ईश्वर दुबे
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भोपाल।तेरह बरस के हवा हवाई कार्यकाल के बाद दुबारा कुर्सी मिल जाने पर लगता यही है शिवराज ने स्मारकों और मंदिरों के पुराने एजेंडे मे मूर्तियों को भी शामिल कर लिया है. पिछले कार्यकाल में आर्मी चीफ के इशारे पर उन्होंने भोपाल में अरबों की जमीन पर पचास करोड़ का शौर्य स्मारक बनवा डाला.यह बनना भी था तो ग्वालियर में,जहाँ झाँसी की रानी शहीद हुई थीं. तब गैस स्मारक,सीता मंदिर, भारत माता मंदिर आदि की भी खूब धूम रही.अब कोरोना विपदा और आर्थिक संकट के बावजूद सीजन-२ में शिवराज अटल बिहारी वाजपेयी का भव्य स्मारक और विशाल प्रतिमा,पद्मावती का स्मारक और मंत्रालय भोपाल में तेरह स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्रियों की मूर्तियाँ स्थापित करने में पूरी तरह से जुट गए हैं.
मंत्रालय में गोविंदनारायण सिंह की प्रतिमा होगी जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने दलबदल किया और विजयाराजे सिंधिया से सांठगाँठ कर बहुमत से सत्ता में आई पंडित मिश्र की सरकार गिरवा दी. सारंगगढ़ के नरेशचन्द्र सिंह की मूर्ति होगी जिन्हें गोविन्द नारायन सिंह के दुबारा दलबदल से खतरे में आई संविद सरकार बचाने विजयाराजे ने बतौर मोहरा इस्तेमाल किया.उन्हें भी कांग्रेस से दलबदल करा मुख्यमंत्री बनवा दिया पर सरकार हफ्ते भर में गिर गई. कैलाश जोशी पद का तनाव नहीं झेल पाए और उनींदे रहने पर सात महीने मे हटा दिए गए थे.रविशंकर शुक्ल भले पहले मुख्यमंत्री थे पर डेढ़ महीने ही रहे.मंडलोई बमुश्किल डेढ़ साल ही रहे.
अब शिवराज के ताजा निर्णय के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुन्दरलाल पटवा की एक मूर्ति वीआइपी रोड पर भी लगाईं जाएगी.पूर्व मुख्यमंत्रियों की मूर्तियाँ लगाने और खर्च का सिलसिला सतत ज़ारी रहने वाला है. याने जैसे कोई पूर्व.........होगा, मूर्ति लगा दी जाएगी.जिस प्रदेश में गाँव-गरीब पानी को तरसें, सरकारी अस्पतालों-स्कूलों की दुर्दशा से अख़बार रंगे पड़े हो वहाँ पब्लिक के पैसे का ऐसा दुरुपयोग अपराध नहीं तो क्या है...? पर कोई कर भी क्या सकता है भला, क्योंकि प्रदेश की जनता बारी बारी से कांग्रेस और भाजपा के ही मुख्यमंत्रियों से शासित होने को अभिशप्त जो है.