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  • पाटन और महासमुंद से रायपुर के एकात्म परिसर पहुंचे कार्यकर्ता, बाहर धरने पर बैठे
  • बाहरी प्रत्याशी को हटाने की मांग, सामूहिक इस्तीफे की दी धमकी, पुलिस फोर्स तैनात

 भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर जहां कई विधायकों के टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है, वहीं हारे हुए नेताओं को फिर टिकट देने पर गुस्सा भी है। ऐसे में बाहरी व्यक्तियों को टिकट देने के पार्टी के फैसले के खिलाफ भड़के पाटन क्षेत्र के तमाम कार्यकर्ताओं ने रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच जमकर हंगामा कर रहे है।

कार्यकर्ताओं ने मोती लाल वापस जाओ के लगाए नारे

  1.  

    पाटन से तमाम कार्यकर्ता रविवार शाम राजधानी स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय एकात्म परिसर पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे सैंकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मोतीलाल वापस जाओ का नारा लगा रहे हैं। उनके इस प्रदर्शन में महासमुंद से आए कार्यकर्ता भी शामिल हो गए और बाहर धरना पर बैठ गए हैं। 

     

  2.  

    दरअसल, पाटन से भाजपा ने मोतीलाल साहू को टिकट दिया है। मोतीलाल को टिकट देने से नाराज स्थानीय भाजपा नेताओं ने उनका विरोध शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी भूपेश बघेल के खिलाफ स्थानीय उम्मीदवार उतारने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें बाहरी प्रत्याशी नहीं चाहिए। 

     

  3.  

    प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाटन कांग्रेस का गढ़ रहा है। ऐसे में यहां किसी मजबूत उम्मीदवार को टिकट दिया जाना चाहिए था। बाहरी व्यक्ति होने से उसे पूरा सहयोग नहीं मिलेगा। स्थानीय को टिकट मिले, जिससे हमें जीत मिल सके। 

     

  4.  

    कार्यकर्ताओं ने मोतीलाल की जगह स्थानीय प्रत्याशी को टिकट ने मिलने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी पार्टी को दी है। इससे पहले कार्यकर्ता कुशाभाऊ ठाकरे परिसर भी पहुंचे और वहां मौजूद नेता नंद कुमार साय से बात करने का भी प्रयास किया। जब साय कार से जाने लगे तो कार्यकर्ताओं ने वहां भी उनका घेराव कर दिया। वहीं हंगामे के बाद भाजपा कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। 

     

 

नयी दिल्ली। साल 1943 में सुभाष चंद्र बोस द्वारा ‘आजाद हिंद सरकार’ के गठन की घोषणा करने के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत कभी किसी दूसरे के भू-भाग पर नजर नहीं डालता, लेकिन यदि उसकी संप्रभुता को चुनौती दी गई तो वह ‘‘दुगुनी ताकत’’ से पलटवार करेगा। प्रधानामंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार सशस्त्र बलों को बेहतर प्रौद्योगिकी और नवीनतम हथियारों से लैस करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुविधाएं मुहैया कराकर जवानों की जिंदगी आसान बनाने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक ऐसी फौज बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं जिसका सपना नेताजी (बोस) ने देखा था।’’ 

 
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने और पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ योजना लागू करने जैसे फैसले किए। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर लाल किला में राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया। बोस के करीबी सहयोगी लालती राम की ओर से भेंट की गई ‘आजाद हिंद फौज’ की टोपी पहनकर मोदी ने कहा कि किसी दूसरे के भू-भाग पर नजर डालना भारतीय परंपरा नहीं रही है, ‘‘लेकिन जब हमारी संप्रभुता को चुनौती दी जाएगी तो हम दुगुनी ताकत से पलटवार करेंगे।’’ 
 
लालती राम ‘आजाद हिंद फौज’ के जीवित बचे गिने-चुने सदस्यों में से एक हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों को भारत के भीतर और बाहर की ऐसी ताकतों के खिलाफ आगाह किया जो देश और इसके संवैधानिक मूल्यों को निशाना बनाकर इसके खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी ताकतों से लड़ना और उन्हें मात देना हर भारतीय का कर्तव्य है।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों से लड़ने के लिए राष्ट्रवाद और भारतीयता की भावना होना जरूरी है।
 
रानी झांसी रेजिमेंट की स्थापना के फैसले के वक्त बोस का विरोध होने की घटना का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि यह रेजिमेंट सोमवार को अपनी स्थापना के 75 साल पूरे कर लेगा। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार बोस के सपनों को साकार करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अब एक पारदर्शी प्रक्रिया के बाद थलसेना में महिलाओं को ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ से स्थायी कमीशन में प्रवेश की अनुमति दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वायुसेना को जल्द ही महिला लड़ाकू पायलटों का पहला बैच मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण का काम अंतिम चरण में है।
 
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न दलों की ओर से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा का सिलसिला तेज हो गया है। आज समाजवादी पार्टी ने 9 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया। पार्टी ने पहले चरण के लिए 3 उम्मीदवारों और दूसरे चरण के लिए 6 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। शनिवार को भाजपा ने 77 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। 
 

राज्य में पहले चरण के चुनाव के लिए सपा ने संतोष सुमन को बीजापुर, बिमलेश दुबे को जगदलपुर और छबिंद्र वर्मा को दंतेवाड़ा से टिकट दिया है।  

इसी तरह दूसरे चरण के लिए नवीन गुप्ता को रायपुर वेस्ट, योगेंद्र भोई को बासना, जिबन सिंह यादव को अकलतारा, मुकेश लहारे को पामगढ़, अमरनाथ अग्रवाल को कोरबा और सुबेंद्र सिंह यादव को वैशालीनगर से टिकट दिया गया है। 

12 नवंबर को पहले चरण का मतदान 

इन पांचों राज्यों में सबसे पहले मतदान छत्तीसगढ़ में होगा। यहां दो दौर में मतदान होगा। पहले फेज में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 12 नवंबर को जबकि दूसरे फेज में 20 नवंबर को चुनाव होगा। छत्तीसगढ़ की सत्ता पर भाजपा 15 साल से काबिज है। डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री पद की कमान संभाले हुए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व कांग्रेस नेता अजीत जोगी के बीच गठबंधन के एलान के बाद मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।  

chandra shekhar sharma

कवर्धा --- पंद्रह बरस सत्ता सुख भोगने के बाद चौथी पारी के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही भाजपा और प्रदेश के मुखिया डाक्टर रमण सिंह इस बार सत्ता की चाबी पाने कोई रिस्क लेने के फ़िराक में नहीं है | फूंक फूंक कर कदम रख रहे है चाहे वो गृह जिले की ही विधानसभा सीट क्यों ना हो | इसका प्रत्यक्ष उदहारण जिले की कवर्धा व पंडरिया विधानसभा सीट के वर्तमान विधायको पर पुनः दांव खेल कर जातिवाद की राजनीति को पुनः हवा दी है । हाँलाकि इसके पीछे भाजपा की सोची समझी  रणनीति बताई जा रही है | जिसके लिए काफी तर्क वितर्क दिए जा रहे है , परन्तु एक चर्चा यह भी है कि भाजपा शातिर व चतुर राजनीतिज्ञ कांग्रेसी अकबर के माइंडगेम  में उलझ कर रह गई है । भाजपा के लिए पिछले चुनाव में जातिवाद के बोये गए वृक्ष अब जहरीला पोधा बन गया है जिससे ऊबरना भाजपा के लिए आसान नहीं रहा साथ ही टिकट का सपना संजोए डॉ सियाराम साहू , संतोष पांडेय , अम्बिका चंद्रवंशी, रघुराज सिंह , नंदलाल चंद्राकर , लालजी चंद्रवंशी को सक्रिय राजनीति में अब अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा है । राजनैतिक गलियारो के सूत्रों की माने तो भाजपा को भी अब भीतराघात का सामना करना पड़ेगा साथ ही साथ एन्टी इनकंबेंसी वोट का खतरा अलग से है । बहरहाल डॉ रमन के चक्रव्यूह में उलझी कांग्रेस जिले में अब तक अधिकृत प्रत्याक्षियों की घोषणा नही कर पाई है हांलाकि कवर्धा सीट से चिर परिचित पुराने प्रतिद्वंदी अशोक और अकबर फिर आमने सामने होंगे अकबर भी अपने सक्रिय राजनीतिक कैरियर के अंतिम प्रयास कर रहे है । अबकी हार उन्हें सक्रिय राजनीति से किनारा कर सकती है । अपने राजनैतिक भविष्य को बचाने जी जान से जुटे अकबर सारे दाव पेंच आजमा रहे है । पांच साल तक न्यायालय के चक्कर काटने के बाद पुनः जनता के दरबार मे किस्मत आजमा रहे है ।इन्हें भी भितराघात का पूरा खतरा रहेगा यहाँ भी कम विभिषन नहीं है जो पार्टिया अपनो कि नाराजगी को साध लेगी वो बाजी भी मार लेजायेगी | पंडरिया विधान विधानसभा सीट से कुर्मी जाती के वर्तमान विधायक को पुनःटिकट दिए जाने से बाहरी भगाओ का नारा देने वालो के मुंह टिकट वितरण के बाद से बंद है । भाजपा के साहू कुर्मी कार्ड से हतप्रद कांग्रेस पंडरिया से लालाजी चंद्रवंशी को पुनः टिकट दे कर भाजपा के जातिवाद के खेल को गड़बड़ा सकती पर पैराशूट लैंडिंग के लिए आये योगेश्वर राज की टिकट काटना कांग्रेस को गत चुनाव की तरह कही भारी ना पड़ जाए और कांग्रेस की नाव किनारे पहुंचते पहुंचते डूब न जाय। बहरहाल दोनों ही पार्टियों में उहापोह कि स्थिति है | मतदाता कि ख़ामोशी से भी उम्मीदवारों के माथे में चिंता कि लकीरे खीच आई है । 

 

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का क्रिकेट स्टेडियम अब तक दो मेगा शो का गवाह बन चुका है। पहला आयोजन वर्ष 2016 के फरवरी महीने में हुआ था। 'द ग्रेट खली रिटर्नस मेगा शो' के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऐसे प्रचार किया, मानो यह प्रदेश की तकदीर बदल देगा। मेगा शो को सफल बनाने के लिए कांग्रेस सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। कांग्रेस सरकार के मुखिया हरीश रावत व उनके सिपहसालारों के पांव धरती पर नहीं पड़ रहे थे। आखिर पड़ते भी कैसे?

 
कांग्रेसी बिग्रेड जनता को झांसा देकर एक नकली लड़ाई को असली लड़ाई के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। शो के टिकट दस-दस हजार रूपए तक में बेच कर लोगों की जेब काटी गई। सरकारी तामझाम व इंतजामात के साथ हुए इस शो के टिकटों की बिक्री के लाखों रुपये एक निजी संस्था की जेब में गए।
 
मगर विगत 7-8 अक्टूबर को इसी क्रिकेट स्टेडियम में एक दूसरा मेगा शो आयोजित हुआ तो पहले शो के कर्ताधर्ता हरीश रावत व अन्य कई कांग्रेसी नकारात्मक सोच के साथ भाजपा सरकार पर हमलावर हो उठे। यह सोच-समझ व समय का अंतर है। आखिर खली का शो कराने वाले इनवेस्टर्स समिट का मतलब क्या समझेंगे? 

 
राज्य गठन के 18 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने इतने व्यापक स्तर पर निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की पहल की। सरकार की पहल पर देश-विदेश के निवेशकों ने सकारात्मक रुझान दिखाया और लगभग सवा लाख करोड़ के निवेश के प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपे।
 
प्रस्तावों का धरातल पर उतारना और उनका परिणाम अभी भविष्य के गर्भ में है। मगर राज्य के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर विपक्ष द्वारा की गई राजनीति कतई शोभनीय नहीं कही जा सकती है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री से लेकर विदेश तक के निवेशक राजधानी देहरादून में राज्य में निवेश की बुनियाद को आधार देने में जुटे हुए थे, तो दूसरी ओर उसी वक्त राज्य का मुख्य विपक्षी दल 'खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे' वाले अंदाज में धरना-प्रदर्शन में लगा हुआ था।

 
इसका अर्थ क्या लगाया जाएगा? क्या मात्र विरोध करने के लिए विरोध करना विपक्षी दल कांग्रेस का राजनीतिक धर्म है? क्या राज्य के हितों से उसे कोई लेना-देना नहीं है? राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध अपनी जगह उचित है। मगर राज्य के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे पर ओछी राजनीति की इजाजत किसी को भी नहीं होनी चाहिए। कितना अच्छा होता कि कांग्रेस नेता धरना-प्रदर्शन करने के बजाय इन्वेस्टर समिट में शामिल होते। निवेशकों का मनोबल तोड़ने वाली बयानबाजी करने से बेहतर होता कांग्रेस उनके उत्साह को बढ़ाती और राज्य में औद्योगिकीकरण के एक नए युग के आगाज के लिए सार्थक पहल करती।
 
दरअसल, विकासवादी सकारात्मक राजनीति कांग्रेस के डीएनए में नहीं है। कांग्रेस ने हमेशा से झूठ व भ्रम को अपनी राजनीति का केंद्र बिंदु बनाए रखा। यही कारण है कि वर्षों तक केंद्र व राज्यों में एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस दो राज्यों पंजाब व मिजोरम और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी तक सिमट कर रह गई है। कर्नाटक में वह गठबंधन में साझीदार है।

 
बहरहाल, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी चुनावी सभाओं में एक नारा दिया था। शाह ने कहा था 'राज्य अटल जी ने बनाया है- मोदी जी संवारेंगे'। भाजपा सरकार आज इसको चरितार्थ करते दिख रही है। यह तथ्य गौरतलब है कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में सरकार के गठन के फलस्वरूप भाजपा ने न केवल उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया, अपितु इस नवोदित राज्य को विशेष राज्य की श्रेणी में शामिल किया। 
 
वर्ष 2002 में प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार गठित होने के बावजूद वाजपेई सरकार ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उत्तराखंड को विशेष पैकेज दिया। वाजपेई सरकार द्वारा दिए गए औद्योगिक पैकेज का ही परिणाम था कि वर्ष 2004 के बाद राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आई। 
 
यह सुखद संयोग है कि आज जब केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकारें काबिज हैं, तो उन्होंने उत्तराखंड को संवारने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। इनवेस्टर्स समिट के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने लगभग चालीस हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य तय किया था। मगर राज्य सरकार के चतुर्दिक प्रयासों व केंद्र सरकार के सकारात्मक रूप के परिणामस्वरूप लगभग सवा लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निवेशक सम्मेलन की बागडोर अपने हाथों में रखी और लगातार तीन माह तक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए रात-दिन एक किए रखा। 
 
प्रदेश सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया। निवेश के लिए 12 कोर सेक्टर चिन्हित किए गए। पर्यटन, सोलर, ऊर्जा, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, हर्बल, एरोमेटिक जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर मुख्यमंत्री खुद तमाम स्थानों पर निवेशकों से मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के तमाम वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति ने इनवेस्टर्स समिट को उड़ान भरने के लिए पंख लगा दिए। 
 
समिट में निवेशकों के उत्साह को लेकर स्पष्ट है कि राज्य सरकार उनका भरोसा जीतने में सफल रही है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना स्वाभाविक रूप से चुनौती भरा कार्य है। लिहाजा, सम्मेलन के तुरंत बाद से प्रदेश सरकार ने निवेश को अमली-जामा पहनाने के लिए कसरत शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में निवेश प्रस्तावों के फॉलोअप के लिए अलग से सेल का गठन करने का निर्णय लिया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इनवेस्टर्स समिट उत्तराखंड के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को औद्योगिक विकास की एक बहु प्रतीक्षित दिशा देगा।
 
-अजेंद्र अजय
(लेखक उत्तराखंड सरकार में मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष रहे हैं।)
19 महिला पत्रकारों के यौन शोषण का आरोप आखिरकार केन्द्र की मोदी सरकार पर भारी पड़ गया। आरोपों की शुरुआत में जो भारतीय जनता पार्टी 10 दिन से गुड़ खाए बैठी थी वो आखिर आरोप लगाने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से तनाव में आती चली गई। आखिर अकबर का वतन लौटकर मानहानि का दावा ठोंकने और इसे राजनैतिक षड़यंत्र बताने का दावा फुस्स पटाखा साबित हो गया और दो दिन में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने अकबर से अपना पीछा छुड़ा लिया। आनन फानन में केन्द्रीय मंत्रीमंडल में विदेश राज्य मंत्री के पद से एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा।

 
मोदी मंत्रिमंडल से अकबर का इस्तीफा होने के फौरन बाद ही बताना शुरु हो गया है कि पीएम नरेन्द्र मोदी महिला वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते थे और मीटू कैम्पेन के जरिए सामने आ रहीं महिलाओं को न्याय दिलाने का समर्थन करते हैं। इस सरकारी और सत्ताधारी दल के राग के बावजूद इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इस लेटलतीफी में काफी हद तक फजीती करा ली है। मीटू कैम्पेन के जरिए जब भारत में यौन शोषण के खुलासे होने शुरु हुए तो दो चार फिल्मी हस्तियों के बाद मोदी सरकार भी इससे बच नहीं सकी थी। सरकार के विदेश राज्य मंत्री और देश के नामी संपादकों में शुमार रहे एमजे अकबर पर उनकी पुरानी अधीनस्थ पत्रकार प्रिया रमानी, गजाला बहाव, मजली डै आदि ने यौन शोषण के आरोप लगा दिए।
 
महिला पत्रकारों ने अकबर पर जिस तरह के आरोप लगाए थे वो बहुत ही गंभीर किस्म के थे, साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ किन तरीकों से शोषण हो रहे हैं, इस बात को उजागर करते थे। मोदी सरकार ने इन गंभीर आरोपों के बावजूद भी शुरुआत में मंत्री एमजे अकबर के प्रति उतना कड़ा रवैया नहीं दिखाया जिसका आरोप लगाने वाली महिलाएं और उनसे सहानुभूति रखने वाला जनसमुदाय उम्मीद कर रहा था। 

 
अकबर के विदेश दौरे पर होने की बात कहकर मामले में अकबर को तलब करने को लटकाया गया। अकबर गंभीर यौन शोषण के अनेक आरोप लगे होने के बावजूद विदेश में भारतीय लोकतंत्र के प्रतिनिधि बने रहे और भारत सरकार की हैसीयत से सम्मान पाते रहे। यौन शोषण से जुड़े इस अहम मसले पर बीजेपी का लेटलतीफ रवैया कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। अकबर पर बीजेपी की कई दिनों तक चुप्पी सवाल खड़े करती है साथ ही इससे महिलाओं के साथ खड़े आम जनमानस में सरकार की पिछले कुछ दिनों में कुछ हद तक विपरीत छवि बनी भी है।
 
बेशक ये केवल अभी आरोप ही हैं और आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों ने न तो एफआईआर दर्ज करवाई हैं और अकबर के खिलाफ किसी तरह के सबूतों पर भी अब तक खुलासा नहीं हुआ है मगर फिर भी इन आरोपों को हलके में नहीं लिया जा सकता। अगर ऐसा संभव होता तो मोदी कैबीनेट से अमित शाह के करीबी और हाईप्रोफाइल मंत्री एमजे अकबर को आखिरकार इस्तीफा नहीं देना पड़ता।
 
सरकार ने इस्तीफा लेकर या अकबर ने इस्तीफा देकर देश भर में चर्चा में छाए इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर की है मगर आरोपों से इस्तीफे के बीच जितने दिन गुजरे हैं उनसे महिलाओं के साथ वाली मोदी सरकार की छवि को धक्का जरूर लगा है। 
 
मौके पर अकबर के बहाने कांग्रेस ने मोदी सरकार और पूरी भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। इस मामले में देश के विभिन्न बुद्धिजीवियों ने भी पीड़ित महिलाओं के पक्ष में बयान दिए हैं तो नामी संपादकों और अखबारों ने एमजे अकबर पर लगे आरोपों को समर्थन देतीं कई विस्तृत घटनाओं को सोशल मीडिया पर उजागर किया है। नामी पत्रकारों और संपादकों के इन कई खुलासों को देश के लोग कैसे नकार सकते हैं।
 
इस मामले में सरकार पिछले कुछ दिनों में हर मोर्चे पर घिरी है। मोदी मंत्रिमंडल की महिला मंत्रियों को मीडिया के सवालों से बचकर निकलने वाले दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे तो भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा तक को भी उपलब्धियों पर बोलने के बीच अकबर पर सवाल किए जाने पर मौन रहकर निकलना पड़ा। सरकार को चौतरफा फंसते देख केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जरूर मीटू कैम्पेन का समर्थन किया था मगर स्मृति ईरानी सरीखीं मोदी की करीबी मंत्री अकबर को लेकर सरकार को हमलों से बचाने में लगभग नाकामयाब ही रहीं थीं।
 
इस बीच भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती कार्यक्रम के दौरान पीड़ित महिलाओं पर ही सवालिया निशान लगा दिया था। आखिरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर पैबंद से लग रहे मंत्री एमजे अकबर से इस्तीफा लेने में ही पार्टी ने भलाई और अगले चुनाव में सुरक्षित भविष्य समझा।
 
-विवेक कुमार पाठक

पणजी। केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने रविवार को कहा कि गोवा में स्टार्टअप की मदद करने के लिए दिसंबर में वैश्विक निवेशकों का शिखर सम्मेलन होगा। उन्होंने कहा कि अधिक रोजगार सृजित करने के लिए केंद्र सरकार गोवा को स्टार्टअप और लॉजिस्टिक का केंद्र बनाने की योजना बना रही है। इससे राज्य से कृषि निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रभु ने कहा, ‘‘स्टार्टअप के सामने आने वाली दिक्कतों में से एक है पैसे की कमी। हमने विश्व के सभी निवेशकों को बुलाया है जो वित्तपोषण करते हैं। सात दिसंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में पहली बार इस क्षेत्र में निवेश करने वाले वैश्विक निवेशक एकजुट होंगे।’’ 

प्रभु कुदाइम इंडस्ट्रियल एस्टेट में हरित भवन केंद्र का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सालाना होने वाले इस कार्यक्रम में वित्तपोषक, वेंचर कैपिटलिस्ट, निवेशक और ग्रोथ कैपिटल प्रोवाइडर जमा होंगे। उन्होंने कहा कि वह राज्य को हरित विचारों का केंद्र बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम गोवा में स्टार्टअप का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की सोच रहे हैं।’’ 
 
उन्होंने कहा, ‘‘हम कई चीजों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ साथ हमें लोगों के लिए रोजगार सृजित करने होंगे। यदि आप सिर्फ हरित के बारे में बात करेंगे तो लोगों का क्या होगा?’’ प्रभु ने कहा कि गोवा में लॉजिस्टिक का भी केंद्र बनाया जाएगा क्योंकि राज्य में इसके लिए आवश्यक सारी संरचनागत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की कार्य संस्कृति में बदलाव के लिये अपनी सरकार की कोशिशों का रविवार को जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2019 के अंत तक पुलिस में सिपाहियों की कमी लगभग दूर कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के अवसर पर कहा कि पुलिसकर्मियों की कार्यसंस्कृति को बेहतर बनाने के लिये समय-समय पर उनके प्रशिक्षण की सुचारु व्यवस्था की जाएगी। पुलिसकर्मी भी अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर सकेंगे, जिससे वे तनाव रहित होकर कार्य कर सकेंगे।

 
योगी ने कहा कि वर्ष 2019 के अंत तक सवा लाख सिपाहियों की भर्ती पूरी होने से पुलिस बल में आरक्षियों की कमी लगभग खत्म हो जाएगी। इसका सीधा फायदा जनता को होगा। साथ ही पुलिसकर्मियों को छुट्टी मिलने में होने वाली समस्याओं का भी समाधान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल की कमी को दूर करने और उनकी कार्य कुशलता बढ़ाने के लिये भर्ती की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस साल 29303 पुलिस आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 5341 महिलाएं और 3828 पीएसी जवान भी शामिल हैं। इसके अलावा 42 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा रही है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की कार्य संस्कृति बढ़ाने के लिये सरकार ने प्रोन्नतियां प्रदान करने पर विशेष बल दिया है। वर्ष 2017 में 9892 पुलिसकर्मियों को और इस साल 37575 पुलिसकर्मियों को प्रोन्नतियां प्रदान की गयी, जो कि अब तक का एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपराधमुक्त एवं भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश बनाने के लिये गम्भीरता से कार्य शुरू किया गया है और पुलिस को कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं।
 
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कर्त्तव्य का पालन करने के दौरान शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरकार शहीद पुलिसर्मियों के साथ सहयोग करने के लिये तत्पर रहेगी। राज्य सरकार शहीदों के परिवारों के साथ है और उनके हित में सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

इस्लामाबाद। दिवालिया होने की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने शनिवार को दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से आखिरी बार कर्ज लिया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा नकदी संकट से निपटने के लिए आईएमएफ के कर्ज की शायद जरूरत नहीं पड़े। पाकिस्तान इससे पहले भी 12 बार आईएमएफ से कर्ज ले चुका है। पाकिस्तान की पिछली सरकारों ने भी विभिन्न मौकों पर आईएमएफ से लिये गये कर्ज के आखिरी होने का मौके-बेमौके दावा किया था। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार ने 2013 में इसी तरह के संकट से बचने के लिए आईएमएफ से 6.6 अरब डॉलर का कर्ज लेने के बाद ऐसा ही दावा ही किया था।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कराची शेयर बाजार को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह आईएमएफ से लिया जाने वाला 13वां और अंतिम कर्ज है। हम तेजी से दिवालिया होने की ओर बढ़ रहे हैं। हमें 21 करोड़ पाकिस्तानियों का बचाव करना है।’’ कमर का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ ही रोज पहले पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने आने वाले साल में मुद्रास्फीति के 7.5 प्रतिशत तक पहुंच जाने तथा आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रहने के लक्ष्य से पीछे रह जाने की चेतावनी दी है।
 
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार आईएमएफ से लिये जा रहे 13वें कर्ज के बारे में विरोधाभासी बयान दे रही है। उमर के इस बयान से पहले इमरान ने इसी सप्ताह कहा था कि संभवत: आईएमएफ से इस कर्ज की जरूरत नहीं पड़े। आईएमएफ का एक दल कर्ज की शर्तों पर बातचीत के लिए नवंबर की शुरुआत में पाकिस्तान आने वाला है।

काबुल। अफगानिस्तान में संसदीय चुनाव में हुई हिंसा में शनिवार को लगभग 170 लोग हताहत हुए है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक ताजा हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने काबुल के एक मतदान केन्द्र में खुद को उड़ा लिया जिससे कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गये। इस तरह अफगानिस्तान की राजधानी में मृतकों की संख्या 19 पहुंच गई जबकि लगभग 100 लोग घायल है।

विस्फोट की तत्काल किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन तालिबान ने इससे पूर्व कहा था कि उसने ‘‘फर्जी चुनाव’’ पर 300 से अधिक हमलों को अंजाम दिया। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि हिंसा से मतदान बाधित हुआ। उत्तरी कुंदुज शहर में तीन लोगों की मौत हुई और 39 अन्य घायल हो गये। प्रांतीय आईईसी निदेशक मोहम्मद रसूल उमर ने बताया कि कुंदुज शहर से कई किलोमीटर दूर एक मतदान केन्द्र पर तालिबान हमले में स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (आईईसी) के कर्मचारी की मौत हो गई और सात अन्य लापता हो गये। कई मतपत्र बक्सों को भी नष्ट कर दिया गया।
 
प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता ने बताया कि पूर्वी प्रांत नांगरहार में आठ विस्फोट हुए जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और पांच घायल हो गये। चुनाव आयोजकों ने बताया कि प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 27 प्रांतों में मतदान केन्द्रों में कम से कम 15 लाख मतदाताओं ने मतदान किया। कई मतदान केन्द्रों पर हिंसा हुई जिसके कारण इन केन्द्रों को नहीं खोला जा सका और मतदाता घंटों पंक्तियों में खड़े रहे।
 
तालिबान ने ‘‘अपने जीवन की रक्षा के लिए’’ मतदाताओं को चुनावों का बहिष्कार किये जाने की चेतावनी दी थी। चुनाव आयोजकों का कहना है कि मतदाता पंजीकरण सूचियों और बॉयोमीट्रिक सत्यापन उपकरणों में गड़बड़ी के कारण विलंब होने से 371 मतदान केन्द्रों पर रविवार तक मतदान की अवधि बढाई जायेगी। हिंसा के खतरे के बावजूद प्रमुख शहरों में मतदान केन्द्रों पर बड़ी संख्या में मतदाता दिखाई दिये जहां उन्होंने कई घंटों तक मतदान केन्द्र खुलने का इंतजार किया। 
 
लंबे समय बाद हो रहे संसदीय चुनाव के लिए लगभग 90 लाख मतदाता पंजीकृत थे। हमले के बाद कंधार में मतदान में एक सप्ताह तक का विलंब हुआ। चुनावी मैदान में उतरे 2,500 से अधिक उम्मीदवारों में से कम से कम 10 उम्मीदवारों की चुनाव से पहले हत्या कर दी गई थी। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मतदान की शुरुआत में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने ‘‘हर अफगानी,युवाओं और वृद्धों, महिलाओं और पुरूषों’’ से मतदान करने का आग्रह किया। शुरूआती परिणाम 10 नवम्बर को जारी किये जायेगे लेकिन इस तरह की चिंताएं है कि यदि बायोमीट्रिक सत्यापन उपकरण टूटे हुए या नष्ट पाये जाते है तो समस्या हो सकती है।

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