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प्रशांत किशोर का दावा:पश्चिम बंगाल का चुनाव देश में लोकतंत्र बचाने की लड़ाई, कहा- 2 मई को मेरा पिछला ट्वीट निकाल लेना

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में TMC की जीत के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के लिए काम कर रहे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर अपनी रणनीति का खुलासा किया। प्रशांत किशोर ने लिखा कि देश में लोकतंत्र बचाने के लिए बंगाल का चुनाव बेहद अहम है।

प्रशांत किशोर ने चुनाव अभियान के लिए TMC के स्लोगन का फोटो भी शेयर किया। इसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फोटो के साथ एक नारा लिखा है- बंगला निजेर मेय की चे यानी बंगाल को केवल उसकी अपनी बेटी पर भरोसा है।

प्रशांत किशोर ने 21 दिसंबर को किए एक ट्वीट के बारे में भी याद दिलाया। तब उन्होंने दावा किया था कि बंगाल में भाजपा दहाई के आंकड़े से आगे नहीं बढ़ पाएगी। प्रशांत किशोर ने शनिवार को कहा कि 2 मई को नतीजे आने के बाद आप मेरे पिछले ट्वीट पर बात कर सकते हैं।

TMC छोड़ने वाले नेताओं ने प्रशांत पर लगाए थे आरोप

प्रशांत किशोर ने पिछले साल बिहार चुनाव के बीच में ममता बनर्जी के लिए चुनाव अभियान का काम संभाला था। इसके बाद से ममता की पार्टी TMC छोड़ने वाले नेताओं ने बार-बार प्रशांत किशोर के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे। ज्यादातर ने भाजपा में शामिल होने के बाद कहा कि TMC में प्रशांत किशोर ने पूरी बागडोर संभाल ली है।

ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर किशोर का इतना प्रभाव है कि पार्टी में पुराने नेताओं की सुनी नहीं जा रही।हाल में राज्यसभा में TMC छोड़ने का ऐलान करने वाले दिनेश त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर के लोग उनके ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते थे। त्रिवेदी ने कहा- मेरे ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई।

चुनाव से जुड़े हर फैसले में प्रशांत किशोर का दखल

बंगाल में इस बार सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है। प्रशांत किशोर TMC की जीत के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। न सिर्फ उम्मीदवारों के चयन, बल्कि कई नेताओं के BJP में शामिल होने के बाद पार्टी में बगावत रोकने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है। इस समय ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी से दूर जा रहे वोटरों को रोकने की है।

भाजपा के गढ़ में एक चरण में चुनाव, दीदी के किले कई चरणों में बंटे

शुक्रवार को स्मृति ईरानी ने स्कूटर रैली निकाली।
23 जिले हैं पश्चिम बंगाल में, 80.5% राज्य की साक्षरता दर
9.96 करोड़ आबादी है प. बंगाल की, 5.75% देश की जीडीपी में योगदान

चुनाव की घोषणा से दो साल पहले से ही राजनीतिक रस्साकशी में उलझे पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद नई ही कवायद शुरू हो गई है। अब पार्टियां आठ चरण में होने वाले चुनाव के फायदे-नुकसान के गुणा-भाग में जुट गई हैं।

मुद्दा अब ये बन गया है कि खुद को भाजपा जिस दक्षिण बंगाल और जंगलमहाल के इलाके में मजबूत मानती है वहां तो लगभग एक साथ चुनाव हो रहे हैं, मगर जिन जिलों में तृणमूल मजबूत है वहां सीटों को कई चरणों में बांट दिया गया है। चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ममता भी कह चुकी हैं कि एक ही जिले में दो चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं थी।

चरणों के गुणा-भाग से बहुत पहले से ही यहां भाजपा और तृणमूल के बीच जंग तेज है। दल-बदल के अलावा दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्द्धा दुर्गा पूजा पंडालों, विवेकानंद-रविंद्रनाथ ठाकुर-नेताजी जयंती से होती हुई सीबीआई-सीआईडी तक पहुंच गई है।

भाजपा पामेला गोस्वामी के मामले में सीआईडी के दुरुपयोग के आरोप लगा रही है तो टीएमसी का आरोप है कि कोयला घोटाले के नाम पर केंद्र सीबीआई का गलत इस्तेमाल कर रहा है। ध्रुवीकरण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे चर्चा में है। तृणमूल ‘जय बांग्ला’ तो भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ कैम्पेन में जुटी है। नारों और बयानों में तल्खी तो बढ़ ही रही थी, सीटों के बंटवारे ने नए विवाद ही खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, दक्षिण बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, प. मेदिनीपुर व पू. मेदिनीपुर जिले आते हैं। यहां पहले-दूसरे चरण में चुनाव होने हैं। शुभेंदु अधिकारी के आने से भाजपा इसी इलाके में मजबूत हुई है। छठे चरण में 43 सीटों पर मतदान 22 अप्रैल को होना है और रामनवमी 21 अप्रैल को है।

टीएमसी नेताओं का कहना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है। इस चरण में नदिया, बर्धमान, नॉर्थ 24 परगना के कुछ हिस्सों और उत्तर दिनाजपुर जिले की सीटों पर चुनाव होगा। यहां तृणमूल की पकड़ मानी जाती रही है। मुर्शिदाबाद, मालदा, हावड़ा, हुगली और साउथ 24 परगना जिलों की सीटों को अलग चरणों में बांटने का भी टीएमसी ने विरोध किया है।

नई दिल्ली । पांच राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बाद चिंता बढ़ गई है। इसे देखते हुए कश्मीर से कन्याकुमारी तक राज्यों ने बाहरी राज्यों से आने वालों को लेकर सख्ती अपनानी शुरू कर दी है। आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के नये मामलों की तुलना में स्वस्थ लोगों की संख्या में गिरावट होने से सक्रिय मामलों में गुरूवार को वृद्धि का सिलसिला जारी रहा और अब यह डेढ़ लाख के पार पहुंच गए है। विभिन्न राज्यों से देर रात तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक देश में गत 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 16,294 नये मामले सामने आये और संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर एक करोड़ 10 लाख 62 हजार 770 हो गया है। सक्रिय मामलों की संख्या अब 1,52,984 हो गयी है। इस दौरान 11,810 मरीज स्वस्थ हुए जिसे मिलाकर कोरोना मुक्त होने वालों की संख्या एक करोड़ सात लाख 48 हजार 366 हो गयी है। इसी अवधि में 109 मरीजों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा बढ़कर एक लाख 56 हजार 851 हो गया। देश में रिकवरी दर घटकर 97.21 और सक्रिय मामलों की दर बढ़कर 1.37 प्रतिशत हो गयी है जबकि मृत्युदर अभी 1.42 फीसदी है। राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे के दौरान नये मामलों की तुलना में स्वस्थ मरीजों की संख्या में गिरावट होने के कारण सक्रिय मामले बढ़कर 1,160 के पार पहुंच गये। आज सक्रिय मामले 32 और बढ़कर 1,169 पहुंच गये। राजधानी में स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या में कमी होने से सक्रिय मामलों में यह वृद्धि दर्ज की गयी है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार इस अवधि में 220 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या 6,38,593 तक पहुंच गयी है जबकि 188 और मरीजों के स्वस्थ होने से कोरोना मुक्त लोगों की संख्या बढ़कर 6,26,519 हो गयी। राजधानी में मरीजों के स्वस्थ होने की दर आज आंशिक कमी के साथ 98.10 फीसदी पहुंच गयी। राष्ट्रीय राजधानी में महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब से रेल, बस या हवाई जहाज से आने पर निगेटिव जांच रिपोर्ट लानी होगी। यह सख्ती 15 मार्च तक लागू है। राज्य में सक्रिय मामले 477 हो गये हैं। राज्य में कोरोना से 1,539 लोगों की मौत हुई है जबकि 2,60,401 मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। भीड़ को जमा होने से रोकने के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। छोटे कंटेनमेंट क्षेत्रों की पहचान कर लॉकडाउन लगाने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना महामारी से अब तक हरियाणा में 3043, राजस्थान में 2785, जम्मू-कश्मीर में 1955, ओडिशा में 1968, उत्तराखंड में 1690, असम में 1091, झारखंड में 1087, हिमाचल प्रदेश में 982, गोवा में 791, पुड्डुचेरी में 667, त्रिपुरा में 388, मणिपुर में 373, चंडीगढ़ में 351, मेघालय में 148, सिक्किम में 135, लद्दाख में 130, नागालैंड में 91, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 62, अरुणाचल प्रदेश में 56, मिजोरम में 10 तथा दादर-नागर हवेली एवं दमन-दीव में दो लोगों की मौत हुई है।

नई दिल्ली | भारत में एक बार फिर कोरोना वायरस संक्रमण का ग्राफ चढ़ने लगा है। बीते दो दिन से 16 हजार से ज्यादा नए मामले दर्ज हो रहे हैं और रोजाना होने वाली मौतों की संख्या भी सौ के पार है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जांच में कमी, नया स्ट्रेन व टीकाकरण में देरी समेत पांच ऐसे कारण हैं जो काबू में आई महामारी की स्थिति को फिर से बिगाड़ रहे हैं। इस पर सरकार को तुरंत कदम उठाना होगा।

1. रोजाना की कोरोना जांचें आधी रह गईं
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के डाटा के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में देश हर दिन दस लाख से ज्यादा नमूनों की कोविड-19 जांच की जा रही थी। पर इस साल फरवरी आते-आते देश में जांचे इतनी घट गईं कि हर दिन छह से आठ लाख नमूनों की ही जांच हो रही है। बीते चौबीस घंटों में भी देश में 8,31,807 नमूनों की जांच हुई। देश में अबतक कुल 21,46,61,465 नमूनों की जांच हो चुकी है।


2. नमूनों की पॉजिटिविटी दर में वृद्धि
देश में रोजाना होने वाली कोरोना जांच की दर घट जाने के बावजूद नमूनों के पॉजिटिव होने की दर 5 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह स्थिति बताती है कि जरूरत से कम जांचें हो रहीं हैं और जितनी जांचें हो रही हैं, उनमें पॉजिटिव केसों की पुष्टि की दर अधिक है। पिछले महीने देश में टेस्ट पॉजिटिविटी दर लगभग 6 प्रतिशत थी जो इस महीने 5 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि किसी भी देश की जांच पॉजिटिविटी दर लगातार दो सप्ताह तक पांच प्रतिशत या इससे कम होनी चाहिए तब ही संक्रमण पर नियंत्रण किया जा सकता है।

3. कोरोना वायरस के नए रूपों का असर
भारत सरकार बता चुकी है कि ब्रिटेन में सबसे पहले पहचाने गए वायरस के एक नए संस्करण के देश में 180 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। साथ ही दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैले वायरस के एक और नए संस्करण के भी देश में कई मामले सामने आए हैं। हाल में देश में कोरोना का एक नया संस्करण भी पाया गया पर संक्रमण के पीछे इस वायरस के होने की पुष्टि सरकार ने नहीं की है। अशोका विश्वविद्यालय के महामारी विशेष शाहिद जमील का कहना है कि संक्रमण के चरम से देश के उबर जाने का मतलब यह नहीं है कि भारत दूसरी संभावित लहर से सुरक्षित है।

4. बचाव के तरीकों में लापरवाही
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि दिसंबर-जनवरी में देश में कोरोना संक्रमण घटा, जिसके बाद लोग लापरवाही करने लगे और जांचें भी कम हो गई। इस कारण भी अब देश के महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारत में संक्रमण घटने के पीछे का एक अहम कारण बहुत बड़ी आबादी के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो जाना रहा होगा। हाल में जारी कई सिरो सर्वे के परिणाम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि देश की बड़ी आबादी वायरस के जद में आकर खुद ही ठीक हो गई। इस तथ्य के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीयों को पिछले महीने घटे संक्रमण को लेकर अति उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसे बहुत से लोग हो सकते हैं जिनके शरीर में बिना लक्षण वाला कोरोना संक्रमण हो। इसलिए लापरवाही न बरती जाए।

5. आबादी के हिसाब से धीमा टीकाकरण
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा संचालित आवर वर्ल्ड इन डाटा के मुताबिक, भारत प्रति सौ लोगों में मात्र एक को टीका लगा रहा। जबकि ब्रिटेन में हर सौ लोगों पर 27 और अमेरिका 19 लोगों को टीका लग रहा है। भारत का लक्ष्य जुलाई तक 30 करोड़ लोगों को टीका लगाना है, जिसमें वह काफी पीछे है। अभी तक देश में कुल 1,34,72,643 लोगों को ही टीका लगा है जबकि मार्च के अंत तक देश में 3 करोड़ को टीका लगना है। एक मार्च से देश में 27 करोड़ बुजुर्ग व गंभीर मरीजों को टीका लगाया जाना है। भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि देश में टीकाकरण के हर सेशन में लक्ष्य की तुलना में 35 प्रतिशत ही टीकाकरण हुआ।

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक सैन्य अधिकारी का उसकी पत्नी से तलाक मंजूर करते हुए कहा कि जीवनसाथी के खिलाफ मानहानिकारक शिकायतें करना और उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना मानसिक क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति एस के कौल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने टूटे हुए संबंध को मध्यमवर्गीय वैवाहिक जीवन की सामान्य टूट-फूट करार देकर अपने निर्णय में त्रुटि की।

पीठ ने कहा,‘यह निश्चित तौर पर प्रतिवादी द्वारा अपीलकर्ता के खिलाफ क्रूरता का मामला है और उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करने तथा परिवार अदालत के फैसले को बहाल करने के लिए पर्याप्त औचित्य पाया गया है।’ इसने कहा,‘इस तरह अपीलकर्ता अपनी शादी को खत्म करने का हकदार है और वैवाहिक अधिकारों की बहाली का प्रतिवादी का आवेदन खारिज माना जाता है। तदनुसार यह आदेश दिया जाता है।’

सैन्य अधिकारी ने एक सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज में संकाय सदस्य अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक मांगा था। दोनों की शादी 2006 में हुई थी। वे कुछ महीने तक साथ रहे, लेकिन शादी की शुरुआत से ही उनके बीच मतभेद उत्पन्न हो गए और वे 2007 से अलग रहने लगे। पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय भी थे।

सैन्य अधिकारी ने अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसने विभिन्न जगहों पर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। न्यायालय ने कहा,‘जब जीवनसाथी की प्रतिष्ठा को उसके सहकर्मियों, उसके वरिष्ठों और समाज के बीच बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जाता है तो प्रभावित पक्ष से ऐसे आचरण को क्षमा करने की उम्मीद करना मुश्किल होगा।’

नई दिल्ली | भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के मामले में भारतीय अधिकारियों को ब्रिटेन की अदालत में बड़ी जीत मिली है। नीरव मोदी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपना केस हार गया है। इसके बाद भारत ने कहा है कि नीरव मोदी के मामले में ब्रिटेन के कोर्ट के फैसले के बाद उसके प्रत्यर्पण के लिए जल्द संपर्क किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने मामला वहां के होम सेक्रेटरी के पास भेजा है। उनके अप्रूवल पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी। फिलहाल इसके लिए दो महीने का वक्त मिल सकता है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक फ्रॉड मामले में भारत में वांछित है। सीबीआई और ईडी के अनुरोध पर ब्रिटेन से उसका प्रत्यर्पण अगस्त, 2018 में मांगा गया था।

प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि 20 मार्च, 2019 को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में वरिष्ठ जिला न्यायाधीश के समक्ष नीरव को गिरफ्तार किया गया था। तब से उन्हें न्यायिक हिरासत में रहते हुए प्रत्यर्पण की कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस मामले में अंतिम सुनवाई 7-8 जनवरी 2021 को हुई थी। प्रवक्ता ने कहा कि गुरुवार को लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने फैसला सुनाया है। प्रवक्ता ने आदेश का हवाला देते हुए बताया कि न्यायाधीश ने कहा है कि नीरव मोदी ने सबूतों को नष्ट करने और गवाहों को डराने के लिए साजिश रची। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने यूके के गृह सचिव को नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की सिफारिश की है, इसलिए भारत सरकार प्रत्यर्पण के लिए यूके अधिकारियों के साथ संपर्क करेगी।

नीरव का पैंतरा
प्रत्यर्पण से बचने के लिए नीरव मोदी ने कोर्ट में कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार है। साथ ही उसने भारत की जेल में सुविधाएं न होने का दावा किया। उसके वकीलों ने कहा कि मामला विवादित है। नीरव मोदी पर गलत आरोप लगाए गए हैं।

कोर्ट की सख्ती
कोर्ट ने नीरव की मानसिक स्वास्थ्य की चिंता को खारिज कर दिया। कहा कि अगर नीरव को भारत भेजा जाता है तो उसके आत्महत्या करने का कोई खतरा नहीं है क्योंकि उसे ऑर्थर रोड जेल में उचित चिकित्सकीय सहायता मिलेगी। अदालत ने माना कि नीरव मोदी ने सबूत नष्ट करने और गवाहों को डराने के लिए साजिश रची थी।

प्रत्यर्पण को लेकर अब आगे क्या?
नीरव मोदी लंदन की वांड्सवर्थ जेल में बंद है। लंदन कोर्ट में जज सेमुअल गूजी के फैसले के बाद मामला अब ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के पास जाएगा। प्रत्यर्पण को लेकर कोर्ट के फैसले पर गृह मंत्री प्रीति पटेल आखिरी मोहर लगाएंगी। इसके बाद भारत के इस वांटेड भगोड़े को मुंबई जेल लाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, उसके तुरंत भारत आने की संभावना कम है। कोर्ट के फैसले के बाद नीरव मोदी के पास ऊपरी अदालत में जाने का विकल्प होगा। फैसले के खिलाफ वह हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। नीरव के पास अपील के लिए 28 दिनों का वक्त है। हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद वह मानवाधिकार कोर्ट जा सकता है। इसके अलावा उसके पास मानवाधिकारों की बात करते हुए यूरोपीय अदालत में जाने का विकल्प होगा।

भारत में ये मुकदमे चलेंगे
नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में करीब 14 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक के लोन की धोखाधड़ी की। यह धोखाधड़ी गारंटी पत्र के जरिए की गई। उस पर भारत में बैंक घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दो प्रमुख मामले सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज ‍किए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य मामले भी उसके खिलाफ भारत में दर्ज हैं।

हीरा कारोबार से अरबों की संपत्ति जुटाई
हीरा कारोबार से पहचान बनाने वाला नीरव मोदी मूल रूप से गुजरात के रहने वाला है। उसके पिता हीरे के व्यापार से जुड़े थे और इसे ही नीरव मोदी ने आगे बढ़ाया। नीरव तब खासे चर्चा में आया, जब 2010 में नीलामी में नीरव मोदी की कंपनी फायर स्टार डायमंड का गोलकुंडा नेकलेस 16.29 करोड़ रुपये में बिका। 2016 की फोर्ब्स की सूची के अनुसार, 11, 237 करोड़ की संपत्ति के मालिक नीरव देश के सबसे रईस लोगों की सूची में 46वें स्थान पर था।

नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान सीमा पर संघर्ष विराम की घोषणा अगर वास्तविक रूप में अमल में आई तो इसका सकारात्मक असर दोनो देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर भी देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में 4जी सेवा शुरू होना, भारत की पहल पर बुलाई गई पड़ोसी देशों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड जैसी स्थितियों से निपटने के लिए सुझाये गए उपायों का पाकिस्तान द्वारा समर्थन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के विमान को भारतीय एयर स्पेस के उपयोग की इजाजत देना और अब दो कदम आगे बढ़कर संघर्ष विराम पर परस्पर सहमति इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में बहुत कुछ चहलकदमी हो रही है।

डोभाल रणनीतिक स्तर पर सक्रिय
रणनीतिक स्तर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की सक्रियता संघर्ष विराम के पीछे बताई जा रही है। कई अन्य स्तरों पर चहलकदमी का असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।


कूटनीतिक स्तर पर सकारात्मक संकेत
जानकारों का कहना है कि भारत ने ताजा घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान को लेकर जिस तरह से सधी प्रतिक्रिया दी है उससे संकेत साफ हैं कि रिश्तों को बेहतर करने की पहल पर्दे के पीछे चल रही है। दोनों तरफ से कुछ सद्भावना दिखाने का प्रयास हो रहा है।

जमीन पर बदलाव महत्वपूर्ण
सूत्रों ने कहा कि अगर जमीन पर पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का सख्ती से पालन किया और आतंकवाद और घुसपैठ को रोका जा सका तो दोनो देशों के रिश्ते बेहतर बनाने के कुछ और कदम नजर आ सकते हैं।

सामान्य पड़ोसी की तरह चाहते हैं रिश्ते: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने संघर्ष विराम के बाद बातचीत की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर सतर्क बयान दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है,‘भारत, पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी की तरह रिश्ते चाहता है। अगर कोई भी मुद्दा है तो उन्हें शांतिपूर्ण और द्विपक्षीय तरीके से हल करने को प्रतिबद्ध है। आतंकवाद सहित अन्य मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर भारत ने स्पष्ट किया है कि अहम मसलों पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं है।’

नजर आएगी सार्थक पहल
सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले दस पड़ोसी देशों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सुझाए गए उपायों पर समर्थन जताने के बाद पाकिस्तान इस दिशा में कुछ सार्थक पहल भी कर सकता है।

जम्मू कश्मीर से भी समर्थन
उधर जम्मू कश्मीर के दलों ने भी भारत पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हुर्रियत ने भी सकारात्मक बयान दिया है। इसे भी माहौल सुधरने में मददगार बताया जा रहा है।

पाकिस्तान न दे धोखा
जानकारों का कहना है कि फिलहाल धारा 370 सहित कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान ने पिछले दिनों जिस तरह से भारत के प्रति कटुता दिखाई है उसे देखते हुए अभी भारत इंतजार करने की रणनीति अपनाएगा। अतीत में भी पाकिस्तान समझौतो को तोड़ता रहा है ऐसे में जमीनी स्तर पर बदलाव अहम होंगे। जानकार मानते हैं कश्मीर को लेकर सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।
जानकारों का कहना है कि फिलहाल जमीनी स्थिति पर नजर रखनी होगी। चीन और पाकिस्तान दोनो से एक साथ रिश्ते सुधरने की पहल होगी तो इलाके में कई अहम बदलाव भी नजर आएंगे।

अमेरिका का पाकिस्तान पर दबाव
गौरतलब है कि अमेरिका में नए प्रशासन के सत्ता में आने के बाद कई तरह के घटनाक्रम इलाके में हो रहे हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मसले पर साफ संदेश दिया है। कश्मीर को लेकर भी बाइडेन प्रशासन की स्थिति स्पष्ट है। पाकिस्तान को अलग थलग पड़ने का डर सता रहा है। इसका असर भी कूटनीति के स्तर पर दिखेगा।

नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के दर्द पर बालाकोट एयर स्ट्राइक मरहम है। आज ही के दिन भारतीय वायुसेना के वीर जवानों ने पाकिस्तान की धरती में घुस कर आतंकवादियों का सफाया किया था और पाकिस्तान को इसकी भनक भी नहीं लगी थी। आज यानी 26 फरवरी को उस बालाकोट एयर स्ट्राइक के दो साल पूरे हो गए, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर बमबारी कर उसे तबाह कर दिया था। 14 फरवरी को हुए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी की देर रात इसका बदला लिया था और पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश के आतंकी कैंप को नेस्तानबूद कर दिया था। भारतीय वायुसेना के इस एयर स्ट्राइक में जैश के करीब 250 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया था।

दरअसल, पाकिस्तान में बालाकोट एयर स्ट्राइक पुलवामा आतंकी हमले का बदला था। 14 फरवरी को जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ का काफिला गुजर रहा था। सामान्य दिन की तरह ही उस दिन भी सीआरपीएफ के वाहनों का काफिला अपनी धुन में जा रहा था। तभी एक कार ने सड़क की दूसरी तरफ से आकर इस काफिले के साथ चल रहे वाहन में टक्‍कर मार दी। इसके साथ ही एक जबरदस्‍त धमाका हुआ। यह आत्मघाती हमला इतना बड़ा था कि मौके पर ही सीआरपीएफ के करीब 42 जवान शहीद हो गए। पुलवामा आतंकी हमले से पूरे देश में रोष पैदा हो गया।

पुलवामा आतंकी हमले से सभी सन्न थे। हर कोई आतंकियों से इसका बदला लेना चाहता था। सरकार ने भी पुलवामा के शहीदों की शहादत का बदला लेने के लिए 12 दिन बाद 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी कैंप पर हमला कर दिया। पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए सरकार ने भारतीय वायुसेना को चुना। भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को तड़के बालाकोट में आसमान से बमवर्षा शुरू कर दी। भारतीय वायुसेना के इस एयर स्ट्राइक में जैश के न सिर्फ आतंकी ठिकाने तबाह हुए, बल्कि करीब 250 से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।

पुलवामा हमले के जवाब में जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान 26 फरवरी को तड़के पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर बम बरसा रहे थे, तब वहां गहरी नींद में सो रहे लोगों को लगा मानो जलजला आ गया हो। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का हमला काफी खौफनाक था। ऐसा महसूस हो रहा था कि भूकंप के तेज झटकों से जमीन कांप रही है। बालाकोट के जाबा टॉप निवासी मोहम्मद आदिल ने कहा था, ‘सुबह तीन बजे के आसपास का समय था। बाहर से बहुत ही खौफनाक आवाज आई। ऐसा लगा जलजला आया हो। हम सब एक झटके में उठकर बैठ गए। पांच-दस मिनट बाद एहसास हुआ कि बम धमाका हुआ है। इसके बाद हम रात भर सो नहीं पाए। पल-पल यही डर सताता रहा कि कहीं कोई और बम न गिर जाए।’

90 सेकेंड में पूरा हुआ था मिशन
भारतीय वायु सेना (IAF) की तरफ से पाकिस्तान स्थित बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकी शिविर पर 'मिशन' को सिर्फ 90 सेकेंड के भीतर अंजाम दिया गया था और इस ऑपरेशन के लिए जिस तरह की सीक्रेसी रखी गई थी उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे अंजाम देने वाले पायलट के परिवार के सदस्यों को भी इस बारे में कुछ नहीं मालूम था। इस तरह के भारतीय वायुसेना के हमले में पहली बार इस्तेमाल किए गए मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के एक पालयट ने बताया था कि “यह 90 सेकेंड में पूरा हो गया था, हमने बम फेंका और वापस लौट आए।” जबकि, नाम न बताने की शर्त पर भारतीय वायु सेना के एक अन्य पायलट ने कहा था “इसे कोई नहीं जानता था, यहां तक के मेरे परिवार के सदस्यों को भी नहीं मालूम था।”

बालाकोट एयरस्ट्राइक का कोडनेम था ‘ऑपरेशन बंदर’
14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी। बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने ध्वस्त कर दिए थे और इसकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसका कोडनेम ‘ऑपरेशन बंदर’ रखा था। वायुसेना के इस सैन्य ऑपरेशन के लिए 12 मिराज लड़ाकू विमानों को भेजा था। गोपनीयता बनाए रखने और योजना की जानकारी सार्वजनिक न हो यह सुनिश्चित करने के लिए बालाकोट ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन बंदर’ कोडनेम दिया गया था।’

यही कोडनेम क्यों रखा गया? इसके पीछे की किसी खास वजह का खुलासा न करते हुए सूत्रों ने कहा था कि बंदरों का भारत में युद्ध में हमेशा से एक विशेष स्थान रहा है। भगवान राम के सेनानायक प्रभु हनुमान चुपके से लंका में घुस जाते हैं और शक्तिशाली रावण का पूरा साम्राज्य उजाड़ देते हैं।

12 मिराज विमानों ने दागीं मिसाइलें: 26 फरवरी को 12 मिराज विमानों ने बालाकोट शहर में मौजूद जैश के आतंकी ठिकानों पर मिसाइल बरसाने के लिए उड़ानें भरी थीं। बालाकोट पाक के खैबर पख्तूनवा प्रांत में आता है।

Bharat Bandh: देश में वस्‍तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) को आसान बनाने, पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) की बढ़ी कीमतों के खिलाफ आज देशभर के व्‍यापारी भारत बंद (Bharat Bandh) करेंगे. कंफेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की ओर से बुलाए गए इस भारत बंद को अब ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA) का भी समर्थन मिल गया है. साथ ही कुछ अन्‍य संगठनों ने भी व्‍यापारियों के इस भारत बंद का समर्थन किया है.

ऑल इंडिया ट्रांसपोटर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA) ने कैट का समर्थन कर आज ही चक्का जाम का ऐलान किया है. लिहाजा, आज सभी व्यावसायिक बाजार बंद रहेंगे. दावा किया जा रहा है कि इसमें 8 करोड़ छोटे कारोबारी, करीब 1 करोड़ ट्रांसपोर्टर, लघु उद्योग और महिला उद्यमी शामिल होंगी.

जानिये 10 प्रमुख बातें-
फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल (FAIM) ने गुरुवार को कहा कि वह कैट के भारत बंद का समर्थन नहीं कर रहा है. फैम का कहना है कि व्‍यापार मंडल दुकान बंद या भारत बंद जैसी विचारधारा से दूर रहता है. हालांकि, फैम ये मानता है कि जीएसटी में सुधार की जरूरत है, लेकिन इसके लिए बातचीत का रास्‍ता अपनाया जाना चाहिए. उसका कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में अर्थव्यवस्था नाजुक दौर में है. ऐसे में जिम्मेदार नागरिक के नाते व्यापारियों को फिलहाल आंदोलन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. फैम ने बताया कि उसने 22 फरवरी 2021 को 200 जिलाधिकारियों के जरिये पीएम नरेंद्र मोदी को जीएसटी में सुधार का आग्रह किया है.
कैट ने बताया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जीएसटी परिषद से जीएसटी के कठोर प्रावधानों को खत्‍म करने की मांग को लेकर आज देशभर में 1500 जगहों पर धरना दिया जाएगा.
देश भर के सभी बाजार बंद रहेंगे और सभी राज्यों के अलग-अलग शहरों में धरना प्रदर्शन होगा. सभी राज्य स्तरीय-परिवहन संघों ने भारत सरकार की ओर से पेश किए गए नए ई-वे बिल कानूनों के विरोध में कैट का समर्थन किया है.
ट्रांसपोर्ट कार्यालयों को इस दौरान पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की गई है. किसी भी प्रकार की माल की बुकिंग, डिलिवरी, लदाई/उतराई बंद रहेगी. सभी परिवहन कंपनियों को विरोध के लिए सुबह 6 से शाम 8 बजे के बीच अपने वाहन पार्क करने को कहा गया है.
ट्रांसपोर्ट सेक्टर के अलावा बड़ी संख्या में व्यापारिक संगठनों ने भी व्यापार बंद का समर्थन किया है. इसमें ऑल इंडिया एफएमसीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स फेडरेशन, फेडेरेशन ऑफ एल्‍युमिनियम यूटेंसिल्‍स मैन्यूफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन, नॉर्थ इंडिया स्पाईसिस ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया वूमेंन एंटेरप्रैन्‍योर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया कंप्‍यूटर डीलर एसोसिएशन, ऑल इंडिया कॉस्मेटिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन शामिल हैं.

भारत बंद को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी समर्थन दिया है. किसान बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी किसानों से अपील की है कि वह ट्रांसपोर्टर्स और ट्रेड यूनियन की तरफ से किए जा रहे भारत बंद में शामिल हों.
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन और टैक्स एडवोकेट्स के ऑफिस भी बंद रहेंगे. हॉकरों के राष्ट्रीय संगठन हॉकर्स संयुक्त कार्रवाई समिति ने भी बंद का समर्थन किया है.
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है. कैट का दावा है कि भारत व्यापार बंद में 40,000 से अधिक व्यापारिक संगठनों के आठ करोड़ व्यापारी शामिल होंगे. वहीं कुछ अन्य व्यापारी संगठनों ने कहा कि वे बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं.
अन्य व्यापारी संगठनों मसलन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा कि वे बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं. कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सभी राज्यों के 1,500 बड़े और छोटे संगठन जीएसटी संशोधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं मसलन दवा की दुकानों, दूध और सब्जी की दुकानों को बंद से बाहर रखा गया है.
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव वीके बंसल ने कहा कि कुछ मांगों के समर्थन में हम दुकानें बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. हालांकि, हमारा मानना है कि पिछले 43 माह के दौरान जीएसटी अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है.

चंडीगढ़ृ । भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत और संयुक्त मोर्चा के बयानों के बीच एक बार फिर आगरा की महापंचायत में विरेधाभास दिखाई दिया जहां राकेश टिकैत ने यहां एक बार फिर से संसद कूच का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि कानून वापस नहीं हुए तो अबकी बार हल क्रांति होगी और किसान संसद में जाकर ट्रैक्टर चलाएंगे। दूसरी तरफ संयुक्त मोर्चा ने टिकैत के इस बयान से किनारा कर लिया। कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त मोर्चा की 7 सदस्यों वाली कोर कमेटी और 2 निमंत्रित सदस्यों की बैठक हुई। इसमें भी टिकैत के बयान को लेकर चर्चा हुई। इस पर कुछ सदस्य नाराज दिखे। बैठक के बाद मोर्चे ने कहा कि यह राकेश टिकैत का निजी बयान है। संसद कूच का मोर्चा का कोई कार्यक्रम नहीं है। बैठक में 28 को होने वाली मोर्चे की बैठक के लिए तैयारी की गई। बता दें कि टिकैत ने कहा था कि वो संसद में जाकर ट्रैक्टर चलाएंगे, अगर उन्हें जेल भी ले जाएंगे तो वहां जो पार्क हैं, उनमें गेहूं-मक्के की बिजाई करेंगे।
टिकैत ने इसके साथ ये भी का था कि मुझे पता है कि इसके बाद मुझे 12-13 साल तिहाड़ जेल में रहना पड़ेगा, लेकिन किसान तो आजाद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि तारीख मैं नहीं बताऊंगा, तारीख संयुक्त मोर्चा तय करेगा। टिकैत के इस बयान पर अब संयुक्त मोर्चा ने किनारा करते हुए कहा कि यह टिकैत का निजी बयान है। किसानों ने राष्ट्रपति को पत्र लिख जेल में बंद किसानों के खिलाफ दर्ज मामले खारिज करने और उन्हें बिना शर्त तुरंत रिहा करने की मांग की है। इसके साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर किसान मोर्चे की पुलिस घेराबंदी के नाम पर, आम आदमी की बंद सड़कों को खोले जाने की भी मांग की। किसानों और उनके संघर्ष के समर्थक व्यक्तियों व संगठनों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामले भी खारिज किए जाएं।

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