ईश्वर दुबे
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Bhilai
धमतरी में जिला स्तरीय 'शाला प्रवेशोत्सव' आयोजित; नवप्रवेशी बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत
रायपुर, जुलाई 2026/ नवीन शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर धमतरी स्थित मराठा मंगल भवन में जिला स्तरीय 'शाला प्रवेशोत्सव' का आयोजन किया गया। समारोह में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं पुष्प वर्षा के साथ भावुक व आत्मीय स्वागत किया गया। जिले के प्रभारी मंत्री श्री वर्मा ने छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें एवं शाला गणवेश प्रदान किए। सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया। दिव्यांग विद्यार्थियों को आवश्यक सहायक किट वितरित कर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। इसी तरह शैक्षणिक, खेलकूद, सांस्कृतिक व सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
उद्देश्य और सोच से ही काम बड़ा बनता है: मंत्री श्री टंक राम वर्मा
जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है। आज का विद्यार्थी ही कल का वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक और राष्ट्र निर्माता बनेगा। विद्यार्थियों में उत्साह भरने के लिए उन्होंने संत और तीन मजदूरों की एक प्रेरक कथा साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक मजदूर की सकारात्मक सोच और स्पष्ट लक्ष्य ने साधारण से पत्थर तोड़ने के काम को 'बांध निर्माण' जैसे महान राष्ट्रसेवा के कार्य में बदल दिया। उन्होंने कहा कि काम केवल हाथों से नहीं, बल्कि उद्देश्य और सोच से बड़ा बनता है। मंत्री श्री वर्मा ने विद्यार्थियों से केवल अंक लाने तक सीमित न रहकर ज्ञान और संस्कारों के माध्यम से समाज सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
पौधरोपण और 'न्योता भोजन' में सहभागिता
मंत्री श्री वर्मा ने नूतन विद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर 'न्योता भोजन' किया, जिससे विद्यार्थियों में विद्यालय के प्रति अपनापन और उत्साह का संचार हुआ।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे
जिले के प्रभारी मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में डिजिटल शिक्षा, मजबूत अधोसंरचना, छात्रवृत्ति और पारदर्शी योजनाओं के जरिए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक या सामाजिक कारणों से पढ़ाई से दूर न रहे। कार्यक्रम में कलेक्टर ने स्वागत भाषण देते हुए जिले में विकसित की जा रही शैक्षणिक अधोसंरचना, नवाचारों और समावेशी माहौल की जानकारी दी। जिला शिक्षा अधिकारी ने विभागीय उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष तथा महापौर ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू,अन्यजनप्रतिनिधि,अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
महिला स्व-सहायता समूहों, FPO और युवाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार-मंत्री श्री टंक राम वर्मा
धमतरी को मिली बड़ी सौगात: कृषि विज्ञान केंद्र में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण
रायपुर, जुलाई 2026/ कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में स्थापित माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्क्यूबेशन सेंटर (कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर) किसानों, युवाओं और नए उद्यमियों को कम लागत पर आधुनिक मशीनरी, उत्पाद परीक्षण, पैकेजिंग और कौशल प्रशिक्षण की साझा सुविधा प्रदान करते हैं। बिना बड़ी मशीनें खरीदे, उद्यमी यहाँ अपने कच्चे माल (जैसे फल, सब्जी, मसाले या मिलेट्स) से जूस, अचार, सॉस व अन्य उत्पाद बनाकर उनकी गुणवत्ता और बाजार का परीक्षण कर सकते हैं।
धमतरी जिले में कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को नई पहचान देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), धमतरी में नवनिर्मित ‘माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्क्यूबेशन सेंटर’ का भव्य लोकार्पण राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी सफलतापूर्वक समापन हुआ।
वैज्ञानिक प्रसंस्करण से किसानों की आय दोगुनी करना मुख्य उद्देश्य: मंत्री श्री टंक राम वर्मा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि कृषि और उद्यानिकी उपजों का वैज्ञानिक विधि से प्रसंस्करण (Processing) करना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है। कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अब सिर्फ तकनीक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें ग्रामीण उद्यमिता के पावरहाउस के रूप में विकसित किया जा रहा है। 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना' से ग्रामीण युवाओं, स्व-सहायता समूहों और एफपीओ (FPO) को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।
मंत्री श्री वर्मा ने इन्क्यूबेशन सेंटर में स्थापित आधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया और प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक सिखाकर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
स्थानीय उपजों को मिलेगा नया बाजार: कलेक्टर
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने इसे जिले के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इस सेंटर से स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे धमतरी के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नई राहें खुलेंगी।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सीखे गुणवत्ता और मार्केटिंग के गुर
तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान किसानों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण एवं स्वच्छता आधुनिक पैकेजिंग व लेबलिंग FSSAI के मानक एवं नियम,विपणन और ब्रांडिंग के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
इस कार्यक्रम में धमतरी महापौर श्री रामू रोहरा, पूर्व विधायक श्रीमती रंजना दीपेंद्र साहू, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाए, कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता, खाद्य प्रसंस्करण विभागाध्यक्ष, जिला व्यापार उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, किसान और महिला समूहों की सदस्याएं उपस्थित थीं।
Public Safety Is the Highest Priority; No Negligence in Preparedness Will Be Tolerated: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai
Raipur, July , 2026/Amid continuous rainfall across several districts of Chhattisgarh and the Red and Yellow Alerts issued by the India Meteorological Department (IMD), Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has directed all District Collectors, Superintendents of Police, and officials of concerned departments to remain on high alert. Emphasising that public safety is the State Government's highest priority, he said no negligence in disaster preparedness, relief, or rescue operations will be tolerated.
The Chief Minister instructed District Collectors to maintain strict surveillance over flood-prone and waterlogged areas, identify vulnerable locations, and take all necessary precautionary measures without delay. He directed that people residing in vulnerable areas be shifted to safer locations in advance wherever required to prevent any loss of life.
He also directed all districts to ensure comprehensive preparedness for relief and rescue operations. Relief camps should be equipped with adequate food, safe drinking water, medicines, first aid, electricity, sanitation, and other essential facilities. He further instructed officials to provide special care for senior citizens, women, children, and divyangjan.
Shri Sai directed the National Disaster Response Force (NDRF), State Disaster Response Force (SDRF), Police, Home Guards, Nagar Sena, Health Department, Public Works Department, Power Distribution Company, and all other concerned departments to work in close coordination and remain fully prepared. He instructed officials to ensure the availability of rescue equipment, boats, relief materials, and all other necessary resources for immediate response during emergencies.
The Chief Minister also directed officials to maintain round-the-clock monitoring at both the district and state levels and continuously review weather conditions, reservoir water levels, river and stream conditions, and other potential risk areas. He instructed that relief and rescue operations be launched immediately wherever the situation demands prompt intervention.
Appealing to the people of the state, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai urged citizens to follow advisories issued by the India Meteorological Department and the district administration, avoid visiting rivers, streams, and waterlogged areas unnecessarily, and immediately report any emergency to the local administration. He expressed confidence that with administrative preparedness, timely action, and public cooperation, any potential disaster can be effectively managed.
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai Holds Detailed Discussions with Railway Minister Shri Ashwini Vaishnaw to Expedite Key Rail Projects in Chhattisgarh
Raipur, July , 2026/Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai met Union Railway Minister Shri Ashwini Vaishnaw during his visit to New Delhi on July 30. He held detailed discussions on the expansion of railway infrastructure, new rail projects, and the progress of pending railway lines in Chhattisgarh.
The Chief Minister said that Chhattisgarh is one of the country's most important states in terms of industry, mineral resources, and agriculture. He stated that expanding the railway network is not merely a matter of improving transportation but is also crucial for industrial growth, trade, tourism, agricultural marketing, the development of tribal regions, and balanced regional progress. He added that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, Chhattisgarh is benefiting from the unprecedented expansion of railway infrastructure across the country, and the state government is working in close coordination with the Central Government to accelerate these efforts.
A major focus of the meeting was the Katghora–Dongargarh New Railway Line Project. It was informed that the approximately 295-kilometre rail corridor will be developed through a joint venture between the Ministry of Railways and the Government of Chhattisgarh. A Special Purpose Vehicle (SPV) will be formed for the implementation of the project. The railway line will connect Katghora, Kartala, Mungeli, Kawardha, Khairagarh, and Dongargarh, bringing railway connectivity for the first time to several regions that currently have no rail access. The Chief Minister said the project will accelerate regional development, promote industrial growth, and provide improved transportation facilities to millions of people.
The meeting also reviewed the progress of the Raoghat–Jagdalpur Railway Line Project. The Chief Minister said that land acquisition for the approximately 140-kilometre railway line has been completed and that the railway tendering process is in its final stage. He expressed confidence that the early commencement of construction would significantly strengthen connectivity in the Bastar region and provide fresh momentum to its social and economic development.
Chief Minister Shri Sai requested the early approval of three other important railway projects in the state—Sardega–Pathalgaon–Ambikapur (244 km), Dharamjaigarh–Pathalgaon–Lohardaga (301 km), and Ambikapur–Barwadih (200 km). He said these projects would strengthen rail connectivity in northern Chhattisgarh and adjoining regions while creating new opportunities for trade, tourism, mineral transportation, and local employment. Railway Minister Shri Ashwini Vaishnaw assured that positive steps would be taken towards granting early approval to these projects.
The progress of survey work for the Kirandul–Kothagudem (180 km) and Gadchiroli–Bijapur–Kirandul (Bacheli) (490 km) railway line projects was also reviewed during the meeting. The Chief Minister requested that the survey work be completed at the earliest so that further action could begin, strengthening connectivity in the Bastar region and supporting both development and security-related initiatives.
रेड एवं येलो अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता बरतने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी और समय पर राहत-बचाव सुनिश्चित करने के निर्देश
जन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर जुलाई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही वर्षा तथा मौसम विभाग द्वारा कई जिलों के लिए जारी रेड एवं येलो अलर्ट को देखते हुए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उच्च सतर्कता (हाई अलर्ट) पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे संभावित बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखें तथा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाएं। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता हो, वहां लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की संभावना न रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में राहत एवं बचाव की समुचित तैयारियां पहले से सुनिश्चित की जाएं। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों, प्राथमिक उपचार, बिजली, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। साथ ही वृद्धजनों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत वितरण कंपनी तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता बनाए रखें। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों, उपकरणों, नावों तथा राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला एवं राज्य स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए तथा मौसम की स्थिति, जलाशयों के जलस्तर, नदी-नालों की स्थिति और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित समीक्षा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेते हुए राहत एवं बचाव कार्य तत्काल प्रारंभ किए जाएं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन की सतर्कता, समयबद्ध कार्रवाई और जनसहयोग से किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।
जलापूर्ति योजनाओं के संचालन व रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री
पीएचई द्वारा यूनिसेफ और एसीई के सहयोग से हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए कार्यशाला का आयोजन
रायपुर. जुलाई 2026. उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।
कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। श्री साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता श्री समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।
जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत
कक्षा 10वीं एवं 12वीं के 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन का हुआ भूमिपूजन
पुसौर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव
रायपुर, जुलाई 2026/ रायगढ़ जिले के नगर पंचायत पुसौर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव-2026 उत्साह, उल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन का भूमिपूजन किया। साथ ही नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि विद्यालय में पहला कदम किसी भी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत होता है। शिक्षा केवल व्यक्ति का जीवन ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की दिशा और दशा बदलने की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासित जीवन और सतत मेहनत के बल पर उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन का लक्ष्य अभी से निर्धारित करने और उसी दिशा में समर्पित होकर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह तय होना चाहिए कि जीवन में किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के द्वार खुले हैं और ऐसे अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुँचाना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय संस्थानों में चयनित होने वाले विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाशाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली भेज रही है, जहाँ उनके अध्ययन और आवास का संपूर्ण व्यय सरकार वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के मार्ग में आर्थिक अभाव कभी बाधा नहीं बन सकता।
मंत्री श्री चौधरी ने शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान जिन शिक्षकों के बच्चे शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उनका मंच से सम्मान भी किया गया। उन्होंने प्राचार्यों और शिक्षकों का आह्वान किया कि वे ऐसे उत्कृष्ट शासकीय विद्यालय विकसित करें, जहाँ अभिभावक स्वयं अपने बच्चों का प्रवेश दिलाने के लिए उत्सुक हों। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में पुसौर में नर्सिंग कॉलेज और नालंदा परिसर का निर्माण भी किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य केवल नए विद्यार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि विद्यालय को बच्चों के लिए आनंददायक और प्रेरणादायी बनाना है। उन्होंने अभिभावकों से घर में बच्चों के अध्ययन के लिए एक अलग स्थान निर्धारित करने और प्रतिदिन उनसे विद्यालय में सीखी गई नई बातों पर चर्चा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और आत्मीयता विकसित होगी।
मेधावी विद्यार्थियों, दिव्यांग छात्रा एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पूर्ण दृष्टिबाधित छात्रा कामिनी यादव को 86 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी सम्मान किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में प्रमुख रेल परियोजनाओं को गति देने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से की विस्तृत चर्चा
रेल नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास का मजबूत आधार बनेगा : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पांडे उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।
बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।
बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं - सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) - को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।
Chhattisgarh and Odisha Hold Meeting in New Delhi on Mahanadi Water Issues Under the Chairmanship of Union Jal Shakti Minister Shri C.R. Patil
Raipur, July , 2026/ A significant initiative towards achieving an amicable and long-term resolution of issues related to the sharing of Mahanadi river waters has been taken at Shram Shakti Bhawan in New Delhi on July 30. A meeting on the Mahanadi water dispute between Chhattisgarh and Odisha was held under the chairmanship of Union Jal Shakti Minister Shri C.R. Patil. Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai attended the meeting, along with Odisha Chief Minister Shri Mohan Charan Majhi.
Addressing the meeting, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said that the Mahanadi is the shared lifeline of both Chhattisgarh and Odisha. Its waters are closely linked to farmers' livelihoods, drinking water supply, industrial development, environmental conservation, and the future of coming generations.
He said that the Chhattisgarh Government views the meeting not as a continuation of a dispute but as the beginning of a new phase of resolution. He said that the atmosphere of dialogue and cooperation between the two states would provide a strong foundation for a permanent and practical solution.
He further said that the Chhattisgarh Government fully respects Odisha's requirements related to irrigation, drinking water, and the Hirakud Project. Similarly, he emphasised that the needs of Chhattisgarh's farmers, tribal regions, drought-affected areas, and the state's future development should also be considered with equal sensitivity. He stated that the interests of both states are complementary rather than conflicting, and the solution should ensure that neither state's interests are adversely affected.
The Chief Minister said that experts from both states have already conducted scientific studies on water availability and related technical aspects. He stated that the next step should be to develop a practical and future-oriented framework based on these technical findings. He suggested establishing a joint water management system for low-rainfall years to ensure that neither state faces hardship. He also proposed creating a permanent institutional mechanism to review water availability, utilisation, and future requirements periodically.
Shri Sai further suggested that as many issues as possible should be resolved through administrative and technical coordination. At the same time, only matters of policy significance should be referred to the ministerial level. He said this approach would make the decision-making process more effective, transparent, and time-bound.
The Chief Minister requested Union Jal Shakti Minister Shri C.R. Patil and the Central Water Commission to provide impartial technical assistance, prepare a time-bound action plan, and facilitate the drafting of a long-term consensus-based agreement between the two states. He said the Central Government's constructive role would further strengthen mutual trust and accelerate the process of reaching a solution.
Expressing gratitude to Prime Minister Shri Narendra Modi and Union Minister for Home and Cooperation Shri Amit Shah, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said that the spirit of cooperative federalism and coordination among states has created a positive environment for resolving complex issues that have remained pending for years. He expressed confidence that, under the guidance of the Central Government, both states would develop a solution that secures the water requirements of farmers, citizens, industries, the environment, and future generations.
Union Minister of State for Housing and Urban Affairs Shri Tokhan Sahu,
Chhattisgarh Chief Secretary Shri Vikas Sheel, Principal Secretary to the Chief Minister Shri Subodh Kumar Singh, the Chief Secretary of Odisha and senior Water Resources Department officials of both state governments attended the meeting.
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक
रायपुर जुलाई 2026/ महानदी जल बंटवारे से जुड़े विषयों के सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को किसी विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग का जो वातावरण बना है, वह भविष्य में स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मजबूत आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ओडिशा की सिंचाई, पेयजल तथा हीराकुंड परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करती है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी अंचलों, सूखा प्रभावित क्षेत्रों तथा राज्य की भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं और समाधान भी ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के हित प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल की मात्रा तथा उससे जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर भविष्य उन्मुख एवं व्यवहारिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कम वर्षा वाले सालों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार की जाए, जिससे किसी भी राज्य को कठिनाई का सामना न करना पड़े। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए, जो समय-समय पर जल उपलब्धता, उपयोग और आवश्यकताओं की समीक्षा करता रहे।
मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत महत्व के विषयों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर विचार के लिए लाया जाए। उन्होंने कहा कि इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल तथा केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक पहल दोनों राज्यों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी तथा समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और राज्यों के बीच समन्वय की भावना ने वर्षों से लंबित जटिल विषयों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बने।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।