छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

कांग्रेस छत्तीसगढ़ में चुनाव आचार संहिता उल्लघंन के कई मामलों को लेकर मंगलवार को चुनाव आयोग पहुंचीं। छत्तीसगढ़ में एक ओर दूसरे चरण का मतदान हो रहा था और दिल्ली में राज्य के प्रभारी और सांसद पीएल.पुनिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयुक्त से मिला और अपनी शिकायत दर्ज कराई।  

 पीएल पूनिया ने मुलाकात के बाद कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार बौखलाकर चुनाव प्रभावित करने के लिए कई तरह की हरकतें कर रही है। उन्होंने बताया कि बीती रात चिरमिरी हाईस्कूल के हेडमास्टर वेद प्रकाश मिश्रा के घर तीन ईवीएम मशीनें मिलीं। आयोग के मुताबिक शायद वो सेक्टर प्रभारी है लेकिन आयोग ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी सूरत में वो अपने घर ईवीएम नहीं रख सकते थे। बीती रात ही ईवीएम जब्त कर कार्रवाई की गई।  


वहीं भाजपा के एक प्रत्याशी के पास से दो लाख रुपए बरामद हुए हैं। रात को पैसा बांटने का काम कर रहे थे उसमें एफआईआर हुई है लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। राज्य के अंबिकापुर से खबर मिल रही है कि जिन इलाकों में कांग्रेस मजबूत है वहां सुबह सात बजे पोलिंग शुरू नहीं हुई। कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसे हथकंडे अपनाने का आरोप लगाकर मतदान समय बढ़ाने की मांग की।

 


इसी प्रकार चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद बतौर राज्य प्रभारी कांग्रेस को रुकने की इजाजत नहीं मिली जबकि भाजपा के प्रदेश प्रभारी अनिल जैन और संगठन मंत्री सौदान सिंह वहीं मौजूद रहे। उनका कहना है कि आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है। इसी प्रकार 17 नवंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रायपुर में बिना अनुमति रोड शो और उसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को पोस्टल बैलेट नहीं दिए। उनको वोटिंग अधिकार से वंचित किया गया है।  

प्रथम चरण की तरह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के दूसरे एवं अंतिम चरण में भी मतदान का औसत 2013 के मुकाबले कम रहा है। दूसरे चरण में 19 जिलों की 72 विधानसभा सीटों पर मतदान का कुल औसत 71.93 प्रतिशत रहा, जबकि 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में यह 77.12 प्रतिशत था। वहीं दूसरे चरण में ईवीएम खराब होने की बेहद शिकायतें दर्ज की गईं।

 

मुख्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा ने निर्वाचन सदन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 72 विधानसभा सीटों पर 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। 2 सीटों पर सुबह 7 बजे से 3 बजे तक मतदान हुआ, जबकि बाकी विधानसभा सीटों पर सुबह 8 बजे से 5 बजे तक मतदान हुआ। उप निर्वाचन आयुक्त के मुताबिक दूसरे चरण में एक करोड़ 54 लाख मतदाता थे, जिनमें पुरुषों की संख्या 77 लाख 53 हजार और महिलाओं की संख्या 76 लाख 46 हजार थी। जबकि थर्ड जेंडर के मतदाताओं की संख्या 877 रही।

 

सिन्हा ने बताया कि पहले चरण में मतदान का औसत 76.42 फीसदी रहा, जबकि दूसरे चरण में 71.93 प्रतिशत रहा। दोनों चरणों को मिला कर मतदान का कुल औसत 74.17 प्रतिशत रहा। 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में प्रथम चरण में 75.06 प्रतिशत और दूसरे चरण में 77.12 प्रतिशत की वोटिंग हुई थी। जबकि दोनों चरणों का कुल औसत 77.4 रहा था। उन्होंने बताया कि ये अंतरिम आंकड़ें हैं, और देर रात या सुबह तक ही सही औसत का पता चल सकेगा। हालांकि राज्य निर्वाचन पदाधिकारी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक शाम छह बजे तक 66.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

सिन्हा ने बताया कि सघन नक्सल प्रभावित बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा के दो मतदान केन्द्रों आमामोरा और औढ़ में 82 और 82.5 प्रतिशत की वोटिंग दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा मतदान बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्रों में 83 प्रतिशत, संजारी बालोद में 82.12 प्रतिशत, गुंडर देही में 81 प्रतिशत, पाटन में 80 प्रतिशत दर्ज का गया। वहीं चंद्रपुर, बागरेल और जमुनापाली मतदान केन्द्रों पर शून्य प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं परेवापाली में सड़क न बनने के चलते मतदान का बहिष्कार किया।

 

 

सिन्हा ने बताया कि प्रथम चरण की तरह दूसरे चरण में भी 100 की उम्र पार कर चुके कई बुजुर्ग मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया और कई ने तो सेल्फी भी खिंचवाई। आयोग के मुताबिक राज्य में 100 साल से ऊपर वोटरों की संख्या 3,630 से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मिस ट्रांसजेंडर इंडिया वीणा शिंदे समेत थर्ड जेंडर समुदाय के लोगों ने भी बढ़ चढ़ कर वोटिंग की। राज्य में कुल 964 वोटर थर्ड जेंडर समुदाय के हैं। 
उप निर्वाचन आयुक्त संदीप जैन के मुताबिक दूसरे चरण में 19 हजार 336 ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें से अतिरिक्त 25 प्रतिशत ईवीएम रिजर्व में रखी गई थीं।

उन्होंने बताया कि सेक्टर मजिस्ट्रेट को भी अलग से एक-दो ईवीएम दी जाती हैं। मतदान के दौरान 114 बैलेट यूनिट (.44 प्रतिशत) में खराबी की शिकायतें आईं, जबकि 89 सेंट्रल यूनिट (.46 प्रतिशत) और 359 वीवीपैट यूनिट (1.66 प्रतिशत) में खराबी पाई गई, जिन्हें तुरंत बदल दिया गया।

 

ज्यादा वीवीपैट खराब होने के पीछे जैन ने वजह बताई कि जब भी बैलट यूनिट या सेंट्रल यूनिट में खराबी आती है, तो वीवीपैट को भी बदलना पड़ता है, जिसकी वजह से वीपीपैट खराब होने के ज्यादा मामले सामने आते हैं। आयोग के डीजी दिलीप शर्मा ने बताया कि दूसरे चरण में सी-विजिल एप पर 1819 शिकायतें आईं, जिनमें से 1768 का तुरंत निराकरण कर दिया गया, वहीं 48 में जांच जारी है और 3 मामले अभी पेंडिंग हैं।

उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में 12 करोड़ 51 लाख रुपए का सामान आर नकदी जब्त की गई। जिसमें 4 करोड़ 47 लाख 13 हजार रुपए नकद, 1 लाख 24 हजार लीटर अवैध शराब, जिसकी बाजार में कीमत 1 करोड़ 55 लाख के आसपास थी। वहीं 29 लाख 13 की कीमत का सोना और चांदी, एक लाख 76 हजार की ड्रग, 6 करोड़ 17 लाख की गाड़ियां, साड़ियां और कूकर को जब्त किया गया। 
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत 72 विधानसभा सीटों पर मंगलवार सुबह आठ बजे मतदान प्रारंभ हो गया। राज्य में ​मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सुबह आठ बजे राज्य के 19 जिलों की 72 ​विधानसभा सीटों में मतदान प्रारंभ हो गया। अ​धिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में 1079 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसमें से 113 अनुसूचित जाति और 176 अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। इसमें 119 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र बिन्द्रानवागढ़ के दो मतदान केन्द्रों आमामोरा और मोढ़ में सुबह सात बजे से दोपहर तीन तक बजे तक तथा शेष सभी विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर मतदान समय सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित है। अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 19336 है। इसमें संवेदनशील मतदान केन्द्र 444 और संगवारी मतदान केन्द्र 118 हैं। संगवारी मतदान केंद्रों पर मतदान दल की सभी सदस्य महिलाएं होंगी। उन्होंने बताया मंगलवार को हो रहे मतदान में कुल मतदाताओं की संख्या 1,54,00,596 है। जिसमें। पुरुष मतदाता 77,53,337 और महिला मतदाता 76,46,382 हैं। वहीं तृतीय ​लिंग के 877 मतदाता हैं। 
 
मतदान संपन्न कराने के लिए 84688 मतदान कर्मियों को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गए हैं। अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लगभग डेढ़ लाख जवानों को तैनात किया गया है। राज्य के गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। इन जिलों में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान में मतदाता जिन 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे उनमें कसडोल सीट से विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और रमन मंत्रिमंडल के नौ सदस्य रायपुर दक्षिण सीट से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत, भिलाई से प्रेम प्रकाश पांडेय, बैकुंठपुर से भैयालाल राजवाड़े, मुंगेली से पुन्नूलाल मोहिले, प्रतापपुर से रामसेवक पैकरा, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, कुरूद से अजय चंद्राकर और नवागढ़ से दयालदास बघेल शामिल हैं।वहीं मतदाता अंबिकापुर से विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, पाटन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, सक्ति से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत, दुर्ग ग्रामीण से सांसद ताम्रध्वज साहू, मरवाही से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और कोटा से उनकी पत्नी रेणु जोगी के भाग्य का भी फैसला करेंगे। दूसरे चरण की 72 सीटों में से 17 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए तथा नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 72 सीटों में से 43 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 27 तथा बहुजन समाज पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी।
 
राज्य में इससे पहले हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुख्य रूप से मुकाबला रहता था, लेकिन इस बार के चुनाव में जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन द्वारा चुनाव लड़ने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। इस बार भाजपा 65 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में है। वहीं, लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता इस बार बदलाव के लिए वोट देगी। राज्य में अपनी-अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, अनेक केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती समेत अनेक नेताओं ने लगातार रैलियां की हैं। छत्तीसगढ़ में पहले चरण में राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए इस महीने की 12 तारीख को मतदान हुआ था। इस दौरान इस क्षेत्र के 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया था। 11 दिसंबर को मतों की गिनती की जाएगी।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के दूसरे चरण का मतदान जारी है। मतदाता पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, राज्य शासन के नौ मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। दूसरे चरण में 1,53,85,983 मतदाता 1079 उम्मीदवारों के लिए मतदान करेंगे। इसमें 119 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। राज्य के रायपुर नगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 46 उम्मीदवार और बिंद्रानवागढ़ में सबसे कम छह उम्मीदवार हैं। पहले दौर में यहां 18 सीटों के लिए मतदान हुआ था। 

 

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

राज्य में शांतिपूर्ण मतदान के लिए अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लगभग एक लाख जवानों को तैनात किया गया है। राज्य के गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। इन जिलों में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। दूसरे चरण के लिए 72 सीटों में शाम पांच बजे तक मतदान होगा। 

दूसरे चरण के मतदान का LIVE अपडेट 

-कवर्धा में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोंकझोंक। 

- दोपहर 2.55 बजे तक 45.2 फीसदी वोटिंग।


अब तक की वोटिंग 

कवर्धा- 44%
पंडरिया-41%
भरतपुर-47%
मनेंद्रगढ़-44%
बैकुंठपुर-46%


- सीएम रमन सिंह ने कवर्धा में वोट डाला।


- दूसरे चरण के मतदान में दोपहर 12 बजे तक 23.71 फीसदी वोटिंग हुई। 

- कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और दुरुपयोग की शिकायत की।

- छत्तीसगढ़ सरकार में मुख्य सचिव अजय सिंह ने रायपुर में किय मतदान। 





- छत्तीसगढ़ दूसरे चरण के मतदान में 10 बजे तक 12.54 फीसदी मतदान हुआ। 
 




- बिलासपुर में पेंड्रा मतदान केंद्र में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस अध्यक्ष अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी ने मतदान किया। 
 




- बिलासपुर में सुबह 9 बजे तक 10 फीसदी वोटिंग हुई।

- महासुमंद के मतदान केंद्र में 91 ईवीएम खराब होने के कारण मतदान रुका। मतदान शुरू होते ही आई थी गड़बड़ी। 

- 100 वर्ष की बुजुर्ग महिला मतदाता ननकी बाई ने 20 रामपुर, सैक्टर क्रमांक 24, मतदान केंद्र क्रमांक 233 में वोट दिया। 



- अंबिकापुर में एक मतदान केंद्र के बाहर कतार में लगे मतदाता। 
 



- दूसरे चरण के मतदान के लिए वोटिंग शुरू। बिलसापुर में पेंड्रा के एक मतदान केंद्र में वोटिंग के लिए पहुंचे मतदाता। 
 




1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला

छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान में मतदाता जिन 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, उनमें कसडोल सीट से विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और रमन मंत्रिमंडल के नौ सदस्य, रायपुर दक्षिण सीट से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत, भिलाई से प्रेम प्रकाश पांडेय, बैकुंठपुर से भैयालाल राजवाड़े, मुंगेली से पुन्नूलाल मोहिले, प्रतापपुर से रामसेवक पैकरा, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, कुरूद से अजय चंद्राकर और नवागढ़ से दयालदास बघेल शामिल हैं।

मतदाता अंबिकापुर से विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, पाटन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, सक्ति से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत, दुर्ग ग्रामीण से सांसद ताम्रध्वज साहू, मरवाही से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और कोटा से उनकी पत्नी रेणु जोगी के भाग्य का भी फैसला करेंगे।

दूसरे चरण की 72 सीटों में से 17 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए और नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 72 सीटों में से 43 सीटों में जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 27 और बहुजन समाज पार्टी को एक सीट में जीत मिली थी। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता था।

अजीत जोगी ने त्रिकोणीय किया मुकाबला

Ajit jogi- Mayawati
Ajit jogi- Mayawati
राज्य में इससे पहले हुए चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ही आमने सामने रहती थीं। लेकिन इस बार के चुनाव में जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर चुनाव लड़ने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है।

राज्य में भाजपा पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। इस बार भाजपा 65 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में है। वहीं लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता इस बार बदलाव के लिए वोट देगी। राज्य में अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, अनेक केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुख मायावती समेत अनेक नेताओं ने लगातार रैलियां की है।

पीएम मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने किया प्रचार

राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी
राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी
प्रचारा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह समेत अन्य भाजपा नेताओं ने गांधी परिवार पर निशाना साधा और कांग्रेस पर वादा खिलाफी करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने पिछले साढ़े चार वर्ष के केंद्र सरकार के कार्यकाल और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्ष के कार्यकाल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ की।

इधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने केंद्र सरकार पर राफेल डील में उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने और उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने का आरोप लगाया। वहीं उन्होंने राज्य में चिटफंड घोटाला, नान घोटाला तथा पनामा पेपर मामले को लेकर मुख्यमंत्री रमन सिंह को घेरा।

छत्तीसगढ़ में पहले चरण में राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए इस महीने की 12 तारीख को मतदान हुआ था। इस दौरान इस क्षेत्र के 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया था। 11 दिसंबर को मतों की गिनती की जाएगी। 
छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में 72 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं। इन विधानसभा सीटों मे 1.54 करोड़ मतदाता हैं। जिसमें 77.53 लाख वोटर पुरुष और 76.46 लाख महिला और 877 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान केंद्रों पर सुबह से भारी भीड़ दिखी। वोटिंग के लिए पहुंचे मतदाताओं को सुबह से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही कई जगहों पर ईवीएम में खराबी की खबरें आई हैं। 

रायपुर ग्रामीण में 21 ईवीएम मशीनों मे आई खराबी 

रायपुर मे 21 ईवीएम मशीनों के खराब होने की सूचना आई है। भाटापरा के 8 मतदान केंद्रों में ईवीएम मशीन खराब होने की सूचना आई है। साथ ही कोरिया के बूथ नबंर 17, सराईपाली के कुसमिसराल, पाली तानाखार के पसान में ईवीएम में खराबी की सूचना आई है। वहीं इसके बीच जांजगीर मे 17 फीसदी मतदान तो चंद्रपुर में 14 फीसदी वोटिंग हुई है। 
 
बता दे कि जहां-जहां ईवीएम मशीन खराब होने कि सूचना आई है वहां-वहां मतदान थोड़ी देर रोककर मशीनों को बदला जा रहा है। जिसके कारण मतदाता निराश होकर लौट रहे हैं। निर्वाचन आयोग को इस पर जल्द ही संज्ञान लेना होगा। क्योंकि अगर इसी प्रकार मतदाता लौटता रहा तो इसका असर मतदान के प्रतिशत पर भी पड़ेगा। 

कवर्धा सीट पर आधे धंटे तक रुका मतदान

मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृहनगर कवर्धा विधानसभा सीट से सबसे पहले ईवीएम खराब होने की खबर आई। बता दें कि यहां सुबह तकरीबन आधे धंटे तक मतदान रुका रहा। शुरुआत में कवर्धा के मतदान केंद्र शंख्या 232, 236, 239, 242 पर ईवीएम खराब हुई थी जिसके कुछ देर बाद ईवीएम को ठीक किया गया। इसके बाद मतदान फिर से शुरू हुआ। 

हालांकि ईवीएम सिर्फ कवर्धा ही नहीं बल्कि कई और विधानसभा सीटों पर भी ईवीएम खराब होने की खबर आई। धमतरी में ईवीएम खराब होने के कारण बहुत देर तक वोटिंग रूकी रही। इसके साथ  सिहावा विधानसभा क्षेत्र में कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब हो गए। इसी क्रम में प्रेमनगर विधानसभा के बूथ क्रमांक 90-91 पर ईवीएम खराब होने की खबर आई थी। जिसके कारण मतदान की  प्रतिक्रिया को आधे-धंटे तक रोका गया। 

दूसरे चरण के मतदान में 72 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। इन विधानसभा सीटों पर छत्तीगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव अजीत जोगी, युद्धवीर सिंह जूदेव, रेणु जोगी जैसे दिग्गज मंत्री समेत 1079 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। हालंकि दोपहर दो बजे तक 30 फीसदी मतदान हो चुका है। मतदान शाम पांच बजे तक होगा। 

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए प्रचार रविवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया. दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की 72 सीटों के लिए मंगलवार को मतदान होगा. दूसरे चरण के लिए होने वाले मतदान के लिए शनिवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त हो गया. अधिकारियों ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम गया. मतदान समाप्ति के 48 घंटे की समय अवधि में रैली तथा सभाओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों को मतदान समाप्ति के 48 घंटे पूर्व जिले से बाहर जाना होगा. अतः इस संबंध में अधिकारियों को व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. चुनाव आयोग ने राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान तय किया था.

पहले चरण में नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए 12 नवंबर को मतदान हुआ. पहले चरण में 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. दूसरे चरण में राज्य के 19 जिलों में मतदान होगा जिनमें गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं.


राज्य में पिछले 15 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और इस बार के चुनाव में वह 65 सीटों पर जीत के लक्ष्य को लेकर चुनाव मैदान में है. वहीं, कांग्रेस को उम्मीद है कि इस चुनाव में सत्ता परिवर्तन होगा और उसकी सरकार बनेगी. दूसरे चरण के मतदान में मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा किया है.

छत्तीसगढ़: अजीत जोगी बोले- बहुमत नहीं मिला तो BJP से मिला सकते हैं हाथ

राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और अन्य दलों के नेताओं ने अपनी पार्टी के पक्ष में प्रचार किया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेताओं ने अपने भाषणों में गांधी परिवार पर तीखे हमले किए तथा केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं को गिनाया.

राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर लगाया आरोप, कहा- राज्य में बुरी हालत में हैं किसान

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे और छत्तीसगढ़ में नान घोटाले को लेकर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री रमन सिंह को कठघरे में खड़ा किया. इसके साथ ही नेताओं ने किसानों के मुद्दे पर एक दूसरे पर हमला बोला. दूसरे चरण के मतदान में रमन मंत्रिमंडल के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर समेत अन्य मंत्रियों, कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव, पूर्व मुख्यंत्री अजीत जोगी और उनकी पत्नी रेणु जोगी समेत 1101 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य तय होगा.

राज्य में पिछले चुनावों में मुख्यत: भाजपा और कांग्रेस के मध्य ही मुकाबला होता रहा है. लेकिन इस बार के चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के कारण कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. दूसरे चरण में सबसे ज्यादा रायपुर शहर दक्षिण में 46 उम्मीदवार और सबसे कम बिंद्रानवागढ़ में छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

महासमुंद (छत्तीसगढ़)। कांग्रेस पर छत्तीसगढ़ के लोगों की आंखों में धूल झोंकने और झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि कांग्रेस के एक ही परिवार की चार पीढ़ियों ने देश पर शासन किया, जिसका उन्हें तो लाभ मिला लेकिन देश को कोई लाभ नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दे कर कहा, ‘‘ कांग्रेस छत्तीसगढ़ के भले लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है और झूठे वादे कर रही है।’’ 

उन्होंने सवाल किया कि जिन्होंने बैंकों को लूटा है और जिन्होंने लुटवाया है, क्या उनसे पाई-पाई लेना गुनाह है? मोदी ने कहा कि जो बैंकों को लूट कर देश छोड़ कर भाग गए हैं, दुनिया में कहीं भी उनकी संपत्ति हो, सरकार उसे जब्त करने का कानून लायी है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक में इन्होंने (कांग्रेस ने) कहा था कि किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर देंगे। इनकी सरकार को एक साल होने जा रहा है लेकिन वहां के अख़बार कथाएं छाप रहे हैं कि सैकड़ों की तादात में उन किसानों के नाम पर वारंट निकल रहे हैं, जिन पर कर्ज़ था।
 
मोदी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2008 में किसानों का रिण माफ करने की संप्रग सरकार की योजना से किसानों को नहीं, बल्कि ऐसे आठ फीसदी लोगों को फायदा हुआ जो इसके हकदार थे ही नहीं। राज्य में भाजपा को एक बार फिर जनादेश देने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रमन सिंह को सच्चे अर्थ में काम करने का मौका सिर्फ पिछले साढ़े चार साल में ही मिला क्योंकि इससे पहले दिल्ली में रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार बैठी थी।
 
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने छत्तीसगढ़ पर कोई ध्यान नहीं दिया। छत्तीसगढ़ को फलने फूलने का पहला अवसर तब आया जब दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी। मोदी ने कहा कि सीताराम केसरी एक दलित थे और कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्हें पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया बल्कि सोनिया गांधी के लिए रास्ता बनाने की खातिर उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि नकारात्मक माहौल के बाद भी लोगों के सहयोग से बीमारू राज्य कहलाने वाले छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों पर रमन सिंह ने लाकर खड़ा किया।
 
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को झूठे वादे करना, झूठ बोलना, फरेब करना और लोगों को गुमराह करने के अलावा कुछ आता नहीं है। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने किसान को ताकतवर बनाया और अब उनकी सरकार किसानों को आधुनिक खेती की ओर ले जा रही है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इन्होंने पचास साल तक झूठ बोलकर देश को गुमराह किया और अब इन्हें समझना चाहिए कि ‘देश की जनता ने 440 में से आपको 40 पर ला कर खड़ा कर दिया है।’
 

राफेल डील को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा पर वार करती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी है। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी राफेल डील को खास तौर पर मुद्दा बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी को बहस की चुनौती दी। राहुल गांधी ने कहा, "मैं मोदी जी को चैलेंज करता हूं कि कहीं भी, किसी भी जगह, किसी भी प्रदेश में मेरे साथ स्टेज पर आकर 15 मिनट के लिए राफेल पर डिबेट कर लें। 

 15 मिनट मुझे बोलने दें और 15 मिनट मोदी जी बोलें। राहुल ने आगे ये भी बताया कि वो किन मुद्दों पर पीएम से बहस करेंगे।  राहुल ने कहा मैं एचएएल के बारे में बोलूंगा, मैं जो फ्रांस के राष्ट्रपति ने बोला है उसके बारे में बोलूंगा।" "मैं बोलूंगा कि 526 करोड़ रुपये का हवाई जहाज नरेंद्र मोदी जी ने 1600 करोड़ रुपये में खरीदा। मैं बोलूंगा कि उन्होंने कोई भी प्रोसिजर फॉलो नहीं किया। मैं बोलूंगा कि रक्षामंत्री ने साफ कहा है कि ये डील मैंने नहीं प्रधानमंत्री ने की है। 


मैं बोलूंगा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने साफ बताया कि नरेंद्र मोदी ने बोला कि किसको कॉन्ट्रेक्ट मिलना चाहिए।" राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी ने किसानों के पास कालाधन होने की बात कहकर अन्नदाताओं का अपमान किया है। गांधी ने प्रधानमंत्री के इस कथित बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘क्या आपने माल्या, ‘मेहुल भाई’, नीरव मोदी को गेहूं उगाते देखा है? मोदीजी किसान का अपमान मत करिए।

  दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा पिछले पांच साल से विधायक हैं इसके पूर्व दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वर्तमान में सांसद के पद पर सुशोभित हैं लेकिन दुर्ग शहर के विकास में वोरा परिवार की कोई भूमिका नहीं दिखाई देता है। एक भी एैसा बड़ा विकास कार्य वोरा परिवार गिना दें जिसे वोरा परिवार नें दुर्ग में करवाया हो। कांग्रेस के पचास साल के शासन में दुर्ग शहर का कोई भी विकास नहींहो सका और यह सच्चाई है कि भाजपा शासनकाल में दुर्ग शहर में अभूतपूर्व विकास कार्य संपन्न हुए। तात्कालीन महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में तथा मंत्री हेमचंद यादव के समय बड़ी तेजी के साथ दुर्ग शहर का स्वरुप परिवर्तित हुआ। वर्तमान में वोरा परिवार के प्रत्याशी अरुण वोरा को जनता को बताना होगा कि उनके कार्यकाल में क्या क्या बड़े विकास कार्यों को उन्होने करवाया है या करवाने का प्रयास किया है। मोतीलाल वोरा चाहते तो पूर्व में ही दुर्ग का कायाकल्प करने की ताकत रखते थे परंतु उन्होनें दुर्ग के लिए तो दूर की बात छत्तीसगढ के लिए भी कुछ नहीं किया। छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद अजीत जोगी के शासन में युवा आयोग के अध्यक्ष रहते हुए भी अरुण नें कोई कार्य नहीं करवाया जिसे वे अपनी उपलब्धि बता सकें। दुर्ग में धमधानाका का पुल ही कांग्रेस की निशानी है। दुर्ग वायशेप ब्रिज, शिवनाथ पुल, दुर्ग की सड़कें, नालियां सभी विकास कार्य भाजपा और भाजपा विधायक, महापौर सांसद की देन है। कांग्रेस के प्रत्याशी दुर्ग में किस विकास कार्य के लिए वोट मांग रहे हैं समझ से परे है। विकास कार्य के लिए सोच की आवश्यकता होताी है जो वोरा परिवार में कहीं भी परिलक्षित नहीं होता है। अरुण वोरा के लिए बाबू जी के अलावा दुर्ग में कोई सहारा नहीं हैं। पिछले चुनाव में बाबूजी नें जनता के पास जाकर इज्जत बचा लेने की गुहार लगाई थी, हेमचंद यादव हारे फिर से इज्जत की खातिर बड़े नेता होने के बावजूद दुर्ग से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं एैसे में जनता कब तक एक वरिष्ठ नेता की इज्जत की खातिर अपने विकास को दांव पर लगाएगी? इधर अरुण वोरा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं जीतने की खुशी अभी से मना रहे हैं उन्हे जनता के बीच जाने की जरुरत है। जनता को नेता चाहिए किसी परिवार की इज्जत नहीं बचानी है लोग बोलना शुरु कर दिए हैं कि दुर्ग अब किसी पप्पू प्रत्याशी को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है जो बाबूजी की गोद में अभी भी पड़ा हुआ है बाबू जी से पूछे बगैर कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। पूरा चुनाव प्रचार में वोरा परिवार जुटा हुआ है। रायपुर से गोविंदलाल वोरा का परिवार चुनाव संचालन कर रहे हैं। जमीनी नेता असमंजस की स्थिति में हैं एैसे में जीत कैसे होगी। कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ अंडरकरंट यह है कि कांग्रेसियों का वोट भी जनता कांग्रेस जे के प्रत्याशी प्रताप मध्यानी के पक्ष में पड़ सकता है। भाजपा के कैडर वोट हैं जो दुर्ग में स्थायी है किसी का नुकसान हो रहा है तो वह हैं अरुण वोरा। त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा की हार होगी एैसा जनता जनार्दन का कहना है।

देश के लोकतंत्र ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि बुलेट पर बैलेट की चोट से करारा जबाव दिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ की पहले चरण के 18 विधानसभा सीटों में नक्सल प्रभावित सीटों पर जिस तरह से बहां के मतदाताओं ने निर्भिक होकर मुखरता से मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है वह निश्चित रुप से लोकतंत्र की विजय है। खासबात यह कि यह सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर की सीटों पर मतदाताओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी को पार कर गया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 70 प्रतिशत मतदान इसलिए मायने रखता है कि मतदाताओं की बेरुखी के चलते देश के कई सामान्य सीटों पर मतदान का प्रतिशत लगभग 70 फीसदी रह पाता है। सही मायने में देखा जाए तो इसका सारा श्रेय इस क्षेत्र के आम मतदाताओं को जाता है जिन्होंने नक्सलियों की लाख चेतावनियों को सीरे से खारिज कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि क्षेत्र का विकास अंशाति फैलाने से नहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी हुई सरकार के माध्यम से ही हो सकता है। चुनाव आयोग,सुरक्षा बलों और सरकार को भी इस मायने में धन्यवाद देना होगा कि लाख बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक मतदान संपन्न कराया गया।
 
दरअसल नक्सलियों ने इस बार अधिक भय का वातावरण बनाकर चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों पर लगातार हमलें किए गए वहीं लोगों को चुनाव में भाग लेने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनियां दी। नक्सली इस बार अधिक आक्रामक होकर चुनावों को प्रभावित करना चाहते थे। इन दिनों में सुरक्षा बलों पर अधिक हमलें हुए। मतदान करने वालों के हाथ जिस्म से अलग करने की चेतावनी दी गई। गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहने को कहा गया। सुरक्षाबलों पर लगातार हमलें इनकी रणनीति का हिस्सा था पर ना सुरक्षा बलों ने हार मानी और ना ही मतदाताओं ने। दरअसल देखा जाए तो आदिवासियों के रहनुमा बनने की दुहाई देने वाले नक्सलियों का असली चेहरा सामने आ चुका है। चुनावों से पहले नक्सलियों ने जबरदस्त भय का वातावरण बनाने के प्रयास किए। मतदान के दिन भी सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला कर भय का वातावरण बनाने की कोशिश की गई पर जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर बुलेट को बैलेट से करारा जबाव दिया है। देखा जाए तो क्षेत्रवासियों के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सली ही हो गए हैं। सड़क, शिक्षा−स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं क्षेत्र में नहीं पहुंचाने देना ही इनका मकसद रह गया। नक्सलियों किसी भी हालत में इस क्षेत्र में विकास नहीं देखना चाहते। इसका एक बड़ा कारण विकास आएगा तो इनकी दुकान उठ जाएगी रहा है। लोगों के यह बात समझ में आने लगी है। 
 
दरअसल लोकतंत्र की यह खूबी भी है और इसे सबसे बड़ी सफलता माना जाना चाहिए कि लोगों के समझ में आने लगा है कि उनका हित हिंसा का साथ देने में या हिंसक प्रवृतियों के आगे नतमस्तक होने में नहीं अपितु लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुनकर विधायिका में भेजकर विकास की गंगा का प्रवाह क्षेत्र में लाने में है। शिक्षा,स्वास्थ्य, सहज आवागमन के लिए सड़कों और आवागमन के साधनों की सहज उपलब्धता उन्हें मुख्य धारा से जोड़ सकती है। यह उनके समझ में आने लगा है यही कारण है कि भय और आतंक का माहौल होने के बावजूद लोगों में नक्सलियों का विरोध करने का साहस आया है। सुरक्षा बलों के साहस की भी सराहना करनी होगी कि नक्सलियों के दुर्दांत इरादों का बहादुरी से मुकाबला कर रहे हैं। लोगों में विश्वास जगाने में सफल रहे हैं। अब अगले चरण का मतदान 20 नवंबर को होने जा रहा है। आशा की जानी चाहिए कि छत्तीसगढ़ के मतदाता और अधिक मुखरता से 20 तारीख के मतदान में हिस्सा लेंगे। पहले चरण के खासतौर से नक्सल प्रभावित इलाकों के मतदान से सरकार और नक्सलियों के लिए भी साफ संदेश है। सरकार के लिए यह संदेश है कि लोग विकास में विश्वास रखते हैं, यही कारण है कि लाख चेतावनियों के बावजूद मतदान में हिस्सा लेकर मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं ऐसे में चुनावों के बाद किसी भी दल की सरकार बने उस सरकार की प्राथमिकता इस क्षेत्र के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार सहित क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने के कार्यों को प्राथमिकता देनी होगी वहीं नक्सलियों के लिए भी साफ संदेश है कि उन्हें भी हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र की मजबूती और क्षेत्र के नागरिकों तक आधारभूत सुविधाओं के साथ मुख्य धारा में लाने के कार्य में भागीदार बनना चाहिए। 
 
देखा जाए तो सुकमा हो या दंतेवाड़ा या बस्तर यहां के लोगों ने जिस तरह से घर से निकल कर मतदान केन्द्र आकर अपने मताधिकार के प्रयोग से साहस का परिचय दिया है वह काबिले तारीफ है। वहीं हिंसक ताकतों को साफ संदेश दिया गया है कि बुलेट का जबाव बैलेट से आसानी से दिया जा सकता है। बुलेट पर बैलेट से विजय पाई जा सकती है। यही हमारे लोकतंत्र की खूबी है और यही लोकतंत्र का सौंदर्य। 
 
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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