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5 नवंबर को एक दिन की विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के द्वार कड़े पहरे में खुले। न्यायालय के आदेश के बावजूद किसी महिला ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश नहीं की। लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के न्यायालय के आदेश के विरोध को गलत ठहराया जा रहा है। इनका कहना है कि कुछ समय पहले जब ट्रिपल तलाक के खिलाफ न्यायायल का आदेश आया था तब उस सम्प्रदाय के लोग भी मजहबी परंपरा के नाम पर कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे थे। लेकिन उस समय जो लोग ट्रिपल तलाक को उस सम्प्रदाय की एक कुप्रथा कहकर न्यायालय के आदेश का समर्थन कर रहे थे, आज जब बात उनकी एक धार्मिक परंपरा को खत्म करने की आई, तो ये लोग अपनी धार्मिक आस्था की दुहाई दे रहे हैं। अपने इस आचरण से ये लोग अपने दोहरे चरित्र का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए कुछ तथ्य।

1. अब यह प्रमाणित हो चुका है, मंदिर में वो ही औरतें प्रवेश करना चाहती हैं जिनकी भगवान अय्यप्पा में कोई आस्था ही नहीं है। जबकि जिन महिलाओं की अय्यप्पा में आस्था है, वे न तो खुद और न ही किसी और महिला को मंदिर में जाने देना चाहती हैं। इसका सबूत ताजा घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोन्स का वो बयान है जिसमें उन्होंने कहा है कि मंदिर में जो महिलाएं प्रवेश करना चाहती थीं वे कानून व्यवस्था में खलल डालने के इरादे से ऐसा करना चाहती थीं। एक मुस्लिम महिला जो मस्जिद तक नहीं जाती, एक ईसाई लड़की जो चर्च तक नहीं जाती।
 
2. ऐसी बातें सामने आ जाने के बाद, यह इन बुद्धिजीवियों के आत्ममंथन का विषय होना चाहिए कि कहीं ये लोग सनातन परम्पराओं को अंध विश्वास या कुरीतियाँ कह कर खारिज करने के कुत्सित षड्यंत्र का जाने अनजाने एक हिस्सा तो नहीं बन रहे? 

3. इन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि हिंदू धर्म एक मात्र ऐसा धर्म है जो नए विचारों को खुले दिल से स्वीकार करता है और अपने अनुयायी को अपने हिसाब से पूजा करने या न करने की आजादी भी देता है।
 
यह अतुल्य है क्योंकि कट्टर नहीं है,
यह कट्टर नहीं है क्योंकि यह उदार है,
यह उदार है क्योंकि यह समावेशी है,
यह समावेशी है क्योंकि यह जिज्ञासु है,
यह जिज्ञासु है क्योंकि यह विलक्षण है।

4. शायद इसलिए इसकी अनेकों शाखाएँ भी विकसित हुईं, सिख जैन बौद्ध वैष्णव आर्य समाज लिंगायत आदि।
 
5. अन्य पंथों के विपरीत जहाँ एक ईश्वरवादी सिद्धान्त पाया जाता है, और ईश्वर को भी सीमाओं में बांधकर उसको एक ही नाम से जाना जाता है और उसके एक ही रूप को पूजा भी जाता है, हिन्दू धर्म में एक ही ईश्वर को अनेक नामों से जाना भी जाता है और उसके अनेक रूपों को पूजा भी जाता है। खास बात यह है कि उस देवता का देवत्व हर रूप में अलग होता है। जैसे कृष्ण भगवान के बाल रूप को भी पूजा जाता है और उनके गोपियों के साथ उनकी रासलीला वाले रूप को भी पूजा जाता है। लेकिन इन रूपों से बिल्कुल विपरीत उनका कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान देते चक्रधारी रूप का भी वंदन भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में किया जाता है। इसी प्रकार माँ दुर्गा के भी अनेक रूपों की स्तुति की जाती है। हर रूप का अपना नाम अपनी पूजन पद्धति है और विशेष बात यह है, कि हर रूप में देवी की शक्तियां भिन्न हैं। जैसे नैना देवी मंदिर में उनके सती रूप की, कलिका मंदिर में काली रूप की, कन्याकुमारी मंदिर में कन्या रूप की तो कामाख्या मंदिर में उनके रजस्वला रूप की उपासना की जाती है।
 
6. यह बात सही है कि समय के साथ हिन्दू धर्म में कुछ कुरीतियाँ भी आईं जिनमें से कुछ को दूर किया गया जैसे सति प्रथा और कुछ अभी भी हैं जैसे बाल विवाह जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
 
7. लेकिन किसी परंपरा को खत्म करने से पहले इतना तो जान ही लेना चाहिये कि क्या वाकई में वो "कुप्रथा" ही है ?
 
8. यहां सबसे पहले तो यह विषय स्पष्ट होना आवश्यक है कि इस परंपरा का ट्रिपल तलाक से कोई मेल नहीं है क्योंकि जहाँ पति के मुख से निकले तीन शब्दों से एक औरत ना सिर्फ अकल्पनीय मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजरती थी, उसका शरीर भी एक जीती जागती जिंदा लाश बन जाता था क्योंकि यह कुप्रथा यहीं समाप्त नहीं होती थी। इसके बाद वो हलाला जैसी एक और कुप्रथा से गुजरने के लिए मजबूर की जाती थी। वहीं सबरीमाला मंदिर में एक खास आयु वर्ग के दौरान महिलाओं के मंदिर में न जाने देने से ना उसे कोई मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है और न ही किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट। इसलिए सर्वप्रथम तो जो लोग दोनों विषय मिला रहे हैं उनका मकसद शायद मूल विषय से लोगों का ध्यान भटकाना है।
 
9. इस विषय से जुड़ा एक और भ्रम जिसे दूर करना आवश्यक है, वो यह कि मासिक चक्र के दौरान हिन्दू धर्म में महिला को अछूत माना जाता है। यह एक दुष्प्रचार के अलावा कुछ और नहीं है क्योंकि अगर सनातन परंपरा में मासिक चक्र की अवस्था में स्त्री को "अछूत" माना जाता तो कामख्या देवी की पूजा नहीं की जाती।
 
10. अगर मासिक चक्र के दौरान महिला के शरीर की स्थिति को आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो इस समय स्त्री का शरीर विभिन्न क्रियाओं से गुजर रहा होता है। यह सिद्ध हो चुका है कि मासिक चक्र के दौरान महिलाओं की बीएमआर (BMR) लेकर हर शारिरिक क्रिया की चाल बदल जाती है। यहां तक कि उसका शारीरक तापमान भी इन दिनों सामान्य दिनों की अपेक्षा बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान उसके शरीर में होर्मोन के स्तर में उतार चड़ाव होता है। दूसरे शब्दों में इस अवस्था में महिला "अछूत' नहीं होती बल्कि कुछ विशेष शारिरिक और मानसिक क्रियाओँ से गुजर रही होती है। यह तो हम सभी मानते हैं कि हर वस्तु चाहे सजीव हो या निर्जीव, एक ऊर्जा विसर्जित करती है। इसी प्रकार मासिक चक्र की स्थिति में स्त्री एक अलग प्रकार की ऊर्जा का केंद्र बन जाती है। जिसे आधुनिक विज्ञान केवल तापमान का बढ़ना मानता है, वो दरअसल एक प्रकार की ऊर्जा की उत्पत्ति होती है। खास बात यह है कि किसी भी पवित्र स्थान में ऊर्जा का संचार ऊपर की दिशा में होता है, लेकिन मासिक चक्र की अवधि में स्त्री शरीर में ऊर्जा का प्रभाव नीचे की तरफ होता है (रक्तस्राव के कारण)।
 
अतः समझने वाला विषय यह है कि मासिक चक्र के दौरान मंदिर जैसे आध्यात्मिक एवं शक्तिशाली स्थान पर महिलाओं को न जाने देना "कुप्रथा" नहीं है, और ना ही उनके साथ भेदभाव बल्कि एक दृष्टिकोण अवश्य है जो शायद भविष्य में वैज्ञानिक भी सिद्ध हो जाए जैसे ॐ, योग और मंत्रों के उच्चारणों से होने वाले लाभों के आगे आज विश्व नतमस्तक है।
 
-डॉ. नीलम महेंद्र

जम्मू। भारत और पाकिस्तान के सैनिकों ने दिवाली की पूर्व संध्या पर मंगलवार को जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक दूसरे को मिठाइयां दी। उन्होंने एक दूसरों को त्योहार की शुभकामनाएं भी दीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर ने एक ट्वीट में कहा, "दिवाली के अवसर पर, विश्वास बहाली उपाय के तहत, भारतीय और पाकिस्तान सेनाओं ने छह नवंबर को पुंछ और मेंधर में मिठाइयों का आदान-प्रदान किया गया।" दोनों सेनाओं ने एक दूसरे को मिठाइयों के साथ शुभकामनाएं भी दी। 

इस बीच, एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, ‘‘फायर एंड फ्यूरी कोर’’ लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी ने दिवाली की पूर्व संध्या पर पश्चिमी लद्दाख के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में शून्य से कम तापमान में तैनात सैनिकों के साथ बातचीत की।प्रवक्ता ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दी। बाद में लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सैनिकों के साथ बातचीत की।
दीपावली हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्योहार है और इसे देश में ही नहीं अब तो विदेशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। रोशनी के इस त्योहार की छटा भारत के हर कोने में देखते ही बनती है। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है। इसलिए मां लक्ष्मी की आराधना में हर कोई काफी पहले से जुट जाता है। लक्ष्मी जी के स्वागत और उनको प्रसन्न करने के लिए दीपावली से काफी समय पहले ही लोग अपने घरों की पुताई सफाई करवाते हैं और घर पर विभिन्न प्रकार की रोशनी करते हैं ताकि मां लक्ष्मी उनके घर की ओर आकर्षित हो सकें और उनकी कृपा हासिल की जा सके।
 
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
 
इस वर्ष दीपावली पर माँ लक्ष्मी जी की पूजा का मुहूर्त 17 बजकर 57 मिनट से लेकर 19 बजकर 53 मिनट तक है और पूजा मुहूर्त की कुल अवधि 1 घंटा 55 मिनट की रहेगी। इसके अलावा महानिशिता काल 23 बजकर 38 मिनट से लेकर 24 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में माँ लक्ष्मी की पूजा से विशेष लाभ होना निश्चित है। इसके अलावा भी कई अन्य उपाय हैं जिनसे मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है। जरूरत है तो बस सच्चे मन से उनका ध्यान करने की। भक्त चाहे अमीर हो या गरीब, मां लक्ष्मी सब पर कृपा करती हैं।
 
दीपावली के दिन सामूहिक पूजन में भाग लेने के बाद यदि संभव हो तो रात्रि पूजन अवश्य करें। इसके लिए श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, कनक धारा श्री यंत्र और लक्ष्मी यंत्र को मंदिर में स्थापित कर पूजन करें। इस दौरान कमल गट्टे की माला लेकर 'ओम श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ओम महालक्ष्म्ये नमः' का जाप करें। इस मंत्र को जपने के दौरान यदि हवन में घी की आहुति भी डालें तो और अच्छा रहेगा।
 
पूजा की तैयारी ऐसे करें
 
घर की सफाई करके लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी में दीवारों को रंग कर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं। संध्या के समय विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाएं। लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखें। इसे मोली बांधें। इस पर मिट्टी के गणेशजी स्थापित करें। उसे रोली लगाएं। दो सामान्य दीपक और छह चौमुखे दीपक बनाएं तथा 26 छोटे दीपक रखें। इनमें तेल तथा बत्ती डालकर धूप आदि सहित पूजा करें। पूजा पहले पुरुष करें बाद में स्त्रियां। पूजा करने के बाद एक एक दीपक घर के कोनों पर जलाकर रखें। एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजन करें। अपनी इच्छानुसार घर की बहुओं को रुपए दें। लक्ष्मी पूजन रात के समय बारह बजे करना चाहिए। इस समय एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेश जी की जोड़ी रखें। समीप ही रुपए, सवासेर चावल, गुड़, केले, मूली, हरी ग्वार फली तथा पांच लड्डू रखकर सारी सामग्री सहित लक्ष्मी गणेश का पूजन करके लड्डुओं से भोग लगाओ। दीपकों का काजल सब स्त्री पुरुषों की आंखों में लगाना चाहिए। रात्रि जागरण करके गोपालसहस्त्र का पाठ करना चाहिए। इस दिन घर में बिल्ली आए तो उसे भगाना नहीं चाहिए। बड़ों के चरणों की वंदना करनी चाहिए। दुकान गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
 
रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरांत चूने अथवा गेरु में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल्ल, लोढ़ा तथा छाज (सूप) का तिलक काढ़ना चाहिए। दूसरे दिन चार बजे प्रातःकाल उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर कूड़े को दूर फेंकने के लिए ले जाते हुए कहते जाओ− लक्ष्मी आओ, दरिद्र जाओ। इसके बाद लक्ष्मी जी कथा सुनें।
 
माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु के पूजन की विधि
 
आचमन प्राणायाम करके संकल्प के अंत में− स्थिरलक्ष्मीप्राप्त्र्यथं श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्र्यथं सर्वारिष्टनिवृत्तिपूर्वकसर्वाभीष्टफलप्राप्त्र्यथम् आयुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धर्यथं व्यापारे लाभार्थं च गणपति नवग्रह कलशादि पूजनपूर्वकं श्रीमहाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती लेखनी कुबेरादीनां च पूजनं करिष्ये कहकर जल छोड़ें। इसके बाद गणपति, कलश और नवग्रह आदि का पूवोक्त विधि से पूजन करके महालक्ष्मी का पूजन करें।
 
कई लोग लक्ष्मी पूजन के समय सिर्फ उन्हीं की तस्वीर की पूजा करते हैं। मां लक्ष्मी अपने पति भगवान श्री विष्णु के बगैर कहीं नहीं रहतीं इसलिए उनकी तस्वीर अथवा मूर्ति के साथ भगवान श्री विष्णु की तस्वीर या मूर्ति होना भी आवश्यक है। इसके अलावा मां लक्ष्मी के साथ ही भगवान श्री गणेश की भी तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। तभी मां लक्ष्मी का वहां स्थायी वास होता है। इसके अलावा पूजन के समय वहां शालिग्राम, शंख, तुलसी और अनंत महायंत्र भी होना चाहिए। मां लक्ष्मी चूंकि समुद्र देवता की पुत्री हैं इसलिए पूजन के समय मंदिर में यदि कुबेर पात्र, मोती और शंख इत्यादि भी हों तो अच्छा रहेगा।
 
मां लक्ष्मी को कमल बेहद पसंद है। उनका एक नाम कमला भी है। मां लक्ष्मी को पूजन के समय कमल अर्पित किया जाए तो वह बेहद प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा कमल गट्टे की माला से उनका पूजन भी किया जाता है। कमल गट्टे की माला लेकर 'ओम श्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद मम गृहे आगच्छ आगच्छ महालक्ष्म्ये नम:' का जाप करें। नित्य यदि यह जाप करें तो और भी अच्छा एवं फलदायक होगा।
 
मान्यताएं
 
दीपावली पूजन के अलावा इस पर्व के बारे में कुछ मान्यताएं भी प्रचलित हैं जैसे कि हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि त्रेता युग में इस दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने समूची नगरी को दीपों के प्रकाश से जगमग कर जश्न मनाया था और इस तरह तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा।
 
इसके अलावा बौद्धों के प्राकृत जातक में दिवाली जैसे त्योहार का जिक्र है जिसका आयोजन कार्तिक महीने में किया जाता है। जैन लोग इसे महावीर स्वामी के निर्वाण से जोड़ते हैं। कहा जाता है कि करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की रात में पावा नगरी में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ। महावीर के निर्वाण की खबर सुनते ही सुर असुर मनुष्य नाग गंधर्व आदि बड़ी संख्या में एकत्र हुए। रात अंधेरी थी इसलिए देवों ने दीपकों से प्रकाश कर उत्सव मनाया और उसी दिन कार्तिक अमावस्या को प्रातः काल उनके शिष्य इंद्रमूर्ति गौतम को ज्ञान लक्ष्मी की प्राप्ति हुई। तभी से इस दिन दीपावली मनाई जाने लगी।
 
दीपावली के बारे में एक मान्यता यह भी है कि जब राजा बलि ने देवताओं के साथ लक्ष्मी जी को भी बंधक बना लिया तब भगवान विष्णु ने वामन रूप में इसी दिन उन्हें मुक्त कराया था। पुराणों में कहा गया है कि दीपावली लक्ष्मी के उचित उपार्जन और उचित उपयोग का संदेश लेकर आती है।
 
- शुभा दुबे
केदारनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीपावली के पर्व पर उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम पहुंचे और भगवान के दर्शन तथा पूजा—अर्चना की। मंदिर के कपाट बंद होने से दो दिन पूर्व मंदिर के दर्शन करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी के साथ उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्रे सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी मौजूद थे। मंदिर के अंदर करीब 10—15 मिनट पूजा करने के बाद मोदी ने मंदिर की परिक्रमा की और पिछले कुछ दिनों में धाम में हुई बर्फबारी से खूबसूरत हुए नजारे का भी दीदार किया। प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगायी गयी केदारनाथ की तस्वीरों का भी अवलोकन किया जिसमें वर्ष 2013 में आयी प्रलयंकारी भीषण आपदा से उजड़ गये क्षेत्र के पुनर्निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया था।
मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग 'आस्था पथ' के दोनों ओर खडे़ श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों का भी प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें दीपावली की शुभकामनायें भी दीं। मोदी ने केदारनाथ मंदिर के चारों तरफ घूम—घूम कर वहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों तथा व्यवस्था का भी जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने इसके अलावा धीमी गति से चल रहे एक विशेष वाहन में बैठकर मंदाकिनी नदी के किनारे केदारपुरी में पुनर्निर्माण परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया। आपदा में क्षतिग्रस्त होने के बाद पुनर्निर्मित उदक कुंड का भी उन्होंने अवलोकन किया।

विधायक बनते ही अक्सर नेताओं के पास गाड़ी बंगला, सुख-सुविधाएं मिलने लगती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में एक विधायक ऐसी भी हैं जो देश में सबसे कम कमाई करने वाले विधायकों की सूची में आती हैं। केराबाई मनहर को पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार उतारा था और उन्होंने कांग्रेस की दिग्गज नेता पद्मा मनहर को 15 हजार से भी ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी।

 

केराबाई सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनका परिवार बेहद सामान्य है, विधायक के रूप में मिलने वाली तनख्वाह ही उनकी आय का साधन है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, केराबाई की वार्षिक तनख्वाह पांच लाख 40 हजार रुपये हैं। केराबाई की वार्षिक आय राष्ट्रीय स्तर के औसत आय से भी कम है।

केराबाई के पिता शिक्षक थे, उनकी गांव में थोड़ी सी खेती है, जिससे आय नाममात्र की होती है, इसके अलावा कुछ मवेशी हैं। सारंगढ़ के ग्राम टेंगनापाली में परिवार के सदस्य रहते हैं। इस विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने केराबाई मनहर पर ही विश्वास जताया है वहीं दूसरी ओर पिछली शिकस्त को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने उनके खिलाफ उत्तरी जांगड़े को उतारा है।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 62 नक्सलियों ने 51 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। सभी नक्सलियों ने बस्तर के आईजी विवेकानंद सिन्हा और नारायणपुर के एसपी जीतेंद्र शुक्ला के सामने आत्मसमर्पण किया।

जानकारी के मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों ने कहा कि हमने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय खो दिया है, अब मुख्यधारा से जुड़कर काम करना चाहते हैं। बता दें राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों का नक्सलियों ने बहिष्कार किया है। विरोध करते हुए उन्होंने पर्चे फाड़े और बैनर लगाए।

वहीं ये भी कहा जा रहा है कि जिन दो ग्रामीणों को नक्सलियों ने बीजापुर के गंगालुर से अगवा किया था उनमें से एक की हत्या कर दी है। जबकि दूसरे ग्रामीण को मारपीट कर छोड़ दिया है। फिलहाल नक्सलियों ने ग्रामीणों के साथ ये सब किया है या नहीं, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है।

विरोध कर भाजपा को हटाने की बात कही
नक्सलियों ने विधानसभा चुनावों का विरोध करते हुए बीजापुर के भोपालपटनम ब्लॉक में पोस्टर लगाए। पोस्टरों में उन्होंने भाजपा को हटाने की बात कही है। इसके साथ ही नक्सलियों ने राजनीतिक प्रत्याशियों के पोस्टर पर क्रॉस का निशान भी लगाया है और कहा है कि जो भी वोट मांगने आए उसे मार भगाओ।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक उनकी संपत्ति में करीब सवा चार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। शिवराज द्वारा नाम निर्देशन पत्र में दिए गए आय-व्यय के ब्यौरा के अनुसार उनके पास 10 करोड़ 45 लाख 82 हजार 140 रुपए हैं। 

 

नामांकन पत्र में दी गई जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी साधना सिंह की संपत्ति शिवराज से दोगुनी है। साल 2013 में दिए गए चुनावी शपथपत्र के मुताबिक शिवराज के पास छह करोड़ 27 लाख 54 हजार 114 रुपए की संपत्ति थी। जिसमें इस बार सवा चार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। 

शिवराज की संपत्ति का ब्यौरा 

नगद राशि

शिवराज सिंह चौहान : 45 हजार

साधना सिंह : 40 हजार


बैंक एकाउंट का ब्यौरा

शिवराज सिंह चौहान

एसबीआई बैंक विदिशा- आठ लाख 36 हजार 819

एसबीआई बैंक भोपाल- पांच लाख 79 हजार 423

जिला सहकारी बैंक भोपाल- छ: लाख 10 हजार 532

साधना सिंह

एसबीआई विदिशा- नौ लाख 47 हजार 374

पीएनबी भोपाल- एक लाख 72 हजार 392


आवासीय

शिवराज सिंह चौहान : विदिशा में मकान है।

साधना सिंह : अरोरा कॉलोनी में फ्लैट है।


जमीन का ब्यौरा

शिवराज सिंह चौहान : 77 लाख रुपए

उनके पास जैत में 20 एकड़, बैस में साढ़े तीन लाख और डोलखेड़ी में ढाई एकड़ भूमि है।

साधना सिंह : तीन करोड़ 32 लाख रुपए

साधना सिंह के नाम से विदिशा में 32 एकड़ जमीन है।


वाहन

शिवराज सिंह चौहान के पास वाहन नहीं है।

साधना सिंह के नाम से डेढ़ लाख की एक एंबेसडर है।

 
अन्य

शिवराज सिंह चौहान

एक रिवाल्वर- 5500 रुपए
घरेलू सामान- दो लाख 50 हजार
 

कुल संपत्ति का ब्यौरा

शिवराज सिंह चौहान : तीन करोड़ 15 लाख 70 हजार 274 रुपए।

साधना सिंह : सात करोड़ 30 लाख 11 हजार 866 रुपए।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा के अंदर मचा संग्राम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम बाबूलाल गौर हर हाल में चुनाव लड़ने पर अड़े नजर आ रहे हैं। भाजपा ने अभी तक उनकी दावेदारी का एलान नहीं किया है, लेकिन आज उन्होंने नामांकन फॉर्म खरीद लिया। 

 बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर ने आज भोपाल में नामांकन फॉर्म खरीदा। बाबूलाल गौर गोविंदपुरा सीट से कृष्णा को टिकट दिलाना चाहते हैं। पिछले दिनों भाजपा ने 176 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया था लेकिन उसमें गोविंदपुरा सीट का नाम नहीं था। इस सीट को होल्ड पर रखा गया है। 


दरअसर, भाजपा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। वह अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह अपनी बहू कृष्णा गौर को गोविंदपुरा सीट पर लड़ाना चाहते हैं। गोविंदपुरा विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां से 88 साल के बाबूलाल गौर दशकों तक चुने जाते रहे हैं। 

इस सीट पर कई दावेदार हैं। हालांकि भाजपा ने अभी इसके लिए किसी का नाम फाइनल नहीं किया है। गौर ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ा था और वह इसी सीट से 10 बार विधायक बन चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था, अगर हमें टिकट नहीं मिला तो मैं और कृष्णा जी अलग-अलग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। 

 

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