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जम्मू-कश्मीर में हालात में सुधार होने के साथ ही यहां तैनात अतिरिक्त सुरक्षाबलों की वापसी होने लगी है। जम्मू-कश्मीर से पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद चरणबद्ध तरीके से अब अतिरिक्त सुरक्षाबलों की वापसी हो रही है। एएनआई के मुताबिक सीआरपीएफ की दस कंपनियों को जम्मू-कश्मीर से असम के लिए रवाना किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश से कुल 20 कंपनियां असम के लिए रवाना की जाएंगी। जवानों की रवानगी लिए एक स्पेशल ट्रेन भी चलाई गई है। इससे पहले सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के 5000 से ज्यादा जवान घाटी से रवाना हो चुके हैं। एक दिसंबर को 4 से 5 अतिरिक्त कंपनियां घाटी से रवाना की गई थीं। बता दें कि जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने की घोषणा से पहले कश्मीर में 50 हजार से अधिक सीएपीएफ के जवानों को भेजा गया था। इन जवानों की भूमिका घाटी में कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने में महत्वपूर्ण रही।

अयोध्या पर 9 नवंबर वाले फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो या नहीं इसपर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच गुरुवार को फैसला करेगी। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ गुरुवार को आपस में विचार करेगी।  गौरतलब है कि अयोध्या मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से आठ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में कहा गया कि नौ नवंबर के पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले में कई गलतियां हैं और कई विरोधाभास हैं लिहाजा उस फैसले पर पुनर्विचार करने की दरकार है। पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की मियाद खत्म होने के आखिरी दिन यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजीव धवन के नेतृत्व में दाखिल की गई।
ये याचिकाएं मौलाना मुफ्ती हसबुल्लाह, मोहम्मद उमर, मौलाना महफूज उर रहमान, मिसबाउद्दीन, रिजवान, हाजी महबूब, असद और अयूब की ओर से दायर की गई हैं। पुनर्विचार याचिकाओं में कहा गया कि नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह कानून के विपरीत है। इसमें विरोधाभास है और पूर्ण न्याय का उल्लंघन है।
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने मीडिया को बताया था कि आठ लोगों की ओर से पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समर्थन दे रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर पुनर्विचार याचिकाओं पर ओपन कोर्ट में सुनवाई हुई तो उनकी ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन पैरवी करेंगे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अनुच्छेद 370 के बाद अब नागरिकता संशोधन विधेयक पर सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के विपरीत है कि नहीं यह अलग बात है, लेकिन इसमें भारत की वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा और सभ्यता है।

 

सिंधिया ने इंदौर में कहा कि विभाजन देशों के आधार पर तो पहले भी हुआ था, लेकिन धर्म के आधार पर यह पहली बार है। मैं तो मानता हूं कि यह संविधान के विपरीत है, लेकिन भारतीय संस्कृति के आधार पर है। अब राज्य और धर्म के आधार हो रहा है। 

उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि जो भारत की विचारधारा और सभ्यता है कि सभी को साथ में लेकर चलना। इस अध्यादेश में भी धर्म और राज्य के आधार की बात है। बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में लिखा है कि किसी को जात-पात, धर्म की दृष्टिकोण से नहीं देखा जाएगा। केवल भारत के नागरिक के रूप में देखा जाएगा।

पहले भी पार्टी लाइन को छोड़ चुके हैं सिंधिया
सिंधिया पहले भी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, कांग्रेस शुरू से अब तक सरकार के इस कदम का विरोध कर रही है। 

एमपी में कांग्रेस सरकार की ऋणमाफी पर जताई थी नाराजगी
अक्तूबर में भिंड में पार्टी के एक कार्यक्रम में भी सिंधिया ने मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि- चुनाव से पहले कांग्रेस ने दो लाख कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन किसानों के 50 हजार तक के ही कर्जमाफ हुए। 

ट्विटर स्टेटस बदलकर जनसेवक लिखा
सिंधिया ने कुछ दिनों पहले ट्विटर अकाउंट से अपना कांग्रेसी परिचय हटा दिया था। इसे लेकर भी पार्टी आलाकमान से उनकी नाराजगी की खबरों ने सुर्खियां बटोरी थी। ट्विटर के नए बायो में सिंधिया ने खुद को जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया था। 


खास बातें

    देशी रडार इमेजिंग सेटेलाइट आरआईसैट के अलावा नौ विदेशी उपग्रह भी साथ लेकर गया रॉकेट
    श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र के लांचिंग पैड से दोपहर 3.25 बजे पीएसएलवी सी-48 हुआ लॉन्च
    पीएसएलवी के जरिये इस बार एक साथ 10 सैटेलाइट आसमान में रवाना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज 3.25 बजे अंतरिक्ष में फिर एक नया इतिहास रच दिया। इसरो ने पीएसएलवी सी-48 रॉकेट से भेजे गए सभी 10 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है।  यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लांचिंग पैड से लॉन्च किया गया। इसरो के मुताबिक 21 मिनट में इसे कक्षा में स्थापित करना था जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर दिया गया है।
अपनी इस उड़ान के साथ यह रॉकेट अंतरिक्ष अभियानों का अपना ‘अर्द्धशतक’ पूरा कर लिया है। साथ ही यह श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाने वाला भी 75वां मिशन है। इसरो ने पीएसएलवी सी-48 के जरिये एक साथ 10 सैटेलाइट को आसमान में रवाना किया। इनमें 9 विदेशी उपग्रह शामिल हैं। इसमें देश की दूसरी खुफिया आंख कही जा रही रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट आरआईसैट-2बीआर1 भी शामिल है। इसरो के मुताबिक, इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में 576 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में 37 डिग्री झुकाव पर स्थापित कर दिया गया है। इसी के साथ देश की सीमाओं पर घुसपैठ की कोशिश लगभग नामुमकिन हो जाएगी।
सेंसर देंगे सीमापार आतंकियों के जमावड़े की भी सूचना
इसमें लगे खास सेंसरों के चलते सीमापार आतंकियों के जमावड़े की भी सूचना पहले ही मिल जाएगी। साथ ही सीमापार की गतिविधियों का विश्लेषण भी आसान हो जाएगा। 22 मई को लांच किया गया आरआईसैट-2बी पहले से ही देश की खुफिया आंख के तौर पर निगरानी का काम कर रहा है। इसके अलावा पीएसएलवी के साथ जाने वाली 9 अन्य सैटेलाइट विदेशी हैं, जिनमें अमेरिका की 6, इस्राइल की 1, इटली की 1 और जापान की 1 सैटेलाइट है।

ये सभी इंटरनेशनल कस्टमर सेटेलाइट एक नए कमर्शियल सिस्टम न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के तहत लांच किया जा रहा है। इन सभी सेटेलाइट को पीएसएलवी के उड़ान भरने के 21 मिनट के अंदर बल्बनुमा पेलोड फायरिंग तकनीक के जरिये एक के बाद एक अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इस उड़ान के लिए मंगलवार को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया था। इस ऐतिहासिक उड़ान का दीदार करने के लिए पांच हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था भी की गई थी।
आरआईसैट की होगी यह खासियत

    05 साल तक सीमाओं की निगरानी करेगी यह सैटेलाइट
    628 किलोग्राम है इस सैटेलाइट का वजन
    100 किलोमीटर इलाके की तस्वीर एक साथ ले पाएगा
    यह सैटेलाइट दिन और रात में एक जैसी निगरानी करेगा
    माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी पर काम करेगा यह सैटेलाइट
    एक्स बैंड एसएआर कैपेबिल्टी के चलते हर मौसम में साफ तस्वीर देगा
    स्वदेश में बने खास डिफेंस इंटेलिजेंस सेंसर से है युक्त

लांच से पहले तिरुपति दर्शन को पहुंचे इसरो चीफ
पीएसएलवी सी-48 के बुधवार को उड़ान भरने से पहले इसरो चीफ डा. के सिवन मंगलवार को यहां तिरुपति बालाजी मंदिर गए थे। सिवन ने भगवान के दर्शन करने के साथ ही पूजा भी की थी। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि पीएसएलवी सी-48 की लांचिंग इसरो के लिए ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि यह इस रॉकेट की 50वीं और श्रीहरिकोटा लांचिंग स्टेशन से किसी रॉकेट की 75वीं उड़ान रही।  
इस्राइली स्कूली छात्रों की सैटेलाइट भी भेजेगा इसरो
इस अभियान में इसरो पीएसएलवी सी-48 के जरिए इस्राइल के तीन छात्रों की तरफ से डिजाइन की गई ‘डूचीफैट-3’ सैटेलाइट को भी लांच किया। दक्षिण इस्राइल के अशांत गाजा पट्टी क्षेत्र से महज एक किमी दूर स्थित शा हनेगेव हाईस्कूल के इन तीनों छात्रों एलोन अब्रामोविच, मीतेव असुलिन और शमुएल अविव लेवी की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच है। इन्होंने इस सैटेलाइट को हर्जलिया साइंस सेंटर और अपने स्कूल के साथ मिलकर बनाया है। छात्रों के मुताबिक, इस रिमोट सेन्सिंग फोटो सैटेलाइट से देश भर के बच्चों को पृथ्वी को देखने और विश्लेषण करने की सुविधा मिलेगा। साथ ही किसानों को भी इसका लाभ होगा।
छात्रों का प्रोजेक्ट, कम बजट में बड़े काम
उपग्रह की योजना, अंतरिक्ष में उसकी कार्यप्रणाली और जमीन से सॉफ्टवेयरों के जरिए उससे संपर्क आदि को छात्रों ने ही तैयार किया। यह केवल 2.3 किलो का है। इसे तैयार करने में करीब ढाई वर्ष लगे। कुल 60 विद्यार्थियों ने मिलकर इसे तैयार किया है। सभी निर्णय इन्होंने ही मिलकर लिए।  उनसे संबंधित वरिष्ठ लोग केवल सुझावदाता की भूमिका में रहे। छात्रों ने कम बजट के बावजूद उपग्रह से डाटा ट्रांसफर सुनिश्चित करने के लिए उपग्रह द्वारा ली जाने वाली तस्वीरों को कंप्रेस करके पृथ्वी पर भेजने की तकनीक का उपयोग किया है।
भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में हासिल सफलताओं से प्रभावित हैं छात्र
प्रोजेक्ट में शामिल एलोन ने बताया कि उपग्रह को तैयार करते हुए कई बाधाएं अचानक सामने आईं। इसने उन्हें कई चीजें सीखने का अवसर दिया। भारत की अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हासिल सफलताओं से प्रभावित इन विद्यार्थियों ने उम्मीद जताई कि उन्हें इसरो के श्रीहरिकोटा केंद्र पर भी जाने का अवसर मिलेगा। इसी समूह में इंग्लैंड से भी एक छात्र शामिल होगा।
 

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना की ताकत में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है. भारतीय सेना ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तहत 10 हजार SiG 716 असॉल्ट राइफल के पहले बैच को शामिल कर लिया है. इन अत्याधुनिक राइफलों का प्रयोग जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी अभियान में किया जाएगा. मालूम हो कि भारत ने अपने अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को अत्‍याधुनिक असलहे से लैस करने के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रियाओं के तहत 72,400 सिग सउर राइफलों का ऑर्डर दिया है.   

वर्तमान में इन राइफलों को जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के उत्तरी कमांड को सौंप दिया गया है. सेना की यह कमांड जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों और सीमा पर पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देती है. इस रायफल के शामिल होने से भारतीय सेना की मारक क्षमता में वृद्धि होगी.

क्योंकि, यह रायफल नजदीक से मार करने (क्लोज कॉम्बेट) और दूर से मार करने वाली रायफलों की श्रेणी की सबसे उन्नत तकनीक से लैस है.  बता दें कि भारत ने भारतीय सेना को 72,400 नई असॉल्ट राइफलों से लैस करने के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. इन राइफल्स की आपूर्ति अमेरिकी हथियार निर्माता सिग सउर द्वारा की जा रही है.

इन रायफलों को अमेरिका में बनाया जाएगा और एक साल के भीतर इसे भारतीय सेना को सौंप दिया जाएगा क्योंकि, इन रायफलों के लिए अनुबंध फास्ट-ट्रैक खरीद (एफटीपी) के तहत किया गया है. पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरों को देखते हुए भारतीय सेना को फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत करना पड़ा है.सिग सउर रायफल इनमें से 66 हजार राइफलें भारतीय सेना के लिए हैं. जबकि दो हजार रायफलों को भारतीय नौसेना और चार हजार रायफलों को भारतीय वायु सेना को सौंपा जाएगा.

सिग सउर SIG716 7.62x51 मिमी असॉल्ट राइफलें भारत में निर्मित 5.56x45 मिमी इंसास राइफलों की जगह लेंगी. बता दें कि इंसास रायफलों को लेकर भारतीय सेना पहले ही शिकायत दर्ज करा चुकी है. इसकी फायरिंग क्षमता और मैगजीन के टूटने की बहुत शिकायतें आ रही हैं.सिग सउर के अलावा भारतीय सेना सात लाख से अधिक एके 203 असॉल्ट राइफलों को भी शामिल करने की तैयारी में है. एके 203 भारत और रूस के संयुक्त उद्यम के जरिए देश में ही बनाई जा रही हैं.

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर रेलवे की एक दलील को अनुमति दे दी, जिसमें कोर्ट से मांग की गई थी कि दिल्ली-मथुरा-आगरा लाइन पर एक नया रेलवे लाइन बिछाने के लिए ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में 452 पेड़ों को काटने की अनुमति दी जाए. कोर्ट ने साथ ही क्षतिपूरक वनीकरण के साथ इस फैसले को मंजूरी दी है. इसके अनुसार काटे जाने वालों पेड़ों की जगह उत्तर रेलवे को दूसरी जगह पेड़ लगाने होंगे.

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह उत्तर रेलवे द्वारा जिस स्थान पर पेड़ लगाए जाएंगे, वहां का दौरा करने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति करे और मुआवजे के रूप में उत्तर रेलवे द्वारा लगाए गए पेड़ों का निरीक्षण करे.

ट्रेपेजियम जोन में 40 से अधिक संरक्षित स्मारक

बता दें कि ताज ट्रेपेजियम जोन में 40 से अधिक संरक्षित स्मारक हैं, जिसमें तीन विश्व धरोहर स्थल जैसे ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी शामिल हैं. ताज ट्रेपेजियम जोन 10,400 वर्ग किमी का परिभाषित क्षेत्र है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्मारक को प्रदूषण से बचाने के 30 दिसंबर 1996 को फैसला सुनाया था. एक जनहित याचिका में ताजमहल को बचाने की मांग की गई थी. जिसके जवाब में यह फैसला सुनाया गया और उद्योगों में कोयले/कोक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इस ताज ट्रेपेजियम जोन की वजह से रियल एस्टेट के लोगों को काफी मंदी का सामना करना पड़ा था. जमीन-फ्लैट की कीमतों में भी गिरावट आई थी, जिसके चलते नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था.

गृह मंत्री अमित शाह आज थोड़ी देर में नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश करेंगे। इस बीच लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना के यूटर्न और जदयू में खटपट के बाद हालांकि विपक्ष का हौसला बढ़ा है, मगर इसके बावजूद संख्या बल सरकार के साथ है। 
राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश, 119 हुआ बहुमत का आंकड़ा
राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को प्रस्तुत कर दिया गया है। चार सांसदों की छुट्टी की वजह से बहुमत का आंकड़ा घटकर 119 पहुंच गया है। 
राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा हुआ कम, चार सांसदों की छुट्टी मंजूर
राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित कराने में जुटी सरकार को बड़ी राहत मिली है। राज्यसभा के चार सांसदों की छुट्टी मंजूर हो गई है जिससे बहुमत का आंकड़ा भी कम हो गया है। अब इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।
थोड़ी देर में राज्यसभा में पेश होगा नागरिकता विधेयक, संसद पहुंचे शाह
राज्यसभा में थोड़ी देर में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह संसद पहुंच गए हैं।
राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित
जीएसटी के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई केंद्र द्वारा समय पर नहीं किए जाने के विरोध में टीआरएस सहित विभिन्न दलों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित।
सरकार हमारी शंकाएं दूर करे- संजय राउत
शिवसेना सांसद संजय राउत ने आज फिर कहा कि हमारे मन में कुछ शंकाएं हैं अगर उनका जवाब नहीं मिलता है तो हम देखेंगे क्या करना है। राज्यसभा में हमारी दोनों तरफ ज्यादा जरूरत है। रावत ने पूछा कि क्या बिल को समर्थन नहीं देने वाले देशद्रोही हैं।

संजय राउत ने कहा कि वोटबैंक की राजनीति नहीं होनी चाहिए, यह सही नहीं है। फिर से हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन करने का प्रयास न करें। इसके अलावा श्रीलंका के तमिल हिंदुओं के लिए इस बिल में कुछ भी नहीं है।
पटना में धरने पर बैठे तेजस्वी यादव
नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ पटना में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव धरने पर बैठे हैं। तेजस्वी यादव ने इस बिल को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने सत्ता में बने रहने के लिए इसका समर्थन किया है।
दोपहर एक बजे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक
आज दोपहर एक बजे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई है। जिसमें सरकार कई बड़े फैसले ले सकती है।
संसदीय कार्यमंत्री का दावा- पूर्ण बहुमत से राज्यसभा में पारित होगा विधेयक
भाजपा संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक आज दोपहर 12 बजे राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा और यह पूर्ण बहुमत से पारित होगा।
संसदीय दल की बैठक में बोले पीएम- कुछ दल पाक की भाषा बोल रहे हैं
भाजपा संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकता विधेयक पर कुछ दल पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। इसके जरिए लाखों लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा। संसदीय कार्यमंत्री ने बैठक के बाद बताया कि पीएम मोदी ने इस विधेयक को ऐतिहासिक कहा है। नागरिकता विधेयक स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, इससे धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए लोगों को स्थायी राहत मिलेगी।

पीएम मोदी ने भाजपा सांसदों से आगामी बजट पर समाज के सभी वर्गों से नीतियों पर प्रतिक्रिया लेने और उसे वित्त मंत्री के साथ साझा करने के लिए भी कहा।

गुजरात के गोधरा में साल 2002 में हुए ट्रेन हादसे को लेकर गठित नानावती आयोग रिपोर्ट का दूसरा भाग आज विधानसभा में पेश हुआ। आयोग ने सितंबर 2008 में गोधरा कांड पर अपनी प्राथमिक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी गई है। 
बता दें कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जलाने की घटना के प्रतिक्रियास्वरूप समूचे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। इसकी जांच के लिए तीन मार्च 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जीटी नानावती की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। न्यायमूर्ति केजी शाह आयोग के दूसरे सदस्य थे। 2009 में शाह के निधन के बाद अक्षय मेहता को सदस्य बनाया गया।

शुरू में आयोग को साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी से जुड़े तथ्य और घटनाओं की जांच का काम सौंपा गया था। लेकिन जून 2002 में आयोग को गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा की भी जांच करने के लिए कहा गया। पहले पेश की गई रिपोर्ट में आयोग ने साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या-छह में आग लगाने को सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया था। 

ठाणे,मुंबई पुलिस ने कल्याण में हुई एक हत्या का पर्दाफाश किया है. ठाणे जिले के कल्याण इलाके में एक लड़की की लाश एक सूटकेस में बंद मिली थी, जिसमें लड़की का सिर ही गायब था. हत्या के बाद सूटकेस में लाश को बंद कर आरोपी ऑटो रिक्शा में डालकर फरार हो गया था. लड़की का हत्यारा कोई और नहीं बल्कि उसका सगा बाप है, जिसे लड़की का प्यार पंसद नहीं आया तो उसने लड़की को मौत के घाट उतार दिया.
पुलिस के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम)  प्रवीण पवार के मुताबिक लड़की के पिता ने ही लड़की की हत्या की है. पुलिस को शक है कि यह मामला ऑनर किलिंग का है.
पुलिस ने घटना के बारे में बताते हुए कहा है कि एक अनजान शख्स रविवार सुबह करीब 5:25 बजे भिवंडी की ओर जाने के लिए कल्याण स्टेशन पर ऑटोरिक्शा में सवार हुआ. ऑटो में जब शख्स सवार हुआ तो सूटकेस से बदबू आ रही थी. जब इस मामले में उसने यात्री से पूछा तो वह सूटकेस छोड़कर फरार हो गया.
जब इस मामले में ऑटो ड्राइवर को शक हुआ तो उसने पास के अन्य ऑटो चालकों को इकट्ठा किया. जब ऑटो ड्राइवर ने ड्राइवरों की मौजूदगी में सूटकेस खोला तो उसे एक महिला की लाश मिली, जिसे कमर से तीन हिस्सों में काटा गया था. जब ठाणे पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पुलिस को कोई क्लू नहीं मिला. न तो मृत युवती की पहचान हो पा रही थी, न ही मृत युवती का सिर दिख रहा था और न ही आरोपी को पहचाना जा सका. पुलिस के पास एक ही क्लू था कि रेलवे स्टेशन के बाहर एक शख्स लाल रंग की टीशर्ट में घूम रहा है.
पुलिस के हाथ पहला सुराग कल्याण स्टेशन के पास का सीसीटीवी फुटेज था. पुलिस ने शख्स की रेलवे स्टेशन पर गतिविधि की निगरानी की. ठाणे क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने फुटेज स्कैन किया, जिसके बाद आरोपी के हाथ में एक सूटकेस देखा गया. शख्स टिटवाला रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुआ था.
कैसे पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी?
ठाणे पुलिस के मुताबिक यूनिट के सदस्यों ने कई ऑटो ड्राइवरों से इस मामले में बातचीत की. इसके साथ ही टिटवाला रेलवे स्टेशन के पास पुलिस ने उस ड्राइवर से भी बात की जिसकी गाड़ी में आरोपी सूटकेस लेकर सवार हुआ था. पुलिस ने आसपास के इलाकों में आरोपी की तस्वीर दिखाकर पूछताछ की तो आरोपी के बारे में पता चला. पुलिस ने आरोपी को उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया.
परिवार के लिए आई थी पुणे
प्राथमिक जांच में पुलिस को पता चला है कि मृत लड़की का नाम प्रिंसी तिवारी है, जो चार महीने पहले ही उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से पुणे आई थी. प्रिंसी ने हाल ही में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था. वह अपने परिवार की मदद करने महाराष्ट्र आई थी. आरोपी अरविंद तिवारी टिटवाला स्थित आवास में अकेले रहता है, वहीं पत्नी और उसकी 4 बेटियां जौनपुर में रहती हैं. प्रिंसी टिटवाला 4 महीने पहले ही आई थी और एक भांदुप स्थित प्राइवेट फर्म में क्लर्क की नौकरी करती थी.
बेटी के रिश्ते पर पिता को था ऐतराज
दावा किया जा रहा है कि यहीं एक आदमी के साथ वह रिलेशनशिप में आ गई, जिसका पिता ने कई बार विरोध किया. आरोपी पिता को डर था कि इस रिश्ते से उसकी बहन की शादियों पर इस रिश्ते का फर्क पड़ेगा. वह कई बार लड़की को टोक चुका था, लेकिन लड़की सुन नहीं रही थी. पिता को डर था कि इससे समाज में बदनामी होगी.
आरोपी पिता की बात जब प्रिंसी ने नहीं सुनी तो उसने अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया. आरोपी का नाम मनीष तिवारी है और उम्र 47 बरस की है. आरोपी पिता ने पुलिस के सामने यह माना है कि मृत लड़की उसकी बेटी है और वह ऐसे लड़के साथ रिलेशनशिप में थी, जिससे रिश्ता रखने के लिए उसने मना किया था.
पुलिस को शरीर के अन्य हिस्सों की तलाश
पिता के बार-बार टोकने पर जब लड़की नहीं मानी तो दरिंदा पिता ने अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है, साथ ही पूछताछ कर रही है. पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है प्रिंसी तिवारी के शरीर अन्य हिस्सों को आरोपी ने कहां दफनाया है.

निर्भया के दोषियों को अब फांसी का फंदा करीब आते दिखने लगा है। शायद इसी वजह से एक दोषी इतना घबरा गया है कि अजीबोगरीब बातें करना लगा है। दोषी अक्षय कुमार सिंह ने फांसी से बचने के लिए बेतुके तर्क दिए हैं। उसका कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण की वजह से वैसे ही लोग मर रहे हैं, फिर फांसी की क्या जरूरत है? अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ जो पुनर्विचार याचिका दायर की है, उसमें यह तर्क दिया गया है। वह यहीं पर नहीं रुका बल्कि मौत सामने देख उसे सतयुग-कलियुग से लेकर गांधी जी तक याद आ गए हैं।

उसका कहना है कि दिल्ली तो गैस चैंबर बन चुकी है। दिल्ली में प्रदूषण की वजह से वैसे ही लोगों की उम्र कम हो रही है, तब हमें फांसी क्यों दी जा रही है? इतना ही नहीं उसने अपनी याचिका में दुनिया के कई सिद्धांतों के साथ सतयुग-कलियुग और महात्मा गांधी का भी जिक्र किया है।

एडवोकेट एपी सिंह के हवाले से दायर याचिका में कहा गया, 'हर किसी को पता है दिल्ली एनसीआर में हवा और पानी की हालत क्या है। जिंदगी छोटी होती जा रही है, फिर मौत की सजा क्यों?'
गैस चैंबर बनी दिल्ली
अक्षय कुमार ने अपनी याचिका में दलील दी है कि दिल्ली की एयर क्वालिटी लगातार खराब हो रही है। राजधानी गैस चैंबर बन चुकी है। यहां तक कि दिल्ली के पानी में भी जहर घुला हुआ है।
 
कलयुग में उम्र बस 50-60 साल
अक्षय ने अपनी याचिका में वेद पुराण और उपनिषद का भी हवाला दिया। उसने कहा कि सतयुग में लोग हजारों साल तक जीते थे। त्रेता युग में भी आदमी हजार साल तक जीता था। मगर कलयुग में आदमी की उम्र 50-60 साल तक रह गई है। कम ही लोग हैं, जो 80-90 तक पहुंच पाते हैं। कड़वी सच्चाई और विपरीत परिस्थितियों से गुजरते वक्त एक लाश से ज्यादा नहीं रहता। पिछले साल नौ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज की थी। मगर चौथे आरोपी अक्षय ने पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी।

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