ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
Google Analytics —— Meta Pixel
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि विपक्षी दल जहां अपनी-अपनी मिल्कियत बचाने के लिए आपस में हाथ मिला रहे हैं, वहीं भाजपा ने देश की तकदीर बदलने के लिए काम किया है। उन्होंने कुछ विपक्षी नेताओं को ‘‘झूठ की मशीन’’ करार दिया और कहा कि "वे एके-47 के फायर की तरह झूठ दागते हैं।" मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे विपक्षी दलों के गठबंधन से चिंतित न हों क्योंकि लोग उन्हें स्वीकार नहीं करते और यहां तक कि उनके नकारात्मक कार्यों, देश के अच्छे कार्यों को नकारने और सेना के लिए ‘‘अपशब्द तथा अपमानजनक शब्दों’’ के चलते उनसे "नफरत" करते हैं।
लखनऊ। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये वर्ष 1992 जैसा ही आंदोलन शुरू करने के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इरादे को मुल्क के लिये बेहद खतरनाक बताते हुए आज कहा कि मंदिर को लेकर अचानक तेज हुई गतिविधियां पूरी तरह राजनीतिक हैं। एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने बातचीत में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर हिन्दूवादी संगठनों द्वारा अचानक तेज की गयी गतिविधियों के बारे में कहा कि जहां तक मंदिर निर्माण को लेकर तथाकथित हिन्दूवादी संगठनों में बेचैनी का सवाल है, तो साफ जाहिर है कि यह सियासी है। आगामी लोकसभा चुनाव को सामने रखकर यह दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन वे संगठन दरअसल क्या करेंगे, अभी तक इसका सही अंदाजा नहीं है।
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पहली बार नागा साधु भी चुनावी अखाड़े में दांव अजमाने के लिए उतरे। गुरुवार को जूना अखाड़े के नागा साधु दिगंबर जनकपुरी महाराज रायपुर पश्चिम से नामांकन दाखिल करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ साधुओं की टोली थी। वे भगवान के नाम की जयकारा लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे।
नागा साधु रायपुर पश्चिम से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इस सीट पर भाजपा से परिवहन मंत्री राजेश मूणत, कांग्रेस से विकास उपाध्याय, जनता कांग्रेस छग और बसपा गठबंधन से भोजराज गौरखड़े और आम आदमी पार्टी से उत्तम जायसवाल चुनावी मैदान में हैं।
जनकपुरी महाराज ने कहा कि वे समाज से भ्रष्टाचार मिटाने और लोगों की भलाई के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। नागा साधु का नामांकन दाखिल करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है।
रायपुर . कई दशकों के बाद ऐसा हो रहा है जब पेट्रोल-डीजल की कीमत एक बराबर हो गई। पेट्रोल पंप संचालकों का दावा है कि जब से ये कारोबार शुरू हुआ दोनों की कीमत में बड़ा अंतर रहता था, लेकिन अब दोनों की कीमत एक बराबर हो गई।
शुक्रवार को राजधानी में पेट्रोल 77.17 और डीजल 77.05 रुपए में बिका। यानी दोनों की कीमत 77 रुपए हो गई। पंप मालिकों का अनुमान है कि कीमतें लगातार गिरी तो पहली बार ऐसा होगा कि डीजल महंगा और पेट्रोल सस्ता हो जाएगा। पिछले महीने की शुरुआत में लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी, लेकिन उसके बाद अभी करीब 12 दिनों से दोनों की कीमतें घट रही हैं।
महीने के दूसरे दिन भी पेट्रोल में 19 और डीजल में 15 पैसे की कमी की गई। अफसरों का दावा है कि केंद्र सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार की ओर से टैक्स में कमी के बाद छत्तीसगढ़ में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत दूसरे राज्यों की अपेक्षा ज्यादा कम हो रही है। डीजल की कीमत कम होने के बाद मालभाड़ा में बढ़ोतरी भी रुक गई है। डीजल 80 रुपए पार होने के बाद भाड़ा 10 फीसदी बढ़ाने पर अड़े ट्रांसपोर्टर अब किसी भी तरह का किराया नहीं बढ़ा रहे हैं। इस वजह से त्योहार में लोगों को बाहर से आने वाली चीजें महंगे दामों में नहीं मिल रही है।
3 साल पहले 16 रुपए का फर्क था : पेट्रोल और डीजल की कीमत में तीन साल पहले तक 2015 में 16.26 रुपए का अंतर था। यह अंतर सबसे ज्यादा था। उस समय डीजल की कीमत 57 रुपए थी और पेट्रोल भी सस्ता था। सितंबर 2018 में यह घटकर 2.49 रुपए हो गया। इसके बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ती रही और फर्क भी बढ़ता रहा। लेकिन अचानक ही कीमतें कम होने लगी। इसी के असर दोनों की कीमत बराबर हो गई। इसका असर गाड़ियों के बाजार पर भी पड़ रहा है। डीजल वाली गाड़ियों की बुकिंग कम हो रही है। इस दिवाली में अभी तक सबसे ज्यादा बुकिंग पेट्रोल वाली गाड़ियों की ही हो रही है।
कमीशन पर असर नहीं : पेट्रोल-डीजल की कीमत कम होने का असर पेट्रोल पंप संचालकों के कमीशन पर नहीं हो रहा है। कुछ महीने पहले ही बढ़े हुए कमीशन को कीमत कम होने के बाद भी बरकरार रखा गया है। पंप संचालकों को अभी एक लीटर पेट्रोल की बिक्री पर 3.31 और डीजल की बिक्री पर 2.22 रुपए कमीशन मिल रहा है। हालांकि पंप संचालकों ने इस कमीशन को और बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि पंप चलाने का खर्चा बढ़ गया है। इसलिए कमीशन भी बढ़ना ही चाहिए।
खेल डेस्क. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की तारीफ की है। उन्होंने कहा, "कोहली क्रिकेट के सुपरस्टार हैं। वे टेस्ट को जिंदा रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। क्रिकेट में अभी सुपरस्टार खिलाड़ियों की कमी है। इंग्लैंड में ऐसे एक या दो खिलाड़ी हैं, लेकिन सबसे आगे कोहली हैं।"
‘जगमोहम डालमिया एनुअल कॉन्क्लेव’ में शुक्रवार को स्मिथ ने कहा, ‘‘कोहली को टेस्ट क्रिकेट पसंद है और वे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने उस देश में टेस्ट को प्रासंगिक बनाए रखा है, जहां आईपीएल और टी-20 को पसंद किया जाता है।’’
स्मिथ ने कहा, ‘‘विराट जब तक टेस्ट क्रिकेट को एक आइकन और सुपरस्टार के तौर पर बढ़ावा देते रहेंगे, तब तक हमारे पास इस खेल को प्रासंगिक बनाए रखने का मौका है।’’ स्मिथ ने 117 टेस्ट खेले हैं। इनमें से 109 मैचों में वे दक्षिण अफ्रीका के कप्तान थे।
इस मौके पर स्मिथ ने कूकाबुरा गेंद की बुराई की और कहा कि इसके इस्तेमाल से टेस्ट क्रिकेट बोरिंग हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह गेंद काफी सॉफ्ट होती है, जिससे गेंदबाज ज्यादा समय तक स्विंग नहीं करा पाता। प्रशंसक ड्रॉ मैच की जगह रोमांचक खेल देखने आते हैं।’’
स्मिथ ने कहा, ‘‘टेस्ट में गेंद स्पिन और स्विंग होनी चाहिए। साथ ही हवा में भी मूवमेंट चाहिए। जब पिच से बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को बराबर मदद मिलेगी, तभी टेस्ट क्रिकेट को भविष्य में बचाया जा सकेगा।’’
उन्होंने बोरिंग टेस्ट के लिए क्वालिटी टीम की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया। स्मिथ ने कहा, ‘‘कई टीमें बदलाव के साथ गुजर रहीं है। इससे मैच में बराबरी का टक्कर नहीं हो पा रहा है। अगर मैच बराबरी के होंगे तो दर्शक निश्चित तौर पर टेस्ट देखने आएंगे।’
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को 177 उम्मीदवारों ने नाम की घोषणा कर दी। इस सूची में भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं के नाम गायब हैं। जिसके बाद भाजपा में टिकट बटवारे को लेकर विरोध शुरू हो गया है। मनचाही सीट नहीं मिलने और सीट कटने से नेता नाराज हैं और उनके समर्थक बिफर गए हैं। राज्यभर में सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुए हंगामे का शोर राजधानी में मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गया है।
बाबूलाल गौर समर्थकों का हंगामा
बाबूलाल गौर की सीट गोविंदपुरा को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। जिसके बाद गौर के समर्थकों ने भी जमकर हंगामा काटा। बाबूलाल गौर के समर्थक को आशंका है कि उनका टिकट काटा जा सकता है। गौर के समर्थकों ने बड़ी संख्या में गोविंदपुरा में हंगामा किया। साथ ही उन्होंने बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को टिकट देने की मांग। समर्थक हर हाल में कृष्णा गौर को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। समर्थकों का दावा है कि अगर यह सीट कृष्णा गौर को नहीं दी गई तो यह सीट भाजपा के हाथ से निकल सकती है।
कैलाश जोशी ने गौर से जताई सहानुभूति
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने भी बाबूलाल गौर की सीट होल्ड होने पर दबी जुबान में इसे गलत बताया। जोशी ने कहा, "मैं कुछ कह भी दूं कि गलत हो रहा है तो इससे क्या होगा। पार्टी तय करती है मेरे कहने से कुछ नहीं होगा।"
विधायकों और पूर्व मंत्रियों के टिकट काटे जाने पर जोशी ने कहा, "कोई ना कोई कारण होगा जिसकी वजह से इनके टिकट काटे गए हैं।" कैलाश जोशी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन के मुद्दे पर कहा कि इससे भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान झेलना पड़ सकता है।
वेल सिंह भूरिया का हंगामा
भाजपा नेता वेल सिंह भूरिया सरदारपुर से विधायक हैं। इस बार उनका टिकट संजय बघेल को दे दिया गया है। टिकट कटने से नाराज भूरिया अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। भूरिया अपने समर्थकों की फौज के साथ करीब 25 गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे थे।
कुसुम मेहदेल भी शिवराज से मिलीं
पन्ना विधानसभा सीट के लिए भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। कुसुम मेहदेले यहां से विधायक हैं। इस बार उनका टिकट कटने की भी आशंका है। मेहदले मुख्यमंत्री आवास पहुंचीं और शिवराज सिंह से मुलाकात कर उन्होंने टिकट बंटवारे पर अपनी नाराजगी जताई।
चुनाव की तारीख सामने आते ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में उठापटक शुरू हो गई है। मौजूदा विधायक दोबारा जीत के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं। इन्हीं नेताओं में से एक हैं कांग्रेस के बाबा जो अंबिकापुर विधानसभा से विधायक हैं। इन्हें सिर्फ प्यार से टीएस बाबा बुलाया जाता है, असल में ये सरगुजा रियासत के राजा हैं, इनका नाम है- त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव।
टी एस सिंहदेव का रुतबा पूरे छत्तीसगढ़ में है। वे इतने लोकप्रिय हैं कि लोग उन्हें राजा जी या राजा साहब बुलाने की बजाय टीएस बाबा कहकर पुकारते हैं। टीएस सिंहदेव राज्य के सबसे अमीर विधायक हैं। 2013 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मिजोरम के सभी विधायकों की संपत्ति को मिला दिया जाए तो उनकी कुल संपत्ति होती है।
2013 में उनकी कुल संपत्ति लगभग 551 करोड़ थी, तो वहीं इस बार उनकी संपत्ति 504 करोड़ के आस-पास है। अंबिकापुर इलाके में कई मकान, सरकारी इमारतें, यात्रियों के लिए बनाए गए सराय, हॉस्पिटल, स्कूल या खेतों पर इन्हीं के परिवार का मालिकाना हक है। इस बार अंबिकापुर सीट से उनके सामने BJP के अनुराग सिंहदेव चुनाव लड़ रहे हैं। टीएस सिंहदेव पिछले दो बार से अंबिकापुर में चुनाव जीतते आए हैं, इस बार उनकी नजर हैट्रिक पर है।
केंद्र सरकार पर लगातार राम मंदिर निर्माण के लिए साधु-संत दबाव बना रहे हैं। शुक्रवार को आरएसएस के सरकार्यवाह ने भी सरकार से इस मसले पर अध्यादेश लाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय से न्याय मिलने में देरी हो रही है और सभी चाहते हैं कि राम मंदिर बने। इस मामले पर अब उच्चतम न्यायालय के पूर्व जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर का बयान आया है। उनका कहना है कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार इसपर कानून बना सकती है।
जस्टिस चेलमेश्वर ने कांग्रेस पार्टी से जुड़े संस्थान ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस की एक परिचर्चा सत्र के दौरान कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं। जस्टिस चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है।
इस साल की शुरुआत में जस्टिस चेलमेश्वर उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को परिचर्चा सत्र में जब चेलमेश्वर से पूछा गया कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान क्या संसद राम मंदिर के लिए कानून पारित कर सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘यह एक पहलू है कि कानूनी तौर पर यह हो सकता है (या नहीं)। दूसरा यह है कि यह होगा (या नहीं)। मुझे कुछ ऐसे मामले पता हैं जो पहले हो चुके हैं, जिनमें विधायी प्रक्रिया ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में अवरोध पैदा किया था।’ चेलमेश्वर ने कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय का आदेश पलटने के लिए कर्नाटक विधानसभा द्वारा एक कानून पारित करने का उदाहरण दिया। उन्होंने राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद से जुड़ी ऐसी ही एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘देश को इन चीजों को लेकर बहुत पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था। यह (राम मंदिर पर कानून) संभव है, क्योंकि हमने इसे उस वक्त नहीं रोका।’