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कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये देश भर में लागू लाक डाऊन से आम आदमी की सुविधाओं के लिये प्रशासन, राजनैतिक दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा अन्य संस्थाएं, लोग कार्य कर रहे हैं। लेकिन लगातार लोगों के घरों में बन्द रहने , काम धन्धा प्रभावित होने का असर गायों के साथ अन्य जीव जन्तुओं पर भी पड़ा है। सडकों पर बेसहारा घूमती गायों की सेवा ,उनकी देखभाल का बीड़ा शहडोल , अनूपपुर , सतना , बुरहानपुर, ग्वालियर,जबलपुर जिले में कार्यरत सतगुरु मिशन की विशेष इकाई धेनु सेवा संस्थान के लोगों ने उठाया है।
   प्राप्त जानकारी के अनुसार आनंद मिश्रा के साथ संस्था के अन्य सदस्यों ने गायों के साथ अन्य जीवों की सेवा वर्षों से कर रहे हैं। लाकडाउन के दौरान इस संस्था ने गायों तथा अन्य जीवों को भोजन, पानी , प्राथमिक चिकित्सा के साथ आवश्यकता के अनुरुप उनके रहने की व्यवस्था भी कर रहे हैं। कई अवसरों प बनर यह संस्थान वाहन दुर्घटना मे घायल गायों कॊ भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवा चुकी है।
   सतगुरु परिवार के सदस्यों द्वारा नि: स्वार्थ भाव से गायों की सेवा सुश्रुवा करते हुए जो लोग देखते हैं या जिन्हे इसकी जानकारी है, आवश्यकता के अनुरुप वे स्वत: संस्थान के लोगों से मदद लेते रहते है। जीवों के प्रति  ऐसी नि: स्वार्थ सेवाभाव सचमुच सराहना का कार्य है।

भारत के हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर मुहर लगाते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदल गए हैं। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा है- मोदी महान हैं, वह बहुत अच्छे नेता हैं।ट्रंप ने अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज ने बातचीत के दौरान कहा- नरेंद्र मोदी ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के मामले में हमारी मदद की है, वह काफी अच्छे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम विदेश से कई दवाईयां मंगवा रहे हैं। इसमें भारत में बनाई जाने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां भी शामिल है। इसे लेकर मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत में कहा कि भारत से अभी बहुत अच्छी चीजें आनी बाकी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की 29 मिलियन डोज खरीदी है।

ट्रंप ने चैनल से बातचीत में कहा कि मैंने पीएम मोदी से पूछा था क्या वो हमें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां देंगे? वो शानदार थे। बता दें कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन भारत में मलेरिया के इलाज की दवा है। भारत में मलेरिया के मामले हर साल बड़ी संख्या में आते हैं और यही वजह है कि भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक है। ये दवा इस वक्त एंटी-वायरल के रूप में इस्तेमाल हो रही है।

भारत ने मानवीय आधार पर हटाया प्रतिबंध
मंगलवार को ही सरकार ने इस दवा पर लगे निर्यात से आंशिक तौर पर प्रतिबंध हटाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार सरकार ने मानवीय आधार पर यह फैसला लिया है। ये दवाएं उन देशों को भेजी जाएंगी जिन्हें भारत से मदद की आस है। हालांकि घरेलू जरुरतें पूरी होने के बाद स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर निर्यात किया जाएगा।

अमेरिका ने दी थी भारत को नतीजे भुगतने की धमकी
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत अनुरोध के बावजूद अमेरिका को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात की अनुमति नहीं देता है तो उन्हें हैरानी होगी। पिछले हफ्ते ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है ताकि भारत अमेरिकी में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की बिक्री की इजाजत दे। इससे कुछ घंटे पहले ही भारत ने मलेरिया की इस दवा के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था।

अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच उनके इलाज के लिए इस दवा के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, 'मुझे हैरानी होगी अगर वह (ऐसा) करेंगे, क्योंकि आप जानते हैं कि भारत का अमेरिका के साथ व्यवहार बहुत अच्छा रहा है।' मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत कई वर्षों से अमेरिकी व्यापार नियमों का फायदा उठा रहा है, और ऐसे में अगर नई दिल्ली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को रोकता है, तो उन्हें हैरानी होगी।

पेरिस। फ्रांस में कोरोना वायरस का कहर जारी है। सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस में 24 घंटों के भीतर 833 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। महामारी की शुरुआत के बाद दैनिक मौतों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। देश के स्वास्थ्य मंत्री ओलिवियर वेरन ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फ्रांस में कोरोना वायरस महामारी में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 8 हजार 911 तक पहुंच गई। कोरोना वायरस महामारी के चलते फ्रांस में 17 मार्च से ही लॉकडाउन घोषित किया जा चुका है। हालांकि, अभी महामारी के संक्रमण का आंकड़ा थमता दिखाई नहीं दे रहा है। फ्रांस ने अब हर रोज अस्पतालों के साथ नर्सिंग होम्स में कोरोना वायरस के संंक्रमण से होने वाली मौतों का आंकड़ा जारी करना शुरू कर दिया है। पहले केवल अस्पतालों में दैनिक हिसाब से होने वाली मौतों का आंकड़ा जारी किया जाता था।
न्यूयॉर्क में दो हफ्ते बढ़ा लॉकडाउन
अमेरिका में कोरोना वायरस संकट सबसे बुरे सप्ताह में पहुंच चुका है। न्यूयॉर्क, मिशिगन और लुइसियाना में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका में मृतकों की संख्या 10,000 के पार पहुंच चुकी है। देश में कुल मृतक संख्या 10369 हो चुकी है जबकि संंक्रमित 3,52,160 हो चुके हैं। वहीं यूरोपीय देशों में मृतकों की संख्या घटी है।  
जापान में लागू हो सकता है आपातकाल
जापान में टोक्यो समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस संंक्रमण के मामले बढऩे पर पीएम शिंजो आबे ने कहा कि सरकार आपातकाल घोषित करने और बाजार को एक हजार अरब डॉलर का पैकेज देने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, 'सलाहकार समिति के विचार जानने के बाद हम मंगलवार से ही आपातकाल पर विचार कर रहे हैं। जबकि आर्थिक हानि को देखते हुए सरकार 108 हजार अरब येन (एक हजार अरब डॉलर) का राहत पैकेज भी दिया जाएगा।
पाकिस्तान में कुल 3,520 मामले
पाकिस्तान में संक्रमण की संख्या 3,520 तक पहुंच गई। जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लोगों से घरों में रहने की अपील के बावजूद लोग सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते देखे गए। अब तक देश में कुल 52 मौतें हो चुकी हैं जबकि पंजाब प्रांत में 1,684, सिंध में 932 मामले सामने आए हैं। यहां पीओके में 225 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं, कोरोना के चलते पाकिस्तान ने गुरुद्वारा पंजा साहिब में बैसाखी समारोहों को रद्द कर दिया है।
इक्वाडोर में सड़कों पर पड़े हैं शव
अमेरिका से लगा लेटिन अमेरिकी देश इक्वाडोर भी इन दिनों कोरोना वायरस की चपेट में है। यहां के पश्चिमी शहर गुयाक्विल में सड़कें वीरान हैं और मृतकों के शव सड़कों पर हैं जिन्हें उठाने वाला तक नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि इस शहर में मौतों की बढ़ती संख्या ने ताबूतों की कमी पैदा कर दी है और लोग कार्डबोर्ड के डिब्बों का ताबूत बनाने को मजबूर हो रहे हैं। देश के उपराष्ट्रपति ओटो सोनेहोल्जनर ने इन हालातों के लिए जनता से माफी मांगी है। गुयाक्विल शहर में करीब 150 लावारिस शव सड़कों और गलियों में हैं। जबकि लोग इन शवों के पास जाने तक से कतरा रहे हैं क्योंकि उन्हें भी वायरस का खौफ है। उपराष्ट्रपति ने शवों को सड़कों से हटाने का आदेश जारी किया है।  

 

ट्रंप बोले-भारत को देख लेंगे
वाशिंगटन। कोरोना वायरस के कहर से बेहाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर से प्रतिबंध नहीं हटाया तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना वायरस से संंक्रमित मरीजों के इलाज में किया जा रहा है। इससे पहले ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस दवा के लिए गुहार लगाई थी। व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया है और मैं समझता हूं कि इस बात के कोई कारण नहीं हैं कि भारत अमेरिकी दवा के ऑर्डर पर से बैन नहीं हटाएगा। ट्रंप ने कहा, मैंने यह नहीं कहीं सुना कि यह उनका (पीएम मोदी) का फैसला था। मैं जानता हूं कि उन्होंने इस दवा को अन्य देशों के निर्यात के लिए रोक लगाई है। मैंने उनसे कल बात की थी। हमारी बातचीत बहुत अच्छी रही। भारत ने अमेरिका के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया है। ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी के साथ हालिया फोन कॉल के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह इस दवा को अमेरिका को देने पर विचार करेंगे। ट्रंप ने कहा, मुझे इस बात पर आश्चर्य नहीं होगा कि यह फैसला उन्हें मुझे बताना होगा जो हमने रविवार सुबह हमने बातचीत की थी। मैंने उनसे कहा था कि हम आपके दवा को देने के फैसले की सराहना करेंगे। यदि वह दवा को अमेर?िका को देने की अनुमति नहीं देते हैं तो ठीक है लेकिन निश्चित रूप से जवाबी कार्रवाई हो सकती है और क्?यों ऐसा नहीं होना चाहिए?
हम जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अच्छे व्यापारिक संबंध हैं और संकेत दिया कि यदि भारत ने दवा के निर्यात पर से प्रतिबंध नहीं हटाया तो हम जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर कोरोना से लडऩे के लिए सहयोग की मांग की थी। मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से लडऩे में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन बेहद कारगर दवा है।
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन का सबसे बड़ा उत्पादक है भारत
भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं, इसलिए भारतीय दवा कंपनियां बड़े स्तर पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन का उत्पादन करती हैं। अब यह दवा कोरोना वायरस से लडऩे में कारगर सिद्ध हो रही है, तब इसकी मांग और बढ़ गई है। हालांकि, कच्चे माल की कमी ने इस दवा के उत्पादन को बहुत प्रभावित किया है। वैश्विक लॉकडाउन के कारण भारतीय दवा निर्माता कंपनियों ने सरकार से इस दवा के लिए कच्चे माल को एयरलिफ्ट कर मंगाने की मांग की है।

न्यूयॉर्क।  अमेरिका में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 10 हजार के पार हो गई है। न्यूयॉर्क में हालात बेहद डरावने हो चुके हैं । यहां अब हर रोज औसतन 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। रविवार को न्यूयॉर्क के एक हॉस्पिटल के मंजर ने हर किसी को हिला कर रख दिया यहां सिर्फ 40 मिनट के अंदर 10 लोगों की मौते हो गई। ब्रूकलिन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हर तरफ अफरा-तफरी का मंजर है। बीते रविवार को यहां 40 मिनट के अंदर 10 मरीजों ने दम तोड़ दिया और वह  भी सिर्फ एक इमरजेंसी रूम में। इसमें से 6 मरीजों की मौत कार्डियक अरेस्ट के चलते हुई, जबकि 4 मरीज तो इमरजेंसी रूम के अंदर भी नहीं पहुंच सके। यहां के एक डॉक्टर ने बताया कि लोग इतने ज्यादा बीमार हैं कि पलक झपते ही मरीजों की मौत हो जाती है। इतना ही उन्होंने ये भी कहा कि वेंटिलेटर लगाते-लगाते ही लोगों की मौत हो जाती है। वहीं जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक अमेरिका में सोमवार सुबह तक 340,000 मामलों की पुष्टि हुई है और अब तक 9,650 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं शीर्ष प्रशासन के अधिकारियों ने सप्ताह के अंत में एक साझा संदेश जारी करते हुए कहा कि अमेरिका के सामने इसके आगे भी मुश्किल समय है। इसके अलावा देश के अग्रणी संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी फौसी ने कहा यह संभवत: बहुत बुरा सप्ताह है। इसके अलावा न्यूयॉर्क शहर में सिटी काउंसिल हेल्थ कमेटी के चेयरमैन ने भी चेताया है कि कोरोना की वजह से मरने वालों के इतने अधिक शव हो गए हैं कि मुर्दाघर लगभग भरे हुए हैं।
उन्‍होंने जल्‍दी ही इसके अस्‍थाई विकल्‍प तैयार करने की बात कही। चेयरमैन मार्क लेवाइन ने कहा इस बात की आशंका गहराती जा रही है कि जल्द ही मृतकों की संख्या शहर और अस्पतालों के मुर्दाघरों की सीमा से बाहर हो जाएगी ऐसे में पब्लिक पार्क में अस्थाई सामूहिक कब्र बनाने पर विचार किया जा रहा है। मगर उन्‍होंने यह स्‍पष्‍ट नहीं किया कि उनकी किसी पार्क में कब्र बनाने की तैयारी है। लेवाइन ने कहा हमारी तैयारी केवल कहने तक सीमित नहीं है। हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

वाशिंगटन। दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित है। यहां स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। अमेरिका में अब तक नौ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यहां संक्रमण के मामले तीन लाख से ज्यादा हो गए हैं। वहीं, न्यूयॉर्क में 24 घंटे में 630 लोगों की मौत हो चुकी है। बाकी जगहों की मौत का आंकड़ा जोड़ा जाए तो यह संख्या 1200 हो जाती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगले दो हफ्तों में कोरोना से मरने वालों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है।
जर्मनी में भी एक लाख संक्रमित
अमेरिका, इटली और स्पेन के बाद अब जर्मनी में भी संक्रमितों की संख्या बढ़कर एक लाख के पार हो गई है।
इटली में दो हफ्ते में सबसे कम मौत
इटली में पिछले दो हफ्ते की सबसे कम मौतें दर्ज की गई हैं। नागरिक सुरक्षा सेवा ने बताया कि रविवार को कोरोना वायरस से 525 लोगों की मौत हुई है जो 19 मार्च को हुई 427 लोगों की मौतों के बाद सबसे कम है।
फ्रांस में 8000 से अधिक मौतें
फ्रांस में 357 नई मौतें हुई हैं, हालांकि यह पिछले दो दिनों के मुकाबले कम है। फिर भी यहां मृतकों की संख्या बढ़कर 8078 हो गई है।
सिंगापुर में 10 भारतीय संक्रमित ठीक
सिंगापुर में सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के 72 (भारतीय) नए मामलों में 10 के ठीक होने की खबर है। देश में इस घातक वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,189 हो गई है।

वाशिंगटन। कोविड-19 के लिए संभावित टीके का अनुसंधान कर्ताओं ने चूहे पर परीक्षण किया है। जितनी मात्रा में यह टीका दिया जाना चाहिए उतनी ही मात्रा में इसने चूहों में कोरोना वायरस के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की। वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन में पाया गया कि चूहों में जब टीके पिट्सबर्ग कोरोना वायरस (पिट्टकोवैक) का परीक्षण किया गया इसने कोरोना वायरस, सार्स सीओवी-2 के खिलाफ बहुत मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित किया। टीका दिए जाने के दो हफ्तों के भीतर ये एंटीबॉडीज बने। अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ सह अनुसंधानकर्ता एंड्रिया गामबोट्टो ने कहा हमने सार्स-सीओवी पर 2003 में और 2014 में एमईआरएस-सीओवी पूर्व में परीक्षण किया है। सार्स-सीओवी-2 से करीब से जु़ड़े ये दो विषाणु बताते हैं कि एक खास प्रोटीन जिसे स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है वह वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने के लिए जरूरी है। गामबोट्टो ने कहा हमें पता है कि इस नये विषाणु से कहां पर लड़ने की जरूरत है। इस अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने टीके का प्रभाव बढ़ाने के लिए इसे देने का एक नया तरीका अपनाया है जिसे मोइक्रो नीडल अरे कहा जाता है। उन्होंने बताया कि यह 400 छोटी-छोटी सुइयों का उंगली के पोर के आकार का एक टुकड़ा है जो त्वचा के उस हिस्से में स्पाइक प्रोटीन के टुकड़ों को पहुंचाता है जहां प्रतिरोधक प्रतिक्रिया सबसे मजबूत होती है।वैज्ञानिकों ने कहा कि वर्तमान अध्ययन में वर्णित टीका में ज्यादा प्रमाणिक रुख का पालन किया गया है जिसमें वायरल प्रोटीन के लैब निर्मित टुकड़ों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने के लिए किया गया है। उनका कहना है कि जैसे फ्लू के लिए अभी टीके दिए जाते हैं, यह टीका भी बिलकुल उसी तरह काम करता है।

 (वॉशिंगटन)
वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका में कोरोना वायरस से शुक्रवार को 1480 लोगों की मौत हुई है और इस वायरस से किसी भी देश में एक दिन में मौत का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे एक दिन पहले अमेरिका में 1,169 लोगों की मौत हुई थी। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ट्रैकर के मुताबिक, गुरुवार रात 8.30 बजे से शुक्रवार रात 8.30 बजे के बीच 1,480 लोगों की मौत हो गई है। अब तक पूरे अमेरिका में मरने वालों की संख्या 7 हजार का आंकड़ा पार कर चुका है। सबसे अधिक मौतें न्यूयॉर्क में हुई हैं जहां 3 हजार से अधिक कोविड19 मरीजों की मौत हुई है।
उधर, बेहतर गुणवत्ता वाली चिकित्सा सामग्री की कमी को लेकर मेडिकल स्टाफ प्रदर्शन पर उतर आया है। न्यूयॉर्क और कैलिफॉर्निया राज्य में जगह-जगह तख्ता और बैनर लिए नर्सों और अन्य हेल्थ स्टाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार उन्हें बेहतर उपकरण उपलब्ध कराए क्योंकि अगर इसके अभाव में उनकी जान चली गई तो फिर लोगों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पूरे देश में 276,500 लोग कोरोना की चपेट में हैं। अब स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि अब तक सेना सिर्फ मेकशिफ्ट अस्पतालों को बनाने और मेडिकल आपूर्ति के काम में लगी हुई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा युद्ध जैसी इस स्थिति से लड़ने के लिए कोई भी बेहतर तरीके से तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, हम कोरोना वायरस से लड़ने में अपने प्रयास के तहत सेना की जिम्मेदारी बढ़ाने जा रहे हैं। क्योंकि इस युद्ध जैसी स्थिति से लड़ने के लिए कोई बेहतर तरीके से तैयार नहीं है। एक अदृश्य दुश्मन सामने खड़ा है।
अनिरुद्ध, ईएमएस, 4 अप्रैल 2020

रोम। इटली का एक गांव ऐसा भी है, जो कोरोना वायरस से पूरी तरह बचा हुआ है। इटली के पूर्वी क्षेत्र पियोदमॉन्ट में स्थित तुरीन शहर के इस गांव का नाम 'मोंताल्दो तोरीनीज' है। यहां लोगों का मानना है कि 'जादुई पानी' की वजह से कोरोना वायरस का एक भी केस नहीं आया। मालूम हो ‎कि पूरी दुनिया में किलर कोरोना वायरस की वजह से अभी तक सबसे अधिक जानें इटली में गई हैं। इटली में लगभग 13 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1 लाख पांच हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। लोगों का कहना है कि इसी पानी ने नेपोलियन बोनापार्ट के सैनिकों का निमोनिया तक ठीक हो गया था। मोंताल्दो तोरीनीज गांव तुरीन से लगभग 19 किलोमीटर की दूरी पर है। तुरीन में शनिवार को कोरोना संक्रमण के लगभग 3,658 मामले सामने आए। वहीं, पियोदमॉन्ट इलाका बुरी तरह प्रभावित है और यहां 8,206 लोग संक्रमित हैं।पियोदमॉन्ट के मेयर ने सर्गेई गियोत्ती ने बताया कि यहां की स्वच्छ हवा और कुएं के पानी की वजह से सभी पूरी तरह ठीक हो गए। उन्होंने बताया, 'संभवतः कुएं के पानी की वजह से ऐसा हुआ।' उन्होंने बताया कि यहां से कई लोग तुरीन जाते हैं, जहां कोरोना महामारी फैली है, लेकिन स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवनशैली की वजह से यहां कोरोना नहीं फैल पाया। उन्होंने लोगों को जागरूक किया और सभी परिवारों को मास्क बांटे। उन्होंने बताया, 'मैंने गांव के लोगों को रोज हाथ साफ करने और लोगों के सीधे संपर्क में न आने को लेकर जागरूक किया। यह गांव इस इलाके का पहला क्षेत्र है, जहां सभी परिवारों को मास्क बांटे गए।' ऐसा माना जाता है कि 720 लोगों की आबादी वाले मोंताल्दो तोरीनीज गांव के कुएं का पानी नेपोलियन की सेना को ठीक करने में मददगार साबित हुआ था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट दूसरी बार निगेटिव आई है। व्हाइट हाउस के चिकित्सक सीन कोनली ने एक मेमो में लिखा, 'इस सुबह राष्ट्रपति का दोबारा कोविड-19 के लिए टेस्ट हुआ। वह स्वस्थ हैं और उनमें कोई लक्षण नहीं मिले हैं। उनका नमूना लेने में केवल एक मिनट लगा और 15 मिनट में परिणाम आ गया।'
द हिल की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति की रिपोर्ट निगेटिव आई है। कोरोना वायरस टास्कफोर्स प्रेस ब्रीफिंग में, राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए नर्सिंग होम के लिए नए दिशानिर्देशों की घोषणा की। इन दिशानिर्देशों में नर्सिंग होम को आदेश दिया गया है कि वह किसी भी अनावश्यक चिकित्सकीय आगंतुकों को आने की अनुमति न दें। नए दिशानिर्देशों के अनुसार नर्सिंग होम को कोविड-19 के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए निवासियों के एक समूह की देखभाल करने का काम एक ही स्टाफ को सौंपना चाहिए।

इसके अलावा राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशासन नर्सिंग होम को सुझाव देता है कि स्वस्थ और बीमार निवासियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र चिन्हित करें। ट्रंप ने कहा कि यह अभ्यास स्वास्थ्य एजेंसियों भविष्य में लंबे समय तक जारी रख सकते हैं। उनके दिशानिर्देश ऐसे समय पर सामने आए हैं जब देश भर के 140 से अधिक नर्सिंग होम कोविड-19 की चपेट में आ चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि रोग से सुरक्षा के रूप में मास्क पहनने के दिशानिर्देश भी जल्द ही दिए जाएंगे। इस बारे में पूछे जाने पर कि क्या लोगों को मास्क पहनना चाहिए, ट्रंप ने दुपट्टे (स्कार्फ) के इस्तेमाल की सिफारिश की क्योंकि यह मास्क से अधिक मोटा होता है। उन्होंने कहा, 'यदि लोग उसे (मास्क) पहनना चाहते हैं तो पहन सकते हैं। बहुत से मामलों में स्कार्फ बेहतर है। यह मोटा होता है।'

अमेरिका में पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 1169 मौतें हुई हैं। जिसके साथ ही मृतकों की संख्या 6000 के पार पहुंच गई है। वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या दो लाख के पार हो गई है जो दुनियाभर में सबसे ज्यादा है। इस परिस्थिति में अमेरिका अपने मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक वेंटीलेटर्स, चिकित्सा आपूर्ति और निजी सुरक्षा के लिए जरूरी सामान रूस से खरीदने के लिए राजी हो गया है।

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