ईश्वर दुबे
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जीवनदीप आश्रम होगा आशा-करुणा और सेवा का प्रकाश स्तंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत-वृंद को सिंहस्थ : 2028 के लिए किया आमंत्रित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृंदावन में जीवनदीप आश्रम लोकार्पण कार्यक्रम को किया संबोधित
पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि आधारित उद्योगों के प्रोत्साहन से मध्यप्रदेश बनेगा नंबर-1 राज्य
इस वर्ष से यशोदा योजना के माध्यम से स्कूली बच्चों को प्रदाय किए जायेंगे दूध के पैकिट
दतिया जिले में किया गया विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को वितरित किये कृषि यंत्र
मुख्यमंत्री दतिया जिले के भांडेर में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में हुए शामिल
रायपुर :
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत सरदार पटेल मैदान कवर्धा में आयोजित चार दिवसीय संभागीय सरस मेला का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला समूहों को विभिन्न योजनाओं के तहत 11.43 रूपये की सहायता राशि के चेक वितरण किए, जो महिला समूहों के आजीविका संवर्धन में सहायक सिद्ध होंगे।
इस दौरान पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद कवर्धा श्री चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओं श्री अभिषेक अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चन्द्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहें।
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी स्टालों का निरीक्षण कर महिला समूह के सदस्यों से उनके व्यवसाय की जानकारी ली। स्टाल में दीदियों से चर्चा करते हुए व्यवसाय के लिए कच्चे माल उसके उत्पादन और विक्रय की जानकारी ली। लखपति दीदियों से बात करते हुए उन्होंने कहा की ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार का मजबूत आधार स्तंभ बनकर उभरी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रही है।
उन्होंने बताया कि संभागीय सरस मेला के आयोजन से दुर्ग संभाग के सभी सात जिलो के महिला स्व सहायता की दीदीयां लाभान्वित हो रही हैं। समूह द्वारा बनाये गए दैनिक उपयोग के आकर्षक सामाग्री, जैविक खादय पदार्थ एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं को विक्रय के लिए उचित मंच मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर वोकल फाॅर लोकल को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया है। इस आयोजन से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा जिससे वे आत्मनिर्भर होने की दिशा मे आगे बढ़ेगी। हमारा प्रयास है कि ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की पूरी भागीदारी हो और वे अपने लघु व्यवसाय से उद्यमी की पहचान हासिल कर सके। मेले में आए सभी स्व सहायता समूह की दीदियों को उपमुख्यमंत्री ने उनके व्यवसाय के लिए शुभकामनाएं दी और उम्मीद जताई कि इस आयोजन से क्षेत्र की जनता को लाभ होगा।
रायपुर :
कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अभिनव और प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां अब तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू हुआ है। इस अवसर पर स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने जब स्टीयरिंग संभाली तो उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी उनके पैसेंजर बन गए। पहले परिवहन व्यवसाय केवल पुरूष प्रधान कार्य माना जाता था, जिस मिथक को तोड़ अब समूह की महिलाएं स्टेयरिग थामकर आजीविका का सशक्त साधन तैयार करने के साथ ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी नई गति देने जा रही हैं।
सरस मेले के शुभारंभ के अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिले की 10 महिला समूहों को 'आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस' योजना के तहत सीएलएफ मैजिक वाहन वितरित किए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि इन वाहनों का वितरण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक वाहन की लागत लगभग 7.50 लाख रुपये है, जिसमें से 5 लाख रुपये केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिए गए हैं। शेष राशि का प्रबंधन संबंधित समूहों द्वारा किया गया है, जिससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि अब स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने क्षेत्रों में यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराकर आय का स्रोत विकसित करेंगी। विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में यह पहल आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, जहां अब तक परिवहन की कमी एक बड़ी समस्या रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यह पहल केवल शुरुआत है। यदि महिलाएं इस अवसर का पूरी लगन और समर्पण से उपयोग करें, तो वे “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती हैं। यह योजना महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान और समाज में नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगी।
वाहन संचालन के लिए महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दी गई है। यह वाहन 10 अलग अलग संकुल के महिला समूहों 10 विभिन्न ग्रामीण रूट पर संचालन हेतु प्रदान किया गया है। इस पहल के तहत महिला समूह की सदस्य अब टाटा मैजिक वाहन संचालित कर परिवहन व्यवसाय से जुड़ेंगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर उनकी भूमिका को भी सशक्त करेगा। योजना के तहत ये महिलाएं जिले के वनांचल एवं मैदानी क्षेत्रों में, जहां आवागमन के साधन सीमित हैं, वहां यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करेंगी। इससे न केवल दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा सुलभ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
रायपुर :
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के शुभारंभ एवं खेल स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने तैयारियों में लगे अधिकारियों और एजेंसियों को कार्यों में तेजी लाते हुए सभी व्यवस्थाएं समय पर एवं पुख्ता रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार भी इस दौरान मौजूद थे।
रायपुर :
राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सौजन्य भेंट की।
Raipur, March 24, 2026//
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has announced financial assistance for families affected by ropeway accident at Khallari Mata Temple in Mahasamund district a few days back. He has approved compensation of Rs. 5 lakh to the families of deceased persons and Rs. 50,000 to those injured, ensuring support during this difficult time.
Expressing deep condolences, the Chief Minister extended heartfelt sympathies to the bereaved families and stated that the state government stands firmly with them and is committed to providing every possible assistance.
He further informed that a detailed investigation into the incident is currently underway, and those found responsible will face strict action under all circumstances.
Vishnu Deo Sai to Disburse ₹500 Crore to Nearly 5 Lakh Landless Labour Families
Increasing Income and Ensuring Financial Stability for Landless Labourers is our Focus: Shri Sai
Raipur, 24 March 2026// Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai will transfer ₹500 crore to nearly five lakh landless agricultural labour families on 25 March from Balodabazar under the Deendayal Upadhyay Bhoomiheen Krishi Mazdoor Kalyan Yojana, which aims to strengthen livelihoods and provide financial stability.
The highest number of beneficiaries are from Raipur district with 53,338 landless agricultural labourers, followed by 39,401 in Bilaspur and 37,011 in Mahasamund. By bringing these families into the mainstream, the government has strengthened its commitment to prioritising those at the very end of the social and economic spectrum—'Antyodaya'.
Under the scheme, a total provision of ₹495 crore 96 lakh 50 thousand has been made for more than 4.95 lakh eligible families. Each landless agricultural labour family receives financial assistance of ₹10,000 per year, transferred directly into their bank accounts.
As per the Chief Minister’s announcement, annual assistance of ₹10,000 will continue to be provided to landless agricultural labourers. In the SANKALP Budget 2026–27, a provision of ₹600 crore has been made to strengthen financial security for these families. The support is expected to help meet essential needs such as education, healthcare, and daily expenses without dependence on loans.
Chief Minister said the objective of launching the scheme is to increase the net income of landless agricultural labour families and provide them with financial stability. The scheme also covers landless families associated with forest produce collection, as well as traditional occupations (pauni-pasri arrangements) such as shepherds, carpenters, blacksmiths, cobblers, barbers, and washermen. In scheduled areas, it includes tribal families engaged in religious practices at local shrines, such as priests, Baiga, Gunia, and Manjhi communities. The beneficiary list also includes 22,028 Baiga and Gunia families, who play a key role in preserving the state’s cultural traditions. The government has increased the annual assistance from ₹7,000 to ₹10,000 per family, with the amount being transferred directly to beneficiaries’ bank accounts.
राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा- उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 गेम-चेंजर, खेलों में करियर बनाने का बड़ा मंच ओलंपियन
करीब 3,800 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा; छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों के 100 से अधिक खिलाड़ी
प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित होंगी
कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर
रायपुर, 24 मार्च 2026/बुधवार 25 मार्च से शुरू हो रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह तैयार है और राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव का मानना है कि यह “राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा बढ़ावा देगा।” खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री साव ने मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारतीय खेल इतिहास में एक “मील का पत्थर” साबित होगा।
श्री साव ने बताया कि, “हमने पहले सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन छोटे स्तर पर किए हैं। अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी कर हम एक बड़े मंच पर कदम रख रहे हैं, जो हमारी क्षमताओं की परीक्षा भी लेगा और उन्हें नई ऊंचाई देगा।”उन्होंने कहा, “यह छत्तीसगढ़ के लिए निस्संदेह एक ऐतिहासिक और यादगार आयोजन है। यह हमारे खेल प्रतिभा और बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती देगा। साथ ही, यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्रदान करेगा।”
श्री साव ने बताया कि, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के साथ खेलने और उन्हें देखने का अनुभव छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए बेहद समृद्ध करने वाला होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह आयोजन राज्य के खेल तंत्र और खिलाड़ियों दोनों के लिए बड़ी ताकत साबित होगा।”
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा लेंगे और कुल नौ खेलों का आयोजन होगा। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल होंगे।
करीब 3,800 प्रतिभागी इन खेलों में हिस्सा लेंगे, जो 3 अप्रैल तक चलेंगे। प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित की जाएंगी। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। एथलेटिक्स में सर्वाधिक 34 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। तैराकी (24), कुश्ती (18), वेटलिफ्टिंग (16) और तीरंदाजी (10) में भी दो अंकों में स्वर्ण पदक होंगे। हॉकी और फुटबॉल टीम खेल हैं, जिनका आयोजन रायपुर में होगा। एथलेटिक्स जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में आयोजित की जाएगी।
भारत के शीर्ष खिलाड़ी, हॉकी ओलंपियन दिलीप तिर्की, सलीमा टेटे और शीर्ष धावक अनिमेष कुजूर ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स खेलों में करियर बनाने और आदिवासी समुदाय से निकले दिग्गज खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का एक शानदार मंच है।”
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व ओलंपियन दिलीप तिर्की ने साई मीडिया से कहा, “मेरे लिए और हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि देश में पहली बार इस तरह की चौंपियनशिप शुरू हो रही है। यह युवाओं और आदिवासी खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और खेलों में आगे बढ़ने, तथा देश के लिए खेलने का एक बेहतरीन अवसर है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विज़न है कि भारत एक खेल राष्ट्र बने। वे चाहते हैं कि हर युवा किसी न किसी खेल से जुड़ा रहे।”
मेजबान राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और असम से 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। पुरुष और महिला खिलाड़ियों का अनुपात लगभग 50-50 रहेगा, जो ओलंपिक चार्टर में लैंगिक समानता के सिद्धांत के अनुरूप है।
दिलीप तिर्की ने बताया कि, “केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी चाहते हैं कि खेलों के माध्यम से हमारे खिलाड़ी, खासकर आदिवासी खिलाड़ी, बेहतर करियर बना सकें, अपने जीवन को सुधार सकें और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैं स्वयं एक आदिवासी परिवार से आता हूं और खेलों, विशेषकर हॉकी के माध्यम से आज यहां तक पहुंचा हूं। मुझे विश्वास है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। पहले भी कई आदिवासी खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है और वे हमारे समाज के प्रेरणास्रोत बने हैं।”