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कुंब्रिया,एक पुलिस अफसर ने ड्यूटी पर होने के दौरान पुलिस वैन में महिला के साथ 20 बार सेक्स किया. 29 साल के अफसर को जांच के बाद बर्खास्त कर दिया गया है.
ये मामला ब्रिटेन के कुंब्रिया का है. दोषी करार दिए गए अफसर मैट सिम्पसन 6 साल से पुलिस सेवा में थे. उन्हें गंभीर रूप से अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया गया.
ड्यूटी के दौरान सेक्स करने के लिए बर्खास्त अफसर अपना रेडियो हमेशा चालू रखते थे ताकि कॉल आने पर वह ऑन्सर कर सके. मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला के नए पार्टनर ने अफसर का मैसेज देख लिया और पुलिस को जानकारी दी.
जांच करने वाली कमेटी के चेयरमैन निकोलस वाकर ने कहा कि बर्खास्तगी से कम कुछ भी सजा दिया जाना सही नहीं होता.
निकोलस वाकर ने कहा कि जब अन्य पुलिसकर्मी काम कर रहे थे, ये अफसर ड्यूटी के नियमों का सरासर उल्लंघन कर रहा था.
वहीं, कुंब्रिया पुलिस ने डिप्टी चीफ मार्क वेबस्टर ने कहा कि विभाग के तमाम लोग हाई स्टैंडर्ड का पालन करते हैं. इसलिए ऐसी हरकत किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है. दोषी करार दिए गए मैट का बर्खास्त किया जाना बिल्कुल सही है.

राशिद ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘मुझे लगता है कि कश्मीर मसले पर अबतक हमने कमजोरी ही दिखायी है। मैने इस संबंध में कैबिनेट बैठकों में बात की है।’’ मंत्री का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उस बयान के कुछ दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कश्मीर के लोगों के प्रति पाकिस्तान के समर्थन को दोहराया था ।

लाहौर। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के विश्वस्त सहयोगी और प्रभावशाली मंत्री ने शनिवार को कहा कि कश्मीर मसले पर पाक ने ‘‘कमजोरी’’ प्रदर्शित की है और अपनी ही सरकार के उस दावे का खंडन किया कि इसने इस मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में ‘‘सफलता’’ पायी है। पाकिस्तान सरकार के रेल मंत्री शेख राशिद ने कहा कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ सरकार कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए देश में पांच फरवरी तक रैली आयोजित करेगी।

राशिद ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘मुझे लगता है कि कश्मीर मसले पर अबतक हमने कमजोरी ही दिखायी है। मैने इस संबंध में कैबिनेट बैठकों में बात की है।’’ मंत्री का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उस बयान के कुछ दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कश्मीर के लोगों के प्रति पाकिस्तान के समर्थन को दोहराया था ।

खान ने गुरुवार को ट्वीट किया था, ‘‘जम्मू कश्मीर का विवाद निश्चित तौर पर प्रासंगिक सुरक्षा परिषद प्रस्ताव तथा कश्मीरी आवाम की इच्छा के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए । कश्मीरी लोगों का हम लगातार नैतिक, राजनीतिक और राजनयिक समर्थन करते रहेंगे....।’’ शुक्रवार को खान ने कश्मीर की स्थिति पर बैठक की अध्यक्षता की थी, इस बैठक में सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा, आईएसआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज हमदी, विदेश सचिव सोहैल महमूदी और सेना तथा सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया ।

बैठक में हर साल पांच फरवरी को कश्मीर के लोगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किये जाने वाले कश्मीर दिवस की तैयारियों पर चर्चा हुई । इस साल का कश्मीर दिवस अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत सरकार की ओर से पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जा वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शाषित क्षेत्रों में बांटने के निर्णय के बाद पहली बार पाकिस्तान में यह दिवस मनाया जाएगा । केंद्र सरकार के इस निर्णय का पाकिस्तान ने कड़ा विरोध किया था जबकि भारत सरकार ने यह कह कर इसका बचाव किया कि विशेष दर्जा से जम्मू कश्मीर में केवल आतंकवाद को ही बढ़ावा मिला है ।

इससे पहले दिसंबर में मंत्री राशिद ने ऐतिहासिक करतारपुर गलियारे के बारे में कहा था कि यह पाकिस्तान सेना अध्यक्ष जनरल बाजवा के दिमाग की उपज है । बड़बोले मंत्री के रूप में प्रसिद्ध राशिद ने कहा था कि यह गलियारा भारत को हमेशा तकलीफ देता रहेगा ।

बॉन (जर्मनी),कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को स्वीकारा कि इस मुद्दे पर उन्हें वैश्विक समुदाय का साथ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही है। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले में गैरजरूरी हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है और उसने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाया, जहां से उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई।
इमरान ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, पश्चिमी देशों के लिए व्यावसायिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ा बाजार है और कश्मीर में 80 लाख लोगों के साथ क्या हो रहा है, उस पर धीमी प्रतिक्रिया की यही वजह है।' जर्मनी के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान ने यहां तक कह डाला कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत उससे बातचीत नहीं करना चाहता। बता दें कि भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान अपने देश में प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती।
आरएसएस की तुलना नाजी से
आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान में बढ़े तनाव के बार में पूछने पर इमरान ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा, 'मैं पहला नेता था जिसने दुनिया को चेताया कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में कट्टरपंथी विचारधारा-हिंदुत्व का नियंत्रण स्थापित हो रहा है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा है।' इमरान ने कहा, 'राजनीतिक संगठन आरएसएस का गठन 1925 में हुआ था जो कि जर्मनी के नाजियों से प्रेरित है और उसके संस्थापक नस्लभेद में यकीन रखते थे वैसे जैसे कि नाजी विचारधारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पर बनी थी, आरएसएस की विचारधारा मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से नफरत पर आधारित है।'
भारत से वार्ता के प्रयास का दावा
दुनियाभर को पता है कि भारत पाक द्वारा फैलाए आतंकवाद के कारण उससे वार्ता क्यों नहीं कर रहा है, लेकिन झूठे दावे करते हुए इमरान ने कहा, 'पीएम बनने के बाद, मैंने भारत सरकार और पीएम मोदी से बातचीत के प्रयास किए। बतौर पीएम मेरे पहले भाषण में मैंने कहा कि अगर भारत एक कदम आगे बढ़ता है तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे और मतभेद को दूर करेंगे। लेकिन मुझे बहुत जल्दी पता चल गया कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत ने मुझे जवाब नहीं दिया।'
इमरान ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए अनौपचारिक बैठक की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया था कि यूएनएससी में बहुमत का विश्वास है कि कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है।

वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई को अपने शब्दों को लेकर सावधान रहने की हिदायत दी है। उन्होंने खामनेई की अमेरिका और यूरोपीय देशों पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए यह चेतावनी दी है। ट्रंप ने ट्वीट कर चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान के तथाकथित सुप्रीम लीडर ने यूरोप और अमेरिका के बारे में बहुत ओछी बातें की हैं। उनकी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो रही है और उनके लोग पीडि़त हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, खामनेई ने अपने भड़काऊ बयान में अमेरिका को शातिर और यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को अमेरिका का नौकर बताया था, जो कि गलत बयान था।

बॉन (जर्मनी),कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को स्वीकारा कि इस मुद्दे पर उन्हें वैश्विक समुदाय का साथ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही है। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले में गैरजरूरी हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है और उसने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाया, जहां से उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई।

इमरान ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, पश्चिमी देशों के लिए व्यावसायिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ा बाजार है और कश्मीर में 80 लाख लोगों के साथ क्या हो रहा है, उस पर धीमी प्रतिक्रिया की यही वजह है।' जर्मनी के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान ने यहां तक कह डाला कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत उससे बातचीत नहीं करना चाहता। बता दें कि भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान अपने देश में प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती।

आरएसएस की तुलना नाजी से
आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान में बढ़े तनाव के बार में पूछने पर इमरान ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा, 'मैं पहला नेता था जिसने दुनिया को चेताया कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में कट्टरपंथी विचारधारा-हिंदुत्व का नियंत्रण स्थापित हो रहा है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा है।' इमरान ने कहा, 'राजनीतिक संगठन आरएसएस का गठन 1925 में हुआ था जो कि जर्मनी के नाजियों से प्रेरित है और उसके संस्थापक नस्लभेद में यकीन रखते थे वैसे जैसे कि नाजी विचारधारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पर बनी थी, आरएसएस की विचारधारा मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से नफरत पर आधारित है।'

भारत से वार्ता के प्रयास का दावा
दुनियाभर को पता है कि भारत पाक द्वारा फैलाए आतंकवाद के कारण उससे वार्ता क्यों नहीं कर रहा है, लेकिन झूठे दावे करते हुए इमरान ने कहा, 'पीएम बनने के बाद, मैंने भारत सरकार और पीएम मोदी से बातचीत के प्रयास किए। बतौर पीएम मेरे पहले भाषण में मैंने कहा कि अगर भारत एक कदम आगे बढ़ता है तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे और मतभेद को दूर करेंगे। लेकिन मुझे बहुत जल्दी पता चल गया कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत ने मुझे जवाब नहीं दिया।'

इमरान ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए अनौपचारिक बैठक की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया था कि यूएनएससी में बहुमत का विश्वास है कि कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है।

ताइपे,ताइवान के राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने बुधवार को कहा कि अगर चीन ने उनके देश पर हमला किया तो पेइचिंग उसकी बड़ी कीमत चुकाएगा। वेन ने इसके साथ ही कहा कि चीन को उनके देश के प्रति कठोर रुख के बारे में दोबारा विचार करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि साई ने हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव जीता है और यह उनका लगातार दूसरा कार्यकाल है। उन्हें रेकॉर्ड 82 लाख मत मिले हैं। चीन ने साई को सत्ता से हटाने की अपनी इच्छा को कभी नहीं छुपाया क्योंकि उनकी पार्टी इस विचार से इनकार करती रही है कि उनका द्वीप देश चीन का हिस्सा है। पेइचिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और उसका संकल्प है कि वह एक दिन उसपर कब्जा कर लेगा चाहे उसे बलप्रयोग ही क्यों न करना पड़े।

उधर, मीडिया को दिए अपने साक्षात्कार में साई ने कहा कि उन्हें अपने देश को औपचारिक रूप से आजाद घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह देश पहले से ही आजाद है।

आधुनिक ताइवान चीन से 70 सालों से अलग सरकार चला रहा है। यह कई दशकों तक चियांग कई-शेक के तानाशाही के अंदर रहा है । लेकिन 1980 के दशक से यह एशिया के सबसे अधिक प्रगतिशील लोकतंत्र के रूप में आगे बढ़ा है। हालिया चुनाव ने यह साबित किया ताइवान में बड़ी संख्या में अपने देश को स्वतंत्र हिस्सा मानते हैं।

सैन्य ताकत में कहां टिकता है ताइवान
ताइवान ने चीन को धमकी तो दे डाली है, लेकिन क्या वाकई चीन के सैन्य ताकत के सामने टिक पाएगा। ताइवान के पास 290,000 सैन्यकर्मी हैं जिनमें 1,30,000 आर्मी, 45, 000 नौसेना व मरीन कॉर्प्स में हैं। वहीं, उसके पास 80,000 वायु सैनिक हैं। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन की बात करें तो उसके पास 9,75,000 थल सैनिक हैं जो इसके पीपल्स लिबरेशन ऑफ ऑर्मी का आधा है।

न्यूयॉर्क. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर नाकामी हाथ लगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन-पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर समर्थन जुटाने में असफल रहे। भारत ने कहा कि हमारे साथ संबंध बेहतर करने के लिए पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह सही मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। यूएनएससी के कई सदस्यों ने कहा कि कश्मीर, भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है। लिहाजा, इसे दोनों देशों के बीच बातचीत से ही हल होना चाहिए।
बुधवार को चीन के दबाव में कश्मीर पर यूएनएससी की बैठक बुलाई गई। इस ‘क्लोज्ड डोर मीटिंग’ में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के अलावा किसी को शामिल नहीं किया जाएगा।
‘एक बार फिर उनकी हार हुई’
यूएन में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘हमने एक बार फिर देखा कि एक सदस्य देश की कोशिशों की हार हुई। ये हमारे लिए खुशी की बात है कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा कश्मीर में खतरे की स्थिति को नकार दिया गया। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर लगातार आधारहीन आरोप लगाता रहा है। कई देशों का कहना है कि कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से ही हल किया जाना चाहिए।’’
पिछली बैठक में पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सहयोगी चीन ने इस बैठक के लिए दबाव बनाया। अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद भी चीन ने इस मुद्दे पर यूएनएससी की बैठक बुलाई थी। हालांकि, तब चीन और पाकिस्तान को इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ, क्योंकि सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा करार देते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद दिसंबर में भी चीन ने कश्मीर पर चर्चा कराने के लिए बैठक का आग्रह किया था, लेकिन तब बैठक नहीं हुई।
चीन के अलावा सभी सदस्य भारत के साथ
यूएनएससी में 5 स्थायी सदस्य देश हैं, जबकि 10 निर्वाचित सदस्यों का निश्चित कार्यकाल होता है। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन इसके स्थायी सदस्य हैं। चीन के अलावा बाकी 4 सदस्य देश कश्मीर मुद्दे पर दखल देने से इनकार करते रहे हैं। भारत सरकार के रुख का समर्थन करते हुए इन देशों ने सभी विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने को कहा है।

इस्लामाबाद । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की एक तस्वीर वायरल हुई है जिसमें वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ लंदन के एक रेस्तरां में बैठे हैं। उनकी इस तस्वीर के बाद विपक्ष ने उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल किया है। बीमार चल रहे शरीफ (69) को इलाज के लिए 19 नवंबर को एयर ऐम्बुलेंस से लंदन ले जाया गया था। उसके एक महीने पहले उन्हें अदालत से जमानत मिली थी। वह भ्रष्टाचार के एक मामले में सात साल की जेल की सजा काट रहे थे। शरीफ हार्ट सहित कई रोगों से पीडि़त हैं। सोमवार को लीक हुई तस्वीर में शरीफ अपने पुत्र हसन, पीएमएल-एन के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ, उनके बेटे सलमान और पूर्व वित्त मंत्री इशाक डार के साथ एक रेस्तरां में बैठे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस तस्वीर में उनका चेहरा साफ नहीं दिख रहा है। संघीय विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी ने लीक तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया और व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए निशाना साधा।
 

लाहौर । मुंबई अटैक के मास्टरमाइड हाफिज सईद को टेरर फंडिंग केस में मंगलवार को आतंकवाद रोधी कोर्ट में पेश किया जहां उसने खुद को बेकसूर बताया। उसने अपना बयान रिकॉर्ड कराया जिसमें उसने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। आतंक रोधी विभाग ने हाफिज और उसके साथियों के खिलाफ पंजाब के विभिन्न शहरों में 23 एफआईआर दर्ज की थी। उसे पिछले साल 17 जुलाई को अरेस्ट किया गया था। हाफिज को लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया है। 10 जनवरी को सुनवाई के दौरान हाफिज को अदालत में सवालों की सूची सौंपी गई थी। कोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक, हाफिज ने अपने जवाब में खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह निर्दोष है। अधिकारी ने कहा कि कोर्ट अब मामले की सुनवाई बुधवार को करेगा जिसमें आखिरी दलीलें रखी जाएंगी। बता दें कि पंजाब पुलिस के आतंक रोधी विभाग के आवेदन के बाद लाहौर और गुजरांवाला में हाफिज के खिलाफ केस जर्द किया गया था। हाफिज को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई कैमरे की निगरानी में हो रही थी और कोर्ट परिसर में पत्रकारों को घुसने की इजाजत नहीं दी गई।

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