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तेल अवीव । इज़राइल में वैज्ञानिकों का कहना है कि वे बुढापे की प्रक्रिया को उलटा करने में सफल हो गए हैं। 35 रोगियों को शामिल कर एक स्टडी में उसके टेलोमेरेस की लंबाई बढ़ा दी है। इस स्टडी में शामिल लोग तीन महीने तक हर हफ्ते 90 मिनट के 5 सेशन्स में शामिल हुए। सभी को हाइपरबेरिक ऑक्सीजन रूम में बिठाया गया। इसके परिणामस्वरूप सभी के टेलोमेरेस 20 फीसदी तक बढ़ गए। यह एक प्रभावशाली दावा है। इससे पहले भी कुछ अन्य रिसर्चर्स ने कोशिश की, लेकिन निश्चित उन्हें सफलता नहीं मिली।
तेल अवीव यूनिवर्सिटी में मेडिसिन और फैकल्टी स्कूल ऑफ न्यूरोसाइंस के डॉक्टर और  लीड रिसर्चर शेयार एफर्टी ने बताया कि उनके इस शोध की प्रेरणा उन्हें बाहरी दुनिया से मिली। शेयार ने बताया 'नासा द्वारा जुड़वा बच्चों में से एक को अंतरिक्ष में भेजा गया और दूसरा पृथ्वी पर रहा। हमारे शोध में टेलोमेरेस की लंबाई जितनी बढ़ी उससे हमें पता चला कि बाहरी वातावरण में परिवर्तन उम्र बढ़ने के कोर सेलुलर को प्रभावित कर सकता है। 'एफर्टी ने कहा 'लंबे टेलोमेरेस बेहतर सेलुलर परफॉरमेंस से जुड़े होते हैं।' इस शोध में यह भी सामने आया कि थेरेपी के जरिए सेन्सेंट सेल 37 फीसदी तक कम हो गए जिससे नई हेल्दी सेल फिर से बनने लगीं। पशु अध्ययनों से पता चला है कि सेन्सेंट सेल को हटाने से बाकी जीवन 33फीसदी से अधिक हो जाता है।
शोध में शामिल हुए किसी भी इंसान की जीवन शैली या डाइटिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ। हर एक को एक मास्क के जरिए 100 फीसदी ऑक्सीजन साँस लेते हुए हाइपरबेरिक रूम में रखा गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि उम्र बढ़ना खुद अल्जाइमर, पार्किंसंस, गठिया, कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। वैज्ञा‎निकों की माने तो हर बार जब आपके बॉडी में एक सेल दोबारा बनता है तो आपकी जवानी और कम होती चली जाती है। ऐसा टेलोमेरेस की कमी की वजह से होता है। यह वही स्ट्रक्चर है जिसके जरिए हमारे क्रोमोजोम्स 'कैप' होते हैं।

वाशिंगटन। अमेरिका की सिलिकॉन वैली में बसे एक भारतीय-अमेरिकी उद्योगपति ने हाल में सम्पन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस का प्रचार करने के लिए बॉलीवुड संगीत का इस्तेमाल किया था। इससे पहले इस साल की शुरुआत में, अजय जैन भूटोरिया ने कई भाषाओं में कुछ मशहूर बॉलीवुड गीतों का इस्तेमाल कर एक अभियान भी चलाया था, ताकि भारतीय-अमेरिकी बाइडन से अधिक जुड़ाव महसूस करें। भूटोरिया ने कहा, ऐसी शिकायतें थी कि भारतीय-अमेरिकी वोट नहीं करते। लेकिन मैंने पूछा, क्या आप ने उनकी भाषा में उन तक पहुंचने की कोशिश की? जब कोई प्रचारक एक मतदाता से उसकी भाषा में बात करता है तो उनके बात सुनने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने कहा, ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी भारतीय अंग्रेजी बोलते हों। लोग आपसे तभी जुड़ते हैं, जब आप उनसे उनकी भाषा में बात करें। भूटोरिया ने अमेरिका का नेता कैसा हो, जो बाइडन जैसा हो, ट्रंप हटाओ, अमेरिका बचाओ, बाइडन-हैरिस को जिताओ, अमेरिका को आगे बढ़ाओ और जागो अमेरिका जागो- बाइडन हैरिस को वोट दो, जैसे नारे 14 भारतीय भाषाओं में जारी किए थे।भूटोरिया और उनकी पत्नी विनीता ने एक वीडियो, चले चलो, चले चलो बाइडन हैरिस को वोट दो भी जारी किया था, जो भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में पहली बार दक्षिण-एशियाई संगीत का इस्तेमाल किया गया। भूटोरिया ने कहा कि लोग संगीत, भोजन, भाषा और संस्कृति से अधिक जल्दी जुड़ते हैं। भूटोरिया का जन्म राजस्थान में हुआ और वह असम के गुवाहाटी में पले-बढ़े। अपने पिता से प्रेरित भूटोरिया भी अनके प्रवासियों की तरह एक सूटकेस और खाली जेब के साथ असीमित अवसरों की तलाश में अमेरिका पहुंचे थे।

कुआलालंपुर । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच (एपेक) के नेताओं ने कोरोना के चलते कठिनाइयों का सामना कर रहीं अर्थव्यवस्थाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए मुक्त, खुले और गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार और निवेश की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। एपेक नेताओं ने 2017 के बाद से शुक्रवार को अपना पहला संयुक्त बयान जारी करने के लिए मतभेदों को अलग रखा, और 21 एपेक अर्थव्यवस्थाओं के बीच बड़े पैमाने पर मुक्त व्यापार समझौते और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत बनाने पर सहमति जाहिर की है। इस साल की बैठक के मेजबान देश मलेशियाई के प्रधानमंत्री मोहिउद्दीन यासीन ने कहा कि अमेरिका और चीन के व्यापार युद्ध, जिसके चलते अतीत में वार्ता बाधित हुई, वह कोविड-19 के कारण ‘‘खत्म हो गया’’ है। इस साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि दर में 2.7 प्रतिशत गिरावट की उम्मीद है, जो 2019 में 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। उन्होंने कहा कि एपेक का जोर आर्थिक सुधार में तेजी लाने और एक किफायती टीका विकसित करने पर था।

इस्लामाबाद । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को ऐलान किया कि अब उनके यहां इंटरनेट के कंटेंट पर सेंशरशिप लाई जाएगी। नियमों को तोड़ने वाली कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। नए डिजिटल कानून के आने से पाकिस्तान में बवाल मच गया है। इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों ने पाकिस्तान को धमकी दी है कि अगर इस कानून में बदलाव नहीं किया जाता है तो फिर उन्हें पाकिस्तान से अपना कारोबार समेटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसमें गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी बड़ी कंपनिया शामिल हैं।
सरकारी नीतियों के मामले में वैश्विक इंटरनेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एशिया इंटरनेट गठबंधन ने एक बयान में कहा कि इंटरनेट कंपनियों को निशाना बनाने वाले नये कानून चिंताजनक हैं। बता दें कि गूगल, फेसबुक और ट्विटर भी इस गठबंधन का हिस्सा है। कंपनियों ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं, जब सिर्फ दो दिन पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने इस बारे ऐलान किया।
पाकिस्तान के एक अखबार मुताबिक आईटी मंत्रालय के द्वारा बुधवार को घोषित नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों को हर वो जानकारी देनी होगी, जो जांच एजेंसियां मांगेंगी। इन जानकारियों में सब्सक्राइबर की सूचना, ट्रैफिक डेटा और यूजर के डेटा जैसी संवेदनशील जानकारियां भी शामिल हो सकती हैं। नए नियमों के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों या इंटरनेट सेवा देने वालों को इस्लाम की अवहेलना करने वाली सामग्री, आतंकवाद को बढ़ावा देने, अभद्र भाषा, अश्लील साहित्य या किसी भी सामग्री को खतरे में डालने के लिए 3.14 मिलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

 

वॉशिंगटन । जानलेवा कोरोना वायरस महामारी के बाद अब दुनिया को  चापरे वायरस परेशान कर सकता है। कोरोना की तरह इसमें भी पर्सन टू पर्सन इंफेक्शन के सबूत मिले हैं। इसकी पुष्टि अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंटोल ने भी कर दी है। बताया गया कि बोलिविया में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इसमें ऐसा बुखार होता है, जिससे ब्रेन हैमरेज तक हो सकता है। यह लगभग इबोला जैसा है। इबोला को भी काफी खतरनाक माना गया था, हालांकि उस पर भी जल्द ही नियंत्रण हासिल कर लिया गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वायरस का नाम है- चापरे वायरस। दरअसल, इस वायरस का मूल साल 2004 में बोलिविया के चापरे इलाके में देखा गया था।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीडीसी ने कहा कि 2019 में इस संक्रमण की चपेट में आए पांच में तीन लोग स्वास्थ्य कर्मी थे जिसमें से दो की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता कॉलिन कार्लसन ने कहा कि इबोला जैसे हेमरैजिक फीवर कोरोना या फ्लू की तरह बहुत मुश्किल से फैलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हेमरैजिक बुखार के लक्षण आम तौर पर संक्रमण के तुरंत बाद दिखाई देते हैं (सांस की लंबी बीमारी के चलते) और संक्रमित के सीधे संपर्क में आने से यह संक्रमण एक से दूसरे इंसान में फैलता है। लेकिन अगर यह महामारी का रूप लेता है तो यह मेडिकल सिस्टम को तबाह कर सकता है। मरीजों का इलाज करते हुए कई स्वास्थ्यकर्मी बीमार हो जाते हैं। 2019 में चापरे वायरस का पहला संकेत मानव शरीर के फ्ल्यूड्स के एक कलेक्शन में पाया गया था।
सैंपल्स को इकट्ठा करने वाले डॉक्टरों का मानना था कि रोगी डेंगू के संपर्क में आए होंगे। सीडीसी रिसर्चर मारिया मोराल्स ने कहा कि 'दक्षिण अमेरिका में  डेंगू बहुत प्रचलित है। हेमैरजिक फीवर के लक्षण वाला डेंगू से पहले कुछ और नहीं सोच सकता। यह दोनों बहुत समान हैं।' सीडीसी के संक्रामक रोग विशेषज्ञ कैटलिन कोसाबूम ने कहा कि जिन मरीजों को इस वायरस का संक्रमण हुआ उन्होंने बुखार, पेट दर्द, उल्टी, मसूड़ों से खून निकलने, त्वचा पर छाले  और आंखों में दर्द की शिकायत की। फिलहाल इस वायरस का कोई इलाज नहीं है ऐसे में पानी चढ़ाना ही सिर्फ एक रास्ता है। बता दें ‎कि दुनिया भर को कई महीनों तक लाकडाउन के रुप में बंधक बनाकर रखने वाले जानलेवा कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला आए मंगलवार को एक साल हो गया। अब भी लोग इस संक्रामक रोग से परेशान हैं।

कोलांग। इंडोनेशिया के उत्‍तरी सुमात्रा के कोलांग शहर में ताबूत बनाने वाले 33 साल के जोसुआ हुतागलुंग के घर पर आसमान से एक अनमोल खजाना गिरा और वह देखते ही देखते 10 करोड़ रुपए के मालिक बन गए। दरअसल, जोसुआ के घर पर आकाश से एक बड़ा सा उल्‍कापिंड गिरा। जब पत्थर की जांच की गयी तो पता चला कि यह करीब साढ़े 4 अरब साल पुराना दुर्लभ उल्‍कापिंड है जिसकी कीमत 1.3 मिलियन पाउंड आंकी गई है। जोसुआ ने बताया कि उल्‍कापिंड के गिरने के समय वे उत्‍तरी सुमात्रा के कोलांग स्थित अपने घर के बगल में काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जोर से आवाज़ सुनाई दी और जब उन्होंने कमरे से निकल कर देखा तो उनकी छत में एक बड़ा सा छेद हो चुका था। आकाश से गिरे पत्‍थर का वजन करीब 2.1 किलोग्राम है। जोसुआ ने बताया कि उल्‍कापिंड गिरने से 15 सेंटीमीटर जमीन में गड्ढा भी हो गया था। इस उल्‍कापिंड के बदले जोसुआ को 14 लाख पाउंड या करीब 10 करोड़ रुपये मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जोसुआ ने जमीन के अंदर गड्ढा खोदकर अनमोल उल्‍कापिंड को बाहर निकाला इसलिए इस पर उसी का मालिकाना हक बनता था। जोसुआ ने बताया कि जब उन्‍होंने इसे जमीन से निकाला तो वह काफी गरम था और आंशिक रूप से टूटा हुआ था। जोसुआ ने कहा कि उल्‍कापिंड के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि उसके घर के कई हिस्‍से हिल गए और घर की छत टूट गई। स्‍थानीय लोगों ने बताया कि उन्‍होंने बहुत तेज धमाके की आवाज सुनी जिससे उनके घर भी हिल गए। दुर्लभ उल्‍कापिंड के गिरने के बाद जोसुआ के घर उसे देखने वालों का तांता लगा हुआ है।

आयोवा सिटी । कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अमेरिका में नई पाबंदियां लगानी शुरू कर दी हैं। रिपब्लिकन गवर्नरों ने मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है और स्कूलों को दोबारा खोलने की योजनाएं भी फिलहाल स्थगित की जा रही हैं। इस बीच, कई लोग मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम के पीछे के विज्ञान पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों को इस बात का भी डर है कि एक बार फिर पाबंदियां लगाए जाने से और नौकरियां जा सकती हैं। आयोवा की गवर्नर किम रेनॉल्ड्स जो मास्क पहनने के खिलाफ थीं, उन्होंने भी मंगलवार से मुंह ढंकने के अपने नियम में बदलाव किया। हालांकि उन्होंने दावा किया, ‘‘मास्क पहनने से कोरोना वायरस फैलने का खतरा कम होने या ना होने, दोनों से जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांत है।’’जन स्वास्थ्य अधिकारियों ने अगले सप्ताह ‘थैंक्सगिविंग’ के मद्देनजर भी विशेष तैयारियां की हैं।
वहीं डॉक्टरों ने लोगों से बड़े समारोह ना करने की अपील की है।आयोवा के अलावा, नॉर्थ डकोटा और यूटा ने भी अब मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। वहीं साउथ डकोटा ने स्कूलों को एक बार फिर बंद करने का फैसला लिया है। हाल में यहां 94 छात्र और 47 कर्मचारी संक्रमित पाए गए थे। इस बीच, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल ने मंगलवार को कहा कि देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के मद्देनजर आने वाले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था धीमी पड़ सकती है। ‘जॉन हॉपकिन्स’ विश्वविद्यालय के अनुसार अमेरिका में सोमवार को सर्वाधिक 73,000 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती थे। वहीं सोमवार को कोविड-19 के 1,66,000 से अधिक नए मामले सामने आए थे। अमेरिका में अभी तक 2,47,000 से अधिक लोगों की वायरस से मौत हो चुकी है। यहां प्रतिदिन औसतन 1,145 लोगों की मौत हो रही है।
 

वाशिंगटन. अमेरिका के पूर्व सर्जन जनरल विवेक मूर्ति समेत (Vivek Murthy) दो प्रमुख भारतीय-अमेरिकियों को अगले बाइडन-हैरिस (Jo Biden) प्रशासन की कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. 'द वाशिंगटन पोस्ट' और 'पॉलिटिको' ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 से निपटने को लेकर निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष भारतीय-अमेरिकी सलाहकार मूर्ति स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री बनाए जा सकते हैं और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरुण मजूमदार (Arun Majumdar) को ऊर्जा मंत्री बनाया जा सकता है.

विवेक मूर्ति सत्ता हस्तांतरण के कोविड-19 सलाहकार बोर्ड के सह अध्यक्ष हैं. वह कोरोना वायरस संबंधी मामलों को लेकर बाइडन के निकट सहयोगी रहे हैं. खबरों में में कहा गया है कि इसी प्रकार, ‘एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी-एनर्जी’ के पहले निदेशक मजूमदार ऊर्जा संबंधी मामलों पर बाइडन के शीर्ष सलाहकार रहे हैं. मजूमदार के अलावा ऊर्जा मंत्री पद के लिए पूर्व ऊर्जा मंत्री अर्नेस्ट मोनिज, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधार्थी डैन रीचर और पूर्व उप ऊर्जा मंत्री एलिजाबेथ शेरवुड रैंडल भी दावेदार हैं. स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री पद के लिए मूर्ति के अलावा उत्तरी कैरोलाइना की स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री मैंडी कोहेन और न्यू मैक्सिको की गवर्नर मिशेल लुजान ग्रीशम को भी दावेदार माना जा रहा है.

बाइडन की ATR टीम में 20 भारतवंशी
बता दें कि बाइडन ने 20 से अधिक भारतवंशियों को अपनी एजेंसी रिव्यू टीम (ART) में शामिल किया है. इनमें से तीन भारतवंशी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. यह टीम प्रमुख संघीय एजेंसियों की मौजूदा प्रशासन में कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी ताकि सत्ता का हस्तांतरण सुचारु रूप से सुनिश्चित किया जा सके. बाइडन की हस्तांतरण टीम ने कहा कि अब तक के राष्ट्रपति हस्तांतरण टीम के इतिहास में यह टीम सबसे अधिक विविधता लिए हुए है. अमेरिका में सत्ता हस्तांतरण के लिए बनाई गई आर्ट टीम में सैकड़ों सदस्य हैं जिनमें से आधी से अधिक महिलाएं हैं. 40 प्रतिशत उन समुदायों से हैं जिनका संघीय सरकार में ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व रहा है. इनमें गैर श्वेत, एलजीबीटी और विकलांग शामिल हैं. इस टीम में राहुल गुप्ता राष्ट्रीय औषधि नियंत्रण नीति के मामले में नेतृत्व कर रहे हैं. किरण आहूजा को कार्मिक प्रबंधन को लेकर बनी टीम की कमान सौंपी गई है. पुनीत तलवार को विदेश विभाग से जुड़ी टीम में जगह दी गई है. पाव सिंह को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की टीम में नामित किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की जिस फूड प्रोग्राम संस्था (World Food Program) को इस साल नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) दिया गया, वो अस्ल में इस बात का संकेत है कि अगले साल यानी 2021 में इस संस्था के सामने और कड़ी चुनौती होने वाली है. माना जाए तो एक तरफ, अर्थव्यवस्थाएं झटके में हैं तो अगले साल बढ़ती गरीबी की हालत में भुखमरी की समस्या (Global Famine) और विकराल होने को है. WFP के प्रमुख डेविड बीस्ले ने यह चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि इस तरफ दुनिया के प्रमुख देशों ने समय से ध्यान नहीं दिया तो एक भयानक संकट मुंह बाए खड़ा है.बीस्ले ने साफ कहा है कि कोविड 19 के प्रकोप के शुरूआती दौर में इस साल अप्रैल में ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि भुखमरी एक वैश्विक महामारी बनने जा रही है, अगर फौरन इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए. कुछ देशों ने राहत पैकेजों और कर्ज़ माफी जैसे कदम उठाकर भुखमरी की समस्या को इस साल थोड़ा कम करने या टालने में तो सफलता पाई लेकिन अब 2021 में यह संकट और बड़ा होने वाला है.बीस्ले क्यों ऐसी चेतावनी दे रहे हैं और इसका पूरा अर्थ क्या है? इसके साथ ही, आपको यह भी समझना चाहिए कि कोविड 19 अगले साल और क्या भयानक तस्वीर दिखा सकता है? क्या वाकई अगला साल और ज़्यादा मुश्किलों से भरा होने वाला है?

क्यों बदतर हो सकता है 2021?
बीस्ले की मानें तो इस साल प्राकृतिक प्रकोप सामने आया तो देशों के कोषों में रकम थी, लेकिन महामारी से अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ी हैं और गिरावट लगातार जारी है इसलिए अगले साल धन का संकट होगा. इसके अलावा, कम और मध्यम आय वाले देशों में आर्थिक संकट कहर ढाएगा, तो जिन देशों में कोविड 19 की अगली लहरों के कारण फिर लॉकडाउन और शटडाउन की नौबत आ रही है, उन्हें खास तौर से सचेत रहना होगा. कोरोना वायरस के चलते चूंकि माइग्रेशन, बेरोज़गारी और गरीबी बढ़ी इसलिए करीब तीन दर्जन देश संभवत: अकाल जैसे हालात से दो चार होंगे. इस स्थिति को टालना है तो बीस्ले के मुताबिक डब्ल्यूएफपी के पास पर्याप्त पैसा होना चाहिए.

अर्थव्यवस्था और महामारी का अगला साल?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैक्सीन आ भी जाती है तो भी 2025 तक सर्दियों के हर मौसम में कोरोना वायरस संक्रमण बड़ी समस्या होगा. वहीं, अमेरिका में तो अनुमान और भयानक तस्वीर दिखा रहे हैं. विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 1918 के स्पैनिश फ्लू से अमेरिका में 6,75,000 मौतें हुई थीं और 2021 के आखिर तक कोविड 19 से होने वाली मौतों का आंकड़ा इसके बहुत करीब पहुंच जाएगा. आने वाले सालों में स्पैनिश फ्लू से हुई मौतों के आंकड़े को कोविड पार कर जाएगा.
रही बात अर्थव्यवस्थाओं की, तो 2021 में बेहतर होने की उम्मीद तो है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया की अर्थव्यवस्था बहुत धीमी रफ्तार से रिकवर होगी. यह भी आशंका है कि वैश्विक मंदी यानी रिसेशन की भी दूसरी लहर अगले साल देखी जाएगी. कोविड की अगली वेव्स को देखते हुए ज्यादातर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि 2021 के आखिर तक भी कई देशों की अर्थव्यवस्था महामारी से पहले की स्थिति में नहीं पहुंच सकेगी. यानी धन संकट और बड़ा होता साफ दिख रहा है.

क्या होगा वैक्सीन का रोल?
बीस्ले ने यह भी अनुमान जताया कि कोविड 19 के खिलाफ वैक्सीन से यह उम्मीद की जा सकती है कि कम से कम विकसित देशों की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा. लेकिन गरीब देशों के लिए मुश्किल इसलिए है कि जो कर्ज़ माफ किया गया है उसे वसूलने की कवायदें जनवरी 2021 से फिर शुरू होंगी. नए लॉकडाउन और महामारी की अगली लहरों के ​चलते चिंता तो और बड़ी हो ही जाती है.

बीजिंग । चीन में उइगर मुसलमानों के साथ बढ़ते भेदभाव को लेकर असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ते अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ अब उइगर मुस्लिमों की बगावत तेज हो गई है। मुस्लिमों ने ऐलान किया है कि जब तक उन्हें चीन के अत्याचारों से आजादी नहीं मिल जाती उनका संघर्ष जारी रहेगा। उइगर मुस्लिमों ने पूर्वी तुर्किस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके विरोध-प्रदर्शन करते हुए इस जंग का ऐलान किया। प्रदर्शन के दौरान उइगर समुदाय के नेताओं ने कसम खाई कि जब तक चीन से आजादी नहीं मिल जाती, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।
बता दें कि पूर्वी तुर्किस्तान भी मध्य एशिया का एक स्वतंत्र हिस्सा हुआ करता था लेकिन चीन ने उस पर कब्जा कर लिया जिसे ही आज शिंजियांग प्रांत के रूप में जाना जाता है। यहां समय-समय पर आजादी के लिए प्रदर्शन होते रहते हैं। बता दें कि 12 नवंबर को पूर्वी तुर्किस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दुनियाभर के कई देशों में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए। पूर्वी तुर्किस्तान या शिंजियांग में 10 लाख उइगर हैं जो लंबे समय से चीन के शोषण का शिकार हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में यह बात कई बार सामने आ चुकी है कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार मुस्लिमों को तरह-तरह से प्रताड़ित करती है। उनसे जबरन श्रम करवाया जाता है व उनकी आबादी घटाने के लिए महिलाओं का जबरन गर्भपात भी कराया जाता है।
अमेरिका ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मुस्लिमों पर अत्याचार के मद्देनजर चीन के खिलाफ कई कड़े कदम भी उठाए। कुछ वक्त पहले अमेरिका ने शिंजियांग प्रांत निर्मित सभी उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी थी क्योंकि वहां मुस्लिमों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम करवाया जाता है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी ट्रंप सरकार चीन के इस अमानवीय कृत्य को पुरजोर तरीके से उठाती आई है। अब जब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हो गया है तो यह देखने होगा कि नए राष्ट्रपति जो बाइडेन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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