ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
Chhattisgarh Emerging as a National Leader in Digital Governance: CM Shri Vishnu Deo Sai
Raipur, July , 2026/ Under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, Chhattisgarh is witnessing a transformative phase in administrative reforms and digital governance. The state is modernising its traditional governance system by creating an administration where citizens remain at the centre, processes are simplified, decisions are time-bound, and governance is more transparent, accountable and technology-driven. The 435 administrative reforms implemented by the state government have gone beyond procedural simplification to bring a significant change in governance culture, making government services more accessible, transparent and efficient for citizens, farmers, entrepreneurs, investors and youth. As a result, Chhattisgarh is rapidly emerging as one of the country's leading states in digital governance, service delivery and administrative innovation.
He stated that the state government has made good governance not merely a policy objective but the core working philosophy of the administration. Wide-ranging reforms have been introduced across sectors including land management, revenue administration, grievance redressal, online citizen services, industrial investment, registration systems, digital agriculture and e-governance. He said these reforms are aimed at saving citizens' time, effort and financial resources while making government processes more transparent and strengthening public trust through technology. This vision, he said, is laying the foundation for a developed Chhattisgarh.
He stated that the government's clear objective is to build an administration where citizens do not have to make visits to government offices, public services are delivered within stipulated timelines, and every government process is transparent and accountable. He added that digital technology is being used not only to improve convenience but also to strengthen trust between the government and citizens. The entire process of administrative reforms is being driven by the objective of bringing governance closer to the people and ensuring that every citizen receives government services with dignity and without unnecessary obstacles.
He said that administrative reforms in Chhattisgarh now extend far beyond e-governance. Significant improvements have been introduced in grievance redressal, land management, revenue administration, investment facilitation, registration services, digital agriculture, online citizen services, industrial approvals and service delivery. These reforms are benefiting citizens, farmers, entrepreneurs, industries and investors alike by improving administrative efficiency, accelerating decision-making and strengthening transparency and accountability in governance.
He said that good governance is the most important foundation for achieving the national vision of Viksit Bharat 2047. He said development can accelerate only when administration becomes simple, transparent and technology-enabled. Accordingly, the state government is continuously strengthening digital platforms, online services, integrated citizen service delivery systems and data-driven decision-making. He said the government's priority is to ensure that the benefits of governance reach every citizen equally and that public trust remains its greatest strength.
डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही सुशासन की वास्तविक पहचान है: मुख्यमंत्री
प्रशासनिक सुधारों से बदल रहा छत्तीसगढ़: प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित
डिजिटल सुशासन के मॉडल के रूप में उभर रहा छत्तीसगढ़
उत्कृष्ट भूमि सुधार एवं एग्रीस्टैक के लिए केंद्र सरकार ने दिए ₹598 करोड़
रायपुर जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।
रायपुर, जुलाई 2026 / छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति का संकल्प अब एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त पहल ने सारंगढ़ विकासखंड में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।
हाल ही में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से न केवल 30 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, बल्कि उनके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक की जिम्मेदारी भी उठाई गई है। यह कहानी शासकीय संकल्प और सामाजिक सहभागिता के उस बेहतरीन समन्वय की है, जो राज्य के लिए एक मिसाल बन रही है।
डॉक्टर्स डे पर आईएमए का अनूठा उपहार: 15 बच्चों को लिया गोद
अक्सर उत्सवों को औपचारिकताओं में मनाया जाता है, लेकिन आईएमए की जिला इकाई ने इस बार 'चिकित्सक दिवस' (Doctors' Day) को सेवा की नई परिभाषा दी। आईएमए के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ग्राम छुहीपाली के 15 कुपोषित बच्चों को गोद लेने का संवेदनशील निर्णय लिया। इन बच्चों के संपूर्ण इलाज, आवश्यक दवाइयों और विशेष पोषण आहार का पूरा खर्च अब एसोसिएशन द्वारा वहन किया जाएगा।
शिविर में जांच और त्वरित रेस्क्यू
शुक्रवार को सारंगढ़ विकासखंड में आयोजित इस विशेष शिविर में ग्राम छुहीपाली के 15 बच्चों सहित कुल 30 कुपोषित बच्चों की गहन स्वास्थ्य जांच की गई। जिला चिकित्सालय की शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्चों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण (SAM) के लक्षण पाए गए, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय देखरेख मिल सके।
सतत निगरानी का बना 'एक्शन प्लान'
यह अभियान केवल एक दिन के शिविर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक मुस्तैद फॉलो-अप प्लान तैयार किया गया है।स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर सप्ताह बच्चों के वजन और शारीरिक वृद्धि (Growth Monitoring) की कड़ाई से निगरानी करेंगी। ठीक एक महीने बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आईएमए की संयुक्त टीम दोबारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी, ताकि यह देखा जा सके कि बच्चों की सेहत में कितना सुधार हुआ है। कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब डॉक्टर्स और प्रशासन हाथ मिला लें, तो कोई भी बच्चा अस्वस्थ नहीं रहेगा।
टीम वर्क से मिलेगी कुपोषण को मात
इस मानवीय पहल को जमीन पर उतारने में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO), ईएनटी विशेषज्ञ, जन औषधि केंद्र व आशा निकेतन के संचालक और एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का महिलाओं ने जताया आभार
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना की 29वीं किस्त की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की। राशि प्राप्त होने के बाद बालोद जिले की लाभार्थी महिलाओं में खुशी का माहौल है। महिलाओं ने योजना को आर्थिक संबल देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
बालोद जिले के विभिन्न ग्रामों की महिलाओं ने बताया कि योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे स्वरोजगार संबंधी कार्यों में आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया है।
दवाइयों, स्कूल फीस, दैनिक खर्च में बनी मददगार
ग्राम बघमरा की श्रीमती देवकी विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें 29वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है। वे इस राशि का उपयोग घर के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं। ग्राम जगन्नाथपुर की श्रीमती जामवंती विश्वकर्मा ने कहा कि हर महीने मिलने वाली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। वहीं ग्राम ओरमा की श्रीमती राधिका सोनवानी ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है।
विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन का बनी मजबूत आधार
लाभार्थी महिलाओं ने अपने मोबाइल पर प्राप्त राशि का संदेश दिखाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
बालोद के भरदाकला में आधुनिक कृषि तकनीक बनी मिसाल, कम समय में बेहतर गुणवत्ता से धान की रोपाई
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रुझान खेती को नई गति दे रहा है। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती अधिक वैज्ञानिक, समयबद्ध और लागत प्रभावी बन रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम भरदाकला के किसान एवं सरपंच श्री क्रांति भूषण साहू ने अपने खेतों में पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) का सफल उपयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री साहू ने इस वर्ष 10 से 12 एकड़ क्षेत्र में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई कराई। उन्होंने बताया कि जहां पारंपरिक तरीके से मजदूरों के माध्यम से रोपाई करने में 20 से 25 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं इस मशीन की सहायता से रोपाई का कार्य बहुत कम समय में सटीक और व्यवस्थित ढंग से पूरा हो गया। मशीन से पौधों की रोपाई निश्चित दूरी और सीधी कतारों में होने से फसल का विकास बेहतर होता है तथा बाद में निंदाई-गुड़ाई जैसे कृषि कार्य भी आसानी से किए जा सकते हैं।
श्री साहू ने बताया कि कृषि सीजन में मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे समय में पैडी ट्रांसप्लांटर जैसी आधुनिक तकनीक श्रम और समय दोनों की बचत करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ट्रे आधारित नर्सरी तैयार करने सहित कुछ अतिरिक्त लागत आती है, लेकिन बड़े रकबे की खेती के लिए यह तकनीक लंबे समय में अधिक किफायती और लाभदायक सिद्ध होती है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में श्रमिकों की उपलब्धता में कमी और समयबद्ध खेती की आवश्यकता को देखते हुए कृषि मशीनीकरण ही बेहतर विकल्प है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में क्षेत्र के अनेक किसान भी अब पैडी ट्रांसप्लांटर तकनीक को समझने और अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे समय पर रोपाई, बेहतर फसल प्रबंधन और उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से बढ़ेगा ग्रामीणों का जीवन स्तर
रायपुर, जुलाई 2026/ ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए विकसित भारत जी राम जी के तहत प्रदेश के गांवों में विकास कार्यों को गति मिल रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले की ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान के लिए पक्की नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने से बरसात के दौरान जलजमाव, गंदगी और आवागमन की परेशानी से ग्रामीणों को स्थायी राहत मिलेगी, वहीं गांव में स्वच्छता और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी।
ग्राम पंचायत जुंगेरा की सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने बताया कि गांव में लंबे समय से कच्ची नाली होने के कारण बरसात के दिनों में पानी गलियों और घरों तक पहुंच जाता था। इससे लोगों का जनजीवन प्रभावित होने के साथ घरेलू सामानों को भी नुकसान उठाना पड़ता था। पंचायत द्वारा कई वर्षों से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब साकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पक्की नाली के निर्माण से न केवल जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि गांव में स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा और लोगों का जीवन भी अधिक सुविधाजनक बनेगा। ग्रामीणों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने से बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से हमेशा के लिए राहत मिलेगी।
सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी सोच और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण आज गांवों में ऐसे स्थायी और जनहितकारी विकास कार्य तेजी से धरातल पर उतर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी
स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण पर जोर
हर उद्योग में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट, प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे तथा देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के निर्देश
रायपुर, जुलाई 2026/ राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक "बर्ड आइलैंड" (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।
धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन
लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
रायपुर, जुलाई 2026/ कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।
स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।
जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
पहचान से लेकर घर वापसी तक
इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"
लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।
सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल 'एग्रीस्टेक किसान पंजीयन' बस्तर अंचल के किसानों के लिए खेती-किसानी को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ किसानों को पंजीयन में परेशानी जरूर हुई, लेकिन नारायणपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की तत्परता ने इस चुनौती को एक मिसाल में बदल दिया। प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण अब अंदरूनी क्षेत्रों के किसान बिना किसी बाधा के समय पर खाद-बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
चिंता के बादल छंटे, समय पर मिला खाद-बीज
ग्राम कुकड़ाझोर के निवासी किसान बीरसिंह पिता माहरू के लिए इस साल का खरीफ सीजन शुरुआत में चिंताओं भरा था। तकनीकी कारणों से उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सहकारी समिति से खाद और बीज मिलने में दिक्कत आ रही थी। खेती का समय निकला जा रहा था और बीरसिंह लगातार प्रयासों के बाद भी तकनीकी त्रुटि के कारण पंजीयन नहीं करा पा रहे थे।परेशान होकर बीरसिंह ने नारायणपुर तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर त्रुटियों को दूर किया। कुछ ही समय में बीरसिंह का पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया। श्री बीरसिंह ने कहा कि अगर प्रशासन समय पर मेरी मदद नहीं करता, तो इस साल मेरी पूरी खेती पिछड़ जाती। अधिकारियों की त्वरित पहल से मेरी चिंता दूर हो गई और अब मुझे समय पर खाद-बीज मिल गया है।
वीरू और सगराम की भी दूर हुई परेशानी
यह राहत केवल बीरसिंह तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पंजीयन की इस सुलभता का लाभ जिले के अन्य किसानों को भी मिला। ग्राम बोरण्ड के किसान वीरू भी इसी तरह की तकनीकी समस्या से जूझ रहे थे, जिसका प्रशासन ने त्वरित निराकरण किया। इसी तरह ग्राम कोचवाही के किसान सगराम पोटाई का पंजीयन भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया, जिससे उन्हें समय पर कृषि इनपुट (खाद-बीज) मिल सका।
प्रशासनिक तालमेल और संवेदनशीलता की मिसाल
एग्रीस्टेक जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाना है। नारायणपुर जिले में तकनीकी समस्याओं का जिस तेजी से समाधान किया गया, वह यह साबित करता है कि यदि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।
प्रशासन की इस मुस्तैदी से न केवल नारायणपुर के किसानों का डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि बस्तर में खेती को अधिक सशक्त, सरल और लाभकारी बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान, शासकीय अवकाश के बावजूद सक्रिय रहा प्रशासन
समाज कल्याण विभाग ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से पहुंचाई सहायता, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़े गणेश राम यादव
प्रतिमाह मिलती है दिव्यांग पेंशन: राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न हो रहा उपलब्ध
महतारी वंदन योजना का मिल रहा परिवार को लाभ
रायपुर जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।
ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गणेश राम यादव की भाभी श्रीमती चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।