ईश्वर दुबे
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Bhilai
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का महिलाओं ने जताया आभार
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना की 29वीं किस्त की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की। राशि प्राप्त होने के बाद बालोद जिले की लाभार्थी महिलाओं में खुशी का माहौल है। महिलाओं ने योजना को आर्थिक संबल देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
बालोद जिले के विभिन्न ग्रामों की महिलाओं ने बताया कि योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे स्वरोजगार संबंधी कार्यों में आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया है।
दवाइयों, स्कूल फीस, दैनिक खर्च में बनी मददगार
ग्राम बघमरा की श्रीमती देवकी विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें 29वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है। वे इस राशि का उपयोग घर के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं। ग्राम जगन्नाथपुर की श्रीमती जामवंती विश्वकर्मा ने कहा कि हर महीने मिलने वाली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। वहीं ग्राम ओरमा की श्रीमती राधिका सोनवानी ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है।
विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन का बनी मजबूत आधार
लाभार्थी महिलाओं ने अपने मोबाइल पर प्राप्त राशि का संदेश दिखाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
बालोद के भरदाकला में आधुनिक कृषि तकनीक बनी मिसाल, कम समय में बेहतर गुणवत्ता से धान की रोपाई
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रुझान खेती को नई गति दे रहा है। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती अधिक वैज्ञानिक, समयबद्ध और लागत प्रभावी बन रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम भरदाकला के किसान एवं सरपंच श्री क्रांति भूषण साहू ने अपने खेतों में पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) का सफल उपयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री साहू ने इस वर्ष 10 से 12 एकड़ क्षेत्र में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई कराई। उन्होंने बताया कि जहां पारंपरिक तरीके से मजदूरों के माध्यम से रोपाई करने में 20 से 25 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं इस मशीन की सहायता से रोपाई का कार्य बहुत कम समय में सटीक और व्यवस्थित ढंग से पूरा हो गया। मशीन से पौधों की रोपाई निश्चित दूरी और सीधी कतारों में होने से फसल का विकास बेहतर होता है तथा बाद में निंदाई-गुड़ाई जैसे कृषि कार्य भी आसानी से किए जा सकते हैं।
श्री साहू ने बताया कि कृषि सीजन में मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे समय में पैडी ट्रांसप्लांटर जैसी आधुनिक तकनीक श्रम और समय दोनों की बचत करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ट्रे आधारित नर्सरी तैयार करने सहित कुछ अतिरिक्त लागत आती है, लेकिन बड़े रकबे की खेती के लिए यह तकनीक लंबे समय में अधिक किफायती और लाभदायक सिद्ध होती है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में श्रमिकों की उपलब्धता में कमी और समयबद्ध खेती की आवश्यकता को देखते हुए कृषि मशीनीकरण ही बेहतर विकल्प है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में क्षेत्र के अनेक किसान भी अब पैडी ट्रांसप्लांटर तकनीक को समझने और अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे समय पर रोपाई, बेहतर फसल प्रबंधन और उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से बढ़ेगा ग्रामीणों का जीवन स्तर
रायपुर, जुलाई 2026/ ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए विकसित भारत जी राम जी के तहत प्रदेश के गांवों में विकास कार्यों को गति मिल रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले की ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान के लिए पक्की नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने से बरसात के दौरान जलजमाव, गंदगी और आवागमन की परेशानी से ग्रामीणों को स्थायी राहत मिलेगी, वहीं गांव में स्वच्छता और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी।
ग्राम पंचायत जुंगेरा की सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने बताया कि गांव में लंबे समय से कच्ची नाली होने के कारण बरसात के दिनों में पानी गलियों और घरों तक पहुंच जाता था। इससे लोगों का जनजीवन प्रभावित होने के साथ घरेलू सामानों को भी नुकसान उठाना पड़ता था। पंचायत द्वारा कई वर्षों से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब साकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पक्की नाली के निर्माण से न केवल जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि गांव में स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा और लोगों का जीवन भी अधिक सुविधाजनक बनेगा। ग्रामीणों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने से बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से हमेशा के लिए राहत मिलेगी।
सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी सोच और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण आज गांवों में ऐसे स्थायी और जनहितकारी विकास कार्य तेजी से धरातल पर उतर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी
स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण पर जोर
हर उद्योग में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट, प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे तथा देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के निर्देश
रायपुर, जुलाई 2026/ राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक "बर्ड आइलैंड" (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।
धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन
लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
रायपुर, जुलाई 2026/ कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।
स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।
जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
पहचान से लेकर घर वापसी तक
इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"
लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।
सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल 'एग्रीस्टेक किसान पंजीयन' बस्तर अंचल के किसानों के लिए खेती-किसानी को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ किसानों को पंजीयन में परेशानी जरूर हुई, लेकिन नारायणपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की तत्परता ने इस चुनौती को एक मिसाल में बदल दिया। प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण अब अंदरूनी क्षेत्रों के किसान बिना किसी बाधा के समय पर खाद-बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
चिंता के बादल छंटे, समय पर मिला खाद-बीज
ग्राम कुकड़ाझोर के निवासी किसान बीरसिंह पिता माहरू के लिए इस साल का खरीफ सीजन शुरुआत में चिंताओं भरा था। तकनीकी कारणों से उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सहकारी समिति से खाद और बीज मिलने में दिक्कत आ रही थी। खेती का समय निकला जा रहा था और बीरसिंह लगातार प्रयासों के बाद भी तकनीकी त्रुटि के कारण पंजीयन नहीं करा पा रहे थे।परेशान होकर बीरसिंह ने नारायणपुर तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर त्रुटियों को दूर किया। कुछ ही समय में बीरसिंह का पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया। श्री बीरसिंह ने कहा कि अगर प्रशासन समय पर मेरी मदद नहीं करता, तो इस साल मेरी पूरी खेती पिछड़ जाती। अधिकारियों की त्वरित पहल से मेरी चिंता दूर हो गई और अब मुझे समय पर खाद-बीज मिल गया है।
वीरू और सगराम की भी दूर हुई परेशानी
यह राहत केवल बीरसिंह तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पंजीयन की इस सुलभता का लाभ जिले के अन्य किसानों को भी मिला। ग्राम बोरण्ड के किसान वीरू भी इसी तरह की तकनीकी समस्या से जूझ रहे थे, जिसका प्रशासन ने त्वरित निराकरण किया। इसी तरह ग्राम कोचवाही के किसान सगराम पोटाई का पंजीयन भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया, जिससे उन्हें समय पर कृषि इनपुट (खाद-बीज) मिल सका।
प्रशासनिक तालमेल और संवेदनशीलता की मिसाल
एग्रीस्टेक जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाना है। नारायणपुर जिले में तकनीकी समस्याओं का जिस तेजी से समाधान किया गया, वह यह साबित करता है कि यदि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।
प्रशासन की इस मुस्तैदी से न केवल नारायणपुर के किसानों का डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि बस्तर में खेती को अधिक सशक्त, सरल और लाभकारी बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान, शासकीय अवकाश के बावजूद सक्रिय रहा प्रशासन
समाज कल्याण विभाग ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से पहुंचाई सहायता, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़े गणेश राम यादव
प्रतिमाह मिलती है दिव्यांग पेंशन: राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न हो रहा उपलब्ध
महतारी वंदन योजना का मिल रहा परिवार को लाभ
रायपुर जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।
ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गणेश राम यादव की भाभी श्रीमती चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया आधार
आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार
रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा "जशक्राफ्ट" ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।
विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।
जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।
राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल करना है।
बदली बिलाईगढ़ के तिहारूराम की तकदीर: 4 लाख रूपए के अनुदान से मिला ट्रैक्टर
कृषि यंत्रीकरण योजना से आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़े किसान के कदम
रायपुर, आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।
ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा।
'वन स्टॉप सेंटर' से मिला किसानों को तत्काल लाभ
सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा 'वन स्टॉप सेंटर' के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।
शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।
उन्नत कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।
उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।
जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।