ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
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भोपाल।सतना जिले के एक सीमेंट संयंत्र को 43 करोड़ रुपये की रायल्टी वापस करने के मामले में पेंच फंस गया है। यह पेंच भोपाल स्थित खनिज संचालनालय ने लगाया है तथा कहा है कि एक कमेटी बनाकर इस मामले का निराकरण किया जाये। सतना जिले में पहले मैहर सीमेंट वक्र्स कंपनी हुआ करती थी जिसे अब मेसर्स अल्ट्राटेक कंपनी ने टेकओवर कर लिया है। इस कंपनी की 78 करोड़ रुपये की रायल्टी राशि पर वर्ष 1983 से विवाद था। इसमें से 35 करोड़ रुपये की राशि कंपनी को वापस हो चुकी है तथा अब 43 करोड़ रुपये की राशि और वापस की जाना है। हाईकोर्ट के आदेश पर एक चार्टर्ड एकाउन्टेंट को नियुक्त कर इस मामले का आडिट कराया गया जिसमें उसने पाया कि कंपनी ने स्वयं के द्वारा उत्पादित लाईम स्टोन पर तो रायल्टी दे दी परन्तु बाहर से खरीदे गये लाईम स्टोन पर उसकी जवाबदारी रायल्टी भुगतान हेतु नहीं बनती है। सीए ने आडिट में इसके सभी कागजात भी सही पाये हैं। जब मामला शेष 43 करोड़ रुपये कंपनी को वापस करने का बना तो सतना कलेक्टर ने खनिज संचालनालय से इस पर मार्गदर्शन मांग लिया क्योंकि वापस की जाने वाली राशि बहुत है। खनिज संचालनालय ने सतना कलेक्टर को कहा कि वह अभी इस राशि का भुगतान न करे तथा पहले एक कमेटी बनाकर इस मामले का परीक्षण कराये तथा कमेटी की अनुशंसा पर भुगतान की कार्यवाही करे। जिला स्तर पर गठित की जाने वाली कमेटी में वित्त विभाग का एक अधिकारी तथा एक अन्य जिला स्तर का अधिकारी रखने के लिये कहा गया है। जिस सीए ने इस मामले का आडिट किया था तो उसे उसके पारिश्रमिक का भुगतान करने का प्रस्ताव भी अलग से भेजने के लिये खनिज संचालक ने कहा है। अब कमेटी की अनुशंसा पर ही बकाया राशि का निपटारा होगा। इस बकाया राशि का सीधे कंपनी को भुगतान न करें उसकी आगामी रायल्टी में किश्तों के तहत समायोजन किया जायेगा।