ईश्वर दुबे
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ इन दिनों राष्ट्रवाद के साथ ही मठ-मंदिरों के उन्नयन और धार्मिक पर्यटन विकसित करने के साथ ही उदार हिंदुत्व की राह पर कांग्रेस और उसकी सरकार को ले जा रहे हैं। इसका मकसद बहुसंख्यक मतदाताओं के मानस में कांग्रेस के लिए और अधिक जगह बनाना है। ए.के. एंटोनी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की समीक्षा के बाद सिफारिश की थी कि कांग्रेस को उदार हिंदुत्व की अपनी पुरानी विचारधारा पर आगे बढ़ना होगा ताकि बहुसंख्यक मतदाता भी उससे अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। जनसंपर्क और अध्यात्म विभाग के मंत्री पी.सी. शर्मा इन दिनों कमलनाथ सरकार के मठ मंदिरों के उन्नयन और धार्मिक पर्यटन को विकसित करने के प्रयासों को अमलीजामा पहनाने पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहे हैं। अब कमलनाथ सरकार द्वारा तेजी से राम वन गमन पथ एक धार्मिक पर्यटन के रुप में विकसित किया जायेगा। मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने भी ऐलान किया है कि स्थानीय निकाय संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में रामलीला मंचन के लिए मंच तैयार करेंगी ताकि इसके मंचन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। एक हजार गौशालाओं के निर्माण का फैसला कमलनाथ सरकार काफी पहले ही कर चुकी है। अब कांग्रेस की योजना 16 दिसम्बर को राजधानी भोपाल में विजय पर्व शौर्य स्मारक में मनाने की है। 16 दिसम्बर 1971 को प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना ने सरेन्डर किया था, उसी की याद ताजा कराने इस दिन विजय पर्व मनाने की योजना है।
कमलनाथ का मकसद इसके माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की घेराबंदी उसके ही एजेंडे पर करने की है और इसके लिए सरकार अपने इस अभियान में तेजी से आगे बढ़ रही है। एंटोनी कमेटी की सिफारिशों के बाद तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने अपने कार्यकाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में गणेश प्रतिमा एवं दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की शुरुआत की थी जो अभी भी जारी है। 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अनेक मंदिरों में पूजा अर्चना कर चुनाव अभियान का शुभारंभ किया था। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा की यात्रा पूरे विधि विधान से की थी। इन सबका चुनावों में कांग्रेस को फायदा हुआ और 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता का सूर्योदय हुआ। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार हिंदुत्व के साथ ही राष्ट्रवाद के मुद्दे को भी उभारने जा रही है और इसके लिए ही शौर्य स्मारक में विजय पर्व मनाने की योजना बनाई है। कांग्रेस पार्टी की इस आयोजन के सम्बन्ध में औपचारिक घोषणा अभी होना शेष है लेकिन इस पर विचार-विमर्श लगभग पूरा हो गया है। 16 दिसम्बर 1971 का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में उस समय अंकित हो गया था जब पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और पूर्वी पाकिस्तान में आजाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ। एक नये राष्ट्र के उदय का पूरा श्रेय श्रीमती इंदिरा गांधी को है और यह ऐसी लड़ाई थी जिसमें पाकिस्तान को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। उस दैरान पूरे देश में इंदिरा गांधी की जय-जयकार हुई थी और विश्व पटल पर वे एक सख्त नेता के रुप में उभरी थीं। यहां तक कि तत्कालीन विपक्ष के नेता अटलबिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को संसद में दुर्गा कहा था। आज की पीढ़ी को इन सब बातों की विस्तार से जानकारी देने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है।
1985 में लोकसभा में कमलनाथ ने कहा था कि भारत की आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करना विशेष रुप से सरकार का कार्य है, वास्तविक आध्यात्मिक संस्थाओं और इस क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। पी.सी.शर्मा का कहना है कि प्रदेश में अध्यात्म विभाग का गठन हमारी सरकार ने किया है। मंदिरों में पूजा अर्चना करने वाले पुजारियों की बेहतरी के लिए नीतियों को नये सिरे से निर्धारित किया और पुजारियों का मानदेय तीन गुना कर दिया गया। सरकार द्वारा मॉ नर्मदा, मॉ क्षिप्रा, मॉ मंदाकिनी एवं मॉ ताप्ती जैसी जीवनदायिनी पवित्र नदियों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नदी न्यास का गठन किया गया है। मंदिर व मठों की व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन के लिए मठ-मंदिर सलाहकार समिति का भी गठन किया गया है। विभिन्न मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए राशि प्रदान की गयी है। तीर्थ दर्शन के लिए तीन विशेष ट्रेनें चलाई गयी हैं। शर्मा का कहना है कि प्रदेश की पावन भूमि का आलोकित स्वरुप भगवान श्रीराम के चरण कमल प्रदेश में पड़ते ही साकार हो गया था। कमलनाथ सरकार प्रतिबद्ध है कि प्रदेश के वे पवित्र तीर्थस्थल जैसे सतना, पन्ना, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर आदि जिले जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का समय व्यतीत किया था प्रदेश कांग्रेस सरकार उन स्थलों को वही आलोकित स्वरुप देने के लिए संकल्पित है। चित्रकूट-कामदगिरी, गुप्तगोदावरी, स्फटिक-शिला, अनुसूइया-आश्रम, हनुमान-धारा, दशरथ-गाठ इत्यादि स्थलों को धार्मिक पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा। साथ ही भोपाल में समूचे राम वन गमन पथ की प्रतिकृति भी निर्मित की जाएगी। शहरी मतदाताओं को खुश करने सभी नगरपालिक निगमों, नगरपालिकाओं व निगम परिषदों में रामलीला मंच बनाने का ऐलान करते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा है कि अतिक्रमण के चलते अब रामलीला कराने के लिए भी समिति व आयोजकों के पास जमीन नहीं बची है, इन हालातों में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों में स्थायी व्यवस्था करते हुए रामलीला मंच का निर्माण करेगी। सरकार को जमीन तलाशने खास मेहनत नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि दुर्गा उत्सव समितियों के पंडालों का उपयोग भी रामलीला मंचन के लिए किया जा सकता है।
महाकाल की नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के बाद अब ओंकारेश्वर को विकसित करने के लिए 156 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी प्रदान करते हुए कमलनाथ ने निर्देश दिए हैं कि ओंकारेश्वर मंदिर के लिए शीघ्र ही एक विधेयक तैयार किया जाए। ओंकारेश्वर कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान कमलनाथ ने कहा कि देश में केवल मध्यप्रदेश को यह गौरव हासिल है कि 12 ज्योर्तिलिंगों में से यहां प्रतिष्ठापित हैं। हमारा लक्ष्य है कि ये पवित्र स्थान विश्व पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित हों। ओंकारेश्वर विकास योजना एक समयबद्ध ढंग से पूरा करने के भी निर्देश दिए गए, निर्देश के साथ ही कहा कि हर विकास कार्य पूरा करने की तारीख तय हो। उन्होंने कहा कि अगले शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पेश करने की हमारी मंशा है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर विकास के लिए 350 करोड़ रूपए के विकास की योजना कमलनाथ पहले ही स्वीकृति दे चुके हैं। ओंकारेश्वर विकास की योजना मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार की गयी है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इस योजना को अंतिम रुप दिया। मंत्रालय में यह योजना मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत की गयी। इसमें विकास का एक विस्तृत विवरण तैयार किया गया है। इसमें ओंकारेश्वर के प्रवेश द्वार को भव्य बनाना, मंदिर का संरक्षण, प्रसाद काउंटर, मंदिर के चारों ओर विकास तथा सौंदर्यीकरण, शापिंग काम्पलेक्स, झूलापुल और विषरंजन कुंड के पास रिटेनिंग वॉल, बहुमंजिला पार्किग, पहुंच मार्ग, परिक्रमा पथ का सौंदर्यीकरण, शेड निर्माण, लैं स्केपिंग, धार्मिक पौराणिक गाथा पुस्तकों की लायब्रेरी, ओंकार आइसलैंड का विकास, गौमुख घाट पुन-निर्माण, भक्त निवास और भोजनशाला, ओल्ड पैलेस, विष्णु मंदिर, ब्रम्हा मंदिर, चन्द्रेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार, ई-साइकिल तथा ई-रिक्शा सुविधा, बोटिंग, आवागमन, बस स्टैंड, पर्यटक सुविधा केन्द्र सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं।
और यह भी
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार महात्मा गांधी की रामराज्य की संकल्पना पर काम कर रही है। मध्यप्रदेश में आधुनिक गौशालाओं के निर्माण की बात हो, गौसंरक्षण और उपचार की बात हो या फिर प्रभु श्रीराम के राम वन गमन पथ की बात हो, इन सब पर कमलनाथ सरकार ठोस कार्य कर रही है। मठों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों को पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित किया जा रहा है। राम वन गमन पथ और गौवंश के संरक्षण का जहां तक सवाल है इन मुद्दों पर शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने खाली बयानबाजी करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है लेकिन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार प्रदेश में इन विषयों पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इसी श्रंखला में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में स्थायी रामलीला मंच का निर्माण होगा और वहां पर बाकायदा रामलीला का मंचन हो यह सुनिश्चित किया जायेगा। रामलीला सनातन परम्परा का वास्तविक संदेश समाज को देती है और इसके मंचन से सामाजिक व सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी जो अंततोगत्वा समाज सुधार में सहायक होगी।
- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।