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कभी दुनिया के बेहतरीन फिनिशर कहे जाने वाले 'कैप्टन कूल' एमएस धोनी आज रन बनाने को बेताब हैं। भारत को एक नहीं बल्कि तीन खिताब दिलाने वाले धोनी लगातार लचर प्रदर्शन के कारण दबाव झेल रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ अभी तक खेले गए मैचों में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है, लेकिन चौथे वन-डे में फैंस को उनसे काफी उम्मीदें हैं। 

छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल तेज हो चुकी है और हमारा चुनावी रथ भी तैयार है। अमर उजाला के चुनावी रथ के इस बार का पड़ाव है कोरबा। कोरबा को छत्तीसगढ़ का ऊर्जा हब कहा जाता है। यहां की पहचान एशिया के सबसे बड़े खुले कोयला खदान गेवरा माइंस की वजह से भी है। कोरबा जिले में चार विधानसभा सीटें हैं- कोरबा, कटघोरा, पाली तनाखार और रामपुर। इन चार विधानसभा सीट में से दो सामान्य, एक अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।आइए जानते हैं कि क्या है कोरबा जिले की विधानसभाओं में खास

 कोरबा विधानसभा


इस विधानसभा सीट पर मोदी की लहर का असर नहीं होता है। पिछले दो चुनावों से कांग्रेस ने ही अपनी विजयी पताका फहराई है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जयसिंह अग्रवाल ने भाजपा के जोगेश लांबा को हराया था। कोरबा एक व्यवसायिक क्षेत्र है इस वजह से इस सीट को अहम माना जा रहा है। इस बार भाजपा जयसिंह अग्रवाल के सामने विकास महतो को उतारेगी। 

कटघोरा विधानसभा

इस विधानसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है, लेकिन इससे पहले कटघोरा कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है। कांग्रेस के बोधराम कंवर को छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है। लेकिन 2013 के चुनाव में बीजेपी के मिस्टर क्लीन कहे जाने वाले लखनलाल देवांगन से बोधराम कंवर को हार का सामना करना पड़ा। 

पाली तनाखार विधानसभा

पाली तनाखार सीट तब सुर्खियों में आई जब यहां के विधायक कांग्रेस छोड़ भाजपा से जुड़ गए। इस विधायक का नाम है रामदयाल उइके। रामदयाल उइके इस विधानसभा सीट पर हमेशा जीत दर्ज करते आए हैं। पिछले चुनाव में एक अलग पार्टी ने दस्तक दी, नतीजा यह रहा कि भाजपा दूसरी प्रतिद्वंदी पार्टी से तीसरी पार्टी बन गई। भाजपा ने इस बार दांव रामदयाल पर लगाया है।

रामपुर विधानसभा

यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस विधानसभा सीट में पिछले चुनाव से कांग्रेस का बोलबाला है, इससे पहले दो बार बीजेपी जीत हासिल कर चुकी है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के श्यामलाल कंवर को 67868 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के ननकीराम को 57953 वोट मिले थे। इस बार भी भाजपा ने ननकीराम पर भरोसा जताया है। 

केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। दोनों के बीच नीतिगत मुद्दों को लेकर पर्याप्त मतभेद हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल के शुरुआती महीनों में सरकार और आरबीआई के बीच दूरियां बढ़ी हैं। यहां तक कि सरकार और आरबीआई के बीच संवादहीनता की स्थिति तक बनती जा रही है।

 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल अचार्य ने शुक्रवार को सरकार के हस्तक्षेप की ओर इशारा किया था। विरल अचार्य ने आरबीआई की स्वायत्तता को लेकर चिंता जाहिर की थी। विरल ने कहा था कि आरबीआई की स्वायत्तता पर चोट किसी के हक में नहीं होगी। 

विरल ने कहा था कि सरकार के केंद्रीय बैंक के कामकाज में ज्यादा दखल देने से उसकी स्वायत्ता प्रभावित हो रही है। केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार से थोड़ा दूरी बनाकर रखना चाहती है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। सरकार की तरफ से बैंक के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप किया जा रहा है, जो कि घातक हो सकता है। 

कहा जा रहा है कि वर्तमान हालात का असर उर्जित पटेल के भविष्य पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट का कहना है अगले साल सितंबर में उर्जित पटेल के तीन साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पटेल के सेवा विस्तार की बात तो दूर की है उनके बाकी के कार्यकाल पर भी सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट का कहना है कि केवल 2018 में ही कम से कम आधे दर्जन नीतिगत मसलों पर मतभेद उभरकर सामने आए। सरकार की नाराजगी ब्याज दरों में कटौती नहीं किए जाने को लेकर भी रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नीरव मोदी की धोखाधड़ी सामने आने के बाद भी सरकार और केंद्रीय बैंक में तनाव की स्थिति पैदा हुई थी। पटेल चाहते हैं कि सरकारी बैंकों पर नजर रखने के लिए आरबीआई के पास और शक्तियां होनी चाहिए।

सरकार के अंदर मौजूद कुछ लोगों का इस मामले पर कहना है कि रघुराम राजन इससे (उर्जित) बेहतर थे। अकेले 2018 में आधे दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें केंद्र और गवर्नर का स्टैंड एक-दूसरे से अलग रहा। इस मनमुटाव की शुरुआत तब हुई जब आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बजाए उसमें बढ़ोतरी की गई, इससे सरकार नाराज हो गई। इसने दोनों के बीच तनातनी की शुरुआत की। केंद्रीय बैंक का मानना था कि यह पूरी तरह से उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। 

राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में 10 लाख रुपये लेकर बैंक में जमा करने जा रहे बिहारी गैस सर्विस के कैशियर को बदमाशों ने दिनदहाड़े गोली मार दी। वारदात से हड़कंप मच गया।

 

मिली जानकारी के अनुसार कैशियर श्याम सिंह बैग में 10 लाख रुपये लेकर बैंक में जमा करने जा रहा था। तभी बाइक से आए बदमाशों ने उसे गोली मार दी। गोली श्याम सिंह के सीने में लगी और उसकी मौत हो गई। वारदात से हंगामा मच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाश बाइक पर थे। बाइक चालक हेलमेट पहने हुए था जबकि पीछे बैठा शख्स मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए था।

श्याम सिंह श्याम सिंह लखनऊ के विनीतखंड दो में रहता था।

मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले भव्य सुनेजा उसी विमान के कप्तान थे जो आज इंडोनेशिया के समुद्र में क्रैश हो गया। बता दें कि सोमवार को लायन एयर का बोइंग 737 मैक्स-8 विमान टेक ऑफ करने के महज 13 मिनट बाद ही क्रैश हो गया था। विमान का मलबा भी बरामद किया गया है। जकार्ता से पांगकल पिनांग के लिए उड़ान भरने वाले इस विमान में 189 लोग सवार थे।

 

इंडोनेशिया की आपदा एजेंसी ने हादसे का शिकार हुए विमान की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर डालीं, जिनमें बुरी तरह टूट चुका एक स्मार्टफोन, किताबें, बैग, विमान के कुछ हिस्से दिख रहे हैं। दुर्घटना की जगह तक पहुंचे खोजी एवं बचाव पोतों ने यह सामान इकट्ठा किया है।

एजेंसी प्रमुख मोहम्मद सयोगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमें अभी तक नहीं पता है कि कोई जीवित बचा है।' विमान के आपातकालीन ट्रांसमीटर से कोई परेशानी का संकेत नहीं आया था। 'हम उम्मीद करते हैं, प्रार्थना करते हैं लेकिन पुष्टि नहीं कर सकते।'

उन्होंने आगे कहा, 'हम पहले से ही वहां पर हैं, हमारा हेलिकॉप्टर पानी के इर्द गिर्द सहायता करने के लिए घूम रहा है। हम मलबे को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।'

अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई टालते हुए कहा कि जनवरी में उपयुक्त बेंच इस मामले की सुनवाई करेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह जनवरी 2019 में अयोध्या विवाद मामले में सुनवाई की तारीख तय करेगा।

 

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, सरकार के वकील तुषार मेहता ने इस मामले में कोर्ट से अपील किया कि कोर्ट बताए कि इस मामले की जनवरी में कब से सुनवाई शुरू होगी। इसपर बेंच ने कहा कि यह सब फैसला नई पीठ करेगी।

बता दें कि 2010 से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन भूमि विवाद के मसले पर अब तक नियमित सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। पहले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में ही मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 1994 में इस्माइल फारूखी मामले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से प्रभावित है, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

उन्होंनेे पहले इस टिप्पणी को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजने की मांग की। तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने 27 सितंबर को बहुमत (2:1) से लिए फैसले में मसले को संविधान पीठ को भेजने से इनकार कर दिया। साथ ही साफ किया कि मामले का निपटारा भूमि विवाद के तौर पर किया जाएगा। 

छत्तीसगढ़ की 90 सीटों वाली विधानसभा में ऐसे 22 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें महिला मतदाता बहुमत में हैं और इस बार वह चुनाव का रुख तय करेंगी। 

 महिलाओं के वोट के महत्त्व को देखते हुए पांच अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मातृ शक्ति सम्मलेन को संबोधित किया था। इस सम्मलेन में उन्होंने कांग्रेस को केवल चुनाव में हराने की अपील ही नहीं की बल्कि कांग्रेस को राज्य में खत्म कर देने की अपील की थी। 


पिछले विधानसभा चुनावों में भी महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 77.32 फीसदी था जो पुरुष मतदाताओं से 0.3 फीसदी अधिक था। दिलचस्प बात ये है कि महिला बहुल इन सीटों से 2013 के विधानसभा चुनाव में केवल दो सीटों पर कांग्रेस की महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। इन 22 सीटों में से 13 पर कांग्रेस, आठ पर भाजपा और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने कब्जा किया था। 

इसके अलावा अगर बात पूरे विधानसभा की करें तो पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने कुल 24 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें कांग्रेस की 13 महिला उम्मीदवारों में से 4 ने जबकि भाजपा की 11 महिला प्रत्याशियों में से 6 निर्वाचित हुई थीं। 

भाजपा ने अब तक इस विधानसभा चुनाव के लिए 77 उम्मीदवारों की घोषणा की है, इनमें दो दर्जन से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को प्रत्याशी बनाया गया है। महिला बहुल इन 22 सीटों पर भाजपा ने केवल 4 महिलाओं को ही टिकट दिया है। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा की 22 महिला बहुल सीटें 

पत्थलगांव, धरमजयगढ़, खल्लारी, मरवाही, कवर्धा, महासमुंद, बिंद्रावांगढ़, सिहावा, खुज्जी , मोहला-मानपुर, कांकेर , भानुप्रतापपुर, केशकाल, नारायणपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, बस्तर, कोंटा, बीजापुर और  कोंडागांव डौंडी लोहरा 

छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव होने वाले हैं। दक्षिणी छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 12 नवंबर को जबकि उत्तरी छत्तीसगढ़ में 20 नवंबर को मतदान होने हैं। इन विधानसभा चुनावों में महिलाएं बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। 

छत्तीसगढ़ में चुनावी बयानबाजी से गहमागहमी का दौर जारी है। बसपा ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) के साथ तालमेल किया। इस बीच जकांछ प्रमुख अजीत जोगी का एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वे कांग्रेस नेता से अपनी जीत के लिए समर्थन मांग रहे हैं। 

 जकांछ के अध्यक्ष अजीत जोगी दूसरे चरण में मरवाही सीट से चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि मरवाही की जनता का दबाव है। लेकिन इस दौरान जोगी की मरवाही के कांग्रेस नेता दया वाकरे के साथ कथित बातचीत का एक ऑडियो वायरल हो रहा है। इस कथित बातचीत में जोगी वाकरे से अपनी जीत के लिए समर्थन मांग रहे हैं। 


बता दें कि अजीत जोगी जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे तब इसी मरवाही सीट से कांग्रेस की टिकट पर उपचुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। मरवाही कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। अब मरवाही के कांग्रेस नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर फोन कर जीताने की उम्मीद करने राजनीतिक पारा चढ़ गया है। 

क्या है इस वायरल ऑडियो में 

इस वायरल ऑडियो में अजित जोगी ने दया वाकरे से कह रहे हैं, "वाकरे जी आप हमेशा साथ दिए हो। फिर लड़ रहा हूं मरवाही से, आपको पूरी ताकत लगानी पड़ेगी, मैं बार-बार नहीं आ पाऊंगा, सब आप लोगों को ही देखना है।"

इस सीट से दया वाकरे ने खुद को कांग्रेस प्रत्याशी बताया तो जोगी ने कहा कि चुनाव का टिकट गुलाब राय को मिल रहा है इसलिए टिकट नहीं मिलेने पर तो वह साथ देंगे ना। 

इस बातचीत में वाकरे जोगी को बाबूजी कहकर संबोधित करते हैं। वाकरे जोगी से कहते हैं आप ही ने तो कांग्रेस में शामिल कराया था। पार्टी से गद्दारी कैसे कर दें। 

वाकरे कहते हैं कि गोड़ समाज की बैठक में तय हुआ है कि समाज से किसी को लड़ाने और जीताना है। इस पर जोगी वाकरे से कहते हैं, "इतना तो कर सकते हो मेरे लिए। न उनका करो न मेरा करो।" 

कांग्रेस नेता दया वाकरे ने इस पूरे वाकये के बारे में कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं और पार्टी के लिए ही काम करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बारे में ब्लॉक अध्यक्ष को भी बता दिया है। 

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। चुनावी राज्यों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। चाय की चौपाल हो या कोई बाजार हर तरफ चुनाव की ही चर्चा है। 90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में मतदाता सबसे पहले अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पहले चरण में 18 सीटों पर 12 नवंबर को मतदान होना है।

 

पहले चरण की 18 में से 10 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं। बता दें कि राज्य में कुल 51 सीटें सामान्य है जबकि 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। पहला चरण अपने आप में खास अहमियत रखता है क्योंकि इस चरण में मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश के कई मंत्री और पूर्व मंत्री चुनावी जंग में उतरेंगे। सीएम रमन सिंह के सामने अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला हैं। 

साख का विषय बनी मुख्यमंत्री की सीट 
राजनांदगांव की सीट भाजपा के लिए साख का विषय बनी हुई है। राजनांदगांव की सीट नक्सल के प्रभाव वाली सीट है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ राजनांदगांव से पूर्व पीएम अटल बिहारी की भतीजी करुणा शुक्ल को मैदान में उतारा है। पिछले विधानसभा चुनाव में राजनांदगांव की 6 सीटों में से कांग्रेस ने 4 जबकि भाजपा ने 2 सीटों पर कब्जा किया था। इसके अलावा पहले चरण की 18 सीटों पर 12 कांग्रेस और 6 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। 

421 नामांकन पत्र हुए दाखिल
पहले चरण के लिए कुल 421 नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं। आखिरी दिन 323 नामांकन पत्र दाखिल किए गए। नामंकन की तिथि खत्म होने के बाद अब चुनाव आयोग आज से नामांकनों की जांच करेगा। बता दें कि पहले चरण के लिए नामांकन वापसी की तिथि 26 अक्टूबर है। 

31 लाख से ज्यादा वोटर्स करेंगे वोट
पहले चरण में 31 लाख 79 हजार 520 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान के लिए 4,336 मतदान केंद्र बनाने का फैसला किया है। 

पहले चरण में ताल ठोकेंगे ये प्रत्याशी

राजनांदगांव  

कांग्रेस: करुणा शुक्ला
भाजपा: रमन सिंह

बीजापुर 

कांग्रेस: विक्रम शाह मांडवी
भाजपा: महेश गागडा

दंतेवाड़ा - (ST)

कांग्रेस: देवती वर्मा
भाजपा: भीमा मंडावी

चित्रकोट - (ST)

कांग्रेस: दीपक कुमार बैज
भाजपा: लच्छुराम कश्यप

बस्तर - (ST)
कांग्रेस: लाखेश्वर बघेल
भाजपा: सुभाऊ कश्यप 

गदलपुर 

कांग्रेस: रेखचंद जैन
भाजपा: संतोष बाफना

नारायणपुर - (ST)

कांग्रेस: चंदन कश्यप
भाजपा: केदार कश्यप

केशकाल - (ST)

कांग्रेस: संतराम नेतम
भाजपा: हरिशंकर नेतम

कोण्डागांव - (ST)

कांग्रेस: मोहन लाल मर्कम
भाजपा: लता उसेंडी

अंतागढ़ - (ST)

कांग्रेस: अनूप नाग
भाजपा: विक्रम उसेंडी

भानुप्रतापुर - (ST)

कांग्रेस: मनोज सिंह मांडवी
भाजपा: देवलाल दुग्गा

कांकेर - (ST)

कांग्रेस: शिशुपाल सोरी
भाजपा: हीरा मरकाम

खैरागढ़ 

कांग्रेस: गिरवर जंघेल
भाजपा: कोमल जंघेल

डोंगरगढ़ - SC

कांग्रेस: भूनेश्वर बघेल
भाजपा: सरोजिनी बंजारे

डोंगरगांव  

कांग्रेस: दलेश्वर साहू
भाजपा: मधुसूदन यादव

खुज्जी  

कांग्रेस: चन्नी साहू
भाजपा: हिरेंद्र साहू

मोहला- मनपुर - (ST)

कांग्रेस: इंद्र शाह मांडवी
भाजपा: कंचनमाला भुआर्य

कोंटा - (ST)

भाजपा: धनीराम बरसे
कांग्रेस: कवासी लखमा

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण में 12 नवंबर को 18 सीटों पर मतदान होंगे जबकि दूसरे चरण में 72 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होंगे।
सभी विधानसभा सीटों के परिणाम एक साथ 11 दिसंबर को आएंगे।

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिस पर पैनी नजर है। हम छत्तीसगढ़ जाकर वहां की सियासत का हाल बताएंगे लेकिन उससे पहले इस राज्य के बारे में कुछ बातें जानना बेहद जरूरी हैं। 

 

छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। राज्य में अभी कुल 11 लोकसभा और 5 राज्यसभा की सीटें हैं। कुल 27 जिले हैं। राज्य में 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में लगातार तीसरी बार कांग्रेस को मात देकर सरकार बनाई थी। रमन सिंह की अगुवाई में बीजेपी को 2013 में कुल 49 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी। जबकि कांग्रेस सिर्फ 39 सीटें ही जीत पाई थी।

आज हम बात करेंगे सत्ता के सेमीफाइनल के पहले पड़ाव यानी रायपुर के बारे में...रायपुर जिले को कुल चार विधानसभा सीटों में बांटा गया है- रायपुर ग्रामीण, रायपुर नॉर्थ सिटी, रायपुर साउथ सिटी, रायपुर वेस्ट सिटी। ये चारों सीटें सामान्य हैं।

इन चारों सीटों का अपना महत्व है, हर सीट पर नए समीकरण देखने को मिलते हैं। इस बार रायपुर में 9,49,562 मतदाता प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे जिनमें 4,88,883 पुरुष,  4,60,443 महिला और 236 अन्य शामिल हैं।

रायपुर ग्रामीण

रायपुर ग्रामीण पर हमेशा से ही भाजपा का कब्जा रहा है लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां तख्तापलट कर दिया। इस कांटे की टक्कर में कांग्रेस के सत्यनारायण शर्मा ने मात्र 1861 वोटों की बढ़त के साथ भाजपा के नंदे साहू को करारी शिकस्त दी थी।

इस विधानसभा क्षेत्र में साहू बहुल्य आबादी होने की वजह से भाजपा ने 2008 में नंदे साहू को उतारा था और उन्होंने जीत दर्ज की लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस के दिग्गज नेता सत्यनारायण शर्मा से हार गए। आपको बता दें इस विधानसभा सीट से पिछली बार 12 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था लेकिन हम आपको दस उम्मीदवारों के नाम बताएंगे।

कुछ ऐसी रही विधानसभा चुनाव 2013 की तस्वीर : 

1. सत्यनारायण शर्मा 70,774 कांग्रेस
2. नंदे साहू  68,913 भाजपा
3. महेश देवांगन 1,205 छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच
4. विनोद कुमार बघेल 1,203 बसपा
5. भरत भाई खाखरिया 1,010 निर्दलीय
6. रविशंकर डहरिया 805 निर्दलीय
7. गौतमबुद्ध अग्रवाल 681 शक्ति सेना
8. फरहत भाई  301 निर्दलीय
9. गीतेश्वर चंद्राकर 244 निर्दलीय
10. राजेश मुखर्जी 173 लोक जनशक्ति पार्टी

2013 विधानसभा चुनाव में रायपुर ग्रामीण के मतदाता 

कुल मतदाता :  2,29,440
पुरुष मतदाता :  1,23,767
महिला मतदाता :  1,05,673
कुल मतदान :  1,45,639 (65%) 
नोटा :  3,521 (1.5%)

रायपुर पश्चिम

रायपुर पश्चिम की विधानसभा सीट शहर की सबसे विकसित और वीआईपी सीट है, इस सीट पर भाजपा के राजेश मूणत का दबदबा है। राजेश विधायक के साथ-साथ PWD मंत्री भी हैं। राज्य में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए रायपुर-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 2008 में हुआ था जिसमें राजेश मूणत को जीत मिली थी।

बात पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो बीजेपी के राजेश मूणत ने कांग्रेस के विकास उपाध्याय को 6160 वोटों से हराया था। इस सीट से पिछले विधानसभा चुनाव में 15 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी।

रायपुर शहर पश्चिम 2013 उम्मीदवार

1   राजेश मूणत            64,611 भाजपा
2    विकास उपाध्याय 58,451 कांग्रेस
3    मेघराज साहू 2,914 छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच
4    अनिल मिश्रा 1,467 बसपा
5    लिकेश सिंह  1,019 निर्दलीय
6    विवेक वारेतवर 980 निर्दलीय
7    कर्नल बलवंत सिंह 512 निर्दलीय
8    अहफाज रशीद 442 बससपा
9    नवीन गुप्ता  435 सपा
10 शेख इस्माइल 352 निर्दलीय

2013 विधानसभा चुनाव में रायपुर शहर पश्चिम के मतदाता 

मतदाता : 2,10,089
पुरुष मतदाता : 1,09,813
महिला मतदाता : 1,00,276
कुल मतदान : 1,32,231 (64.1%)
नोटा  : 2,357 (1.1%)

रायपुर उत्तर

रायपुर उत्तर विधानसभा सीट पर बारी-बारी से कांग्रेस और भाजपा ने जीत दर्ज की है। 2008 में यहां से कांग्रेस के कुलदीप सिंह जुनेजा ने जीत दर्ज की थी और 2013 में भाजपा के श्रीचंद सुंदरानी ने कुलदीप को लगभग 3500 मतों से हराया था।

2008 में भाजपा की तरफ से सच्चिदानंद उपासने चुनावी मैदान में उतरे थे। लेकिन हार के बाद अगले  विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने श्रीचंद सुंदरानी पर दांव लगाया और वे जीत गए। रायपुर उत्तर से पिछले विधानसभा चुनाव में 14 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।

2013- रायपुर शहर उत्तर उम्मीदवार

1 श्रीचंद सुंदरानी 52,164 भाजपा
2 कुलदीप सिंह जुनेजा 48,688 कांग्रेस
3 सुनंद बिस्वास  735 बसपा
4 हाजी मो. अशरफ 447 निर्दलीय
5 हैदर रजा    415 निर्दलीय
6 मोहम्मद इसरार 349 सपा
7 मोहम्मद सजन 326 निर्दलीय
8 बेनू गेनाद्रे   300 निर्दलीय
9 संजीव सेन   241 छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच
10 सलीम खान  180 निर्दलीय
11 संजय नाग   168 शिवसेना
12 प्रदीप अरोड़ा  157 निर्दलीय
13 मुशाहिद खान 154 निर्दलीय
14 नीलोफर अली 79 निर्दलीय

2013- रायपुर शहर उत्तर चुनाव

मतदाता : 1,65,485
पुरुष मतदाता : 84,861
महिला मतदाता : 80,624
कुल मतदान : 1,04,403 (64.6%) 
नोटा : 2,424 

रायपुर दक्षिण

रायपुर दक्षिण को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां राज्य सरकार के कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल हमेशा से ही चुनाव जीतते आए हैं। कांग्रेस ने हर चुनाव में बृजमोहन के खिलाफ अलग-अलग प्रत्याशी खड़े किए, लेकिन हर बार हार का ही सामना करना पड़ा। रायपुर दक्षिण से पिछले विधानसभा चुनाव में 38 उम्मीदवार खड़े हुए थे, जिसमें से बृजमोहन अग्रवाल ने करीब 25 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी।

विधानसभा चुनाव 2013

 रायपुर शहर दक्षिण


1  बृजमोहन अग्रवाल  -  81,429 (भाजपा)
2  डॉ. किरनमयी नायक   46,630 (कांग्रेस)
3  कमाल अख्तर     1,036 निर्दलीय
4  अब्दुल नईम खान    929 निर्दलीय
5  शमशेर अली    737 निर्दलीय
6  विमला भारती  614 निर्दलीय
7  रईस फाजिल  597 बसपा
8  सूरज            289 निर्दलीय
9  नजत अली    269 निर्दलीय
10  सगीरुद्दीन ओवैसी 264 निर्दलीय

विधानसभा चुनाव 2013- रायपुर शहर दक्षिण

मतदाता : 2,05,759
पुरुष मतदाता : 1,05,787
महिला मतदाता : 99,972
कुल मतदान : 1,35,307 (66.8%) 
नोटा : 2,126 (1.0%) 

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