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बीजिंग । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की है कि चीन ने पिछले चार दशकों में 77 करोड़ से अधिक लोगों का आर्थिक स्तर सुधारकर गरीबी के खिलाफ संघर्ष में पूर्ण जीत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा किया गया यह ‘चमत्कार', इतिहास के पन्नों पर दर्ज किया जाएगा। शी ने गरीबी उन्मूलन में देश की उपलब्धि पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए घोषणा की कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश से गरीबी का पूरी तरह उन्मूलन हो गया है।
चीन की जनसंख्या करीब 1.4 अरब है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश इतने कम समय में लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल नहीं हुआ है। शी ने कहा ग्रामीण इलाकों में रह रहे सभी गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाल लिया गया है। इसी के साथ ही, चीन ने 2030 की तय समयसीमा से 10 साल पहले ही गरीबी उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
उन्होंने कहा कि पिछले आठ से अधिक साल में ग्रामीण इलाकों में रह रहे अंतिम 9.899 करोड़ गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। सभी 832 गरीब काउंटी और 1,28,000 गरीब गांव गरीबी सूची से बाहर आ चुके हैं। शी ने कहा कि 1970 के दशक के आखिर में शुरू किए गए सुधार से लेकर अब तक चीन की मौजूदा गरीबी रेखा के अनुसार 77 करोड़ गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।
उन्होंने कहा कि चीन ने इस अवधि में वैश्विक स्तर पर गरीबी में आई कमी में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। शी जिनपिंग ने कहा कि इन उपलब्धियों के साथ चीन ने ‘चमत्कार' किया, जिसे ‘इतिहास के पन्नों में दर्ज' किया जाएगा। जिनपिंग ने 2012 के अंत में सत्ता संभाली थी और उस समय उन्होंने गरीबी के पूरी तरह उन्मूलन को अपना मुख्य लक्ष्य बताया था। उस समय चीन में करीब 10 करोड़ गरीब लोग थे। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार पिछले 40 साल में गरीबी से बाहर निकले चीनी लोगों का हिस्सा वैश्विक आंकड़े का 70 प्रतिशत से अधिक है।

दमिश्‍क । अमेरिका का जो बाइडेन प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और उसने सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकाने पर जोरदार हवाई हमला कर जमकर बमबारी की है। बताया जा रहा है कि इस मिलिशिया गुट ने इराक में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट हमला किया था। रॉकेट हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हो गए थे और एक ठेकेदार की मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि सुपर पावर अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनने के एक महीने बाद ही हवाई हमला करके जो बाइडेन ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने रॉकेट हमले के जवाब में भले ही यह हवाई हमला किया हो लेकिन उसके दायरे को सीमित रखा है ताकि तनाव न बढ़े। साथ ही इस हमले को सीरिया में अंजाम दिया गया है ताकि इराक की सरकार को राहत मिले जो खुद भी 15 फरवरी को हुए रॉकेट हमले की जांच कर रही है। यह हवाई हमला बाइडेन प्रशासन की पहली सैन्‍य कार्रवाई है।
बाइडेन प्रशासन ने अपने शुरुआती दिनों में यह इरादा जाहिर किया था कि वे चीन की ओर से पेश की चुनौती पर ज्‍यादा फोकस करेंगे। अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि इस हवाई हमले को सीधे राष्‍ट्रपति जो बाइडेन के आदेश पर अंजाम दिया गया है। इस हमले की घोषणा करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा कि इस संतुलित सैन्‍य कार्रवाई को राजनयिक कदमों के साथ अपने साथियों के साथ विचार विमर्श के बाद अंजाम दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता जॉन किर्बी ने कहा कि इस सैन्‍य कार्रवाई के जरिए राष्‍ट्रपति बाइडेन ने यह स्‍पष्‍ट संदेश दिया है कि हम अमेरिकी और गठबंधन सेना के लोगों की रक्षा करेंगे। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने कई बार जवाबी सैन्‍य कार्रवाई की है। इराक में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट हमले ऐसे समय पर किए गए थे जब वॉशिंगटन और तेहरान दोनों वर्ष 2015 में किए गए परमाणु समझौते को फिर से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्‍ता तलाश रहे हैं।

ब्रिसबेन । दुनिया में लाखों की संख्या में कीट-पंतगों की प्रजाति होती हैं। इनमें छोटे से लेकर विशाल आकार वाले इन कीड़ों जंगलों और घरों में देखे जाता है। लेकिन ऑस्‍ट्रेलिया के ब्रिसबेन शहर में एक विशाल कीड़ा नजर आया है। कीड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह इंसान के हाथ के पंजे के बराबर है। ब्रिसबेन शहर के कैंप माउंटेन इलाके में घूमने गए एक परिवार को यह कीड़ा दिखाई दिया और उन्‍होंने इसकी तस्‍वीर फेसबुक पर डाल दी।
यह कीड़ा एक पेड़ पर बैठा हुआ था और उसे देखकर परिवार एक बार तो दहशत में आ गया। इस परिवार ने उसे नापने की कोशिश की तो वयस्‍क आदमी के मुट्ठी के बराबर यह कीड़ा रहा, वहीं बच्‍चे के पंजे से भी बड़ा था। इस तस्‍वीर को सोशल मीडिया में डाले जाने के बाद कीड़ों पर नजर रखने वाले एक व्‍यक्ति ने कॉमेंट किया, 'वाह, यह तो असाधारण है।' एक अन्‍य यूजर ने लिखा, 'यह कितना सुंदर है।' इस कीड़े की दुर्लभता को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए लेकिन माना जा रहा है कि यह तस्‍वीर विशाल वुड मोथ की है जो क्विंसलैंड के तट पर अक्‍सर पाया जाता है। इन कीड़ों के पंखों का फैलाव 25 सेंटीमीटर और लंबाई 15 सेंटीमीटर हो सकती है। ये देखने में भूरे होते हैं और सीने पर गहरा दाग होता है। दिन में ये कीड़े अपने पंखों को मोड़ लेते हैं। ये कीड़े आमतौर पर गर्मियों के महीने में पाए जाते हैं। ये दुनिया के सबसे भारी कीड़े होते हैं जिनका वजन करीब 30 ग्राम तक होता है। ऑस्‍ट्रेलिया के पूर्वी तट पर विशाल कीड़े बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।

टोक्यो । विकसित और संपन्न राष्ट्रों में शुमार जापान में बढ़ते आत्महत्या के मामलों में तेजी से यहां की सरकार चिंतित है। सपकार ने अस समस्या से समाधान के लिए यहां मिनिस्‍टर ऑफ लोन्‍लीनेस यानी अकेलेपन का मंत्रालय बनाया है। जी हां यहां पर लोगों के अकेलेपन को दूर करने के लिए एक मंत्री और मंत्रालय होगा। दुनियाभर में फैली महामारी के बाद यहां आत्महत्या के बढ़ते मामलों की वजह से यहां की सरकार ने यह अहम कदम उठाया है। जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा ने कैबिनेट में मिनिस्‍टर ऑफ लोन्‍लीनेस की नियुक्ति की है। इस मंत्रालय के जरिए लोगों के अकेलेपन और नागरिकों में तनाव की स्थिति को दूर करना है।
पीएम सुगा ने शुक्रवार को तेतसुशी साकामोटो को देश का मिनिस्‍टर ऑफ लोन्‍लीनेस नियुक्‍त किया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मंत्रालय की मदद से आत्महत्या की दर में कमी आएगी। पीएम सुगा ने कहा, ‘महिलाएं बहुत ही अकेला महसूस कर रही हैं और आत्‍महत्‍या की दर बढ़ती जा रही है।’ खबरों के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान जापान में साल 2020 में अकेलेपन की वजह से बड़ी संख्या में आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। यहां पिछले 11 सालों के बाद आत्महत्या के मामलों में इतना इजाफा हुआ है। इसी को देखते हुए जापान सरकार ने यह फैसला लिया है। आपको बता दें 2020 में जापान में सबसे ज्‍यादा आत्‍महत्‍या का रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। महामारी के समय में एक दशक में सबसे ज्‍यादा लोगों ने आत्‍महत्‍या की और 20,919 लोगों की जिंदगी खत्‍म हो गई। साल 2019 की तुलना में सुसाइड रेट में 3.7 फीसदी की दर से इजाफा हुआ।
जापान के अलावा कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में भी इस तरह का मंत्रालय है। ऐसा माना जा रहा है कि जापान में महामारी के दौरान आबादी में अकेलेपन की समस्या बढ़ी है। बता दें ऐसे समय में लोगों ने इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल किया है और जिसकी वजह से लोग अकेलेपन के शिकार हो गए हैं। हाल ही में एक स्टडी में कुल 1,750 युवाओं को शामिल किया था। इसमें 16, 17 और 18 वर्ष की उम्र के युवा थे, जिसमें से अधिकांश लोगों ने इंटरनेट पर काफी समय खर्च किया था।

जेनेवा । संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी अभियानों के प्रमुख मार्क लोवकॉक ने कहा है कि युद्ध प्रभावित देश यमन में हालत तेजी से बिगड़ रहे हैं। अगर दानदाताओं खासतौर पर खाड़ी के पड़ोसी देशों ने संयुक्त राष्ट्र की 3.85 अरब डॉलर की मांग पर उदारतापूर्वक दान नहीं दिया,तब यमन को अब तक के सबसे भयानक अकाल आ सकता है। लोवकॉक ने कहा कि खाड़ी देशों खासतौर पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने वर्ष 2018 और 2019 में उदारतापूर्वक दान दिया था,लेकिन पिछले वर्ष उन्होंने इसमें जबरदस्त कटौती की थी। उन्होंने कहा कि इससे एजेंसी वर्ष 2020 में प्रति माह केवल 90लाख लोगों को खाद्य पदार्थ और अन्य मानवीय सहायता मुहैया करा पाई थी जबकि वर्ष 2019में खाद्य पदार्थ और मानवीय सहायता पाने वाले लोगों की संख्या एक करोड़ 30 लाख से एक करोड़ 40 लाख व्यक्ति प्रति माह थी। उन्होंने कहा वे 40 लाख लोग जिन्हें पिछले वर्ष भोजन नहीं मिला वे ‘‘ उन लोगों में शामिल हैं जो भुखमरी की ओर बढ़ रहे हैं।’’
लोवकॉक ने कहा, कोष के बिना और लोग काल के गाल में समा जाएंगे, अब जो देश के हालात हैं, जहां कुछ इलाकों में पहले ही अकाल है, उसमें अकाल की विभीषिका और बढेगी और ऐसा अकाल दुनिया ने दशकों में नहीं देखा होगा। तब इस लिहाज से बहुत कुछ दांव पर है। गौरतलब है कि अरब के इस सर्वाधिक निर्धन देश में संघर्ष 2014 में उस वक्त शुरू हुआ जब ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना और देश के उत्तरी इलाकों पर कब्जा कर लिया था।

सैन डिएगो । अमेरिका में नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई फैसलों को पलट दिया गया। बाइडेन ने ट्रंप के द्वारा वैश्विक महामारी के दौरान ग्रीन कार्ड जारी करने पर लगाई रोक को हटा दिया गया है। अधिवक्ताओं का कहना था कि यह अमेरिका में वैध आव्रजन को रोक रहा था। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल वसंत में कोरोना वायरस के कारण बढ़ती बेरोजगारी से निपटने का हवाला देते हुए 2020 के अंत तक ग्रीन कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी थी, जिसे 31 दिसम्बर को उन्होंने मार्च अंत तक के लिए बढ़ा दिया था। बाइडेन ने कहा कि वैध आव्रजन को रोकना ‘अमेरिका के हित में नहीं है।’ बाइडेन ने कहा, ‘बल्कि इससे अमेरिका को नुकसान पहुंचता है.... जिसमें अमेरिकी नागरिकों या वैध स्थायी निवासियों के परिवार के सदस्यों को यहां उनके परिवारों से मिलने से रोकना शामिल है। यह अमेरिका के उद्योगों को भी प्रभावित करता है, जिसका विश्वभर के प्रतिभाशाली लोग हिस्सा हैं।’ अमेरिकी आव्रजन वकील संघ के अनुसार, इन आदेशों से अधिकतर आव्रजन वीजा पर रोक लग गई थी।

वाशिंगटन । अमेरिका ने कहा कि म्यांमार की सेना को सत्ता छोड़ देनी चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार बहाल करनी चाहिए। अमेरिका ने कहा कि वह म्यांमार के लोगों के साथ है। देश में असैन्य नेतृत्व वाली सरकार की लोगों की इच्छा का समर्थन करता है। इस माह म्यांमार की सेना ने सरकार का तख्तापलट कर दिया था और आंग सान सू की तथा राष्ट्रपति यू विन मिंट समेत कई नेताओं को बंदी बना लिया था। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा जुंटा (सैन्य प्रशासन) को दिए गए हमारे संदेश में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्हें सत्ता छोड़ देनी चाहिए, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को बहाल करना चाहिए और म्यांमार के लोगों के प्रति हमारे संदेश में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। प्राइस के बयान से एक दिन पहले अमेरिका ने म्यांमार के सैन्य अफसरों के विरुद्ध अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।
अमेरिका और कई पश्चिमी देश म्यांमार को उसके पूर्ववर्ती नाम बर्मा से संबोधित करते रहे हैं। प्राइस ने कहा हम बर्मा के लोगों के साथ हैं। हम विश्व में समान विचारधारा वाले अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर, बर्मा में असैन्य सरकार की बहाली का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बर्मा के सैन्य अफसरों को समझना चाहिए कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकार को हटाने के उनके प्रयास के नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि तख्तापलट के लिए जवाबदेही तय करने का अकेला अमेरिका ही पक्षधर नहीं है। प्राइस ने कहा, हमने ब्रिटेन और कनाडा द्वारा हाल में लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन किया है और यूरोपीय संघ जो भी कदम उठाएगा हम उसका भी स्वागत करेंगे।

वाशिंगटन । अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने बांग्लादेश के अपने समकक्ष एके अब्दुल मोमन के साथ आर्थिक, रक्षा और आतंकवाद रोधी सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। फोन पर की गई बातचीत में दोनों नेताओं ने दक्षिण एशिया तथा बृहद् हिंद-प्रशांत क्षेत्र की चुनौतियां का मिलकर सामना को लेकर सहमति जताई। इस दौरान दोनों ने म्यांमार में जारी गतिरोध, रोहिंग्या शरणार्थी संकट के स्थाई समाधान और श्रमिक एवं मानवाधिकारों का सम्मान किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक बयान में बताया कि ब्लिंकन और मोमन ने आर्थिक, आतंकवाद रोधी कदमों तथा रक्षा सहयोग को गहरा करने और जलवायु परिवर्तन जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने के तरीकों पर भी चर्चा की।
प्राइस ने कहा ब्लिंकन ने 2021 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ के लिए विदेश मंत्री मोमन को शुभकामनाएं दी और दोनों नेताओं ने दक्षिण एशिया तथा बृहद् हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतियों से निपटने के लिए निकट सहयोग की इच्छा व्यक्त की। वहीं, ब्लिंकन ने मोमन से बातचीत के बाद ट्वीट किया विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन से बात कर अच्छा लगा और उन्हें बांग्लादेश की स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ के लिए शुभकामनाएं दी। हमने अमेरिका और बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने की पुष्टि की और दक्षिण एशिया तथा हिंद-प्रशांत में पेश आने वाली चुनौतियों से मिलकर निपटने को उत्साहित हैं। क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर भारत, अमेरिका और कई अन्य विश्व शक्तियां स्वतंत्र, मुक्त और समृद्ध हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने को लेकर बातचीत कर रही हैं।

कोलंबो । श्रीलंका के झटका देने के बाद भी पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपने कोलंबो दौरे के दौरान कश्‍मीर का मुद्दा उठाने से बाज नहीं आए। इमरान ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच विवाद का एकमात्र मुद्दा कश्‍मीर है, इस केवल बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि सत्‍ता में आने के बाद मैंने भारत और मोदी को बातचीत का सुझाव दिया था लेकिन मैं असफल रहा। मुझे भरोसा है कि आखिर चीजें परवान चढे़गी। इमरान का बयान उस समय पर आया है, जब भारत ने अपने रुख में नरमी लाकर उनके विमान को अपने हवाई क्षेत्र से जाने की अनुमति दे दी थी।
इमरान खान ने कोलंबो में कहा, मैं जैसे ही सत्‍ता में आया था, मैंने भारत की ओर हाथ बढ़ाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि इस उपमहाद्वीप में आगे बढ़ने का तरीका यह है कि हम अपने मतभेदों का समाधान बातचीत के जरिए दें। मैं सफल नहीं रहा लेकिन मुझे भरोसा है कि अंतत: चीजें परवान चढ़ेंगी।' उन्‍होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें भी उसी तरह से सभ्‍य तरीके से रहना चाहिए। कश्‍मीर में आतंकियों को भेजने वाले इमरान ने कहा,हम चाहते हैं कि इस उपमहाद्वीप में सभी विवादों का समाधान संवाद के जरिए हो। इमरान ने बड़बोलापन दिखाकर कहा कि पाकिस्‍तान अमेरिका और चीन के बीच खाई को कम करने में भूमिका निभा सकता है।
इसके पहले भारत ने पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान के विमान को अपने एयरस्‍पेस के इस्‍तेमाल की मंजूरी दे दी थी। मंगलवार को इमरान भारत के हवाई इलाके से होकर श्रीलंका पहुंचे थे। अगर भारत एयरस्‍पेस इस्‍तेमाल करने की अनुमति नहीं देता तब इमरान के विमान को खासा घूमकर लंबे रास्‍ते से श्रीलंका पहुंचना पड़ता। 2019 में पाकिस्‍तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उड़ानों के लिए अपना एयरस्‍पेस खोलने से इनकार कर दिया था। तब पीएम मोदी को अमेरिका और सऊदी अरब जाना था। पाकिस्‍तान ने कश्‍मीर में कथित‍ मानवाधिकार उल्‍लंघन को वजह बताया था। इससे पहले श्रीलंका ने पहले ही इमरान का संसद में प्रस्‍तावित भाषण रद्द कर दिया है। पाकिस्‍तानी मीडिया में इस लेकर खूब हो-हल्‍ला मचा और आरोप लगाया गया कि भारत के दबाव में श्रीलंका ने ऐसा किया है।

वाशिंगटन । व्हाइट हाउस ने कहा है कि यदि अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन होता है, तो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन इसका समर्थन नहीं करेंगे। इसके साथ ही व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए अगला कदम उठाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। अमेरिका और तालिबान के बीच फरवरी 2020 में समझौता हुआ था जिसके तहत स्थाई रूप से संघर्ष विराम, तालिबान और अफगानिस्तान की सरकार के बीच शांति स्थापना को लेकर बातचीत और एक मई तक सभी विदेशी सेनाओं की वापसी पर सहमति बनी थी।
अफगानिस्तान में लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिक हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन होने पर बाइडन इसे समर्थन देंगे, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा मुझे नहीं लगता कि वह इसका समर्थन करेंगे। साकी ने कहा अफगानिस्तान में अगला कदम उठाने की प्रक्रिया जारी है। इस पर चर्चा हो रही है और आगे क्या होगा मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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