ईश्वर दुबे
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विद्युत उपभोक्ता रहे सतर्क, सतर्कता ही समझदारी
मोर बिजली मोबाइल एप केवल Play Store या App Store से ही डाउनलोड करें
रायपुर, 15 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए किसी अनजान वॉट्सएप, मेल अथवा एसएमएस पर क्लिक करने से बचें । मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर किसी भी लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए कभी भी कोई एपीके पाइल अथवा कोई वेब लिंक नहीं भेजती है।
छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी से के एमडी श्री भीम सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने पॉवर कंपनी मैदानी स्तर पर शिविर का करेगी। उपभोक्ता अपना कोई भी भुगतान सिर्फ मोर बिजली एप, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर अथवा नजदीकी कार्यालय में ही करें, किसी मैदानी कर्मचारी को भी नकद भुगतान न करने की सलाह दी गई है। पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। बिजली बिल भुगतान हो या कोई अन्य सूचना पॉवर कंपनी अपने उपभोक्ताओं को संदेश सिर्फ CSPDCL-S सेंडर ID से ही भेजती है।
मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना अथवा विद्युत सेवा से संबंधित किसी अन्य जानकारी के लिए पॉवर कंपनी की केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर उपभोक्ता कॉल कर सकते हैं, अथवा नजदीकी सीएसपीडीसीएल के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
’Adi Parab’ provides a vibrant platform for tribal culture, art and traditions
‘Adi Parab’ painting and attire recognised by the Golden Book of World Records
Chief Minister enjoys attire show featuring traditional costumes of 43 tribes
100-seater hostel for tribal students and research scholars inaugurated
Two-day ‘Adi Parab’ concludes with enthusiasm
Raipur, March 15, 2026//
In the closing ceremony of the two-day ceremony of Adi Para held at the Tribal Research and Training Institute (TRTI) campus in Nava Raipur on Saturday Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said the government is working with firm resolve to secure the future of the tribal community with the commitment of Prime Minister Shri Narendra Modi and Union Home Minister Shri Amit Shah.
He noted that the region, long affected by Naxal influence and deprived of development for decades, is now witnessing rapid change and expressed confidence that the state is moving steadily towards becoming free from Naxalism.
Shri Sai said the theme of ‘Adi Parab’ was “From Tradition to Identity” and that the event provided a platform to showcase the rich tribal culture, art and traditions of Chhattisgarh. Tribal folk artists from Chhattisgarh, Telangana, Odisha, Maharashtra and Jharkhand participated in the festival.
Members of 43 tribes gathered on a single platform, reflecting the state’s cultural diversity. The Chief Minister also congratulated the organising the department and extended best wishes for ‘Adi Parab’ painting and attire being recognised in the Golden Book of World Records.
On the occasion, the Chief Minister inaugurated a 100-seater hostel built at a cost of Rs 5 crore at the TRTI campus to provide better opportunities for higher education and research to youth from the tribal community.
The Chief Minister said that one of the two museums located at the campus is dedicated to the life of martyr Veer Narayan Singh. On November 1, 2025, on the occasion of the silver jubilee of Chhattisgarh’s statehood, Prime Minister Shri Narendra Modi inaugurated the country’s first digital Shaheed Veer Narayan Singh Memorial and Tribal Freedom Fighters Museum, which is a matter of pride for all.
He said the second tribal museum presents a vivid depiction of tribal life, including traditional costumes and customs associated with occasions such as birth, marriage and death. In the race of modernity, it is important to preserve the country’s fading cultural heritage.
Shri Sai said the welfare of the tribal community has become a national priority under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi. He added that the election of Smt Droupadi Murmu, a daughter of the tribal community, as President is a matter of pride for the entire tribal society.
The Chief Minister said that under the Dharti Aaba Tribal Village Utkarsh Abhiyan, transformation work is underway in 6,691 identified tribal habitations in Chhattisgarh. Bringing particularly vulnerable tribal groups into the mainstream remains one of the government’s top priorities.
He said that through the PM-JANMAN scheme, special backward tribal communities are being provided roads, housing and other basic facilities. Under the scheme, more than 56,000 families in over 2,300 PVTG habitations in the state are benefiting.
Shri Sai said the Niyad Nellanar Yojana (Your Good Village) is an important initiative of the state government aimed at delivering basic facilities and people are already availing benefits such as roads, electricity, drinking water, health services and education.
पं. ख़ुशीलाल शर्मा शासकीय (स्वशासी) आयुर्वेद महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "नेत्रम-2026" हुई सम्पन्न
पहले बेटियों के जन्म से ही विवाह की सताती थी चिंता, अब सरकार कर रही बेटियों का कन्यादान
मुख्यमंत्री कन्या/विवाह योजना से जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का बस रहा है घर
शुजालपुर में हुआ सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन
सम्मेलन में हुआ 162 बेटियों का विवाह और 38 बेटियों का निकाह
किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी मिलेगी बिजली
युवाओं के लिये बनेगा खेल स्टेडियम
बरही में बनेगा वॉलीबॉल का इंडोर स्टेडियम
जलाशय और नहरों का होगा जीर्णोद्धार
मुख्यमंत्री ने बरही के कृषि महोत्सव में विकास कार्यों की दी सौगात
रायपुर :
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय एल्युमिनाई मीट ”एग्री टेक मिलन 2026“ में महाविद्यालय के सैकड़ों पूर्व छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इस एल्युमिनाई मीट में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी कई पूर्व छात्रों ने शिरकत की। कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में पहली बार आयोजित इस एल्युमिनाई मीट में विगत 28 वर्षों में महाविद्यालय से उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इस अवसर पर दो दिवसीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मेला भी आयोजित किया गया जिसमें कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न किसानोपयोगी नवीन प्रौद्यौगिकियां प्रदर्शित की गई। एग्री टेक मिलन 2026 का शुभारंभ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया। समारोह की अध्यक्षता कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा ने की। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र संघ 2026 के पदाधिकारियों को पद एवं गोपनियता की शपथ भी दिलाई गई।
एल्युमिनाई मीट का शुभारंभ करते हुए कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि आज यह एक ऐतिहासिक अवसर है जब स्वामी विवेकानंद प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में पहली बार भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का मिलन समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि इस मिलन समारोह में विविध क्षेत्रों में सफल हो चुके पूर्व विद्यार्थियों को देख कर प्रसन्न्ता हो रही है विशेषकर उन छात्रों से जिन्होंने उद्योग एवं व्यवसाय के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित कर अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान किया है। डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि अभियांत्रिकी कृषि की रीढ़ है। उन्नत एवं नवाचारी कृषि में कृषि यंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी विकसित भारत /2047 विजन डाक्यूमेंट में विकसित भारत के निर्माण हेतु कृषि अभियांत्रिकी को तीसरा सबसे महत्वपूर्ण साधन बताया गया है। डॉ. चंदेल ने आव्हान किया कि कृषि में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को कृषि यंत्रों के उपयोग हेतु प्रोत्साहित करें। उन्होंने महाविद्यालय में वर्तमान में अध्यनरत छात्रों से कहा कि वे विभिन्न क्षेत्रों में सफल पूर्व छात्रों से मिलकर उनके ज्ञान एवं अनुभव का लाभ प्राप्त करें।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि महाविद्यालय में पहली बार एल्युमिनाई मीट का आयोजन किया जा रहा है जिसमें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत विगत 28 वर्षों में कृषि अभियांत्रिकी की पढ़ाई कर चुके भूतपूर्व विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इन पूर्व विद्यार्थियों में से अनेक विद्यार्थी संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर आसीन हैं। इसके अलावा कुछ भूतपूर्व छात्र प्रतिष्ठित औद्योगिक तथा व्यवसायिक संस्थानों में निदेशक अथवा वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। अनेक विद्यार्थियों ने स्टार्टअप स्थापित कर अन्य लोगों को रोजगार प्रदान किया है। इसके अलावा लगभग 100 भूतपूर्व विद्यार्थी विभिन्न विश्वविद्यालयो में निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक के रूप में योगदान दे रहे हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में वर्ष 1997 में कृषि अभियांत्रिकी संकाय की स्थापना की गई थी जिसके अंतर्गत एम. टेक पाठ्यक्रम प्रारंभ किये गये थे। वर्ष 2008 में शोध पाठ्यक्रम शुरू किए गए। वर्ष 2014 में स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना के साथ कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में विभिन्न स्नातक पाठय्क्रम प्रारंभ किये गए। डॉ. वर्मा ने बताया कि कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा अब तक 97 नवीन प्रौद्योगिकी विकसित की गई है तथा 32 डिजाईन पेटेंट प्राप्त किये गए हैं।
एग्री टेक मिलन 2026 समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में सफल भूतपूर्व छात्र-छात्राएं शामिल हुए जिनमें श्री अतुल पाठक, अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग उत्तराखण्ड, श्री प्रितेश राजपूत डिप्टी कलेक्टर जिला सक्ति छत्तीसगढ़, श्रीमति वंदना चुरेन्द्र, निदेशक कोयतुर फिश फार्मिंग, श्री प्रशांत सुब्रमण्यम, निदेशक कैप्स आईसक्रीम रायपुर तथा सुश्री श्रेया जैन एशोसिएट मैनेजर बालको कोरबा प्रमुख हैं।
इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा, निदेशक शिक्षण डॉ. ए.के. दवे, संचालक अनुसंधान डॉ. वी. के. त्रिपाठी, निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टूटेजा, अपर संचालक कृषि अभियांत्रिकी विभाग श्री जी. के. पीढ़िया, प्रगतिशील कृषक श्री बिसेश्वर साहू एवं डॉ. एम.पी. त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में प्राध्यापक डॉ. आर.के. नायक ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
रायपुर :
उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शनों की समीक्षा के साथ ही जल जीवन मिशन 2.0 की जानकारी दी गई।
जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा
नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से आयोजित बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना तथा विभिन्न राज्यों के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी मौजूद थे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, जल जीवन मिशन के संचालक श्री जितेन्द्र कुमार शुक्ला तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी भी उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के साथ उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।
बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, उसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा हर घर तक नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। घरेलू नल जल कनेक्शनों की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति, पेयजल योजनाओं के संचालन में आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधानों पर भी इस दौरान चर्चा की गई। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 की केंद्रीय कैबिनेट से अनुमोदन एवं उसकी शर्तों के बारे में सभी राज्यों को अवगत कराया गया। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में जल जीवन मिशन की समयावधि को दिसम्बर-2028 तक बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में बताया कि छत्तीसगढ़ द्वारा जल जीवन मिशन की योजनाओं के लिए राज्यांश के रूप में 3426 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। उन्होंने इसके समतुल्य केंद्रांश की राशि प्राथमिकता से जारी करने का अनुरोध किया। भारत सरकार द्वारा एकल ग्राम योजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का निर्णय लिया गया है। श्री साव ने इसमें आंशिक संशोधन करते हुए मल्टी-विलेज योजनाओं (MVS) के लिए भी प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सभी राज्यों को भारत सरकार के साथ एमओयू करना होगा। भारत सरकार द्वारा सुझाए गये बिन्दुओं को समाहित कर संशोधित ओएंडएम नीति (O&M Policy) लागू करनी होगी। इसके बाद ही भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत राशि जारी की जाएगी। साथ ही मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सभी योजनाओं की डिजिटल एसेट रजिस्ट्री सुजलम भारत मोबाइल एप के माध्यम से सुजल गांव आईडी जनरेट किया जाना होगा तथा योजनाओं का फाइनेंशियल रिकॉन्सिलिएशन भी किए जाने की अनिवार्यता होगी। इन प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद ही भारत सरकार द्वारा मिशन के तहत योजनावार राशि जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में हुए शामिल
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज की एकजुटता और उनकी संघर्षशील परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि सिंधी समाज ने देश के इतिहास के सबसे कठिन दौर—विभाजन की विभीषिका—का सामना किया है। इसके बावजूद इस समाज ने व्यापार और उद्यम के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विभाजन के समय सिंधी समाज के अनेक परिवारों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति और घर-बार छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था और परिश्रम के बल पर उन्होंने नई शुरुआत की और आज सिंधी समाज विकास के नए-नए सोपान रच रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज का यह जुझारूपन और आत्मविश्वास पूरे समाज के लिए प्रेरणास्पद है और इसके लिए समाज के सभी सदस्य प्रशंसा के पात्र हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज को एकजुट होने का अवसर मिलता है। जब समाज संगठित और मजबूत होता है तो राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की एकजुटता वास्तव में सराहनीय है और इस प्रकार के मेलों का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे। इस मेले में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज सिंधी समाज के लोग देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं और अपनी मेहनत, लगन तथा उद्यमशीलता के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर अपने कार्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जो उनके परिश्रम और दूरदर्शिता का परिचायक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत प्रदेश सरकार ने अधिकांश गारंटियों को पूरा कर लिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में आज से प्रारंभ की गई गौधाम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में गौधाम स्थापित किए गए हैं। इन गौधामों के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी। यहां पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, काऊ कैचर, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और हम उनका पूजन करते हैं। गाय से प्राप्त पंचगव्य को अमृत के समान माना गया है, जो हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को चेट्रीचंड्र पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी सराहना की।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंधी समाज अत्यंत मेहनतकश समाज है। उन्होंने समाज द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोती लाल साहू, धमतरी महापौर श्री रामू रोहरा, पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष श्री महेश दरयानी सहित सिंधी समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
‘आदि परब’ जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच प्रदान करने का बेहतर आयोजन
‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिला ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ पुरस्कार
मुख्यमंत्री ने 43 जनजातियों के पारंपरिक परिधान में सजे अटायर शो का लिया आनंद
जनजातीय विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा और शोधार्थियों के लिए 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण
हर्षोल्लास के साथ ‘आदि परब’ का हुआ समापन
रायपुर 14 मार्च 2026/ हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजातीय समाज के श्री अंकित साकिनी और श्री डायमंड ध्रुव को सम्मानित किया। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिनका चयन NIT और IIT में हुआ है। मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए चेक भी प्रदान किए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया तथा पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत अटायर शो का आनंद लिया।
कार्यक्रम में विधायक श्री प्रबोध मिंज एवं श्री इन्द्रकुमार साहू, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मण्डावी, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, आदिम विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ. सारंश मित्तर, टीआरटीआई की संचालक श्रीतमी हिना नेताम सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए “मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना–2026 (MBBS)” का शुभारंभ किया है। इस योजना के माध्यम से कोरोना महामारी और अन्य कारणों से बकाया बिजली बिल के भुगतान में कठिनाई का सामना कर रहे उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा रही है। योजना के तहत प्रदेश के 29 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल भुगतान में लगभग 758 करोड़ रुपए तक की छूट मिलेगी।
उल्लखेनीय है कि कोरोना काल के दौरान अनेक परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हुए थे, जिसके कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का समय पर भुगतान नहीं कर पाए। ऐसे उपभोक्ताओं को राहत देने और उन्हें आर्थिक रूप से पुनः मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है।
कोरोना संक्रमण के दौरान लंबे समय तक मीटर रीडिंग नहीं हो पाने के कारण कई उपभोक्ताओं को एक साथ कई महीनों के बिजली बिल प्राप्त हुए, जिन्हें जमा करना उनके लिए कठिन हो गया। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बकाया बिजली बिलों के समाधान के लिए यह विशेष योजना लागू की है।
इस योजना के अंतर्गत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल तथा कृषि उपभोक्ताओं को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। उपभोक्ताओं को मूल राशि और अधिभार (सरचार्ज) में छूट प्रदान की जाएगी। योजना में 31 मार्च 2023 की स्थिति में बकाया राशि को आधार मानते हुए राहत दी जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि की छूट पहली बार प्रदान की जा रही है, जिसके तहत कुल 758 करोड़ रुपए तक की राशि की राहत उपभोक्ताओं को मिलेगी। योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को अपने बकाया बिजली बिलों का भुगतान सरल और सुविधाजनक तरीके से करने का अवसर मिलेगा।
योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से या अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्रों एवं कार्यालयों में पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।
इसके अतिरिक्त प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए गांव-गांव में विशेष शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।
ऊर्जा विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे भुगतान के समय सावधानी बरतें और किसी प्रकार की शंका या समस्या होने पर अपने नजदीकी विद्युत वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क करें।