ईश्वर दुबे
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तिरुवनंतपुरम | केरलम में 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए बृहस्पतिवार को वोट डाले जाएंगे। राज्य का चुनाव इस बार अनुभव बनाम बदलाव की लड़ाई नजर आ रहा है। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने जहां अपने मौजूदा विधायकों को बड़ी संख्या में फिर से मैदान में उतारा तो वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने नए चेहरों के भरोसे सत्ता में वापसी का मंसूबा संजोया है। दूसरी तरफ राज्य में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में जुटे भाजपा के नेतृत्ववाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदें जनता के करिश्मे पर टिकी हुई हैं।मुख्यमंत्री पी. विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने 69 मौजूदा विधायकों को फिर से उम्मीदवार बनाया है। इनमें से कई ने 2021 के चुनाव में अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि सत्ता विरोधी लहर को भांपते हुए 30 विधायकों के टिकट काटे गए और कुछ सीटों पर बदलाव भी किए गए हैं। एलडीएफ ने 2021 में हारने वाले केवल तीन उम्मीदवारों को ही मौका दिया है, जबकि हारे 38 उम्मीदवारों को इस बार टिकट नहीं मिला। एलडीएफ का मानना है कि उसके मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है, इसलिए उन्हें दोहराना सही रहेगा।
केरलम में धर्म और पहचान की कैसी राजनीति?
केरलम विधानसभा चुनाव में धर्म और पहचान की राजनीति भी खूब हुई। हाल ही में आई एक रिपोर्ट को लेकर ईसाई संगठन केरल कैथोलिक बिशप परिषद (केसीबीसी) ने असंतोष जताया और कहा कि सरकार को सिर्फ रिपोर्ट जारी करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। रिपोर्ट में ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच तुलना की गई है। इसे कुछ लोग चुनाव से पहले तनाव बढ़ाने की कोशिश मान रहे हैं।
लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी एक साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है. इससे पहले तमाम नेता अपने और अपने परिवार के लिए आरक्षित सीटों की तलाश में जुट गए हैं. इस सब काम में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सबसे ज्यादा तेजी से काम लिया है. उन्होंने अपनी परंपरागत जहूराबाद सीट छोड़ने का फैसला ले लिया है. इसके साथ ही उन्होंने संजय निषाद की पार्टी के प्रभाव वाली सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. इसके बाद से ही कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही है. इस सीट पर संजय निषाद की पार्टी चुनाव लड़ती आ रही है. ऐसे में एनडीए में सबकुछ ठीक होने को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. राजभर का यह ऐलान संजय निषाद के लिए काफी परेशानी करने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन सीटों पर दावा ठोका है जो निषाद पार्टी की हैं.
मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा मोड़ आया है। कांग्रेस ने एलान किया है कि वह इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद सम्मान जताने के तौर पर लिया गया है। इस निर्णय के बाद अब बारामती सीट पर चुनाव का माहौल पूरी तरह बदल गया है।दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नाथाला ने साफ कहा कि पार्टी ने अपने उम्मीदवार को मैदान से हटाने का निर्देश दे दिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार आकाश मोरे ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब उसे वापस लिया जाएगा। नामांकन वापस लेने का आज आखिरी दिन था, इसलिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।
क्यों लिया कांग्रेस ने चुनाव न लड़ने का फैसला?
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों ने राजनीतिक गलियारे में तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी, माकपा (सीपीआई-एम) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। माकपा का कहना है कि बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।
'वोटर संदिग्ध नहीं, नागरिक हैं'
माकपा के महासचिव एमए बेबी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में विरोध दर्ज कराया है। पत्र में दावा किया गया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान वोटर को एक संदिग्ध की तरह देखा गया। पार्टी का आरोप है कि अब मतदाता को यह
भुवनेश्वर | ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि राज्य सरकार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कानून लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म 'टॉक्सिक मीडिया' में बदलते जा रहे हैं। मंत्री ने एक्स पर साझा एक पोस्ट में बताया, 'सोशल मीडिया पर अशोभनीय टिप्पणी करने वालों को इससे बचना चाहिए, वरना आने वाले दिनों में सरकार उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।'
सार्वजनिक जगहों पर भी अभद्र भाषा के खिलाफ कानून बनाने की योजना
उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि सोशल मीडिया धीरे-धीरे जहरीले मीडिया का रूप ले रहा है, जहां बिना किसी रोक-टोक के अभद्र भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। प्रस्तावित कानून अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियों को निशाना बनाएगा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने वालों की जवाबदेही तय करेगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार जिस कानून पर विचार कर रही है, उसका दायरा सार्वजनिक स्थानों तक भी बढ़ाया जा सकता है, जिससे अभद्र भाषा के उपयोग को नियमन के दायरे
कच्छ | केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) को देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल होने का गौरव हासिल है, उसकी बहादुरी के किस्से भी उतने ही ज्यादा हैं। 1965 में इस बल की छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तान की इन्फेंट्री, जिसने गुजरात स्थित कच्छ के रण में 'टाक' और 'सरदार पोस्ट' पर हमला किया, को मुंह तोड़ जवाब दिया था। दुनिया हैरान थी कि अर्धसैनिक बल की सेकेंड बटालियन की दो कंपनियों (करीब 150 जवान) ने पाकिस्तानी सेना की 51 वीं ब्रिगेड के 35 सौ सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। पाकिस्तान ने 14 घंटे में तीन बार हमले का प्रयास किया, लेकिन सीआरपीएफ के बहादुर जवानों ने उनके मंसूबे पूरे नहीं होने दिए। पाकिस्तान के पास तोपें भी थी, जबकि सीआरपीएफ जवानों के पास सामान्य हथियार थे। नतीजा, पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए, जिनमें दो अफसर भी शामिल थे।चार को जिंदा पकड़ लिया गया।सीआरपीएफ के अदम्य शौर्य, रण कौशल और अद्वितीय बहादुरी के चलते हर साल 9 अप्रैल को शौर्य मनाया जाता है। 1965 में जब पाकिस्तान ने यह हमला किया तो उस वक्त बीएसएफ की स्थापना नहीं हुई थी। अप्रैल 1965 में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा की एक सैनिक चौकी पर हमला करने की योजना बनाई।
पाकिस्तानी सेना का मकसद भारतीय भू-भाग पर कब्जा करना था। इ
नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के महानिदेशालय शिपिंग ने देश के सभी बंदरगाहों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों का पूरा लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।जारी सर्कुलर में कहा गया है कि कई मामलों में पोर्ट अथॉरिटीज की ओर से दी गई रियायतें जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट और रीफर प्लग-इन शुल्क निर्यातकों तक समान रूप से नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में अब इन रियायतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से संबंधित हितधारकों, जैसे फ्रेट फॉरवर्डर्स और NVOCCs के माध्यम से निर्यातकों
Notable progress recorded across key indicators in 2025–26
Technology-driven measures strengthen transparency and monitoring
Raipur, April 9, 2026/ Chhattisgarh has emerged as one of the leading states in the country in the implementation of Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGA), with notable progress recorded across key indicators in the financial year 2025–26.
Nearly 97% of active labourers complete e-KYC
A major step towards improving transparency and efficiency has been the near-completion of e-KYC for active labourers. As of April 1, 2026, around 97 percent of active labourers in the state have completed e-KYC. In total, e-KYC has been carried out for 58.16 lakh labourers. In parallel, geo-tagging of 11.32 lakh completed assets has been undertaken, enabling better tracking and monitoring of works on the ground.
GIS-based planning in 11,668 gram panchayats
The state has also adopted GIS-based planning on a large scale. For the financial year 2026–27, a total of 2,86,975 works have been planned across 11,668 gram panchayats through the Yuktdhara portal. This approach has helped align planning with local requirements while ensuring a more structured and scientific process. At worksites, attendance monitoring has been strengthened through the use of face authentication-based NMMS (National Mobile Monitoring System). This has made the system more reliable and reduced scope for discrepancies.
Direct public access through QR codes
In another step towards public transparency, QR codes have been installed in gram panchayats, allowing citizens to access detailed information about ongoing works. Since September 1, over five lakh scans have been recorded, indicating active public engagement with the system.
Monthly platform for grievance redressal and review
The state has also introduced a regular platform for grievance redressal and review. On the 7th of every month, “Rozgar Diwas” and “Awas Diwas” are organised alongside the 'Chawal Utsav'. These events provide an opportunity for beneficiaries to raise concerns and for officials to review the implementation of schemes at the ground level.
Through a combination of digital tools and administrative measures, the state has focused on improving transparency, strengthening monitoring, and ensuring that benefits reach labourers effectively under MGNREGA.
तय मानक के अनुरूप नहीं होने पर बदली जाएंगी साड़ियां
रायपुर, 09 अप्रैल 2026/महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ है, लेकिन जहां भी गड़बड़ी मिली है, वहां सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर साड़ियां बदली जाएंगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दी गई साड़ियों की लंबाई और गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक्शन लिया है। विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को साल में दो साड़ी यूनिफॉर्म दी जाती है। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए तय हैं। इसी आधार पर राज्य में करीब 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति का आदेश छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को दिया गया था। साड़ियों के रंग, डिजाइन और लंबाई का मापदंड राज्य स्तर पर तय किया गया था। इसके अनुसार साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर निर्धारित है।
महिला एवं बाल विकास विभाग को साड़ी की आपूर्ति से पहले छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी के
सैंपल की जांच तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड, मुंबई से कराई गई थी, जिसमें गुणवत्ता सही पाई गई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरित की गई l हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कुछ शिकायतें सामने आईं। इनमें साड़ी छोटी होने, धागा निकलने और रंग छोड़ने की बात कही गई। विभाग ने तुरंत जांच समिति बनाकर इन मामलों की पड़ताल कराई। जांच में कुछ मामलों में लंबाई कम और बुनाई में खामियां सामने आईं।विभाग का कहना है कि कॉटन साड़ी होने के कारण पहली धुलाई में रंग छोड़ने की स्थिति कुछ जगहों पर दिखी, लेकिन बाद में रंग सामान्य रहा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे साड़ियों की दोबारा जांच करें और जहां मापदंड से कमी मिले, उसकी जानकारी भेजें। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी साड़ियों को बदलकर मानक के अनुसार नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं।
विभाग ने यह भी बताया कि जारी कार्यादेश में ही एजेंसी को गुणवत्ता बनाए रखने और शिकायत मिलने पर सामग्री बदलने की शर्त लिखी गई थी।विभाग का कहना है कि किसी भी हितग्राही को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी मानक के अनुरूप साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
रायपुर 9, अप्रैल 2026/ कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास से अछूता रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम हेटारकसा आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जहां पहले सड़क, संचार और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन के नक्सल उन्मूलन अभियान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांव में विकास दिखने लगा है।
नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा कारणों से पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही थी। ग्रामीण, कुएं और नालों पर निर्भर थे, और गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन और राज्य शासन के प्रयासों से ग्राम हेटारकसा के 63 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। दो सोलर पंप आधारित जल टंकियों के माध्यम से अब गांव के हर घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव के निवासी राजनाथ पोटाई बताते हैं कि पहले पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, जिसमें अधिक समय व श्रम लगता था। वहीं अब घर में ही दिनभर पानी मिलने से दैनिक जीवन काफी आसान हो गया है।
गांव की महिला सविता बेन ने कहती हैं कि पहले पानी की समस्या के कारण दिन का बड़ा हिस्सा इसी कार्य में चला जाता था, लेकिन अब नल-जल सुविधा से उन्हें राहत मिली है और वे अन्य कामों में समय दे पा रही हैं।
स्वास्थ्य और आजीविका पर सकारात्मक असर
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से गांव में जलजनित बीमारियों में कमी आई है। साथ ही ग्रामीण अब घरों के आसपास सब्जी-बाड़ी कर रहे हैं, जिससे टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी जैसी फसलें उगाकर वे पोषण के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित इस दूरस्थ क्षेत्र में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज ग्राम हेटारकसा यह साबित कर रहा है कि जब सुरक्षा, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।