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जगदलपुर (छत्तीसगढ़)।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में पिछले महीने नक्सली हमले में मारे गये दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू को शुक्रवार को श्रद्धांजलि दी और विपक्षी कांग्रेस पर ‘‘शहरी माओवादियों’’ को बचाने का आरोप लगाया।
दंतेवाड़ा जिले में 30 अक्टूबर को नक्सलियों के हमले में साहू और दो सुरक्षाकर्मी मारे गये थे। यह जिला राज्य की राजधानी रायपुर से करीब 450 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मोदी ने कहा, ‘‘दूरदर्शन के एक निर्दोष कैमरामैन अच्युतानंद साहू की माओवादियों ने हत्या कर दी, जो अपनी ड्यूटी कर रहे थे। वह बस्तर के लोगों के सपनों को समूचे देश के लोगों के साथ साझा कर रहे थे। इसमें उनकी क्या गलती थी?’’ प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ में यहां अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को विधानसभा के लिये पहले चरण का मतदान होगा।
 
उन्होंने कांग्रेस पर शहरी माओवादियों के समर्थन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गरीब आदिवासी युवाओं का जीवन बर्बाद किया। मोदी ने कहा, ‘‘हाल में हमारे बहादुर जवान भी माओवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए और कांग्रेस पार्टी के लिये ये माओवादी क्रांतिकारी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब बस्तर की जनता को कांग्रेस के इन नेताओं को हार का स्वाद चखाकर मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए, जो शहरी माओवादियों को तो बचाने की कोशिश करते हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को माओवादियों से मुक्त कराने की बात करते हैं।’’ नक्सलियों को ‘‘बुरी मानसिकता वाला दैत्य’’ बताते हुए मोदी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बस्तर क्षेत्र के विकास के लिये कुछ खास नहीं किया। नक्सलियों ने मतदाताओं को आगामी चुनाव का बहिष्कार करने को कहा है। 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिये 12 और 20 नवंबर को दो चरण में चुनाव होंगे। पहले चरण का चुनाव बस्तर क्षेत्र के 18 नक्सल प्रभावित विधानसभा क्षेत्रों में होगा। शेष 72 विधानसभा क्षेत्रों के लिये चुनाव 20 नवंबर को होंगे और मतगणना 11 दिसंबर को होगी।
नोटबंदी के दो वर्ष पूरे हो गये हैं। अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित बनाने की दिशा में सरकार द्वारा जो भी कदम उठाए गए उनमें नोटबंदी एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। सबसे पहले सरकार ने देश के बाहर काले धन पर निशाना साधा। संपत्ति धारकों को दंड कर के भुगतान पर उस पैसे को वापस लाने के लिए कहा गया। जो लोग ऐसा करने में असफल रहे हैं उन पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है। दूसरे देशों में मौजूद सभी बैंक अकाउंट्स और संपत्तियों का विवरण सरकार तक पहुंचा है, जिसके परिणामस्वरूप नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
 
तकनीकी का इस्तेमाल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों पर रिटर्न दाखिल करने और टैक्स बेस का विस्तार करने के लिए किया गया है। कमजोर वर्ग भी देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हों, यह सुनिश्चित करने की दिशा में वित्तीय समावेशन एक और महत्वपूर्ण कदम था। जन धन खातों के जरिए अधिक से अधिक लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुके हैं। आधार के जरिए सरकारी सहायता का प्रत्यक्ष और पूरा लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। जीएसटी के जरिए अप्रत्यक्ष करों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाना सुनिश्चित किया गया।
 
नकद की भूमिका
 
भारत नकदी के वर्चस्व वाली अर्थव्यवस्था थी। नकद लेन-देन में, लेने वाले और देने वाले का पता नहीं लगाया जा सकता। इसमें बैंकिंग प्रणाली की भूमिका पीछे छूट जाती है और साथ ही टैक्स सिस्टम भी बिगड़ता है। नोटबंदी ने नकद धारकों को सारा कैश बैंकों में जमा करने पर मजबूर किया। बैंकों में नकद जमा होने और किसने जमा किए, ये पता चलने के परिणामस्वरूप 17.42 लाख संदिग्ध खाता धारकों की पहचान हो सकी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंड कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बैंकों में ज्यादा धन जमा होने से बैंकों की ऋण देने की क्षमता में भी सुधार हुआ। आगे निवेश के लिए इस धन को म्यूचुअल फंड में बदल दिया गया। ये कैश भी औपचारिक प्रणाली का हिस्सा बन गया।
 
गलत तर्क
 
नोटबंदी की एक बे-तर्क आलोचना यह है कि लगभग पूरा नकद बैंकों में जमा हो गया है। नोटबंदी का उद्देश्य नकदी की जब्ती नहीं था। नोटबंदी का उद्देश्य था कैश को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल कराना और कैशधारकों को टैक्स सिस्टम में लाना। भारत को नकद से डिजिटल लेनदेन में स्थानांतरित करने के लिए सिस्टम में बदलाव की ज़रूरत है। इसका स्पष्ट रूप से उच्च कर राजस्व और उच्च कर आधार पर असर होगा।
 
डिजिटलीकरण पर प्रभाव
 
‘द यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस’ यानि एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) 2016 में लॉन्च किया गया था जिसके जरिए दो मोबाइल धारकों के बीच वास्तविक समय में भुगतान संभव है। इसके जरिए हुआ लेन-देन अक्टूबर 2016 के 0.5 अरब रुपयों से बढ़कर सितंबर 2018 में 598 अरब रुपये पहुंच गया। भारत इंटरफेस फॉर मनी यानि भीम (बीएचआईएम) एनपीसीई द्वारा विकसित किया गया एक ऐप है, जिसमें यूपीआई का उपयोग कर त्वरित भुगतान किया जाता है। इस समय करीब 1.25 करोड़ लोग लेनदेन के लिए भीम ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। भीम ऐप के जरिए लेनदेन सितंबर 2016 के 0.02 अरब रुपये से बढ़कर सितंबर 2018 में 70.6 अरब रुपये हो गया। जून 2017 में यूपीआई के जरिए हुए कुल लेनदेन में भीम ऐप की हिस्सेदारी लगभग 48% है।
 
रुपे कार्ड का उपयोग प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) और ई-कॉमर्स दोनों में किया जाता है। इसके जरिए प्वाइंट ऑफ सेल में नोटबंदी से पहले 8 अरब रुपयों का लेनदेन हुआ था वहीं सितंबर 2018 में यह बढ़कर 57.3 अरब रुपये हो गया और ई-कॉमर्स में ये आंकड़ा 3 अरब रुपयों से बढ़कर 27 अरब रुपये हो गया।
 
आज यूपीआई और रुपे कार्ड की स्वदेशी भुगतान प्रणाली के आगे वीजा और मास्टरकार्ड भारतीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी खो रहे हैं। डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से होने वाले भुगतान में यूपीआई और रूपे की हिस्सेदारी अब 65% तक पहुंच चुकी है।
 
प्रत्यक्ष करों पर प्रभाव
 
नोटबंदी का प्रभाव व्यक्तिगत इनकम टैक्स कलेक्शन पर भी देखा गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष 2018-19 (31-10-2018 तक) इनकम टैक्स कलेक्शन में 20.2% बढ़ोतरी देखी गई है। कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन भी 19.5% अधिक रहा। नोटबंदी से दो साल पहले जहां प्रत्यक्ष कर कलेक्शन में क्रमशः 6.6% और 9% की वृद्धि हुई, वहीं नोटबंदी के बाद के दो वर्षों- 2016-17 में 14.6% और 2017-18 में 18% की वृद्धि दर्ज हुई।
 
इसी तरह वर्ष 2017-18 में इनकम टैक्स रिटर्न 6.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25% अधिक है। इस साल, 31-10-2018 तक 5.99 करोड़ रुपये का रिटर्न दाखिल किया जा चुका है जो पिछले वर्ष की इस तारीख तक की तुलना में 54.33% अधिक है। इस साल 86.35 लाख नये करदाता भी जुड़े हैं।
 
मई 2014 में जब वर्तमान सरकार चुनी गई, तब इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की कुल संख्या 3.8 करोड़ थी। इस सरकार के पहले चार वर्षों में यह संख्या बढ़कर 6.86 करोड़ हो गई है। इस सरकार के पहले पांच वर्ष पूरे होने तक हम निर्धारिती आधार को दोगुना करने के करीब होंगे।
 
अप्रत्यक्ष कर पर प्रभाव
 
नोटबंटी और जीएसटी के लागू होने से नकद लेनदेन बड़े पैमाने पर खत्म हुआ है। डिजिटल लेनदेन में बढ़ावा साफ देखा जा सकता है। इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचा है, करदाताओं की संख्या बढ़ी है। जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं का आंकड़ा पहसे के 60 लाख 40 हजार से बढ़कर 1 करोड़ 20 लाख हो गया। नेट टैक्स के हिस्से के रूप में दर्ज वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक खपत अब बढ़ी है। इसने अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष कर वृद्धि को बढ़ावा दिया है। इससे केंद्र और राज्य दोनों को फायदा हुआ है। जीएसटी के बाद प्रत्येक राज्य को हर साल कराधान में अनिवार्य 14% की वृद्धि हो रही है। तथ्य यह है कि निर्धारकों को अपने कारोबार की घोषणा अब न केवल अप्रत्यक्ष कर के प्रभावित आंकड़े के साथ करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि कर निर्धारण में उनसे उत्पन्न आयकर का खुलासा किया गया है। 2014-15 में जीडीपी अनुपात पर अप्रत्यक्ष कर 4.4% था। जीएसटी के बाद यह कम से कम 1 प्रतिशत अंक बढ़कर 5.4% तक चढ़ गया है।
 
छोटे करदाताओं को 97,000 करोड़ रुपये, जीएसटी निर्धारकों को 80,000 करोड़ रुपये की वार्षिक आयकर राहत देने के बावजूद टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों की दरें कम कर दी गई हैं, लेकिन टैक्स कलेक्शन बढ़ गया है। टैक्स बेस का विस्तार किया गया है। प्री-जीएसटी 31% कर दायरे में आने वाली 334 वस्तुओं पर कर कटौती देखी गई है।
 
सरकार ने इन संसाधनों का इस्तेमाल बेहतर बुनियादी ढांचा निर्माण, सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण भारत के विकास के लिए किया है। इससे बेहतर क्या हो सकता है कि आज गांव सड़कों से जुड़ें हैं, हर घर बिजली पहुंच रही है, ग्रामीण स्वच्छता दायरा 92% पहुंच चुका है, आवास योजना सफल हो रही है, 8 करोड़ गरीब घरों तक गैस कनेक्शन पहुंचा है। दस करोड़ परिवारों को आयुष्मान भारत का लाभ मिल रहा है। सब्सिडी वाले भोजन पर 1,62,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, किसानों के लिए एमएसपी में 50% की वृद्धि और सफल फसल बीमा योजना। यह अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण है जिससे 13 करोड़ उद्यमियों को मुद्रा लोन मिला है। सातवां वेतन आयोग चंद हफ्तों के भीतर लागू किया गया था और वन रैंक वन पेंशन का वादा पूरा किया गया। अधिक व्यवस्थित अर्थव्यवस्था यानि अधिक राजस्व, गरीबों के लिए अधिक संसाधन, बेहतर बुनियादी ढांचा, और हमारे नागरिकों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन।
 
-अरुण जेटली
(लेखक केंद्रीय वित्त मंत्री हैं)

जगदलपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वह शहरी माओवादियों का समर्थन करती है जिन्होंने गरीब आदिवासी युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। इस महीने के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक वह समृद्ध छत्तीसगढ़ के लिए दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को पूरा नहीं कर देते।

मोदी ने माओवाद का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नीत सरकार ने नक्सल प्रभावति बस्तर के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘जो शहरी माओवादी हैं, वे शहरों में वातानुकूलित घरों में रहते हैं, वे साफ सुथरे रहते हैं और उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रिमोट कंट्रोल से आदिवासी बच्चों का जीवन तबाह कर रहे हैं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि जब सरकार कार्रवाई करती है तो वह शहरी नक्सलियों का समर्थन क्यों करती है।’’ प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को ‘‘राक्षसी मनोवृत्ति’’ करार दिया और कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बस्तर क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘क्या आप ऐसे लोगों को माफ करेंगे? ये लोग छत्तीसगढ़ नहीं जीत पाएंगे। मैं आपसे यह सुनिश्चित करने की अपील करता हूं कि बस्तर में भाजपा सभी सीटों पर विजयी हो। यदि कोई और जीतता है तो यह बस्तर के सपनों पर एक धब्बा होगा।’’

नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में बेरोजगारी की दर दो साल के उच्चतम स्तर पर चले जाने संबंधी खबर को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मोदी ने ‘सूटबूट वाले दोस्तों को फायदा पहुंचाने और युवाओं के सपने को मिट्टी में मिलाने का काम किया है।’गांधी ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘‘2014-ठग विद्या 1: मुझे प्रधानमंत्री बनाओ, मैं 2 करोड़ रोज़गार दिलाऊँगा। 2016-ठग विद्या 2: नोटबंदी में मेरा साथ दो, मैं काला धन वापस लाऊंगा।2018- असलियत: सूट बूट वाले दोस्तों को राफेल में उड़ाऊंगा, नौजवानों के सपने मिट्टी में मिलाऊँगा।’’
 
दरअसल, थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है। श्रमिक भागीदारी भी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गया है जो जनवरी 2016 के आंकड़ों से बी नीचे है। 
इंदौर। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा गरमाने के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल अपनी चुनावी हार का अंदेशा होते ही पाकिस्तान और भगवान राम का नाम लेने लगता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शकील अहमद ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब भी भाजपा को लगता है कि चुनावों में उसकी स्थिति खराब है, तो वह पाकिस्तान का नाम लेने लगती है। इसके साथ ही, वह भगवान राम के नाम पर राजनीति करने लगती है।’’ 
 
राम मंदिर मामले में कांग्रेस का रुख पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "यह मामला अभी शीर्ष न्यायालय में विचाराधीन है। अगर अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने को लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई बयान आयेगा, तो हम इस पर जरूर प्रतिक्रिया देंगे।" पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "अगर केंद्र की भाजपा सरकार अयोध्या में वाकई राम मंदिर बनाना चाहती है, तो वह अध्यादेश क्यों नहीं ले आती? लेकिन यह सरकार भगवान राम के नाम पर लोगों को छलने की कोशिश कर रही है।" उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा अपने भ्रष्टाचार और नाकामी को छिपाने के लिये देश के शहरों के नाम बदल रही है, ताकि उसकी स्याह हकीकत जनता के सामने न आ सके। 
 
नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर मोदी सरकार के खिलाफ हमला करते हुए अहमद ने विमुद्रीकरण को "तुगलकी फरमान" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी के कारण पिछले दो साल के दौरान देश के असंगठित क्षेत्र में करीब दो करोड़ लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा, जबकि इसी अवधि में बड़े पूंजीपतियों के तीन लाख 17 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिये गये।
 
अहमद ने आरोप लगाया कि राफेल घोटाला भ्रष्टाचार के साथ "देशद्रोह" से भी जुड़ा है क्योंकि लड़ाकू जहाजों के इस विवादास्पद सौदे में भारत की अहम रक्षा जरूरतों को नजरअंदाज किया गया। 

घरेलू रसोई गैस और महंगी हो गई है। सरकार के एलपीजी डीलरों के कमीशन बढ़ाये जाने के बाद भारतीय घरों में पहुंचने वाली एलपीजी गैस सिलेंडर की दरों में यह बढ़ोतरी हो गई है। एलपीजी कीमत में दो रुपये प्रति सिलेंडर की कीमत की बढ़ोतरी की गयी है। 

 

सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों की कीमत अधिसूचना के अनुसार 14.2 किलो के सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की दिल्ली में कीमत 507.42 रुपये होगी जो पहले 505.34 रुपये थी। 

इससे पहले, पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीलर कमीशन बढ़ाने का आदेश दिया था। आदेश में मंत्रालय ने कहा कि 14.2 किलो और 5 किलो के सिलेंडर पर घरेलू एलपीजी वितरकों का कमीशन पिछली बार सितंबर 2017 में क्रमश: 48.89 रुपये तथा 24.20 रुपये नियत किया गया था।

आदेश के अनुसार एलपीजी वितरकों के कमीशन की नये सिरे से समीक्षा के लिये अध्ययन के लंबित होने के बीच परिवहन लागत, वेतन आदि में वृद्धि को देखते हुए अंतरिम उपाय के रूप में वितरकों का कमीशन 14.2 किलो के सिलेंडर के लिये बढ़ाकर 50.58 रुपये प्रति सिलेंडर तथा 5 किलो के सिलेंडर के मामले में 25.29 रुपये करने का फैसला किया गया है।

इस महीने यह दूसरा मौका है जब एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाये गये हैं। इससे पहले, एक नवंबर को मूल कीमत पर कर के कारण प्रति सिलेंडर 2.84 रुपये की वृद्धि की गयी थी। जून से एलपीजी सिलेंडर के दाम हर महीने बढ़े हैं। इसका कारण उच्च मल कीमत पर जीएसटी भुगतान है और कुल मिलाकर कीमत 16.21 रुपये बढ़ा है।

मुंबई में 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की लागत अब 505.05 रुपये जबकि कोलकाता में 510.70 रुपये तथा चेन्नई में 495.39 रुपये होगी। विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों तथा परिवहन लागत के कारण दाम अलग-अलग हैं।

छत्तीगसढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के पहले चरण के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राफेल विमान सौदा, नोटबंदी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार और चिटफंट मुद्दे पर रमन सिंह सरकार को घेरा है। 

 कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय चुनावी दौरे पर हैं। इस दौरान राहुल गांधी कई चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। 

राहुल गांधी ने दौरे के पहले दिन शुक्रवार को कांकेर जिले के पखांजुर में चुनावी सभा को संबोधित किया। राहुल गांधी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पैसों की कमी नहीं है। प्रदेश में सालों से भाजपा की सरकार है। यहां चिटफंड कंपनियां लोगों का पैसा लेकर भाग गई। 
 
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कुछ उद्योगपति मित्रों का 3 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज माफ कर दिया। लेकिन किसानों के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी देश का पैसा लेकर भाग गए। विजय माल्या देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलकर गया था।

राहुल ने नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर कहा कि यह पूरी तरह से फेल योजना साबित हुई। सरकार  ने लोगों को लाइन में लगा दिया। राहुल ने कहा कि हर गरीब व्यक्ति, आदिवासी, महिलाएं बैंक के बाहर लाइन में लगी थी। इससे क्या हासिल हुआ। 

नोटबंदी से सिर्फ चौकीदार के दोस्तों का भला हुआ और किसी का भला नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि नोटबंदी की गई और कालाधन वापस लाने के नाम पर लोगों का बेवकूफ बनाया गया।

राहुल ने राफेल सौदे पर भी प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और इसमें भ्रष्टाचार होने के आरोप को दोहराया। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिल लिमिटेड (एचएएल) से कॉन्ट्रैक्ट छीनकर अनिल अंबानी की कंपनी को दे दिया। मोदी सरकार ने 526 करोड़ का हवाई जहाज, 1600 करोड़ रुपये में खरीदा। अनिल अंबानी ने पूरी जिंदगी में हवाई जहाज नहीं बनाया और एचएएल 70 सालों से जहाल ही बना रही है।

छत्तीगसढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के पहले चरण के लिए राज्य के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में चुनाव प्रचार करने पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री ने जगदलपुर में चुनावी शंखनाद करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। 

 

जगदलपुर में सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश में जितने प्रधानमंत्री हुए हैं वे जितनी बार बस्तर आए होंगे, मैं उससे ज्यादा बार अकेला बस्तर आया हूं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बस्तर मेरे दिल के सबसे करीब है। मैं यहां जब भी आया हूं कभी खाली हाथ नहीं आया। हर बार विकास की नई योजना के लेकर आया हूं। सरकारें तो पहले भी होती थी, लेकिन विकास कहीं होता था। 

पीएम मोदी ने कहा कि पहले जो सरकारें रहीं उनकी सोच रहती थी मेरा-तेरा, मेरी जात वाला मेरी बिरादरी वाला, मेरा रिश्तेदार और मेरा परिवार। हमनें इन स्थितियों को बदला है हमारा मंत्र है सबका साथ - सबका विकास। मेरे तेरे का खेल अब कोई बर्दाश्त करने वाला नहीं है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए केंद्र की सरकार और राज्य की रमन सिंह सरकार लगातार कार्य कर रही है।  

पीएम मोदी ने कहा कि जिन बच्चों के हाथ में कलम होनी चाहिए, राक्षसी मनोवृत्ति के लोग उनके हाथ में बन्दूक पकड़ा देते हैं। अर्बन माओवादी लोग खुद ऐश की जिन्दगी जीते हैं और आदिवासी बच्चों की जिन्दगी तबाह करते हैं और कांग्रेस के लोग ऐसे अर्बन माओवादी लोगों को बचाने के लिए मैदान में उतर आते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ के लिए जो सपने देखें थे उनको पूरा करने के लिए मैं बार-बार छत्तीसगढ़ आया हूं। जब तक मैं अटल जी के सपने पूरे नहीं कर देता तब तक चैन से बैठने वाला नहीं हूं। 

पीएम मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के नेतृत्व में जो विकास यात्रा चली है उसको रुकने नहीं देना है। वो समय अब दूर नहीं है जब छत्तीसगढ़ देश के उत्तम राज्यों में से एक होगा। 

उन्होंने कहा कि 10 साल तक केंद्र में जो कांग्रेस की सरकार थी उसने छत्तीसगढ़ में हो रहे विकास कार्यों को अटकाने और लटकाने के भरसक प्रयास किए, इसके बाबजूद रमन सिंह जी ने छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को रुकने नहीं दिया। 

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी दलितों, पीड़ितों, शोषितों, वंचितों और गरीबों को सिर्फ और सिर्फ अपना वोट बैंक मानती है, कांग्रेस पार्टी इन्हें इंसान के रूप में देखने को तैयार नहीं है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कांग्रेस की कई सरकारें चली लेकिन कभी आदिवासियों के विकास की चिंता नहीं की। अटल जी देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने आदिवासियों के विकास के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया और देश में आदिवासियों के विकास के लिए वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ किया। 

पीएम मोदी ने कहा कि वो दिन भी दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ का भविष्य बस्तर की आर्थिक समृद्धि से जुड़ने वाला है। 

मतदाताओं को लुभाने के लिए सत्ताधारी पार्टी शनिवार को घोषणा पत्र जारी करेगी। पार्टी ने इसे संकल्प पत्र का नाम दिया है। संकल्प पत्र में किसानों और युवाओं पर फोकस रह सकता है। प्रदेश के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुताबिक यह गेम चेंजर साबित होगा।

 

पार्टी ने इसे तैयार करने के लिए राज्य के सभी इलाकों में जाकर लोगों के सुझाव लिए हैं। इस वजह से इसे बनाने में समय लगा है। अग्रवाल के मुताबिक संकल्प पत्र में नए छत्तीसगढ़ के निर्माण का विजन है। 2025 तक छत्तीसगढ़ देश के विकसित राज्यों में शामिल होगा।

शनिवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पार्टी घोषणा पत्र को जारी करेंगे। घोषणा पत्र की बारीकियां बताने से बचते हुए कृषि मंत्री अग्रवाल ने बताया कि संकल्प पत्र के केंद्र में किसान और युवा होंगे। पार्टी ने पिछले 15 साल में न्याय और विकास के मुद्दे पर काम किया है और आगे भी पार्टी इसी एजेंडे पर काम करेगी।

शनिवार को पहले चरण के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है, सोमवार को 18 सीटों पर मतदान होंगे। दूसरे चरण की 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा। 

छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज डोंगरगढ़ में घोषणापत्र जारी कर दिया जिसे 'जन घोषणा पत्र' नाम दिया गया है। 

 

घोषणापत्र में किसानों और बेरोजगारों पर जोर साफ दिखाई दिया। प्रदेश के लिए पार्टी ने कई बड़े वादे किए हैं:

1. सरकार गठन के 10 दिन के भीतर किसानों के लिए तत्काल ऋण छूट

2. 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों के लिए पेंशन का प्रावधान. 

3. स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लागू करना। चावल के लिए 2500 प्रति क्विंटल और मक्का के लिए 1700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी। 

4.घरेलू उपभोग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली की दरें आधा करना। शहरी क्षेत्रों में रह रहे लोगों के लिए घर और ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों के लिए जमीन का वादा।

5. हर परिवार को हर महीने एक रुपये प्रति किलो की दर पर 35 किलो चावल का वादा

6. घर घर रोजगार, हर घर रोजगार के तहत रोजगार पर झुकाव, वित्तीय सहायता के लिए 'राजीव मित्र योजना' के तहत 10 लाख बेरोजगार युवाओं को मासिक अनुदान का प्रावधान

7. महिला सुरक्षा के लिए विशेष महिला थाने, हर थाने में महिला सेल, 

8. अल्पसंख्यक समुदायों और उनके हितों के लिए उनकी सुरक्षा, नौकरी के अवसरों और व्यापार करने में आसानी के लिए विशेष सहायता के प्रस्ताव

9. 70-85 वन फसलों पर एमएसपी में वृद्धि और तेंदू पत्ता श्रमिकों के लिए 4000 रुपये प्रति बैग। दैनिक मजदूरी मजदूरों के लिए एक सम्मानजनक आय,

पार्टी ने दावा किया है कि घोषणापत्र को छत्तीसगढ़ के 24 जिलों के दौरे के बाद किसानों, महिला प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों, छात्रों, शिक्षकों, खदान श्रमिकों, तेंदू पत्ता श्रमिकों, आदिवासियों, व्यापारियों, डॉक्टरों समेत विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों से बड़े पैमाने पर इनपुट शामिल किया गया है।  
भाजपा शनिवार को अपना घोषणापत्र जारी करेगी।

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