ईश्वर दुबे
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अक्टूबर, शनिवार को स्कंद षष्ठी मनाई जा रही है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है।
यह षष्ठी अति महत्वपूर्ण मानी गई है। यह तिथि भगवान शिव जी के बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। माना गया है कि भगवान कार्तिकेय का पूजन मनोकामना सिद्धि को पूर्ण करने में सहायक है। इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से रोग, राग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार स्कंद षष्ठी के दिन स्वामी कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से जीवन में उच्च योग के लक्षणों की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत करने से काम, क्रोध, मद, मोह, अहंकार से मुक्ति मिलती है और सन्मार्ग की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु ने माया मोह में पड़े नारद जी का इसी दिन उद्धार करते हुए लोभ से मुक्ति दिलाई थी, ऐसा पुराणों में वर्णन है।
इस दिन कार्तिकेय के साथ भगवान विष्णु के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस दिन ब्राह्मण भोज के साथ स्नान के बाद कंबल, गरम कपड़े दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
यह व्रत करने से नि:संतान लोगों को संतान की प्राप्ति होती है साथ ही सफलता, सुख-समृद्धि, वैभव प्राप्त होता है। दरिद्रता मिटकर दु:ख का निवारण होता है, तथा जीवन में धन-ऐश्वर्य मिलता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से क्रोध, लोभ, अहंकार, काम जैसी बुराइयां भी खत्म हो जाती हैं और मनुष्य अच्छा और सुखी जीवनव्यतीत करता है।