ईश्वर दुबे
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भोपाल । कोराना वायरस महामारी के मरीजों के साथ इलाज में राजधानी के जेके अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस अस्पताल में कोरोना वायरस के मरीजों को पहले तो नि:शुल्क इलाज के लिए भर्ती किया गया। सरकार ने अब 31 अक्टूबर को नि:शुल्क इलाज का करार अस्पताल से खत्म कर लिया। यहां अभी भर्ती 57 मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट भी नहीं कराया। 22 मरीज आइसीयू में हैं, जिन्हें शिफ्ट करने में जोखिम भी है। ऐसे में मरीजों को अब अपने खर्च पर इलाज कराना होगा। आइसीयू में भर्ती मरीजों के इलाज हर दिन 4 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च होंगे। इसी हफ्ते स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अधिकारियों की बैठक में कुछ अस्पतालों से नि:शुल्क का 31 अक्टूबर से अनुबंध खत्म करने का निर्णय लिया गया था। इसमें एलएन मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। इस निर्णय के बाद यहां भर्ती कुछ साधारण मरीजों को होम आइसोलेशन में भेज दिया गया है। कुछ की आज (रविवार) को छुट्टी कर दी जाएगी, पर गंभीर मरीजों की फजीहत हो रही है। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की बड़ी गलती यह रही कि अस्पताल प्रबंधन को पहले से यह जानकारी नहीं दी गई कि 31 अक्टूबर के बाद नि:शुल्क इलाज का अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। लिहाजा, मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना बंद नहीं किया गया। गंभीर मरीजों को भी भर्ती किया गया, जिन्हें शिफ्ट करना जोखिम भरा है। वजह, मरीज ऑक्सीजन व वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। एंबुलेंस के वेंटिलेटर की क्षमता कमजोर रहती है, इसलिए दूसरे अस्पताल ले जाना ठीक नहीं रहेगा। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि मरीजों का परीक्षण कराकर एम्स, हमीदिया या चिरायु अस्पताल में उन्हें नि:शुल्क इलाज के लिए भर्ती कराया जाता, पर यह भी नहीं किया गया। ऐसे में मरीजों के पास अब अपने पैसे से इलाज कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। एलएन मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन अनुपम चौकसे ने कहा कि जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड है उनका इस योजा के तहत नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। बाकी मरीजों की मर्जी है। वह कहीं जाना चाहें तो शिफ्ट हो सकते हैं। ज्यादातर मरीज अपने पैसे से इलाज कराने को तैयार हैं। यहां भरती के एक मरीज के करीबी अजय पटेल का कहना था कि मेरे रिश्तेदार यहां भती है और वह अभी वेंटिलेटर पर हैं। ऐसी स्थिति में हम जोखिम नहीं उठा सकते। उन्हें निजी वार्ड में शिफ्ट करा दिया है। इलाज पर जो भी खर्च आएगा हम उठाएंगे। वहीं सीएमएचओ भोपाल डॉ.प्रभाकर तिवारी का कहना है कि अस्पताल ने मरीजों को तो पहले से ही भर्ती करना बंद कर दिया था। मरीजों को भी यह जानकारी है कि 31अक्टूबर के बाद नि:शुल्क इलाज नहीं होगा। कोई मरीज चाहेगा तो उसे हमीदिया या दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराएंगे।