Google Analytics —— Meta Pixel
newscreation

newscreation

मुंबई. अपनी फिल्म ‘रंगीला राजा’ की रिलीज में आ रही दिक्कतों से गोविंदा नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री में उनके साथ बीते 9 साल से साजिश की जा रही है। हालांकि, इस फिल्म स्टार ने किसी का नाम नहीं लिया। बता दें कि गोविंदा की फिल्म को 8 नवंबर को रिलीज होना था लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस पर 20 कट लगाने को कहा और इस तरह फिल्म की रिलीज टल गई। खास बात ये है कि इसी दौरान अमिताभ बच्चन और आमिर खान की फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ रिलीज हुई। गोविंदा पहले भी कह चुके हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ खास लोगों का प्रभुत्व है।

पहलाज निहलानी की है फिल्म
रंगीला राजा को सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड ने प्रोड्यूस किया है। निहलानी ने ही साल 1986 में अपनी फिल्म ‘इल्जाम’ से गोविंदा को लॉन्च किया था और यह फिल्म सुपरहिट रही थी। अब तक रंगीला राजा की रिलीज डेट सामने नहीं आ सकी है। गोविंदा इसी से नाराज हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- मेरे साथ पिछले 9 साल से फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग साजिश कर रहे हैं। ये लोग मेरी फिल्म को किसी भी अच्छे प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं होने देते। बता दें कि पहलाज निहलानी ने पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट में एक अपील दायर की थी। इसमें उन्होंने फिल्म में 20 कट लगाए जाने के सेंसर बोर्ड के आदेश को चुनौती दी है। निहलानी ने कहा था कि उन्होंने ठग्स ऑफ हिंदोस्तान की रिलीज के तीन हफ्ते पहले सेंसर बोर्ड को अपनी फिल्म दी थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रंगीला राजा विवादित कारोबारी विजय माल्या के जीवन पर आधारित है।

गोविंदा ने और क्या कहा?
कई हिट कॉमेडी फिल्में देने वाले गोविंदा ने रंगीला राजा की रिलीज के बारे में कहा- या तो मेरी फिल्मों को रिलीज होने नहीं दिया जाता या फिर उन्हें अच्छे थिएटर और स्क्रीन्स नहीं मिलतीं। हालिया उदाहरण फ्रायडे का है जिसे मीडिया ने अच्छा रिव्यू दिया था। लेकिन, फिल्म को थिएटर ही नहीं मिले। निहलानी जी अच्छे प्रोड्यूसर हैं और उन्होंने कई स्टार्स को मौका दिया है। हमारी फिल्म इंडस्ट्री पहले तो ऐसी नहीं थी। अब लगता है जैसे हम किसी और ही दुनिया में रह रहे हैं। मैं लंबे वक्त तक चुप रहा लेकिन अब ऐसा करना मुझे सही नहीं लगता।

  • सूत्रों के मुताबिक पिछले शुक्रवार को दिल्ली में बैठक हुई
  • एमएसएमई को कर्ज के मुद्दे पर सहमति के संकेत, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के मुद्दे पर स्थिति साफ नहीं
  • आरबीआई और सरकार के बीच कैपिटल फ्रेमवर्क, केंद्रीय बैंक की स्वायतत्ता को लेकर विवाद
     

नई दिल्ली. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल पिछले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले। सूत्रों से हवाले से सोमवार को यह जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि मोदी और उर्जित पटेल की मीटिंग में सरकार और रिजर्व बैंक के बीच चल रहे विवाद सुलझाने पर चर्चा हुई। 

 

सूत्रों के मुताबिक ऐसे संकेत मिले हैं कि आरबीआई लघु और मध्यम उद्योगों को कर्ज देने के लिए विशेष इंतजाम कर सकता है। नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने और आरबीआई के सरप्लस में से सरकार को रकम जारी करने के मुद्दे पर स्थिति साफ नहीं हो पाई।

आरबीआई का सरप्लस हो सकता है विवाद की वजह

  1.  

    पिछले हफ्ते कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने आरबीआई के सरप्लस में से 3.6 लाख करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन, आरबीआई ने इसे नहीं माना। उसका कहना था कि इससे माइक्रो इकोनॉमी को खतरा हो सकता है।

     

  2.  

    आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने जवाब देते हुए कहा था कि सरकार को फंड की कोई जरूरत नहीं है। आरबीआई को 3.6 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

     

  3.  

    पिछले दिनों सरकार ने आरबीआई की धारा 7 का इस्तेमाल करते हुए रिजर्व बैंक को तीन पत्र भेजे थे। इसके बाद सरकार और आरबीआई के बीच विवाद बढ़ गया। यह खबर भी आई कि सरकार धारा 7 लागू करती है तो उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं।

     

  4.  

    अक्टूबर में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि सरकार को केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता बढ़ानी चाहिए। जो सरकार इसका ध्यान नहीं रखती उसे नुकसान उठाना पड़ता है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि मौजूदा विधानसभा चुनाव साधारण चुनाव नहीं हैं बल्कि देश के लिए "बहुत महत्वपूर्ण" हैं क्योंकि इनमें पार्टी की जीत से नरेंद्र मोदी सरकार की 2019 में सत्ता में वापसी के लिए मजबूत नींव तैयार होगी और पार्टी लंबे समय के लिए "अजेय" हो जाएगी। शाह ने चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को वीडियो के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि भारत को महान और विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए भाजपा का पंचायत से लेकर संसद तक लंबा और निर्बाध शासन होना चाहिए जैसा कांग्रेस को 30 साल से ज्यादा समय तक मिला था।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बहुत कुछ किया लेकिन दशकों के लंबे कांग्रेस शासनकाल के बाद ‘‘कुव्यवस्था’’ से देश को बाहर निकालने के लिए तथा इसे आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बनाने के लिए पांच साल पर्याप्त नहीं हैं। विधानसभा चुनाव पांच राज्यों में हो रहे हैं और इनमें से तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा सत्ता में है तथा उसका काफी कुछ दांव पर है। भाजपा 2003 से ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता में है। उसके प्रतिद्वंद्वियों का मानना ​​है कि तीन राज्यों में उसके प्रदर्शन में ज्यादा गिरावट आने से अगले साल के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष को नयी ऊर्जा मिल जाएगी।
 
तेलंगाना और मिजोरम दो अन्य चुनावी राज्य हैं। शाह ने मध्य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सिर्फ जीत के लिए काम नहीं करें बल्कि ऐसी भारी जीत के लिए काम करें जिससे मतों की गिनती के दिन भाजपा के प्रतिद्वंद्वियों का जोश ठंडा हो जाए। उन्होंने कहा कि 2018 के चुनावों को सामान्य चुनाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण चुनाव हैं क्योंकि इसके बाद 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्र में दो बार सत्ता में रही है- पहले अटल बिहारी वाजपेयी के तहत और अब मोदी के तहत। मौजूदा सरकार को पुननिर्वाचित करने से देश तेजी से आगे बढ़ेगा। 
 
शाह ने कहा कि 2019 के चुनावों में जीत से भाजपा लंबे समय तक पंचायत से लेकर संसद तक अजेय हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें पक्का भरोसा है कि अजेय भाजपा से खुशहाल, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद पार्टी को कई चुनावों में मिली जीत का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि यह मोदी के नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं की कठोर मेहनत का नतीजा है।
 
उन्होंने कांग्रेस पर घुसपैठियों और नक्सलियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया तथा कहा कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को इन मुद्दों पर अपनी पार्टी का रूख स्पष्ट करना चाहिए। शाह ने कहा कि यदि 2019 में भाजपा सत्ता में आयी तो उसकी सरकार घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है कि राज्य को कैसे चलाया जाना चाहिए। शाह ने कहा कि चौहान ने "बीमारू" मध्य प्रदेश को एक विकसित राज्य में बदल दिया और उनकी सरकार का मकसद अपने अगले कार्यकाल में इसे देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक बनाना है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भाजपा के विकास एजेंडे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राज्य सरकार के कार्यों, मोदी के संदेश और पार्टी की विचारधारा को हर घर तक पहुंचाने को कहा।
 

भारत की राजनीति में राफेल विवाद ने भूचाल मचा कर रख दिया है। लड़ाकू विमान राफेल की खरीदारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। राहुल ने कहा की मोदी जी ने राफेल डील में बड़ा घोटाला किया है उन्होंने अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाया और अंबानी से बड़ी डील की। विपक्ष ने राफेल को लेकर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। राहुल गांधी ने फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसके बाद दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर खुद सामने आये और उन्होंने  राहुल गांधी के सभी आरोपो को खारिज करते हुए राहुल गांधी के सभी आरोपो का करारा जबाव दिया।

समाचार एजेंसी एनएनआई के साथ दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कई खुलासे भी किये। ट्रैपियर ने कहा कि राफेल डील में दसॉल्ट एविएशन और रिलायंस ज्वाइंट वेंचर के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर मैंने झूठ नहीं बोला। इसके साथ ही ट्रैपियर ने साफ किया कि हमने रिलायंस को खुद चुना, इसके अलावा 30 साझेदार और हैं। राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ''मैं झूठ नहीं बोलता. मैंने जो बात पहले कही और जो बयान दिया बिल्कुल सही हैं। मैं झूठ बोलने के लिए नहीं जाना जाता। मेरे पद पर आप झूठ नहीं बोल सकते।''

 
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने आगे कहा कि हमाने पहले कांग्रेस पार्टी के साथ भी सौदा किया था लेकिन जो राहुल गांधी ने आरोप लगाए है उससे हमें दुख पहुंचा है। ट्रैपियर ने कहा, ''कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का हमारा लंबा अनुभव है। हमारी पहली डील 1953 में प्रधानमंत्री नेहरू के साथ थी। इसके बाद भी हमने कई प्रधानमंत्रियों के साथ डील की। हम भारत के साथ काम कर रहे हैं, किसी पार्टी के साथ नहीं. हम भारतीय वायुसेना और भारत सरकार को सामरिक उत्पाद जैसे लड़ाकू विमान सप्लाई कर रहे हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण है।''
 
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के बयान सामने आने के बाद राफेल विवाद एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है कि अब कौन सच्चा है और कौन झूठा। 
 
 
आपको बता दें कि केन्द्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि फ्रांस से 36 लड़ाकू राफेल विमानों की खरीद में 2013 की ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’ का पूरी तरह पालन किया गया और "बेहतर शर्तों" पर बातचीत की गयी थी। इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि इस सौदे से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने भी अपनी मंजूरी प्रदान की। गौरतलब है कि राफेल सौदे को लेकर देश में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है और कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष भाजपा नीत केंद्र सरकार पर लगातार हमले बोल रहा है। सरकार ने 14 पृष्ठों के हलफनामे में कहा है कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। इस हलफनामे का शीर्षक ‘‘36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का आदेश देने के लिये निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों का विवरण’’ है। केन्द्र ने राफेल विमानों की खरीद के सौदे की कीमत से संबंधित विवरण सीलबंद लिफाफे में न्यायालय में पेश किया। केन्द्र विमानों की कीमतों का विवरण देने को लेकर अनिच्छुक था और उसने कहा था कि इनकी कीमतों को संसद से भी साझा नहीं किया गया है। शीर्ष अदालत के 31 अक्टूबर के आदेश का पालन करते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया और कीमत का ब्यौरा पेश किया गया। न्यायालय अब दोनों दस्तावेजों पर गौर करेगा और बुधवार को सुनवाई करेगा। एक वरिष्ठ विधि अधिकारी ने बताया कि विभिन्न आपत्तियों के मद्देनजर सौदे के मूल्य का ब्यौरा न्यायालय में एक सीलबंद लिफाफे में दायर किया गया। अधिकारी अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे।

 दस्तावेज में कहा गया है कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है और मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने 24 अगस्त, 2016 को उस समझौते को मंजूरी दी जिस पर भारत और फ्रांस के वार्ताकारों के बीच हुयी बातचीत के बाद सहमति बनी थी। 2013 में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार थी। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इसके लिये भारतीय वार्ताकार दल का गठन किया गया था जिसने करीब एक साल तक फ्रांस के दल के साथ बातचीत की और अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सक्षम वित्तीय प्राधिकारी, मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति, की मंजूरी भी ली गयी। 23 सितंबर 2016 को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
 
राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राजग सरकार हर विमान को करीब 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि संप्रग सरकार जब 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर रही थी तो उसने इसे 526 करोड़ रुपये में अंतिम रूप दिया था। दस्तावेज में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दोहराए गए आरोपों का भी जिक्र किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑफसेट पार्टनर के रूप में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की एक कंपनी का चयन करने के लिए फ्रेंच कंपनी दसाल्ट एविएशन को मजबूर किया ताकि उसे 30,000 करोड़ रुपये ‘‘दिए जा सकें।’’ इसमें कहा गया है कि रक्षा ऑफसेट दिशानिर्देशों के अनुसार, कंपनी ऑफसेट दायित्वों को लागू करने के लिए अपने भारतीय ऑफसेट सहयोगियों का चयन करने के लिए स्वतंत्र है।

 दस्तावेज में विस्तार से कहा गया है कि क्यों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस सौदे में ऑफसेट पार्टनर बनने में नाकाम रही क्योंकि दसाल्ट के साथ उसके कई अनसुलझे मुद्दे थे। कांग्रेस ने कहा था कि राफेल मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में सरकार के जवाब से साबित हो गया कि सौदे को अंतिम रूप देने से पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी नहीं ली गई। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एक तरह से सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से विचार-विमर्श नहीं किया गया है।
 
क्या अनुबंध देने के बाद विचार-विमर्श करेंगे या पहले करेंगे?’’। सिंघवी ने आरोप लगाया कि सरकार राफेल मामले पर लोगों को गुमराह कर रही है। राफेल सौदे की जांच के लिये अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और फिर अधिवक्ता विनीत ढांडा ने याचिकाएं दायर कीं। इसके बाद, आप पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी अलग से एक याचिका दायर की। पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में एक संयुक्त याचिका दायर की है। 

पहले चरण के मतदान की बड़ी बातें

  • पहले चरण में छत्तीसगढ़ की 90 में से 18 सीटों पर मतदान
  • नक्सल प्रभावित 18 सीटों पर 31 लाख वोटर
  • बस्तर जिले की 12 और राजनांदगांव की 6 सीटें शामिल
  • सीएम रमन सिंह, करुणा शुक्ला, कवासी लखमा जैसे दिग्गजों की किस्मत दांव पर
  • 2013 चुनाव में इन 18 सीटों में से 12 पर कांग्रेस ने जमाया कब्जा, 6 भाजपा के खाते में

पहले चरण का मतदान 

-चुनाव आयोग ने कहा- अब तक हुई 70 फीसदी वोटिंग। 
 


साढ़े 5 बजे तक कुल 58 फीसदी वोटिंग 

कोंडागांव - 61.47%
केशकल- 63.5%
कांकेर - 62%
बस्तर- 58%
दंतेवाड़ा- 49%
खैरागढ़- 70.14%
डोंगरगढ़-71%
डोंगरगांव - 71%
खुज्जी- 72%

-पहले चरण के लिए वोटिंग खत्म। 


- शाम 5 बजे बाकी 8 सीटों पर भी वोटिंग का समय खत्म। अब मतदान परिसर में मौजूद मतदाता ही वोट डाल सकेंगे। 

- 4.30 बजे तक 56.58 फीसदी वोटिंग, कोंडागांव में 61.47, केशकाल 63.51 फीसदी, कांकेर में 62 फीसदी, बस्तर में 58 फीसदी, दंतेवाड़ा में 49 फीसदी, खैरागढ़ में 64 फीसदी, डोंगा गढ़ में 65.5 फीसदी वोटिंग।

-दूसरे चरण के मतदान के लिए दुर्ग के पाटन में रैली के लिए पहुंचे अमित शाह। 

-नक्सलियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में कोबरा के तीन और जवान घायल, पांच नक्सली मारे गए।  
 
-दोपहर तीन बजे तक 47.18 फीसदी मतदान।

-छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 10 सीटों पर मतदान 3 बजे खत्म हो गया है। बाकी 8 सीटों पर मतदान शाम पांच बजे तक चला। पहले चरण की 10 सीटों पर सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जबकि आठ सीटों पर एक घंटे बाद आठ बजे से मतदान प्रारंभ हुआ। नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोण्डागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोण्टा में सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे खत्म हो गया।

-वहीं विधानसभा क्षेत्र खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट में सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक मतदान होगा। राज्य की जिन 18 सीटों के लिये आज मतदान हुआ उसमें से 12 बस्तर क्षेत्र की और छह सीटें राजनांदगांव जिले की हैं। इन 18 विधानसभा सीट के लिए कुल 190 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला यहां के 31,80,014 मतदाता कर रहे हैं। 
 

- दंतेवाड़ा के मडेंडा गांव के लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। यहां नक्सलियों ने ग्रामीणों को धमकी दी थी कि उंगलियों पर स्याही का निशान देखा, तो उनकी अंगुली काट देंगे। स्थानीय लोगों ने कहा, "गांव में 263 पंजीकृत मतदाता हैं और धमकी के बाद भी कई लोग मतदान कर रहे हैं।" 
  -बस्तर में 2 बजे तक 54 प्रतिशत, जगदलपुर मैं 48 प्रतिशत, बीजापुर में 22 प्रतिशत, चित्रकोट में 54 प्रतिशत, डोंगरढ़ में 30 प्रतिशत, डोंगरगांव में 44 प्रतिशत, खैरागढ़ में 45 प्रतिशत, खुज्जी में 43 प्रतिशत और नारायणपुर में 63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

- एएनआई के मुताबिक पहले चरण की वोटिंग में दोपहर एक बजे तक 25.15 फीसदी मतदान हुआ। 

- बीजापुर के पामेड़ इलाके में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षा दस्ता कोबरा के दो कमांडो घायल हुए। बीजापुर एसपी ने कहा है कि घटनास्थल के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल रवाना कर दिया गया है।
 
-जनपद पंचायत राजनांदगांव में पदस्थ नरेंद्र त्रिपाठी को अचानक हार्ट अटैक आया। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाएगा गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। निर्वाचन कार्य में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। मृत कर्मचारी की ड्यूटी सामान वापसी विभाग में लगाई गई थी। उनपर मतदान दलों की वापसी के बाद वीवीपैट मशीनों को सुरक्षित स्ट्रांग रूम पहुंचाने की जिम्मेदारी थी।

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन बिलासपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा, "विपक्ष अभी भी नहीं जानता कि भाजपा से कैसे लड़ना है। हमारा ध्यान विकास पर केंद्रित है, हम जातीय भेदभाव पर ध्यान नहीं देते। आप छत्तीसगढ़ में जहां भी जाएंगे, विकास को देख सकते हैं।" 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ में चुनावी रैली कर रहे हैं। आज प्रदेश में पहले चरण का मतदान जारी है। इस बीच, मोदी दूसरे चरण के तहत आने वाले बिलासपुर की सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवारों के हक में वोट मांग रहे हैं। मोदी ने कहा, "भाजपा को छत्तीसगढ़ की जनता का आशीर्वाद मिल रहा हैै। छत्तीसगढ़ पूरे देश को ऊर्जा देता है।
पहले चरण के मतदान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "दिवाली से पहले राजनीतिक पंडितों को कुछ शक था कि पता नहीं छुट्टियों की वजह से चुनाव में गर्मी आ पाएगी या नहीं लेकिन मुझे आज बताया गया कि अच्छी संख्या में मतदान जारी है। बम, बंदूक और बुलेट को लोग बैलेट से जवाब दें।" पीएम ने बिलासपुर में सतनामी परंपरा की बात करते हुए कहा कि यह धरती सतनामी परंपरा की भूमि है, गुरु घासीदास की भूमि है। कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश का हिस्सा रहते हुए 40-50 साल कांग्रेस के पास रहा लेकिन बीमारू बना रहा। भाजपा ने उसकी हालत बदली। कांग्रेस के घोषणापत्र के बहाने मोदी ने राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के लिए 36 प्वाइंट गिनाए लेकिन घोषणापत्र में 'नामदार' को 150 बार सर कहा गया। कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ से ज्यादा 'नामदार' का महत्व है। विकास कार्यों को गिनाते हुए पीएम ने ये भी कहा कि लोग अक्सर सोचते हैं कि मोदी इतने पैसे लाता कहां से है। ये जनता के ही पैसे हैं। जो अब विकास कार्य में लग रहे हैं। पीएम ने नोटबंदी का भी जमकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के जरिए ही फर्जी कंपनियों पर शिकंजा कसा गया।  मोदी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि मां और बेटा जमानत पर हैं और नोटबंदी पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन वे यह भूल गए कि नोटबंदी की वजह से ही उन्हें जमानत मांगनी पड़ी । छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण की 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।

नई दिल्ली. तेलंगाना में मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ साथ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। तमाम राजनीतिक दल एक दूसरे पर तीखे हमले बोल रहे हैं। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आज भारतीय जनता पार्टी पर गाय के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जमकर हमला बोला। ओवैसी ने कहा, भाजपा ने तेलंगाना चुनाव को लेकर अपने घोषणापत्र में कहा है कि वह लोगों में 1 लाख गायें बांटेगी। क्या वे एक गाय मुझे भी देंगे? मैं वादा करता हूं कि मैं उसे पूरे सम्मान के साथ रखूंगा। लेकिन सवाल है कि क्या वो मुझे गाय देंगे? ये कोई हंसने वाली बात नहीं है, इस बारे में जरा सोचिए। के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश के बाद छह सितंबर को 119 सदस्यीय विधानसभा भंग कर दी गई थी, जिस कारण चुनाव समय से पूर्व कराए जा रहे हैं। यहां कांग्रेस-टीडीपी और कुछ अन्य छोटे दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के मेडक जिले में गजवेल विधानसभा सीट से 14 नवंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने की उम्मीद है। टीआरएस ने पहले ही 107 विधानसभा सीटों के लिये अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इनमें से 105 उम्मीदवारों की घोषणा विधानसभा भंग किए जाने के कुछ ही समय बाद कर दी गई थी और पार्टी ने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था।

नई दिल्ली. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किये गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिए हैं। दस्तावेजों में कहा गया है कि राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। दस्तावेजों में कहा गया है कि विमान के लिए रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई थी। भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत भी की। दस्तावेजों में कहा गया है कि सौदा नियमों के मुताबिक हुआ। जिसके लिए 74 बैठकें हुई थीं। दस्तावेजों में कहा गया कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत तकरीबन एक साल तक चली और समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मंत्रीमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी ली गई।इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने राफेल सौदे की निर्णय प्रक्रिया का पूरा विवरण प्रस्तुत किया था। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की बेंच ने केंद्र से निर्णय लेने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी थी। बता दें राफेल सौदे में लड़ाकू विमान की कीमतों को लेकर विपक्षी पार्टियां शुरू से ही केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। मामले की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच कर रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि वह डिफेंस फोर्सेज के लिए राफेल विमानों की उपयुक्तता पर कोई राय नहीं देना चाहते और न ही कोई नोटिस जारी कर रहे हैं। कोर्ट केवल फैसला लेने की प्रक्रिया की वैधता जानना चाहता है।
इस सौदे का विरोध कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी का कहना है कि सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति राफेल की दर से विमान खरीद रही है जबकि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान इसकी कीमत 526 करोड़ रुपये तय हुई थी।

नई दिल्ली.  भारत और मोरक्को ने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देश आपराधिक मामलों में एक दूसरे की सहायता करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद प्रदान करेंगे। गृह मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी।  भारत की ओर से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू और मोरक्को की ओर से न्याय मंत्री मोहम्मद औजर ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहयोग पर समझौता किया।
गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि समझौते से मोरक्को के साथ द्विपक्षीय सहयोग मजबूत होगा। अपराधों की रोकथाम, जांच और मुकदमे के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने में मदद मिलने के साथ ही आतंकवादी कृत्यों को वित्तीय मदद का पता लगाने, रोकने और इसे जब्त करने में सहायता भी मिलेगी। बयान में कहा गया है कि दोनों मंत्रियों ने संगठित अपराध और आतंकवाद से पैदा होने वाली चुनातियों का संयुक्त तौर पर मुकाबला करने के प्रति संकल्प जताया ।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राम की नगरी अयोध्या और कृष्ण की नगरी मथुरा को तीर्थ स्थान घोषित कर वहां मांस-मदिरा की बिक्री तथा सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है ।  उप्र सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने सोमवार को 'भाषा' से विशेष बातचीत में कहा 'साधु संतों और करोड़ों भक्तों की मांग थी कि राम और कृष्ण की नगरी में मांस-मदिरा की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाया जाये । उनकी मांग का सम्मान करते हुये प्रदेश सरकार अयोध्या की चौदह कोसी परिक्रमा के आसपास के इलाके और मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्म स्थान के आसपास के इलाके को तीर्थ स्थान घोषित करने की योजना पर काम कर रही है। जब ये दोनों स्थान तीर्थ स्थान घोषित हो जायेंगे तो यहां स्वत: ही मांस-मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लग जायेगा । बिना तीर्थ स्थान घोषित किये इन दोनों स्थानों पर मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाना संभव नही है ।' 
 उन्होंने कहा 'अयोध्या और मथुरा में मांस-मदिरा पर प्रतिबंध की मांग को सरकार ने गंभीरता से लिया है और इन दोनों जगहों को तीर्थ स्थान घोषित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।’’ ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अयोध्या में चौदह कोसी परिक्रमा का इलाका, मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्म स्थान के आसपास के इलाके को तीर्थ स्थान घोषित कर यहां पर मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाये जाने की योजना है । 

शर्मा के मुताबिक, मथुरा में वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गिरिराज जी :गोर्वधन: की सप्त कोषी परिक्रमा का इलाका पहले से ही तीर्थस्थान घोषित है और वहां मांस-मदिरा की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध है ।
गौरतलब है कि छह नवंबर को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया है। संतों ने मांग की थी कि अयोध्या में मांस-मदिरा की बिक्री भगवान राम का अपमान है और इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। 

Ads

R.O.NO. 13784/149 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक