देश

देश (2405)

पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ लंबे समय से जारी गतिरोध के बीत भारत ने कम ऊंचाई पर अधिक देर तक उड़ान भरने वाले अमेरिकी सशस्त्र प्रीडेटर-बी ड्रोन खरीदने में रुचि दिखाई है। यह ड्रोन ना सिर्फ खुफिया जानकारी इक्ट्ठा करता है, बल्कि लक्ष्य का पता लगाकर उसे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से नष्ट कर देता है।
फिलहाल भारत पूर्वी लद्दाख में इज़राइली हेरोन ड्रोन का इस्तेमामल करता है, जो कि निहत्था है। वहीं, चीन की बात करें तो उसके पास विंग लूंग II सशस्त्र ड्रोन है। इसके अलावा वह पाकिस्तान को भी सप्लाई करने की तैयारी में है। पाकिस्तान वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए 48 सशस्त्र ड्रोन का संयुक्त रूप से उत्पादन करने के लिए चीन के साथ करार कर रहा है। विंग लूंग II के सैन्य संस्करण जीजे -2 को हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस बताया गया है। वर्तमान में सीमित सफलता के साथ लीबिया के सिविल वॉर में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि अमेरिका ने चार अरब डॉलर से अधिक के 30 सी गार्डियन बेचने की पेशकश की है। राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों को लगता है कि सर्विलांस और टारगेट पर हमला के लिए एक ही ड्रोन हो न कि अलग-अलग। भले ही भारतीय नौसेना अमेरिका के साथ बातचीत में मुख्य भूमिका निभा रही है, लेकिन भारतीय सेना प्रिडेटर-बी के पक्ष में है।
अमेरिका भारत की उच्च तकनीकी हथियारों की आपूर्ति के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही साथ भारत के द्वारा एस-400 मिसाइल सिस्टम रूस से खरीदने से नाखुश भी है। उसे डर है कि सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भारत मास्को तक पहुंचा सकता है। चीन ने पहले ही रूस से एस-400 प्रणाली का अधिग्रहण कर लिया है और वर्तमान में इसे अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया है।
भले ही नोएडा स्थित कुछ भारतीय प्राइवेट कंपनी medium-altitude long-endurance (MALE) ड्रोन विकसित करने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन वे सशस्त्र ड्रोन हासिल करने की क्षमता से अभी दूर हैं। लद्दाख में किए गए कई प्रयोग तिब्बत के पठार पर उच्च-वेग से चलने वाली हवाओं में खो जाने वाले ड्रोन के साथ पूरी तरह से सफल नहीं हुए हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की योजना है कि इस साल के अंत तक Male Rustom ड्रोन प्रोटोटाइप का उत्पादन किया जाएगा।
 

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो के पास हिंसक झड़प के दो महीने बाद भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर संघर्ष की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने कहा कि  शीर्ष सैन्य कमांडरों ने रविवार को  संघर्ष के डी-एस्केलेशन पर काम करने पर सहमति जताई है जिसके बाद गतिरोध का कोई संकेत नहीं दिखा।

नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर घटना से परिचित एक शख्स ने बताया कि  न तो जमीन पर कुछ भी बदला है और न ही जल्द ही ऐसा कुछ होने की उम्मीद है। क्षेत्र में संघर्ष के  डी-एस्केलेशन पर सैनिकों का कोई विघटन नहीं हुआ है।

दो महीनों में दोनों सेनाओं के बीच शत्रुता बढ़ी, दोनों पक्षों द्वारा आक्रामक मुद्रा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे अन्य क्षेत्रों में फैल रही है और बिना किसी सफलता और तनाव के कई दौर की सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ता हुई।

दोनों देशों की सेनाओं के बीच लद्दाख में एलएसी पर करीब दो महीने से टकराव के हालात बने हुए हैं। छह जून को हालांकि दोनों सेनाओं में पीछे हटने पर सहमति बन गई थी लेकिन चीन उसका क्रियान्वयन नहीं कर रहा है। इसके चलते 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़प भी हो चुकी है। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बात हुई है तथा 22 जून को सैन्य कमांडरों ने भी मैराथन बैठक की।

15 जून की घटना के बाद से भारत ने 3,488 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने विशेष युद्ध बलों को तैनात किया है, जो कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पश्चिमी, मध्य या पूर्वी सेक्टरों में किसी भी प्रकार के हमले से जूझ सकते हैं। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारतीय सेना को पीएलए द्वारा सीमा पार से किसी भी हरकत का आक्रामकता से एलएसी पर जवाब देने का निर्देश दिया है।

लखीमपुर । उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क में 'लुप्तप्राय प्रजातियों' में शामिल दुर्लभ ग्राउन्ड ऑर्किड पौधा पाया गया है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम युलोफिया ओबटुसा है। स्थानीय स्तर पर ग्राउंड ऑर्किड के रूप में लोकप्रिय इस किस्म को कंवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इनडेंजर्ड स्पीसेज(सीआईटीईएस) के तहत 'लुप्तप्राय प्रजाति' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस खोज की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दुधवा या राज्य के किसी अन्य वन क्षेत्र के इतिहास में कभी भी इस ऑर्किड को नहीं देखा गया है। करीब 118 साल पहले इंग्लैंड के केव हर्बेरियम ने ऑर्किड का दस्तावेजीकरण किया था। यह प्रजाति पीलीभीत में साल 1902 में आखिरी बार देखी गई थी।
दुधवा क्षेत्र के निदेशक संजय पाठक ने कहा 30 जून को मुदित गुप्ता (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और फजलुर-रहमान (कट्रानियाघाट फाउंडेशन) के साथ, मैं दुधवा रिजर्व में किशनपुर और सोनारीपुर रेंज में घास का एक सर्वेक्षण कर रहा था, तभी हमने पौधों का एक समूह देखा, जो नाजुक फूलों के गुच्छों के साथ लंबे घास जैसी टहनियों के साथ उगा था।
हालांकि पहले ये कभी रिपोर्ट नहीं किए गए थे, तो जिज्ञासावश हमने उन्हें क्लिक किया। हमने बाद में पौधे की पहचान करने के लिए पर्यावरणविदों और वनस्पति विज्ञानियों से संपर्क किया। हमने मोहम्मद शरीफ सौरभ से संपर्क किया, जो बांग्लादेश के ढाका में नोर्थ साउथ विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान और प्रबंधन विभाग में काम करते हैं। उन्होंने अपने देश में इससे थोड़े अलग आर्किड किस्म का दस्तावेज तैयार किया था।
उन्होंने कहा ऑर्किड और इसके विवरणों की पहचान करने में तीन दिन लग गए और शनिवार को ऑर्किड को दुर्लभ प्रजाति 'युलोफिया ओबटुसा' के रूप में दर्ज किया गया। पाठक ने कहा इस ऑर्किड प्रजाति के बारे में कोई प्रमाणित रिकॉर्ड भारत में उपलब्ध नहीं थे, हालांकि कुछ रिपोर्ट में उत्तर भारत और नेपाल में इसकी उपस्थिति का उल्लेख किया गया है। संयोग से फजलुर-रहमान ने ही जुलाई 2012 में दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ लाल कुकरी सांप को फिर से खोजा था।

नई दिल्ली । पूर्वी अफ्रीकी देश सोमालिया से टिड्डियों का दलएक बार फिर भारत पर धावा बोल सकता है। कृषि मंत्रालय ने एक बयान में इस बात की जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा है कि उसने टिड्डी दल के खतरे को देखते हुए इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले छह राज्यों के अधिकारियों को चेतावनी भेजी है और राज्यों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है।टिड्डी सर्कल कार्यालयों द्वारा राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में टिड्डियों से निपटने के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। तीन जुलाई तक कीरिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक फसलों को मामूली नुकसान पहुंचा है।
टिड्डियों का हमला सबसे खतरनाक
संयुक्त राष्ट्र केखाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने कहा है कि अफ्रीका से होने वाला टिड्डियों का हमला पिछले 70 सालों में सबसे खतरनाक है। इससे कृषि उत्पादन करने वाले देशों में खतरे की आशंका बढ़ गई है।वर्तमान समय में, अपरिपक्व गुलाबी टिड्डे और व्यस्क पीले टिड्डे राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, सिकार, जयपुर और अलवर में सक्रिय हैं। इसके अलावा, इनकी सक्रियता मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में भी देखी गई है। एक अंतर-मंत्रालयीय अधिकार प्राप्त समूह ने देश में खरीफ या गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों को टिड्डियों के हमले से बचाने के लिए संसाधनों का प्रबंधन किया है। इसने 50 किलोग्राम वजनी पांच अडवांस्ड ड्रोन्स को पांच प्रौद्योगिकी कंपनियों से लिया है। इसके अलावा, पवन हंस लिमिटेड से हेलिकॉप्टरों को किराए पर लिया गया है।
टिड्डियों से निपटने कंट्रोल अभियान
तीन जुलाई तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 1,32,777 हेक्टेयर भूमि पर टिड्डियों से निपटने के लिए कंट्रोल अभियान चलाया गया है। इसके अलावा, राज्य सरकारों ने भी 1,13,003 भूमि पर कंट्रोल अभियान को अंजाम दिया है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व एंटोमोलॉजिस्ट प्रमोद वाजपेयी ने कहा, ड्रोन्स का प्रयोग नया है और जाहिर तौर पर ये असरदार भी है। भारत को पूरे गर्मियों के मौसम में टिड्डियों के खिलाफ प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशक मैलाथियोन के पर्याप्त उत्पादन और आपूर्ति को बनाए रखना चाहिए। अब तक जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर और नागौर में 12 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं। ड्रोन लंबे पेड़ों और दुर्गम क्षेत्रों को कवर करने के लिए प्रभावी हैं। एक ड्रोन एक घंटे में 16-17 हेक्टेयर क्षेत्र में कीटनाशकों का छिड़काव कर सकता है।

नई दिल्ली। गलवान झील में गतिरोध वाली जगह से पांच किमी की दूरी पर सैनिकों को इकट्ठा करने वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को अब अपने सैनिकों को वापस बुलाना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए करना होगा, क्योंकि झील के जल स्तर में इजाफा हुआ है। झील के किनारे में बाढ़ के हालात बन गए हैं। गलवान को जानने वाले शख्स ने यह जानकारी हिन्दुस्तान टाइम्स को दी है।एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने कहा कि अक्साई चिन क्षेत्र से आने वाली बर्फीले-ठंड के बाद गलवान घाटी बर्फ से ढंक गई थी जो तापमान में वृद्धि के कारण पिघल रही है और  गलवान नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ गया है। तेज गति से बर्फ पिघलने से नदी के तट की स्थिति खतरनाक हो गई है। उपग्रह और ड्रोन ने नदी के तट पर चीनी टेंटों के बढ़ने का संकेत दिया था।भारत और चीन की सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को बीच पांच मई से शुरू गतिरोध को कम करने के लिए तीन राउंड बातचीत हो चुकी है। इस तरह की कवायद शुरू करने पर व्यापक समझौते भी हुए। लेकिन पहले समझौते के दस दिन बाद यानी 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। लेकिन सैन्य कमांडर ने कहा कि चीन के लिए गलवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो में वर्तमान पोजिशन को बरकरार रखना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि अगर चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति को बहाल नहीं करता है तो गतिरोध सर्दियों के महीनों में भी जारी रह सकता है।

पीएम मोदी के लद्दाख दौरे ने दिए स्पष्ट संदेश
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा करके बहुत स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत पूर्वी लद्दाख में पीछे हटने वाला नहीं है। वह दृढ़ता से हालात से निपटेगा और उसके सशस्त्र बल देश के भूभागों की रक्षा के लिए ठोस दृष्टिकोण अपना रहे हैं। यह भी कहा कि चीन लद्दाख, दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक सैन्य मौजदूगी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है और समय आ गया है कि भारत हालात का फायदा उठाए।

पुलवामा | जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के गंगू इलाके में रविवार को हुए आईईडी ब्लास्ट में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया है। घायल जवान की पहचान जीडी परदीप दास के रूप में हुई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि आतंकवादियों द्वारा IED विस्फोट किया है। यह विस्फोट श्रीनगर-पुलवामा मार्ग पर तब हुआ जब इलाके में सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी तैनात की गई थी। इस ब्लास्ट के बाद पूरे इलाके को बंद कर दिया गया है और तलाशी अभियान जारी है। पिछले चार दिनों में सीआरपीएफ पर यह दूसरा हमला है। बुधवार को सोपोर में एक सीआरपीएफ जवान और एक नागरिक की मौत हो गई थी। इस मामले में अभी जानकारी की प्रतीक्षा है।

नई दिल्ली| भारत में कोरोना के संक्रमण में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 24,850 नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं। साथ ही 613 मरीजों की इस महामारी के कारण जान चली गई है। भारत में कुल मामलों की बात करें तो आंकड़ा 6,73,165 तक पहुंच गया है। इनमें से 2,44,814 एक्टिव केस हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 4,09,083 मरीज या तो स्वस्थ हो चुके हैं या फिर उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।

इसके अलावा आईसीएमआर ने बयान जारी कर कहा है कि चार जुलाई तक देश में कुल 97,89,066 सैंपल की कोरोना टेस्टिंग हुई है। इनमें से 2,48,934 सैंपल की कल जांच की गई है।

कोरोना संक्रमितों को कम संख्या में होना पड़ रहा है अस्पताल में भर्ती: केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कोरोना संक्रमित अधिक से अधिक मरीजों का घर पर ठीक तरह उपचार हो जाने से कम संख्या में लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है। केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा बढ़ने पर कहा, 'दिल्ली के दो करोड़ लोगों की मेहनत रंग ला रही है। दिल्ली का रिकवरी रेट 70 प्रतिशत से ऊपर जाने पर सभी कोरोना वॉरियर्स को बधाई। कोरोना को हराने के लिए अभी हम सबको और मेहनत करनी है।'

सर्वाधिक मौत के मामले में फ्रांस को पीछे छोड़ कर दुनिया पांचवां देश बना मेक्सिको
मेक्सिको कोरोना वायरस (कोविड-19) से होने वाली सर्वाधिक मौत के मामले में फ्रांस को पीछे छोड़ कर दुनिया पांचवां देश बन गया है। यहां पिछले 24 घंटों के दौरान इस संक्रमण के 7000 नये मामले दर्ज किये गये तथा पांच सौ से अधिक लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के महामारी केंद्र के निदेश जोस लुइस अलोमिया ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, 'देश में कोरोना के कारण आज तक 30366 मरीजों की मौत हुई है।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का आष्टांगिक मार्ग कई समाज और राष्ट्र के कल्याण की दिशा में रास्ता दिखाता है। यह करुणा और दया के महत्व पर प्रकाश डालता है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्म चक्र कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आज आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर सभी को अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं। इसे गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आज का दिन हमारे गुरुओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने हमें ज्ञान दिया। उस भावना में, हम भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के उपदेश ‘विचार और कार्य’ दोनों में सरलता की सीख देते हैं ।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का आष्टांगिक मार्ग कई समाज और राष्ट्र के कल्याण की दिशा में रास्ता दिखाता है। यह करुणा और दया के महत्व पर प्रकाश डालता है। बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार सुबह 9 बजे राष्ट्रपति भवन में धर्म चक्र दिवस का उद्घाटन किया। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार इस संक्रमण से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 3,94,226 है और एक मरीज देश छोड़कर चला गया है।

नयी दिल्ली। देश में शनिवार को एक दिन में कोविड-19 के सबसे अधिक 22,771 मामले आने के साथ ही संक्रमित लोगों की कुल संख्या 6,48,315 हो गई है। इसके साथ ही 442 और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 18,655 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार इस संक्रमण से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 3,94,226 है और एक मरीज देश छोड़कर चला गया है। देश में अब भी 2,35,433 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी तक करीब 60.80 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।’’ संक्रमित लोगों की कुल संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। पिछले 24 घंटों में जिन 442 लोगों की मौत हुई है, उनमें से 198 लोगों की महाराष्ट्र में मौत हुई है। इसके बाद तमिलनाडु में 64, दिल्ली में 59, कर्नाटक में 21, गुजरात और पश्चिम बंगाल में 18-18, उत्तर प्रदेश में 14, राजस्थान में 10, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में आठ-आठ, पंजाब में पांच, हरियाणा, मध्य प्रदेश और जम्मू कश्मीर में चार-चार, बिहार में तीन, असम और ओडिशा में दो-दो लोगों की मौत हुई है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसलों से देश को चौंकाते रहे हैं। चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच कल प्रधानमंत्री अचानक जवानों का हौसला बढ़ाने लेह के निमू पहुंच गए। पीएम मोदी से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लद्दाख दौरे की खबर आ रही थी, लेकिन अचानक उनके दौरे को रद्द कर दिया गया। पीएम के इस दौरे के पीछे सारी रणनीति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बनाई।
पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल विपिन रावत और थलसेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे के साथ अचानक लेह पहुंच गए। चीन की आक्रामक पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के खिलाफ सीमा पर भारत की तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही पीएम मोदी ने भारत के जोशीले सैनिकों में जोश भर दिया।
पीएम मोदी के लेह जाने के फैसले को तब तक सार्वजनिक नहीं किया गया जब तक पीएम मोदी हवाई अड्डे पर नहीं उतर गए। पीएम मोदी की इस यात्रा की सारी तैयारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और सेना प्रमुख मुकुंद मुकुंद नरवणे ने अंजाम दिया। आइसोलेशन से दो सप्ताह के बाद बाहर आए एनएसए अजित डोभाल इस दौरान दिल्ली में ही थे।
विशेषज्ञों ने कहा कि लद्दाख क्षेत्र में पीएम मोदी की मौजूदगी ने चीन को संकेत दिया है कि भारत का मतलब व्यापार है और वह अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेगा। साथ ही साथ देश को लोगों को भी भरोसा दिलाया है।
पीएम मोदी के लद्दाख सेक्टर जाने का फैसला गुरुवार शाम को फाइनल किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने इसके लिए सीडीएस बिपिन रावत से चर्चा की थी। पीएम मोदी, अजित डोभाल और तब सेना अध्यक्ष रहे बिपिन रावत ने एक साथ 2017 में डोकलाम तनातनी के दौरान भी चीन का आक्रामकता का सामना किया था और चीन को पीछे हटने पर मजबूर किया था।
पीएम मोदी को लेह में नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी और 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने निमू आर्मी हेडक्वॉर्टर में हालात की पूरी जानकारी दी। पीएम ने निमू में जवानों के साथ मुलाकात की। यह लेह का फॉर्वर्ड इलाका है। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर पीएम मोदी का इस तरह आकर जवानों से मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 

Page 1 of 172

फेसबुक