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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने वर्तमान एवं पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर सुनवाई के लिए बिहार और केरल के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन का मंगलवार को निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पीठ ने दोनों राज्यों के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन के दिशा-निर्देश देने के साथ ही 14 दिसंबर तक पटना तथा केरल उच्च न्यायालयों से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों से कहा कि पहले से गठित विशेष अदालतों से मामलों को जिला अदालतों में भेज दिया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए दो राज्यों के जिलों में जरूरत के अनुसार अदालतों का गठन किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि विशेष अदालतें जब सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई करेंगी तो उनकी की प्राथमिकता में उम्र कैद के मामले होंगे।

 

अदालत अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी सिद्ध नेताओं पर ताउम्र प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी, साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े इस तरह के मामलों में तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने की भी मांग की गई थी।

मालाखेड़ा-अलवर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और किसानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए मंगलवार को कहा कि मोदी अपने हर भाषण में भारत माता की जय बोलते हैं लेकिन काम करते हैं अनिल अंबानी के लिए। राहुल ने यह भी कहा कि देश के कुछ प्रमुख उद्योगपतियों ने ही मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। यहां चुनावी रैली में अपने भाषण के शुरू से ही आक्रामक दिख रहे राहुल ने सबसे पहले रोजगार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को घेरा। उन्होंने अलवर के चार बेरोजगार युवाओं द्वारा एक साथ आत्महत्या किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर आपने रोजगार दिया तो हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार अलवर में चार युवाओं ने एक साथ आत्महत्या क्यों की ?’’ 

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा ‘‘आप अनिल अंबानी को रोज फोन करते हैं लेकिन क्या कभी आपने इन चारों युवाओं के परिवार को भी फोन किया?’’ इसके साथ ही राजस्थान में सत्ता में आने पर किसानों का कर्ज माफ करने तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए काम करने का वादा भी राहुल ने अपनी इस सभा में किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ युवा आत्महत्या कर रहे हैं और दूसरी ओर किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हर भाषण में मोदी कहते हैं - भारत माता की जय, और काम करते हैं अनिल अंबानी के लिये.. उन्हें अपने भाषण की शुरूआत करनी चाहिए अनिल अंबानी की जय...मेहुल चौकसी की जय.. नीरव मोदी की जय....ललित मोदी की जय से।’’

 
राहुल ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी भारत माता की बात करते हैं ... ‘‘तो आप किसानों को कैसे भूल गए? आपने 15 लोगों का 3.5 लाख करोड़ रूपये का कर्ज माफ किया मगर अलवर और राजस्थान के किसानों का आपने एक रूपया भी माफ नहीं किया।’’ उन्होंने कहा कि मोदी अब अपने किसी भी भाषण में राफेल की, रोजगार की बात नहीं करते। कांग्रेस अध्यक्ष ने नोटबंदी को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा, ‘‘नोटबंदी कालेधन के खिलाफ लड़ाई नहीं थी बल्कि यह तो (धन) सफेद करने के लिए थी ... इसलिये मोदी ने आपको कतार में खड़ा कर आपका पैसा लिया उनका पैसा माफ किया।’’ 
 
राहुल ने कहा कि देश के बड़े उद्योगपतियों ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी की सरकार को हिन्दुस्तान के सबसे बडे़ उद्योगपतियों ने बनाया था, मार्केटिंग उनकी थी..टेलीविजन पर उनकी फोटो लगाई.. बड़ी बड़ी मीटिंग के लिये उनको पैसा दिया..उद्योगपतियों ने नरेन्द्र मोदी को हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री बनाया इसलिये नरेन्द्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रूपये दिये।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान की सरकार को कोई उद्योगपति नहीं बना रहा है, राजस्थान की सरकार को किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार बनाने जा रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की जैसे ही सरकार आयेगी, दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ होगा।’’
 
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मोदी जी हर भाषण में कहते हैं कि हर महिला को गैस सिलेंडर दिया लेकिन यह नहीं कहते कि पहले यह सिलेंडर साढे़ तीन सौ रूपये का मिलता था, अब हजार रुपये में देता हूं और पहले कांग्रेस पार्टी जो केरोसिन देती थी वह भी छीन लिया।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने फसल बीमा योजना को लेकर भी तंज कसे और आरोप लगाया कि इसमें किसानों द्वारा जमा करवाए गए 45000 करोड़ रुपये में से 16000 करोड़ रुपये देश के सबसे अमीर लोगों की जेब में गये हैं। राहुल ने कहा, ‘‘यह बीमा की योजना नहीं है। इसको अनिल अंबानी योजना, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी विजय माल्या योजना कहना चाहिए। प्रधानमंत्री का, मुख्यमंत्री का सारा लक्ष्य यही था कि राजस्थान की जनता का पैसा उठाकर इन 15-20 लोगों को दो।’’
 
राहुल गांधी ने कहा ‘‘पहले प्रधानमंत्री मोदी कहते थे कि ‘अच्छे दिन ...’ तो जनता जवाब देती थी ‘... आएंगे’। लेकिन अब नया नारा निकला है ‘चौकीदार...’ फिर जनता से जवाब मिला ‘... चोर है।’’ इससे पहले सभा को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी संबोधित किया।

नयी दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने थलसेना के जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) सहित सशस्त्र बलों के करीब 1.12 लाख जवानों को ज्यादा सैन्य सेवा वेतन (एमएसपी) दिए जाने की बहुप्रतीक्षित मांग खारिज कर दी है। सैन्य सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय के इस फैसले से थलसेना मुख्यालय में ‘‘बहुत रोष’’ है और वह इसकी समीक्षा की मांग करेगा।

 87,646 जेसीओ और नौसेना एवं वायुसेना में जेसीओ के समकक्ष 25,434 कर्मियों सहित करीब 1.12 लाख सैन्यकर्मी इस फैसले से प्रभावित होंगे। सूत्रों ने बताया कि मासिक एमएसपी 5,500 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए करने की मांग थी। यदि सरकार ने मांग मान ली होती तो इस मद में हर साल 610 करोड़ रुपए खर्च होते। सैनिकों की विशिष्ट सेवा स्थितियों और उनकी मुश्किलों को देखते हुए सशस्त्र बलों के लिए एमएसपी की शुरूआत की गई थी।
 
एक सूत्र ने बताया, ‘‘जेसीओ और नौसेना एवं वायुसेना में इसकी समकक्ष रैंक के लिए उच्चतर एमएसपी के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया है।’’ अभी एमएसपी की दो श्रेणियां हैं - एक अधिकारियों के लिए और दूसरी जेसीओ एवं जवानों के लिए। सातवें वेतन आयोग ने जेसीओ और जवानों के लिए मासिक एमएसपी 5,200 रुपए तय की थी जबकि लेफ्टिनेंट रैंक और ब्रिगेडियर रैंक के बीच के अधिकारियों के लिए एमएसपी के तौर पर 15,500 रुपए तय किए थे।
 

थलसेना जेसीओ के लिए ज्यादा एमएसपी की मांग करती रही है। उसकी दलील है कि वे राजपत्रित अधिकारी (ग्रुप बी) हैं और सेना की कमान एवं नियंत्रण ढांचे में अहम भूमिका निभाते हैं। एक सैन्य अधिकारी ने अपने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘चूंकि जेसीओ ग्रुप बी के राजपत्रित अधिकारी होते हैं और उनकी सेवा की अवधि भी लंबी होती है, लिहाजा उन्हें जवानों के बराबर की एमएसपी देना गलत है। यह बहुत अनुचित है।’’ 
 

सूत्रों ने बताया कि थलसेना ने रक्षा मंत्री के सामने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। तीनों सेनाओं और रक्षा मंत्रालय का इस मामले में एक ही रुख है। एमएसपी की शुरूआत पहली बार छठे वेतन आयोग ने की थी। यूरोपीय देशों में सशस्त्र बलों के जवानों के लिए एमएसपी की अवधारणा काफी प्रचलित है। सशस्त्र बल जेसीओ और इसके समकक्ष रैंकों के लिए एमएसपी की अलग राशि तय करने की मांग कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में थलसेना ने साफ किया था कि जेसीओ राजपत्रित अधिकारी होते हैं। थलसेना ने सात साल पुराने उस नोट को भी खारिज कर दिया था जिसमें उन्हें ‘अराजपत्रित’ अधिकारी करार दिया गया था।

सीकर (राजस्थान)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को देश की सारी समस्याओं की जड़ बताते हुए मंगलवार को कहा कि उसके नेता सेना का अपमान करते हैं। ‘भारत माता की जय’ को लेकर भी मोदी ने कांग्रेस तथा इसके अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा और कहा कि हिन्दुस्तान के बेटों के मुंह से ‘भारत माता की जय’ का नारा छीनने वाले ये लोग होते कौन हैं। मोदी ने यहां अपने भाषण की शुरूआत दस बार ‘भारत माता की जय’ बुलवाकर की। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के एक नामदार हैं। उस नामदार ने आज फतवा निकाला है कि मोदी को चुनावी सभाओं की शुरूआत ‘भारत माता की जय’ से नहीं करनी चाहिए। और इसलिए मैंने आज इन लाखों लोगों की मौजूदगी में कांग्रेस के नामदार के फतवे को चूर-चूर कर दस बार भारत माता की जय बुलवाई।’’

दरअसल, इससे थोड़ी देर पहले राहुल गांधी ने हनुमानगढ़ में अपनी जनसभा में कहा था, ‘‘हर भाषण में मोदी कहते हैं भारत माता की जय और काम करते हैं अनिल अंबानी के लिए.. उन्हें अपने भाषण की शुरूआत करनी चाहिए अनिल अंबानी की जय...मेहुल चौकसी की जय.. नीरव मोदी की जय....ललित मोदी की जय से।’’ मोदी ने अपनी सभा में पलटवार किया और दस बार ‘भारत माता की जय’ बुलवाने के बाद कहा, ‘‘हिन्दुस्तान के बेटों के मुंह से भारत माता की जय का नारा छीनने की हिम्मत करने वाले वे होते कौन हैं।’’
 
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा, ‘‘अगर राजस्थान का भविष्य बदलना है तथा इसे और गति से आगे बढ़ाना है तो कांग्रेस का एक भी नुमाइंदा यहां से जीतना नहीं चाहिए। देश की सारी बीमारियों की जड़ कांग्रेस है।’’ मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बलात्कार के मामलों में सजायाफ्ता लोगों के परिजनों को टिकट दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम बेटियों के सम्मान में काम करने वाले लोग हैं और वसुंधरा राजे सरकार ने बलात्कार के मामले में कम से कम समय में जांच पूरी कर, आरोपत्र दायर कर, मामला चलाकर, फांसी की सजा दिलवाने का काम किया।’’ मोदी ने कांग्रेस पर सेना का अपमान करने और उसके लिए अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्हों कहा कि ‘‘पार्टी के एक नेता ने देश की सेना के अध्यक्ष को सड़क छाप गुंडा कहा।’’ 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने वर्षों से लंबित वन रैंक-वन पेंशन की मांग को पूरा किया। ।मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने बैंकों को बर्बाद किया और आज ये नामदार किसानों के नाम पर रेवड़ी बांटते घूम रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति में लोकतंत्र में आपको जनता की आंख में धूल झोंकने का हक नहीं है। 2009 में लोकसभा चुनाव से पहले भी किसानों से कर्ज माफी का वादा किया गया था, लेकिन छह लाख करोड़ रुपये कर्ज था और माफ किया 58,000 करोड़ रुपये।’’ मोदी ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने कर्नाटक में भी राजस्थान की तरह किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया। लेकिन कांग्रेस वहां हार गयी तो ये लोग पिछले दरवाजे से देवेगौड़ा को गले लगाकर कुर्सी से चिपक गए। अब वे कर्ज माफ करने की बजाय, जो किसान कर्ज नहीं चुका रहे हैं, उनका वारंट निकाल रहे हैं।’’

राजनांदगांव|सप्लाई लाइन में बंदर के चिपक जाने के कारण रविवार शाम रेलवे पटरी पार इलाका यानी चिखली, शांतिनगर, स्टेशन पारा, शंकरपुर आदि जगहों में आधा घंटा बिजली बंद रही। इसके चलते लोगों को परेशानी हो रही है।

हादसा चिखली पुलिस चौकी के पीछे बिजली सब स्टेशन के पास हुआ। सवा पांच बजे एक बंदर उछलकर सप्लाई लाइन में चिपक गया। सूचना मिलते ही सप्लाई बंद की गई। अमला मौके पर पहुंचा। बंदर को निकाला गया। आधा घंटा बाद सप्लाई फिर से शुरू की गई। एई जीएन देवांगन ने बताया कि बंदर को निकालने लाइन बंद रखी थी। दूसरी ओर गुरुनानक चौक तरफ शाम 4 से 6 बजे के बीच 6 बार बिजली ट्रिपिंग हुई।

भिलाई. शराब और जुए की लत के आदी शंकरपारा सुपेला निवासी विमल सेठिया ने अपने ही बच्चों के सामने पत्नी बसंती सेठिया की गला दबाकर हत्या कर दी। मृतिका के पड़ोसियों के मुताबिक, बस्ती में जुआ खेलने पर बीती रात विमल ने पत्नी से पैसे की मांग की। इस पर विवाद हुआ और हत्या कर दी। 

 

 

 

पुलिस ने शंकरपारा ओड़िया बस्ती का विमल पेंटिंग का काम करता है। पत्नी घर में जाकर मजदूरी करती थी। पत्नी के पैसे से आरोपी ने शराब पी, फिर बाकी पैसे जुए में लगा दिए। दोबारा पैसे मांगे तो विवाद हुआ। 


चेहरे को नाखूनों से खरोंचा, गला दबाकर कर दी हत्या 

मृतिका बसंती की बेटी ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे जब उसने अपनी मां के रोने और चिल्लाने की आवास सुनाई दी तो उसके पिता मां के गला को हाथ से दबाने में लगे थे। उसने बीच-बचना करने की काफी कोशिश की। लेकिन उन्होंने गला नहीं छोड़ा तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। इस बीच उसकी मां बेहोश हो गई। 

रायपुर.  मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने कहा की भाजपा चौथी बार भी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार नहीं किया कि पार्टी को गठबंधन की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने जोगी के साथ गठबंधन की बात पर कहा कि इसकी संभावना कम है लेकिन समय आैर परिस्थिति के मुताबिक निर्णय लेंगे। मुख्यमंत्री ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में यह बातें कहीं। 

 

कांग्रेस-भाजपा की लहर के साथ त्रिशंकु सरकार की चर्चा

  1.  

    दाे चरणों में संपन्न हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव के परिणाम 11 दिसंबर को आएगा। दोनों ही चरणों में हुई वोटिंग के बाद भाजपा आैर कांग्रेस के अलावा जोगी कांग्रेस भी अपनी जीत के दावे कर रही है। मतगणना की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही कांग्रेस, भाजपा की लहर के अलावा यहां पर त्रिशंकु सरकार की संभावना भी तेज हो गई है।

     

  2.  

    एक आेर जहां कांग्रेस आैर बसपा-जोगी गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं वहीं दूसरी आेर मुख्यमंत्री ने गठबंधन पर बयान देकर एक नई राजनीतिक समीकरण को हवा दे दी है। दरअसल एक न्यूज चैनल ने मुख्यमंत्री से कई मुद्दों पर बात की। इसमें से गठबंधन पर भी मुख्यमंत्री से सवाल किए गए।

     

  3.  

    मुख्यमंत्री ने ईवीएम में गड़बड़ी की कांग्रेस की आशंका पर कहा कि कांग्रेस चुनाव हार रही है इसलिए ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठा रही है। ये उनके अंदर की कमजोरी है आैर उन्होंने हार का बहाना पहले ही ढूंढ लिया है। डा.रमन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का चेहरा वह खुद हैं आैर भाजपा की सरकार में चौथी बार भी वही मुख्यमंत्री रहेंगे। राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोर्ट का जो फैसला होगा उसके मुताबिक काम करेंेगे। इसके लिए आम सहमति की भी कोशिश करेंगे। 

     

  4. प्रधानमंत्री मोदी को राहुल से हिंदुत्व की शिक्षा लेने की जरूरत नहीं 

     

    राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काे अच्छा हिंदू नहीं बताए जाने पर उन्होंने कहा कि मोदी को राहुल से हिंदुत्व की शिक्षा लेने की जरूरत नहीं है। उनका बयान समझदारी वाला नहीं है। राहुल गांधी द्वारा राफेल के आरोप पर रमन ने कहा कि झूठ का कोई सिर-पैर नहीं होता। 

     

  5. गोवा से लौटे जोगी ने कहा- कोई दावा नहीं पर सब जोगी को देख रहे 

     

    चुनाव के बाद गोवा में छुट्टी मनाने गया जोगी परिवार रविवार को लौट आया। एयरपोर्ट पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अजीत जोगी, रेणु जोगी, अमित जोगी और ऋचा जोगी का स्वागत किया। यहां पत्रकारों से चर्चा में अजीत जोगी ने कहा कि गोवा मौसम सुहाना है छत्तीसगढ़ में गर्म। इवीएम में गड़बड़ी के विवाद पर उन्होंने कहा कि अब गड़बड़ी होगी तो होगी, सब 11 को ही पता चलेगा। फिलहाल इस अवसर पर कोई दावा नहीं किया, लेकिन सब जोगी की ओर देख रहे हैं। 

     

  6. खरीद-फरोख्त की आशंका: भंसाली 

     

    इधर जोगी कांग्रेस ने खरीद फरोख्त का अंदेशा जताया है। जोगी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नितिन भंसाली ने कहा कि चुनाव परिणाम के बाद प्रदेश के दो प्रमुख राष्ट्रीय दल हार के भय से हताश होकर सत्ता पाने खरीद फरोख्त की राजनीति कर सकते है। इस मामले में जोगी कांग्रेस ने साक्ष्यों के साथ शिकायत करने की बात कही है। भंसाली ने कहा है कि दोनों ही राष्ट्रीय दल के नेताओ ने सत्ता पाने के लिए जोड़ तोड़ ओर खरीद फरोख्त की राजनीति करने की पूरी प्लानिंग कर ली है। उनके गठबंधन के विधायक प्रत्याशियों से इन दोनों दलों के नेता लगातार संपर्क कर प्रलोभन का प्रयास कर रहे हैं जिसकी साक्ष्यों के साथ शिकायत प्रमुख जांच एजेंसियों और आयोग में करने की तैयारी की जा रही है। 

     

  7. जोगी कांग्रेस, भाजपा की बी-टीम है, इसमें कोई नई बात नहीं है 

     

     इसमें आश्चर्य की कोई बात नही है। उनकी बी-टीम तो है ही वो। हम पहले भी कहते रहे हैं कि जोगी आैर रमन सिंह में सांठगांठ हैं। अब उनका यह बयान इसे आैर पुख्ता कर रहा है। वैसे भी रमन सिंह, अजीत जोगी की कई मामलों में पहले भी मदद कर चुके हैं। जोगी के कई मामले वे दबा कर रखे हैं। जाति प्रकरण हो या अंतागढ़ टेपकांड सभी मामले दबे हुए हैं। जबकि अंतागढ़ टेपकांड में सब कुछ सामने आ चुका है। यदि वे एेसा करेंगे तो सबके सामने एक्सपोज हो जाएंगे। वैसे उन्हें इसका अवसर नहीं मिलेगा। क्योंकि कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ रही है।

    टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष 

भोपाल. मध्य प्रदेश में वोटिंग के बाद अब ईवीएम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों की जानकारी मांगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भोजपुर से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पचौरी ने भोपाल और रायसेन जिलों में रविवार को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

 रविवार को पचौरी सबसे पहले रायसेन पहुंचे। उन्होंने वहां पर एसपी जगत सिंह के साथ स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने कहा कि मतदान के बाद प्रदेश भर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ईवीएम मशीनें जिन स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं, उनके मुख्य द्वार की विजिबिलिटी कैमरे के साथ प्रॉपर होनी चाहिए, जो कि रायसेन में नही है। 

 पत्र लिखकर मांगी आयोग से ईवीएम के नंबरों की जानकारी : कांग्रेस ने चुनाव आयोग से स्ट्रांग रूम के अंदर लैपटॉप ले जाने पर रोक लगाने की मांग की है। सागर, खंडवा, पंधाना की घटनाओं की जांच होनी चाहिए। सुरेश पचौरी ने आयोग को पत्र लिखकर ईवीएम की जानकारी मांगी गई है। पूरे चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम, उपयोग में लाई गई ईवीएम और बिना उपयोग वाली ईवीएम समेत खराब हुई ईवीएम के नंबरों की जानकारी मांगी गई है। आयोग को लिखे गए पत्र में पचौरी ने आशंका जताई गई है कि ईवीएम के जरिए गड़बड़ी हो सकती है। 

 बंद हो गई एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे: रायसेन जिला मुख्यालय पर बनाए गए स्ट्रांग रूम में एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे लाइट नहीं होने के कारण करीब आधे घंटे के लिए शाम 6 बजे बंद हो गए, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने स्ट्रांग रूम के बाहर हंगामा शुरू कर दिया था।

 प्रदेश के कई जिलों से मिली शिकायतें: पचौरी ने कहा कि भोपाल, अनूपपुर, सागर में भी मशीनों के मूवमेन्ट को लेकर शिकायतें मिली हैं। इससे सब से साफ है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और गड़बड़ी होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, उन्होंने कहा कि 2013 में जिस तरह स्ट्रांग रूम के बाहर सोने की इजाजत थी, वैसी ही व्यवस्था इस बार भी की जाए। 

 मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया निरीक्षण : ईवीएम पर लगातार खड़े होते संदेह के सवालों के बीच आखिरकार चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कांताराव ने भी भोपाल में स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। स्ट्रांग रूम के निरीक्षण के बाद कांताराव ने कहा कि चुनाव आयोग के 100 फीसदी नियमों का पालन ईवीएम की सुरक्षा में किया जा रहा है। 

देश के नामी पत्रकार, बुद्धिजीवी होने के नाते श्रीमान वेदप्रताप वैदिकजी के प्रति मेरे मन में काफी सम्मान की भावना होने के बावजूद दिनांक-30 अक्टूबर 2018 को 'लोकमत समाचार' में 'राम मंदिर का अध्यादेश कैसा हो?' शीर्षक उनका लेख पढ़कर मुझे उनकी बुद्धि पर खासा तरस आया। आपने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा- 'मैं कहता हूँ कि वहां दुनिया के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के तीर्थ क्यों न बनें? यह विश्व सभ्यता को भारत की अभूतपूर्व देन होगी। अयोध्या विश्व पर्यटन का आध्यात्मिक केंद्र बन जायेगी।'
 
मेरी यह समझ में नहीं आता कि जिस हिंदुस्तान में विश्व में सबसे ज्यादा मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर व अन्य धर्मस्थल तथा पंडे, मौलवी, पादरी, धर्मगुरु हैं, वह दुनिया का सबसे दरिद्र देश क्यों है ? अगर मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारों व अन्य जितने भी धर्मस्थल हैं, उनमें पूजा-पाठ, नमाज, बलि, कुर्बानी, प्रार्थना, यज्ञ करने से ही मनुष्य का कल्याण होता तो फिर आज हिंदुस्तान विश्व का सबसे बड़ा, सुखी, समृद्धिशाली व ताकतवर देश होता, न कि दरिद्रतम देश। फिर भी भारतवर्ष के लोग मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर के नाम पर इतने उन्माद क्यों हैं? राम मंदिर बनने या बाबरी मस्जिद बनने से ही हिंदुस्तान का कायाकल्प होता तो इनके निर्माण में किसी को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन जो हिंदुस्तान करोड़ों मंदिरों, मस्जिदों, गिर्जाघरों, गुरुद्वारों के होते हुए भी सैकड़ों वर्षों तक विदेशी शासकों का गुलाम रहा है, जिसकी आधी से ज्यादा आबादी आज भी भूखे पेट सोने को अभिशप्त है, उस हिंदुस्तान में राम मंदिर या बाबरी मस्जिद को लेकर इतना उन्माद, इतना हाहाकार क्यों? क्या वे इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर या बाबरी मस्जिद बनने से हिंदुस्तान की दरिद्रता दूर हो जायेगी, हिंदुस्तान का कायाकल्प हो जायेगा? अगर नहीं तो फिर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर इतना हो-हल्ला क्यों? आम आदमी की बात और है, आप सरीखे विद्वान, बुद्धिमान लोग अगर बेसिर-पैर की बातें लिखकर समाज को गुमराह करते हैं तो फिर पत्रकारिता की वृत्ति के प्रति कोफ्त पैदा होने लगती है।
 
मनुष्य के दो सबसे बड़े शत्रु हैं- पहला लोभ और दूसरा भय। सृष्टि के प्रारंभ से ही मुट्ठी भर चालाक, धुरंधर, शैतान, लालची स्वभाव के लोग मनुष्य की इन दो कमजोर नब्जों के जरिये मानव जाति का शोषण करते आ रहे हैं। मनुष्य जाति के शोषण का सबसे भयंकरतम माध्यम है धर्म। सृष्टि ने हमें हिंदु, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध के रूप में नहीं बल्कि मनुष्य के रूप में जन्म दिया है। लेकिन मानवता के दुश्मनों ने हिंदु, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि हजारों धर्मों की सृष्टि कर मानव जाति के टुकड़े-टुकड़े कर दिये हैं और आज समूची मानव जाति धर्म रूपी हैवानियत के शिकंजे में लहुलुहान हो रही है।
धरती हमारी माता है और हम उसकी संतान हैं। मनुष्य धरती की छाती से उत्पन्न जल, अन्न तथा उसके वायुमंडल से ऑक्सीजन ग्रहण कर जीवन धारण करता है, लेकिन अपने क्षुद्र स्वार्थों की खातिर उसी धरती माता को विध्वस्त करने पर तुला हुआ है। हर मां की यह कामना होती है कि उसकी संतान सुख, शांति, समृद्धि से रहे तथा उसके जीवन में कभी कोई आपत्ति-विपत्ति न आये। हमारी धरती माता का भी सिस्टम इस प्रकार बना है कि अगर मनुष्य सृष्टि (वास्तु) के नियमों के अनुसार गृह निर्माण करे और सृष्टि द्वारा प्रदत्त मन की शक्ति का उपयोग करे तो उसे न सिर्फ जीवन भर सुख, शांति, समृद्धि हासिल होती है बल्कि उसे किसी प्रकार की अनहोनी का शिकार भी नहीं होना पड़ता।
 
अफसोस इस बात का है कि चंद क्षुद्र स्वार्थी लोग मानव जाति को इस सत्य से विमुख कर स्वरचित धर्मों और गुरुओं की सेवा-साधना करने से उन्नति होने की झूठी दिलासा और उनकी अवहेलना करने पर नरक, दोखज में जाने का भय दिखाकर न सिर्फ उसका शोषण करते आये हैं, बल्कि उन्होंने समूची मानव जाति को पंगु बनाकर रख दिया है। दुनिया का हर धर्म यही कहता है कि तुम्हारे हाथ में कुछ नहीं, सभी कुछ ऊपरवाला अल्ला, गॉड, भगवान करता है, जबकि हकीकत यह है कि दुनिया में भगवान, अल्ला, गॉड नाम की कोई चीज नहीं है। कबीर ने कहा था- 'पाथर पूजै हरि मिले तो मैं पूजूँ पहाड़।' असली भगवान, गॉड, अल्ला प्रकृति प्रदत्त शक्ति के रूप में खुद मनुष्य के मन में हैं, लेकिन दुनिया के सभी धर्मगुरु प्रकृति प्रदत्त शक्ति को झुठला कर अस्तित्वहीन भगवान, अल्ला, गॉड पर विश्वास करने की सलाह देकर समूची मानव जाति को दिग्भ्रमित करते आये हैं। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि दुनिया में धर्म के नाम पर ही सबसे ज्यादा अपराध, हिंसा, आतंकवाद व विद्वेष फैलाने सरीखी अमानवीय घटनाएं संघटित होती आई हैं। 
 
दुनिया में जितने मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारे व अन्य धर्मस्थल हैं, उनकी संपदा को बेचकर अगर उन्हें मानव कल्याण के कार्य पर खर्च कर दिया जाये तो मैं समझता हूँ कि दुनिया में एक भी दरिद्र, भूखा नहीं रहेगा और दुनिया में अपराध भी न्यूनतम हो जायेंगे। मानव जाति को धर्म तथा धर्मगुरुओं के शिकंजे से आजाद करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है, न कि राम मंदिर या बाबरी मस्जिद का निर्माण। 
सृष्टि ने मनुष्य के मन में इतनी शक्ति प्रदान की है कि दुनिया का कोई भी काम उसके लिए असंभव नहीं। वास्तु के नियमानुसार गृह निर्माण करने तथा मन की शक्ति का उपयोग करने से उसे जीवन में अकल्पनीय सुकून, शांति तथा प्रगति की प्राप्ति होती है। जबकि मनुष्य द्वारा सृजित भगवान, अल्ला, गॉड और मंदिर, मस्जिद, गिरजाघरों का मनुष्य के जीवन में कोई प्रभाव नहीं होता। सृष्टि की सत्ता की अनदेखी कर युग-युग से धर्म और क्षुद्रस्वार्थी धर्मगुरुओं की अंध भक्ति करने की वजह से आज हिंदुस्तान की जनता दरिद्रता का जीवन बसर करने को अभिशप्त है। अस्तित्वहीन अल्ला, भगवान, गॉड की प्रार्थना, पूजा, इबादत में अपना जीवन होम करने वालों को शून्यता के अलावा और भला क्या हासिल होने वाला है ? इसलिए आज मुट्ठी भर लोगों के पास संसार की अधिकांश संपदा एकत्रित हो गई है, जबकि अधिकांश लोगों को दरिद्रता का जीवन बसर करना पड़ रहा है।
 
देश के पूर्वोत्तर के लोग भी सदियों से प्रकृति के नियमों के विपरीत गृह निर्माण करते आये हैं, जिसकी वजह से यह क्षेत्र युगों से युद्ध, आतंकवाद व नकारात्मक सोच से त्राहिमाम करता रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र को हिंसा, उग्रवाद, पिछड़ेपन व अंधविश्वास से मुक्त कर इलाके की जनता का जीवन स्तर सुधारने के लिए हम विगत 23 सालों से लोगों को घर-घर जाकर प्रकृति (वास्तु) के नियमानुसार गृह निर्माण व मन शक्ति के प्रयोग की सलाह देने की मुहिम में जुटे हुए हैं और अब तक 16,000 परिवारों को नि:शुल्क वास्तु सलाह दे चुके हैं। हमने कई स्कूल, कॉलेजों, मंदिरों का भी वास्तु दोष दूर करवाया है, जिसके बाद इनकी काफी उन्नति हुई है। अगर हिंदुस्तान के लोग धर्म के नाम पर जारी ढोंग से खुद को मुक्त कर मन की शक्ति का प्रयोग और सृष्टि (वास्तु) के नियमानुसार गृह निर्माण करने लगें तो फिर वो दिन दूर नहीं होगा, जब हिंदुस्तान विश्व का सबसे सुखी, समृद्ध व शांतिपूर्ण देश बन जायेगा। आप सरीखे बुद्धिजीवी ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन व आंकलन कर धर्म की अवास्तविकता से देश की जनता को अवगत करायें, तभी आपकी पत्रकारिता की सार्थकता होगी।
 
-राजकुमार झांझरी
हिंदुत्व की हांडी में राम मंदिर का मुद्दे एक बार फिर से पकने लगा है। देश में फिलवक्त पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। इनमें से तीन राज्यों में भाजपा की सरकार है। वहीं 2019 के आम चुनाव भी दरवाजे पर खड़े हैं। मौसम चुनाव का हो और भारतीय जनता पार्टी और भगवा ब्रिगेड को राम मंदिर की याद न आये ऐसा हो ही नहीं सकता। पिछले दो दशकों में जब भगवान राम ने ही चुनाव के कीचड़ में धंसे भाजपा के रथ को बाहर निकालने का काम किया। अगर ये कहा जाए कि आज भाजपा को जो स्वरूप और आन-बान-शान है वो राम मंदिर आंदोलन की बदौलत है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 
 
बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का ये विवाद 490 साल पुराना है। हर बार चुनाव में भाजपा भगवान राम को याद करती है। राम मंदिर का मुद्दा उछालती है। राम मंदिर बनवाने के संकल्प को दोहराती है। चुनाव खत्म होते ही राम मंदिर को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। लेकिन इस बार भाजपा और मोदी सरकार सबसे बड़े भंवर में फंसी है। ऐसे में भाजपा अपने सबसे मजबूत और आजमाये राम मंदिर मुद्दे पर लौटती दिख रही है। अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। राम मंदिर पर बिल या अध्यादेश आएगा या फिर कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाएगा, यह तो समय ही बताएगा, परंतु इस मामले पर असमंजस की स्थिति बनना स्वाभाविक है, क्योंकि मसला राजनीतिक नफा-नुकसान से भी संबंधित हो सकता है। फिलवक्त राम मंदिर के मुद्दे को जिस तरह भाजपा और भगवा ब्रिगेड गरमा रही है, उससे ऐसा आभास हो रहा है कि 1992 की भांति इस बार भी कुछ होने वाला है।
 
 
बीते 29 अक्टूबर को अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई की तारीख आगे सरकाने के बाद से संत महात्माओं, हिंदू समाज और हिंदूवादी संगठनों में भारी नाराजगी का माहौल है। इस नाराजगी के माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिन्दू परिषद मेढ़बंदी करने में जुटे हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे हाल ही में अयोध्या आये और नया नारा दिया, ‘हर हिंदू की यही पुकार, पहले मंदिर-फिर सरकार।’ यानी अगले साल लोकसभा चुनाव में सरकार बाद में बने लेकिन पहले राम मंदिर बन जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रमुख प्रवीण तोगड़िया भी पिछले दिनों अयोध्या में अपना शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। शिवसेना, तोगड़िया के राम मंदिर मुद्दे में कूदने से भाजपा व भगवा ब्रिगेड थोड़े दबाव में है। ऐसे में बीजेपी और भगवा ब्रिगेड धर्म सभा को भव्य से भव्यतम बनाने में जुटे हैं। मोदी सरकार पर शिवसेना सरीखे सहयोगी दलों और संघ का भारी दबाव है। भाजपा के अधिकतर सांसद भी मुखर होकर बोल रहे हैं। साक्षी महाराज का साफ मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते रहे, तो एक हजार साल भी लग सकते हैं और फिर भी राम मंदिर नहीं बनेगा। लिहाजा भाजपा सांसदों और नेताओं की लगातार मांग है कि सरकार या तो अध्यादेश लाए अथवा संसद के जरिए कानून बनाए। लब्बो लुआब यह है कि राम मंदिर को लेकर हिंदुत्व की कड़ाही में लंबे समय बाद उबाल आया है। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय निकट आएगा ये हवा तेज से और तेज होती जाएगी। 
 
पिछले दिनों अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद आरएसएस के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी का बयान कि ‘तिरपाल में रामलला का आखिरी दर्शन हैं', से काफी कुछ समझा जा सकता है। धर्म सभा में राम भक्त अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। आरएसएस, वीएचपी और भारतीय जनता पार्टी मिलकर राम भक्तों के शक्ति परीक्षण कार्यक्रम में एक लाख से ज्यादा राम भक्तों को बड़ा भक्त माल की बगिया में बुला रहे हैं। इतिहास के पन्ने पलटे तो अयोध्या का विशेष ब्रांड के हिंदुत्व से परिचय 1989 के रामजन्मभूमि मुक्तियज्ञ, 1990 की कारसेवा और 1992 के ढांचाध्वंस कांड से हुआ। जब मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध दूर-दराज के रामभक्तों ने अयोध्या की ओर रुख किया और उन्होंने  मंदिर के लिए हुंकार भरी। 1990 की कहानी तो रक्तरंजित हो उठी। शासकीय प्रतिबंध और चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षा बलों की परवाह न कर विवादित परिसर की ओर बढ़े डेढ़ दर्जन कारसेवकों ने प्राणों की आहुति दी। इससे पूर्व अयोध्या कफ्र्यू, सुरक्षाबलों की निगरानी, कारसेवकों की धमक और नेताओं की आमद-रफ्त की अभ्यस्त हो चली थी। 1992 का घटनाक्रम तो जगजाहिर है। इसके बाद से रामनगरी हिंदुत्व के केंद्र के तौर पर प्रवाहमान है
 
पर उस दौर का उभार फिर लौटकर नहीं आ सका। 1992 का वह रोष और आक्रोश, तनाव और उत्तेजना आज के माहौल में भी महसूस किया जा सकता है। उन कारसेवकों में साधु-संत, राजनीतिक कार्यकर्ता और आम आदमी भी थे। आज उप्र में मुलायम सिंह नहीं, योगी आदित्यनाथ की सत्ता है और देश में ‘मोदी सरकार’ है!
 
उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक पहचान दिलाने में अयोध्या और राम मंदिर की कितनी भूमिका रही है, यह किसी से छिपा नहीं है। यही नहीं, 1991 में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जब पहली बार कल्याण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी थी तो पूरा मंत्रिमंडल शपथ लेने के तत्काल बाद अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए आया था। सन् 2017 में उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी है तब से अयोध्या के विकास के लिए न सिर्फ तमाम घोषणाएं की गईं बल्कि दीपावली के मौके पर भव्य कार्यक्रम और दीपोत्सव का आयोजन भी किया गया है। फिलवक्त राम मंदिर मुद्दे की कमान भाजपा की ओर से यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों में है। फैजाबाद जिले का नामकरण अयोध्या करने के बाद से ही राजनीति और भगवा टोली की सरगर्मियां पूरे उफान पर हैं। 2010 में हाइकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया जाए और उसमें से दो-तिहाई हिस्से मामले से जुड़े हिंदू पक्षों को सौंप दिए जाएं और एक तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया जाए। तीनों ही पक्षों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी पक्ष आपस में बातचीत करके विवाद सुलझाएं। मगर इसकी तो शुरुआत तक नहीं हुई। 
 
यह विवाद 1988 से ही राजनीतिक रूप धारण कर चुका है, जब भाजपा ने हिमाचल के पालमपुर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था। नतीजतन 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 2 से 85 सीटों तक उछाल लगाई थी। 1996 में 161 सीटों के साथ भाजपा लोकसभा में पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, लेकिन जनादेश अधूरा होने के कारण वाजपेयी सरकार 13 दिनों तक ही टिकी रह सकी। बहरहाल वाजपेयी सरकार 1998 से 2004 तक रही, क्योंकि भाजपा की सीटें 182 थीं और एनडीए के रूप में एक सशक्त, व्यापक गठबंधन उभरकर सामने आया था, लेकिन राम मंदिर बनाने की शुरुआत तक नहीं हो सकी, क्योंकि गठबंधन के कई दल सहमत नहीं थे।
 
आज स्थितियां भिन्न हैं। मोदी सरकार के पास गठबंधन समेत पर्याप्त बहुमत है। राज्यसभा में भी भाजपा-एनडीए सबसे बड़ा पक्ष हैं। कुछ और दलों के धुव्रीकरण से बहुमत के आसार भी बन सकते हैं, जिस तरह राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में हुआ था। आरएसएस के सरसंघचालक का भी स्पष्ट समर्थन है। गठबंधन के घटक दल भी भाजपा के समर्थन में हैं। यदि भाजपा को हिंदुओं की इतनी ही चिंता है, तो अब इस दौर में राम मंदिर बन जाना चाहिए। अलबत्ता इस मुद्दे को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि दूसरे कई मुद्दे भी अहम हैं, जिनकी अनदेखी होती रही है। 
 
 
मुस्लिम नेताओं ओवैसी और जफरयाब गिलानी ने राम मंदिर पर अगर अध्यादेश आता है तो उसे अदालत में चुनौती देने की धमकी भी दी है। उनकी दलील है कि देश संविधान से चलता है, न कि हेकड़ी की सत्ता से। सरकार मंदिर और मस्जिद में भेद करेगी, तो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की व्याख्या है। बहरहाल मोदी सरकार और भाजपा के लिए यह सांप-छुछूंदर वाली स्थिति है। यदि मई, 2019 से पहले इस मुद्दे का निपटारा नहीं होता है, तो प्रधानमंत्री मोदी की दोबारा सत्ता में आने की कोशिशों को धक्का लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि करीब 2-3 फीसदी वोट भाजपा से छिटक कर दूर जा सकते हैं। इसी से जीत-हार का अंतर बढ़ सकता है, लिहाजा अब आखिरी दारोमदार प्रधानमंत्री मोदी पर ही है। देखते हैं कि उनका कदम क्या होता है? फिलवक्त सरयू के तट पर 1992 जैसा माहौल बनाने की तैयारियां आसमान छू रही हैं। इन सबके बीच यह बात तय है कि भाजपा और भगवा ब्रिगेड राम नाम लहर के करंट, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों और सियासी नफे-नुकसान के अंकगणित के हिसाब से फैसला लेंगे।
 
-आशीष वशिष्ठ

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