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 नई दिल्ली। Today;s Petrol Diesel Price: मंगलवार 26 दिसंबर 2023 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमत अपडेट हो गई है। यह कीमत ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों के आधार पर तय होती है।

नई दिल्ली। बॉलीवुड की फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' की तरह ही ये साल शेयर मार्केट के निवेशकों का रहा है। इस साल कुछ कंपनियों के स्टॉक रिटर्न ने निवेशकों की झोली में खुशियां भर दी तो वहीं कुछ शेयर ने निवेशकों को बिकवाली की ओर धकेल दिया। वर्ष 2023 में कई कंपनी के स्टॉक में जबरदस्त रिटर्न देखने को मिला तो वहीं पर कुछ स्टॉक पर बियर का दबाव देखने को मिला है।

नई दिल्ली। शेयर बाजार में आईपीओ (IPO) के साथ लिस्टिंग का सिलसिला भी जारी है। इस हफ्ते 10 कंपनियों के स्टॉक सूचीबद्ध होंगे। आपको बता दें कि आज Suraj Estate और Motisons Jewellers के शेयर बाजार में लिस्ट हो गए हैं।

सूरज एस्टेट शेयर
रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी Suraj Estate Developers का स्टॉक गिरावट के साथ लिस्ट हुई है। कंपनी के शेयर 4.5 फीसदी के डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुई। बीएसई पर कंपनी के शेयर की कीमत 343 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुई। वहीं, एनएसई पर कंपनी के शेयर 340 रुपये पर लिस्ट हुई है।

नई दिल्ली। देश में ऑनलाइन फूड ऑर्डर की संख्या में तेजी देखने को मिली है। ऑनलाइन फूड ऑर्डर को लेकर जोमैटो (Zomato) ने वार्षिक रिपोर्ट जारी किया इस रिपोर्ट का नाम "nation's biggest foodie" है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 में मुंबई में एक व्यक्ति ने 3,580 ऑर्डर किया है। वह एक दिन में 9 ऑर्डर किया है।

फिच रेटिंग्स को उम्मीद है कि 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि के साथ भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में एक होगा। रेटिंग एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत आंकी है।

फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'चालू वित्त वर्ष में सीमेंट, बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग मजबूत बनी रहेगी। भारत के बढ़ते बुनियादी ढांचे के खर्च से स्टील की मांग को भी बढ़ावा मिलेगा। कार की बिक्री में भी वृद्धि जारी रहेगी।'

दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

फिच ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि 2023 में तेज विकास दर के बाद जीडीपी में नरमी की उम्मीद है। भारत वर्तमान में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2030 तक भारत की जीडीपी जापान से अधिक होने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है तो भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि प्रमुख विदेशी बाजारों में धीमी वृद्धि से कमजोरी के बावजूद, भारत की घरेलू खपत से कारपोरेट क्षेत्र में मांग बढ़ेगी। इनपुट लागत का दबाव कम होने से मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में कंपनियों के मुनाफे का स्तर 2022-23 के मुकाबले 290 आधार अंक तक बढ़ सकता है। इससे कारपोरेट जगत को उच्च पूंजीगत व्यय के बावजूद कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जीडीपी में बड़ा योगदान

जीडीपी में बड़ा योगदान देने वाले भारत के सूचना-प्रौद्योगिकी के बारे में फिच ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन देशों में धीमी मांग से आइटी सेवाओं की बिक्री में वृद्धि घटने की संभावना है। हालांकि कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और वेतन के दबाव को दरकिनार करते हुए कंपनियों को उच्च लाभ को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपके लिए जरूरी है कि आप इस डेडलाइन के बारे में जान लें। वरना आपको आने वाले समय में काफी समस्याएं हो सकती है।

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने ऐसे लोगों को हिदायत दी है कि वो अपने अकाउंट में 31 दिसंबर से पहले नॉमिनी जोड़ ले या नामाकंन से बाहर हो जाए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो वे अपने अकाउंट से पैसे निकालने में सक्षम नही होंगे। अगर आपने अपना नामांकन पहले ही जमा कर दिया है, तो आपको इसे दोबारा करने की जरूरत नहीं है।

निर्देशों का करें पालन

SEBI ने कहा है कि लोगों को निर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा एक्सपर्ट का मानना है कि लोगों के यह समझना जरूरी है कि यह कदम महत्वपूर्ण है।
बता दें कि यह कोई रैगुलेटरी प्रोसेस नही हैं, मगर यह इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी दुर्घटना या आपातकालिन स्थिति में नॉमिनी अकाउंट को एक्सेस कर सकेंगे।
क्या होगा परिणाम

अगर आप समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करते हैं तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बता दें कि नामाकंन में हिस्सा ना लेते की स्थिति में सेबी आपके म्यूचुअल फंड और डीमैट अकाउंट से निकासी को रोक देगा।
इसके चलते आप अपने म्यूचुअल फंड से पैसे नहीं निकाल सकेंगे। साथ ही अपने डीमैट खाते से ट्रेडिंग भी नहीं कर सकेंगे।
अगर आपने पहले ही ये बदलाव कर लिया है तो बता दें कि आपको इसे दोबारा करने की जरूरत नहीं है।
ये प्रोसेस बहुत आसान और ऑनलाइन उपलब्ध है। इंवेस्टर्स नॉमिनेशन फॉर्म भर कर और अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) को इसे देकर इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीकल कंपनी ओला इलेक्ट्रिक कंपनी आईपीओ के जरिए फंड जुटाने की तैयारी है। कंपनी ने शुक्रवार को मार्केट रेगुलेटर सेबी में आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर जमा किए हैं। देश में 20 साल बाद कोई व्हीकल मेकर कंपनी आईपीओ के जरिए फंड जुटा रही है।

ओला इलेक्ट्रिक आईपीओ डिटेल्स
ओला इलेक्ट्रिक की ओर से जमा ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, कंपनी 5,500 करोड़ रुपये तक के इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और प्रमोटरों और निवेशकों द्वारा 9.52 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की पेशकश (ओएफएस) कर रही है।

ओला इलेक्ट्रिक के इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई पर होगी। इसके साथ ही कंपनी बुक-रनिंग लीड मैनेजर Kotak Mahindra कैपिटल कंपनी, Citigroup Global Markets India, BofA Securities India, Goldman Sachs (India) सिक्योरिटीज, Axis Capital, ICICI सिक्योरिटीज, SBI Capital Markets, और BOB Capital Markets हैं।

गीगाफेक्ट्री पर फोकस
आईपीओ के जरिए जुटाए जाने वाले फंड के इस्तेमाल कंपनी ओला गीगाफैक्ट्री परियोजना के ओसीटी, कैपिटल एक्सपेंडेचर, सहायक कंपनी को लोन रिपेमेंट, रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट के निवेश और कॉर्पोरेट खर्चों में करेगी।

ओला इलेक्ट्रिक बेंगलुरु स्थित अपनी ओला फ्यूचरफैक्ट्री में बैटरी पैक और मोटर्स जैसे ईवी और कोर ईवी कंपोनेंट का प्रोडक्शन करती है। कंपनी की प्लानिंग तमिलनाडु में ईवी हब बनाने की है, जिसमें ओला फ्यूचरफैक्ट्री, अपकमिंग ओला गीगाफैक्ट्री और दूसरे कंपोनेंट बनाने की है।

ओला इलेक्ट्रिक के बारे में

ओला ने 2021 में अपना पहला EV स्कूटर Ola S1 Pro को लॉन्च किया था। कंपनी के पोर्टफोलियो में फिलहाल 5 स्कूटर हैं।
इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने के 9 महीने के भीतर ही कंपनी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन पोर्टल पर लिस्टेड E2W रजिस्ट्रेशन के आधार पर देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला E2W प्लेयर बन गया है।
जून 2023 की तिमाही तक E2W मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत है। कंपनी का फोकस इंडियन मार्केट के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट पर भी है।
ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी 31 अक्टूबर, 2023 तक अपने डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) ओमनीचैनल वितरण नेटवर्क का संचालन करती है। देश में उसके 935 एक्सपीरियंस सेंटर और 414 सर्विस सेंटर उपलब्ध हैं।
वित्तीय वर्ष 2023 की बात करें तो कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 2,630.93 करोड़ रुपये का है, जिसमें पिछले एक साल में करीब 7 गुना बढ़ोत्तरी हुई है।

खाद्य पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता और अनिश्चितता के कारण महंगाई को लेकर अस्पष्ट परिदृश्य बने रहने की आशंका है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में 6-8 दिसंबर को हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में महंगाई पर जोखिम को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके साथ ही, उच्च कीमतों का हवाला देकर आम सहमति से रेपो दर को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखने की निर्णय लिया गया। 

शुक्रवार को जारी बैठक के ब्योरे में गवर्नर ने कहा, सब्जियों के फिर से महंगा होने से मुख्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में महंगाई तेजी से बढ़ने के किसी भी संकेत के प्रति सतर्क रहना होगा, जो इसे नीचे लाने की प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है।

विकास दर की तुलना में देना होगा ज्यादा महत्व

डिप्टी गवर्नर व एमपीसी सदस्य माइकल देवव्रत पात्रा ने कहा, मौद्रिक नीति को काफी सतर्क रहना होगा। उन्होंने नीति दर में यथास्थिति के पक्ष में मतदान करते हुए कहा, मौद्रिक नीति में वृद्धि की तुलना में महंगाई को अधिक महत्व देने की जरूरत है।

आयकर विभाग ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक बायरन बिस्वास के आवास की तलाशी के दौरान वहां से करीब 70 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज में विधायक के आवास पर बुधवार सुबह शुरू हुई तलाशी करीब 19 घंटे बाद देर रात खत्म हुई।

उन्होंने कहा, 'हमने बायरन बिस्वास के आवास पर छापेमारी के दौरान 70 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं मिली कि इतनी बड़ी राशि वहां क्यों रखी गई थी?

विधायक से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बिस्वास ने कांग्रेस के टिकट पर सागरदिघी निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव जीता था, लेकिन बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।

 

पिछले महीने यानी नवंबर में कृषि श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है। कुछ खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 7.37 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा ग्रामीण श्रमिकों के लिए महंगाई बढ़कर 7.13 प्रतिशत हो गई है।

अक्टूबर में कितनी थी महंगाई?

आधिकारिक बयान के मुताबिक कृषि श्रमिकों के लिए रिटेल महंगाई अक्टूबर में 7.08 प्रतिशत रही थी और ग्रामीण श्रमिकों सहित गांव के मजदूरों के लिए 6.92 प्रतिशत रही।

नवंबर में कितनी रही खाद्य मुद्रास्फीति?

श्रम मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर में 9.38 प्रतिशत और ग्रामीण मुद्रास्फीति 9.14 प्रतिशत रही, जबकि अक्टूबर 2023 में कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति 8.42 प्रतिशत थी और ग्रामीण मुद्रास्फीति 8.18 प्रतिशत था।

बयान के अनुसार, CPI-AL (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-कृषि मजदूर) और CPI-RL (ग्रामीण मजदूर) पर आधारित मुद्रास्फीति की दर इस साल नवंबर में क्रमशः 7.37 प्रतिशत और 7.13 प्रतिशत रही। अक्टूबर 2023 में क्रमशः 7.08 प्रतिशत और 6.92 प्रतिशत हो गई।

कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स भी बढ़ा

नवंबर में कृषि मजदूरों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 12 अंक बढ़कर 1,253 हो गया, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए सूचकांक 11 अंक बढ़कर 1,262 हो गया। वहीं अक्टूबर में ये दोनों सूचकांक क्रमश: 1,241 अंक और 1,251 अंक थे।

कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के सामान्य सूचकांक में वृद्धि चावल, गेहूं, आटा, दालें, प्याज, हल्दी, लहसुन, मिश्रित मसाले, आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण आया है।

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