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The Food Department and district administrations in the state are taking strict action to prevent misuse of domestic LPG cylinders. So far, 214 raids have been conducted and 1,013 cylinders seized, including 392 in Raipur and 201 in Bilaspur.

During a review meeting on Tuesday, Food Secretary Smt. Reena Babasaheb Kangale directed officials and oil companies to widely publicise LPG online booking facilities through WhatsApp, mobile numbers, IVRS and websites. Special emphasis was placed on spreading awareness about Indian Oil’s new booking numbers (Mobile: 8927225667, IVRS: 8391990070).

She also instructed that pending LPG bookings be cleared quickly, adding that cylinder supply has been increased across districts to ensure consumers do not face inconvenience.

In line with guidelines of the Union Ministry of Petroleum and Natural Gas, a balanced and priority-based distribution system for commercial LPG has been implemented to ensure uninterrupted supply to essential services such as hospitals, educational institutions, defence and paramilitary camps, jails, hostels, welfare institutions, railway stations and airports.

For LPG booking or supply-related complaints, the Food Department call centre (1800-233-3663 and 1967) is operational to ensure prompt resolution in coordination with oil companies.

 
 
रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा
 
रायपुर, /मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय प्रवास पर आज शाम रायपुर पहुंचें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल अपने प्रवास के यहां कई धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
 
      आज शाम रायपुर पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।
 
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
 
     कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा श्री शुक्ल का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक श्री किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है।
 
     ज्ञात हो कि उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को वे सुबह 11.15 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके निवास (स्पीकर हाउस) में सौजन्य भेंट करेंगे। इसके पहले वे नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे। दोपहर 12.05 बजे पहुंना गेस्ट हाउस में विंध्य क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
 
      कार्यक्रम में विधायक श्री मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक श्री के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक श्री शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष श्री कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी, श्री मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

रायपुर 17 मार्च 2026/प्रदेश में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता और उपभोक्ताओं तक उसकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन द्वारा सतत निगरानी और समीक्षा की जा रही है। खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले ने खाद्य संचालक तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ 17 मार्च 2026 को समीक्षा बैठक लेकर घरेलू एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को और अधिक सुलभ बनाने के लिए व्हॉट्सएप नंबर, मोबाइल नंबर, आईवीआरएस और वेबसाइट यूआरएल के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए। उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा जारी नए बुकिंग नंबर (मोबाइल 8927225667 एवं आईवीआरएस 8391990070) को भी आमजन तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में बताया गया कि घरेलू एलपीजी के दुरुपयोग को रोकने के लिए खाद्य विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक 214 छापों में 1013 घरेलू एलपीजी सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं, जिनमें रायपुर जिले में सर्वाधिक 392 तथा बिलासपुर जिले में 201 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई सुनिश्चित करती है कि घरेलू गैस का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो और आम उपभोक्ताओं को उसका पूरा लाभ मिल सके।

खाद्य सचिव श्रीमती कंगाले ने ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित एलपीजी बुकिंग को शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी जिलों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाई गई है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी वितरण के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित व्यवस्था लागू की गई है, ताकि अत्यावश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित न हों। इसके तहत अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बल कैम्प, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे स्टेशन एवं एयरपोर्ट की कैंटीन को उनकी मासिक आवश्यकता के अनुरूप गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, भारत सरकार, राज्य सरकार एवं उनके सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यालयों, कैंटीन एवं गेस्ट हाउस को उनकी विगत माहों के उपभोग का 50 प्रतिशत की सीमा तक, जबकि पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाइयों तथा होटल एवं रेस्टोरेंट को निर्धारित सीमा (20 प्रतिशत) के अंतर्गत कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।

एलपीजी बुकिंग एवं आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए खाद्य विभाग का कॉल सेंटर (1800-233-3663 एवं 1967) सक्रिय है, जहां प्राप्त शिकायतों का ऑयल कंपनियों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर राहत मिल सके।

 

अवकाश के दिनों पर भी मिलेगी पंजीयन की सुविधा

रायपुर,17 मार्च 2026/ राज्य के आम नागरिकों को पंजीयन संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा न हो और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यों का सुचारू एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी पंजीयन (स्टाम्प दस्तावेज) कार्यालय चयनित अवकाश दिवसों में भी संचालित (खुले) किए जाएंगे।

जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालय 22 मार्च, 28 मार्च, 29 मार्च तथा 31 मार्च 2026 को भी सामान्य कार्यदिवसों की तरह खुले रहेंगे। इन तिथियों में दस्तावेजों के पंजीयन सहित अन्य सभी संबंधित सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।

शासन के इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे अपने लंबित पंजीयन कार्यों को समय पर पूरा कर सकें। विशेष रूप से वित्तीय वर्ष की समाप्ति के मद्देनज़र इन दिनों में पंजीयन कार्यों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है।

राज्य सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस विशेष सुविधा का अधिकतम लाभ उठाते हुए निर्धारित तिथियों में अपने पंजीयन संबंधी कार्यों का निष्पादन कराएं, जिससे अनावश्यक भीड़ और अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।

 

Raipur, March 17, 2026

In lines with the guidelines of the Union Ministry of Petroleum and Natural Gas, Chhattisgarh government on Tuesday assured that domestic LPG supply in the state remains smooth, and necessary arrangements are being ensured so that consumers do not face inconvenience.


In this regard, Food Secretary Ms. Reena Baba Saheb Kangale said that a balanced and priority-based distribution system has been implemented in Chhattisgarh for institutions and establishments with commercial LPG connections.


As per the guidelines of the Government of India and oil companies, commercial consumers will receive LPG supply within a limit of up to 20% based on their consumption in previous months.

Essential services have been given priority in commercial LPG distribution. Educational institutions, hospitals, military and paramilitary camps, jails, hostels, social welfare institutions, and railway and airport canteens will receive 100% supply. Government offices, public sector undertakings, and their guest houses and canteens will receive 50% supply, while animal feed production units, seed production units, restaurants, and hotels will receive 20% supply.

Ms. Kangale said oil companies will conduct daily reviews of commercial LPG distribution and share reports with the Food, Civil Supplies and Consumer Protection Department to ensure transparency and efficiency. The state government remains committed to ensuring uninterrupted LPG supply to citizens while maintaining balanced availability across all sectors.

 

रायपुर 17 मार्च 2026/ खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है।

खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है।
कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है।

उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।

खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।

 

हमारी सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं की स्वीकृत: 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का किया गया सृजन

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का पहुंच रहा है उजाला: नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांव शतप्रतिशत विद्युतीकृत

आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में हो रहा खर्च

सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता

मंत्रालय से लेकर मैदानी अमले तक कार्य संस्कृति में दिखाई दे रहा स्पष्ट बदलाव

रायपुर, 17 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105 करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर राहत देने के लिए 800 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े राज्य अनुदान के लिए 400 करोड़ रुपए और डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के तहत 8 लाख 83 हजार कृषि पंप उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुदान के कारण सोलर प्लांट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और उपभोक्ता अब केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का उजाला पहुंच रहा है और नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।

 

Efficient Implementation and Field-Level Coordination Drive Performance

Scheme Supports Safe Motherhood Through Financial Assistance: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Raipur, March 17, 2026// Chhattisgarh’s emergence as the top-performing state under the Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY) reflects sustained administrative focus, efficient grievance redressal and coordinated implementation from the grassroots to the state level.

The state has outperformed larger states such as Rajasthan, Madhya Pradesh, Karnataka and Uttar Pradesh by ensuring faster execution of the scheme and prompt resolution of beneficiary concerns. The achievement highlights not only effective policy implementation but also the consistent efforts of Anganwadi workers, supervisors, project officers and state-level officials.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said maternal and child health remains a top priority for the state government. He noted that the scheme provides financial assistance to pregnant women and plays a crucial role in promoting safe motherhood. The state’s top ranking, he said, is the result of sustained efforts in this direction.

Strong Enrolment and Monitoring

A key factor behind the state’s performance has been continuous monitoring and a focused push for enrolment. While 1,75,797 pregnant women were registered under the scheme in 2023–24, the number rose to 2,19,012 in 2024–25. Maintaining this momentum, 2,04,138 registrations were completed by February 2025–26, achieving 93.3 per cent of the target.

Faster Approvals and Processing

Alongside enrolment, the administration ensured that applications were processed without delay. From form submission by Anganwadi workers to verification by supervisors and approvals at the project and State levels, each stage was streamlined. Around 83 percent of applications were processed and forwarded to central government for payment, while the state recorded an approval rate of 83.87 percent from centre, among the highest in the country.

Efficient Grievance Redressal

Grievance redressal, particularly in cases related to payment delays, was addressed on priority. Timely corrective measures were taken wherever required. Although the State government resolved all complaints, central data shows that 7 percent of cases remained pending for more than 30 days. Despite this, with 93 percent of complaints resolved, the state secured the top position.

Over the past three years, a total of 5,98,947 pregnant women have been registered under the scheme in Chhattisgarh, of which 5,40,624 have been approved, reflecting steady outreach and consistent performance.

Financial Support for Safe Motherhood

Under the scheme, the Union Government provides ₹5,000 to pregnant women to support nutrition and healthcare during pregnancy and ₹6,000 is provided on the birth of a second girl child. The assistance is released in three instalments — ₹1,000 at registration, ₹2,000 after six months, and ₹2,000 after childbirth, registration and immunisation. The scheme aims to promote institutional deliveries, reduce infant mortality and ensure improved health outcomes for both mother and child.

 

शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि

रायपुर,17 मार्च 2026/प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है।

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है।
जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

ऐसे मिली उपलब्धि

प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है।

रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है।
इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा।
यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई।

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

 

Raipur, March 17, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai on Tuesday inaugurated a three-day health camp organised at Chhattisgarh Legislative Assembly premises. The inaugural programme was attended by Leader of Opposition Dr. Charandas Mahant, Health Minister Shri Shyam Bihari Jaiswal, along with senior officials and staff of the Health Department.

In a gesture aimed at reinforcing the message of proactive health management, Chief Minister Shri Sai himself underwent a health check-up at the camp. Emphasising the need for regular medical screening, he said that changing lifestyles and reduced physical activity have led to a rapid rise in various ailments, regular health checkups are becoming increasingly essential.

Highlighting the benefits of timely diagnosis, Shri Sai stated that regular health check-ups enable individuals to remain vigilant and adopt necessary precautions, thereby preventing the onset of serious diseases. “Healthy citizens form the bedrock of a strong society and a prosperous state,” he remarked.

Chief Minister Shri Sai also appreciated the initiative taken by Assembly Speaker Dr. Raman Singh, saying that such health camps not only raise awareness but also encourage people to take responsibility for their well-being.

Among those present on the occasion were Health Secretary Shri Amit Kataria, Director (Health) Shri Sanjeev Kumar Jha, Managing Director of CGMSC Shri Ritesh Agrawal, and other officials and staff members.
[1:19 PM, 3/17/2026] +91 87208 49366: Sacrifices of Freedom Fighters Are an Invaluable National Legacy: Chief Minister Shri Sai

Raipur, March 17, 2026// A delegation of Chhattisgarh State Freedom Fighters’ Descendants Association paid a courtesy visit to Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai at his office in the Vidhan Sabha complex on Tuesday. The delegation invited Chief Minister to attend a felicitation programme for the families of freedom fighters to be held in Bemetara district on March 23.

Expressing gratitude for the invitation, Chief Minister Shri Sai said the contribution of freedom fighters occupies a place of lasting importance in the nation’s history and honouring their families is a collective responsibility. Such occasions, he noted, are not only an expression of gratitude but also serve to inspire the younger generation with the values of patriotism, dedication and service to the nation.

He added that such initiatives help strengthen national values in society and play an important role in carrying forward the proud legacy of the freedom struggle.

Chairman of the Chhattisgarh Rajakkar Development Board Shri Prahlad Rajak, Association President Dr. Shirish Sharma, Dr. Shivendra Tripathi, Shri Lalit Mishra, Shri Vinayak Diwan and others were present on the occasion.

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