ईश्वर दुबे
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लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की
कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने कहा, हर 15 दिनों में करें प्रगति की समीक्षा
सभी ठेकेदारों को 10 सितम्बर तक कार्य प्रगति दिखाने कहा, काम नहीं करने वालों को ब्लैकलिस्ट कर अनुबंध निरस्त करने के निर्देश
रायपुर. 18 अगस्त 2026. राज्य शासन बस्तर में सड़क कनेक्टीविटी के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। बस्तर संभाग के सभी जिलों में निर्माणाधीन सड़कों और पुल-पुलियों की प्रगति की लगातार समीक्षा के साथ ही इन्हें तेजी से पूर्ण करने कार्यों की गहन मॉनिटरिंग की जा रही है। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ बस्तर परिक्षेत्र के अभियंताओं और ठेकेदारों की बैठक लेकर निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में भारत सरकार के आर.आर.पी. (Road Requirement Plan) और आर.सी.पी.एल.डब्लू.ई.ए. (Road Connectivity Project in Left Wing Extremism Areas) के अंतर्गत प्रगतिरत सड़कों और पुल-पुलियों को आगामी दिसम्बर माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने नवा रायपुर में पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में अधिकारियों को सभी कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने हर 15 दिनों में प्रगति की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने बैठक में ठेकेदारों से चर्चा कर कार्यस्थलों में आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने इनके त्वरित निराकरण के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया। श्री बंसल ने लोक निर्माण विभाग के बस्तर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों में काम कर रहे ठेकेदारों को 10 सितम्बर तक कार्य प्रगति दिखाने को कहा। उन्होंने निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वालों को ब्लैकलिस्ट कर उनके अनुबंध निरस्त करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में सभी मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में दो-तीन दिन कार्यस्थलों का दौरा कर निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से समन्वय कर टाइमलाइन के अनुसार कार्यों की प्रगति भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जांच कर नियमित भुगतान भी करने को कहा। श्री बंसल ने अनुबंध के अनुसार कार्यक्षेत्रों में सभी ठेकेदारों से प्लांट व मशीनरी लगवाने को कहा। उन्होंने प्लांट व मशीनरी नहीं लगाने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
विभागीय सचिव ने बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन सबमिशन (Submission) की जानकारी ली। उन्होंने द्रुतगामी सड़कों तथा पहुंचविहीन गांवों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित सड़कों व पुलों के प्राक्कलन की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत नए कार्यों में भू-अर्जन और वन-व्यपवर्तन के लंबित मामलों की जानकारी शासन को भेजने के निर्देश दिए, ताकि इनके निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर से की जा सके। उन्होंने निर्माण कार्यों, आयोजनों एवं कार्यक्रमों के बिलों का भुगतान तत्परता से एक माह के भीतर सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी संभागों में अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन, विभागीय जांच तथा न्यायालयीन मामलों के निपटारे की प्रगति की भी समीक्षा की।
श्री बंसल ने बरसात के बाद पेच रिपेयर के कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू करने 30 सितम्बर तक एजेंसियों के निर्धारिण के लिए निविदा की प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुचारू आवागमन के लिए सड़कों के गड्ढों को तत्काल भरने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों के माध्यम से परफॉमेंस गांरटी वाली सड़कों की भी तत्परता से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद बाढ़ एवं अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुल-पुलियों की स्थायी मरम्मत के काम सर्वोच्च प्राथमिकता से करने को कहा।
रायपुर,18 अगस्त 2026/राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समिति के सदस्यों से सौजन्य मुलाकात की। इस विशेष भेंट के दौरान डॉ. सलीम राज ने आम नागरिकों की सहूलियत और बेहतर समझ के लिए यूसीसी के विभिन्न पहलुओं पर सरल भाषा में एक पुस्तक प्रकाशित करने के विचार से समिति को अवगत कराया, ताकि राज्य का हर नागरिक इसके प्रावधानों को आसानी से समझ सके।
नागरिक इन पते एवं माध्यमों से भेज सकते हैं अपने सुझाव
यूसीसी समिति के प्रमुख सदस्यों ने राज्य के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और आम जनता से यूसीसी के ड्राफ्ट हेतु अपने सुझाव साझा करने का विशेष आग्रह किया है।
राज्य में यूसीसी (Uniform Civil Code) समिति ने अपनी कार्यप्रणाली पूरी सक्रियता से प्रारंभ कर दी है। राज्य के आम नागरिक समान नागरिक संहिता को लेकर अपने विचार या सुझाव देना चाहते हैं, तो निम्नलिखित आधिकारिक पता एवं माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। ई-मेल (E-mail) के माध्यम से नागरिक अपने सुझाव सीधे इस This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. पर भेज सकते हैं। इसी तरह वेब पोर्टल (Web Portal) के माध्यम से समिति के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन https://ucc.cgstate.gov.in/ सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
राज्य के नागरिक डाक / पत्राचार (Postal Address) द्वारा अपने लिखित सुझाव कार्यालय, समान नागरिक संहिता (UCC) समिति कमरा नंबर - 202, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स,रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001 के पते पर स्पीड पोस्ट या साधारण डाक से अथवा स्वयं उपस्थित होकर लिखित आवेदन/ज्ञापन व्यक्तिगत रूप से जमा कर सकते हैं।
चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि
रायपुर, 18 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।
योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।
योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।
प्रविष्टियां भेजने का पता -
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,
द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) - 492018
प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘विभागीय आयोजन 2026’ की श्रृंखला में चार दिवस होगा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, मुक्ताकाशी मंच पर सजेगी कला और संगीत की सुरमयी शाम
रायपुर, 18 अगस्त 2026। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कला, संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘विभागीय आयोजन 2026’ की श्रृंखला के अंतर्गत विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘पावस प्रसंग’ का आयोजन किया जा रहा है। वर्षा ऋतु की सौंदर्यपूर्ण अनुभूतियों और भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा को केंद्र में रखकर आयोजित यह कार्यक्रम 21, 22, 24 एवं 25 अगस्त को रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।
‘पावस प्रसंग’ में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक सुंदरता, उमंग, उल्लास और संवेदनाओं को शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाएगा। भारतीय कला परंपरा में वर्षा ऋतु का विशेष महत्व रहा है। बादलों की गड़गड़ाहट, वर्षा की रिमझिम, प्रकृति में नवजीवन का संचार और मन में जागृत होने वाले विविध भावों को कलाकार अपनी नृत्य मुद्राओं, भावाभिव्यक्ति और सुरों के माध्यम से जीवंत करते हैं। इसी समृद्ध सांस्कृतिक भावभूमि को ‘पावस प्रसंग’ के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
संस्कृति विभाग की इस पहल का उद्देश्य शास्त्रीय कला विधाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही आमजन को उच्चस्तरीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जोड़ना है। मुक्ताकाशी मंच का वातावरण इन प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा, जहां दर्शक भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे।
‘पावस प्रसंग’ वर्षा ऋतु की सांस्कृतिक और कलात्मक अनुभूति को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला विशेष आयोजन है। इसमें प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच के गहरे संबंध को कला के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण मुद्राओं और संगीत की मधुर स्वर-लहरियों के माध्यम से वर्षा के विभिन्न रंगों और संवेदनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।
संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित की जा रही विभागीय आयोजनों की श्रृंखला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सहित देश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करना तथा कलाकारों और दर्शकों के बीच जीवंत सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में ‘पावस प्रसंग’ शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
संस्कृति और कला प्रेमियों से सहभागिता का आह्वान
संस्कृति विभाग ने कला एवं संस्कृति प्रेमियों से ‘पावस प्रसंग’ में सहभागी बनने का आह्वान किया है। चार दिनों तक आयोजित होने वाला यह सांस्कृतिक आयोजन रायपुर में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक अनुभूति को भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए कला प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव प्रस्तुत करेगा।
रायपुर, 18 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ में पर्यावरण, प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 से 16 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय 'हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026' का भव्य आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक धरोहर व परिंदों की दुनिया को सहेजना, पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना हैl वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मार्गदर्शन तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में यह आयोजन पूरे प्रदेश में व्यापक जनभागीदारी के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रकृति, संस्कृति और नागरिक विज्ञान का अनोखा संगम
हरेली बर्ड फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य केवल पक्षियों की गणना करना ही नहीं, बल्कि नागरिक विज्ञान (Citizen Science) के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करना था। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के अवसर पर आयोजित इस अभियान ने स्थानीय लोगों, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एकजुट किया।
33 जिलों में 45 बर्ड वॉक और 1,000 से अधिक प्रतिभागी
इस तीन दिवसीय अभियान के दौरान राज्य के सभी 33 जिलों में पक्षी अवलोकन गतिविधियों का आयोजन किया गया।
व्यापक सहभागिता
अभियान में 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और प्रदेश भर में कुल 45 'बर्ड वॉक' आयोजित किए गए।
विविध स्थल
कोपरा जलाशय (रामसर साइट), चिच्छा वेटलैंड, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, अचानकमार टाइगर रिजर्व और नंदनवन जंगल सफारी सहित कई महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) और वन क्षेत्रों में सर्वे किया गयाl नंदनवन जंगल सफारी (नवा रायपुर) में दिव्यांगजनों के लिए विशेष 'बर्ड वॉक' का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
954 चेकलिस्ट और 211 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड
नागरिक विज्ञान मंच eBird के माध्यम से राज्य भर से एकत्र किए गए आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पक्षी विविधता सामने आई है। 3 दिनों में कुल 954 eBird Checklists के जरिए 211 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया।
प्रमुख पक्षी प्रजातियां
सर्वे के दौरान पेंटेड स्टॉर्क (Painted Stork), रेड-नेप्ड आइबिस (Red-naped Ibis), कॉटन पिग्मी-गूज (Cotton Pygmy-Goose), इंडियन पैराडाइज-फ्लाईकैचर (Indian Paradise- Flycatcher) और ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो (Greater Racket-tailed Drongo) जैसी कई दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण प्रजातियां देखी गईं।
महिला समूहों और आजीविका से जुड़ाव
यह अभियान केवल पक्षी अवलोकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे स्थानीय समुदायों और आजीविका से भी जोड़ा गया। रायपुर जिले की ग्राम पंचायत मांढर के अड़बंधा तालाब में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। यहाँ कलश स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित 'फूड कार्ट' स्थानीय समुदाय की पहल और आजीविका- संरक्षण के सुंदर समन्वय का उदाहरण बना।
भविष्य के संरक्षण प्रयासों को मिलेगी मजबूती
इस सफल आयोजन के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य में राज्य की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की नियमित निगरानी, 'पक्षी मित्र' नेटवर्क को मजबूत करने तथा स्कूलों एवं समुदायों के स्तर पर पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।
रायपुर अगस्त 2026/ सावन मास की पुण्य बेला और नागपंचमी के पावन अवसर पर आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं परिवार के सदस्यों के साथ गृहग्राम बगिया स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का अभिषेक कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली के साथ छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।
मैनी नदी के सुरम्य तट पर स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में 17 से 19 अगस्त तक एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण एवं पूजन का तीन दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय एवं श्रीमती कौशल्या साय ने श्रद्धालुओं के साथ अपने हाथों से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को नागपंचमी एवं पवित्र सावन मास की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष अवसर है। भगवान भोलेनाथ लोकमंगल और कल्याण के प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि महादेव की कृपा छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार पर बनी रहे, हमारे अन्नदाता किसानों के खेत-खलिहान समृद्ध हों और प्रदेश में सुख, शांति एवं खुशहाली निरंतर बढ़ती रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति और परमात्मा के प्रति श्रद्धा का अद्भुत समन्वय है। नदियां, वन, पर्वत और जीव-जगत हमारी आस्था एवं जीवन परंपरा के अभिन्न अंग हैं। सावन के पवित्र महीने में शिव आराधना हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, लोककल्याण और सेवा का संदेश देती है।
आस्था और भक्ति का केंद्र बना श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर
तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान को लेकर श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर सहित आसपास के क्षेत्र में उत्साह और भक्तिमय वातावरण है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं।
आयोजन के दौरान पार्थिव शिवलिंग निर्माण, पूजन, अभिषेक, आरती, पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। प्रथम दिन 17 अगस्त को पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ पूजन-अभिषेक, आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। 18 अगस्त को भी पार्थिव शिवलिंग निर्माण, पूजन एवं अभिषेक के बाद आरती और प्रसाद वितरण होगा। तीन दिवसीय अनुष्ठान का समापन 19 अगस्त को पार्थिव शिवलिंग पूजन एवं विशेष पूर्णाहुति के साथ होगा।
लोकमंगल की कामना के साथ एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग
इस विशेष अनुष्ठान में एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और पूजन का संकल्प लिया गया है। श्रद्धालु सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं। सामूहिक शिव आराधना के माध्यम से प्रदेश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं लोककल्याण की कामना की जा रही है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान से बगिया और आसपास का पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर है। मैनी नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, शिव आराधना और श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर आस्था और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ‘गजरथ यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री ने कहा - जनसुरक्षा के साथ हाथियों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण हमारी प्राथमिकता
मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन एवं हाथियों की सुरक्षा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मियों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
गांवों और विद्यालयों तक पहुंचकर हाथियों के व्यवहार एवं सुरक्षित सह-अस्तित्व के प्रति जागरूक कर रही ‘गजरथ यात्रा’
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जशपुर वनमंडल के जनजागरूकता अभियान पर आधारित पुस्तक ‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ का विमोचन किया। यह पुस्तक मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने, हाथियों के संरक्षण और प्रभावित क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए जशपुर वनमंडल द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं अभिनव गतिविधियों का दस्तावेज है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि जशपुर वन-संपदा और जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है। यहां मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके विचरण क्षेत्रों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाकर मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के साथ वन और वन्यजीवों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने ‘गजरथ यात्रा’ की सराहना करते हुए कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को जागरूक और सतर्क बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे प्रयासों में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भूमिका मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत बनाने में सहायक होती है।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित वन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
गांव-गांव और विद्यालयों तक पहुंच रही ‘गजरथ यात्रा’
जशपुर वनमंडल द्वारा विगत वर्षों से हाथी प्रभावित क्षेत्रों में मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने और ग्रामीणों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ‘गजरथ यात्रा’ इसी दिशा में शुरू किया गया एक व्यापक जनजागरूकता अभियान है।
इस अभियान के माध्यम से हाथी प्रभावित गांवों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर ग्रामीणों, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार, उनके आवास, भोजन और विचरण क्षेत्रों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनकी उपस्थिति के दौरान अनावश्यक रूप से निकट नहीं जाने और आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
अभियान के माध्यम से हाथियों को लेकर प्रचलित भ्रांतियों और भय को दूर कर उनके प्रति वैज्ञानिक, संवेदनशील एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए द्वंद्व की संभावनाओं को न्यूनतम करना है।
‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में दर्ज हुई संरक्षण और जनजागरूकता की यात्रा
‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में जशपुर वनमंडल द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और हाथी संरक्षण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को विस्तार से संकलित किया गया है। पुस्तक में जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्रामीण समुदायों की भूमिका, विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने तथा हाथियों के साथ सुरक्षित व्यवहार को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
पुस्तक इस संदेश को भी रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण को प्रभावी बनाने में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों की जागरूकता एवं सहयोग महत्वपूर्ण है। विशेषकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में समय पर सूचना, सावधानी और सामुदायिक समन्वय मानव तथा हाथियों दोनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
तकनीक बनी जनसुरक्षा की सहयोगी, समय पर मिल रही हाथियों की सूचना
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश शर्मा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री रमेश शर्मा ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता सदैव स्मरणीय रहेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिजनों एवं शुभचिंतकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दृष्टिबाधित छात्रा जयमंती खेस को भेंट किया लैपटॉप
मुख्यमंत्री ने पूछा—“आगे क्या बनना चाहती हो?”, जयमंती बोलीं—“शिक्षक बनना चाहती हूं”
मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला- “शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं, मेहनत से अपने सपने को जरूर साकार करें”
विशेष सॉफ्टवेयर से पढ़ाई होगी आसान, अध्ययन सामग्री को सुनकर कर सकेंगी अध्ययन
रायपुर अगस्त 2026/ मजबूत इरादों के आगे कठिनाइयां भी रास्ता छोड़ देती हैं। जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गोरिया की शत-प्रतिशत दृष्टिबाधित छात्रा जयमंती खेस ने अपनी दृष्टिबाधा को कभी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने दिया। उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक बनने का सपना संजोए जयमंती की पढ़ाई को अब तकनीक का मजबूत सहारा मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज ग्राम बगिया स्थित अपने निवास पर जयमंती को विशेष सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
जयमंती वर्तमान में डिग्री गर्ल्स कॉलेज, रायपुर में बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। दृष्टिबाधा के बावजूद शिक्षा के प्रति उनकी लगन और आगे बढ़ने का जज्बा मजबूत है। लैपटॉप मिलने से अब डिजिटल अध्ययन सामग्री तक उनकी पहुंच आसान होगी और वे आधुनिक तकनीक की सहायता से अपनी पढ़ाई को अधिक सुगमता से आगे बढ़ा सकेंगी।
लैपटॉप प्राप्त करते समय जयमंती के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लैपटॉप उनकी पढ़ाई में बेहद उपयोगी साबित होगा। इससे अध्ययन सामग्री तक पहुंच आसान होने के साथ उच्च शिक्षा के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में भी मदद मिलेगी।
“शिक्षक बनना चाहती हूं”—जयमंती के जवाब ने मुख्यमंत्री को किया प्रसन्न
मुख्यमंत्री श्री साय ने लैपटॉप प्रदान करने के दौरान जयमंती से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने छात्रा की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और पूछा, “आगे क्या बनना चाहती हो?” जयमंती ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, “शिक्षक बनना चाहती हूं।”
जयमंती का लक्ष्य जानकर मुख्यमंत्री ने उनका उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। पूरी लगन से पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर आगे बढ़ती रहें।” मुख्यमंत्री ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से जीवन की कठिन से कठिन चुनौती को पार कर अपने सपनों को साकार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
जनदर्शन में रखी थी आवश्यकता, संवेदनशीलता से मिला समाधान
जयमंती ने अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने के लिए कलेक्टर जनदर्शन में लैपटॉप उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। छात्रा की आवश्यकता और शिक्षा के प्रति उनकी लगन को देखते हुए कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद समाज कल्याण विभाग ने छात्रा की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहायक सॉफ्टवेयर से युक्त लैपटॉप तैयार कराया। आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वयं यह लैपटॉप जयमंती को प्रदान किया। इस प्रकार जनदर्शन में छात्रा द्वारा रखी गई आवश्यकता का समाधान उसके शिक्षा के सपने को आगे बढ़ाने का माध्यम बन गया।
तकनीक बनेगी जयमंती की आंखें, पढ़ाई होगी अधिक सुगम
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जयमंती की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लैपटॉप में विशेष सहायक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। इसकी सहायता से स्क्रीन पर उपलब्ध सामग्री को आवाज के माध्यम से सुना और समझा जा सकेगा।
इस तकनीकी सुविधा से जयमंती डिजिटल पुस्तकें, नोट्स एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग अधिक आसानी से कर पाएंगी। इससे उनकी उच्च शिक्षा की राह सुगम होने के साथ डिजिटल माध्यमों से स्वतंत्र रूप से अध्ययन करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री से मिले प्रोत्साहन और तकनीक के इस सहयोग ने जयमंती के शिक्षक बनने के सपने को नई ऊर्जा दी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन मिले तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा और सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर डीकेएस अस्पताल रायपुर में हुआ सफल उपचार
आर्थिक तंगी बनी थी इलाज में बाधा, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने बढ़ाया मदद का हाथ
स्वस्थ होकर मुख्यमंत्री से मिले अविनाश, कहा - मुश्किल समय में मिली मदद ने बदल दी जिंदगी
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आशा और विश्वास का संचार कर रही है। बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के साथ ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार सहायता दी जा रही है। इसी संवेदनशील पहल से फरसाबहार विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी 21 वर्षीय अविनाश नायक का रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल उपचार संभव हो सका है।
स्वस्थ होने के बाद अविनाश आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया पहुंचे और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। अविनाश ने मुख्यमंत्री को बताया कि उपचार के बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार आया है और अब वे पहले की तुलना में कहीं अधिक सहजता से चलने-फिरने के साथ अपने दैनिक कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनके स्वस्थ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना की।
जन्म से थी परेशानी, आर्थिक तंगी के कारण नहीं हो पा रहा था उपचार
अविनाश नायक को जन्म से ही बाएं पैर के अंगूठे और एक अन्य अंगुली में मांसपेशियों एवं हड्डी के असामान्य रूप से बढ़ने की समस्या थी। उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी भी बढ़ती गई। इससे उन्हें चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होने लगी। उपचार की आवश्यकता होने के बावजूद परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उनके सामने सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी।
कुछ वर्ष पूर्व अविनाश ने उपचार के लिए जिला अस्पताल में चिकित्सकों से संपर्क किया। जांच के बाद चिकित्सकों ने बेहतर उपचार एवं ऑपरेशन के लिए किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में जाने की सलाह दी। परिवार के लिए इलाज और ऑपरेशन का खर्च वहन करना संभव नहीं था। ऐसे में बेहतर उपचार की उम्मीद लिए अविनाश ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में अपनी समस्या बताते हुए सहायता के लिए आवेदन किया।
कैंप कार्यालय ने दिखाई तत्परता, रायपुर में कराया उपचार
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने अविनाश की समस्या को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए उनके उपचार के लिए तत्काल आवश्यक पहल की। उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रायपुर भेजा गया, जहां डीकेएस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार और ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
सफल उपचार ने अविनाश के जीवन की एक बड़ी परेशानी दूर कर दी है। लंबे समय से जिस शारीरिक समस्या के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, उससे अब काफी राहत मिली है। वे सामान्य दिनचर्या की ओर लौट रहे हैं।
आर्थिक स्थिति कमजोर थी, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बना सहारा
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अविनाश ने भावुक होकर बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे किसी बड़े अस्पताल में जाकर अपना उपचार करा सकें। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन देने के बाद उनकी समस्या पर गंभीरता से पहल हुई और रायपुर के डीकेएस अस्पताल में सफल उपचार कराया गया।
अविनाश ने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में मिली इस सहायता ने उन्हें बड़ी परेशानी से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने उपचार में सहयोग करने वाले चिकित्सकों और प्रशासन के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।
जरूरतमंदों के लिए उम्मीद और विश्वास का केंद्र बना कैंप कार्यालय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रहा है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बीमारी और अन्य कठिन परिस्थितियों में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में संवेदनशीलता के साथ पहल की जा रही है।
अविनाश की कहानी इसी संवेदनशील व्यवस्था का उदाहरण है। आर्थिक अभाव के कारण जिस युवक का उपचार लंबे समय से नहीं हो पा रहा था, उसे समय पर सहायता और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने से आज उसके जीवन में नई उम्मीद आई है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय जरूरतमंदों के लिए सहायता के माध्यम के साथ भरोसे और संवेदनशील शासन के केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का प्रदर्शन
21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
रायपुर, अगस्त 2026/ 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।
‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा
प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।
छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।
विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।
योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर
प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।
महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।
सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक
प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।
एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।
छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बढ़ा दाखिले का दायरा
अब 31 अगस्त तक ले सकेंगे प्रवेश
रायपुर, अगस्त 2026/उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार का मूल ध्येय प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाना है। दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के कई मेधावी युवा विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण समय पर प्रवेश नहीं ले सके थे। हम नहीं चाहते कि तिथियों के फेर में किसी भी योग्य विद्यार्थी का एक साल खराब हो या वह उच्च शिक्षा से वंचित रह जाए। छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रवेश की तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है। मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करता हूँ कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। राज्य के जिन शासकीय और निजी महाविद्यालयों में अभी भी सीटें रिक्त हैं, वहाँ छात्र अब 31 अगस्त 2026 तक दाखिला ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत प्राचार्य स्तर पर प्रवेश की समय सीमा 31 जुलाई तक और कुलपति की अनुमति से 14 अगस्त तक तय की गई थी। लेकिन अंतिम तिथि बीतने के बाद भी कई महाविद्यालयों में सीटें खाली रह गई थीं और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई अभ्यर्थी समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन ने तिथि विस्तार का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में 20 लाख रूपए के सामुदायिक भवन का हुआ भूमिपूजन
रायपुर, अगस्त 2026/बिलासपुर जिला स्थित बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने डॉ. खूबचंद बघेल और स्वामी आत्मानंद महाराज जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लाखों लोग जन्म लेते हैं, लेकिन अमर वही होते हैं जो अपने सत्कर्मों से समाज का निर्माण करते हैं और इतिहास रचते हैं।
इस अवसर पर मंत्री ने 20 लाख रूपए से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया। छत्तीसगढ़ निर्माण की पृष्ठभूमि का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखा गया था, और मार्ग में निरंतर आगे बढ़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस सपने को साकार किया। यदि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण न हुआ होता, तो प्रदेश की स्थिति आज भी वैसी ही बनी रहती। आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी और अधोसंरचना के हर क्षेत्र में तेज़ी से काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और राजस्व का पूरा पैसा अब यहीं के सर्वांगीण विकास में उपयोग हो रहा है।
सामाजिक बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि कभी पूर्णतः कृषि पर आधारित हमारा समाज अब व्यवसाय, व्यापार और नौकरियों के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है। लोगों के रहन-सहन का स्तर बदला है; जिनके पास कभी साइकिल नहीं थी, वे आज दोपहिया, चारपहिया और हवाई यात्रा तक का आनंद ले रहे हैं। गांव-गांव में महज 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्कूल, हायर सेकेंडरी विद्यालय और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है। इस भौतिक प्रगति के साथ हम सभी को सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।आधुनिकता के इस दौर में गांव-घर का पारस्परिक प्रेम और पारिवारिक मर्यादाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रगति के साथ-साथ अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को बनाए रखना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि संस्कारों के बिना जीवन अधूरा है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहां आपसी प्रेम, भाईचारा, संवेदनशीलता और एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े रहने की भावना सदैव जीवंत रहे।
वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से मिल रही काम करने की प्रेरणा:श्री धरमलाल कौशिक
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन और जीवन अनुभवों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का जीवन अनुभवों से भरा होता है, जिससे सीखकर, समझकर और पढ़कर संगठन व समाज सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद से लेकर आज तक प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक भौतिक साधनों और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ने आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है।
बिल्हा विकासखंड के ग्राम कड़ार में आयोजित इस भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,सरपंच ब्रजेश दुबे,जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रायपुर, 16 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान श्री साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई श्री प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय श्री प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।
कैंसर की रोकथाम में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच जरूरी : डॉ. रमन सिंह
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
15 मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ा दायरा : स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।
इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।