ईश्वर दुबे
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भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय
स्कूली शिक्षा में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का संत समाज ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विभिन्न संत-महात्माओं ने की सौजन्य भेंट, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभार
रायपुर 16 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर श्री स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के श्री महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से श्री उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के श्री देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की।
इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर" जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है।
संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से जोड़ने कृषि कार्यशाला का सफल आयोजन
दंतेवाड़ा को जैविक कृषि का मॉडल जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रायपुर, किसानों और कृषि प्रेमियों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित की गई है। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जैविक खेती स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां और किसानों की मेहनत जैविक कृषि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी है। जैविक खेती अपनाकर किसान भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन कर सकते हैं।
किसानों के लिए संचालित हो रही हैं अनेक योजनाएं
वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भूमि संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।
जैविक खेती बनेगी दंतेवाड़ा की नई पहचान
क्षेत्रीय विधायक श्री चौतराम अटामी ने कहा कि जिले के किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ लेने की अपील की।
वैज्ञानिकों ने दी उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी
कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा जैविक उत्पादों के विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। किसानों की समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
विभिन्न विभागों ने लगाए जानकारी एवं प्रदर्शनी स्टॉल
कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा भूमगादी संस्था द्वारा स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न योजनाओं, तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों को कृषि आदान सामग्री एवं आम के पौधों का वितरण भी किया गया।
महिला स्व-सहायता समूहों ने प्रदर्शित की नवाचार क्षमता
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा रागी से तैयार केक का प्रदर्शन किया गया। मुख्य अतिथि ने केक काटकर महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न गांवों से आए किसान, ग्रामीण युवा और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ
हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का मिला लाभ
रायपुर, वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने जिले को 18 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ करते हुए 16 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 2 करोड़ 9 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
16 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन
वन मंत्री श्री कश्यप ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मिरतुर और बेदरे में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण, उसूर में वरिष्ठ कृषि अधिकारी भवन, आवापल्ली एवं कुटरू में शासकीय महाविद्यालय भवन, भैरमगढ़ महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्ष निर्माण तथा दुगईगुड़ा से चिंताकोंटा तक सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से शिक्षा, कृषि सेवाओं और आवागमन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति प्राप्त होगी।
जिला अस्पताल सहित कई सुविधाओं का लोकार्पण
लोकार्पित कार्यों में जिला अस्पताल परिसर में रैन बसेरा, दाल-भात केंद्र, अत्याधुनिक अटल आरोग्य लैब, कार्यालय सह गोदाम भवन, विद्यालय भवन, पंचायत भवन, पुलिया निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों में तार फेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। अटल आरोग्य लैब में अब 134 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ किया गया। अभियान के माध्यम से जिले में मलेरिया नियंत्रण, समय पर जांच और उपचार के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ
कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। स्वामित्व योजना के अंतर्गत वनाधिकार पट्टों का वितरण किया गया। वहीं निष्क्षय योजना के तहत पोषण आहार फूड बॉक्स, पुनर्वासित परिवारों को आयुष्मान कार्ड, गर्भवती महिलाओं को जच्चा-बच्चा कार्ड तथा दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।
विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है बीजापुर
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बीजापुर में अब विकास की नई धारा बह रही है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुंचना कठिन था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनकल्याण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
आयुष्मान भारत सहित कई योजनाएं बदल रहीं जीवन
मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन योजना तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीजापुर आने वाले वर्षों में विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
इस अवसर पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता सोम पुजारी, कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ डॉ. सागर यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चैबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
30 स्कूल बसों की जांच, चालक-परिचालकों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
अनुपस्थित 45 स्कूल बस संचालकों को जारी किया गया नोटिस
रायपुर, स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।
संयुक्त टीम ने 15 जून से जिले में संचालित स्कूल बसों का करेगी निरीक्षण
विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।
30 बसों का निरीक्षण सुरक्षा मानकों की हुई विस्तृत जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
चालक-परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की दी जानकारी
जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
अनुपस्थित बस संचालकों पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड की तुलना में सस्ती बिजली
बीते वर्षों में महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए विद्युत टैरिफ दरों में की गई है मामूली वृद्धि
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में बढ़ी महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत तथा पूर्व वर्षों के घाटे की भरपाई को देखते हुए यह मामूली वृद्धि, जरूरी और न्यायसंगत है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि उपभोग के अलग-अलग स्लैब के अनुसार यह बढ़ोतरी 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक रहेगी। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि निर्धारित की गई है। राज्य के लाखों परिवारों पर बढ़े हुए टैरिफ का वास्तविक प्रभाव केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास होगा। टैरिफ वृ द्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का ध्यान रखा है।
सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा।
इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत ही कम होने की संभावना है।
गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा।
उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपये प्रति केवीए की वृद्धि की गई है। 33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।
नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।
आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।
सामाजिक सुरक्षा एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजनाओं से जरूरतमंदों को मिल रहा संबल
वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांग हितग्राहियों को लंबित पेंशन राशि का भी किया गया भुगतान
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य में सामाजिक सुरक्षा और मुख्यमंत्री पेंशन योजनाएं वृद्धों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभर रही हैं । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन से जरूरतमंदों को महंगाई के इस दौर में सम्मानजनक जीवन जीने की वास्तविक सुविधा मिल रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सहायता एवं पेंशन योजनाओं के माध्यम से महासमुंद जिले के हजारों जरूरतमंद हितग्राहियों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा योजना और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के अंतर्गत कुल 53 हजार 561 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया गया है।
राज्य शासन की योजनाओं से मिल रहा आर्थिक सहयोग
महासमुंद जिले के उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने बताया कि राज्य शासन द्वारा संचालित पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 24 हजार 253, सुखद सहारा योजना के 9 हजार 76 तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 20 हजार 232 हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है। इन योजनाओं के माध्यम से वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और अन्य पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनके जीवनयापन में सहूलियत मिल रही है।
केंद्रीय पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को भी मिला लाभ
समाज कल्याण विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को भी लंबित पेंशन राशि का भुगतान किया गया है।
तकनीकी प्रक्रिया के कारण हुई थी देरी
भारत सरकार द्वारा नवीन एसएनए-एस्पर्श प्रणाली लागू किए जाने के कारण पेंशन भुगतान में कुछ समय के लिए विलंब की स्थिति बनी थी। अब प्रक्रिया सुचारु होने के बाद पात्र हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि जारी कर दी गई है।
42 हजार से अधिक हितग्राहियों को मिला भुगतान
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 32 हजार 52, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 9 हजार 469 तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 945 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सामाजिक सहायता योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नियमित पेंशन भुगतान से वृद्धजन, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन में सहायता मिल रही है। शासन की इन योजनाओं से हजारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।
Extends best wishes to students across Chhattisgarh as schools reopen for the new academic year
Raipur, June 15, 2026 / Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai on Monday extended his best wishes to students across the state on the commencement of the new academic session beginning June 16 and encouraged them to pursue their studies with dedication, discipline and enthusiasm.
Chief Minister Shri Sai said schools are not merely places for learning but institutions that help shape students' aspirations and lay the foundation for a bright future. He urged students to attend school regularly and approach their studies with confidence, commitment and a positive attitude.
"The hard work and education you acquire today will become the foundation of your success in the years ahead," Chief Minister Shri Sai said.
Chief Minister Shri Sai encouraged students to set clear goals, continue striving toward them and contribute to the development of the state and the nation through knowledge, values and personal growth.
Expressing confidence in the state's students, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said they will achieve new heights through their talent, hard work and determination and bring laurels to Chhattisgarh. He wished all students a successful, bright and inspiring future as they begin the new academic year.
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai Urges Public Representatives to turn Shala Pravesh Utsav into a people's movement
नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं
रायपुर 15 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें पूरी लगन और उत्साह के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि आप सभी बच्चों के सपनों को आकार देने और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का माध्यम है। उन्होंने बच्चों से पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और उत्साह के साथ नियमित रूप से विद्यालय जाने तथा मन लगाकर पढ़ाई करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का परिश्रम और शिक्षा ही आने वाले समय में बच्चों की सफलता का आधार बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने तथा ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से प्रदेश और देश के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के बच्चे अपनी प्रतिभा, मेहनत और संकल्प के बल पर भविष्य में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के सफल, उज्ज्वल और प्रेरणादायी भविष्य की कामना की।
IAS officer trainees pays courtsey call on Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai
Raipur, June 15, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai on Monday advised three Indian Administrative Service (IAS) officer trainees of the Chhattisgarh cadre to uphold sensitivity, impartiality and dedication in public service, saying that administrative service is one of the most effective means of serving people.
Officer trainees including Shri Gokul R. K., Shri V. Yashwanth Nayak, and Shri Ishant Jaiswal, who are currently undergoing training at the Chhattisgarh Administration Academy, Nimora, paid a courtesy call on Chief Minister at his residence office today. Chief Minister congratulated the officer trainees on their success and extended his best wishes for their future careers in public service.
Chief Minister said decisions taken by administrative officers directly affect the lives of thousands of people and, therefore, public interest must remain paramount in every decision. He urged the trainees to remain connected with people, understand their problems and work with a humane approach.
Shri Sai said the true value of education and training lies in using acquired knowledge to bring positive change in the lives of citizens. He also briefed the officers on Chhattisgarh's social and economic landscape, improving connectivity, tourism potential, progress in tackling Left Wing Extremism and the state's development journey. He shared insights into the state's cultural diversity, tribal traditions and emerging development opportunities.
The trainees informed Chief Minister that, during their training, they had visited Sukma and Bijapur districts in Bastar division as well as Jashpur, Surguja and Koriya districts in Surguja division. They also visited the revered Maa Danteshwari temple and studied local culture, development activities and administrative systems.
Sharing their experiences, the officers described Chhattisgarh as a state rich in cultural diversity and warmth. They said interactions with local communities and exposure to tribal traditions had left a deep impression on them and strengthened their commitment to public service.
The trainees also shared their experiences and challenges in preparing for the civil services examination. Referring to his own public life and experiences in public service, Chief Minister encouraged them to keep learning, stay grounded and adopt a people-centric approach in their work.
Director General of the Chhattisgarh Academy of Administration and Additional Chief Secretary Shri Subrat Sahoo, Director Shri T. C. Mahawar and Joint Director Shri Pranav Singh were also present on the occasion.