ईश्वर दुबे
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संसद और विधान सभा गंभीर बहस का केन्द्र होते हैं। बहस से ही देश-प्रदेश के आगे बढ़ने की राह निकलती है। बहस के दौरान अक्सर पक्ष-विपक्ष के बीच तकरार भी हो जाती है। कभी-कभी तो माहौल इतना गरम हो जाता है कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं। अब तो लात-घूंसे और माइक फेंकने तक की घटनाएं सदन में देखने को मिल जाती है। इसकी वजह है आज के दौर में नेता, देश से बड़ा हो गया है। देश से बड़े हो गए नेता का अहंकार भी बड़ा हो गया है। नेताओं की तुनकमिजाजी भी खूब चर्चा बटोरती है। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र को ही ले लीजिए। बहस के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के बीच इतनी गरमा-गरम बहस छिड़ गई कि अखिलेश यादव उप मुख्यमंत्री के पिता जी तक पर उतर आए। दरअसल, जब अखिलेश और केशव एक-दूसरे पर व्यंग्य बाण छोड़ रहे थे तभी बहस के दौरान अखिलेश ने कहा कि आपके जिले की चार लेन सड़क भी सपा सरकार ने बनवाई थी। केशव बोले- जैसे आपने सैफई की जमीन बेचकर सड़क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो बनवाई हो। केशव का यह जवाब सुनकर तैश में आए अखिलेश ने केशव को डपटते हुए कहा कि तुम अपने पिताजी से पैसे लाते हो सड़कें बनाने के लिए, तुमने राशन बांटा पिताजी से पैसे लेकर...। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों को समझा-बुझाकर मामला शांत किया, लेकिन दूसरे ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ गोबर को लेकर आमने-सामने आ गए।
हुआ यूं कि बजट भाषण के दौरान जब अखिलेश प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा की हालत पर बोल रहे थे तो सत्ता पक्ष के सदस्य ने उनके (अखिलेश यादव) आस्ट्रेलिया में पढ़े होने पर टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी से अखिलेश यादव भड़क गए। उन्होंने कहा कि हम वहां पढ़े हैं इसलिए जो अच्छा देखा वो लागू किया। आप लोग गोबर देखते रहते हो तो वही इम्पलीमेंट कर रहे हो। अखिलेश का सीधा इशारा योगी आदित्यनाथ पर था, योगी गौ माता के बड़े सेवक हैं और गोरखपुर में उनके गोरखनाथ मंदिर में बहुत बड़ी गौशाला भी है। अखिलेश यादव ने योगी को संबोधित करते हुए कहा था कि हमें कन्नौज में गोबर प्लांट नहीं चाहिए। वह आप गोरखपुर ले जाइए। हमें हमारा परफ्यूम पार्क दे दीजिए। सरकार के कन्नौज में गोबर प्लांट लगाने की घोषणा पर अखिलेश ने कहा कि कन्नौज की पहचान इत्र से है, गोबर से नहीं। इसलिए गोबर प्लांट लगाना है तो गोरखपुर में प्लांट लगाएं।
उस समय तो सीएम योगी अखिलेश की बातों पर मुस्कुराते रहे, लेकिन जब वह बजट के पक्ष में बोलने के लिए खड़े हुए तो अखिलेश को गोबर पर खूब लपेटा। मंगलवार 31 मई को योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश के गोबर वाले बयान पर उन्हें ज्ञान दिया। योगी ने कहा कि अखिलेश के भाषण में भैंस के दूध का असर ज्यादा दिखाई दे रहा था। गाय का कम था। इस पर सदन में जमकर ठहाके लगे। योगी ने कहा कि बहुत से लोग फैट कंटेंट के नाते भैंस का दूध ज्यादा पसंद करते हैं। उन्हें तो जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर काम करना है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक तरफ किसान की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ गोबर में उन्हें बदबू नजर आ रही है। हमारे यहां गाय का गोबर बड़ा पवित्र माना गया है। तंज कसते हुए सीएम ने आगे कहा कि अखिलेश ने हमसे न सही, चाचा शिवपाल से ही सीखा होता तो पता चल जाता कि पूजा कैसे होती है।
गोबर पर घेरते हुए योगी ने अखिलेश को यहीं नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था बिना गाय और बिना गोबर के नहीं हो सकती। नेचुरल फार्मिंग बगैर गौ माता के संभव ही नहीं है लेकिन आपको (अखिलेश को) गाय के गोबर में बदबू आती है। अगर आपने पूजा की होती और गाय के गोबर को लक्ष्मी के रूप में रखा होता तो पता होता कि भारत की समृद्धि का प्रतीक तो यहीं से प्रारंभ होता है। उन्होंने अखिलेश के सवाल के जवाब में कहा कि कन्नौज भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा है और हम किसी से भेदभाव नहीं करते हैं।
योगी ने गोबर पर अखिलेश को लेकर ज्ञान देते हुए कहा कि कहा कि हमसे नहीं तो कम से कम चाचा शिवपाल से सीख लिए होते, इस पर सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के सदस्य भी हंस पड़े। खुद अखिलेश भी मुस्कुराते नज़र आए। सीएम योगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने यदि गौ-सेवा की होती तो उसी तरह बोले भी होते लेकिन भाषण में भैंस के दूध का ज्यादा असर दिखाई दे रहा था। गाय का कम था।
सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष (अखिलेश) ने कन्नौज की चिंता जरूर की, लेकिन इनके इत्र वाले मित्र तो बहुत कुछ गुल खिला रहे थे, परंतु इत्र उद्योग के लिए बीजेपी सरकार ने ईमानदारी से काम किया है। वर्तमान में अकेले कन्नौज से इत्र का 800 करोड़ का व्यापार हो रहा है। एक जिला-एक उत्पाद योजना से कन्नौज जुड़ा है। पिछले पांच साल में 55 नई इकाइयां लगी हैं। यद्यपि पहले से भी वहां इकाइयां थीं। 375 इकाइयां वहां काम कर रही हैं। कोरोना काल खंड में भी हम लोगों ने 2.7 मिलियन यूएस डॉलर का इत्र निर्यात किया है।
बहरहाल, विधानसभा के अंदर यदि गोबर पर चर्चा हो तो यह समझा जा सकता है कि या तो हम लोग वैज्ञानिक आधार पर काफी आगे बढ़ गए हैं इसके उलट यह भी कहा जा सकता है कि हमारे माननीय विधायकों के पास अब कोई मुद्दा ही नहीं रह गया है, इसलिए सदन में अब गोबर पर चर्चा होने लगी है। सबसे खास बात यह है कि गोबर पर चर्चा कोई छोटे-मोटे नेताओं के बीच नहीं बल्कि दो वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई जिसमें एक पूर्व था तो दूसरा सीएम की कुर्सी पर विराजमान है।
-अजय कुमार