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मथुरा। केंद्रीय गृहमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति, विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है। समकालीन सभ्यताएं उससे बहुत पीछे हैं। भारत में संस्कारों का बहुत महत्व है और यही संस्कार उसे अन्य सभ्यताओं से ज्यादा महान देश बनाते हैं। उन्होंने बताया कि एप्पल कंपनी के सीईओ स्टीव जॉब्स ने व्हाट्सएप्प और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से कहा था कि जब कभी आपका मन कमजोर पड़े या व्याकुल हो तो भारत में नैनीताल के नींव करौरी बाबा के आश्रम चले जाना, मन को बहुत शांति मिलेगी और इतनी ऊर्जा का संचार होगा कि फिर कभी विचलन नहीं होगा।

उन्होंने यह सीख यहां एक निजी विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों को दी। समारोह में एक अन्य विशिष्ट अतिथि रक्षा अनुसंधान संस्थान के पूर्व महानिदेशक एवं अग्नि मिसाइल एवं सामरिक कार्यक्रम के निदेशक डॉ. वेंकटस्वामी ज्ञान शेखरन ने कहा, ‘पहले की तुलना में आज का शिक्षा तंत्र बहुत सरल हो गया है। आज इंटरनेट के माध्यम से आप किसी भी चीज को आसानी से सीख सकते हैं।’ इस मौके पर डॉ. भाटकर एवं डॉ. शेखरन को ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की उपाधि प्रदान की गई। इनके अलावा दीक्षांत समारोह में 12 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 12 को रजत पदक, 10 को मेरिट सर्टिफिकेट तथा कुल 3196 को मास्टर एवं बैचलर डिग्रियां प्रदान की गईं।

नयी दिल्ली पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने संशोधित वृद्धि दर के आंकड़ों पर विवाद के बीच इसकी समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि संदेह दूर करने और भरोसा कायम करने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि आंकड़ों को लेकर बनी ‘पहेली’ पर भी चीजें साफ की जानी चाहिए। नीति आयोग की ओर इशारा करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि ऐसे संस्थान जिनके पास सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना की विशेषज्ञता नहीं है, उनको इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। सुब्रमण्यम ने हाल में अपनी नई किताब ‘आफ काउंसिल: द चैलेंजेस आफ द मोदी जेटली इकनॉमी’ में नोटबंदी की आलोचना की है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में उनसे सलाह ली गई थी, तो उन्होंने इसका कोई साफ जबाब नहीं दिया। 

सुब्रमण्यम ने पीटीआई भाषा से साक्षात्कार में कहा, ‘‘एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा मानना है कि जीडीपी श्रृंखला की नवनिर्धारित पिछली कड़ियों कुछ ‘पहेली जरुर है जिन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए।’’ चूंकि कुछ चीजों को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है, ऐसे में भरोसा कायम करने और किसी तरह के संदेह को दूर करने के लिए मुझे लगता है कि विशेषज्ञों को इसकी गहन जांच करनी चाहिए और अपना जवाब देना चाहिए।’’ 

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा पिछले महीने जीडीपी की पिछली श्रृंखला के आंकड़ों के दौरान नीति आयोग की मौजूदगी को लेकर पैदा हुए विवाद पर सुब्रमण्यम ने कहा कि आंकड़ें बनाने और उनपर चीजें स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी विशेषज्ञों की है। ‘‘मुझे लगता है कि जीडीपी की गणना काफी तकनीकी काम है और तकनीकी विशेषज्ञों को ही यह काम करना चाहिए। ऐसे संस्थान जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता नहीं हैं उन्हें इससे दूर रखा जाना चाहिए।’’ सीएसओ ने पिछले महीने 2004-05 के बजाय 2011-12 के आधार वर्ष का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के जीडीपी आंकड़ों को घटा दिया था। इस आलोचना पर कि जब वह सरकार के साथ काम कर रहे थे तो उन्होंने नोटबंदी पर कुछ नहीं कहा था और अब वह इस मुद्दे को अपनी किताब बेचने के लिए उठा रहे हैं, सुब्रमण्यम ने कहा कि लोगों को जो कहना हैं वे कहें।

उन्होंने कहा कि अपनी नई किताब के जरिये वह उस पहेली बड़ी पहेली की ओर ध्यान खींच रहा हूं कि 86 प्रतिशत करेंसी बंद हो जाती है और अर्थव्यवस्था पर काफी कम असर पड़ा है। पूर्व सीईए का इशारा था कि क्या अर्थव्यवस्था पर इतना कम असर पड़ना जीडीपी की गणना के मौजूदा तरीके की वजह से है। 

सुब्रमण्यम ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर कम असर पड़ने की वजह क्या है? क्या हम जीडीपी का आंकड़ा सही तरीके से नहीं निकाल रहे या हमारी अर्थव्यवस्था काफी ठोस है।’’ सुब्रमण्यम फिलहाल हार्वर्ड केनेडी स्कूल में पढ़ाते हैं। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हालिया विवाद के बारे में पूछे जाने पर सुब्रमण्यम ने कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कायम रखा जाना चाहिए क्योंकि जब संस्थान मजबूत होते हैं तभी देश को भी फायदा होता है। देश में बढ़ती असहिष्णुता पर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि दुनिया भर के देशों में देखा गया है जब देश में अधिक सामाजिक शांति होगी तभी आर्थिक वृद्धि भी बेहतर होगी। 

न्यूयॉर्क। पाकिस्तान आतंकियों को लगातार पनाह दे रहा है, वे आतंकवादी आकर अमेरिकी सैनिकों की हत्या करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हैली ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान इस समस्या का समाधान नहीं निकालता है तब तक वॉशिंगटन को उसे एक डॉलर की भी मदद नहीं देनी चाहिए।
हैली ऐसी पहली भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें अमेरिका में राष्ट्रपति शासन में कैबिनेट पद पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उन देशों को पैसा देने की कोई जरूरत नहीं है जो अमेरिका का अहित चाहते हैं, उसके पीठ पीछे गलत काम करते हैं और ‘‘उसे काम करने से रोकते हैं।’’ 
 

हैली ने अमेरिकी पत्रिका ‘ दी एटलांटिक ’से कहा‘‘ मुझे लगता है कि किन देशों के साथ साझेदारी करना है इस बारे में रणनीतिक रूप से सोचने की जरूरत है मसलन कुछ चीजों पर मिलकर काम करने के लिए हम किन देशों पर भरोसा कर सकते हैं आदि। मुझे लगता है कि हम आंख मूंद कर पैसे को यूं ही जाने देते हैं, यह भी नहीं सोचते कि उसका कुछ फायदा है भी या नहीं। उन्होंने कहा,‘‘ मैं आपको एक उदाहरण देती हूं। पाकिस्तान को ही लीजिए, उन्हें एक अरब डॉलर देते हैं तो भी वे आतंकवादियों पनाह देते हैं और वे आतंकवादी आकर हमारे सैनिकों की हत्या करते हैं।
 
यह बिलकुल भी ठीक नहीं है। जब तक इसमें कोई सुधार नहीं होता तब तक हमें उन्हें एक डॉलर भी नहीं देना चाहिए। बल्कि हमें उस अरब डॉलर का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि यह कोई मामूली राशि नहीं है।’’ इस वर्ष के अंत में हैली संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत का पद छोड़ देंगी। पिछले हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हीथर नोर्ट को इस पद के लिए नामित किया था।
लागोस। एमनेस्टी इण्टरनेशनल ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (आईसीसी) से बोको हराम विद्रोहियों के अत्याचारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नाइजीरिया पर गुनहगारों को न्याय के दायरे में लाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। आईसीसी की प्रमुख अभियोजक फातिमा बेंसौदा ने युद्ध में होने वाले अपराधों और हिंसा के दौरान मानवता विरोधी कृत्यों से जुड़े आठ संभावित मामलों में वर्ष 2010 में प्राथमिक जांच शुरू की थी।
 
 
छह मामले जिहादी संबंधी थे, जिनमें नागरिकों की हत्या, बड़ी संख्या में लोगों का अपहरण करना, स्कूलों तथा पूजा के स्थानों पर हमले, यौन हिंसा, साथ ही संघर्ष में बच्चों का उपयोग करना शामिल है। बोको हराम के इस्लामी उग्रवाद में वर्ष 2009 से अभी तक उत्तर पूर्व नाइजीरिया में 27,000 लोगों की हत्या की जा चुकी है और करीब 18 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट काफी बढ़ गया है।
 
 
नाइजीरिया के राष्ट्रपति मोहम्मद बुहारी ने जून 2015 में वादा किया था कि मानवाधिकारों के दुरुपयोग के सभी मामलों से निपटने के लिए कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाये जाएंगे। बेंसौदा ने पांच दिसम्बर को प्रकाशित हुई अपनी रिपोर्ट में कहा कि नाइजीरिया ने आरोपों की जांच के लिए "ठोस कदम" उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि बोको हराम के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की "ठोस संभावना" दिखाई दी, लेकिन सैनिकों के खिलाफ नहीं "क्योंकि नाइजीरियाई अधिकारी किसी भी ऐसे आरोप को अस्वीकार करते हैं।’’
पांच राज्यों के चुनाव नतीजे मंगलवार हो आ जाएंगे। यदि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सत्ता गई तो उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी। दरअसल कांग्रेस इस ताक में है कि उसकी सरकार बनी तो राज्य के चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो, आर्थिक अपराध शाखा और सीबीआई से कराएगी।
 
 
इस मामले में सामने आई एक डायरी ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। पार्टी के मुताबिक डायरी में मुख्यमंत्री और उनके परिजन सहित कई मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम कोड वर्ड में अंकित हैं। इस मामले में कई महीने बाद खासकर चुनाव के दौरान जांच एजेंसियां कुछ बड़े नौकरशाह के खिलाफ सक्रिय हुईं। इससे पहले छोटे कर्मचारी और अधिकारी ही जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे। 

‘छोटी मछलियों का शिकार कर बड़ों को बचा रहीं जांच एजेंसी’

जांच एजेंसियों को पिछले साल तब बिलासपुर हाईकोर्ट से झटका लगा, जब उनकी ओर से पेश किए गए तीन सरकारी गवाहों को अदालत ने आरोपी बनाने का आदेश दिया था। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस घोटाले का संज्ञान लिया था। 

घोटाले से जुड़ी डायरी सामने लाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे के मुताबिक यह हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है और इसमें सरकार के शीर्ष पर बैठे नेता, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां बड़े लोगों के बदले छोटी मछलियों का शिकार कर मामले पर पर्दा डाल रही हैं। आरोपों के घेरे में रहे शीर्ष नेता व नौकरशाहों से पूछताछ तक नहीं हुई है।
इस बार विधानसभा चुनावों के नतीजे आने में कुछ देरी हो सकती है। हालांकि, मीडिया के कुछ हिस्सों में नतीजों के रात तक खिंचने की जो बात कही जा रही है, वो सही नहीं लगती। 

इस बार देरी की बात क्यों?

दरअसल, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से गुजारिश की थी कि मतगणना के हर राउंड के बाद नतीजों की जानकारी लिखित में दी जाए। उसके बाद जब उम्मीदवार पक्ष की ओर से उस पर हामी भर दी जाए तभी दूसरे राउंड की गिनती शुरू की जाए। इससे हर राउंड की गिनती और फिर घोषणा में 40-45 मिनट का वक्त लग सकता है। 16 से 20 राउंड की गिनती होगी। ऐसे में माना जा रहा है कि जो बड़ी तस्वीर दोपहर 1 बजे तक दिखनी शुरू हो जाती है, उसमें ढाई से तीन घंटे की देरी हो सकती है। 

क्या इस सिस्टम में कुछ नया है?

सीधा जवाब है-नहीं। अगर 7 दिसंबर को जारी, चुनाव आयोग के निर्देश को गौर से पढ़ा जाए तो उसमें साफ लिखा है कि 30 अप्रैल 2014 के पुराने आदेश से ही पैराग्राफ 10.5 और पैराग्राफ 10.6 को दोहराया जा रहा है। जिसके मुताबिक:
 
10.5- हर राउंड के बाद ऑब्जर्वर और रिटर्निंग अफसर, प्रत्याशी-वार नतीजों पर दस्तखत करेंगे और उन्हें ब्लैकबोर्ड/व्हाइटबोर्ड पर तुरंत लिखना होगा। पब्लिक एड्रेस सिस्टम से भी इसकी घोषणा की जाएगी। हर राउंड के नतीजे, उम्मीदवार पक्ष के साथ साझा किए जाएंगे। प्रिंट आउट की एक कॉपी मीडिया को भी दी जाएगी। 

10.6- दूसरे राउंड की मतगणना तभी शुरू हो जब पिछले राउंड की सारी टेबल पर गिनती खत्म हो चुकी हो और उसके नतीजे ब्लैकबोर्ड या व्हाइटबोर्ड पर लिख दिए गए हों।

तो इस बार फर्क कैसे पड़ेगा?

दरअसल, ये आदेश तो पुराना है लेकिन इस बार माना जा रहा है कि कांग्रेस इसको लेकर काफी सख्ती से पेश आने वाली है। यानी, पहले होता ये था कि एक राउंड का कागज, संबंधित पक्षों को थमाने के साथ ही दूसरे राउंड की गिनती की ओर अधिकारी बढ़ जाते थे। लेकिन अब, जब तक पहले राउंड की हर औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती, संबंधित पक्षों की हामी नहीं भर ली जाती, अगले राउंड की गिनती शुरू नहीं हो पाएगी। जब तक ये सब चल रहा होगा, तब तक मतगणना अधिकारी खाली बैठे रहेंगे। ये प्रक्रिया निपटने के बाद ही, अगले राउंड की ईवीएम टेबल पर लाई जाएंगी।

यही वजह है कि एक राउंड से दूसरे राउंड के बीच की इस देरी को मिलाकर नतीजों के अंतिम समय में कुछ फर्क आना स्वाभाविक है। 


विधानसभा सीट और उम्मीदवारों की संख्या

मध्य प्रदेश विधानसभा
कुल सीटें- 230
उम्मीदवार- 2899

राजस्थान विधानसभा
कुल सीटें- 199
उम्मीदवार-  2,274

तेलंगाना विधानसभा
कुल सीटें- 119
उम्मीदवार- 1821

मिजोरम विधानसभा
कुल सीटें- 40
उम्मीदवार-  209

छत्तीसगढ़ विधानसभा
कुल सीटें- 90
उम्मीदवार- 1101

मंगलवार 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जीत का दावा कर रहे हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से पूछा गया कि यदि राज्य में कांग्रेस जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम 140 से ज्यादा सीटे जीतेंगे। कल तक का इंतजार कीजिए उसके बाद सबकुछ साफ हो जाएगा। 

 

7 दिसंबर को मतदान खत्म होने के बाद सभी राज्यों के एग्जिट पोल आए थे। आठ में से चार एग्जिट पोल में राज्य की सत्ता की चाबी कांग्रेस के हाथ में जाती हुई बताई गई थी। वहीं चार में भाजपा के ही सर्वेसर्वा बने रहने की भविष्यवाणी की गई थी। कल नतीजे आने से तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन राज्य में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 

एग्जिट पोल उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर कुछ नेता इसे गलत तो वहीं कुछ पोल में मिली सीटों से भी अधिक सीटें जीतने का अनुमान लगाते हुए दिखे थे। चुनावी पंडितों की मानें तो प्रदेश की 54 सीटें ऐसी हैं जहां कब्जा करने वाला ही प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सकता है। वहीं कई एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं। 

यदि यह एग्जिट पोल सही साबित हुए तो दोनों ही पार्टियां कहीं न कहीं टिकट बंटवारे की प्रकिया को दोष देंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट ना मिलने से नाराज दोनों ही पार्टी के बागी नेताओं ने 30 सीटों पर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरी पार्टी के टिकट पर या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी।

दोनों ही पार्टियों ने बागियों को मनाने का प्रयास किया। कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजय सिंह तो भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन नेताओं को मानने और उम्मीदवारी वापस कराने के लिए मोर्चा संभाला था।

एडीलेड। भारत को आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन सोमवार को पुछल्ले बल्लेबाजों के जुझारूपन के कारण जीत के लिये इंतजार करना पड़ा और कप्तान विराट कोहली ने बाद में कहा कि ऐसे मौके पर वह शांतचित नहीं थे। भारत ने आस्ट्रेलिया को 31 रन से हराकर चार मैचों की श्रृंखला में 1-0 से बढ़त बनायी। आस्ट्रेलिया के अंतिम चार बल्लेबाजों ने 107 रन जोड़े जिससे एक समय भारतीयों की भी चिंता बढ़ने लगी थी। कोहली ने मैच के बाद कहा, ‘‘टेस्ट मैचों में ऐसा होता है। मैच में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। बाधाएं भी आती हैं। उन्होंने वास्तव में अच्छा संघर्ष किया लेकिन हमने अपनी रणनीति अच्छी तरह से लागू की।’’

भारतीय कप्तान से पूछा गया कि जब पुछल्ले बल्लेबाज इंतजार बढ़ा रहे थे तब क्या वे चिंतित थे, उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं बिल्कुल शांतचित था लेकिन आप अपनी भावनाओं को खुलकर उजागर नहीं कर सकते। जसप्रीत (बुमराह) को उसके आखिरी ओवर में मैंने सहज रहने को कहा। गेंदबाजों पर मुझे गर्व है। हमारे पास चार गेंदबाज थे और उन्होंने 20 विकेट लिये जो बड़ी उपलब्धि है। पूर्व में हम ऐसा नहीं कर पाये।’’ कोहली ने कहा कि भारत ने टेस्ट मैच में सामूहिक तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया और उम्मीद जतायी कि उनके बल्लेबाज आगे भी अच्छी बल्लेबाजी करके गेंदबाजों के प्रयास को सफल करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि अगर बल्लेबाज नियमित तौर पर जिम्मेदारी उठाते हैं तो हम प्रत्येक टेस्ट मैच में जीत के लिये प्रयास करेंगे। सामूहिक रूप से हमारी टीम बेहतर थी और हम जीत के हकदार थे।’’
 
भारत की जीत के नायक चेतेश्वर पुजारा रहे जिन्होंने 123 और 71 रन की दो लाजवाब पारियां खेली तथा कप्तान ने भी उनकी सराहना की। कोहली ने कहा, ‘‘पुजारा ने अमूल्य पारी खेली। उनके धैर्य और प्रतिबद्धता से हमने वापसी की। हम जानते थे कि अच्छा स्कोर मेजबान टीम को संकोची बना देगा। कोई भी बढ़त महत्वपूर्ण होती और हमने 15 रन की बढ़त ली। इसके बाद दूसरी पारी में उसने और रहाणे ने शानदार बल्लेबाजी की।’’ कोहली से पूछा गया कि क्या 323 रन का लक्ष्य पर्याप्त था, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमारा निचला मध्यक्रम और निचला क्रम अच्छा प्रदर्शन कर सकता था। हमें 30-35 रन और जोड़ने चाहिए थे जिससे मैच पूरी तरह से आस्ट्रेलिया के हाथ से निकल जाता।’’
 
 
उन्होंने कहा, ‘‘पर्थ जाने से पहले हम इन चीजों पर गौर करेंगे लेकिन अगर कोई श्रृंखला से पहले मुझसे कहता कि श्रृंखला शुरू होने पर हम 1-0 से आगे हो जाएंगे तो मैं इसे हाथों हाथ लेता।’’ आस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन को निराशा थी कि उनकी टीम अप्रत्याशित जीत दर्ज नहीं कर पायी। पेन ने कहा, ‘‘यह हताशाजनक है लेकिन भारत जीत का हकदार था। हमें लग रहा था कि हम लक्ष्य हासिल कर सकते हैं लेकिन हमारे मुख्य बल्लेबाज लंबे समय तक नहीं टिक पाये। मुझे लगता है पुजारा दोनों टीम के बीच मुख्य अंतर रहे। हम पर्थ में इस विश्वास के साथ जाएंगे कि हम अब भी यह श्रृंखला जीत सकते हैं।’’
 
मैन आफ द मैच पुजारा ने कहा कि यहां पूर्व में खेलने का अनुभव उनके काफी काम आया। उन्होंने कहा, ‘‘यहां पूर्व में खेलने के अनुभव का काफी फायदा मिला। इससे मेरी तैयारियों में मदद मिली। टेस्ट मैच जीतने पर श्रेय सभी गेंदबाजों को जाता है। पहली पारी में 15 रन की बढ़त से हमारा भरोसा बढ़ा।’’ पुजारा को अच्छा बल्लेबाज बनाने में उनके पिता की भूमिका अहम रही और उन्होंने उनका आभार भी व्यक्त किया। इस बल्लेबाज ने कहा, ‘‘यह बहुत मायने रखता है। उन्हें गर्व होगा। मैं अपने करियर में उनके समर्थन का आभार व्यक्त करता हूं।’’
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो गये हैं और इन चुनावों के जो परिणाम आयेंगे वे आने वाले समय में भारत की राजनीति की दिशा तय करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिये ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की आशंका करते हुए ट्विट किया और प्रत्येक कांग्रेसी को ईवीएम मशीनों की पहरेदारी पूरी मुस्तैदी से करनी चाहिए। उसकी वजह यह है कि संवैधानिक संस्थाओं पर पदासीन अधिकारियों पर सत्ता से प्रभावित होने की संभावनाओं से नकारा नहीं जा सकता। इसका अर्थ क्या यही लगाया जाये कि लोगों का लोकतान्त्रिक प्रणाली के आधारभूत स्तम्भ ‘चुनाव आयोग’ पर से भरोसा उठ चुका है ? अगर ऐसा है तो बड़ा प्रश्न यह है कि लोकतंत्र को शुद्ध सांसें कैसे मिलेंगी ? लोकतंत्र श्रेष्ठ प्रणाली है। पर उसके संचालन में शुद्धता हो। लोक जीवन में लोकतंत्र प्रतिष्ठापित हो और लोकतंत्र में लोक मत को अधिमान मिले।
 
 
लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चुनाव है, यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रतिबिम्ब होता है। लोकतंत्र में स्वस्थ मूल्यों को बनाए रखने के लिये चुनाव की स्वस्थता एवं पारदर्शिता अनिवार्य है। इनको बनाये रखने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है। उसको इससे कोई मतलब नहीं होता कि चुनावों में हार-जीत किस पार्टी की होगी, उसका मतलब केवल इससे रहता है कि मतदाताओं के मत की पवित्रता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। बेशक ईवीएम मशीनों को लेकर विपक्षी दल पिछले लम्बे अरसे से आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं। सच्चाई यह भी है कि भले ही इन मशीनों का प्रयोग विभिन्न राज्यों के चुनावों में मौजूदा भाजपा सरकार के सत्ता में रहते हुआ है और इनमें से कुछ राज्यों में विपक्षी कांग्रेस पार्टी की सरकार भी बनी है। बावजूद इसके सच्चाई यह भी है कि हर चुनाव में आयोग के पास मतदान में धांधली होने की शिकायतें बढ़ी हैं।
 
हमारी लोकतंत्र प्रणाली में तंत्र ज्यादा और लोक कम रह गया है, यह एक सोचनीय स्थिति है। यह प्रणाली उतनी ही अच्छी हो सकती है, जितने कुशल चलाने वाले होते हैं। आज बड़े-बड़े राष्ट्रों के चिन्तन, दर्शन व शासन प्रणाली में परिवर्तन आ रहे हैं। सत्ता परिवर्तन हो रहे हैं। अब तक जिस विचारधारा पर चल रहे थे, उसे किनारे रखकर नया रास्ता खोज रहे हैं। परिवर्तन अच्छी बात है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि अधिकारों का दुरुपयोग नहीं हो, मतदाता स्तर पर भी और प्रशासक स्तर पर भी। लोक चेतना जागे। ताकि चुनाव की पवित्रता को धुंधलाने के प्रयास करने वाले दो बार सोचें। जाहिर तौर पर चुनाव आयोग किसी भी सरकार के अधीन चलने वाले शासन तन्त्र के माध्यम से ही अपना काम करता है, फर्क सिर्फ यह आता है कि चुनावों के दौरान पूरा प्रशासन तन्त्र संविधान के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग का ताबेदार हो जाता है और चुनाव आयोग पूरी तरह लालच से दूर रहते हुए भय रहित व निडर होकर मतदाताओं द्वारा डाले गये मत की सुरक्षा के संवैधानिक दायित्व से बन्धा रहता है। इसलिये संविधान के अन्तर्गत बनी आचार संहिता मुखर हो, प्रभावी हो। केवल पूजा की चीज न हो। उनकी जगह हिंसा और घृणा, सत्ता एवं दबाव की अलिखित आचार संहिता न बने। रास्ता बताने वाले रास्ता पूछ रहे हैं। और रास्ता न जानने वाले नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों ही भटकाव की स्थितियां हैं। जन भावना लोकतंत्र की आत्मा होती है। लोक सुरक्षित रहेगा तभी तंत्र सुरक्षित रहेगा।
जनादेश में किसी प्रकार का भी घालमघेल किसी भी स्तर पर करने की कोई भी गुंजाइश हमारी चुनाव प्रणाली में नहीं है। यही वजह थी कि भारत का संविधान देते हुए इसके प्रस्तावक बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि हम प्रत्येक वयस्क के मत के अधिकार के साथ जो लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली अपनाने जा रहे हैं उसके चार मजबूत स्तम्भ होंगे। विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका व चुनाव आयोग। लोकतंत्र के दो मजबूत पैर न्यायपालिका और कार्यपालिका स्वतंत्र रहें। एक दूसरे को प्रभावित न करें।
 
ईवीएम मशीनों को लेकर उठने वाला यह सवाल अपनी जगह पूरी तरह वाजिब और गौर करने लायक है कि जब मतपत्रों की जगह मशीनों से मतदान कराने का फैसला लिया गया तो इसका मूल कारण यह था कि इनकी मार्फत मतगणना की प्रक्रिया को दिनों की जगह कुछ घंटों में ही निपटाया जा सकता है लेकिन मतदान होने के बाद इनकी सुरक्षा के इन्तजाम को पूरी तरह दोषरहित बनाने में चुनाव आयोग ने अपेक्षित कदम नहीं उठाये हैं, इसलिये उनकी निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बार-बार चर्चा का विषय बनती रही है, इसको निर्दोष साबित करना चुनाव आयोग का सबसे बड़ा दायित्व है और जिम्मेदारी भी। इसकी प्रक्रिया में नैतिकता अनिवार्य शर्त है। चुनाव के समय हर राजनैतिक दल अपने स्वार्थ की बात सोचता है तथा येन-केन-प्रकारेण चुनाव परिणामों को अपने पक्ष में करना चाहता है। यही कारण है कि इसमें नीति और नैतिकता की बात बहुत पीछे छूट जाती है। सत्ताकांक्षी एवं दुराग्रही ऐसे कदम उठाते हैं कि गांधी बहुत पीछे रह जाता है। जो सद्प्रयास किये जाते हैं, वे निष्फल हो रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देने में मुक्त मन से सहयोग नहीं दिया गया तो कहीं हम अपने स्वार्थी उन्माद में कोई ऐसा धागा नहीं खींच बैठें, जिससे लोकतंत्र की धवलता का पूरा कपड़ा ही उधड़ जाये। अब यह सोचना चुनाव आयोग का काम है कि वह लोकतंत्र की अस्मिता को कैसे बचाये रखता है ?
 
 
मौजूदा परिदृश्यों में चुनाव आयोग की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है, उसे ही वह इमारत बनानी है जिसमें शेष तीनों स्तम्भ अपनी-अपनी सक्रिय भूमिका निभायेंगे। अतः चुनाव आयोग को संविधान में पूरी स्वतन्त्रता दी गई और राजनैतिक दलों की संवैधानिक स्थिति तय करने का अधिकार दिया गया। उसका सरकार से केवल इतना ही नाता रखा गया कि उसकी प्रशासनिक व आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। अतः बिना शक यह माना जा सकता है कि जनता की सरकार जनता के लिये स्थापित कराने का दायित्व चुनाव आयोग का ही है। इस प्रक्रिया के दौरान जब हम विसंगतियों को देखते हैं तो मतदाताओं के विश्वास आहत होता है। विशेषकर ईवीएम मशीनों की गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश में मतदान होने के बाद जिस तरह ईवीएम मशीनों के रखरखाव में लापरवाही बरतने के वाकये सामने आये हैं उनसे चिन्ता होना इसलिए वाजिब है क्योंकि चुनाव आयोग की निगरानी में खलल डालने के प्रयास हुए हैं। चुनाव आयोग के सामने एक गंभीर चुनौती है कि वह अपने दायित्व को पूर्ण विश्वसनीयता, ईमानदारी एवं जिम्मेदारी से निभाये। वही सशक्त माध्यम है जिससे लोक के लिए, लोक जीवन के लिए, लोकतंत्र को शुद्ध सांसें मिलेंगी। लोक जीवन और लोकतंत्र की अस्मिता को गौरव मिलेगा।
 
-ललित गर्ग

जयपुर। सात दिसम्बर को राजस्थान में 199 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद मंगलवार को घोषित होने वाले परिणामों से पूर्व सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने को लेकर अपनी अपनी ताल ठोल रहे हैं। रविवार को भाजपा की कोर कमेटी में परिणाम और सरकार बनाने को लेकर एक बैठक में मंथन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी सहित सांसद, राजे मंत्रिमंडल के सदस्य और पार्टी के पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एग्जिट पोल पर कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए कहा कि परिणाम 11 तारीख को आयेंगे और हम राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनाने जा रहे हैं।

राज्य की चुनाव प्रबंधन कमेटी के संयोजक और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि हम पूर्णांक को प्राप्त करेंगे और पूर्ण बहुमत की सरकार बनायेंगे। मतगणना के दौरान किस प्रकार का प्रबंधन करना है, उसके लिये योजना के तहत अलग-अलग जिलों की क्षेत्रवार जिम्मेवारी बांटी गई है। हरेक जिले में एक वरिष्ठ व्यक्ति मतगणना पर बारीकी से निगरानी रखेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सम्पर्क में ऐसे सारे संभावित लोग हैं। वहीं दूसरी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि कांग्रेस पार्टी को एग्जिट पोल से ज्यादा सीटें मिलेंगी और कांग्रेस सरकार बनायेगी। उन्होंने कहा कि मुझे किसी प्रकार की कोई शंका नहीं है कि कांग्रेस राजस्थान में स्वीप करेगी।

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