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नई दिल्ली। दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के प्रभावशाली पाए जाने से इसकी मांग बढ़ गई है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देश भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन मांग रहे हैं। भारत ने मंगलवार को इसके निर्यात से रोक हटा ली है। इस बीच फार्मा सेक्टर ने भरोसा दिलाया है कि देश में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का पर्याप्त स्टॉक है। साथ ही दवा कंपनियों देश और दुनिया की मांग के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने को तैयार हैं। कोरोना वायरस से निपटने में सहयोग की प्रतिबद्धता जताते हुए भारत ने मंगलवार को मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से आंशिक तौर पर बैन हटा लिया है। कोरोना मरीजों पर इसके अच्छे प्रभाव की बात सामने आने के बाद 25 मार्च को भारत सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी। भारत इस दवा का सबसे बड़ा निर्यातक है।
            इंडियन फार्माश्युटिकल अलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन का कहना है कि, 'भारत दुनिया में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के कुल खपत का 70 फीसदी उत्पादन करता है। जाइडस काडिला और आईपीसीए जैसी कंपनियां देश में इसकी बड़ी उत्पादक हैं।'उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा मांग को पूरी करने के लिए उत्पादन क्षमता पर्याप्त है। यदि आवश्यकता बढ़ती है तो कंपनियां उत्पादन बढ़ाने को तैयार हैं। जैन ने कहा, 'सरकार ने 12 उत्पादों और इनके मिश्रण से प्रतिबंध हटा लिया है। सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। घरेलू मांग और निर्यात के लिए पैरासिटामोल और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग को पूरा किया जाएगा।
         उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि बेवजह खरीदारी और जमाखोरी को रोका जाए। जरूरतमंद मरीजों में इसके सही बंटवारा सुनिश्चित किया जाए। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर अशोक कुमार मदन ने कहा, 'भारत को एक साल में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की 2।4 करोड़ टैबलेट की जरूरत होती है। भारत में अभी सालाना 40 मीट्रिक टन कच्चा माल से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बनाने की क्षमता है। इससे हम 200 एमजी के 20 करोड़ टैबलेट बना सकते हैं। मदन ने कहा, यह दिखाता है कि भारत के पास क्षमता उपलब्ध है। हमें यह देखना है कि इलाज और रोकथाम के लिए देश को कितनी जरूरत है। कंपनियों ने क्षमता बढ़ाने की शुरुआत कर दी है। कोविड-19 के इलाज और बचाव के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन अचानक लाइमलाइट में आ गया है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लागू आवागमन पर लागू 21 दिन की रोक के बीच मार्च में पेट्रोल, डीजल की बिक्री में भारी कमी आई है। इस दौरान पेट्रोल की बिक्री में 17.6 प्रतिशत और डीजल की बिक्री में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विमान ईंधन एटीएफ की बिक्री भी 31.6 प्रतिशत कम हुई है। लॉकडाउन के चलते सड़कों पर वाहनों के आवागमन पर तो रोक है ही विमानों की उड़ानें भी बंद हैं। केवल जरूरी सेवाओं के लिए ही इनकी अनुमति दी जा रही है।
पेट्रोलियम उद्योग के अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक एक साल पहले मार्च महीने के मुकाबले इस साल मार्च में पेट्रोल की बिक्री 17.6 प्रतिशत घटकार 19.43 लाख टन रही। वहीं डीजल की बिक्री 25.6 प्रतिशत घटकर 49.82 लाख टन रह गई। इसी प्रकार विमान ईंधन की बिक्री भी घटकर 4.63 लाख टन रह गई।
इस दौरान केवल एलपीजी सिलेंडर की मांग में ही वृद्धि दर्ज की गई। मार्च माह के दौरान एलपीजी की बिक्री एक साल पहले इसी माह के मुकाबले 1.9 प्रतिशत बढ़कर 22.86 लाख टन हो गई। सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए ये अस्थाई आंकड़े हैं। ये आंकड़े इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलिये कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिन्दुसतान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।

मुंबई। अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट की कंपनी बर्क‎शियर हैथवे ने डेल्टा एयरलाइंस के 31.4 करोड़ डॉलर के शेयर बेच दिए हैं। बर्क‎शियर ने साउथ वेस्ट एयरलाइंस में भी अपनी लगभग 4 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है। यह जानकारी यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन की तरफ से दिए गए विवरण पर आधारित है। कंपनी ने 11 और 12 मार्च को भी डेल्टा एयरलाइंस के 1.3 करोड़ शेयर बेचे थे। ये बिक्री 22.96-26.04 प्रति शेयर के भाव के बीच हुई थी। गौरतलब है ‎कि डेल्टा एयरलाइंस ने घोषित किया था कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में उसकी आय में 90 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है। डेल्टा के इस ऐलान के बाद ही बर्क‎शियर हैथवे द्वारा डेल्टा के शेयरों की बिक्री की खबर आई। गौरतलब है कि 27 फरवरी को बफेट की कंपनी ने 46.40 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर डेल्टा एयर के करीब 1 करोड़ शेयर खरीदें थे जिसके परिणामस्वरुप डेल्टा में बर्क‎शियर हैथवे की होल्डिंग करीब 7.19 करोड़ शेयर हो गई थी। इसके अलावा बर्क‎शियर हैथवेने साउथ वेस्ट एयरलाइंस के भी लगभग 7.4 करोड़ डॉलर के कुल लगभग 23 लाख शेयर बेच दिए हैं। गौरतलब है कि को‎विड-19 का सबसे घातक हमला एयरलाइंस इंडस्ट्रीज पर ही हुआ है। दुनिया भर की कई एयरलाइंस कंपनियों ने पूरी दुनिया में चल रहे लॉकडाउन की वजह से अपना संचालन रोक दिया है।

मुंबई। कोरोना वायरस महामारी के चलते आर्थिक मंदी से देश में 2020 के दौरान बैंकों के गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) अनुपात में 1.9 प्रतिशत और ऋण लागत अनुपात में 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुताबिक कोरोना वायरस संकट के चलते एशिया-प्रशांत बैंकों की ऋण लागत में 300 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। उसका अनुमान है कि चीन का एनपीए अनुपात लगभग दो प्रतिशत बढ़ेगा, जबकि ऋण लागत अनुपात में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। रेटिंग एजेंसी के क्रेडिट विश्लेषक गेविन गुनिंग ने कहा कि भारत में एनपीए अनुपात लगभग चीन के समान (1.9 प्रतिशत) रह सकता है, लेकिन ऋण लागत अनुपात अधिक बुरा होकर करीब 1.3 प्रतिशत बढ़ सकता है। गनिंग ने कहा कि ऐसी चिंताएं भी हैं कि कोरोना वायरस आगे और तेजी से फैलेगा और उसका असर लंबे समय तक रह सकता है। उन्होंने कहा ‎कि इससे 2020 में आर्थिक तकलीफ और बढ़ेगी, जिसका अनुमान हम पहले ही लगा चुके हैं। वित्तीय दशाएं और खराब हो सकती हैं, क्योंकि निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश करेंगे। इससे बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज प्रभावित होगा।

नई दिल्ली। दुपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी बजाज ऑटो ने अपनी पॉप्युलर बाइक बजाज पल्सर आरएस 200 का बीएस 6 रेडी वर्जन पेश किया है। पुराने बीएस4 मॉडल की तुलना में यह नई बाइक 3 हजार रुपये महगी होगी। कंपनी ने इसे 1.45 लाख रुपये के प्राइस टैग के साथ लॉन्च किया है। बाइक में इंजन को छोड़कर कोई अन्य बदलाव नहीं किया गया है। बाइक का लुक और स्टाइलिंग इसके बीएस4 मॉडल की तरह ही है। बाइक में पहले की तरह ही फुली फेयर्ड डिजाइन और मस्क्यूलर फ्यूल टैंक, स्टेप्ड अप सीट, अट्रैक्टिव पेंट जॉब और ग्रैफिक्स दिए गए हैं। इस बाइक में बीएस6 कंप्लायंट 199.5 सीसी लिक्विड कूल, फ्यूल इंजेक्टेड इंजन दिया गया है जिसके साथ 6 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया है। यह इंजन 24 बीएचपी पावर और 18.7 एनएम पीक टॉर्क जनरेट करता है।बजाज ऑटो ने पल्सर 180 एफ और  पल्सर 220एफ को 1 अप्रैल को बीएस 6 इंजन के साथ लॉन्च किया था। 2020 बजाज पल्सर 180एफ बीएस6 की कीमत 1,07,827 रुपये है। बीएस6 मॉडल की तुलना में इसकी कीमत 11 हजार रुपये से ज्यादा बढ़ी है। वहीं, बीएस6 पल्सर 220एफ की कीमत अब 1,17,286 रुपये हो गई है, जो बीएस4 मॉडल से करीब 9 हजार रुपये ज्यादा है। अपडेटेड पल्सर 180एफ के इंजन के साथ कार्ब्युरेटर की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम दिया गया है। बीएस6 बजाज पल्सर 220एफ में 220सीसी  का इंजन दिया गया है। यह इंजन 8,500 आरपीएम पर 20.12 बीएचपी का पावर और 7,000 आरपीएम पर 18.55 एनएम पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इनके साथ ही अब पल्सर रेंज की सभी बाइक बीएस6 एमिशन नॉर्म्स के अनुरूप हैं। हालांकि, पावर और टॉर्क आउटपुट बीएस4 वर्जन के बराबर ही है। बाइक में दिया गया 178.6सीसी का इंजन 8,500 आरपीएम पर 16.8 बीएचपी का पावर और 6,500 आरपीएम पर 14.52 एनएम पीक टॉर्क जेनरेट करता है।

किआ सेल्टॉस बनी ग्राहकों की पहली पसंद
नई दिल्ली। कार ‎निर्माता अग्रणी कंपनी किआ मोटर्स ने 8 महीने में ही 80 हजार से ज्यादा गाड़ियां बेच दी हैं। कंपनी ने भारतीय बाजार में बड़ा धमाका किया है। किआ सेल्टॉस की अब तक 81,784 यूनिट बिक चुकी हैं। भारत में मारुति सुजुकी और ह्यूंदै के बाद किआ ने तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। मार्च में किआ कार्निवाल की 1,117 यूनिट्स बिकीं। वहीं, मार्च में सेल्टॉस की 7,466 यूनिट्स बिकीं। सेल के ये आंकड़े पिछले महीने की तुलना में काफी कम हैं। भारत में 14 अप्रैल 2020 तक लॉकडाउन जारी रहेगा। भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए मार्च का महीना काफी मुश्किल रहा। बाकी कंपनियों की तरह किआ मोटर्स की सेल में भी गिरावट देखी गई। फरवरी महीने में कंपनी ने जहां 15,644 यूनिट्स सेल की थीं। वहीं मार्च महीने में यह आंकड़ा घटकर 8,583 यूनिट्स पर पहुंच गया। कंपनी ने 16 मार्च 2020 को अपनी होलसेल बिलिंग रोक दी थी। कोरोना वायरस के चलते सभी कारों की डिमांड में गिरावट देखी गई है। किआ ने ऑटो एक्सपो 2020 में अपनी नई एसयूवी कार किआ सॉनेट पेश की थी। इवेंट में यह कार कॉन्सेप्ट फॉर्म में पेश की गई थी। इस कार का प्रॉडक्शन वर्जन कई बार टेस्टिंग के दौरान देखा गया। अब इस कार प्रॉडक्शन रेडी वर्जन टेस्टिंग के दौरान देखा गया है। सेल्टॉस में दिया गया 1.4-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन 138 एचपी का पावर और 242एनएम टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ 6-स्पीड मैन्युअल और 7-स्पीड ड्यूल क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के ऑप्शन हैं। साउथ कोरिया की कंपनी किआ मोटर्स ने अगस्त 2019 में सेल्टॉस की लॉन्चिंग के साथ भारतीय कार बाजार में पूरी तरह एंट्री की। अगस्त 2020 में यहां अपनी पहली ऐनिवर्सरी पर सॉनेट को लॉन्च करके कंपनी इस मौके को सेलिब्रेट करेगी। कंपनी ने अगस्त 2019 किआ के साथ भारतीय बाजार में एंट्री की थी। इस कार को भारत में शानदार रिसेप्शन मिला।


नई दिल्ली। एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 30 अप्रैल तक की बुकिंग रोक दी है। एयरलाइंस ने 14 अप्रैल को समाप्त होने जा रहे लॉकडाउन की अवधि पर सरकार के फैसले की प्रतीक्षा के कारण यह फैसला किया है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। दूसरी ओर इंडिगो, स्पाइस जेट और गोएयर ने कहा है कि वे 15 अप्रैल से घरेलू उड़ानों के लिए बुकिंग कर रहे हैं। स्पाइस जेट और गोएयर ने कहा है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक मई से टिकट की बिक्री शुरू कर दी है। इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बुकिंग अभी तक निलंबित है। फुल सर्विस कैरियर विस्तारा ने कहा है कि उसने 15 अप्रैल से यात्रा के लिए बुकिंग शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गो पर कामर्शियल उड़ानें 14 अप्रैल तक निलंबित हैं। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि शुक्रवार से 30 अप्रैल तक बुकिंग बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा, 'हम 14 अप्रैल के बाद के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्पाइस जेट और गोएयर के प्रवक्ता ने कहा कि 15 अप्रैल से घरेलू उड़ानों और एक मई से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से यात्रा के लिए बुकिंग खुली है।
विस्तारा प्रवक्ता ने कहा अभी तक हम 15 अप्रैल से आगे के लिए बुकिंग जारी रखे हुए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की कोई अधिसूचना आती है तो हम कार्रवाई करेंगे। नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खारोला ने कहा गुरुवार को कहा था कि एयरलाइन 14 अप्रैल के बाद की किसी तारीख के लिए टिकट बुकिंग करने के लिए स्वतंत्र हैं।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शुक्रवार को 21 दिवसीय लॉकडाउन के दौरान विमानों के परिचालन के लिए अस्थायी तौर पर दी गई अनुमति (एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट-एआरसी) की अवधि बढ़ा दी है। अब एआरसी तीन जुलाई तक प्रभावी होगा। डीजीसीए ने कहा है कि कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान भी मालवाहक, चिकित्सा सामग्री का परिवहन करने वाले विमानों और समुद्री सुरक्षा में लगे हेलीकॉप्टरों को डीजीसीए से अनुमति लेने के बाद उड़ान भरने की अनुमति है।

मुंबई। कोरोना वायरस के प्रकोप से भारतीय शेयर बाजार की सेहत बिगड़ती जा रही है। दरअसल, नए वित्त वर्ष के दूसरे कारोबारी दिन भी शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली दर्ज की गई है। कारोबार के आ‎खिर में सेंसेक्स 2.39 फीसदी और निफ्टी में 2.06 फीसदी की कमजोरी रही। इससे पहले गुरुवार को रामनवमी की वजह से शेयर बाजार बंद रहे। इस‎लिए इस सप्ताह शेयर बाजार में पांच में से केवल चार ‎दिन कारोबार हुआ, ‎जिसमें से शेयर बाजार में तीन ‎दिन कमजोरी और एक ‎दिन बढ़त के साथ कारोबार हुआ। सप्ताह के पहले कारोबारी ‎दिन सोमवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स करीब 700 अंक की कमजोरी के साथ 29120 पर खुला और 1375.27 अंक नुकसान के बाद 28,440.32 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी करीब 190 अंक की कमजोरी के साथ 8470 पर खुला और 379.15 अंक लुढ़ककर 8,281.10 स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स  854 अंकों की तेजी के साथ 28,440.32 के स्तर पर खुला और 1028.17 अंक की बढ़त के साथ 29,468.49 पर बंद हुआ। निफ्टी भी हरे निशान के साथ 8529 के स्तर पर खुला और 316.65 अंकों का उछाल के साथ 8,597.75 के स्तर पर बंद हुआ। बुधवार को सेंसेक्स करीब 430 अंक की कमजोरी  के साथ 29,035 पर खुला और 1203 अंक टूटकर 28,265.31 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी करीब 130 अंक की कमजोरी के साथ 8470 पर खुला और 343.95 अंक के नुकसान से 8,253.80 अंक पर बंद हुआ। गुरुवार को रामनवमी के अवसर पर शेयर बाजार में कारोबार नहीं हुआ। शुक्रवार को सेंसेक्स 375 अंक की गिरावट के साथ 27,889.97 पर खुला और 674 अंक लुढ़क कर 27,590 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 90 अंक की कमजोरी के साथ 8200 पर खुला और 170.00 अंक गिरकर 8,083 अंक पर बंद हुआ। कोरोना वायरस के कारण भारतीय बैंकों के बारे में मूडीज का अनुमान सामने आने पर शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में बैंकों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है।

रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया कि मांग की कमी और कैश की स्थिति ठीक न होने की वजह से इस सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।

नयी दिल्ली। कोरोना वायरस नामक महामारी के फैलने से घरों की बिक्री खासा गिरावट देखी जा सकती है। बता दें कि पहले से ही मंदी की मार झेल रहा रियल एस्टेट सेक्टर को भारी नुकासान का सामना करना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया का इस साल घरों की बिक्री में 25-35 प्रतिशत गिरावट की उम्मीद है। जबकि ऑफिस प्रापर्टी में 13 से 30 फीसदी गिरावट हो सकती है।

7 शहरों में सस्ते होंगे घर

रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म एनरॉक की रिपोर्ट के मुताबिक 7 शहरों में घरों की बिक्री में 35 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरिदाबाद के इलाके में कीमत में 35 फीसदी की गिरावट हो सकती है।

पहले से ही रियेल एस्टेट सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है और अब इस सेक्टर को कोरोना की मार भी झेलने पड़ रही है। ये वो इलाके हैं जहां पर कोरोना वायरस के मामलों की पुष्टि हुई है।  हालांकि दिल्ली एनसीआर के इलाकों के अलावा रिपोर्ट में कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरू, पूणे और हैदराबाद भी शामिल हैं।  

घरों के निर्माण में भी होगी गिरावट

घरों की बिक्री के साथ घरों के निर्माण कार्य में भी गिरावट देखी जाएगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना वायरस के चलते घरों के निर्माण के क्षेत्र में देरी हो सकती है। जिसका असर घरों की कीमतों पर पड़ेगा। इसी वजह से रियल एस्टेट भी सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद लगाए हुए है।

    रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया कि मांग की कमी और कैश की स्थिति ठीक न होने की वजह से इस सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।

कार्यालय स्थल की घटेगी मांग

लॉकडाउन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कार्यालय तथा खुदरा क्षेत्र में मांग-आपूर्ति पर प्रभाव पड़ सकता है तथा किराये की दर पर भी असर पड़ने की आशंका है। रियल एस्टेट क्षेत्र में जारी नरमी के बाद भी व्यावसायिक खंड में पिछले कई साल से बढ़िया प्रदर्शन देखने को मिल रहा था।

सीबीआरई के चेयरमैन अंशुमान मैगजीन ने कहा कि भारत में कोविड-19 का असर कुछ ही समय तक रहने वाला है क्योंकि यहां संक्रमण अपेक्षाकृत सीमित है। अमेरिका तथा यूरोप की कंपनियां अभी भी आउटसोर्सिंग के लिये भारत पर दांव लगा रही हैं। इससे फिलहाल पट्टे यानी लीज पर कार्यालय की मांग पर असर नहीं पड़ा है।

नई दिल्ली। स्मार्टफोन कंपनी रियलमी ने अपने हैंडसेट के दाम बढ़ाने की घोषणा की है। सरकार द्वारा मोबाइल फोन पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने और रुपए में आ रही गिरावट के मद्देनजर कंपनी ने यह कदम उठाया है। कंपनी ने कहा है कि रियलमी के हैंडसेटों पर मूल्यवृद्धि उत्पाद दर उत्पाद भिन्न होगी।यह मूल्यवृद्धि नए और पुराने दोनों उपकरणों पर लागू होगी। सरकार ने मार्च में मोबाइल फोन पर जीएसटी की दर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी थी। हैंडसेट कंपनियों ने सरकार के इस कदम का विरोध किया था। रियलमी इंडिया ने बयान में कहा कि जीएसटी दरों में वृद्धि से स्मार्टफोन खंड प्रभावित होगा। कंपनी ने कहा कि 2018 के बाद उसे पहली बार मूल्यवृद्धि का कदम उठाना पड़ रहा है। कंपनी ने कहा कि कोविड-19 से स्मार्टफोन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे कलपुर्जों की आपूर्ति घटी है और कीमतों में भी वृद्धि हुई है। कंपनी ने कहा कि इसके अलावा रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है और फिलहाल यह लगातार नीचे आ रहा है। इससे स्मार्टफोन उपकरणों की कुल लागत पर असर पड़ा है। कई स्मार्टफोन ब्रांड पहले ही 2019 और 2020 में कीमतों में बढ़ोतरी कर चुके हैं। उद्योग संगठन इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने कहा कि मोबाइल फोन पर जीएसटी दरों में ऐसे समय वृद्धि की गई है जबकि आर्थिक सुस्ती और कोरोना वायरस की वजह से उद्योग की हालत पहले ही काफी खराब है। इससे उद्योग पटरी से उतरेगा और नौकरियां भी कम होंगी। आईसीईए का अनुमान है कि इस फैसले पर आम आदमी पर करीब 15,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा और सौ करोड़ से अधिक उपभोक्ता प्रभावित होंगे।

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