ईश्वर दुबे
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Bhilai
ध्यान या मेडिटेशन हमारे तनाव को कम करने में किसी चमत्कार की तरह काम करता है। इस मुद्दे पर नए सिरे से बात करने की जरूरत नहीं है कि हम सभी के जीवन में बढ़ती व्यस्तता के चलते तनाव किस कदर हावी होता जा रहा है। इस तनाव या स्ट्रेस पर अगर वक्त रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो यह दूसरी भावनात्मक और शारीरिक परेशानियों की वजह बन सकता है।
ध्यान भारतीय सभ्यता और परंपराओं का हिस्सा है। योग चिकित्सा पद्धति ध्यान के बिना अधूरी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस तरह योगासन करने से हम कई तरह की शारीरिक बीमारियों से बचे रहते हैं, ठीक वैसे ही ध्यान करने पर स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियां हमें परेशान नहीं करती हैं। पिछले दिनों कॉर्पोरेट प्रफेशनल्स पर हुई कई स्टडीज में भी यह बात सामने आई है कि ध्यान वर्क प्रेशर और टारगेट स्ट्रेस को कम करने में भी मददगार है।
इस तरह मिलेगा पूरा लाभ
ध्यान और मेडिटेशन करने के लिए आपको हर दिन 30 मिनट की जरूरत होगी। लेकिन इसकी शुरुआत आप 10 मिनट या 15 मिनट से भी कर सकते हैं। आप चाहें तो 30 मिनट के ध्यान को 10 मिनट के 3 सेशन या 15 मिनट के दो 2 सेशन में बांटकर भी कर सकते हैं। अगर आपको शुरुआत में मन एकाग्र करने में दिक्कत हो तो परेशान ना हों। आप कोशिश करते रहें। ऐसा सभी के साथ होता है शुरुआत में। जब ध्यान लगाने की कोशिश के दौरान उनका मन कहीं ना कहीं भटकता रहता है।
आने दें विचार
कई बार हम इस बात से परेशान हो जाते हैं कि हमारा ध्यान तो एकाग्र हो ही नहीं पा रहा है, आखिर हम ध्यान कैसे लगाएंगे? हमसे यह नहीं हो पाएगा। ऐसा ना सोचें और अपने मन में आनेवाले विचारों को जबरदस्ती दबाने की कोशिश ना करें। जब आप रोज बैठकर किसी बिंदू या किसी दीपक की लो पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंगे तो आपके मन में आनेवाले विचार धीरे-धीरे खुद ही कम हो जाएंगे।
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