ईश्वर दुबे
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नई दिल्ली . हमारे देश में प्रति मिनट करीब 70 हजार कॉल ड्रॉप हो रहे हैं। उपभोक्ताओं की इस परेशानी के बीच हास्यास्पद ये है कि 4जी और 5-जी के जमाने में ट्राई इसके लिए मैन्युअली फोन लगा-लगाकर कॉल ड्रॉप चेक कर रहा है। इसे ड्राइव टेस्ट कह रहे हैं। इसके लिए निजी कंपनी को ठेका दिया गया है।
टीमें शहरों के अलग-अलग हिस्सों जैसे फ्लाइओवर, नदी-नाले, रेलवे लाइन के आसपास जाती हैं और कारों में बैठकर अलग-अलग नंबरों पर फोन लगाती हैं। इनसे मिलने वाली इंटरनेट स्पीड, डेटा डाउनलोड और अपलोड स्पीड जैसी क्वालिटी को दर्ज किया जाता है। मजेदार बात यह है कि जिन नम्बरों पर फोन मिलाए जाते हैं वो भी टेलीकॉम कम्पनियों के बताए हुए होते हैं। दिलचस्प यह है कि कॉल ड्राॅप पकड़ने का यह तरीका दुनिया में कहीं नहीं अपनाया जाता।
2% कॉल ड्रॉप का नियम
नियमों के तहत कॉल ड्राॅप 2% से अधिक नहीं होनी चाहिए और कॉल सेटिंग 95% से अधिक हो। ऐसा न होने पर जुर्माने की व्यवस्था है। लेकिन ड्राइव टेस्ट के डेटा को जुर्माने का आधार भी नहीं बनाया जाता। पिछले एक साल में ही कम से कम 50 शहरों में 15 से 20 हजार किमी के रूट पर कारें चलाकर फोन ऑपरेटरों के मोबाइलों पर कॉल लगाई गईं। ताकि यह जाना जा सके कि जो दावे टेलीकॉम प्रोवाइडर अपनी रिपोर्ट में करते हैं, उनमें कितनी सच्चाई है।
'ऑपरेटरों को आईना दिखाना चाहते हैं'
इस बारे में दैनिक भास्कर ने टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) के अध्यक्ष आरएस शर्मा से पूछा तो उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कम्पनियों से उनके नेटवर्क का अपार डाटा उन्हें टावरों से मिल रहा है। लेकिन, उसकी सत्यता की बारीकी से पड़ताल करना समंदर को छानने के समान है। ट्राई प्रमुख ने कहा कि सैम्पल को पेनल्टी का पैमाना नहीं बनाया जा सकता लेकिन उसके आंकड़ों से हम पारदर्शिता चाहते हैं और ऑपरेटरों को आईना दिखाना चाहते हैं।
'कॉल साइलेंट जोन में चली जाती है'
ड्राइव टेस्ट को हास्यास्पद बताते हुए टेलीकम्युनिकेशन एक्सपर्ट अनिल कुमार कहते हैं कि मोबाइल सेवा ऑपरेटरों ने कॉल ड्राॅप्स दर्ज न होने देने के लिए भी तरीके खोज लिए हैं। कॉल साइलेंट जोन में चली जाती है। कॉल लगाओ तो देर तक चुप्पी रहती है। कुछ देर बाद उस फोन पर नोटिफिकेशन चला जाता है। ये कॉल ड्राॅप्स नार्म्स को चकमा देने के तरीके ही हैं। दुनियाभर में कॉल ड्राॅप्स होते ही नहीं हैं तो वहां इसे जज करने के तरीके भी नहीं हैं।
भारत की निराली समस्या
यह भारत की निराली समस्या है, जो 3जी आने के बाद से शुरू हुई। इसका समाधान ड्राइव टेस्ट नहीं आप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने से ही होगा। दूरसंचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का कहना है कि यह सुझाव अच्छा है। इसके लिए सरकार ट्राई एक्ट में संशोधन पर विचार करेगी। फिलहाल इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक स्थगन आदेश दिया हुआ है। फैसला होने पर सरकार उसका पूरा पालन करेगी।