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भारतीय समाज में सामाजिक समता, सामाजिक न्याय, सामाजिक अभिसरण जैसे समाज परिवर्तन के मुददों को उठाने वाले भारतीय संविधान के निर्माता व सामाजिक समरसता के प्रेरक भारतरत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू मध्यप्रदेश में हुआ था। इनके पिता रामजी सकपाल व माता भीमाबाई धर्मप्रेमी दंपत्ति थे। अम्बेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था। जो उस समय अस्पृश्य मानी जाती थी। इस कारण उन्हें कदम−कदम पर असमानता और अपमान सहना पड़ता था। सामाजिक समता, सामाजिक न्याय, सामाजिक अभिसरण जैसे समाज परिवर्तन के मुद्दों को प्रधानता दिलाने वाले विचारवान नेता थे डॉ. अम्बेडकर। जिस समय उनका जन्म हुआ तथा उनकी शिक्षा दीक्षा का प्रारम्भ हुआ उस समय समाज में इतनी भयंकर असमानता थी कि जिस विद्यालय में वे पढ़ने जाते थे वहां पर अस्पृश्य बच्चों को एकदम अलग बैठाया जाता था तथा उन पर विद्यालयों के अध्यापक भी कतई ध्यान नहीं देते थे। न ही उन्हें कोई सहायता दी जाती थी। उनको कक्षा के अंदर बैठने तक की अनुमति नहीं होती थी साथ ही प्यास लगने पर कोई ऊंची जाति का व्यक्ति ऊंचाई से उनके हाथों पर पानी डालता था क्योंकि उस समय मान्यता थी कि ऐसा करने से पानी और पात्र दोनों अपवित्र हो जाते थे। एक बार वे बैलगाड़ी में बैठ गये तो उन्हें धक्का देकर उतार दिया गया। वह संस्कृत पढ़ना चाहते थे लेकिन कोई पढ़ाने को तैयार नहीं हुआ। एक बार वर्षा में वे एक घर की दीवार लांघकर बौछार से स्वयं को बचाने लगे तो मकान मालिक ने उन्हें कीचड़ में धकेल दिया था। इतनी महान कठिनाइयों को झेलने के बाद डॉ. अम्बेडकर ने अपनी शिक्षा पूरी की। गरीबी के कारण उनकी अधिकांश पढ़ाई मिट्टी के तेल की ढिबरी में हुई। 1907 में मैट्रिक की परीक्षा पास करके बंबई विवि में प्रवेश लिया जिसके बाद उनके समाज में प्रसन्नता की लहर दौड़ गयी। 1923 में वे लंदन से बैरिस्टर की उपाधि लेकर भारत वापस आये और वकालत शुरू की। वे पहले ऐसे अस्पृश्य व्यक्ति बन गये जिन्होंने भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सफलता प्राप्त की। उस समय वे भारत के सबसे अधिक पढ़े लिखे तथा विद्वान नेता थे। डॉ. अम्बडेकर संस्कृत भाषा के प्रबल समर्थक थे। 
 
 
इसी साल वे बंबई विधानसभा के लिए भी निर्वाचित हुए पर छुआछूत की बीमारी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 1924 में भीमराव ने निर्धन और निर्बलों के उत्थान हेतु बहिष्कृत हितकारिणी सभा बनायी और संघर्ष का रास्ता अपनाया। 1936 में स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की और 1937 में उनकी पार्टी ने केंद्रीय विधानसभा के चुनावों में 15 सीटें प्राप्त कीं। इसी वर्ष उन्होनें अपनी पुस्तक 'जाति का विनाश' भी प्रकाशित की जो न्यूयार्क में लिखे एक शोध पर आधारित थी। इस पुस्तक में उन्होंने हिंदू धार्मिक नेताओं और जाति व्यवस्था की जोरदार आलोचना की। उन्होंने अस्पृश्य समुदाय के लोगों को गांधी द्वारा रचित शब्द 'हरिजन' की पुरजोर निंदा की। यह उन्हीं का प्रयास है कि आज यह शब्द पूरी तरह से प्रतिबंधित हो चुका है। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं तथा मूकनायक नामक एक पत्र भी निकाला। 1930 में नासिक के कालाराम मंदिर में प्रवेश को लेकर उन्होंने सत्याग्रह और संघर्ष किया। उन्होंने पूछा कि यदि भगवान सबके हैं तो उनके मंदिर में कुछ ही लोगों को प्रवेश क्यों दिया जाता है। अछूत वर्गों के अधिकारों के लिये उन्होंने कई बार कांग्रेस तथा ब्रिटिश शासन से संघर्ष किया। 
 
1941 से 1945 के बीच उन्होंने अत्यधिक संख्या में विवादास्पद पुस्तकें लिखीं और पर्चे प्रकाशित किये। जिसमें "थॉट ऑफ पाकिस्तान" भी शामिल है। डॉ. अम्बेडकर ही थे जिन्होंने मुस्लिम लीग द्वारा की जा रही अलग पाकिस्तान की मांग की कड़ी आलोचना व विरोध किया। उन्होंने मुस्लिम महिला समाज में व्याप्त दमनकारी पर्दा प्रथा की भी निंदा की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे रक्षा सलाहकार समिति और वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए श्रममंत्री के रूप में भी कार्यरत रहे। भीमराव को विधिमंत्री भी बनाया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने संविधान निर्माण में महती भूमिका अदा की। 2 अगस्त 1947 को अम्बेडकर को स्वतंत्र भारत के नये संविधान की रचना के लिये बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। संविधान निर्माण के कार्य को कड़ी मेहनत व लगन के साथ पूरा किया और सहयोगियों से सम्मान प्राप्त किया। उन्हीं के प्रयासों के चलते समाज के पिछड़े व कमजोर तबकों के लिये आरक्षण व्यवस्था लागू की गयी लेकिन कुछ शर्तों के साथ। लेकिन आज के तथाकथित राजनैतिक दल इसका लाभ उठाकर अपनी राजनीति को गलत तरीके से चमकाने में लगे हैं। संविधान में छुआछूत को दण्डनीय अपराध घोषित होने के बाद भी उसकी बुराई समाज में बहुत गहराई तक जमी हुई थी। जिससे दुखी होकर उन्होंने हिंदू धर्म छोड़ने और बौद्धधर्म को ग्रहण करने का निर्णय लिया। 
 
यह जानकारी होते ही अनेक मुस्लिम और ईसाई नेता तरह−तरह के प्रलोभनों के साथ उनके पास पहुंचने लगे। लेकिन उन्हें लगा कि इन लोगों के पास जाने का मतलब देशद्रोह है। अतः विजयदशमी (14 अक्टूबर 1956) को नागपुर में अपनी पत्नी तथा हजारों अनुयायियों के साथ भारत में जन्मे बौद्धमत को स्वीकार कर लिया। वह भारत तथा हिंदू समाज पर उनका एक महान उपकार है। एक प्रकार से डॉ. अम्बेडकर एक महान भारतीय विधिवेत्ता बहुजन राजनैतिक नेता बौद्ध पुनरूत्थानवादी होने के साथ−साथ भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार भी थे। उन्हें बाबा साहेब के लोकप्रिय नाम से भी जाना जाता है। बाबाजी का पूरा जीवन हिंदू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वव्याप्त जाति व्यवस्था के विरूद्ध संधर्ष में बीता। बाबासाहेब को उनके महान कार्यों के लिए भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। समाज में सामाजिक समरसता के लिए पूरा जीवन लगाने वाले बाबासाहेब का छह दिसम्बर 1956 को देहावसान हो गया। डॉ. अम्बेडकर को अनेकानेक विभूतियों से नवाजा गया। डॉ. अम्बेडकर आधुनिक भारत के निर्माता कहे गये। उन्हें संविधान का निर्माता, शोषित, मजदूर, महिलाओं का मसीहा बताया गया। एक प्रकार से वे महान मानवाधिकारी क्रांतिकारी नेता भी थे। पिछड़ों व वंचित समाज के सबसे प्रतिभाशाली मानव थे। डॉ. अम्बडेकर भारत सशक्तीकरण के प्रतीक बने। आजाद भारत में वे भारत के प्रथम कानून मंत्री तो बने लेकिन उनकी तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी से कभी पटरी नहीं बैठ पायी। उनमें सभी प्रकार के गुण विद्यमान हो गये जो किसी बिरले में ही होते हैं। वह विश्व स्तर के विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, समाजशास्त्री, मानवविज्ञानी, संविधानविद, लेखक, दार्शिनक, इतिहासकार, आंदोलनकारी थे। अमेरिका में कोलम्बिया विवि के 100 टाप विद्वानों में उनका नाम था। 
 
 
वर्तमान समय में भारत की पूरी राजनीति बाबा साहेब के इर्दगिर्द ही थम रही है। देश व प्रदेश के सभी राजनैतिक संगठन बाबा साहेब को भुनाने के लिए जुट गये हैं। आज दलित और पिछड़े समाज के लोगों को समर्थ बनाने के लिए प्रेरित करने में भी डॉ. अंबेडकर की ही महान भूमिका थी।
 
-मृत्युंजय दीक्षित
अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टरों के सौदे में बिचौलिए का धंधा करने वाले क्रिश्चियन मिशेल को आखिरकार हमारी सरकार ने धर दबोचा है। वह बधाई की पात्र है। 3000 करोड़ के इस सौदे में लगभग 300 करोड़ रु. की रिश्वत बांटने वाले इस दलाल को दुबई से पकड़ कर अब दिल्ली ले आया गया है। जांच ब्यूरो के अधिकारी इससे अब सारी सच्चाई उगलवाएंगे। फौज के लिए खरीदे गए हेलिकॉप्टरों के सौदे में किस नेता और किस अफसर को कितने रु. खिलाए गए हैं, ये तथ्य अब इस ब्रिटिश नागरिक मिशेल से उगलवाए जाएंगे।
 इसके पहले उक्त कंपनी के जो अफसर पकड़े गए थे, उनकी डायरियों से कुछ नाम उजागर हुए हैं। उन नामों को सोनिया गांधी के परिवार से जोड़ा गया था। हमारी फौज के एक बड़े अफसर पर भी रिश्वतखोरी के आरोप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में यह जबर्दस्त हथियार आ गया है। सोनिया गांधी परिवार के विरुद्ध पहले ही ‘नेशनल हेरल्ड’ के मामले में आयकर विभाग जांच कर रहा है। अब मोदी ने सोनिया परिवार की तरफ अपनी चुनाव-सभा में नाम लेकर भी इशारा किया है। हो सकता है कि मिशेल जो भी सच उगले, वह कांग्रेस के गले की फांस बन जाए। यदि वह बोफोर्स की तरह सोनिया परिवार को अदालत में अपराधी सिद्ध न कर पाए तो भी चुनाव के अगले छह सात माह में भाजपा के लिए वह रामबाण सिद्ध हो सकता है। हमारे प्रचारमंत्री इतने तीर चलाएंगे कि कांग्रेस का महागठबंधन चूर-चूर हो सकता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने में हर पार्टी सकुचाएगी।
 
 भाजपा यह दावा भी कर सकती है कि जब उसने मिशेल-जैसे ब्रिटिश नागरिक को अपने पंजे में फसा लिया तो विजय माल्या, नीरव मोदी और चोकसे वगैरह तो अपने ही खेत की मूली हैं। उसका भ्रष्टाचार-विरोधी चेहरा देश के मतदाताओं को उसके प्रति उत्साह से भर सकता है। उसने देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए बहुत-सी पहल की हैं। उसमें से कइयों ने तो शीर्षासन कर दिए और कइयों के सुपरिणाम पर्याप्त ठोस और सगुण नहीं हैं। ऐसे में इस तरह की निषेधात्मक नौटंकियां ही अपनी डगमगाती नाव का सहारा बन सकती हैं। इनमें अयोध्या में राममंदिर का निर्माण भी एक जबर्दस्त पैंतरा है। अगस्ता-वेस्टलैंड का मामला राफेल-सौदे को भी मंच के नीचे ढकेल देगा। लेकिन यह न भूलें कि दिल्ली में यदि दूसरी कोई सरकार आ गई तो उसके हाथ में राफेल का ब्रह्मास्त्र होगा। भ्रष्टाचार तो लोकतांत्रिक सरकारों की प्राणवायु है। उसके बिना वे जिंदा रह ही नहीं सकतीं।

कलाकार - सुशांत सिंह राजपूत , सारा अली खान 

निर्देशक - अभिषेक कपूर 

मूवी टाइप - रोमांस 

अवधि- 2 घंटा 24 मिनट

अभिषेक कपूर की निर्देशन में बनी फिल्म केदारनाथ आज सिनेमाघरो में दस्तक दे चुकी है। इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत करने वाली सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत फिल्म में लीड रोल में नजर आयेंगे। 

फिल्म की कहानी 

यह फिल्म उत्तराखंड में हुई केदारनाथ त्रासदी के दौरान दो लोगो के प्रेम की कहानी बयां करती है। इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत (मंसूर) और सारा अली खान (मक्कू) का किरदार निभा रही है। जैसे की नाम से ही पता चल रहा है कि इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत एक मुस्लमान लड़के का किरदार निभा रहे है। वहीं दूसरी तरफ सारा अली खान उर्फ मक्कू केदारनाथ के एक पडिंत की बेटी का किरदार निभा रही है। मक्कू और मंसूर एक- दूसरे से प्यार कर बैठते है, लेकिन धर्म अलग- अलग होने की वजह से दोनों एक नहीं हो पाते है। इसके बाद मक्कू की जबरन शादी करवा दी जाती है। सब खत्म हो जाता है, दोनों के सारे सपने बिखर जाते है, और फिर आती है उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की सबसे बड़ी त्रासदी जिसे आज तक वहां के लोग अपने जहन से नहीं निकाल पाये है। त्रासदी के दौरान काफी कुछ होता है, लेकिन सिर्फ वही नहीं होता जो एक बतौर दर्शक की उम्मीद थी।

 

बता दें कि इस फिल्म में जिस तरह से साऱा अली खान ने अपना अभिनय किया है,  वह वाक्य काबिलय तारीफ है। फिल्म के हर सीन में पूरी तरह से सारा ने अपनी जान डाल दी है। वह जितनी खूबसूरत है उतनी ही खूबसूबरत उनकी एक्टिंग भी है। सारा ने फिल्म केदारनाथ से यह साबित कर दिया है कि वह एक बेहद मंझी कलाकार है। वहीं दूसरी तरफ सुशांत सिंह राजपूत ने भी अपने किरदार को बाखूबी निभाया है।

लेकिन यह फिल्म दर्शको को लुभाने में नाकाम साबित हुई है। क्योंकि इस फिल्म में न तो प्रेम कहानी को सही ढंग से फिल्माया गया है, न ही उत्तराखंड में हुई  केदारनाथ त्रासदी को बाखूबी दिखाया गया । अभिषेक कपूर इस बार अपने निर्देशन में चूकते हुए नजर आये। फिल्म केदारनाथ दर्शको पर अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह से नाकाम रही है। इस फिल्म के गाने भी दर्शको पर अपना जादू नहीं चला पायें। लेकिन अगर आपको उत्तराखंड की खूबसूरती देखनी है  तो आपको इस फिल्म में  कई ऐसे नजारे देखने को मिलेंगे , जो वाक्य बेहद लुभावने है। 

फिल्म केदारनाथ का ट्रेलर-

केदारनाथ फ़िल्म की जब घोषणा हुई तब कहीं एक उम्मीद जागी कि भारतीय सिनेमा ने भारतीय परिपेक्ष्य में भी प्राकृतिक आपदाओं पर एक पूरी फ़िल्म बनाने की हिम्मत दिखाना शुरू कर दी है। इसी त्रासदी पर फ़िल्म ‘केदारनाथ’ आधारित है। मगर कुल मिलाकर मामला टोटल फ़िल्मी निकला! एक बोझिल सी प्रेम कथा जिसे देखना पहाड़ पर चढ़ने जितना ही थकाऊ था और अंत में बच्चों के कार्टून चैनल्स के ग्राफिक्स को टक्कर देते विज़वल इफेक्ट्स और फ़िल्म खत्म हो जाती है। 

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री जरीन खान ने अपनी पूर्व प्रबंधक पर अपमानजक संदेश भेजने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि खान और उनकी पूर्व प्रबंधक अंजलि अथा के बीच विवाद होने के बाद अथा ने उन्हें उनके फोन पर कथित तौर पर कई आपत्तिजनक संदेश भेजे।

पुलिस उपायुक्त परमजीत सिंह दहिया ने बताया कि अथा के खिलाफ बृहस्पतिवार को खार पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 509 (शब्दों, भावों या कृत्यों के जरिए स्त्री के शील भंग की मंशा) के तहत मामला दर्ज किया गया।

 

उन्होंने बताया, “फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हम शिकायत की जांच कर रहे हैं।” जरीन खान ने 2010 में फिल्म “वीर’’ के साथ बॉलीवुड में कदम रखा था। उनकी पिछली फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट की “1921” थी।

एडीलेड। भारत के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के दूसरे दिन भारत को पहली पारी में 250 रन पर आउट करने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने लंच तक दो विकेट 57 रन पर गंवा दिये। लंच के समय उस्मान ख्वाजा 86 गेंद में 21 रन बनाकर खेल रहे थे जबकि शॉन मार्श ने एक रन बनाया है। ऑस्ट्रेलिया अभी भी 193 रन पीछे है। इससे पहले मोहम्मद शमी (छह) दूसरे दिन जोश हेजलवुड की पहली ही गेंद पर आउट हो गए जिन्होंने विकेट के पीछे कैच थमाया। इसके साथ ही भारतीय पारी का अंत हो गया। आस्ट्रेलिया के लिये हेजलवुडने 52 रन देकर तीन विकेट लिये जबकि मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस और नाथन लियोन को दो दो विकेट मिले। ऑस्ट्रेलिया की शुरूआत भी बहुत अच्छी नहीं रही। ईशांत शर्मा ने उनकी पारी की तीसरी गेंद पर आरोन फिंच (0) को आउट किया। ख्वाजा और टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे सलामी बल्लेबाज मार्कस हैरिस (26) ने कुछ देर संभलकर खेलने की कोशिश की। दोनों ने 20.4 ओवर में 45 रन जोड़े। यह भारत के शीर्ष चार विकेटों से लिये हुई किसी भी साझेदारी से बड़ी थी। भारतीय तेज गेंदबाजों ने काफी रफ्तार के साथ गेंद डाली। जसप्रीत बुमराह ने तो एक समय 150 किमी की गति से भी गेंदबाजी की लेकिन कई बार अच्छी लैंग्थ नहीं पकड़ सके। आर अश्चिन को 12वें ओवर में गेंद सौंपी गई जिसने हैरिस को परेशान किया । लंच से पहले हैरिस को अश्विन ने सिली प्वाइंट पर लपकवाया। 

 

भुवनेश्वर। सबसे कमजोर मानी जा रही फ्रांस की टीम गुरूवार को पूल ए में अर्जेंटीना को 5-3 से हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया और पुरूष विश्व कप हाकी के क्रासओवर में अपनी जगह सुरक्षित की। न्यूजीलैंड और स्पेन के बीच मैच 2-2 से ड्रा छूटने के बाद विश्व में 20वें नंबर के फ्रांस को क्रासओवर में जगह बनाने के लिये इस मैच में हर हाल में जीत चाहिए थी और वह इसी इरादे के साथ मैदान पर भी उतरा।

अर्जेंटीना इस हार के बावजूद छह अंक लेकर पूल में शीर्ष पर रहा लेकिन फ्रांस चार अंक के साथ दूसरा स्थान हासिल करने में सफल रहा। न्यूजीलैंड के भी चार अंक हैं लेकिन गोल अंतर में फ्रांस बेहतर रहा। इस तरह से स्पेन शुरूआती चरण में ही बाहर हो गया। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार चारों पूल से शीर्ष पर रहने वाली टीमें सीधे क्वार्टर फाइनल में पहुंचेगी जबकि दूसरे और तीसरे स्थान की टीमें बाकी बचे चार स्थानों के लिये क्रासओवर में खेलेंगी।

पूल ए के अंतिम मैच में फ्रांस ने चार मैदानी गोल किये। उसकी तरफ से ह्यूगो जेनेस्टेट (18वें मिनट), अरिस्टाइड कोइसेन (26वें), गैस्पार्ड बाउमगार्टन (30वें) और फ्रैंकोइस गोएट (54वें) ने मैदानी गोल जबकि कप्तान विक्टर चार्लेट (23वें मिनट) ने पेनल्टी कार्नर पर गोल किया। विश्व में दूसरे नंबर के अर्जेंटीना की तरफ से लुकास मार्टिनेज (28वें) ने मैदानी गोल किया जबकि गोंजालो पेलियट (44वें, 48वें मिनट) ने पेनल्टी कार्नर को गोल में बदला।

नयी दिल्ल। टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की खुदरा बिक्री नवंबर में गिरकर 48,160 वाहन रही। यह पिछले साल इसी महीने की तुलना में आठ प्रतिशत कम है। कंपनी ने कहा कि नवंबर महीने में चीन में उसकी बिक्री घटी है जबकि अन्य प्रमुख बाजारों में बिक्री में वृद्घि दर्ज की गयी है।

टाटा मोटर्स ने बयान में कहा कि उसके जगुआर ब्रांड की खुदरा बिक्री 8.9 प्रतिशत बढ़कर 14,909 वाहन पर पहुंच गयी। हालांकि, लैंड रोवर की बिक्री घटकर 33,251 वाहन रही।

 

यह आंकड़ा पिछले साल नवंबर की तुलना में 14 प्रतिशत कम है। कंपनी ने कहा कि चीन में बिक्री एक साल पहले की अवधि की तुलना में 50.7 प्रतिशत तक की गिरी है। 
 

नयी दिल्ली। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की निर्माण शाखा को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 2,547 करोड़ रुपये के ठेके मिले हैं। एलएंडटी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने बंबई शेयर बाजार को बताया, "एलएंडटी के विद्युत पारेषण और वितरण कारोबार को 2,547 करोड़ रुपये के ठेके मिले हैं।

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कारोबार को तंजानिया में 220 किलोवाट की पारेषण लाइन के निर्माण का काम मिला है।" एलएंडटी ने कहा कि उसे अफ्रीका के उत्तरी क्षेत्र से दो ठेके और थाईलैंड में एक ऑर्डर मिला है।

भारत में, एलएंडटी विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार को झारखंड में 132 किलोवाट सबस्टेशन एवं सहायक पारेषण लाइन और पश्चिम बंगाल में 200 किलोवाट तथा 132 किलोवाट की पारेषण लाइन के निर्माण समेत कई ठेके मिले हैं।

जयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनके खिलाफ शरद यादव की टिप्पणी को महिलाओं का अपमान बताते हुए शुक्रवार को कहा कि निर्वाचन आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। मुख्यमंत्री राजे ने झालावाड़ में मतदान करने के बाद संवाददाताओं से कहा के पूर्व केंद्रीय मंत्री यादव का बयान उनका और विशेष रूप से महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी तरह हतप्रभ रह गयी। मुझे नहीं लगता है कि इतने लंबे अनुभव वाला और हमारे परिवार से करीबी ताल्लुकात रखने वाला कोई भी नेता अपनी वाणी पर संयम नहीं रख पाएगा। इससे बुरी बात और क्या हो सकती है?’

यादव ने अलवर में एक चुनावी सभा में कथित तौर पर कहा था, ‘वसुंधरा को आराम दो, बहुत थक गई हैं। बहुत मोटी हो गई हैं।’ राजे ने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस तरह के बयानों पर संज्ञान लेना चाहिए ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई ऐसी भाषा का इस्तेमाल ना करे। इसके साथ ही राजे ने कहा उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा से युवा पीढ़ी को कोई अच्छा संदेश नहीं जाता है। उन्होंने कहा, ‘यह भाषा तो कोई भी इस्तेमाल कर सकता है लेकिन भाजपा नेताओं के मुंह से तो सुनने को नहीं मिलती। कांग्रेस व उसके सहयोगी दल के मुंह से क्यों सुनने को मिलता है।’

नयी दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को करोड़ों देशवासियों की भावना का प्रतीक बताते हुए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि देश एक संवैधानिक व्यवस्था से चलता है, ऐसे में उच्चतम न्यायालय को इस बारे में जल्द फैसला देकर मामले का पटाक्षेप करना चाहिए। यह देश के विकास एवं सौहार्द के लिये जरूरी है।

दैनिक जागरण फोरम सम्मेलन को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि "देश संविधान के तहत चलता है और सभी का दायित्व बनता है कि वे संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करें। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों देशवासियों की भावना का प्रतीक है । जो देश की भावना है, वही उनकी भी भावना है।" उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में है, ऐसे में वह उच्चतम न्यायालय से अपील करते हैं कि जल्द इस मामले में फैसला देकर इसका पटाक्षेप करें । यह देश के विकास और सौहार्द के लिये जरूरी है।
 
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सोमनाथ मंदिर के विषय का समाधान हो सकता है, तब किसी भी दूसरे मामले का हो सकता है । अगर बात सिर्फ एक राज्य की होती, तब 24 घंटे में हल निकल सकता था और कोई विवाद भी नहीं होता । कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग हमसे सवाल पूछ रहे, उन्हें उस परिवार से इस बारे में सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के नहीं चाहने के बावजूद देश में लोकतंत्र फलता फूलता रहा है और आगे भी बढ़ता रहेगा।
 
बुलंदशहर की घटना के बारे में एक सवाल के जवाब में आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तरप्रदेश में भीड़ द्वारा हत्या करने की कोई घटना उनके समय में नहीं घटी है, बुलंदशहर की घटना एक दुर्घटना है और इस मामले में कोई भी अपराधी नहीं बच पायेगा।
 
उन्होंने कहा कि अवैध गौकशी राज्य में प्रतिबंधित है और इस बारे में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक की जवाबदेही तय कर दी गई है । उन्होंने कहा कि राज्य में हर जिले में गाय, आवरा कुत्तों आदि के संरक्षण के लिये केंद्र खोलने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है । राज्य के 75 जनपदों में गौशाला की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा रहा है।
 
उत्तरप्रदेश में विपक्ष के महागठबंधन को अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकास की राजनीति के कारण जातपात और वोटबैंक की राजनीति हाशिये पर चली गई है।
 
उन्होंने जोर दिया कि विकास के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में दोबारा लौटेगी। उन्होंने जोर दिया कि उत्तरप्रदेश में पिछले डेढ़ साल में विकास एवं सुरक्षा का माहौल कायम हुआ है, निवेश तेजी से बढ़ रहा है। 
 

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