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कांग्रेस छत्तीसगढ़ में चुनाव आचार संहिता उल्लघंन के कई मामलों को लेकर मंगलवार को चुनाव आयोग पहुंचीं। छत्तीसगढ़ में एक ओर दूसरे चरण का मतदान हो रहा था और दिल्ली में राज्य के प्रभारी और सांसद पीएल.पुनिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयुक्त से मिला और अपनी शिकायत दर्ज कराई।  

 पीएल पूनिया ने मुलाकात के बाद कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार बौखलाकर चुनाव प्रभावित करने के लिए कई तरह की हरकतें कर रही है। उन्होंने बताया कि बीती रात चिरमिरी हाईस्कूल के हेडमास्टर वेद प्रकाश मिश्रा के घर तीन ईवीएम मशीनें मिलीं। आयोग के मुताबिक शायद वो सेक्टर प्रभारी है लेकिन आयोग ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी सूरत में वो अपने घर ईवीएम नहीं रख सकते थे। बीती रात ही ईवीएम जब्त कर कार्रवाई की गई।  


वहीं भाजपा के एक प्रत्याशी के पास से दो लाख रुपए बरामद हुए हैं। रात को पैसा बांटने का काम कर रहे थे उसमें एफआईआर हुई है लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। राज्य के अंबिकापुर से खबर मिल रही है कि जिन इलाकों में कांग्रेस मजबूत है वहां सुबह सात बजे पोलिंग शुरू नहीं हुई। कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसे हथकंडे अपनाने का आरोप लगाकर मतदान समय बढ़ाने की मांग की।

 


इसी प्रकार चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद बतौर राज्य प्रभारी कांग्रेस को रुकने की इजाजत नहीं मिली जबकि भाजपा के प्रदेश प्रभारी अनिल जैन और संगठन मंत्री सौदान सिंह वहीं मौजूद रहे। उनका कहना है कि आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है। इसी प्रकार 17 नवंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रायपुर में बिना अनुमति रोड शो और उसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को पोस्टल बैलेट नहीं दिए। उनको वोटिंग अधिकार से वंचित किया गया है।  

प्रथम चरण की तरह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के दूसरे एवं अंतिम चरण में भी मतदान का औसत 2013 के मुकाबले कम रहा है। दूसरे चरण में 19 जिलों की 72 विधानसभा सीटों पर मतदान का कुल औसत 71.93 प्रतिशत रहा, जबकि 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में यह 77.12 प्रतिशत था। वहीं दूसरे चरण में ईवीएम खराब होने की बेहद शिकायतें दर्ज की गईं।

 

मुख्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा ने निर्वाचन सदन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 72 विधानसभा सीटों पर 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। 2 सीटों पर सुबह 7 बजे से 3 बजे तक मतदान हुआ, जबकि बाकी विधानसभा सीटों पर सुबह 8 बजे से 5 बजे तक मतदान हुआ। उप निर्वाचन आयुक्त के मुताबिक दूसरे चरण में एक करोड़ 54 लाख मतदाता थे, जिनमें पुरुषों की संख्या 77 लाख 53 हजार और महिलाओं की संख्या 76 लाख 46 हजार थी। जबकि थर्ड जेंडर के मतदाताओं की संख्या 877 रही।

 

सिन्हा ने बताया कि पहले चरण में मतदान का औसत 76.42 फीसदी रहा, जबकि दूसरे चरण में 71.93 प्रतिशत रहा। दोनों चरणों को मिला कर मतदान का कुल औसत 74.17 प्रतिशत रहा। 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में प्रथम चरण में 75.06 प्रतिशत और दूसरे चरण में 77.12 प्रतिशत की वोटिंग हुई थी। जबकि दोनों चरणों का कुल औसत 77.4 रहा था। उन्होंने बताया कि ये अंतरिम आंकड़ें हैं, और देर रात या सुबह तक ही सही औसत का पता चल सकेगा। हालांकि राज्य निर्वाचन पदाधिकारी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक शाम छह बजे तक 66.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

सिन्हा ने बताया कि सघन नक्सल प्रभावित बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा के दो मतदान केन्द्रों आमामोरा और औढ़ में 82 और 82.5 प्रतिशत की वोटिंग दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा मतदान बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्रों में 83 प्रतिशत, संजारी बालोद में 82.12 प्रतिशत, गुंडर देही में 81 प्रतिशत, पाटन में 80 प्रतिशत दर्ज का गया। वहीं चंद्रपुर, बागरेल और जमुनापाली मतदान केन्द्रों पर शून्य प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं परेवापाली में सड़क न बनने के चलते मतदान का बहिष्कार किया।

 

 

सिन्हा ने बताया कि प्रथम चरण की तरह दूसरे चरण में भी 100 की उम्र पार कर चुके कई बुजुर्ग मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया और कई ने तो सेल्फी भी खिंचवाई। आयोग के मुताबिक राज्य में 100 साल से ऊपर वोटरों की संख्या 3,630 से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मिस ट्रांसजेंडर इंडिया वीणा शिंदे समेत थर्ड जेंडर समुदाय के लोगों ने भी बढ़ चढ़ कर वोटिंग की। राज्य में कुल 964 वोटर थर्ड जेंडर समुदाय के हैं। 
उप निर्वाचन आयुक्त संदीप जैन के मुताबिक दूसरे चरण में 19 हजार 336 ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें से अतिरिक्त 25 प्रतिशत ईवीएम रिजर्व में रखी गई थीं।

उन्होंने बताया कि सेक्टर मजिस्ट्रेट को भी अलग से एक-दो ईवीएम दी जाती हैं। मतदान के दौरान 114 बैलेट यूनिट (.44 प्रतिशत) में खराबी की शिकायतें आईं, जबकि 89 सेंट्रल यूनिट (.46 प्रतिशत) और 359 वीवीपैट यूनिट (1.66 प्रतिशत) में खराबी पाई गई, जिन्हें तुरंत बदल दिया गया।

 

ज्यादा वीवीपैट खराब होने के पीछे जैन ने वजह बताई कि जब भी बैलट यूनिट या सेंट्रल यूनिट में खराबी आती है, तो वीवीपैट को भी बदलना पड़ता है, जिसकी वजह से वीपीपैट खराब होने के ज्यादा मामले सामने आते हैं। आयोग के डीजी दिलीप शर्मा ने बताया कि दूसरे चरण में सी-विजिल एप पर 1819 शिकायतें आईं, जिनमें से 1768 का तुरंत निराकरण कर दिया गया, वहीं 48 में जांच जारी है और 3 मामले अभी पेंडिंग हैं।

उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में 12 करोड़ 51 लाख रुपए का सामान आर नकदी जब्त की गई। जिसमें 4 करोड़ 47 लाख 13 हजार रुपए नकद, 1 लाख 24 हजार लीटर अवैध शराब, जिसकी बाजार में कीमत 1 करोड़ 55 लाख के आसपास थी। वहीं 29 लाख 13 की कीमत का सोना और चांदी, एक लाख 76 हजार की ड्रग, 6 करोड़ 17 लाख की गाड़ियां, साड़ियां और कूकर को जब्त किया गया। 
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत 72 विधानसभा सीटों पर मंगलवार सुबह आठ बजे मतदान प्रारंभ हो गया। राज्य में ​मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सुबह आठ बजे राज्य के 19 जिलों की 72 ​विधानसभा सीटों में मतदान प्रारंभ हो गया। अ​धिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसमें से 113 अनुसूचित जाति और 176 अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। इसमें 119 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र बिन्द्रानवागढ़ के दो मतदान केन्द्रों आमामोरा और मोढ़ में सुबह सात बजे से दोपहर तीन तक बजे तक तथा शेष सभी विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर मतदान समय सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित है। अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 19336 है। इसमें संवेदनशील मतदान केन्द्र 444 और संगवारी मतदान केन्द्र 118 हैं। संगवारी मतदान केंद्रों पर मतदान दल की सभी सदस्य महिलाएं होंगी। उन्होंने बताया मंगलवार को हो रहे मतदान में कुल मतदाताओं की संख्या 1,54,00,596 है। जिसमें। पुरुष मतदाता 77,53,337 और महिला मतदाता 76,46,382 हैं। वहीं तृतीय ​लिंग के 877 मतदाता हैं। 
 
मतदान संपन्न कराने के लिए 84688 मतदान कर्मियों को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गए हैं। अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लगभग डेढ़ लाख जवानों को तैनात किया गया है। राज्य के गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। इन जिलों में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान में मतदाता जिन 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे उनमें कसडोल सीट से विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और रमन मंत्रिमंडल के नौ सदस्य रायपुर दक्षिण सीट से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत, भिलाई से प्रेम प्रकाश पांडेय, बैकुंठपुर से भैयालाल राजवाड़े, मुंगेली से पुन्नूलाल मोहिले, प्रतापपुर से रामसेवक पैकरा, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, कुरूद से अजय चंद्राकर और नवागढ़ से दयालदास बघेल शामिल हैं।वहीं मतदाता अंबिकापुर से विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, पाटन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, सक्ति से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत, दुर्ग ग्रामीण से सांसद ताम्रध्वज साहू, मरवाही से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और कोटा से उनकी पत्नी रेणु जोगी के भाग्य का भी फैसला करेंगे। दूसरे चरण की 72 सीटों में से 17 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए तथा नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 72 सीटों में से 43 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 27 तथा बहुजन समाज पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी।
 
राज्य में इससे पहले हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुख्य रूप से मुकाबला रहता था, लेकिन इस बार के चुनाव में जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन द्वारा चुनाव लड़ने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। इस बार भाजपा 65 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में है। वहीं, लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता इस बार बदलाव के लिए वोट देगी। राज्य में अपनी-अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, अनेक केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती समेत अनेक नेताओं ने लगातार रैलियां की हैं। छत्तीसगढ़ में पहले चरण में राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए इस महीने की 12 तारीख को मतदान हुआ था। इस दौरान इस क्षेत्र के 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया था। 11 दिसंबर को मतों की गिनती की जाएगी।
लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक न्यायपालिका काफी दबाव में है। अदालतों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है। देश के सर्वोच्च न्यायालय से लेकर विभिन्न अदालतों में मुकदमों का बोझ इस कदर हावी है कि न्याय की रफ्तार धीमी से धीमी होती जा रही है। अदालतों पर बढ़ते बोझ की समस्या की तस्वीर आंकड़ों के साथ पेश की जाए तो आम आदमी न्याय की आस ही छोड़ बैठेगा। आंकड़ों के हवालों से बात की जाए तो देश के विभिन्न अदालतों में अभी जितने मुकदमे लंबित हैं, सिर्फ उनकी ही ढंग से सुनवाई की जाए, तो उनका निपटारा होने में लगभग 25 सालों का समय लगेगा। आसानी से समझा जा सकता है कि अगले 25 सालों में अदालतों में और कितने नए मुकदमे आएंगे। इस तरह से जो लंबित मुकदमे हैं, उन्हें निपटाने में 25 वर्ष की जगह और भी लंबा समय लग सकता है। साफ है कि एक ओर तो न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ लदा है, दूसरी ओर उसके जरूरत भर न्यायाधीश भी नहीं हैं। देश की न्याय प्रक्रिया को यदि दुरुस्त करना है तो एक साथ दो मोर्चों पर काम करने की जरूरत है।
 
देश की सर्वोच्च अदालत में करीब 54,013 मुकदमे लंबित हैं। वहीं 3.32 करोड़ मामले देश की निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। इसमें 2.85 करोड़ भी ज्यादा मुकदमे निचली अदालतों में हैं जबकि उच्च न्यायालयों में 47.64 लाख से अधिक निपटारे की बाट जोह रहे हैं। सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश में लंबित हैं जिनमें निचली अदालतों में 68,51,292 हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7,20,440 मुकदमे लटके हैं। हालांकि हाईकोर्ट में लंबित मामलों की फेरहिस्त में राजस्थान हाईकोर्ट ने इलाहाबाद को भी पछाड़ रखा हैं जहां 7,28,030 मुकदमे हैं। दुनिया के किसी दूसरे मुल्क में इतनी तादाद में मुकदमे लंबित नहीं हैं।
 
देश की विभिन्न अदालतों में लंबित लगभग सवा तीन करोड़ मुकदमों में 57 फीसदी मुकदमे फौजदारी मामलों के हैं, जबकि दीवानी व अन्य मामले की संख्या लगभग 43 फीसदी है। इसमें हैरान करने वाली जो बात है, वह यह कि सवा तीन करोड़ से ज्यादा मुकदमों में 46 फीसदी यानी करीब एक करोड़ सैंतालीस लाख मुकदमे तो विभिन्न सरकारों की वजह से हैं। केंद्र और राज्य की सरकारों ने इतनी याचिकाएं दाखिल की हुई हैं कि अदालत की बड़ी ताकत उन याचिकाओं के निपटारे में ही खराब हो रही है। यदि सरकार छोटे-छोटे मसलों पर मुकदमा दायर करना बंद कर दे, तो सिर्फ इतना से ही न्यायपालिका के बोझ में काफी कमी आ सकती है।
 
देशभर के 24 उच्च न्यायालयों में 10 साल से ज्यादा पुराने 21.61 फीसदी मामले हैं जबकि पांच साल से ज्यादा समय से 22.31 फीसदी मुकदमे लटके हुए हैं। निचली अदालतों में यह आंकड़ा बहुत कम है, जहां 10 साल से पुराने महज 8.30 फीसदी हैं और 5 साल से ज्यादा समय के 16.12 फीसदी मामले लंबित हैं। पिछले माह उच्च न्यायालयों ने दस साल से ज्यादा पुराने दशमलव 15 फीसदी मामले निपटाए हैं। हालांकि निचली अदालतों का प्रदर्शन पुराने मुकदमों के निपटारे में बेहतर है, जहां कुल मामलों में 46.89 फीसदी दो साल से कम समय के हैं और दो साल से अधिक पर पांच साल से कम समय के 28.69 फीसदी मुकदमे लंबित हैं। पांच साल अधिक पुराने 16.12 फीसदी मामले हैं जबकि दस साल से ज्यादा समय से 8.30 फीसदी मामले हैं। देश की विभिन्न अदालतों द्वारा इन सभी मामलों का जल्द निपटारा करना पहाड़ को हिलाने जैसी चुनौती का सामना करने से कम नहीं है। 
 
भारत में न्यायपालिका के सामने मुकदमों का बोझ कोई नई समस्या नहीं है। आजादी के बाद से ही अदालतों और जजों की संख्या आबादी के बढ़ते अनुपात के मुताबिक कभी भी कदमताल नहीं कर पाई। इस वजह से न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के मुताबिक न्यायपालिका में भी मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन कायम नहीं हो सका। विधि आयोग ने 1987 में कहा था कि दस लाख लोगों पर कम से कम पचास न्यायाधीश होने चाहिए लेकिन आज भी दस लाख लोगों पर न्यायाधीशों की संख्या पंद्रह से बीस के आस-पास है। न्यायाधीशों के रिक्त पड़े पदों की करें तो सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 31 स्वीकृत पदों में से 3 पद रिक्त हैं। एक अनुमान के अनुसार इस समय अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों के 5,400 से अधिक पद रिक्त हैं जबकि देश के 24 उच्च न्यायालयों में 1221 स्वीकृत पदों में 330 पद खाली हैं। कुल 891 न्यायाधीश अपनी सेवाएं उच्च न्यायालयों में दे रहे हैं। इस समय 4180 पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। निचली अदालतों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है जहां करीब 1360 पद रिक्त हैं जबकि मध्य प्रदेश में रिक्त पदों की संख्या 706 और बिहार में 684 है। गुजरात और दिल्ली में भी न्यायाधीशों के 380 और 281 पद रिक्त हैं। बीते अक्टूबर मध्य तक निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के स्वीकृत 22,036 पदों में 5,133 पद खाली थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी जिसके बाद से राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है। इस समस्या के प्रति केन्द्र सरकार भी चिंतित है और निचली अदालतों में न्यायाधीशों के पदों पर भर्ती के लिये अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करने पर वह भी विचार कर रही थी। पिछले साल अप्रैल में केन्द्र सरकार ने न्यायाधीशों के चयन हेतु उच्चतम न्यायालय से एक केन्द्रीयकृत व्यवस्था तैयार करने का भी अनुरोध किया था। 
 
विशेषज्ञों के अनुसार अदालतों में मुकदमों के निपटारे में देरी और मुकदमों की संख्या में लगातार इजाफा होने का जिम्मेदार किसी एक को ठहराना गलत है। अगर, सही ढंग से कहा जाए तो किसी भी मामले में देरी का कारण शुरू से लेकर अंत तक सभी होते हैं। मसलन कभी पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में देरी करती है तो कभी गवाहों तक समन नहीं पहुंचते, कभी जज का तबादला हो जाता है तो कभी बचाव पक्ष के वकील के पास समय की कमी के कारण केस की तारीख आगे बढ़ा दी जाती है और कभी जज के पास मुकदमों की अधिक संख्या होने के कारण मामलों को अगली तारीख पर टाल दिया जाता है। ऐसे में न्याय की रफ्तार में तेजी लाना पहाड़ को हिलाने जैसी चुनौती से कम नहीं है। पूरा सिस्टम सुधारने पर ही न्याय प्रक्रिया में तेजी आना संभव है। समय के साथ व्यवस्था के तीनों प्रमुख स्तंभों के बीच बढ़ते टकराव ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया। 
 
सवाल यह भी है कि देश की अदालतें मुकदमों के बोझ तले भला दबी क्यों हैं ? असल में तमाम विसंगतियों के बाद भी न्यायालयीन प्रक्रिया के प्रति आम लोगों का बढ़ता विश्वास कुछ इस वजह से भी है कि आम लोगों में विश्वास बहाली के लिये जो कार्य कार्यपालिका को करना चाहिये था, न्यायालय को करना पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में नेताओं की स्वेच्छाचारिता और गुंडों से उनकी सांठ-गांठ पर चुनाव आयोग और न्यायालय ने मिलकर लगाम कसने की जो सार्थक कोशिश की है, उससे भी आम लोगों का उस पर भरोसा बढ़ा है। 
 
वास्तव में भारतीय न्यायपालिका के पास संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। केंद्र और राज्य दोनों सरकारें न्यायपालिका के संबंध में खर्च बढ़ाने में रुचि नहीं रखते हैं। वहीं पूरे न्यायपालिका के लिए बजटीय आवंटन पूरे बजट का एक महज 0.1 फीसदी से 0.4 फीसदी है। जो बेहत निराशाजनक है। देश में अधिक अदालतों और अधिक बेंच की जरूरत है। आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी आधुनिकीकरण और कम्प्यूटरीकरण सभी अदालतों तक नहीं पहुंच पाया है। निचली अदालतों में न्यायिक गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। वहीं भारतीय न्यायिक व्यवस्था बेहतरीन दिमागों और प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने में बुरी तरह विफल रही है। चूंकि निचली अदालतों में न्यायाधीशों के फैसले से संतुष्ट नहीं होने पर लोग उच्च न्यायालयों में फैसलों के खिलाफ अपील दायर करते हैं, जिससे फिर मुकदमों की संख्या बढ़ जाती है।
 
सरकार को अपनी तरफ से ऐसे सभी मामलों को वापस ले लेना चाहिये जिनका बहुत अधिक महत्व नहीं है। इसके साथ ही न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरने के साथ तथा उनकी संख्या कम से कम दस गुणा अधिक कर देनी चाहिये। वहीं पुराने और अप्रासंगिक हो चुके कानूनों में संशोधन, अदालतों को अत्याधुनिक तकनीकी से लैस करने और सरक्षित न्यायिक परिसर बनाने पर गौर करना होगा। न्यायपालिका में व्याप्त खामियों की वजह से ही कई समस्याएं पैदा हुई हैं। न्यायापालिका को देश की बाकी संस्थाओं से कतई अल नहीं मानना चाहिए। जो दिक्कतें हमारे समाज में मौजूद हैं, कमोबेश वहीं न्यायपालिका में भी हैं। अमेरिकी विचारक अलेक्जेंडर हैमिल्टन ने कहा था, ‘न्यायापालिका राज्य का सबसे कमजोर तंत्र होता है, क्योंकि उसके पास न तो धन होता है और न ही हथियार। धन के लिए न्यायपालिका को सरकार पर आश्रित रहना होता है और अपने दिए फैसलों को लागू कराने के लिए उसे कार्यपालिका पर निर्भर रहना होता है।’ न्यायिक प्रक्रिया में आमूल सुधार के जरिए अदालतों का बोझ भी हल्का हो सकता है और लोगों को न्याय मिलने में देरी को रोका जा सकता है। न्यायपालिका में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए यह बहुत ही जरूरी है।
 
-आशीष वशिष्ठ

चंफई (मिजोरम)। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा को भलीभांति पता है कि पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी। मिजोरम के चंफई में पहली चुनावी सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर राज्य की संस्कृति को तबाह करने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

 
उन्होंने कहा, ‘‘संघ और भाजपा समझते हैं कि मिजोरम में घुसने और यहां की संस्कृति बर्बाद करने के लिए उनके पास यही एक अवसर बचा है। उन्हें पता है कि वे अगला लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाएंगे।’’ मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 28 नवंबर को होगा। यह पूर्वोत्तर में एक मात्र राज्य बचा है जहां कांग्रेस सत्ता में है।
 
उन्होंने दावा किया कि राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) आगामी चुनाव में भाजपा की साझेदार है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि एमएनएफ और भाजपा त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में चुनाव के बाद गठबंधन करेंगे। हालांकि दोनों ही दल इस दावे को खारिज कर चुके हैं।

झाबुआ (मप्र)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी को जायज ठहराते हुए मंगलवार को कहा कि देश से भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने और बैंकिंग सिस्टम में पैसा वापस लाने के लिये नोटबंदी जैसी बड़ी तेज दवाई का उपयोग करना जरुरी था। मध्यप्रदेश में 28 नंवबर को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के सिलसिले में प्रदेश के आदिवासी बहुल अंचल झाबुआ के चुनावी दौरे पर आमसभा को सम्बोधित कर रहे प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस देश को भ्रष्टाचार ने बर्बाद किया है। हर नीचे स्तर पर आपसे कोई न कोई भ्रष्टाचार के चलते पैसा मांगता है कि नहीं? क्या देश को इस बीमारी से बाहर निकालना चाहिये, कि नहीं?’’

 
उन्होंने कहा ‘‘जब दीमक लगती है तो सबसे जहरीली दवा डालनी पड़ती है। हिन्दुस्तान में कांग्रेस के राज से ऐसा भ्रष्टाचार फैला कि मुझे नोटबंदी जैसी बड़े तेज दवाई का उपयोग करना पड़ा, ताकि गरीबों को लूट कर ले जाया गया पैसा देश के खजाने में वापस आये। वर्ना हम तो अखबार में तस्वीरें देखते हैं कि बिस्तर के नीचे नोट पड़े हैं, बोरे भर भर नोट पड़े हैं। आज... ये मोदी की ताकत देखिये कि पाई-पाई बैंकों में जमा कराने को मजबूर कर दिया।’’
 
उन्होंने आगे कहा कि गरीबों के लिये जो घर बन रहे हैं, पुल बन रहे हैं, गरीबों के कल्याण की योजनाएं बन रही हैं, उसमें लग रहा पैसा पहले बिस्तर के नीचे छिपाया गया था। वह बाहर निकला तो गरीबों के काम आने लगा और इससे उनको (कांग्रेस) परेशानी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने चार साल में प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना के तहत, बिना गारंटी के अब तक 14 करोड़ लोगों को ऋण दिये हैं। इनमें से 70 फीसद लोगों को पहली बार ऋण दिया गया है।
 
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल में बीते 55 साल में 1500 स्कूल थे जबकि 15 साल के भाजपा के शासनकाल में 4000 स्कूल बनाये गये। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ हमारा मंत्र बालक बालिका को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, किसानों को सिंचाई, बुजुर्ग को दवाई है।’’ उन्होंने कहा कि चार माह पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसानों को ऋण माफी का वादा किया था लेकिन इसके बजाय वहां किसानों को ऋण का पैसा जमा करने के लिये नोटिस या जेल का वारंट जारी किया जा रहा है। 
 
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। मेरा सपना है कि वर्ष 2022 तक सबके पास पक्का घर हो। हमने अब तक 1.25 करोड़ गरीब लोगों को पक्के घर की चाबी सौंप दी है।

इंदौर। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को यह कहकर सियासी सरगर्मियां बढ़ा दीं कि उन्होंने अपने किडनी प्रतिरोपण के बाद स्वास्थ्य कारणों से अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। स्वराज यहां संवाददाताओं से कहा, "वैसे तो मेरी चुनावी उम्मीदवारी तय करने का अधिकार मेरी पार्टी को है। लेकिन स्वास्थ्य कारणों से मैंने अपना मन बना लिया है कि मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी।’’ सुषमा, 2009 से ही लोकसभा में मध्यप्रदेश के विदिशा क्षेत्र की नुमाइंदगी कर रही हैं।

भाजपा की 66 वर्षीय नेता ने कहा, "विदिशा से वर्ष 2009 में लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद मैं सदन की नेता प्रतिपक्ष और इसके पश्चात विदेश मंत्री के अहम पदों पर आसीन होने के बावजूद आठ साल तक अपनी संसदीय सीट के आठों विधानसभा क्षेत्रों में हर महीने नियमित तौर पर जाती थी। लेकिन दिसंबर 2016 में किडनी प्रतिरोपण के बाद मुझे डॉक्टरों ने धूल से बचने की हिदायत दी है। इस कारण मैं पिछले एक साल से चुनावी सभाओं में भी भाग नहीं ले पा रही हूं।"

उन्होंने कहा, "मैं स्वास्थ्य कारणों से खुले स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकती हूँ। मैं बंद सभागारों में ही कार्यक्रम कर सकती हूं। मैंने अपने नेतृत्व से भी कहा है कि अपने स्वास्थ्य की मर्यादा को देखते हुए मुझे धूल से बचना है।" स्वराज ने कहा, "मैं विदेश तो जा सकती हूँ। लेकिन धूल से बचने की डॉक्टरी हिदायत के कारण गुजरे अरसे में विदिशा नहीं जा सकी, क्योंकि कुछेक कस्बों को छोड़कर मेरा पूरा संसदीय क्षेत्र देहाती है।"

गुजरे अरसे में विदिशा क्षेत्र में स्वराज के नहीं पहुंचने पर नाराज लोगों ने लोकसभा सांसद को "गुमशुदा" बताते हुए पोस्टर लगाये थे। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अगर मेरे विरोधी मेरे स्वास्थ्य के प्रति इस कदर संवेदहीन होकर ऐसे पोस्टर लगाते हैं, तो मुझे इस पर कुछ नहीं कहना।" उन्होंने कहा, "'मेरा रिकॉर्ड मध्यप्रदेश की ऐसी लोकसभा सांसद का रहा है, जिसने अपने क्षेत्र का सबसे ज्यादा दौरा किया है। पिछले दो साल के दौरान मैं भले ही अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा नहीं कर सकी हूं। लेकिन मैंने विदिशावासियों से किये गये सारे वादे दिल्ली में बैठकर पूरे किये हैं।" स्वराज ने कहा, "बुधनी-इंदौर रेललाइन को मंजूरी दिलाने का वायदा भी मैंने आगामी चुनावों से पहले पूरा कर दिया है।"

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली सचिवालय के अंदर हमला हुआ है। इस दौरान केजरीवाल पर मिर्ची पाउडर फेंका गया। हमलावरों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और पुछताछ की जा रही है। बता दे कि केजरीवाल पर यह पहला हमला नहीं है बल्कि उनपर इससे पहले भी की कई बार हमला करने की कोशिश की जा चुकी है। 

हमलावर की पहचान अनिल के रुप में हुई है। अनिल ने बताया कि वो गोली मारने आया था। उधर आप ने केजरीवाल की सुरक्षा में भारी चूक का आरोप लगाया है। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के दूसरे चरण का मतदान जारी है। मतदाता पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, राज्य शासन के नौ मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। दूसरे चरण में 1,53,85,983 मतदाता 1079 उम्मीदवारों के लिए मतदान करेंगे। इसमें 119 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। राज्य के रायपुर नगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 46 उम्मीदवार और बिंद्रानवागढ़ में सबसे कम छह उम्मीदवार हैं। पहले दौर में यहां 18 सीटों के लिए मतदान हुआ था। 

 

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

राज्य में शांतिपूर्ण मतदान के लिए अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लगभग एक लाख जवानों को तैनात किया गया है। राज्य के गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। इन जिलों में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। दूसरे चरण के लिए 72 सीटों में शाम पांच बजे तक मतदान होगा। 

दूसरे चरण के मतदान का LIVE अपडेट 

-कवर्धा में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोंकझोंक। 

- दोपहर 2.55 बजे तक 45.2 फीसदी वोटिंग।


अब तक की वोटिंग 

कवर्धा- 44%
पंडरिया-41%
भरतपुर-47%
मनेंद्रगढ़-44%
बैकुंठपुर-46%


- सीएम रमन सिंह ने कवर्धा में वोट डाला।


- दूसरे चरण के मतदान में दोपहर 12 बजे तक 23.71 फीसदी वोटिंग हुई। 

- कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और दुरुपयोग की शिकायत की।

- छत्तीसगढ़ सरकार में मुख्य सचिव अजय सिंह ने रायपुर में किय मतदान। 





- छत्तीसगढ़ दूसरे चरण के मतदान में 10 बजे तक 12.54 फीसदी मतदान हुआ। 
 




- बिलासपुर में पेंड्रा मतदान केंद्र में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस अध्यक्ष अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी ने मतदान किया। 
 




- बिलासपुर में सुबह 9 बजे तक 10 फीसदी वोटिंग हुई।

- महासुमंद के मतदान केंद्र में 91 ईवीएम खराब होने के कारण मतदान रुका। मतदान शुरू होते ही आई थी गड़बड़ी। 

- 100 वर्ष की बुजुर्ग महिला मतदाता ननकी बाई ने 20 रामपुर, सैक्टर क्रमांक 24, मतदान केंद्र क्रमांक 233 में वोट दिया। 



- अंबिकापुर में एक मतदान केंद्र के बाहर कतार में लगे मतदाता। 
 



- दूसरे चरण के मतदान के लिए वोटिंग शुरू। बिलसापुर में पेंड्रा के एक मतदान केंद्र में वोटिंग के लिए पहुंचे मतदाता। 
 




1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला

छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान में मतदाता जिन 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, उनमें कसडोल सीट से विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और रमन मंत्रिमंडल के नौ सदस्य, रायपुर दक्षिण सीट से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत, भिलाई से प्रेम प्रकाश पांडेय, बैकुंठपुर से भैयालाल राजवाड़े, मुंगेली से पुन्नूलाल मोहिले, प्रतापपुर से रामसेवक पैकरा, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, कुरूद से अजय चंद्राकर और नवागढ़ से दयालदास बघेल शामिल हैं।

मतदाता अंबिकापुर से विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, पाटन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, सक्ति से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत, दुर्ग ग्रामीण से सांसद ताम्रध्वज साहू, मरवाही से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और कोटा से उनकी पत्नी रेणु जोगी के भाग्य का भी फैसला करेंगे।

दूसरे चरण की 72 सीटों में से 17 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए और नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 72 सीटों में से 43 सीटों में जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 27 और बहुजन समाज पार्टी को एक सीट में जीत मिली थी। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता था।

अजीत जोगी ने त्रिकोणीय किया मुकाबला

Ajit jogi- Mayawati
Ajit jogi- Mayawati
राज्य में इससे पहले हुए चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ही आमने सामने रहती थीं। लेकिन इस बार के चुनाव में जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर चुनाव लड़ने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है।

राज्य में भाजपा पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। इस बार भाजपा 65 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में है। वहीं लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता इस बार बदलाव के लिए वोट देगी। राज्य में अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, अनेक केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुख मायावती समेत अनेक नेताओं ने लगातार रैलियां की है।

पीएम मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने किया प्रचार

राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी
राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी
प्रचारा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह समेत अन्य भाजपा नेताओं ने गांधी परिवार पर निशाना साधा और कांग्रेस पर वादा खिलाफी करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने पिछले साढ़े चार वर्ष के केंद्र सरकार के कार्यकाल और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्ष के कार्यकाल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ की।

इधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने केंद्र सरकार पर राफेल डील में उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने और उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने का आरोप लगाया। वहीं उन्होंने राज्य में चिटफंड घोटाला, नान घोटाला तथा पनामा पेपर मामले को लेकर मुख्यमंत्री रमन सिंह को घेरा।

छत्तीसगढ़ में पहले चरण में राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए इस महीने की 12 तारीख को मतदान हुआ था। इस दौरान इस क्षेत्र के 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया था। 11 दिसंबर को मतों की गिनती की जाएगी। 
छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में 72 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं। इन विधानसभा सीटों मे 1.54 करोड़ मतदाता हैं। जिसमें 77.53 लाख वोटर पुरुष और 76.46 लाख महिला और 877 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान केंद्रों पर सुबह से भारी भीड़ दिखी। वोटिंग के लिए पहुंचे मतदाताओं को सुबह से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही कई जगहों पर ईवीएम में खराबी की खबरें आई हैं। 

रायपुर ग्रामीण में 21 ईवीएम मशीनों मे आई खराबी 

रायपुर मे 21 ईवीएम मशीनों के खराब होने की सूचना आई है। भाटापरा के 8 मतदान केंद्रों में ईवीएम मशीन खराब होने की सूचना आई है। साथ ही कोरिया के बूथ नबंर 17, सराईपाली के कुसमिसराल, पाली तानाखार के पसान में ईवीएम में खराबी की सूचना आई है। वहीं इसके बीच जांजगीर मे 17 फीसदी मतदान तो चंद्रपुर में 14 फीसदी वोटिंग हुई है। 
 
बता दे कि जहां-जहां ईवीएम मशीन खराब होने कि सूचना आई है वहां-वहां मतदान थोड़ी देर रोककर मशीनों को बदला जा रहा है। जिसके कारण मतदाता निराश होकर लौट रहे हैं। निर्वाचन आयोग को इस पर जल्द ही संज्ञान लेना होगा। क्योंकि अगर इसी प्रकार मतदाता लौटता रहा तो इसका असर मतदान के प्रतिशत पर भी पड़ेगा। 

कवर्धा सीट पर आधे धंटे तक रुका मतदान

मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृहनगर कवर्धा विधानसभा सीट से सबसे पहले ईवीएम खराब होने की खबर आई। बता दें कि यहां सुबह तकरीबन आधे धंटे तक मतदान रुका रहा। शुरुआत में कवर्धा के मतदान केंद्र शंख्या 232, 236, 239, 242 पर ईवीएम खराब हुई थी जिसके कुछ देर बाद ईवीएम को ठीक किया गया। इसके बाद मतदान फिर से शुरू हुआ। 

हालांकि ईवीएम सिर्फ कवर्धा ही नहीं बल्कि कई और विधानसभा सीटों पर भी ईवीएम खराब होने की खबर आई। धमतरी में ईवीएम खराब होने के कारण बहुत देर तक वोटिंग रूकी रही। इसके साथ  सिहावा विधानसभा क्षेत्र में कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब हो गए। इसी क्रम में प्रेमनगर विधानसभा के बूथ क्रमांक 90-91 पर ईवीएम खराब होने की खबर आई थी। जिसके कारण मतदान की  प्रतिक्रिया को आधे-धंटे तक रोका गया। 

दूसरे चरण के मतदान में 72 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। इन विधानसभा सीटों पर छत्तीगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव अजीत जोगी, युद्धवीर सिंह जूदेव, रेणु जोगी जैसे दिग्गज मंत्री समेत 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। हालंकि दोपहर दो बजे तक 30 फीसदी मतदान हो चुका है। मतदान शाम पांच बजे तक होगा। 

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