छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

राजनांदगांव। मामूली विवाद के बाद पिता को मौत के घाट उतारने वाले आरोपी पुत्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाघनदी क्षेत्र के ग्राम बंजारी की है। 21 दिसंबर को सेवाराम व उसके पुत्र तोरण पटेल के बीच किसी बाद को लेकर विवाद हो गया। विवाद के बाद पुत्र तोरण आवेश में आकर अपने पिता सेवाराम पर बासुला से दो ताबड़तोड़ वार कर दिया।

पुत्र के वार से पिता बुरी तरह से घायल हो गया था। उपचार के लिए उसके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया जा रहा था। इसीबीच सेवाराम ने दम तोड़ दिया। आरोप से बचने आरोपी पुत्र ने पूरे मामले को सड़क दुर्घटना में तब्दील कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच की।

जांच में पूरा माजरा समझ आ गया। पूछताछ के बाद आरोपी पुत्र ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस आरोपी पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा सत्र शुरू होने में सिर्फ 24 घंटे बाकी है, लेकिन भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं हो पाया है। छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब विधायकों की शपथ का कार्यक्रम तय होने के बाद भी नेता प्रतिपक्ष की घोषणा नहीं हो पाई है।

हाल यह है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अब तक पर्यवेक्षक तक की घोषणा नहीं की है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो मध्यप्रदेश और राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष के लिए पर्यवेक्षक की घोषणा होनी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक की घोषणा अटक गई है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से बताया कि पहले पर्यवेक्षक के नाम की घोषणा दिल्ली से होगी। जब पर्यवेक्षक यहां आएंगे तब ही नेता प्रतिपक्ष तय होंगे। ये प्रक्रिया कब तक होगी, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो पर्यवेक्षक नहीं आने के कारण विधायकों के शपथ के बाद भी नेता प्रतिपक्ष की घोषणा हो सकती है।

वर्ष 2013 में विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही कांग्रेस ने टीएस सिंहदेव को नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने के बाद गौरीशंकर अग्रवाल ने विधानसभा में भाषण दिया। इसके बाद टीएस सिंहदेव ने विधानसभा को संबोधित किया था। इस दौरान वे बंद गले का कोट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे।

रमन-बृजमोहन में फंसा पेच

नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बीच पेच फंस गया है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो करीब 11 विधायकों ने बृजमोहन अग्रवाल को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए केंद्रीय संगठन से सिफारिश की है। इसमें आदिवासी विधायक ननकीराम कंवर भी शामिल हैं। बृजमोहन अग्रवाल पार्टी विधायकों में सबसे वरिष्ठ हैं और लगातार चुनाव जीत रहे हैं। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व अगर आदिवासी नेता प्रतिपक्ष का प्रस्ताव देता है, तो बृजमोहन खेमा ननकीराम कंवर का समर्थन करेगा।

नेता प्रतिपक्ष के लिए क्या है नियम

विधानसभा सचिव चंद्रशेखर गंगराड़े ने बताया कि विधायकों के शपथ ग्रहण से पहले नेता प्रतिपक्ष की जानकारी देने का कोई प्रावधान नहीं है। विपक्ष के नेता की जब जानकारी दी जाती है, विधानसभा में उसकी सूचना जारी कर दी जाती है। विधानसभा अध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने के बाद नेता प्रतिपक्ष की जानकारी आवश्यक होती है। उन्होंने बताया कि चार जनवरी के बाद भी भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष की जानकारी दी जा सकती है।

रायपुर। पिछली भाजपा सरकार के समय लगातार लूप लाइन में रहे अपर मुख्य सचिव आईएएस केडीपी राव कि मंत्रालय वापसी हो गई है। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से केडीपी राव को रमन सरकार ने मंत्रालय से बाहर रखा था। इसके पीछे वजह थी कि केडीपी राव को कुछ साल पहले जब बिलासपुर कमिश्नर बनाया गया तो उन्होंने पदस्थापना को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद लगातार सरकार और केडीपी राव के बीच कश्मकश चलती रही। इस बीच उन्हें लगातार मंत्रालय से बाहर रखा गया।

 

विदित हो कि राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष केडीपी राव प्रमुख सचिव से प्रमोट होकर अप्रैल 2018 में अपर मुख्य सचिव बन गए। 1988 बैच के आईएएस केडीपी राव राज्य के छठवें अपर मुख्य सचिव होंगे। विवेक ढांड के रिटायरमेंट लेने के बाद अपर मुख्य सचिव का एक पद खाली हुआ था।

 

24 अप्रैल 2018 को मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव के पद के लिए डीपीसी हुई थी, जिसमें राव के नाम पर मुहर लगी थी। मुख्य सचिव अजय सिंह ने राव के प्रमोशन का आदेश जारी किया था। केडीपी राव एक तेजतर्रार ईमानदार अधिकारी हैं। वे छत्तीसगढ़ में छठवें अपर मुख्य सचिव हैं।

बिलासपुर कमिश्नर के पदस्थापना के बाद शुरू हुआ था विवाद

 

वर्ष 2014 केडीपी राव को बिलासपुर कमिश्नर बनाया गया था। उनका मानना था कि यह पद उनके अनुकूल नहीं है लिहाजा बहुत जद्दोजहद के बाद उन्होंने यहां जॉइनिंग दी थी, तब से वे पिछली सरकार के हिट लिस्ट में आ गए थे। केडीपी राव का कार्यकाल नवंबर 2019 तक है, लिहाजा अब उनकी मंत्रालय वापसी के बाद नई सरकार भी चर्चा में आ गई है।

कांग्रेस पार्टी की राज्य में सरकार आते ही बड़े फेरबदल का दौर जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव पद सहित आईपीएस स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुनील कुमार कुजूर को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। उन्हें अजय सिंह की जगह पर नियुक्त किया गया है।
 
बता दें कि अजय सिंह फरवरी 2020 में सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन 13 महीने पहले ही उन्हें पद से हटा दिया गया है। सिंह अब राजस्व मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष होंगे। वह राज्य के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं तथा जनवरी 2018 से राज्य के मुख्य सचिव के पद पर तैनात थे।

वहीं, कुजूर इस साल अक्तूबर में रिटायर होने वाले हैं, और गुरुवार को मुख्य सचिव का कामकाज संभाल रहे हैं। जबकि पिछले नौ महीने से अध्यक्ष राजस्व मंडल के रूप में काम कर रहे केडीपी राव की मंत्रालय में वापसी हो गई है। वे कृषि उत्पादन आयुक्त और एसीएस कृषि व जैव प्रौद्योगिकी होंगे।

कुजूर की छवि तेज तर्रार अफसरों जैसी

 
कुजूर की छवि तेज तर्रार अफसरों की है। माना जा रहा है लोकसभा चुनाव से पहले प्रशासन में कसावट लाने के लिए उनकी नियुक्ति की गई है। वे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर भी रह चुके हैं। कुजूर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा अपर मुख्य सचिव वाणिज्य एवं उद्योग तथा सार्वजनिक उपक्रम विभाग के पद पर तैनात थे।

अक्तूबर में सेवानिवृत्त हो रहे कुजूर को नई व महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। वे प्रदेश के पहले ट्राइबल नौकरशाह हैं जो इस पद पर पहुंचे हैं। राज्य में 32 फीसदी आदिवासी हैं। इससे पहले सरजियस मिंज और नारायण सिंह इस वर्ग के बड़े नौकरशाह थे, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने उन्हें अवसर नहीं दिया।
 
शिवराम प्रसाद कल्लूरी
शिवराम प्रसाद कल्लूरी

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का भी हुआ तबादला


छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य में बड़ी संख्या में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है। राज्य सरकार ने राज्य में पहले ही नए पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति कर दी है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के अध्यक्ष कोप्पाला दुर्गानंद प्रसाद राव को कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी के पद पर पदस्थ किया है। राज्य शासन ने वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन को अपर मुख्य सचिव वाणिज्य एवं उद्योग तथा सार्वजनिक उपक्रम विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है।
 

एसआरपी कल्लूरी की हुई वापसी


वहीं दूसरी तरफ सरकार ने छह आईपीएस अफसरों के भी तबादले किए हैं। बस्तर आईजी पद से हटाए जाने के बाद से पीएचक्यू (पुलिस हेड क्वार्टर) में आईजी ट्रेनिंग के पद पर कार्यरत एसआरपी कल्लूरी एक बार फिर मुख्यधारा में लौट आए हैं। उन्हें आईजी ईओडब्लू और एसीबी बनाया गया है।

इनके अलावा रायपुर आईजी डॉ. दीपांशु काबरा और दुर्ग आईजी जीपी सिंह के कार्यभार में बदलाव किया गया है, दोनों पीएचक्यू में रहेंगे। लेकिन इनके स्थान पर दो जूनियर अफसर डॉ. आनंद छाबड़ा (रायपुर रेंज) और रतनलाल डांगी (दुर्ग रेंज) को प्रभारी आईजी बनाया गया है। उल्लेखनीय यह है कि 6 माह पहले ही मंत्रालय से पीएचक्यू लौटे एडीजी अरुणदेव गौतम को एक बार फिर सचिव गृह, जेल एवं परिवहन बनाया गया है।

पाॅक्सो एक्ट के मामले थानों में दर्ज, लेकिन जारी किए गए आंकड़ों से गायब
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के वर्ष 2018 के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
भिलाई. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के जिले में हर तीसरे दिन दुष्कर्म होता है। वहीं लूट, हत्या और धोखाधड़ी के मामलों में 10 फीसदी इजाफा हुआ है। खुद पुलिस विभाग के आंकड़े इस बात को बयान कर रहे हैं। हालांकि यह आंकड़े पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के हैं, लेकिन अब बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं।
तीन साल में जिले में हत्या और लूट के आंकड़े बढ़े
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार जिले में हत्या, लूट, अपहरण, धोखाधड़ी और बलवा के मामले में वर्ष 2016 की तुलना में बढ़े हैं। वर्ष 2018 में 148 मामले दुष्कर्म के आए हैं। पाक्सो एक्ट के भी मामले आए हैं, लेकिन जारी रिकार्ड में शून्य बताया जा रहा है। वर्ष 2011 में आई एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक दुर्ग जिला पूरे देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामले में अव्वल हो गया था।
गोवा, हिमाचल और जम्मू में सुरक्षित हैं महिलाए
हमारे राज्य से बेहतर स्थिति और भी कई राज्यों में जहां महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित है। गोवा, हिमाचल प्रदेश जम्मू- कश्मीर, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, उत्तराखंड, दादर-हवेली जैसे राज्य है, जहां महिलाओं के साथ अपराध नहीं के बराबर है। यहां की महिलाओं को कई मामलों में सुकून है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां की महिलाएं सुरक्षित हैं।
मोहन नगर व कोतवाली थाने में दर्ज मामला
30 नवंबर को कोतवाली में पॉक्स एक्ट का मामला दर्ज हुआ। शंकर नगर निवासी 14 वर्षीय नाबालिग की दोस्ती महाराष्ट्र अकोला निवासी अनमोल कुशवाहा से हुई। 30 नवंबर को वह नाबालिग से मिलने उसके घर तक पहुंचा। आरोपी नाबालिग युवती के घर के आंगन में बात करते समय अश्लील हरकत की। इसका युवती ने विरोध किया। आरोपी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 27 दिसंबर को मासूम की मां की रिपोर्ट पर मोहन नगर पुलिस ने नाबालिग आरोपी के खिलाफ धारा 376, पॉक्सो की धारा 3, 4 के तहत अपराध दर्ज किया गया। 27 की सुबह सवा 11 बजे उरला निवासी महिला पति के साथ प्रेग्नेंसी चेकअप कराने जिला अस्पताल गई थी। इस दौरान बच्ची उसने बच्ची से अश्लील हकत की। बच्ची ने इसकी जानकारी मां को दी। तब उन्होंने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
कुल अपराध घटे, लेकिन संगीन अपराधोंं की संख्या बढ़ी
एडिशन एसपी सिटी विजय पांडेय ने बताया कि तीन साल में पहली दफा कुल आपराधिक आंकड़ों का ग्राफ कम हुआ है। लेकिन इसमें भी हत्या, अपहरण, लूट, नकबजनी, बलवा, खयानत जैसे गंभीर प्रकरणों की संख्या में करीब 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। दुष्कर्म के मामले भी सामने आए हैं।
10 साल में अपराध दोगुना
छत्तीसगढ़ में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की संख्या 10 साल में दोगुना हो गई। 2001 में पूरे राज्य में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की संख्या 3989 थी।2013 में 7012 तक पहुंचा। 2014 में अपराध की संख्या 6255 तक आई। 2015 में फिर एक बार 5720 मामले दर्ज किए।
52% महिलाएं होती हैं हिंसा की शिकार
इंटरनेशनल सेंटर पर रिसर्च ऑन वूमन की रिपोर्ट के मुताबिक 52 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी तरह हिंसा की शिकार होती है। 38 प्रतिशत महिलाओं पर कभी न कभी घसीटे जाने, पिटाई-थप्पड़ मारे जाने और जलाए जाने जैसी हिंसा होती है। त 34 प्रतिशत महिलाएं 15 से 19 वर्ष की उम्र में अपने पति या किसी साथी के हाथों हिंसा का शिकार होती हैं। दहेज मृत्यु, शील भंग, अनाचार के मामले बढ़े हैं।
7 साल पहले ज्यादा थे दुष्कर्म के मामले
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की साल 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पॉक्सो समेत महिला संबंधी अपराध छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में सबसे ज्यादा हुए। दिल्ली में प्रति एक लाख की आबादी में 208 बलात्कार हुए जबकि दुर्ग-भिलाई में ये औसत 507 का बताया गया। जिले के जामुल थाने में सबसे ज्यादा अनाचार के मामले दर्ज किए गए।
पाॅक्सो एक्ट के मामले हुए दर्ज
मोहन नगर थाना के टीआई राजेश बागड़े ने बताया कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ धारा 376, पॉक्सो की धारा 3, 4 के तहत अपराध दर्ज किया है। वहीं कोतवाली थाना की एसाई बेबी नंदा ने बताया कि घर के आंगन में नाबालिग से अश्लील हरकत अपराध दर्ज किया है।

रायगढ़. अगर आपके पास स्मार्ट फोन है और कोर्ट में आपका कोई केस चल रहा है, तो अपने केस की स्थिति आप घर बैठे जान सकेंगे। ई-कोर्ट एप के जरिए आप सुनवाई से संबंधित सारी जानकारी देख सकेंगे आपको कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। रायगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट डिजिटलाइजेशन के माध्यम से प्रकरणों की फाइलिंग करने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है।
एलसीडी के माध्यम से अधिवक्ताओं को बताया जाएगा केस का स्टेटस
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में मंगलवार को जिला जज रमाशंकर प्रसाद ने एलसीडी के माध्यम से कोर्ट के प्रकरणों के डिजिटलाइजेशन की शुरुआत की। जिसमें एलसीडी के जरिए अधिवक्ताओं को हर केस का स्टेटस बताया जाएगा एवं सारे प्रकरण एक साथ एलसीडी में दिखाई देंगे।
प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए न्यायालयीन प्रकरणों को बहुत पहले से ऑनलाइन कर दिया गया है, लेकिन हर व्यक्ति की पहुंच से दूर व कंप्यूटर का बेसिक नॉलेज नहीं होने से ग्रामीण लाभ नहीं ले पा रहे थे, इसलिए ई-कोर्ट सर्विसेस शुरू की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी बेरीवाल ने न्यायिक सेवा केंद्र के अतिरिक्त कक्ष का शुभारंभ किया।
एक क्लिक पर मिलेगी कॉपी
केंद्रीय पंजीयन शाखा में सभी प्रकरण की फाइलिंग एक ही खिड़की में लिया जाएगा जिसके लिए केस-इन्फार्मेशन सिस्टम (सीआईएस) के माध्यम से प्रकरणों की फाइलिंग होगी। इसके बाद रजिस्ट्रार के द्वारा प्रकरणों को कार्य विभाजन पत्रक के अनुसार भेजा जाएगा। कोई भी पक्षकार अपने प्रकरण की स्थिति को फाइलिंग नंबर अथवा पंजीयन नंबर के माध्यम से देख सकता है।
यदि किसी पक्षकार ने मोबाइल नंबर या इमेल एड्रेस दिया है तो एसएमएस या ई-मेल के द्वारा की उसके प्रकरण की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। पहले आवेदन करने के बाद नकल प्राप्त करने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब एक क्लिक से ऑर्डर की कापी प्राप्त होगी।
बार-बार कोर्ट नहीं आना पड़ेगा
केस के संबंध में पक्षकारों को बार-बार अधिवक्ता से पूछना नहीं पड़ेगा। आप अपने ई-कोर्ट एप पर जाकर केस में क्या तारीख लगी और किसलिए लगी, इसकी जानकारी मोबाइल पर ही मिल जाएगी। साथ ही फैसला कब होगा और अब तक केस में क्या हुआ जैसी जानकारी भी मिल जाएगी। इसके अलावा किस न्यायालय में एवं किससे संबंधित है की जानकारी एक ही क्लिक पर मिल जाएगी।
यदि कोई प्रकरण पेंडिंग है या उसका डिस्पोजल हो गया है तो उसकी भी जानकारी मिल जाएगी। न्यायिक सेवा केन्द्र में नि:शुल्क सेवा के लिए पैरालीगल वालिंटियर की ड्यूटी लगेगी। लोगों को जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

राजनांदगांव. शहर के गायत्री मंदिर के सामने फलाईओवर के नीचे सोमवार को फुटपाथ पर सो रही 5 साल की बच्ची से एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। आसपास के लोगों ने आरोपी को देखा तो शोर मचा दिया। इस पर वह भागने लगा। लोगों ने उसे पकड़कर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया। वहीं बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सोती हुई बच्ची को उठाकर ले गया था आरोपी
काेतवाली थाना क्षेत्र में गायत्री मंदिर के सामने फ्लाइओवर के नीचे कचरा बीनने वालों का परिवार अपनी पांच साल की बच्ची के साथ रहता है। सोमवार तड़के करीब 4.30 बजे बच्ची के माता-पिता उसे सोता छोड़कर कचरा बीनने के लिए निकल गए। इसी दौरान शंकरपुर निवासी ओमप्रकाश साहू (35) पहुंचा और बच्ची को अकेले सोता देख उठाकर कुछ दूर ले आया। इसके बाद उसने बच्ची से दुष्कर्म किया। ओमप्रकाश की हरकत आसपास के लोगों ने देखी तो शोर मचा दिया। इस पर वह बच्ची को छोड़कर भागने लगा।तभी और भी लोग एकत्र हो गए और उन्होंने पीछा कर आरोपी को पकड़ लिया। वहीं कुछ दूर माैजूद बच्ची के परिजन भी मौके पर आ गए और कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी को उनके हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
घटना के बाद बच्ची की हालत देख उसे मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अत्याधिक खून बह जाने के कारण वहां पर बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। वारदात को लेकर लोगों में भी आक्रोश का माहौल है।

दंतेवाड़ा. आरक्षक बनने 10 सालों से इंतजार कर रहे नक्सल मोर्चो पर तैनात 42 सहायक आरक्षकों को नए साल में प्रमोशन मिला है। इनके उत्कृष्ट कार्य पर इन्हें सहायक आरक्षक से आरक्षक पद पर नियुक्ति दी गई है। नक्सलियों के खिलाफ लोहा लेने इन जवानों की भूमिका भी सबसे अहम रही है। अब तक ये केवल एक निश्चित मानदेय पर काम कर रहे थे। अब इन्हें तमाम सुविधाओं का फायदा मिलेगा।
इन जवानों व इनके परिजन का करीब 10 साल का इंतजार खत्म हो गया। एसपी डाॅ. अभिषेक पल्लव नए साल के पहले दिन इन्हें बैच लगाकर नियुक्ति देंगे व साल 2019 से अब ये आरक्षक के रूप में काम करेंगे। इस नियुक्ति पर जवानों में खुशी है। एसपी डाॅ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि सहायक आरक्षक रहते इन जवानों ने उत्कृष्ट कार्य किया है। 42 सहायक आरक्षकों को आरक्षक के पद पर नियुक्ति के आदेश जारी हुए हैं। इसके अलावा नक्सलियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन चलाने व उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों व अफसरों को भी इसके पहले आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला है। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने में डीआरजी के जवानों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। हर छोटे-बड़े ऑपरेशन में पूरी जांबाजी के साथ ये जवान नक्सलियों से लोहा लेते हैं। आउट ऑफ टर्न प्रमोशन में सबसे ज्यादा फायदा इन जवानों को ही मिला है। हाल के ढाई सालों में दंतेवाड़ा में बड़े एनकाउंटर्स हुए हैं। इसमें सबसे बड़ी भूमिका डीआरजी के जवानों व अफसरों की रही। बताया जा रहा है 10 से ज्यादा जांबाज जवानों व अफसरों के नाम पुलिस मुख्यालय भेजे गए हैं। जिन्हें प्रमोशन की मुहर लगनी अभी बाकी है।

अकलतरा . ग्राम झलमला स्थित शासकीय प्राइमरी स्कूल टांडपारा में पदस्थ शिक्षक गजाधर सिंह मरकाम को शराब पीकर स्कूल आने और आए दिन अनुपस्थित रहने की शिकायत शाला प्रबंधन एवं विकास समिति समेत अभिभावकों ने कलेक्टर व डीईओ से की थी।
शिकायत मिलने पर डीईओ ने मामले की जांच कराई थी, जिसमें जांच टीम ने शिकायत सही पाई थी। जिस पर शिक्षक गजाधर सिंह मरकाम को शासकीय प्राथमिक शाला झिरिया अटैच कर दिया था। अटैच के बाद टांडपारा स्कूल में दो शिक्षक होने और पहली से पांचवीं तक 94 विद्यार्थी होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
ऐसे में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने कलेक्टर एवं डीईओ से अधिकारी एक शिक्षक की मांग की थी। जिस पर अकलतरा बीईओ सीके धृतलहरे द्वारा शिक्षक गजाधर सिंह मरकाम को टांडपारा में पुन: पदभार ग्रहण करने आदेश जारी कर दिया। शुक्रवार की सुबह शिक्षक गजाधर सिंह जब चार्ज लेने स्कूल पहुंचे तो छात्र-छात्राएं आक्रोशित हो गए।
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने पहले इसका विरोध किया। इसके बाद स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राएं भी मुख्य गेट के सामने जमीन पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के अध्यक्ष राजेश नायक एवं उपाध्यक्ष भारती नायक ने बताया कि शाला में पूर्व में पदस्थ शिक्षक गजाधर सिंह मरकाम को शिकायत के आधार पर हटाया गया था।
फिर से उसी शिक्षक की यहां पोस्टिंग कर दी गई। यह गलत है, इसी का विरोध किया गया। आदेश में सुधार नहीं हुआ तो आगे स्कूल का संचालन नहीं होने देंगे।

रंगदारी की शिकायतों से गिरती पुलिस की साख बचाने की कवायद
क्राइम ब्रांच में भष्टाचार बढ़ने से डीजीपी अवस्थी ने दिया निर्देश
बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले में क्राइम ब्रांच का गठन नहीं किया गया था।
अफसरों-जवानों में से कुछ जिलों में लौटाए गए कुछ को लाइन में भेज दिया गया है
रायपुर . प्रदेश के 24 जिलों में क्राइम ब्रांच और स्पेशल इंटेलिजेंस सेल (एसआईयू) को भंग कर दिया गया है। स्वतंत्र ईकाई रूप में काम करने वाली इन दोनों शाखाओं को भंग करने का आदेश शुक्रवार को डीजीपी डीएम अवस्थी ने जारी किया। क्राइम ब्रांच और एसआईयू में काम कर रहे कुछ कर्मियों की सेवाएं जिलों में लौटा दी गई हैं कुछ तो लाइन में भेज दिया गया है।
आदेश के बाद पुलिस महकमे में खलबली है। चर्चा है कि क्राइम ब्रांच के अधिकांश अफसर वसूली, रंगदारी और कुछ अफसरों का मातहत बनकर काम करने में लगे थे। इससे पुलिस की साख लगातार गिर रही थी, जिसे बचाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के अलावा क्राइम ब्रांच राज्य के करीब हर जिले में काम कर रही थी। बस्तर में केवल बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले को छोड़कर बाकी जिलों में क्राइम ब्रांच का गठन किया गया था।
अपराध नियंत्रण के लिए हुआ था क्राइम ब्रांच का गठन, वो झूठा फंसाने की धमकी देने लगे
अपराध नियंत्रण के लिए इसका गठन जिले में किया जाता था। टीम में 70 से 80 कर्मी होते थे। क्राइम ब्रांच के लिए शासन स्तर पर कोई अलग से नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया था। रेंज के आईजी और पुलिस अधीक्षक सुविधानुसार टीम बनाते थे। थानों से कर्मी चुनकर अटैच किए जाते थे।
कई जगह क्राइम ब्रांच ने वसूली शुरू कर दी थी। झूठे आरोप में फंसाकर जेल भेजने की धमकी भी दी जाती थी। अफसर ट्रांसफर होने पर साथ में चहेतों को भी ले जाते थे और क्राइम ब्रांच में पदस्थ करते थे, जो एजेंट के रूप में काम काम करते थे।
एसआईयू ने जमीन विवादे सुलझाने के बजाय की ब्लैकमेलिंग, सेटलमेंट का दबाव बनाया
एसआईयू | थानों में जमीन से जुड़े विवादों की शिकायतें सालों जांच के नाम पर लटकी रहती थीं, इस वजह से एसअाईयू का गठन किया गया था। लेकिन एसआईयू में जमीन के खास मामलों में जांच के बदले सेटलमेंट किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रहीं थीं।
एसआईयू में मामला आते ही सैटलमेंट करने के लिए मजबूर किया जाता था। कई शिकायतें में लोगों ने परिवार के सदस्यों को भी परेशान करने और ब्लैकमेल करने की बात कही। सौदेबाजी करने पर ही छोड़ा जाता था।
अब सभी मामलों की जांच थानास्तर पर ही होगी
24 घंटे के अंदर सभी आईजी और एसपी को कंप्लायंस रिपोर्ट देनी होगी। अब सभी मामलों की जांच थाने के स्तर पर ही करवाई जाएगी। इसके लिए जरूरी पड़ने पर थानों में ही अलग-अलग विंग बनाकर उनके स्तर पर काम का बंटवारा किया जाएगा। - डीएम अवस्थी, डीजीपी

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