ईश्वर दुबे
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने 107 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे जबकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशाम्बी जिले की सिराथू सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
उत्तर प्रदेश चुनाव में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक पलायन भी शुरू हो गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे बड़े मंत्री भाजपा का दामन छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को कितना नुकसान होगा? साथ ही साथ जिस तरीके से स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं उससे भगवा पार्टी कैसे निकल पाएगी, इसी को लेकर हमने चाय पर समीक्षा में चर्चा की। हमेशा की तरह प्रभासाक्षी के इस खास कार्यक्रम में संपादक नीरज कुमार दुबे मौजूद रहे। नीरज कुमार दुबे ने बताया कि नेताओं के जाने से जनता भी दूसरी तरफ चली जाती है, यह कोई जरूरी नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य भले ही यह दावा कर रहे हो कि वह जिस पार्टी से गए उस पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन यह बात भी सच है कि भाजपा फिलहाल नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के रथ पर सवार है और उसे बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से चुनाव लड़ने को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि भाजपा योगी आदित्यनाथ के जरिए पूर्वांचल के सभी सीटों को साधने की कोशिश कर रही है। साथ ही साथ स्वामी प्रसाद मौर्य गोरखपुर से लगे सीट से ही आते हैं। ऐसे में पार्टी को होने वाले नुकसान को कम करने में योगी आदित्यनाथ अहम साबित हो सकते हैं। आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने गोरखपुर शहर से चुनावी मैदान में उतारा है। अब तक मायावती चुनावी मैदान में उतरने से मना कर चुकी हैं जबकि अखिलेश यादव भी सीधे-सीधे चुनावी मैदान में उतरने के सवाल पर जवाब नहीं दे रहे हैं। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि 5 साल तक सत्ता का मलाई खाने के बाद आप अगर किसी दूसरे दल में जाते हो तो इससे आपका स्वार्थ झलकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बातों पर विश्वास करना इसलिए भी जायज नहीं है क्योंकि आज से 5 दिन 7 दिन पहले ही वह भाजपा के दलित और पिछड़ों के लिए किए गए कार्यों को गिना रहे थे।
भाजपा के बागी नेताओं का समाजवादी पार्टी में शामिल होने को लेकर नीरज दुबे ने माना कि अखिलेश यादव के लिए यह परिस्थितियां बेहद ही मुश्किल है। अखिलेश यादव को अपने ऐसे कई नेताओं को दरकिनार करना पड़ा होगा। यही कारण है कि अखिलेश यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि अब वह अन्य दलों से आने वाले लोगों को समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं करेंगे। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि इतनी भारी संख्या में दूसरे दलों से आए लोगों को अगर अखिलेश यादव टिकट देंगे तो समाजवादी पार्टी में भी बगावत के स्वर उठने लगेंगे। देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव की रणनीति में अखिलेश यादव किस तरह से आगे बढ़ते हैं। लेकिन यह तो तय है कि मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच दिलचस्प होता जा रहा है। नीरज दुबे ने दावा किया कि अखिलेश यादव जोश में होश होते दिखाई दे रहे हैं। चुनाव से पहले वह अति उत्साही नजर आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ 2017 में दिखाई दिया था तब उन्हें बेहद ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा था।
भाजपा की सूची जारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को 107 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे जबकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशाम्बी जिले की सिराथू सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। पार्टी ने जिन 107 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है, उनमें से 105 सीटों पर पहले और दूसरे चरण में मतदान होना है। गोरखपुर में छठवें चरण के तहत तीन मार्च को जबकि सिराथू में पांचवें चरण के तहत 27 फरवरी को मतदान होना है। पार्टी ने 20 वर्तमान विधायकों के टिकट भी काटे हैं। पहले और दूसरे चरण के लिए घोषित उम्मीदवारों में मथुरा से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, शाहजहांपुर से राज्य के वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, थानाभवन से गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा, आगरा ग्रामीण से उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, नोएडा से पंकज सिंह, सरधना से संगीत सोम प्रमुख नाम हैं। प्रधान ने कहा कि पार्टी ने 21 नए चेहरों को टिकट दिया है, जिनमें युवा, महिला और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले प्रबुद्ध लोग शामिल हैं।
भाजपा को बीस फीसदी लोगों के भी वोट नहीं मिलेंगे: अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक बार फिर चार सौ सीटें जीतने का दावा करते हुए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 80 बनाम 20 से उनका मतलब है कि भाजपा को उत्तर प्रदेश चुनाव में 20 फीसदी लोगों का समर्थन मिलेगा जबकि बाकी 80 प्रतिशत का समर्थन सपा को मिलेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अब स्वामी प्रसाद मौर्य व अन्य के सपा में शामिल होने के बाद भाजपा को वह भी (20 फीसदी समर्थन) मिलना मुश्किल है। अखिलेश यादव ने यहां मौर्य व अन्य विधायकों के सपा की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। सपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दावा कर रही है कि उसे उत्तर प्रदेश चुनाव में तीन चौथाई सीटों पर जीत मिलेगी, जिसका अर्थ है कि उन्हें केवल तीन या चार सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी और अंबेडकरवादी लोग मिलकर काम करेंगे तो 400 सीटें भी जीत जाएंगे, क्योंकि जनतापरिवर्तन चाहती है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले हमने कहा था कि मुख्यमंत्री जी को गणित का अध्यापक रखना होगा, जो वह अस्सी और बीस की बात कर रहे हैं।... समाजवादी पार्टी के साथ अस्सी फीसदी लोग खड़े हो ही गये। हालांकि जिन-जिन लोगों ने आज स्वामी प्रसाद मौर्य की बात सुनी होगी, उससे लगता है कि वह 20 फीसदी (लोग) भी उनके खिलाफ हो गये होंगे।
इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि आगामी चुनाव में वह उप्र से भाजपा का सूपड़ा साफ कर देंगे। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के खात्मे का शंखनाद हो गया है। भाजपा ने देश और प्रदेश की जनता को गुमराह कर उसकी आंखों में धूल झोंकी है और जनता का शोषण किया है। अब भाजपा का खात्मा करके उत्तर प्रदेश को भाजपा के शोषण से मुक्त कराना है। मौर्य ने कहा, यह मकर संक्रांति भाजपा के अंत का प्रतीक होगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता गहरी नींद में थे और हमारे इस्तीफे के बाद उनकी नींद उड़ गई।
- अंकित सिंह