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अमेरिकी नौसेना ने ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के आधार पर चीन पर पलटवार किया है। न्यूज रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पास एंटी एयरक्राफ्ट वाहक हथियारों का बड़ा जखीरा है और दक्षिण चीन सागर पूरी तरह से चीनी सेना के कब्जे में है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि इससे वे डरे नहीं हैं।
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट में लिखा, "चीन के पास DF-21D और DF-26 जैसे हथियारों की लंबी शृखंला मौजूद है। दक्षिण चीन सागर पूरी तरह से एलपीए की मुट्ठी में है। इस इलाके में किसी भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट वाहक की गतिविधि से PLA खुश हो जाएगी: विशलेषक"
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने लिखा, 'दक्षिणी चीन सागर में अमेरिकी नौसेना का दो विमान वाहक मौजूद है। #USSNimitz और #USSRonaldReagan भयभीत नहीं हैं।' आपको बता दें कि जवाब के साथ हैशटैग #AtOurDiscretion का इस्तेमाल किया गया।
अमेरिका ने अपने दो विमान वाहक को दक्षिणी चीन सागर में यूएसएस रोनॉल्ड रीगन और यूएसएस निमित्ज को सैन्य अभ्यास के लिए भेजा है। यह अभ्यास लंबे समय से नियोजित है, लेकिन चीन ने भी पैरासेल द्वीप समूह के पास सैन्य अभ्यास आयोजित किया है, जिसकी अमेरिका और अन्य देशों द्वारा आलोचना की गई है। दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहकों के अमेरिकी नौसेना के संचालन ने इसे और बल दिया है।  हांगकांग सहित कई क्षेत्रों में वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया।
कोरोना वायरस को लेकर भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
अमेरिका ने कोरोनो वायरस को लेकर भी लगातार चीन पर हमला बोला है। वॉशिंगटन ने बीजिंग पर दुनिया से जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। चीन ने मई में ट्विटर पर एक संक्षिप्त वीडियो के साथ जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन कोरोनो वायरस प्रकोप पर बीजिंग से सावधानी के शब्दों को नहीं सुनता है।
एनिमेटेड वीडियो को गुरुवार को फ्रांस में चीनी दूतावास द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किया गया और इसका शीर्षक था "वन्स अपॉन ए वायरस"। वीडियो में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका कार्टून और आंकड़ों के साथ एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहा है। वीडियो में चीनी पक्ष का कहना है कि उसने जनवरी में एक नए वायरस की खोज के बारे में बताया, अमेरिका ने इसका कोई ध्यान नहीं रखा।
एक मिनट 39 सेकंड के वीडियो में चीन को जनवरी में अपने लॉकडाउन की घोषणा करते हुए दिखाया गया है और अमेरिका इसे बर्बर करार दे रहा है।
 

काठमांडू । नेपाल में जारी राजनीतिक घमासान में दो दिन की राहत मिल गई है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे को लेकर मामला स्टेंडिंग कमेटी की बैठक टलने से दो दिन के लिए टल गया है। इस बीच, विभिन्न दलों की बैठकों का दौर जारी रहा।
पार्टी के कई सीनियर लीडर चाहते हैं कि इस मसले का हल आपसी सहमति से निकाला जाए। इस बीच, खबर है कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से मिलने शीतल निवास पहुंचे हैं।
ओली के मुख्य विरोधी और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड के बीच शनिवार को 3 घंटे बातचीत हुई। दोनों के बीच हुई चर्चा से ही सोमवार को होने वाले राजनीतिक फेरबदल का निचोड़ निकलेगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ही नेताओं पर यह दबाव है कि वो पार्टी में किसी तरह की टूट न होने दें।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में ओली की पार्टी दो फाड़ की कगार पर पहुंच गई है। पार्टी का दूसरा धड़ा भारत से विरोध नहीं चाहता। इस बीच, ओली ने दूसरे धड़े के बड़े नेताओं से मुलाकात की और सहयोग मांगा। बुधवार को प्रचंड की अध्यक्षता में पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में 44 में से 33 सदस्यों ने ओली के इस्तीफे की मांग की थी। इसके बाद गुरुवार को ओली के इस्तीफे पर सहमति नहीं होने पर समिति की बैठक टाल दी गई थी। इस बीच, ऐसी भी चर्चा है कि ओली नई पार्टी बना सकते है। उन्होंने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-यूएमएल के नाम से पार्टी का रजिस्ट्रेशन भी कराया हुआ है। ऐसे में दो दिन की राहत के बाद सोमवार को ही नेपाल में राजनीति का बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
 

कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने अप्रवासी कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस बिल के कारण करीब आठ लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है। गल्फ न्यूज ने स्थानीय मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने निर्धारित किया है कि अप्रवासी कोटा बिल का ड्राफ्ट संवैधानिक है।

इस बिल के अनुसार, कुवात में भारतीयों की आबादी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। बिल को संबंधित समिति में स्थानांतरित करने की बात कही गई है ताकि इसके लिए एक व्यापक योजना बनाई जाए।

आउटलेट ने बताया कि इसस बिल के कारण करीब 8,00,000 भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है। आपको बता दें कि कुवैता में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है, जिसकी कुल संख्या तकरीबन 15 लाख है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के साथ ही वहां प्रवासियों के खिलाफ बयानबाजी शुरू हो चुकी थी। इसके बाद स्थानीय शासन और सरकारी अधिकारियों ने कुवैत से विदेशियों की संख्या कम करने की बात कही। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, कुवैत में कोरोनो वायरस के 49,000 से अधिक मामले सामने आए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने कुवैत के प्रधानमंत्री, शेख सबा अल खालिद अल सबाह ने अप्रवासियों की आबादी 70 से घटाकर 30 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा।

फोर्ट लॉडरडेल । एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के 40 से 50 राज्यों में पुष्ट मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।  चार जुलाई को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस से पहले कोरोना वायरस के मामलों का बढ़ना चिंता का एक विषय बन गया है। अमेरिका के चार राज्यों एरिजोना, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा और टेक्सास में बृहस्पतिवार को कुल 25,000 नए मामले सामने आए थे।वहीं देश में रोजाना 50,000 से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं।अमेरिका में संक्रामक रोग के शीर्ष विशेषज्ञ डॉ एंथनी फाउची ने अमेरिका चिकित्सक संघ के ‘लाइवस्ट्रीम’ में कहा था, ‘‘ हमने एक बेहद परेशान करने वाला सप्ताह देखा है।’’स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक मास्क पहनने के नियम को लागू करने से इनकार कर रहे टेक्सास के रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेज एबॉट ने लोगों को मास्क पहनने का आदेश दिया है। इन बढ़ते मामलों का कारण लॉकडाउन के हटने के बाद अमेरिकी नागरिकों का मास्क ना पहनना और सामाजिक दूरी ना बनाना माना जा रहा है।फाउची ने आगाह किया कि अगर लोगों ने बात मानना शुरू नहीं किया तो, ‘‘ हम कुछ गंभीर पेरशानियों में पड़ सकते हैं।’’‘जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय’ के अनुसार अमेरिका में 51,200 नए मामले आए थे। ‘कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट’ द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार 10 को छोड़कर सभी राज्यों में पिछले 14 दिन में नए मामले तेजी से बढ़े हैं। अरिजोना, टेक्सास और फ्लोरिडा में हालत बेहद खराब है। कैलिफोर्निया के अलावा यहां भी बार, रेस्तरां और सिनेमाघर पिछले कुछ सप्ताह से दोबारा बंद कर दिए गए हैं। पूर्वोत्तर के बाहर केवल नेब्रास्का और दक्षिण डकोटा में कोविड-19 के मामले कम हुए हैं। वहीं नेवेडा में मामले तीन गुना और इडाहू में मामले पांच गुना बढ़े हैं। अमेरिका में मामले ऐसे समय बढ़ रहे हैं जब देश चार जुलाई को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने की ओर बढ़ रहा है। इस बीच, सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में बेरोजगारी दर घट का 11.1 प्रतिशत हो गई, जिसका कारण 48 लाख नौकरियों का सृजन करना है। ‘जॉन हॉपकिन्स’ के अनुसार दुनिया में कोविड-19 के सबसे अधिक करीब 27 लाख मामले अमेरिका में ही सामने आए हैं। वहीं यहां इससे 1,28,000 लोगों की जान जा चुकी है। दुनिया भर में कोविड-19 के 1.7 करोड़ मामले सामने आए हैं और 5,17,000 लोगों की इससे जान जा चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसके मद्देनजर आगाह किया है कि बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठे होकर जश्न मनाने से वायरस के मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं। कई नगर निकायों ने आतिशबाजी के कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। वहीं कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में ‘बीच’ बंद रहेंगे।
 

लंदन।  नासा के लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटेर (एलआरओ) स्पेसक्राफ्ट के मिनियेचर रेडियो फ्रीक्वेंसी इंस्ट्रूमेंट ने पाया है कि चांद पर लोहे और टाइटेनियम का भंडार है। अर्थ ऐंड प्लैनटरी साइंस लेटर्स में छपी इस खोज से जुड़े जॉन हॉपकिन्स अप्लाइड फिजिक्स लैबरेटरी से मिनि-आरएफ के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर वेस पैटरसन का कहना है कि रेडार इंस्ट्रूमेंट ने हमारे सबसे करीबी पड़ोसी की उतपत्ति और कॉम्पलेक्सिटी की नई जानकारी देकर हमें हैरान कर दिया है। 
 दरअसल, अभी तक माना जाता रहा है कि मंगल ग्रह के आकार के प्रोटोप्लैनेट या प्राग्गह और एकदम नई पृथ्वी के बीच टक्कर से चांद की उतपत्ति हुई थी। इसलिए चांद का ज्यादातर केमिकल कंपोजिशन पृथ्वी से मिलता जुलता है। इसकी गहराई में जाकर देखें तो पाएंगे कि चांद का अंदरूनी हिस्सा एक समान नहीं है। चांद की सतह के उजाले हिस्से जिन्हें लूनर हाईलैंड्स कहा जाता है, वहां चट्टानों में पृथ्वी की तरह कुछ मात्रा में मेटल मिलते हैं। यदि यह माना जाए कि टक्कर के वक्त पृथ्वी की परतें अच्छी तरह से कोर, मैंटल और क्रस्ट में विकसित हो चुकी थीं तो यह समझा जा सकता है कि चांद के अंदर ज्यादा मेटल नहीं रहा होगा। हालांकि, जब चांद के अंधेरे वाले हिस्से मरिया को देखा जाता है तो पता चलता है कि वहां कई जगहों पर पृथ्वी से भी ज्यादा मेटल है। इस अंतर की वजह से वैज्ञानिक हमेशा से उलझन में रहे हैं और इस बात पर शोध जारी रहा कि आखिर दूसरे पराग्ग्रह का चांद पर कितना असर रहा होगा।
मिनि-आरएफ ने खोजा एक पैटर्न: 
मिनि-आरएफ को अब एक पैटर्न मिला है, जिससे इस सवाल का जवाब मिल सकता है। इसकी मदद से रिसर्चर्स को चांद के उत्तरी गोलार्ध के क्रेटर्स की मिट्टी में एक इलेक्ट्रकिल प्रॉपर्टी मिली है। इस इलेक्ट्रिकल प्रॉपर्टी को डाइइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट कहते हैं। किसी मटीरियल और स्पेस के वैक्यूम में इलेक्ट्रिक फील्ड ट्रांसमिट करने की रेलेटिव अबिलिटी यानी सापेक्ष क्षमता को डाइइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट कहते हैं। इसकी मदद से गड्ढों में छिपी बर्फ को खोजा जा रहा था। हालांकि, टीम को पता चला कि गड्ढे के आकार के साथ-साथ यह क्षमता भी बढ़ती जा रही थी। यानी जितने बड़े क्रेटर, उतना ज्यादा डाइइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट।
 

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनपीसी) की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की बैठक बृहस्पतिवार को स्थगित कर दी गई क्योंकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे पर कोई आम सहमति बना पाने में नाकाम रहा।

काठमांडू। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की अहम बैठक में शनिवार को प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के भविष्य पर निर्णय लिया जाएगा। पार्टी सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। भारत विरोधी टिप्पणी करने को लेकर प्रधानमंत्री पद से ओली के इस्तीफे की बढ़ती मांग के मद्देनजर यह बैठक हो रही है। हिमालयन टाइम्स समाचार पत्र में यह खबर प्रकाशित हुई है कि ओली और एनसीपी के र्काकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास में बैठक की। मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि तीन घंटे तक चली बैठक दोनों शीर्ष नेताओं के बीच विश्वास बहाल करने के लिये हुई। ओली के साथ बैठक के बाद प्रचंड ने नेपाल की राष्ट्रवति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनपीसी) की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की बैठक बृहस्पतिवार को स्थगित कर दी गई क्योंकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे पर कोई आम सहमति बना पाने में नाकाम रहा। यह समिति पार्टी की सबसे प्रभावशाली इकाई है। एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनकी हालिया भारत विरोधी टिप्पणी ‘‘ना तो राजनीतिक रूप से सही है और ना कूटनीतिक रूप से उपयुक्त है। ’’ प्रचंड ने कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी कि भारत उन्हें अपदस्थ करने की साजिश रच रहा है , ना तो राजनीतिक रूप से सही है और ना कूटनीतिक रूप से उपयुक्त है।’’

प्रधानमंत्री ओली (68) ने रविवार को दावा किया था कि उन्हे पद से हटाने के लिये दूतावासों और होटलों में विभिन्न तरह की गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि देश के मानचित्र को अद्यतन कर उसमें रणनीतिक रूप से तीन भारतीय क्षेत्रों- लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा--को शामिल किये जाने संबंधी उनकी सरकार के कदम के बाद के खेल में कुछ नेपाली नेता भी संलिप्त हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक दौरान प्रचंड द्वारा कही गई बात को उद्धृत करते हुए कहा कि दक्षिणी पड़ोसी (देश) और अपनी ही पार्टी के नेताओं पर प्रधानमंत्री ओली द्वारा आरोप लगाया जाना उचित नहीं है।

प्रचंड ने पहले भी और बार-बार यह कहा है कि सरकार तथा पार्टी के बीच समन्वय का अभाव है। साथ ही, वह एनसीपी द्वारा ‘‘एक व्यक्ति एक पद’’ प्रणाली का पालन किये जाने पर जोर दे रहे हैं। एनसीपी के दोनों धड़ों--ओली के नेतृत्व वाले और प्रचंड के नेतृत्व वाले--के बीच मतभेद उस वक्त बढ़ गया जब प्रधानमंत्री ने बजट सत्र का सत्रावसान करने का बृहस्पतिवार को एकपक्षीय तरीके से फैसला किया। मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक, ओली ने संसद का सत्रावसान करने का फैसला किया है, ताकि वह पार्टी को विभाजित करने वाले एक विवादास्पद विधेयक को फिर से पेश कर सकें।

सूत्रों ने बताया कि प्रचंड ने शनिवार को पार्टी की स्थायी समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें प्रधानमंत्री के भविष्य पर निर्णय लिया जा सकता है। स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा कि शनिवार को समिति की बैठक के दौरान दोनों पक्ष कोई ऐसा तंत्र बनाने पर काम करेंगे, जिसके तहत पार्टी और सरकार दोनों को कुछ नियम-कायदों का पालन करना होगा, ताकि मतभेद दूर हो सकें। उन्होंने यह विचार प्रकट किया कि प्रधानमंत्री ओली मनमाने तरीके से सरकार चला रहे हैं और वह पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड को अपना काम नहीं करने दे रहे हैं। ओली और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, दोनों ही सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष हैं।

एनसीपी की केंद्रीय समिति के सदस्य एवं विदेश मामलों के पार्टी के उप प्रमुख बिष्णु रिजाल ने कहा कि अब प्रधानमंत्री ओली के समक्ष यह विकल्प है कि वह एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत का पालन करते हुए या तो पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ें या फिर प्रधानमंत्री पद का। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मतभेदों को खत्म करने के लिये दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाएगा ताकि शनिवार की बैठक के बाद संकट समाप्त हो जाए। ’’ मंगलवार को हुई स्थायी समिति की बैठक के दौरान प्रचंड और पूर्व प्रधानमंत्रियों माधव कुमार नेपाल तथा झालानाथ खनल ने विवादस्पद बयान देने को लेकर ओली से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था।

उन्होंने ओली से यह भी कहा था कि अपनी टिप्पणी को साबित करने के लिये वह साक्ष्य पेश करें। पार्टी में ओली हाशिये पर चले गये हैं क्योंकि काफी संख्या में वरिष्ठ नेता प्रचंड के साथ हैं। ओली के पास स्थायी समिति में सिर्फ 15 सदस्यों का ही समर्थन है। इस बीच, राम कुमारी झाकरी और बिजय पौडेल सहित एनसीपी नेताओं का एक धड़ा शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय के सामने धरना पर बैठ गया। वे शीर्ष नेतृत्व पर इस बारे में दबाव बनाना चाहते हैं कि पार्टी की संभावित टूट को टाल कर इसे अक्षुण्ण रखा जाए। वहीं, माय रिपब्लिका न्यूजपोर्टल की खबर के मुताबिक एनसीपी में निकट भविष्य में टूट होती नजर नहीं आ रही है क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर दोनों प्रमुख धड़े आपसी मतभेदों को दूर करने के लिये बातचीत कर रहे हैं। खबर के मुताबिक दिनमें आज एनसीपी के दूसरी श्रेणी के नेताओं ने ललितपुर में एक बैठक की। इसमें कई मंत्री शामिल हुए।

अमेरिका-ब्राजील में रोजाना करीब 50 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं लेकिन मौतें पहले के मुकाबले कम हो रही हैं। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की वजह ढूंढ निकाली है। उनका कहना है कि इस बदलाव के पीछे कोरोना वायरस का नया रूप ‘जी614’ जिम्मेदार है। इससे संक्रमण तो काफी तेजी से बढ़ रहा है लेकिन जान जाने का जोखिम कम हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का यह अध्ययन सेल पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना के नए रूप ने यूरोप से लेकर अमेरिका तक बहुत तेजी से संक्रमण फैलाया। हालांकि, लोगों को पहले से अधिक बीमार नहीं किया। यानी इस नए कोरोना वायरस से दुनिया में कोई नए तरह का खतरा पैदा नहीं होता है।  

अमेरिका के लॉस अलामॉस नेशनल लैबोरेटरी के इस अध्ययन के बारे में मुख्य लेखक बेट कोर्बर कहते हैं कि कोविड-19 के वायरस में रूप परिवर्तन (म्यूटेशन) की क्षमता है। हमने अप्रैल की शुरूआत में वायरस के अनुवांशिक अनुक्रम में म्यूटेशन होते पाया। जिससे पता लगा कि वायरस के पूर्व रूप ‘डी614’ में आश्चर्यजनक बदलाव हो रहे हैं।

इस आधार पर वैज्ञानिकों ने वायरस के कई अनुवांशिक अनुक्रमों को जांचा। साथ ही वायरस के इंसानों, जानवरों और प्रयोगशाला में कोशिकाओं पर रूप परिवर्तन का अध्ययन किया। जिससे पता लगा कि ज्यादातर संक्रमणों में वायरस का नया रूप ‘जी614’ मौजूद था जो कि ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाता है।

 नौ गुना तेजी से दुनिया में फैला कोरोना का नया रूप
कैलिफोर्निया के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी की वैज्ञानिक एवं प्रमुख शोधार्थी एरिका ओल्मन सैफायर का कहना है कि अब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोग ‘जी614’ कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। यह रूप  कोरोना के पूर्व रूप ‘डी614’ की तुलना में तीन से नौ गुना ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाता है। मार्च की शुरूआत में इसकी मौजूदगी यूरोप में थी और मार्च के अंत तक यह अमेरिका तक फैल चुका था।

कारण : प्रोटीन स्पाइक में बदलाव
रूप परिवर्तन ने कोरोना वायरस के प्रोटीन स्पाइक पर असर किया है। स्पाइक वायरस की वह संरचना होती है, जिसका इस्तेमाल करके वह मानव कोशिका से प्रवेश करता है।  

असर : संक्रमित करने की क्षमता बढ़ी
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कोरोना वायरस के जीन समूह में विभिन्नता के कारण मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने की उसकी क्षमता में सुधार हुआ और वह दुनिया भर में सबसे ताकतवर संक्रमण के रूप में फैल गया।

खतरा : श्वास नली में अधिक संक्रमण  
संक्रमण का यह नया रूप ‘जी614’ कोविड-19 के मरीजों की ऊपरी श्वास नली में अधिक संक्रमण करता है। जिसका मतलब है कि यह विषाणु नाक, आंखों और नाक के बीच के हिस्से और गले में ज्यादा तेजी से अपनी संख्या बढ़ाता है।  

चिंता : नए वर्जन पर वैक्सीन कितनी असरदार  
वैज्ञानिक अब यह समझने में लगे हैं कि कोरोना वायरस जी 614 को नष्ट करने में संभावित टीके कितने कारगर होंगे क्योंकि दुनियाभर में जिन टीकों के निर्माण का अनुसंधान चल रहा है, उनमें कोरोना के पूर्व रूप का प्रोटीन स्पाइक लिया गया है।

उम्मीद : मारक क्षमता खोता जाएगा
 ड्यूक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बर्लिन के अस्पतालों में भर्ती 1000 ऐसे मरीजों पर अध्ययन किया, जिन्हें नए रूप ने संक्रमित किया था। उन्होंने पाया कि नया रूप कोरोना के मूल रूप से ज्यादा खतरनाक नहीं है। इस आधार पर ऑन्कोलॉजी के प्रोफेसर लॉरेंस यंग कहते हैं कि जैसे-जैसे वायरस में म्यूटेशन होगा, उसका संक्रमण तो बढ़ेगा पर वह कमजोर होता जाएगा।

 

टोक्यो । जापान में अब ऐसी बुलेट ट्रेन चलेगी जो न केवल तेज दौड़ेगी बल्कि भूकंप के दौरान भी यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखेगी। इस ट्रेन का नाम है- एन700एस। इसके नाम में एस का मतलब है 'सुप्रीम।Ó यह ट्रेन टोक्यो से ओसाका शहर के बीच चलेगी। यह दुनिया की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेनों में से एक है। यह 360 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। सेंट्रल जापान रेलवे ने 13 साल बाद तोकैदो शिंकनसेन लाइन पर नया बुलेट ट्रेन मॉडल पटरी पर उतारा है। इस ट्रेन को ओलिंपिक खेलों के दौरान चलाया जाना था लेकिन कोरोना महामारी के चलते गेम्स नहीं हो पाए। बुलेट ट्रेन का यह मॉडल पिछली बुलेट ट्रेनों से ज्यादा अलग नहीं दिखाई देता। हालांकि यह ट्रेन यात्रियों के लिए ज्यादा आरामदायक है। एक नए ऐक्टिव सस्पेंशन सिस्टम की वजह से दौड़ते समय यह ट्रेन ज्यादा वाइब्रेट नहीं करती।
ऑटोमैटिक कंट्रोल और ब्रेकिंग सिस्टम
ट्रेन में अपग्रेडेड ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम है। इसके ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम इमरजेंसी के समय ट्रेन को तेजी से रोकने का काम करते हैं। इस बुलेट ट्रेन की खास बात है कि इसमें लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम है। इस सिस्टम की वजह से किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान अगर ट्रेन के पॉवर सिस्टम में खराबी आती है तो यह इस बैटरी के सहारे दौड़ सकती है और यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा सकती है। इस बुलेट ट्रेन की सीटों की बात करें तो इनका नया डिजाइन लंबी दूरी को यात्रियों के लिए ज्यादा आरामदायक है। इसके अंदर की लाइट्स माहौल को हल्का बना देती हैं। सीटों के ऊपर बने रैक की लाइट हर स्टॉप पर जलती है। ऐसा इसलिए ताकि कोई यात्री अपना सामान ट्रेन में ही न भूल जाए। ज्यादा सामान के लिए स्टोरेज एरिया इस मॉडल में जोड़ा गया है। हर कोच में दो की जगह छह सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं।
 

जिनेवा । कोरोना वायरस से दुनिया भर में मरने वालों की संख्या 5.15 लाख के पार पहुंच गई है। साथ ही संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 1.06 करोड़ से अधिक हो गया है।ताजा आंकड़ों के अनुसार विश्व भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 10,667,217 हो गई है, जबकि 515,646 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कोविड-19 के मामले में अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और रूस तीसरे स्थान पर है। वहीं कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है।
भारत में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के 19,148 नए मामले सामने आए हैं, और अब कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 6,04,641 हो गई है।इस अवधि में कोरोना से 434 लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 17,834 हो गई है। देश में कोरोना के 2,26,947 सक्रिय मामले हैं,और 3,59,860 लोग महामारी से निजात पा चुके हैं। भारत संक्रमण के मामले में विश्व में सबसे अधिक प्रभावित देशों की सूची में चौथे स्थान पर है।सबसे ताकतवार मुल्क अमेरिका में कोरोना से अब तक 26,85,806 लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 128,061 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ब्राजील में अब तक 14,48,753 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि 60,632 लोगों की मौत हो चुकी है।
रूस में संक्रमण से अब तक 653,479 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 9521 लोगों ने जान गई है। ब्रिटेन में संक्रमण के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। इस महामारी से 3,14,992 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 43,991 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। संक्रमण के मामले में पेरू और चिली विश्व में क्रमश: छठे और सातवें स्थान पर हैं। पेरू में संक्रमितों की संख्या 2,88,477 और मृतकों की संख्या 9860 हो गई है। चिली में कोरोना से 2,82,043 लोग संक्रमित हुए हैं और मृतकों की संख्या 5753 है। आठवें स्थान पर स्पेन में अब तक 249,659 लोग संक्रमित हुए है जबकि 28,346 लोगों की मौत हो चुकी है। यूरोपीय देश इटली में महामारी ने बहुत कहर बरपाया है। यहां अब तक कोविड-19 से 2,40,760 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 34,788 लोगों की मौत हुई है।
खाड़ी देश ईरान में संक्रमितों की संख्या 230,211 हो गई है और 10,958 लोगों की इसके कारण मौत हुई है। कोरोना संक्रमण के मामले में मैक्सिको फ्रांस से आगे निकल गया है। यहां संक्रमितों की संख्या 231,771 पहुंच गई है और अब तक वायरस से 28,510 लोगों की मौत हुई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना संक्रमितों की संख्या दो लाख से अधिक हो गई है। यहां अब तक 2,13470 लोग संक्रमित हैं तथा 4395 लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में अब तक 202,981 लोग संक्रमित हुए हैं और 29,864 लोगों की मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना संक्रमितों की संख्या 201,098 हो गई है और 5150 लोगों की मौत हो चुकी है।
ब्राजील में पिछले 24 घंटों में कोरोना के संक्रमण से 1,038 लोगों की मौत के साथ संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 60 हजार के पार हो चुकी है। जर्मनी में 195,893 लोग संक्रमित हुए हैं और 8,995 लोगों की मौत हुई है। वैश्विक महामारी कोरोना के उद्गमस्थल चीन में अब तक 84,816 लोग संक्रमित हुए हैं और 4,641 लोगों की मृत्यु हुई है। कोरोना वायरस से बेल्जियम में 9754, कनाडा में 8678, नीदरलैंड में 6132, स्वीडन में 5370, इक्वाडोर में 4576, स्विट्जरलैंड में 1965, आयरलैंड में 1738 और पुर्तगाल में 1579 लोगों की मौत हुई है।

बोस्टन । अमेरिका के बोस्टन शहर में कला आयोग ने उस प्रतिमा को हटाने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। जिसमें मुक्त किए एक दास को अब्राहम लिंकन के पैरों में घुटने के बल झुके हुए दिखाया गया है। जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद अमेरिका में दासता के प्रतीकों के खिलाफ बढ़ रहे गुस्से के बीच आयोग को इमैन्सिपेशन मेमोरियल के बारे में काफी शिकायतें मिली थी। यह प्रतिमा बोस्टन कॉमन के नजदीक एक पार्क में वर्ष 1879 से लगी है। यह प्रतिमा इससे तीन साल पहले वाशिंगटन डीसी में बनाई गई ऐसी ही प्रतिमा से मिलती जुलती है। प्रतिमा को बोस्टन में इसकारण  लगाया गया, क्योंकि इस शहर में प्रतिमा को बनाने वाले श्वेत शिल्पकार थॉमस बॉल का घर है। प्रतिमा को अमेरिका में दासों को मुक्त करने के जश्न के तौर पर लगाया गया लेकिन कई लोगों ने काले व्यक्ति के लिंकन के सामने घुटने के बल झुकने को लेकर आपत्ति जाहिर की थी।
बोस्टन के मेयर मार्टी वाल्श ने कहा,यह साफ है कि बोस्टन के निवासी और आगंतुक इस प्रतिमा से असहज महसूस कर रहे हैं। प्रतिमा को हटाने की मांग वाली याचिका पर 12,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों ने इस हटाने की अभी कोई तारीख तय नहीं की है और कहा कि 14 जुलाई को अगली बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा।

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