ईश्वर दुबे
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रायपुर :
राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने भेंट की। उन्होंने राज्यपाल को विश्वविद्यालय में 4 एवं 5 मई 2026 को आयोजित होने वाले “इनोवेशन महाकुंभ” के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । श्री डेका ने कहा कि इस आयोजन से बस्तर के युवाओं में नवाचार और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा मिलेगा यह पहल युवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में सराहनीय है। राज्यपाल ने कार्यक्रम का पोस्टर विमोचन भी किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक - केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया
खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र
देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा
रायपुर 25 मार्च 2026/छत्तीसगढ़ की धरती आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष श्री दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुश्री साइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं।
जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया।
रायपुर: 25 मार्च 2026/
यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा सम्मानित 'ग्लोबल यूथ इनोवेटर' और 'एलियन इनोवेशंस' के 21 वर्षीय संस्थापक रवि किरण ने छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाक़ात में उनके साथ स्टार्टअप में ऑपरेशंस और पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहीं हर्षिता भी उपस्थित थीं। विशेष बात यह है कि ये दोनों ही युवा अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ इस नवाचार के जरिए समाज में बदलाव ला रहे हैं।
इस अहम मुलाक़ात का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों (PwDs) को सशक्त बनाने और उनके दैनिक जीवन को अधिक स्वतंत्र व सुलभ बनाने के लिए विकसित किए गए अत्याधुनिक उपकरणों— 'नेविनॉट' (Navinaut) और 'साइनएक्स' (SignX)— का प्रदर्शन करना था।
बैठक के दौरान सचिव श्री यादव के समक्ष इन 'मेड इन इंडिया' तकनीकों की कार्यप्रणाली और हजारों दिव्यांगों के जीवन में इनके सकारात्मक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। रवि ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारत का पहला टॉर्च के आकार का कॉम्पैक्ट सहायक उपकरण 'नेविनॉट' प्रस्तुत किया। यह उपकरण बिना पारंपरिक छड़ी के बाधा-मुक्त और सुरक्षित रूप से चलने में मदद करता है। इसमें सटीक रूप से बाधाओं का पता लगाने के लिए एडवांस्ड लिडार (LiDAR) सेंसर और अलर्ट के लिए टैक्टाइल वाइब्रेशन की सुविधा है। इसके साथ ही श्रवण एवं वाक् बाधित (मूक-बधिर) व्यक्तियों के लिए 'साइनएक्स' (SignX) का भी प्रदर्शन किया गया। यह स्मार्ट डेस्क-आधारित एआई (AI) उपकरण बिना किसी दुभाषिए के रीयल-टाइम संवाद को संभव बनाता है। यह 97.6 प्रतिशत सटीकता के साथ सांकेतिक भाषा को पहचानकर उसे तुरंत आवाज में बदल देता है, और 'स्पीच-टू-टेक्स्ट' फीचर के जरिए सामने वाले की बातों को स्क्रीन पर दिखाता है।
समाज कल्याण सचिव श्री भुवनेश यादव ने इन नवाचारों की गहरी सराहना करते हुए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना शासन की प्राथमिकताओं में से एक है। श्री यादव ने इन उपकरणों की व्यावहारिक उपयोगिता को देखते हुए भविष्य में इन्हें प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी सार्थक विचार-विमर्श किया।
यह बैठक तकनीकी नवाचारों और सरकारी प्रयासों के समन्वय से दिव्यांग समुदाय के लिए एक समावेशी, समान और सुलभ वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai Transfers Financial Assistance Under Deendayal Upadhyay Bhumiheen Krishi Majdoor Kalyan Yojana
Over Rs. 495 Crore Transferred to Bank Accounts of More Than 4.95 Lakh Landless Agricultural Labourers Across the State
Good Governance Initiatives Strengthen Economic Support for Farmers, Labourers and Women
Raipur, March 25, 2026//
Following a joyful Holi celebrated by farmers, this Navratri has brought a renewed sense of prosperity and confidence for landless agricultural labourers in Chhattisgarh. Government schemes under the state’s “people-centric and transparent governance” model are now visibly transforming everyday lives. Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai highlighted this while addressing a programme organised under the Deendayal Upadhyay Bhumiheen Krishi Majdoor Kalyan Yojana in Balodabazar district on March 25.
During the event held in Balodabazar, Chief Minister Shri Sai transferred Rs. 495.96 crore into the bank accounts of 4,95,965 landless agricultural labourers across the state. He described the initiative as not merely financial assistance but a “decisive step towards dignity, empowerment, and recognition of labour.”
In his address, the Chief Minister stated that the government is fulfilling the guarantees of Prime Minister Shri Narendra Modi with “speed, transparency, and accountability.” He noted that the disbursement of the paddy procurement difference amounts enabled farmers to celebrate Holi with enthusiasm and satisfaction. Similarly, the financial assistance provided to women under the Mahtari Vandan Yojana on International Women’s Day have strengthened their resolve for “self-reliance and financial independence.”
On the occasion, Chief Minister Shri Sai also symbolically handed over house keys to beneficiaries under the Pradhan Mantri Awas Yojana. He informed that more than 18 lakh houses have been approved in the past two years, marking a significant step towards “housing security and improved quality of life” for thousands of families.
Recalling the cultural and spiritual heritage of Balodabazar, the Chief Minister paid tribute to Baba Guru Ghasidas, Sant Kabir, and freedom fighter Veer Narayan Singh. He stated that under the Deendayal Upadhyay Bhumiheen Krishi Majdoor Kalyan Yojana, the state government is providing Rs. 10,000 to landless agricultural labourers to meet household needs, support children’s education, and pursue small livelihood activities.
The Chief Minister further stated that the government is procuring paddy at Rs. 3,100 per quintal in line with its commitment to farmers. He highlighted that over Rs. 10,000 crore has been allocated to expand irrigation facilities across the state. In addition, measures such as increased tendupatta collection rates, the revival of the Charan Paduka Yojana, and initiatives such as the Ram Lala Darshan Yojana and the Mukhyamantri Teerth Darshan Yojana are promoting both “social welfare and cultural empowerment.”
Referring to the Bijli Bill Samadhan Yojana, he stated that special concessions and easy instalment options are being provided to clear pending dues from the COVID period. The scheme will continue till June, with solution camps being organised across the state.
Highlighting overall development, Chief Minister Shri Sai stated that Chhattisgarh aims to reach new heights by better utilising its mineral wealth, agricultural, and forest resources. He emphasised that the Bastar region, once affected by Naxalism, is now moving rapidly towards “peace, trust, and accelerated development.” With the resolve of the central government and the courage of security forces, extremism is nearing its end, paving the way for a new era of growth in the region.
बलरामपुर में मधुमक्खी पालन जिला स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न
रायपुर, 25 मार्च 2026/ मधुमक्खी पालन शहद, मोम और पराग उत्पादन के लिए एक अत्यंत लाभदायक कृषि-आधारित व्यवसाय है। भारत में वैज्ञानिक तकनीक से मधुमक्खियों को बक्सों में पालकर, मौसमी फूलों के अनुसार स्थानांतरित कर बड़े पैमाने पर शहद निकाला जाता है, जो किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है। मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति को आगे बढ़ते हुए फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उप संचालक कृषि श्री रामचंद्र भगत ने फसल चक्र एवं विविधिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु इस व्यवसाय के लिए अनुकूल है, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों को आय का बेहतर विकल्प मिल सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता श्री परमेश्वर गोरे ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक श्री अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
अनुभवी मधुमक्खी पालक कृषक श्री बैद्यनाथ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसान अपने खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस जिला स्तरीय प्रशिक्षण में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा—नक्सलवाद अब अंतिम पड़ाव पर, बस्तर में गूंज रही विकास की आवाज़
रायपुर 25 मार्च 2026/छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की धरती पर हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भय और हिंसा का वातावरण बनाने वाली माओवादी विचारधारा अब समाप्ति की ओर है और बस्तर तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के सशक्त मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और रणनीतिक कार्रवाई की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ देश के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।
पिछड़ा वर्ग के सामाजिक विसंगतियों को दूर करना- छ.ग.पि. वर्ग आयोग अध्यक्ष श्री निषाद
रायपुर, 25 मार्च 2026/मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए व्यापक सर्वेक्षण अत्यंत आवश्यक है, जिसे सांख्यिकीय विभाग को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर प्रतिवर्ष सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा देशभर के पिछड़ा वर्ग आयोगों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर साझा मुद्दों और प्रस्तावों पर चर्चा की जाए। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सभागार में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया मुख्य अतिथि के रूप में उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आयोग के कार्यों की समीक्षा की तथा विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल विभिन्न जातियों की सामाजिक स्थिति, ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में विविध रूप में देखने को मिलती है। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों को दूर करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री आर.एस. विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष श्रीमती चंद्रकांति वर्मा, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत लाल मटियारा, उपाध्यक्ष डॉ. लखन धीवर, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव द्वारा पावर पाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतीकरण के माध्यम से छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग के हितों के संरक्षण और संवर्धन हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने आयोग की संरचना, शक्तियों तथा प्राप्त शिकायतों एवं जाति समावेशन से जुड़े प्रकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
430 पदों पर चयन सूची जारी
रायपुर, 25 मार्च 2026/
छत्तीसगढ़ में प्रयोगशाला परिचारक भर्ती-2023 की प्रक्रिया के बाद अंततः अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कुल 430 पदों पर भर्ती के लिए जारी इस प्रक्रिया में एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था ।
भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 4 अगस्त 2023 को हुई थी, जब रिक्त पदों को भरने की स्वीकृति दी गई। इसके बाद 5 अक्टूबर 2023 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया, जिसमें 1,28,685 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। परीक्षा का आयोजन 3 अगस्त 2025 को किया गया, जिसमें 1,12,792 परीक्षार्थी शामिल हुए।
परीक्षा परिणाम 18 सितंबर 2025 को घोषित किया गया, जिसके बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 8 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 23 फरवरी 2026 तक चली। सत्यापन के आधार पर 2106 अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए चयनित किया गया।
इसके बाद 13 मार्च से 23 मार्च 2026 तक अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति मंगाई गई। कुल 53 अभ्यर्थियों ने आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनका निराकरण कर 24 मार्च 2026 को अंतिम सूची तैयार की गई। अंततः 25 मार्च 2026 को जारी अंतिम चयन सूची के अनुसार 430 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। इनमें विभिन्न वर्गों के साथ-साथ दिव्यांगजनों के लिए भी 30 पद आरक्षित रखे गए हैं, जिनमें 15 पद OL (वन लेग) और 15 पद HH (हियरिंग हैंडीकैप्ड) श्रेणी के लिए निर्धारित हैं।
चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 30 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसके बाद उन्हें प्रदेश के 285 महाविद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार पदस्थ किया जाएगा। नियुक्ति आदेश शीघ्र जारी किए जाने की जानकारी विभाग ने दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के पूर्ण होने से लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राशि का किया अंतरण
प्रदेश के 4.95 लाख से अधिक भूमिहीन कृषकों के खातों में 495 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित
सुशासन सरकार की सतत पहल से किसान, मजदूर और महिलाओं को मिल रहा मजबूत आर्थिक संबल
रायपुर, 25 मार्च 2026/ किसानों की खुशियों भरी होली के बाद अब भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए भी यह नवरात्रि समृद्धि और आत्मविश्वास का संदेश लेकर आई है। छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की योजनाएं अब सीधे जनजीवन में परिवर्तन का आधार बनती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार जिले में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलौदा बाजार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 4 लाख 95 हजार 965 भूमिहीन कृषि मजदूरों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि अंतरित की। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि श्रम और सम्मान को सशक्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को सरकार द्वारा तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि धान खरीदी में अंतर की राशि मिलने से किसानों ने इस वर्ष उत्साह और संतोष के साथ होली मनाई, वहीं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को मिली राशि ने उनके आत्मनिर्भरता के संकल्प को और मजबूत किया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश कराते हुए मकानों की चाबियां भी सौंपीं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 18 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा का नया अध्याय जुड़ा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बलौदाबाजार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का स्मरण करते हुए बाबा गुरु घासीदास, संत कबीर और शहीद वीर नारायण सिंह को नमन किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि भूमिहीन कृषि मजदूरों को दी जा रही है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा और छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार हेतु 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः संचालन तथा रामलला दर्शन एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक और आध्यात्मिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरोना काल में लंबित बिलों के निपटान हेतु विशेष छूट एवं आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह योजना जून तक संचालित होगी और प्रदेशभर में इसके लिए समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रदेश के समग्र विकास पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संपदा, कृषि और वन उत्पादों के बेहतर उपयोग से छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के संकल्प और सुरक्षाबलों के साहस से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा पांच जिलों के हितग्राहियों से वर्चुअल संवाद कर योजनाओं के प्रभाव की जानकारी ली।
वर्ष 2025 की यूपीएससी में चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2047 के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हैं शिल्पकार
इन युवाओं के कंधों पर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के कल्याण और विकास का है दायित्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम" पुस्तिका का किया लोकार्पण
अभ्यर्थियों को ट्राफी भेंट कर किया गया सम्मानित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूपीएससी-2025 में चयनित अभ्यर्थियों से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया संवाद