ईश्वर दुबे
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रायपुर/ दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र में शॉर्ट सर्किट और सिलेंडर विस्फोट से एक ही परिवार के चार सदस्यों की दर्दनाक मौत पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इससे मन अत्यंत व्यथित है। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को परिजनों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की विशेष सहायता राशि देने की घोषणा की है। यह राशि शासन के नियमानुसार दी जाने वाली 4-4 लाख रुपये की सहायता के अतिरिक्त होगी।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को परिजनों के ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
रोजगारोन्मुखी नीतियों का असर: पीएलएफएस 2025 में छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर केवल 2.3 प्रतिशत
रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास से बदल रही छत्तीसगढ़ की आर्थिक तस्वीर
युवाओं को अवसर, गांवों को मजबूती: रोजगार सृजन में छत्तीसगढ़ बना सकारात्मक मॉडल
सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हुआ रोजगार का आधार : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर : भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) 2025 के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम होकर 2.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा प्रदेश की मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगारोन्मुखी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को सम्मानजनक आजीविका, स्थायी आय और आत्मनिर्भरता से जोड़ना रही है। यही कारण है कि खेती, वनोपज, स्वरोजगार और लघु उद्यमों पर आधारित आर्थिक गतिविधियों ने प्रदेश में रोजगार के अवसरों को लगातार मजबूत किया है।
प्रदेश में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को आर्थिक विकास की धुरी बनाते हुए किसानों, ग्रामीणों और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आजीविका से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। समर्थन मूल्य पर वनोपज खरीदी, ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा, लघु एवं कुटीर उद्योगों के विस्तार, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांवों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ा है, जिससे पलायन में कमी आने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि केवल बेरोजगारी के आंकड़े कम होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को उनकी क्षमता और कौशल के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराना अधिक महत्वपूर्ण है। इसी सोच के अनुरूप कौशल उन्नयन, उद्यमिता विकास, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और निवेश आधारित औद्योगिक विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जहां प्रदेश में लगातार नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सरकार ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार का संकल्प छत्तीसगढ़ के प्रत्येक युवा, किसान, महिला और श्रमिक को आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ाने का है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास और रोजगार के नए अवसरों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, ताकि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनहितकारी योजनाओं, सुशासन और रोजगारोन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के अग्रणी विकासशील राज्यों में अपनी मजबूत पहचान और अधिक सुदृढ़ करेगा।
25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित
रायपुर, 12 मई 2026/रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा लगातार सघन निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जिले की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी के बीच स्थिर बनी हुई है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए इस वर्ष अब तक 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई है।
आधुनिक तकनीक से वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी
रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए 4 सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (CAAQMS) स्थापित की गई हैं। ये केंद्र खनन प्रभावित क्षेत्रों—कुंजेमुरा, मिलुपारा (तमनार), छाल (धरमजयगढ़) तथा औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के अंतर्गत रायगढ़ शहर और ओ.पी. जिंदल औद्योगिक पार्क क्षेत्र में नियमित रूप से मैन्युअल मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
नियम उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति
मंडल द्वारा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। जनवरी 2026 से मई 2026 तक प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले 8 उद्योगों पर 3 लाख 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी प्रकार, फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं परिवहन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले 17 उद्योगों पर 76 लाख 20 हजार 255 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है। इस प्रकार कुल 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की गई है।
फ्लाई ऐश परिवहन के लिए सख्त SOP और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था
सड़कों पर उड़ने वाली धूल एवं राखड़ की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मंडल द्वारा विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इसके तहत कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों के परिवहन के दौरान डस्ट कंट्रोल उपायों का पालन अनिवार्य किया गया है। फ्लाई ऐश के पारदर्शी और वैज्ञानिक निपटान के लिए IWMMS पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राखड़ के उठाव से लेकर अंतिम निपटान तक की प्रत्येक गतिविधि की डिजिटल निगरानी की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्धता
क्षेत्रीय कार्यालय, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार रायगढ़ जिले में प्रदूषण स्तर में लगातार वृद्धि होने की आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले की वायु गुणवत्ता नियंत्रित और स्थिर बनी हुई है। मंडल द्वारा उद्योगों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
स्टाफ नर्स का नाम होगा नर्सिंग ऑफिसर
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभारः श्याम बिहारी जायसवाल
रायपुर, 12 मई 2026/ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है। उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।
AI और अत्याधुनिक कौशल से सुसज्जित होंगे युवा
जिला प्रशासन की पहल से खुलेगा अत्याधुनिक तकनीक और स्वरोजगार का मार्ग
रायपुर, 12 मई 2026/ युवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस कर उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन धमतरी द्वारा एक दूरदर्शी पहल की गई है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल उन्नयन पाठ्यक्रम (AI Upskilling Course 2026) हेतु प्रवेश परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। इस अभिनव प्रयास का लक्ष्य स्थानीय युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल स्किलिंग के क्षेत्र में निपुण बनाकर उनके लिए रोजगार के नए द्वार खोलना है।
युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह
पी.जी. कॉलेज धमतरी के IT भवन में आयोजित इस परीक्षा में जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसमें कुल प्रतिभागी 166 ने हिस्सा लिया, जिसमें से ऑफलाइन माध्यम 107 विद्यार्थी और ऑनलाइन माध्यम 59 विद्यार्थी शामिल हुए। बड़ी संख्या में युवाओं की यह भागीदारी जिले में नई तकनीकों और डिजिटल साक्षरता के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।
वैश्विक स्तर का प्रशिक्षण और स्किलिंग
परीक्षा के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को बेंगलुरु की प्रतिष्ठित संस्था द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। इस विशेष प्रोग्राम में युवाओं को उन स्किल्स का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा जिनकी वर्तमान में वैश्विक उद्योगों में सर्वाधिक मांग है। चयनित विद्यार्थियों को आगे विशेष AI Skill Training Program से जोड़ा जाएगा। यह प्रशिक्षण प्रतिष्ठित संस्था Learnijoy Bangalore द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को AI Video Generation, Website Development, AI Agents Making, Automation Tools, Digital Productivity, Prompt Engineering तथा आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित करने जैसी अत्याधुनिक स्किल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
रोजगार और उद्यमिता पर केंद्रित पहल
इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार, इंटर्नशिप, फ्रीलांसिंग और डिजिटल उद्यमिता के काबिल बनाना है। प्रशिक्षण पूरी तरह से 'Industry-Oriented' होगा, जिससे युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।
कलेक्टर का संदेश भविष्य डिजिटल और AI का है
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, आने वाला युग AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी का है। हमारा प्रयास है कि धमतरी के युवाओं को समय रहते वैश्विक स्तर की स्किलिंग उपलब्ध कराई जाए। इससे वे न केवल बेहतर रोजगार प्राप्त करेंगे, बल्कि स्वयं के स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार सृजक भी बन सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन भविष्य में भी नवाचार, स्टार्टअप प्रमोशन और टेक्नोलॉजी आधारित रोजगार कार्यक्रमों को निरंतर बढ़ावा देता रहेगा।
नवाचार की ओर बढ़ते कदम
गौरतलब है कि इससे पहले Yuva Fest में आयोजित AI वर्कशॉप के माध्यम से 4 विद्यार्थियों को इंटर्नशिप का अवसर मिला था, जिससे प्रेरित होकर इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया। जिला प्रशासन की यह पहल धमतरी को तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने और डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
चोट के बावजूद जीता गोल्ड
रायपुर, 12 मई 2026/ रायपुर के सरोना स्थित निजी पब्लिक स्कूल के स्केटिंग ग्राउंड में 9 एवं 10 मई 2026 को प्रथम छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय रोलर स्पोर्ट्स रैंकिंग चौंपियनशिप का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बिलासपुर की होनहार खिलाड़ी शिविका पांडेय ने अपनी प्रतिभा और अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए राज्य स्तरीय चौंपियन का खिताब अपने नाम किया।
चोट को मात देकर हासिल किया स्वर्ण
शिविका ने 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के ट्वॉय इनलाइन स्केट स्पर्धा में हिस्सा लिया। 9 मई को आयोजित 400 मीटर रेस के दौरान वे गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घायल अवस्था में ही रेस पूरी कर कांस्य पदक जीता। अगले ही दिन, उसी चोट और दर्द के बावजूद, शिविका ने 200 मीटर रेस में असाधारण प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और अपने आयु वर्ग की ओवरऑल चौंपियन बनीं।
परिचय और परिवार
शिविका पांडेय बिलासपुर के बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की छठवीं कक्षा की छात्रा हैं और रॉयल स्केटिंग क्लब, बिलासपुर में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं। उनकी इस सफलता पर उनके परिवार में हर्ष का माहौल है। शिविका के माता-पिता चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। डॉ. श्वेता पांडेय आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं और डॉ. विद्या भूषण पांडेय (विभागाध्यक्ष - बालरोग विभाग), शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय महाविद्यालय, बिलासपुर में पदस्थ हैं। उल्लेखनीय है कि शिविका स्वयं स्वर्ण प्राशित (आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर प्राप्त) हैं। उनके पिता डॉ. विद्या भूषण पांडेय नियमित रूप से स्वर्ण प्राशन शिविरों का आयोजन कर बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
रायपुर, 12 मई 2026/छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी श्री महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया।
परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर
श्री कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया।
तकनीक का बेजोड़ तालमेल
श्री कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है।
आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन
महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैगन कीखेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ प्राप्त हुई।
क्षेत्र के किसानों के लिए रोल मॉडल
महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।
रायपुर, 12मई 2026/छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल प्रभावी और सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन हो।
राखड़ प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुशासित व्यवस्था
मंडल की सतर्कता के परिणामस्वरूप जांजगीर-चांपा सहित राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लाई ऐश (राखड़) का प्रबंधन निर्धारित वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। हाल ही में विभागीय अधिकारियों ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राखड़ के परिवहन, भंडारण और निस्तारण की प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित एवं मानकों के अनुरूप पाई गईं।
पारदर्शिता और जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जनसहभागिता को विशेष महत्व दिया है। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि राखड़ परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन हो तथा धूल या अन्य कणों का अनियंत्रित प्रसार न हो। वैज्ञानिक डंपिंग तकनीकों के उपयोग से आसपास के जल स्रोतों और कृषि भूमि की गुणवत्ता सुरक्षित बनी हुई है। स्थानीय निकायों और ग्रामीणों के साथ सतत संवाद के माध्यम से मंडल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर रहा है।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ा जनविश्वास
मंडल आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उद्योगों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। इस सतत निगरानी व्यवस्था से न केवल पर्यावरणीय अनुपालन को मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।
स्वच्छ और हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में सतत प्रयास
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण करना है। नियमित समीक्षा, उन्नत तकनीकों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से मंडल पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों को स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai-led initiative brings relief to water-stressed rural areas
Water Resources Department launches statewide effort to replenish rural water bodies
Raipur, May 12, 2026/ Amid falling water levels and an intense summer across Chhattisgarh, the Water Resources Department has launched a large-scale effort to refill drying village ponds through canal networks, providing relief to rural communities dependent on these water bodies for daily use. So far, 4,755 ponds across the state have been replenished with canal water under the special campaign, while work is continuing in other identified ponds based on local requirements.
The initiative has been taken in line with the direction of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai to address water scarcity in rural areas during peak summer months, when ponds, often the primary source of water for villages, begin to dry up rapidly.
According to data released by the department, Raipur district has recorded the highest number of refilled ponds. Out of 783 ponds identified for water replenishment, 663 have already received canal water. In Balodabazar-Bhatapara district, 504 out of 586 ponds have been filled, while in Dhamtari district, water has been supplied to 329 out of 508 identified ponds.
The campaign is being carried out across most districts of the state to ensure immediate relief for villagers facing water shortages for domestic and community use. The initiative is also expected to aid groundwater recharge in surrounding areas. Water released into ponds through canal systems gradually percolates into the soil, helping improve groundwater levels and sustain wells and handpumps for longer periods during summer.
The initiative, under which canal water from various irrigation projects is being diverted to village ponds, is emerging as a significant step towards water conservation and groundwater recharge. Beyond providing immediate summer relief, it is also expected to strengthen awareness around preservation of traditional water bodies and local water resources in rural areas.
4755 तालाब हुए लबालब
मुख्यमंत्री श्री साय की मंशा के अनुरूप सूखते तालाबों को*जीवनदान देने जल संसाधन विभाग का विशेष अभियान
रायपुर,12 मई 2026/ वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान तालाबों में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में सूख रहे 4 हजार 755 तालाबों को अब तक विभाग द्वारा त्वरित पहल करते हुए नहरों के माध्यम से भरा जा चुका है और जरूरत के मुताबिक शेष तालाबों में भी पानी भरने का कार्य तेजी से जारी है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भीषण गर्मी नेे पूरे देश को अपने चपेट में ले रखा है, इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इससे जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्र में पानी का प्रमुख स्त्रोत तालाब भी जलविहीन हो रहे हैं। ऐसे हालात में लोगों को राहत पहुंचाने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में सूख रहे तालाबों में जल भराव का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।
जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें सर्वाधिक रायपुर जिला के अंतर्गत निस्तारी हेतु प्रस्तावित कुल 783 तालाबों में से अब तक 663 तालाबों में जल भराव हेतु नहर से पानी दिया जा चुका है। इसी तरह बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के 586 तालाबों में से 504 तालाबों, धमतरी जिले के 508 तालाबों में से 329 तालाबों में पानी भरा जा चुका है। इस तरह प्रदेश के अमूमन सभी जिलों के तालाबों में पानी भराव का कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में लोगों के निस्तारी आदि की समस्या का तत्काल समाधान हो सके।
उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के तहत नहरों के माध्यम से पानी को तालाबों तक पहुंचाने के लिए यह योजना जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावी कदम साबित हो रही है। यह पहल केेवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जल संरक्षण की सामूहिक सोच को मजबूत करती है। जब गांवों के तालाब भरते हैं और लोगों को उनका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, तब समाज में जल बचाने और जल-स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।
जल संसाधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में जल दोहन सहित अन्य कारणों से सूखते तालाबों के लिए नहरों से पानी का पहुंचाया जाना अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है। इसके माध्यम से तालाबों के भू-जल स्तर में वृद्धि अहम साबित होगी। नहरों से तालाबों में छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भूूूू-जल का पुर्नभरण होता है। इससे कुएं, हैण्डपम्प लम्बे समय तक जलयुक्त बने रहते हैं। इस तरह तालाबों के भरने से जहां ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पानी के कमी से राहत मिल रही है, वहीं आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।