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नयी दिल्ली। कमजोर वैश्विक रुख और स्थानीय आभूषण निर्माताओं की मांग में गिरावट के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते सप्ताह सोने का भाव 820 रुपए गिरकर 33,770 रुपए प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं के कम उठाव के कारण बीते सप्ताह के दौरान चांदी की कीमत में भी गिरावट आई और यह 40,000 रुपये के नीचे चला गया। अमेरिकी सरकारी खजाने की आय बढ़ने, चौथी तिमाही के बेहतर अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े आने से डॉलर के 10 सप्ताह के उच्च स्तर तक मजबूत होने के कारण विदेशी सर्राफा बाजार में कमजोरी के रुख के अनुरूप स्थानीय कारोबारी धारणा में मंदी का रुख रहा।

दुनिया भर के शेयर बाजारों में मजबूत रुख से भी घरेलू सर्राफा बाजार की धारणा प्रभावित हुई। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में हाजिर सोना सप्ताह के अंत में 1,293.90 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जो 28 जनवरी के बाद इसका न्यूनतम स्तर है। चांदी भी गिरावट के साथ 15.29 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय आभूषण विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं की मांग में भारी गिरावट से भी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ा।
 
दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 34,590 रुपये प्रति दस ग्राम पर स्थिरता के रुख के साथ खुलने के बाद विदेशों में मंदी के रुख तथा स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की सुस्त होती मांग के अनुरूप आगे कमजोर होता गया तथा सप्ताहांत में यह 820 रुपये की भारी गिरावट के साथ 33,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सोना 99.5 प्रतिशत शुद्धता भी इसी तरह सप्ताहांत में 840 रुपये की गिरावट के साथ 32,600 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ। गिन्नी भी कुछ कमजोर होकर सप्ताहांत में 100 रुपये की हानि के साथ 26,500 रुपये प्रति 8 ग्राम पर बंद हुई।


बैंकाक। क्रिकेट को हांगझू एशियाई खेल 2022 के खेल कार्यक्रम में शामिल किया गया है जिससे इस खेल की इन महाद्वीपीय खेलों में वापसी हो सकती है। यह फैसला एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) की यहां हुई आम सभा में लिया गया। ओसीए के मानद उपाध्यक्ष रणधीर सिंह ने कहा, ‘‘ हां, क्रिकेट को हांगझू एशियाई खेल 2022 के खेल कार्यक्रम में शामिल किया गया है।’’ रविवार को मीडिया में आई खबरों में यह जानकारी दी गई। ‘इनसाइडदगेम्स.बिज’ खेल वेबसाइट के अनुसार एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) की आम सभा की बैठक में यह फैसला किया गया।क्रिकेट को 2010 और 2014 एशियाई खेलों में जगह मिली थी लेकिन इंडोनेशिया में 2018 में हुए खेलों से इसे हटा दिया गया। भारत इससे पहले टीम के व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देकर इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता से बाहर रह चुका है।

 
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने क्रिकेट को एशियाई खेलों में शामिल करने का ओसीए के फैसले का स्वागत किया। इस बैठक में शामिल रहे आईओए के महासचिव राजीव मेहता ने कहा, ‘‘ हम ओसीए के फैसले का स्वागत करते हैं। किक्रेट का कौन सा प्रारूप खेला जाएगा यह तय नहीं है लेकिन यह स्वागत योग्य कदम है।’’ उन्होंने कहा कि आईओए चाहेगा की इस प्रतियोगिता में भारतीय क्रिकेट टीम भाग ले। मेहता ने कहा, ‘‘ आईओए बीसीसीआई से 2022 एशियाई खेलों में क्रिकेट की एक टीम भेजने का अनुरोध करेगा। भारत पुरुष और महिला दोनों वर्गों में जीत सकता है और तालिका में अपने पदकों की संख्या को बढ़ा सकता है।’’ पूरी संभावना है कि अगर क्रिकेट को जगह मिलती है तो 2010 में ग्वांग्झू और 2014 में इंचियोन खेलों की तरह 2022 में भी टी20 प्रारूप को ही शामिल किया जाएगा।
 
एशियाई खेलों के अगले टूर्नामेंट के आयोजन में अब भी काफी समय है और ऐसे में भारतीय टीम के प्रतिनिधित्व पर चर्चा करने के लिए बीसीसीआई को काफी समय मिलेगा।बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘2022 एशियाई खेलों के लिए अभी काफी समय है। समय आने पर हम चर्चा करेंगे और फैसला लेंगे।’’ क्रिकेट को 2022 खेलों में जगह देना उम्मीद के मुताबिक है क्योंकि ओसीए के मानद उपाध्यक्ष रणधीर सिंह ने उपयुक्त स्थल चुनने के लिए पिछले महीने हांगझू का दौरा किया था। श्रीलंका और पाकिस्तान ने 2014 में क्रमश: पुरुष और महिला वर्ग में स्वर्ण पदक जीते थे जबकि 2010 में बांग्लादेश और पाकिस्तान ने बाजी मारी थी। राष्ट्रमंडल खेल 1998 में भी क्रिकेट को शामिल किया गया था और तब भारत ने भी अपनी टीम भेजी थी।
हमारी वायु सेना के विंग कमांडर पायलट अभिनंदन की सकुशल वापसी पर कौन भारतीय प्रसन्न नहीं होगा? यह हमारा वह बहादुर पायलट है, जिसने अपनी जान की परवाह नहीं की और जिसने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर उसके एफ-16 युद्ध विमान को नष्ट कर दिया। अभिनंदन को सुरक्षित भारत लौटाना पाकिस्तान की जिम्मेदारी थी। किसी भी राष्ट्र पर यह जिम्मेदारी आती है, वियना अभिसमय पर दस्तखत करने की वजह से। पाकिस्तान यों तो इस अंतरराष्ट्रीय कानून का हस्ताक्षरकर्ता है लेकिन उसने इस कानून को प्रायः तोड़कर ही इसका पालन किया है। उसने भारत के दर्जनों सैनिकों को पकड़े जाने के बाद भारत के हवाले करने के बदले सिर काटने का काम किया है जबकि इस अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए भारत ने 1971 में 90 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों को सुरक्षित लौटाया है। 
अब पाकिस्तान ने अभिनंदन को लौटाया है तो यह कोई बहुत बड़ा अजूबा नहीं है। 1999 में नवाज़ शरीफ ने हमारे पायलट नचिकेता को भी लौटाया था लेकिन इस बार प्रधानमंत्री इमरान खान ने अभिनंदन को लौटाने के पहले सौदेबाजी करने की कोशिश की। वे चाहते थे कि अभिनंदन को लौटाने के बदले भारत बातचीत शुरू करे लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस सौदेबाजी में नहीं उलझेगी। इमरान चाहते तो सारा मामला काफी तूल पकड़ सकता था लेकिन उन्होंने मोदी के राजनीतिक चौके पर कूटनीतिक छक्का मार दिया। उन्होंने अभिनंदन को बिना किसी शर्त छोड़ने की घोषणा कर दी। पाकिस्तानी संसद में इस घोषणा पर जिस तरह तालियां बजीं और पाकिस्तानी नेताओं के चेहरे पर जैसी मुस्कराहट फैल गई, उसी से आप अंदाज लगा सकते हैं कि पाकिस्तानी क्या समझ रहे थे। वे हारी हुई बाजी जीत लेने का अहसास करवा रहे थे। 
 
इसमें शक नहीं कि इमरान के इस कूटनीतिक दांव को सारी दुनिया में सराहा जाएगा लेकिन यह न भूलें कि मोदी सरकार ने आतंकी अड्डों को उड़ाने की जो पहल की है, वह वैसी ही है, जैसी कि इस्राइल या अमेरिका करता है। वह पहल गैर-फौजी थी। याने भारतीय फौज ने न तो किसी पाकिस्तानी फौजी ठिकाने पर और न ही किसी शहर के नागरिकों पर हमला किया। उसका निशाना पाकिस्तान नहीं था। उसके आतंकी थे। लेकिन मोदी की इस पहल ने पाकिस्तान के रोंगटे खड़े कर दिए। मोदी ने जैसी पहल की, वैसी आज तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने नहीं की।
 
पाकिस्तान को दूर-दूर तक यह आशंका भी नहीं थी कि भारत अचानक ऐसा हमला कर सकता है। ऐसा हमला भारत ने तब भी नहीं किया, जबकि उसके संसद पर आतंकी आक्रमण हुआ था या मुंबई में बेकसूर लोग आतंकी वारदात में मारे गए थे। इसीलिए पाकिस्तान के प्रवक्ता यह प्रचार कर रहे कि भारतीय जहाजों को सिर्फ तीन मिनिट में ही उन्होंने मार भगाया। बाद में उन्होंने और उनके कहने पर अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने भी भारत के इस दावे को मनगढ़ंत बताया कि उसके जहाजों ने बालाकोट में 300 आतंकियों को मार गिराया है। पाकिस्तानी प्रवक्ता का कहना था कि बालाकोट में सिर्फ एक आदमी मारा गया। भारतीय जहाज हड़बड़ी में लौटते हुए अपने एक हजार किलो के बम जंगल में गिरा गए।
 
यदि सचमुच ऐसा ही होता तो सारे पाकिस्तान में शर्म-शर्म के नारे क्यों लग रहे थे? ‘भारत से बदला लो’ की चीख-चिल्लाहट क्यों हो रही थी ? यदि भारत के दावे फर्जी थे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दूसरे देशों के नेताओं को फोन क्यों कर रहे थे ? अपनी फौज को आक्रामक मुद्रा में क्यों ला रहे थे? जाहिर है कि हमारे इस गैर-फौजी हमले ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। भारत और पाकिस्तान, दोनों की तरफ से बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे थे। दोनों देशों की जनता असमंजस में पड़ी हुई थी। टीवी चैनलों पर दोनों देशों के सेवा-निवृत्त फौजी और पत्रकार लोग अपनी-अपनी जनता को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। यदि भारत के इस हमले से पाकिस्तान का कोई नुकसान नहीं हुआ तो उसे इतने भड़कने की जरूरत क्या थी ? 
लेकिन इमरान खान यदि बढ़-चढ़कर भाषण नहीं देते तो पाकिस्तान में उनकी छवि चूर-चूर हो जाती। यह तो मानना पड़ेगा कि इमरान के वक्तव्य बड़े सधे हुए थे और उनमें काफी संजीदगी भी थी। हर बार वे शांति की अपील कर रहे थे और पुलवामा-कांड से पाकिस्तान के जुड़े होने के प्रमाण मांग रहे थे लेकिन हम यह न भूलें कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय जनमत भी बड़ा कारण था। पाकिस्तान के सभी सही और गलत कामों के दो बड़े समर्थक रहे हैं। अमेरिका और चीन। इस बार अमेरिका ने पाकिस्तान का बिल्कुल साथ नहीं दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इशारा दे दिया था कि पाकिस्तान इस बार अकड़ेगा नहीं। चीन ने भी सुरक्षा परिषद के भारत-समर्थक बयान पर दस्तखत कर दिए थे, हालांकि उसका विदेश मंत्रालय पाकिस्तान-समर्थक बयान जारी करता रहा। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब सुरक्षा परषिद में मसूद अहजर और उसके संगठन जैश-ए-मुहम्मद को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी काली सूची में डालने का प्रस्ताव ला रहे हैं।
 
दूसरे शब्दों में असली मुद्दा यह नहीं है कि हमने पाकिस्तान के कितने जहाज गिराए और पाकिस्तान ने हमारे कितने हेलिकॉप्टर गिराए। असली मुद्दा है- आतंकवाद का। पाकिस्तान को अब यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा कि आतंकवाद को वह भारत के विरुद्ध एक हथियार की तरह इस्तेमाल करना बंद करेगा या नहीं ? इस हमले ने पाकिस्तान और दुनिया को यह बता दिया है कि भारत परमाणु ब्लैकमेल से डरने वाला नहीं है। यह शायद दुनिया की ऐसी पहली घटना है जबकि एक परमाणु सम्पन्न राष्ट्र ने एक दूसरे परमाणु संपन्न राष्ट्र के आतंकी ठिकानों पर हमला किया है। 
 
इमरान खान के वार्ता के प्रस्ताव को भारत ठुकराए, यह ठीक नहीं है लेकिन इमरान पहले यह बताए कि वे बात किस मुद्दे पर करना चाहते हैं ? चार-पांच दिन पहले मैंने कुछ पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर बोलते हुए कहा था कि इमरान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर सीधे बात करना चाहिए और उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए कि भारत और पाक मिलकर दहशतगर्दी के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ेंगे। मुझे खुशी है कि इमरान ने मोदी को फोन भी किया लेकिन शांति की हवाई बात करने से क्या फायदा है ? अभिनंदन को छोड़ दिया, यह अच्छा किया लेकिन क्या यही असली मुद्दा रहा है, दोनों देशों के बीच! उनकी शांति की अपील में कितनी सच्चाई है, यह दिखाने के लिए भी तो इमरान को कोई ठोस कदम उठाना था। यदि वे दो-चार आतंकवादी सरगनाओं को पकड़ कर तुरंत अंदर कर देते या भारत को सौंप देते तो माना जाता कि उन्होंने कुछ ठोस कदम उठाए हैं।
वास्तव में आतंकवाद के कारण पाकिस्तान की परेशानी भारत से कहीं ज्यादा है। सारी दुनिया में पाकिस्तान अपने आतंकवाद के कारण बदनाम हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन ने भी उसे काली सूची में डालने की चेतावनी दे दी है। पाकिस्तानी जनता आतंकी गतिविधियों के कारण बहुत त्रस्त है। दुनिया में पाकिस्तान अब आतंकवाद के कारण ‘गुंडा राज्य’ (रोग स्टेट) के नाम से जाना जाने लगा है। इमरान खान यदि ‘नया पाकिस्तान’ बनाना चाहते हैं तो उन्हें फौज को मनाना पड़ेगा कि वह आतंकियों का इस्तेमाल करना बंद करे। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपनी संक्षिप्त और सीमित सैन्य कार्रवाई से अपनी-अपनी जनता के सामने अपनी छवि सुरक्षित कर ली है लेकिन अब यह सही समय है, जबकि वे बातचीत के द्वार खोलें और आतंकवाद को इतिहास की कूड़ेदान के हवाले कर दें। अगर सार्थक बातचीत होगी तो कश्मीर समेत सभी समस्याओं का शांतिपूर्ण हल आसानी से निकल सकता है।
 
-डॉ. वेदप्रताप वैदिक
दिव्य कुम्भ, भव्य कुम्भ। प्रयागराज में मकर संक्रांति से शुरू हुआ कुम्भ मेला महाशिवरात्रि पर समाप्त हुआ। शिवरात्रि को आखिरी स्नान पर्व था और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पृथ्वी पर लगने वाला दुनिया का सबसे बड़ा मेला कुम्भ इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि इसकी भव्यता, गंगा की निर्मलता और साफ सफाई की पूरी दुनिया में चर्चा रही। कुम्भ मेले का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 दिसंबर 2018 को गंगा पूजन कर किया था। उसी दिन 450 साल बाद ऐतिहासिक अक्षयवट और सरस्वती कूप खोलने की भी घोषणा की गयी थी।
इस कुम्भ मेले में देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी पहुँचे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संगम में स्नान किया और गंगा आरती की। यही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार के तो सभी मंत्री एक साथ कुम्भ नहाने पहुँचे और साथ ही प्रदेश के इतिहास में पहली बार कैबिनेट की बैठक राजधानी लखनऊ के बाहर प्रयागराज में हुई। कुम्भ मेले ने उत्तर प्रदेश को तो बहुत कुछ दिया ही इस मेले के लिए खासतौर पर प्रयागराज को एअरपोर्ट और एक नया रेलवे स्टेशन भी मिला।

 

कुम्भ मेला इस कदर रौशनी में नहाया रहा कि दुनिया आश्चर्यचकित रह गयी। हर स्नान पर्व पर एक साथ ढाई से तीन करोड़ लोगों का आना और बिना किसी समस्या के स्नान पर्व का निपटना, बेहतरीन सुविधाओं वाली टैंट नगरी, विभिन्न अखाड़ों के शाही स्नान, उनकी पेशवाई और अखाड़ों की चहल-पहल तथा आचार्य महामंडलेश्वरों की शानौ शौकत, पंडालों में गूंजते वैदिक मंत्र और घंटे घड़ियाल, सुंदर झाकियों को देखने के लिए लगी लाइनें, नागा बाबाओं को हैरत से देखती भीड़, पहली बार लगे किन्नर अखाड़े में आचार्य महामंडलेश्वर से आशीर्वाद लेने के लिए लगी भक्तों की भीड़, हठयोगियों के हठ को आश्चर्य से देखते लोग, ठंड के बावजूद खुले आसमान के नीचे डेरा जमाए सुबह का इंतजार करते श्रद्धालु, घाटों पर साफ-सफाई और लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी, जल पुलिस की चौकस निगाहें, स्नान पर्वों पर स्नानार्थियों पर फूल बरसाते हेलीकॉप्टर, पुलिस और प्रशासन के लोगों का लखनवी अंदाज, हर पचास कदम पर कूड़ेदान की व्यवस्था, जगह-जगह बने शौचालय, अस्पताल, एटीएम, खोया पाया केंद्र आदि हर तरह की सुविधाओं वाला यह महाकुम्भ पर्व वर्षों तक याद रखा जायेगा।
 

 

इस कुम्भ में लोगों ने वह दृश्य भी देखा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद अक्षयवट की पूजा की। बाद में बड़े हनुमानजी के दर्शन किए और फिर कुम्भ में स्वच्छाग्रहियों के पैर धोए। इन्हीं सफाईकर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर कुम्भ में स्वच्छता की ऐसी मिसाल कायम की जो पहले कभी नहीं देखी गई। मोदी ने कुम्भ के दौरान स्वच्छाग्रहियों के पैर धोकर ना सिर्फ उनका आशीष ग्रहण किया बल्कि एक संदेश भी दिया। इस दौरान सफाई कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे थे जबकि मोदी नीचे एक पटरे पर बैठे थे। इसके अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी संगम तट पर पूजा-पाठ किया और गंगा आरती कर विश्व कल्याण की कामना की। राष्ट्रपति ने साधु-संतों से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति ने संगम नोज से ही महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा का बटन दबाकर अनावरण किया। राष्ट्रपति कोविंद कुम्भ में आने वाले देश के दूसरे राष्ट्रपति हैं। इससे पहले प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1953 में कुंभ मेला आए थे।
 
कुम्भ मेले में यात्रियों की निःशुल्क सेवा के लिए लगाई गईं 500 से अधिक शटल बसों ने गत सप्ताह एक साथ परेड कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पूर्व सबसे बड़े बेड़े का रिकॉर्ड अबु धाबी के नाम था जहां दिसंबर, 2010 में 390 बसों ने परेड कर रिकॉर्ड बनाया था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिनिर्णायक ऋषि नाथ ने बताया कि परेड के लिए 510 बसें लगाई गई थीं जिसमें सात बसें मानक के अनुरूप नहीं चल सकीं। 503 बसें मानक के अनुरूप चलीं।
 
कुम्भ मेला यहाँ हुई धर्म संसदों को लेकर सुर्खियों में भी रहा। क्योंकि जनवरी-फरवरी माह के दौरान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए साधु संतों ने जोरदार आंदोलन चलाया हुआ था। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की एक टिप्पणी- इस संगम में सभी नंगे हैं को लेकर भी भारी विवाद हुआ। लेकिन कुल मिलाकर देखा जाये तो पिछले कई आयोजनों से यह आयोजन बेहतरीन रहा। लगभग 45 किलोमीटर के दायरे में बसायी गयी कुम्भ नगरी में यदि दो माह में 25 करोड़ से ज्यादा लोग आयें और बिना किसी असुविधा के स्नान और पूजन करके जाएं तो यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ लोगों के आने से यहाँ के लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिला और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को जोरदार फायदा हुआ। रेल, विमान, यात्री बसों की सुविधाएं बेहतरीन रहीं। यही कारण रहा कि इस बार वाराणसी में हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन के बाद जब बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने कुम्भ में स्नान किया तो यहाँ की सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थके। खुद प्रभासाक्षी की टीम ने कुम्भ मेले में लंबा समय बिताया और गंगा मैय्या की जय के उद्घोष के बीच हर व्यक्ति चाहे वह साधु हो या श्रद्धालु, मोदी और योगी की तारीफों के पुल बांधते हुए दिखे। वाकई एक दिव्य और भव्य तथा श्रेष्ठ आयोजन के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को बधाई।
 
- नीरज कुमार दुबे

गाजा। इज़राइल के लड़ाकू विमानों ने गाज़ा पट्टी पर हमास के दो ठिकानों पर बमबारी की है। एक सुरक्षा सूत्र ने रविवार को यह जानकारी दी। हमास सुरक्षा सूत्र ने बताया कि ‘विस्फोटक उपकरण’ से लैस गुब्बारों को इज़राइली शहर की ओर भेजने की सेना की रिपोर्ट के बाद यह हमला किया गया। सूत्र के मुताबिक, गाज़ा पट्टी के अल बुरीज और राफेह में शनिवार देर शाम किए गए हमले में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। 

इज़राइली सेना ने एक बयान में बताया कि गाज़ा पट्टी से विस्फोटक उपकरण से लैस कई गुब्बारों को इज़राइली क्षेत्र की ओर भेजा गया था, जिसके बाद यह हमला किया गया। बयान में कहा गया, ‘‘ किसी के घायल होने या कोई नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।’’बुधवार शाम इज़राइल के लड़ाकू विमानों ने गाज़ा में कई ठिकानों को निशाना बनाया था क्योंकि फलस्तीन एंक्लेव से विस्फोटक गुब्बारे छोड़े गए थे जिसमें इज़राइल में एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया था।

मेठी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने एक संदेश में कहा है कि ‘क्लाश्निकोव असाउल्ट राइफल - 203’ तैयार करने वाला भारत और रूस का नया संयुक्त उद्यम छोटे हथियारों की भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जरूरतों को पूरा करेगा।  रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तर प्रदेश के अमेठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम के दौरान रूसी राष्ट्रपति का यह संदेश पढ़ा।  प्रधानमंत्री मोदी ने एके - 203 असाउल्ट राइफल के लिए यहां एक विनिर्माण इकाई का उदघाटन किया। 

 

 
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ‘एके - 203 राइफल’ उस इंसास राइफल की जगह लेगी, जिसका इस्तेमाल थल सेना और अन्य बल कर रहे हैं। इस इकाई में 7,00,000 एके - 203 राइफलें तैयार करने का शुरूआती लक्ष्य है। पुतिन ने अपने संदेश में कहा, ‘‘नया संयुक्त उद्यम नवीनत सीरिज की विश्व प्रसिद्ध क्लाश्निकोव असाउल्ट राइफलें तैयार करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह, भारतीय रक्षा उद्योग क्षेत्र के पास राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की इस श्रेणी के छोटे हथियारों की जरूरत पूरी करने का अवसर होगा जो अत्याधुनिक रूसी प्रौद्योगिकी पर आधारित होगा। ’’ 
 
उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच सैन्य एवं तकनीकी सहयोग परंपरागत रूप से विशेष रणनीतिक साझेदारी का एक अहम क्षेत्र रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘सात दशक से भी अधिक समय से हम विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता के शस्त्र एवं उपकरण भारतीय मित्रों को आपूर्ति कर रहे हैं। हमारे देश के सहयोग से भारत में 170 सैन्य एवं उद्योग इकाइयों की स्थापना की गई है।’’ गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में पुतिन की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत में क्लाश्निकोव तैयार करने के लिए मोदी के साथ उनकी सहमति बनी थी। 

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेठी में आयुध कारखाने का उद्घाटन किये जाने एक दिन बाद सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने झूठ बोला है क्योंकि वह अपने संसदीय क्षेत्र में आयुध कारखाने का उद्घाटन 2010 में ही कर चुके हैं।

 

 
गांधी ने ट्वीट कर कहा, 'अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का शिलान्यास 2010 में मैंने खुद किया था। पिछले कई सालों से वहां छोटे हथियारों का विनिर्माण चल रहा है।" उन्होंने आरोप लगाया, 'कल आप अमेठी गए और अपनी आदत से मजबूर होकर आपने फिर झूठ बोला। क्या आपको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती?"
 
 
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को अमेठी में आधुनिक क्लाशनिकोव-203 राइफलों के निर्माण के लिए बनी आयुध कारखाने का उद्घाटन किया था। इस मौके पर उन्होंने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि वह घूम-घूम कर मेड इन उज्जैन, मेड इन इंदौर और मेड इन जयपुर कहते हैं, लेकिन यह मोदी है, जिसने 'मेड इन अमेठी' को सच कर दिखाया है।
 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने भारत के साथ तनाव कम करने की कोशिश में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) सरगना मसूद अजहर पर कार्रवाई करने का फैसला किया है। मीडिया में आई एक खबर के अनुसार एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने रविवार को बताया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आतंकवादियों की सूची में अजहर को शामिल करने के प्रस्ताव पर अपने विरोध को वापस भी ले सकता है।  सूत्र ने बताया, ‘‘सरकार ने सैद्धांतिक रूप से जेईएम (अजहर) के नेतृत्व पर कार्रवाई करने का निर्णय किया है।’’ उन्होंने बताया कि जेईएम के खिलाफ देश में कार्रवाई ‘‘जल्द ही किसी भी समय’’ हो सकती है।

 

 
सूत्र ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की कोशिश में इमरान खान सरकार ने जेईएम के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। भारतीय पायलट को उसके देश भेजने के बाद तनाव कम करने की कोशिश में इमरान खान सरकार का यह अन्य महत्वपूर्ण कदम है।’’ अजहर के भविष्य पर एक सवाल के जवाब में आधिकारिक सूत्र ने बताया कि वह यह पुष्टि नहीं कर सकते कि उसे घर में नजरबंद किया जाएगा या हिरासत में लिया जाएगा। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा अधिकारी ने संकेत दिया कि पाकिस्तान जैश प्रमुख को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित कराने के प्रस्ताव पर अपने विरोध को वापस ले सकता है।
 
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान अब अजहर के खिलाफ सुरक्षा परिषद की कार्रवाई का और विरोध नहीं करेगा तो उन्होंने कहा, ‘‘देश को फैसला लेना होगा कि व्यक्ति महत्वपूर्ण है या देश का व्यापक राष्ट्रीय हित अहम है।’’  अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बुधवार को पाकिस्तान में रहने वाले अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नये सिरे से प्रस्ताव रखा था। ऐसा होने से अजहर के वैश्विक रूप से यात्रा करने पर पाबंदी लग जाएगी, उसकी संपत्तियां फ्रीज हो जाएंगी। सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध के बारे में निर्णय लेने वाली समिति 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त तीन स्थाई सदस्य देशों के ताजा प्रस्ताव पर 10 दिन के अंदर विचार करेगी।
 

पणजी। दिग्गज क्रिकेट सचिन तेंदुलकर ने रविवार को यहां कहा कि वह चाहते हैं कि भारत खेलों से प्यार करने वाले देश की जगह ऐसा देश बने जो खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले। दक्षिण गोवा जिले में एक कार्यक्रम में तेंदुलकर ने कहा, ‘‘ मैंने कई बार कहा है कि भारत खेलों से प्यार करने वाला देश है लेकिन खेल खेलने वाला नहीं। इसलिए मेरा लक्ष्य है कि भारत को खेल खेलने वाला देश बनाऊं।’’ 

 

 मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि जब बात स्वास्थ्य की हो तो इसमें हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे पता है, हम सब फिट दिखना चाहते हैं लेकिन आंकड़े ऐसा नहीं कहते है। इसमें सुधार की काफी गुंजाइश रहती है। मैं यही संदेश सभी को देना चाहता हूं।’’ बल्लेबाजी के रिकार्डो के इस खिलाड़ी ने कहा कि बच्चों के करियर के चयन के मामले में भी अभिभावकों में बदलाव आ रहा है।
 
 
उन्होंने कहा, ‘‘ अभिभावक अब खुले विचार के हो रहे हैं। आपके पास इतने सारे लोकप्रिय शेफ और पेशेवर नृतकों का उदाहरण है। भारत धीरे धीरे बदल रहा है।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘आज के दौर करियर का चुनाव सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि आप डॉक्टर बनना चाहते हैं या इंजीनियर।’’ 

संयुक्त राष्ट्र। फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा है कि परिषद का विस्तार इसके सुधार की दिशा का ‘‘पहला महत्वपूर्ण हिस्सा’’ है। फ्रांस ने मार्च महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली है। भारत लंबे समय से ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है और इस बात पर जोर देता रहा है कि वह परिषद का स्थायी सदस्य बनने का हकदार है।

 

 
पंद्रह सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य एवं वीटो शक्ति प्राप्त फ्रांस ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए पिछले महीने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ परिषद में एक नया प्रस्ताव पेश किया था। परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत, जर्मनी और जापान के वास्ते अपने समर्थन को दोहराते हुए फ्रांस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के शक्तिशाली संगठन में स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार परिषद सुधार की दिशा में ‘‘पहला महत्वपूर्ण हिस्सा’’ है।
 
संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थानीय प्रतिनिधि फ्रांस्वा डेल्ट्रे ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान तथा अफ्रीका के न्यायसंगत प्रतिनिधित्व के साथ गैर-स्थायी और स्थायी दोनों श्रेणियों में सुरक्षा परिषद का विस्तार चाहते हैं तथा यह इसका पहला महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के राजदूत क्रिस्टोफर हेस्जेन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में डेल्ट्रे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सुधार की कुंजी 15 सदस्यीय परिषद के विस्तार, सहभागिता और नागरिक समाज के लिए खुलापन जैसे तीन क्षेत्रों के माध्यम से खुलती है। 

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