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उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं

आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो - उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा

रायपुर,  कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।

गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।

जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी श्री आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, एडीएम श्री एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ श्री राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

अंबिकापुर के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित रोजगार मेले में युवाओं से किया आत्मीय संवाद, चयनित अभ्यर्थियों को दी बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं

रायपुर, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को अंबिकापुर स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित संभाग स्तरीय रोजगार मेले में सहभागिता कर क्षेत्र के युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने रोजगार के लिए पहुंचे युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता युवाओं को उनकी प्रतिभा, योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने युवाओं से निरंतर परिश्रम, कौशल विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रोजगार मेले केवल नियुक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का सशक्त मंच हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की राह और अधिक मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में कौशल और दक्षता ही सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विभिन्न विभागों के माध्यम से कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सके।
इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने रोजगार मेले के माध्यम से चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रोजगार मेले में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

आदिवासी संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में डॉ. बुधरी ताती के योगदान की मुख्यमंत्री ने की सराहना

रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. बुधरी ताती ने चार दशक से अधिक समय तक बस्तर अंचल सहित वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सतत कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती जैसे व्यक्तित्व हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत, लोक संस्कृति और सेवा की परंपरा के सशक्त प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को समाज के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती के परिजन उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय ShakthiSAT Mission के लिए चयनित महिमा राजपूत को मुख्यमंत्री ने दी बधाई

रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय ShakthiSAT Mission के लिए चयनित रायपुर की प्रतिभाशाली छात्रा महिमा राजपूत को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महज 14 वर्ष की आयु में 108 देशों के विद्यार्थियों के साथ इस प्रतिष्ठित अंतरिक्ष मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित होना न केवल महिमा की असाधारण प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिमा राजपूत ने अपनी लगन, प्रतिभा और समर्पण से अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अवसर मिलने पर वैश्विक मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि महिमा की यह प्रेरणादायी सफलता प्रदेश के लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और विज्ञान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिमा राजपूत को पुनः हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की तथा आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाती रहेंगी।

रायपुर,  किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (PROM) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं।

महासमुंद जिले के कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।


Raipur , June 27, 2026: In a significant step towards unlocking Chhattisgarh’s mineral wealth, the Board of Directors of NMDC-CMDC Limited (NCL) has approved the next phase of exploration at the Baloda-Belmundi Diamond Block in Mahasamund district. At its Board meeting held in New Delhi, the company decided to commence Large-Diameter Drilling, marking a crucial milestone towards assessing the diamond deposit scientifically and paving the way for commercial diamond mining in the state.

The Board reviewed the progress of the project and directed that all technical activities under the Prospecting Licence be completed within the stipulated timeline. The large-diameter drilling programme will enable a precise assessment of the diamond-bearing kimberlite pipe. Based on the results, a detailed Feasibility Report will be prepared, which will form the basis for a final decision on the commercial development of the diamond mine.

The meeting was attended by Shri Amitava Mukherjee, Shri Ashish Chatterjee, Shri Saurabh Singh, Chairman, Chhattisgarh Mineral Development Corporation (CMDC), Shri P. Dayanand, Secretary, Mineral Resources Department, Government of Chhattisgarh, Shri Rajat Bansal, Managing Director, CMDC, Shri Upendra Kumar, and Shri Vinay Kumar.

NMDC-CMDC Limited (NCL) is a joint venture between NMDC Limited (51%), a Government of India enterprise, and the Chhattisgarh Mineral Development Corporation (49%). While the company has traditionally focused on iron ore mining, the successful discovery of natural diamonds at Baloda-Belmundi marks its emergence as a multi-mineral development company.

NCL identified the prospective kimberlite pipe through stream sediment sampling, geophysical surveys, and targeted drilling. Around 200 tonnes of bulk samples were processed at NMDC’s Panna Diamond Processing Plant, yielding five natural diamonds weighing a total of 1.22 carats, providing strong scientific confirmation of diamond-bearing geology in the area.

Experience from leading diamond-producing countries such as Botswana, South Africa, Canada, and Australia suggests that such early-stage discoveries often indicate the presence of commercially viable diamond deposits. Consequently, the Baloda-Belmundi project is being viewed as a strategically important mineral development initiative not only for Chhattisgarh but also for India.

The Board also reviewed the progress of NCL’s key iron ore projects in Chhattisgarh. At Bailadila Deposit-4, production is targeted at one million tonnes during the current financial year, with plans to gradually increase capacity to seven million tonnes per annum. Development of Bailadila Deposit-13, with a proposed production capacity of 10 million tonnes annually, is also progressing steadily.

The Board reaffirmed its commitment to environmentally responsible mining, scientific waste management, water conservation, and the socio-economic development of local communities across all its projects.

Speaking after the meeting, Shri Saurabh Singh, Chairman, Chhattisgarh Mineral Development Corporation and Director, NCL, said, “The prudent utilisation of mineral resources and balanced industrial development are essential for India’s economic growth. The Baloda-Belmundi diamond project has the potential to become a historic milestone in positioning Chhattisgarh among the country’s leading diamond-producing states.”

रायपुर ,27 जून 2026। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में श्री अमिताभ मुखर्जी, श्री आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल, श्री उपेंद्र कुमार तथा श्री विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

​उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग तक की बनी मजबूत चेन

छत्तीसगढ़ के वनांचल में 'पीली क्रांति' से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूरत

​रायपुर,27 जून 2026/

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का आदिवासी बहुल नगरी विकासखंड अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर 'पीली क्रांति' (हल्दी उत्पादन) की ओर कदम बढ़ा चुका है। मुख्यमंत्री के मंशानुसार कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और वनांचल के किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां हल्दी की वैज्ञानिक खेती की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी शुरुआत की गई है।
​इस मुहिम के तहत नगरी और मगरलोड क्षेत्र के 250 किसानों ने 10 टन उच्च गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज (राइजोम) की बुवाई कर आगामी सीजन में 250 टन बंपर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जिला प्रशासन की इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसानों को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि 'उत्पादन–प्रसंस्करण–ब्रांडिंग–विपणन' की एक सशक्त वैल्यू चेन (मूल्य श्रृंखला) से जोड़ा जा रहा है।

खेत से लेकर बाजार तक का रोडमैप

​कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत धमतरी, जनपद पंचायत नगरी और 'प्रदान' संस्था के संयुक्त त्रिकोणीय सहयोग से ग्रामीण स्तर पर यह ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत व्यवस्था को बेहद संगठित रूप दिया गया है। 'गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी' (FPC) के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया गया है। कच्चे माल को सीधे औने-पौने दामों में बेचने के बजाय, जिला पंचायत द्वारा ग्राम कोर्रेमुडा में एक अत्याधुनिक हल्दी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है। यहां 'हरिभूमि किसान उत्पादक संगठन' के जरिए हल्दी का पाउडर और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे। तैयार हल्दी पाउडर को आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ 'गट्टासिल्ली FPC' द्वारा सीधे बाजार में उतारा जाएगा, जिससे बिचौलियों का खात्मा होगा और किसानों को सीधा मुनाफा मिलेगा।

'कोर्रेमुडा' में हुआ आधुनिक खेती का शंखनाद

​इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए ग्राम पंचायत झुझरकस्सा के आश्रित ग्राम कोर्रेमुडा में एक दिवसीय वृहद तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों और पीआरपी (PRP) ने हिस्सा लिया।

विशेषज्ञों ने भूमि सुधार, रोगमुक्त राइजोम चयन, बीज उपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन की बारिकियां सिखाईं।लगभग 270 दिनों की इस फसल के दौरान कृषि मित्र हर चरण में किसानों के खेतों में जाकर तकनीकी मार्गदर्शन देंगे, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

ऊपरी भूमि का सदुपयोग और टिकाऊ आय का जरिया

​नगरी विकासखंड का एक बड़ा हिस्सा पथरीली या ऊपरी भूमि (Upland) के अंतर्गत आता है, जहां धान की खेती उतनी लाभदायक नहीं होती। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह भूमि हल्दी जैसी नकदी फसलों के लिए बेहद उपयुक्त है। इस नई पहल से न केवल अनुपयोगी समझी जाने वाली जमीन का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
​यह समन्वित प्रयास आने वाले वर्षों में धमतरी के नगरी क्षेत्र को राज्य के नक्शे पर हल्दी उत्पादन और मूल्य संवर्धन के एक बड़े कृषि-उद्यमिता केंद्र के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

पलायन की त्रासदी से 'लखपति दीदी' बनने की मुकम्मल दास्तान

रायपुर,27 जून 2026/

​छत्तीसगढ़ की माटी में संघर्ष और स्वावलंबन की एक ऐसी अमिट इबारत लिखी है श्रीमती राजकुमारी साहू ने। कभी दो वक्त की सूखी रोटी और बच्चों के बेहतर भविष्य की तलाश में अपनी सरजमीं छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर राजकुमारी, आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम बिलासपुर में आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं। कल तक जो हाथ तंगहाली के आगे बेबस थे, आज वे 'बिहान' योजना की बदौलत न सिर्फ अपने परिवार की किस्मत बदल रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार दे रहे हैं।

​मजबूरी का वो दौर: जब रास्ते धुंधले थे

​राजकुमारी साहू का शुरुआती जीवन किसी आम साधनहीन ग्रामीण महिला की तरह अभावों के साए में बीता। परिवार में आय का कोई स्थायी जरिया नहीं था। जब गाँव में उम्मीद की सारी खिड़कियाँ बंद नजर आने लगीं, तो पेट की आग बुझाने के लिए उन्हें अपने परिवार के साथ अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ा। दूसरे प्रदेशों की तंग गलियों और कठिन परिस्थितियों में मजदूरी करते हुए उनके मन में हमेशा एक ही कसक रहती थी— "क्या कभी अपनी माटी में रहकर, अपने बच्चों के सामने सिर उठाकर जीने का मौका मिलेगा?"

​'बिहान' का उजला सवेरा और 'जय मां संतोषी' का संकल्प

​कहते हैं कि जब आपके भीतर कुछ कर गुजरने की तड़प हो, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। राजकुमारी के जीवन में यह रास्ता छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यानी 'बिहान' ने खोला। गाँव लौटने पर जब उन्हें महिला स्व-सहायता समूहों के बारे में पता चला, तो उनके भीतर सोया हुआ नेतृत्व गुण जाग उठा। उन्होंने ठान लिया कि वे अब खुद को और गाँव की दूसरी महिलाओं को लाचारी के दलदल से बाहर निकालेंगी।​शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण थी। गाँव की झिझकती और आशंकित महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाना आसान नहीं था। राजकुमारी ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार बैठकें कीं, महिलाओं की झिझक को तोड़ा और आखिरकार 10 कर्मठ महिलाओं को साथ लेकर 'जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह' की नींव रखी। प्रति माह 100 रुपए की मामूली बचत से शुरू हुआ यह सफर, दरअसल उनके बड़े सपनों की पहली किस्त थी।

​पलायन के दर्द को बनाया हुनर: ऐसे खड़ा हुआ आइसक्रीम का साम्राज्य

​राजकुमारी की दूरदर्शिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पलायन के दौरान मिले कड़वे अनुभवों को भी अपनी ताकत बना लिया। बाहर मजदूरी करते समय उन्होंने आइसक्रीम और कुल्फी बनाने की प्रक्रिया को बड़े ध्यान से देखा था। उन्होंने सोचा कि क्यों न इस हुनर को अपने गाँव में ही रोजगार का जरिया बनाया जाए। 'बिहान' योजना ने उनके इस अभिनव आइडिया पर भरोसा जताया और समूह के माध्यम से उन्हें 1 लाख 50 हज़ार रुपए का बैंक लोन तथा 60 हज़ार रुपए की सामुदायिक निवेश राशि (CIF) स्वीकृत की गई। इस पूंजी से राजकुमारी ने स्थानीय बाजार से कच्चा माल खरीदा और अपने परिवार के सहयोग से घर पर ही मटका कुल्फी, तरह-तरह की आइसक्रीम और बादाम शेक जैसे लजीज उत्पाद तैयार करने लगीं। शुद्धता और बेजोड़ स्वाद के कारण देखते ही देखते उनके उत्पादों की मांग बिलाईगढ़ और उसके आसपास के बाजारों में तेजी से बढ़ गई।
​ ​राजकुमारी साहू की मेहनत ने आज उनके उद्यम को एक सफल मुकाम पर पहुँचा दिया है, जिसकी बानगी इन आँकड़ों में साफ देखी जा सकती है। आज यह समूह और राजकुमारी साहू 3 लाख रुपए से अधिक की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। कल तक जो महिला अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर थी, आज वह शान से 'लखपति दीदी' की कतार में खड़ी है।

​गृहिणी से 'सफल उद्यमी': एक रोल मॉडल का उदय

​श्रीमती राजकुमारी साहू आज सिर्फ एक सफल व्यावसायिक नाम नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण छत्तीसगढ़ के बदलते परिदृश्य का एक जीवंत प्रतीक हैं। आज वे खुद प्रशिक्षित होकर एक पेशेवर उद्यमी की भूमिका निभा रही हैं। वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं, बल्कि अपने समूह की अन्य दीदियों को भी व्यवसाय के नए गुर सिखाकर उन्हें सशक्त बना रही हैं।
​राजकुमारी साहू की यह प्रेरक दास्तान छत्तीसगढ़ की हर उस महिला को संबल देती है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपना आसमान खुद छूना चाहती है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर, प्रशासनिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम हो, तो ग्रामीण अंचल की एक साधारण गृहिणी भी अपने भाग्य की विधाता बन सकती है।

लखनपुर में सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर्स से मिले पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

युवा डिजिटल क्रिएटर्स से संवाद कर पर्यटन, संस्कृति और स्वच्छता अभियान को जन-आंदोलन बनाने का किया आह्वान

रायपुर, 27 जून 2026। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं को देश-दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से लखनपुर (अंबिकापुर) में आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर मीट में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए डिजिटल क्रिएटर्स एवं सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर्स से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा को छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए प्रदेश के पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक आस्था केंद्रों, लोक संस्कृति और जनजातीय जीवन की सकारात्मक एवं प्रेरणादायी कहानियों को व्यापक स्तर पर साझा करने का आग्रह किया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यम लोगों तक पहुंचने का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है। सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और पर्यटन को नई पहचान दिलाने का सशक्त उपकरण भी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, धार्मिक आस्था, वन्यजीव और जनजातीय जीवन का अद्भुत संगम है, जिसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने में डिजिटल क्रिएटर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने सभी सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर्स से आग्रह किया कि वे अपनी रचनात्मक सामग्री के माध्यम से चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी, सिरपुर, भोरमदेव, रामगढ़, मैनपाट, बारसूर, चंद्रखुरी, दंतेवाड़ा सहित प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करें, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित हों। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान का प्रचार नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार, हस्तशिल्प, लोक कला, संस्कृति और आर्थिक समृद्धि से भी सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र है।

संवाद के दौरान श्री राजेश अग्रवाल ने स्वच्छता को सफल पर्यटन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि स्वच्छ पर्यटन स्थल ही पर्यटकों के मन में स्थायी छाप छोड़ते हैं। उन्होंने सभी डिजिटल क्रिएटर्स से अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने तथा पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प ले, तो छत्तीसगढ़ देश के सबसे स्वच्छ और आकर्षक पर्यटन राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आगामी 29 एवं 30 जून को सरगुजा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थल रामगढ़ में आयोजित होने वाले दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के व्यापक प्रचार-प्रसार का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर्स एवं डिजिटल क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से रामगढ़ महोत्सव की विशेषताओं, ऐतिहासिक महत्व, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, स्थानीय लोक कला और पर्यटन आकर्षणों को देशभर के लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है और यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत को नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से बड़ी संख्या में पर्यटक एवं संस्कृति प्रेमी रामगढ़ महोत्सव से जुड़ेंगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा प्रयास केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाना है। सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे युवा इस अभियान के सशक्त भागीदार बन सकते हैं। मुझे विश्वास है कि डिजिटल क्रिएटर्स के सहयोग से छत्तीसगढ़ की सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और हमारे प्रमुख पर्यटन आयोजनों की पहचान दुनिया के हर कोने तक पहुंचेगी।

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