑफिस ऑफ ग्लोबल क्रिमिनल जस्टिस की प्रमुख तथा अमेरिकी राजदूत केली क्यूरी ने कहा, ‘‘मैं यह कह सकती हूं कि घटना को लेकर ओआईसी (इस्लामिक सहयोग संगठन) के सदस्यों की तरफ से समुचित प्रतिक्रिया न मिलने और मुखरता से विरोध नहीं किये जाने को लेकर हमें निराशा हुई।’’ 

क्यूरी ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अमेरिका-प्रायोजित एक कार्यक्रम से पहले संवाददाताओं से यह बात कही। यह कार्यक्रम चीन के अशांत शिनजियांग प्रांत में उइगरों की कथित सामूहिक नजरबंदी की घटना पर केंद्रित था।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब अमेरिका ने अपनी वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘चीन ने शिनजियांग में मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को सामूहिक हिरासत में लेने का अपना अभियान तेज कर दिया है।’’

विश्व के सभी देशों में उसके नागरिकों के मन में अपने देश के प्रति असीम प्यार की भावना समाहित रहती है। यही भावना उस देश की मतबूती का आधार भी होता है। जिस देश में यह भाव समाप्त हो जाता है, उसके बारे में कहा जा सकता है कि वह देश या तो मृत प्राय: है या समाप्त होने की ओर कदम बढ़ा चुका है। हम यह भी जानते हैं कि जो देश वर्तमान के मोहजाल में अपने स्वर्णिम अतीत को विस्मृत कर देता है, उसका अपना खुद का कोई अस्तित्व नहीं रहता। इसलिए प्रत्येक देश के नागरिक को कम से कम अपने देश के बारे में मन से जुड़ाव रखना चाहिए। इजराइल के बारे में कहा जाता है कि वहां का प्रत्येक नागरिक अपने लिए तो जीता ही है, लेकिन सबसे पहले अपने देश के लिए जीता है। इजराइल में हर व्यक्ति के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि देश के हिसाब से अपने आपको तैयार करे। इजराइल का हर व्यक्ति एक सैनिक है, उसे सैनिक का पूरा प्रशिक्षण लेना भी अनिवार्य है। यह उदाहरण एक जिम्मेदार नागरिक होने का बोध कराता है। इसी प्रकार विश्व के सभी देशों में राजनीतिक नजरिया केवल देश हित की बात को ही प्राथमिकता देता हुआ दिखाई देता है। वहां देश के काम को प्राथमिकता के तौर पर लिया जाता है। अपने स्वयं के काम को बाद में स्थान दिया जाता है।
 
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश माना जाता है। यहां के राजनेता मात्र जनता के प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में जनता को भी यह समझना चाहिए कि हम ही भारत की असली सरकार हैं। असली सरकार होने के मायने निकाले जाएं तो यह प्रमाणित होता है कि राजनेताओं से अधिक यहां जनता की जिम्मेदारियां कुछ ज्यादा ही हैं। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ यही है कि जनता को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। अगर जनता सजग और सक्रिय नहीं रही तो राजनेता देश का क्या कर सकते हैं, यह हम सभी के सामने है।
भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद जिस परिवर्तन की प्रतीक्षा की जा रही थी, उसके बारे में उस समय के नेताओं ने भी गंभीरता पूर्वक चिन्तन किया, लेकिन देश में कुछ राजनेता ऐसे भी हुए जो केवल दिखावे के लिए भारतीय थे, परंतु उनकी मानसिकता पूरी तरह से अंग्रेजों की नीतियों का ही समर्थन करती हुई दिखाई देती थीं। अंग्रेजों का एक ही सिद्धांत रहा कि भारतीय समाज में फूट डालो और राज करो। वर्तमान में भारतीय राजनीति का भी कमोवेश यही चरित्र दिखाई देता है। आज भारतीय समाज में आपस में जो विरोधाभास दिखाई देता है, उसके पीछे केवल अंग्रेजों की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। इस सबके लिए हम भी कहीं न कहीं दोषी हैं। हमने अपने अंदर की भारतीयता को समाप्त कर दिया। स्व-केन्द्रित जीवन जीने की चाहत में हमने देश हित का त्याग कर दिया।
 
वर्तमान में भारतीय समाज में केवल पैसे को प्रधानता देने का व्यवहार दिखाई देता है। हमें यह बात समझना चाहिए कि केवल पैसा ही सब कुछ नहीं होता, जबकि आज केवल पैसा ही सब कुछ माना जा रहा है। इस सबके पीछे कहीं न कहीं हमारी शिक्षा पद्धति का भी दोष है। जहां केवल किताबी ज्ञान तो मिल जाता है, लेकिन भारतीयता क्या है, इसका बोध नहीं कराया जाता। इसके लिए एक बड़ा ही शानदार उदाहरण है, जो मेरे साथ हुआ। मैं एक बार जिज्ञासा लिए कुछ परिवारों में गया। उस परिवार के बालकों से प्राय: एक ही सवाल पूछा कि आप बड़े होकर क्या बनना चाहोगे। इसके जवाब में अधिकतर बच्चों ने मिलते जुलते उत्तर दिए। किसी ने कहा कि मैं चिकित्सक बनूंगा तो किसी ने इंजीनियर बनने की इच्छा बताई। इसके बाद मैंने पूछा कि यह बनकर क्या करोगे तो उन्होंने कहा कि मैं खूब पैसे कमाऊंगा। लेकिन एक परिवार ऐसा भी था, जहां बच्चे के उत्तर को सुनकर मेरा मन प्रफुल्लित हो गया। उस बच्चे ने कहा कि मैं पहले देश भक्त बनूंगा और बाद में कोई और। मैं कमाई भी करूंगा तो देश के लिए और इसके लिए लोगों को भी प्रेरणा दूंगा कि आप भी देश के लिए कुछ काम करें। एक छोटे से बालक का यह चिन्तन वास्तव में जिम्मेदारी का अहसास कराता है। लेकिन क्या हम केवल एक बालक की सोच के आधार पर ही मजबूत देश का ताना बाना बुन सकते हैं। कदाचित नहीं। हम सभी को यह सोचना चाहिए कि हम जो भी काम कर रहे हैं, उससे मेरे अपने देश का कितना भला हो रहा है।
हमारा देश लोकतांत्रिक है। इस नाते इस देश के लोक को ही देश बनाने की जिम्मेदारी का निर्वाह करना होगा। देश में होने वाले चुनावों में हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए, इसका गंभीरता से चिन्तन भी करना चाहिए। हम जैसा देश बनाना चाहते हैं, वैसे ही उम्मीदवारों को प्रतिनिधि के तौर पर चुनना हमारा नैतिक कर्तव्य है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐसा करना जरूरी है। मतदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य है आप सभी अपना मतदान करें और सही सरकार चुनें ताकि देश भ्रष्टाचार रहित हो।
 
भारत देश का एक इतिहास है कि आम लोगों में से ही कुछ लोग ही अपना मतदान करते हैं। पढ़े लिखे नागरिक संपन्न लोग मतदान करना ही नहीं चाहते हैं। इनके मतदान नहीं करने से ही देश में भ्रष्टाचार का जन्म होता है। अनपढ़ नागरिक अपना काम देहाड़ी छोड़ कर आते हैं और मतदान करते हैं। हाँ यह जरूर है कि इनको नहीं पता की सही उम्मीदवार को वोट दिया है या गलत, इन्हें बस इतना पता होता है कि हम ने वोट दिया है। हमको मतदान करते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि हम अपने लिए सरकार बनाने जा रहे हैं। इसलिए स्वच्छ छवि वाले और देश हित में काम करने वाली सरकार को बनाना भी हम सबका नैतिक कर्तव्य है।
 
देश में राजनीति के प्रति लोगों की उदासीनता को देखते हुए देश में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाये जाने का संकल्प लिया गया है। पर क्या मात्र इस कदम से देश में मतदाताओं में कोई जागरूकता आने वाली है ? शायद नहीं क्योंकि हम भारत के लोग कभी भी किसी बात को संजीदगी से तब तक नहीं लेते हैं जब तक पानी सर से ऊपर नहीं हो जाता है। आज के समय में हर व्यक्ति सरकारों को कोसते हुए मिल जायेगा, पर जब सरकार चुनने का समय आता है तो हम घरों में कैद होकर रह जाते हैं। आज अगर कहीं पर कोई अनियमितता है तो वह केवल इसलिए है कि हम उसके प्रति उदासीन हैं। अगर हम अपने मतदान का प्रयोग करना सीख जाएँ तो समाज से खऱाब लोगों का चुन कर आना काफी हद तक कम हो सकता है। वास्तव में आज देश के मतदाताओं के लिए मतदान अनिवार्य किया जाना चाहिए। बिना किसी ठोस कारण के कोई मतदान नहीं करें तो उसे दंड देना चाहिए और संभव हो तो उसका मताधिकार भी छीन लेना चाहिए।
 
-सुरेश हिन्दुस्थानी

नयी दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान जब तक अपनी जमीन से चल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता तब तक भारत की उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती। उन्होंने बातचीत व आतंकवाद के साथ-साथ नहीं चलने पर जोर दिया। इंडियाज वर्ल्ड: मोदी गवर्नमेंट्स फॉरेन पॉलिसी पर बातचीत में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आईएसआई और अपनी सेना पर नियंत्रण करने की जरूरत है जो बार-बार द्विपक्षीय रिश्तों को बर्बाद करने पर तुले हैं। उन्होंने कहा कि हम आतंकवाद पर बात नहीं चाहते, हम उस पर कार्रवाई चाहते हैं। आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।

स्वराज से भारत द्वारा बालाकोट में की गई भारतीय हवाई कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी पलटवार के बारे में भी सवाल पूछा गया, इस पर उन्होंने कहा कि भारत ने खास तौर पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि जैश की तरफ से पाकिस्तानी सेना ने हम पर हमला क्यों किया? आप न सिर्फ जैश को अपनी जमीन पर पाल रहे हैं बल्कि उन्हें वित्त पोषित कर रहे हैं और जब पीड़ित देश प्रतिरोध करता है तो आप आतंकी संगठन की तरफ से उस पर हमला करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इमरान खान (पाकिस्तानी प्रधानमंत्री) इतने उदार हैं और राजनय हैं, उन्हें हमें मसूद अजहर सौंप देना चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते हो सकते हैं बशर्ते पड़ोसी देश अपनी जमीन पर आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे।

नयी दिल्ली। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के प्रयास में चीन द्वारा अड़ंगा लगाए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से डरे हुए हैं और चीन के खिलाफ उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता है। गांधी ने ट्वीट कर कहा कि कमजोर मोदी शी चिनफिंग से डरे हुए हैं। जब चीन भारत के खिलाफ कदम उठाता है तो उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता है। 

उन्होंने दावा किया कि मोदी की चीन कूटनीति: गुजरात में शी के साथ झूला झूलना, दिल्ली में गले लगाना, चीन में घुटने टेक देना रही। दरअसल, चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी। बीते 10 साल में संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने का यह चौथा प्रस्ताव था। 

 

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं क्योंकि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं की राय जानने के बाद अब पार्टी के कार्यकर्ताओं की राय लेने का काम शुरू कर दिया है। बुधवार शाम से कांग्रेस की दिल्ली इकाई के उन 52 हजार कार्यकर्ताओं को फोन किये जा रहे हैं जोकि राहुल गांधी के शक्ति मोबाइल एप पर पंजीकृत हैं। ऑटोमेटेड कॉल्स में IVR सिस्टम के जरिये की जा रही राय में कार्यकर्ताओं से पूछा जा रहा है कि क्या वह आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन चाहते हैं या नहीं। इस कॉल में उन्हें हाँ या ना चुनने का विकल्प वाला बटन दबाना है और उनकी राय दर्ज हो जायेगी।

दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने इस बारे में कहा है कि मैंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और राज्य पार्टी इकाई के सभी कार्यकारी अध्यक्षों की राय ली है और अब सभी कार्यकर्ताओं की राय ली जा रही है। इस रायशुमारी के परिणाम कांग्रेस अध्यक्ष को बता दिये जाएंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन होता है तो वह सिर्फ लोकसभा चुनावों के लिए ही होगा और पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव अपने बलबूते ही लड़ेगी। चाको का कहना है कि रायशुमारी का काम जल्द पूरा हो जायेगा और उसी के बाद कुछ फैसला होगा।

 

 
माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल के साथ गठबंधन करके ही रहेंगे क्योंकि कार्यकर्ताओं को जो फोन कॉल आ रहे हैं उसमें भाजपा को हराने के लिए आप से गठबंधन करना क्या सही होगा यह पूछा जा रहा है। अब कोई कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा को जिताने की बात तो करेगा ही नहीं और इसलिए वह वही बटन दबाएगा जो कांग्रेस आलाकमान चाहता है। 
 
पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दिल्ली की पार्टी इकाई के नेताओं के साथ आम आदमी पार्टी से गठबंधन के मुद्दे पर बैठक की थी। इस बैठक के बाद शीला दीक्षित ने संवाददाताओं से साफ कहा था कि आम आदमी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा और पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। यही नहीं हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस के बूथ प्रभारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भी कहा था कि पार्टी की राज्य इकाई आप के साथ गठबंधन करने के खिलाफ है। उल्लेखनीय है कि जब दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार की हार हुई थी और 28 विधायकों के साथ आम आदमी पार्टी अपना पहला चुनाव जीत कर आई थी तो राहुल गांधी की पहल पर ही अरविंद केजरीवाल को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस की ओर से समर्थन दिया गया था। वरना शीला दीक्षित तो उस समय भी केजरीवाल के खिलाफ थीं।
 
उधर, अरविंद केजरीवाल बार-बार राहुल गांधी से यह अपील कर रहे हैं कि गठबंधन किया जाये ताकि भाजपा को हराया जा सके। केजरीवाल तो कांग्रेस के साथ हरियाणा और पंजाब में भी गठबंधन चाहते हैं लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इससे साफ इंकार कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि राकांपा नेता शरद पवार ने राहुल गांधी से इस मुद्दे पर बात की है कि राहुल गांधी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को साथ लेकर चलें।

नई दिल्ली। दिल्ली के चांदनी चौक से अपने जीवन की शुरुआत करने वाले सुपरस्टार अक्षय कुमार अब राजनीति में कदम रखने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अब अक्षय कुमार का नाम सामने आ रहा है कि वह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दिल्ली की चांदनी चौक संसदीय सीट से अपना पर्चा दाखिल कर सकते हैं। इसको लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता उनसे संपर्क बनाए हुए हैं।

अक्षय कुमार ने शहीद जवानों के परिजनों को मदद मुहैया कराने के लिए गृह मंत्रालय की वेबसाइट भारत के वीर को प्रमोट करने में अहम भूमिका अदा की है। वहीं, अक्षय ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की मदद के लिए कई जागरुकता अभियान भी चलाएं और खुद सड़कों पर उतरकर कई सारे विज्ञापन किए। इसके अलावा अक्षय कुमार की छवि एक राष्ट्रवादी स्टार के तौर पर ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि उन्होंने देशहित और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए पैडमैन, टॉयलेट एक प्रेम कथा, एयरलिफ्ट जैसी कई सारी फिल्में की हैं। वहीं, उन्होंने चांदनी चौक टू चाइना फिल्म करके चांदनी चौक के साथ लगाव प्रदर्शित किया था। 

हालिया वर्षों में अक्षय कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। वहीं, बीते दिन यानी की बुधवार को प्रधानमंत्री ने अक्षय कुमार को टैग करते हुए लोकसभा चुनाव के लिए मतदाताओं को प्रेरित करने की अपील की। हालांकि सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में पहले ये बताया गया था कि चांदनी चौक सीट से भाजपा डॉ. हर्षवर्धन को उतारने जा रही है। लेकिन, जिस तरह से बीजेपी अब अक्षय कुमार को तरजीह दे रही है उनका लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि पंजाब की गुरदासपुर सीट से चार बार सांसद रह चुके विनोद खन्ना के निधन के बाद खबरें ऐसी भी थीं कि अक्षय कुमार को यहां से चुनावी अखाड़े में उतारा जा सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आपको बता दें कि अक्षय कुमार के ससुर और प्रसिद्ध अभिनेता स्वर्गीय राजेश खन्ना नई दिल्ली सीट से तीन बार कांग्रेस की टिकट पर सांसद बन चुके हैं। वर्तमान में चांदनी चौक से सांसद डॉ. हर्षवर्धन को पूर्वी दिल्ली भेजा जा रहा है।  

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा किए जाने के बाद पार्थ द्वारा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की जा रही है। दरअसल, अजीत पवार के बेटे हैं पार्थ पवार। बता दें कि अजीत पवार अपने बेटे को महाराष्ट्र की मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहते हैं लेकिन शरद पवार ने पहले घोषणा कर दी थी कि उनके परिवार से महज दो ही लोग चुनाव लड़ेंगे। पहली उनकी बेटी सुप्रिया सुले और वो खुद। 

जिस वक्त चुनाव लड़ने के लिए पार्थ का नाम सामने आया तो शरद पवार ने कहा कि परिवार से ही तीन लोगों के चुनाव लड़ने पर कार्यकर्ताओं के सामने गलत छवि पेश होगी और उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि, बाद में पार्थ ने पवार से चुनाव लड़ने की अपील भी की। 

आपको बता दें कि शरद पवार और बेटी सुप्रिया पवार पहले से ही केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन अब अजीत पवार भी केंद्र की राजनीति में आना चाहते हैं ऐसे में उन्होंने अपने बेटे पार्थ के चुनाव लड़ने पर जोर दिया। हालांकि, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन भी नहीं हुआ था तब से अजीत पवार ने राजनीति में अपनी पकड़ बना ली थी। कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार के दौरान अजीत पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। 

 

महाराष्ट्र की मवल सीट को लेकर पवार परिवार में चल रहे घमासान पर अगर नजर डालें तो यहां पर अभी तक एनसीपी का खाता भी नहीं खुला है। दरअसल, साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद मवल सीट अस्तित्व में आई थी और इस सीट पर साल 2009 और 2014 में लोकसभा चुनाव हो चुका है, जिसमें शिवसेना ने दोनों बार एनसीपी को मात दी थी। 

कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए दिग्गज नेता टॉम वडक्कन ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। वडक्कन कांग्रेस के महासचिव रहने के साथ-साथ कांग्रेस कर्यालय के प्रभारी भी रह चुके हैं। वडक्कन को भाजपा के दिग्गज नेता रविशंकर प्रसाद ने पार्टी में शामिल किया। वडक्कन कांग्रेस के प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

 
इस मौके पर टॉम वडक्कन ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित हुए है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद पार्टी का जो रवैया रहा उससे मैं बेहद दुखी हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा सेना पर सवाल उठाया जाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। वडक्कन ने कांग्रेस पर परिवार की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। 
 

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। इसी बीच दिल्ली कांग्रेस में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर घामासान मचा हुआ है। एक ओर जहां दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको के नेतृत्व से कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं से कॉल कर यह पूछ रही है कि क्या वह आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन चाहते हैं या नहीं। वहीं दिल्ली की प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का सर्वे मुझसे पूछे बगैर कैसे किया जा सकता है? 

 

 
इसके पहले भी शीला दीक्षित यह साफ कर चुकी हैं कि दिल्ली में आप से कांग्रेस का कोई भी गठबंधन नहीं होगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताया था कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी राष्ट्रीय राजधानी की सारी सीटें जीतेगी। गौरतलब है कि दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान होगा और 23 मई को लोकसभा के समस्त नतीजे आएंगे।
 
उधर आप संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार कांग्रेस से गठबंधन करने की कोशिश में जुटें हुए हैं हालांकि उन्हे अब तक कोई भी कामयाबी नहीं मिल पाई है। बुधवार को भी उन्होंने राहुल गांधी से ट्वीट कर गठबंधन पर विचार करने का आग्रस किया था।  

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