भ्रूण केस और बैंक स्कैम फिसड्डी साबित हो रही है पुलिस,भ्रूण हत्या डीलिंग जांच में पुलिस का सुस्त रवैया सामने आया Featured

-दोनों चर्चित केसों में पुलिस की नाकामी सामने आई, सभी नामजद फरार पुलिस गिरफ्त से बाहर

शिवपुरी. जिले में इस समय दो केस सर्वाधिक सुर्खियों में हैं और दोनों ही केसों में पुलिस की लचर कार्यप्रणाली जन चर्चा का विषय बनी हुई है। ये केस हैं 48 करोड़ के बैंक घोटाले में नामजद आरोपियों से लेकर कन्या भ्रूण हत्या डीलिंग स्कैम में फ रार डॉक्टर रईस खान एवं उसकी नर्स पत्नी पूनम खान का केस दर्ज होने के लंबे समय बाद तक पुलिस गिरफ्त में ना आना। दोनों ही मामले अपने आप में बेहद संवेदनशील हैं और प्रदेश के फलक पर छाए हुए हैं। वित्तीय घोटालों में अब तक का सबसे बड़ा डेढ़ सौ करोड़ का सहकारिता बैंक घोटाला जहां राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शासन के लिए गले की फ ांस बना हुआ है आने वाले विधान सभा सत्र में सरकार को इस मुददे पर जबाव देना पड़ सकता है वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश जैसे प्रांत में जहां कन्याओं के उत्थान के लिए प्रदेश के मुखिया की लागू की गई योजनाएं पूरे देश में शोहरत पा रही हैं, वहां उन्हीं के शासन में में सेक्स डिटर्मिनेशन से लेकर कन्या भ्रूण हत्या की डीलिंग सरेआम किया जाना सरकार के लिए भी खासी छीछालेदर का विषय बना हुआ है।
शिवपुरी पुलिस इस केस के दर्ज होने के बाद से पिछले एक पखवाड़े से हाथ पर हाथ रखे बैठी नजर आ रही है। सीधा संदेश यह है कि दोनों ही मामलों में आरोपी रसूखदार हैं जिसके चलते पुलिस तंत्र उन पर हाथ डालने से कन्नी काट रहा है। कोलारस बैंक स्कैम के आरोपी पूर्व ब्रांच मैनेजर ज्ञानेंद्र दत्त शुक्ला रमेश राजपूत और कैशियर राकेश पाराशर एक माह से भूमिगत है उनका कोई पता नहीं चला है, राकेश पाराशर के भाई मुकेश पाराशर और अन्य परिजन भी कहां है इसकी भी कोई जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आ पा रही। इसी तर्ज पर सिद्धिविनायक अस्पताल में सामने आए कन्या भ्रूण हत्या डीलिंग केस के वायरल वीडियो आधारित केस में भी पुलिस लचर रवैया धारण किए हुए हैं। पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से इस केस में जांच की दिशा तक पुलिस ठीक से तय नहीं कर पा रही। जांच अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं, मामले को अधिकारियों की इस चुप्पी ने और हाई प्रोफ ाइल बना दिया है जिसके चलते तमाम तरह की आशंका बल पा रही हैं। इस मामले में भ्रूण डिस्पोज करने वाले दोनों स्वीपर्स को तक को कोतवाली पुलिस ट्रेस नहीं कर पाई है। मामले में प्रथम दृष्टया आरोपों की जद में आ रहे सिद्घिविनायक अस्पताल मैनेजमेंट से जुड़े लोगों और यहां सेवा दे रहे अन्य चिकित्सकों को भी पूछताछ से अछूता रखे हुए है। ना गिरफ्तारियां हो रही ना कड़ी दर कड़ी पूछताछ की स्थिति बन रही, केवल केस दर्ज करने मात्र से इस मामले में ज्यादा कुछ निकल पाएगा इसकी संभावना तब तक कम है जब तक पर्याप्त सबूत जुटाने की दिशा में पुलिस जांच आगे ना बढ़े। शुरू से ही यह मामला लेटलतीफी का कारण बना हुआ है। केस पुलिस को सुपुर्द करने से पूर्व प्रशासन ने जिस ढंग से 24 घंटे के भीतर जांच की वह फि र भी काफ ी हद तक संतोषप्रद तरीका रहा लेकिन पुलिस के पाले में केस पहुंचने के बाद से जांच के नाम पर अब तक सिर्फ लकीर पीटी जा रही है।
बीच में बाक्स

*29 को मुख्यमंत्री के सामने उठ सकता है भ्रूण हत्या केस और बैंक स्कैम*

29 सितम्बर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शिवपुरी आ रहे हैं ऐसे में कन्या भ्रूण हत्या डीलिंग केस को लेकर जहां उनको जनता के सवालों और प्रतिनिधि मण्डलों को फेस करना पड़ सकता है वहीं बैंक घोटाले मेंं भी वे मीडिया के सवालों से रुबरु हो सकते हैं। इन दोनों ही केसों में प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पाया है जबकि दोनों ही मामले पब्लिक फोरम पर सर्वाधिक सरगर्म बने हुए हैं।

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