ईश्वर दुबे
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भोपाल केंद्र सरकार द्वारा असमय मौत के मामले में लाइफ कवर देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के क्रियान्वयन में अफसरों की रुचि नहीं है। प्रदेश के सिर्फ पौने आठ फीसदी लोगों को ही इस योजना से जोड़ा जा सका है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 2015 में शुरू की गई थी। इसके लिए हर साल 330 रुपए का प्रीमियम बैंकों द्वारा खातेदारों से लिए जाने का प्रावधान है जिसमें दो लाख रुपए का लाइफ कवर है। यह योजना 18 से 50 साल तक के बैंक खाताधारकों के लिए लागू की गई है।
योजना के एमपी में क्रियान्वयन का परीक्षण करने के बाद यह बात सामने आई है कि प्रदेश में इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 18 से 50 साल तक की उम्र के 3.15 करोड़ लोग रहते हैं, इसके विपरीत सिर्फ 24.37 लाख लोगों का ही इस योजना में बीमा किया जा सका है जो तय आबादी का सिर्फ 7.76 प्रतिशत ही है। इसी तरह की स्थिति प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के मामले में भी है। इस योजना में 18 से 70 साल तक की उम्र के लोग शामिल हैं और इसके लिए साल भर में सिर्फ 12 रुपए प्रीमियम लिया जाता है पर इसका कवरेज भी प्रदेश में अपेक्षित नहीं है। सितम्बर 2019 तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में इस उम्र सीमा के 4 करोड़ लोगों में से सिर्फ 94.33 लाख लोगों को ही योजना से जोड़ा गया है।
इन दोनों ही योजनाओं में क्लेम सेटलमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक 10715 बीमा क्लेम सेटलमेंट किए गए हैं। इसमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में सबसे अधिक 772 केस इंदौर में और सबसे कम 12 आगर मालवा के हैं। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में सबसे कम 9 केस आगर मालवा और सबसे अधिक 216 इंदौर से सेटल किए गए हैं।