ईश्वर दुबे
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रायपुर, 1 मई 2026/
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में धमतरी जिले ने एक नया इतिहास रचा है। राज्य सरकार द्वारा जारी पंचायत विकास सूचकांक (PDI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, धमतरी जिले की ग्राम पंचायतों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि कुरूद विकासखंड की मंदरौद ग्राम पंचायत के नाम रही है, जिसने 'गरीबी मुक्त एवं आजीविका संवर्धन' (थीम-1) में 94.4 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
सतत विकास के मॉडर्न मॉडल के रूप में उभरा धमतरी
PDI रैंकिंग में केवल मंदरौद ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य पंचायतों ने भी अपनी छाप छोड़ी है। 'स्वस्थ पंचायत', 'जल संपन्न पंचायत' और 'स्वच्छ एवं हरित पंचायत' जैसी श्रेणियों में जिले की कई पंचायतों ने A+ और A ग्रेड प्राप्त कर यह साबित किया है कि यहाँ शासन की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूती से उतर रही हैं।
"पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा"
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राज्य के नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन ने हर्ष व्यक्त किया है।उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा मंत्री ने मंदरौद पंचायत को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। मंदरौद की सफलता प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत और नवाचार का मॉडल बनेगी।विधायक श्री अजय चंद्राकर ने इस जीत का श्रेय सामूहिक प्रयासों को देते हुए कहा कि बयह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत अमले और जागरूक ग्रामीणों की मेहनत का फल है। धमतरी विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। कलेक्टर ने इस उपलब्धि को पारदर्शी प्रशासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, और यह रैंकिंग उसी दिशा में एक मील का पत्थर है।
सफलता के पीछे के मुख्य कारक
मंदरौद और धमतरी की अन्य पंचायतों की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना। विकास कार्यों में ग्रामीणों की सक्रिय जनभागीदारी सुनिश्चित करना और आजीविका पर फोकस करते हुए गरीबी उन्मूलन के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधनों का संवर्धन करना रहा।धमतरी जिले की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सशक्तिकरण और समग्र विकास की एक नई इबारत लिख रही है।
Courtesy and Sensitivity Must Define Administrative Conduct: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai
Raipur, May 1, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has issued clear and firm instructions to government officials to make the administrative system more people-centric and sensitive, emphasising that citizens must be treated with courtesy, patience and respect. He stated unequivocally that officials at both headquarters and field levels represent the face of the government, and their conduct directly shapes its public image.
Chief Minister Shri Sai underlined that listening to people is the foremost duty of administrative officers. He cautioned officials to take public grievances seriously and remain focused on solutions. “Dialogue becomes meaningful only when it is rooted in empathy and a genuine intent to resolve problems,” he remarked.
Directing all the departments to make grievance redressal more effective, simple and trustworthy, Shri Sai said that every citizen visiting a government office should feel heard and respected. Such positive experiences are instrumental in building public trust.
He further observed that the success of government schemes cannot be measured merely by statistics, but by the lived experiences of people on the ground. Officials, therefore, must remain actively engaged in the field, interact directly with citizens and tailor their efforts to real needs. Sensitivity and promptness, he stressed, are the true strengths of an effective administration.
Shri Sai directed the officials to make transparency and accountability the foundation of their work. He added that public trust is the government’s greatest capital. To sustain it, integrity must be complemented by courteous and humble behaviour.
“Good governance is not established by policies alone, but by conduct,” Shri Sai further said that when officials adopt a simple, approachable and cooperative attitude and ensure prompt redressal of grievances, the administrative system naturally becomes more effective and complaints begin to decline.
Chief Minister asserted that the vision of a 'Developed Chhattisgarh can be realised only when governance becomes accessible, sensitive and respectful towards every citizen. He urged officials to adopt this ethos as their guiding principle, ensuring that every individual feels the government stands with them.
Shri Sai also announced that during Sushasan Tihar 2026, he will conduct surprise inspections across various regions, assessing not only officials’ work performance but also their behaviour. He emphasised that sensitivity, courtesy and accountability during public interactions will be closely evaluated.
It is noteworthy that “Sushasan Tihar 2026” is being organised across Chhattisgarh from May 1 to June 10 to ensure prompt and effective resolution of public grievances. Large-scale solution camps will be held in both rural and urban areas, where applications will be received and addressed at the Panchayat and ward levels. The initiative will witness active participation of public representatives, while the Chief Minister himself will undertake surprise visits to review grievance redressal and the implementation of government schemes.
रायपुर, 1 मई 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में जिला दुर्ग के 6 वर्षीय 'गूगल बॉय ' रुद्र शर्मा ने अपने पालकों के साथ मुलाकात की।अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति से उसने हैरान कर दिया। राज्यपाल श्री डेका से मुलाकात के दौरान रुद्र ने सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
कक्षा पहली के छात्र रुद्र को यूपीएससी और पीएससी स्तर के प्रश्नों के उत्तर भी याद हैं। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने उससे छत्तीसगढ़ के गठन, राज्य की विशेषताओं और भारतीय संविधान से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका रुद्र ने बिना झिझक तुरंत सही जवाब दिया।
रुद्र की तेज स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर राज्यपाल ने उसकी सराहना की। उन्होंने लोक भवन की ओर से रुद्र को प्रमाण पत्र प्रदान किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर रुद्र के माता श्रीमती पायल शर्मा के साथ उसके नाना श्री विनोद शर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने उसकी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।
“A Historic Step Towards Women Empowerment That Will Be Remembered for Generations”: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai
Chief Minister Expresses Gratitude to Assembly Speaker Dr Raman Singh for Convening Special Session
Raipur, May 1, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, in a post on social media platform ‘X’, stated that Matru Shakti is not merely a subject of reverence, but the very foundation of creation, values, and strength. Guided by this spirit, a one-day special session of the Chhattisgarh Legislative Assembly was convened to deliberate on key issues related to the holistic development and empowerment of women. The session witnessed extensive discussions on the resolution to implement one-third reservation for women in Parliament and all State Legislative Assemblies across the country.
Chief Minister Shri Sai observed that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, a robust foundation has been laid for the social and economic empowerment of women in India. “Strengthening their political participation is the next crucial step in this journey,” he noted, adding that the resolution represents a meaningful effort to ensure that half of the country’s population is fully integrated with its rights and opportunities.
Expressing his gratitude to Assembly Speaker Dr Raman Singh for organising the special session on such a significant subject, Shri Sai remarked that this initiative would be remembered as a historic milestone in the direction of women’s empowerment.
He further highlighted that the session saw the dignified participation of women from diverse sections of society and professional fields. They articulated their perspectives in strong support of the initiative, lending a powerful voice to the cause of women’s rights and empowerment. Senior MLAs and women leaders also participated actively in the deliberations, sharing their views and endorsing the resolution with conviction.
Highlighting the importance of the issue, the Chief Minister stated unequivocally that creating any obstacle in the path of women’s dignity and rights cannot be justified. “This is a matter that rises above political affiliations. It is intrinsically linked to the nation’s comprehensive development and its bright future,” he said, calling for collective support for every positive step in this direction.
लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं - मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश
शालीनता और संवेदनशीलता - यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 1 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।
उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज, सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट
रायपुर, 1 मई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।
धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक
अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।
विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) श्री धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।
खरगोन जिले के कतरगांव और शाजापुर के ग्राम मकोड़ी के गेहूँ उपार्जन केंद्र का किया औचक निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने कतरगांव के कृषक श्री पाटीदार को सौंपी अनाज खरीदी पावती
पं. कमल किशोर नागर द्वारा संचालित गौसेवा और नशा मुक्ति अभियान का व्यापक प्रभाव है
प्रदेश में गेहूं का उत्पादन दोगुना हुआ : किसानों से एक-एक दाना खरीदेंगे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पं. कमल किशोर नागर द्वारा प्रस्तुत श्रीमद्भगवत् कथा में हुए शामिल
प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम
रीवा से सर्वाधिक 24 हजार यात्रियों ने लिया हवाई सेवाओं का लाभ