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नयी दिल्ली। भाजपा के पूर्व नेता और विचारक के एन गोविंदाचार्य ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि 1993 के कानून में सरकार अध्यादेश के द्वारा संशोधन करके राम जन्मभूमि परिसर की पूरी जमीन का अधिग्रहण करे जिससे अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हो सके। पत्र में गोविंदाचार्य ने कहा है कि "राम जन्मभूमि की 2.77 एकड़ जमीन समेत पूरे परिसर की 67 एकड़ भूमि का स्वामित्व 1993 से केंद्र सरकार के पास है। केंद्र ने इसके लिए कानून बनाया था जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने 1994 के फैसले में मान्यता भी दे दी थी। भूमि के मिल्कियत विवाद में सरकार को भूमि अधिग्रहण का पूरा अधिकार है।"

गोविंदाचार्य ने कहा है कि "तत्कालीन नरसिंहा राव सरकार द्वारा बनाए गए उपरोक्त कानून में भूमि के इस्तेमाल पर लगाई गई पाबंदियों को भी उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया था। इसी वजह से मंदिर निर्माण में संवैधानिक अड़चन आ रही है।" उन्होंने मांग की है कि 1993 के कानून में सरकार अध्यादेश के द्वारा संशोधन करके राम जन्मभूमि परिसर की पूरी जमीन का अधिग्रहण करे जिससे रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हो सके। भाजपा के पूर्व नेता ने सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति के रिकॉर्ड समय में निर्माण के लिए देशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि "इसी तेजी के साथ अयोध्या में श्री राम मंदिर जन्म भूमि पर मंदिर का निर्माण भी हो जाए तो जनता द्वारा आपके लिए दिया गया ऐतिहासिक जनादेश सार्थक होगा।" 
 
गोविंदाचार्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2011 में लगाई गई रोक और इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू नहीं होने का उल्लेख करते हुए सरकार से इस मामले में औपचारिक पक्षकार बनकर पूरा पक्ष प्रस्तुत करने की मांग की है। गोविंदाचार्य ने कहा है कि सिविल प्रोसिजर कोड कानून के तहत जमीन की मिल्कियत के मुकदमे में भू स्वामी का पक्षकार होना जरूरी है तो फिर इस मुकदमे में केंद्र सरकार पार्टी बनकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त क्यों नहीं करती।गोविंदाचार्य ने कहा है कि राम की ऐतिहासिकता को अदालतों ने माना है और वर्तमान मामला सिर्फ भूमि की मिल्कियत का है। गर्भगृह के समीप स्थानों की पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में रामलला के प्राचीन मंदिर के अनेक अवशेष और प्रमाण मिले हैं। 

कोलकाता। कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘‘एक सफेद घोड़े पर हाथ में तलवार लेकर बैठा हीरो’’ करार दिया।गत रविवार को थरूर ने बेंगलुरु साहित्य महोत्सव में दावा किया था कि एक आरएसएस नेता ने मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की थी। थरूर के इस बयान पर विवाद हो गया था।मोदी पर की गई थरूर की कथित ‘बिच्छू’ वाली टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ शनिवार को दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया गया।थरुर ने एक बार फिर मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘‘एक सफेद घोड़े पर हाथ में तलवार लेकर बैठा हीरो’’ करार दिया जो कहता है कि ‘‘मैं सारे जवाब जानता हूं।’’ 

कांग्रेस सांसद ने एक औद्योगिक संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘मोदी एक व्यक्ति की सरकार हैं और हर कोई उनके इशारे पर नाच रहा है।’’ उन्होंने कहा कि भारत में अभी इतिहास का ‘‘सबसे केंद्रीकृत प्रधानमंत्री कार्यालय’’ है।थरूर ने कहा, ‘‘हर फैसला पीएमओ करता है। हर फाइल मंजूरी के लिए पीएमओ भेजी जाती है।’’ अगले लोकसभा चुनावों के मुद्दे पर थरूर ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों के बीच चुनाव से पहले और चुनाव के बाद गठबंधन होंगे, लेकिन ‘‘हो सकता है’’ कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद का ‘‘चेहरा नहीं हों।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव अहम है, जिसमें भाजपा को दूसरा कार्यकाल नहीं मिलने वाला।
 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर फैसला सामूहिक रूप से होगा और ‘‘हो सकता है कि वह (राहुल गांधी) नहीं हों।’’ थरूर ने कहा, ‘‘भाजपा के मुकाबले कांग्रेस में बहुत वरिष्ठ नेता हैं। हमारे पास प्रणब मुखर्जी जैसे लोग थे। पी.चिदंबरम एवं अन्य हैं, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए राहुल गांधी नेता के तौर पर सर्वमान्य हैं और इस पर कोई सवाल नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच निष्पक्ष चुनाव हो तो राहुल गांधी स्पष्ट तौर पर जीतेंगे।’’ मोदी सरकार की आलोचना जारी रखते हुए थरूर ने कहा कि एक अत्यंत-केंद्रीकृत और अक्षम सरकार देश चला रही है तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में कुछ भी सकारात्मक नहीं है।
 
उन्होंने नोटबंदी, रुपए के कमजोर होने, सांप्रदायिकता, गोरक्षकों की हिंसा, भीड़ हत्या जैसी घटनाओं के लिए भी मोदी सरकार की आलोचना की। थरूर ने एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि मूर्तियां स्थापित करना और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाना केंद्र की मोदी सरकार की ‘‘नाकामियों’’ से लोगों का ध्यान हटाने की चाल है।उन्होंने कहा, ‘‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे ध्यान भटकाने वाले हैं। मैं भारत के लोगों से अपील करूंगा कि वे ध्यान भटकाने वाले मुद्दों से दूर रहें और भारतीयों की जिंदगी और वास्तविकताओं पर ध्यान दें। वास्तविकता यह है कि भारतीय आम आदमी पिछले साढ़े चार साल से परेशान है।’’ 

जयपुर। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (राजग) के घटक के रुप में लड़ना चाहती है और उसने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में 15 सीटों पर दावेदारी की है। प्रदेश लोजपा अध्यक्ष सूरज कुमार बुराहड़िया ने गुरूवार को संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी राजग के घटक के रुप में भाजपा के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है। लोजपा पदाधिकारी हाल ही में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन सैनी से मिले थे और 15 सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी उतारने की मांग की थी।

उन्होंने बताया कि 15 सीटों की पार्टी की मांग पर भाजपा से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है लेकिन सैनी ने केन्द्रीय नेतृत्व का हवाला देते हुए उन्हें आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिये पार्टी अलवर ग्रामीण, उदयपुरवाटी, झुंझुनूं, वैर, मालपुरा, निवाई, टोंक हिंडौन सहित प्रदेश की 15 सीटों पर फोकस कर रही है। इस संबंध में उन्होंने लोजपा प्रमुख एवं केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करने का आग्रह किया है और संभवतया दीपावली से पहले कोई निर्णय हो जायेगा।

बुराहडिया ने कहा कि यदि भाजपा के साथ सहमति नहीं बनती है तो लोजपा राजस्थान में सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से अपने प्रत्याशी उतारेगी। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी ने पूरी तरह कमर कस ली है। उन्होंने बताया कि लोक जनशक्ति के सुप्रीमों व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को संसद में पुनः अध्यादेश के माध्यम से लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसके सार्थक परिणाम चुनाव में देखने को मिलेंगे। दलित सेना के प्रदेशाध्यक्ष महेन्द्र कुमार ओझा ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोग हमेशा से ही चुनावों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे है।

देहरादून। योग गुरु रामदेव ने अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने की शनिवार को कड़ी वकालत की और कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय मामले में जल्द फैसला नहीं देता तो संसद में कानून लाया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने गत 29 अक्टूबर को अयोध्या भूमि विवाद मामले में तत्काल सुनवाई किए जाने से इनकार कर दिया था। इसने कहा था कि एक ‘‘उचित पीठ’’ जनवरी में फैसला करेगी कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में कब सुनवाई की जाए।

इसके बाद विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की मांग तेज होने लगी है।रामदेव ने पतंजलि योग पीठ में दो दिवसीय सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि मामले में शीर्ष अदालत जल्द फैसला नहीं देती है तो लोकतंत्र में संसद सर्वोच्च संस्थान है और कानून लाने में कुछ भी गलत नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनेगा तो और क्या बनेगा।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टाइल का खादी 'कुर्ता-जैकेट' युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खादी ग्रामोद्योग की खादी की सात दुकानों से रोजाना 1,400 कुर्ता-जैकेट बिक रहे हैं। खादी इंडिया ने प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर 17 सितंबर को कनॉट प्लेस स्थित अपने स्टोर में 'मोदी जैकेट' और 'मोदी कुर्ता' की एक श्रृंखला पेश की थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन वी के सक्सेना ने पीटीआई-भाषा से कहा कि हमारी 'मोदी कुर्ता-जैकेट' श्रृंखला को धीरे-धीरे देश भर के और भी दुकानों में पेश करने की योजना है। कनॉट प्लेस स्थित दुकान की अक्टूबर 2018 में कुल बिक्री रिकॉर्ड 14.76 करोड़ रुपये रही। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 34.71 प्रतिशत अधिक है। 
 
सक्सेना ने कहा, "खादी इंडिया के दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, जोधपुर, भोपाल, मुंबई और एर्नाकुलम में हर केंद्र पर 'मोदी कुर्ता-जैकेट' के रोजाना दो सौ पीस बिक रहे हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खादी को अपनाने के आह्वान के चलते स्वदेशी कपड़ों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इससे लोगों खासकर युवाओं में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है।

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक दल जीत के लिए दिन रात एक कर रहे हैं। ऐसे में बसपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दावा किया है कि राज्य में इस बार उनकी पार्टी अपने 34 साल के इतिहास का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए कम से कम 32 सीटें जीतेगी और सत्ता की चाबी बसपा के पास रहेगी। मध्यप्रदेश बसपा अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने ‘भाषा’ के साथ बातचीत में राज्य में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने की भविष्यवाणी के साथ ही अपनी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘‘हम कम से कम 32 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे और सत्ता की चाबी बसपा के पास रहेगी। कुल मिलाकर 75 सीटों पर हमारी स्थिति पहले से बहुत अच्छी है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2003 में बसपा ने राज्य विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीती थीं, 2008 में सात और 2013 में चार सीटें जीती थीं। इस बार प्रदेश में 15 साल से सत्ता पर काबित भाजपा के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर एवं दलित एकता के चलते हम अच्छी जीत की स्थिति में हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में एक सीट लेने वाला निर्दलीय भी कभी-कभी मुख्यमंत्री बन जाता है। मैं तो कम से कम 32 सीटों पर बसपा की जीत की उम्मीद के साथ आपको यह बता रहा हूं। हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश की सत्ता की धुरी बहनजी :बसपा सुप्रीमो मायावती: के आजू-बाजू रहे, लेकिन यह तय है कि खंडित जनादेश आने पर हम भाजपा को समर्थन नहीं करेंगे।’’ 
 
उन्होंने बताया, ‘‘पिछले चुनाव में प्रदेश के पांच जिलों मुरैना, रीवा, सतना, दतिया एवं ग्वालियर में बसपा का दबदबा था। इस बार भी इन जिलों की कुछ सीटों से हम जीतेंगे। इसके अलावा छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, श्योपुर, दमोह, कटनी, बालाघाट एवं सिंगरौली जिलों में भी पार्टी का खाता खुलने की पूरी उम्मीद है।’’ वर्ष 2008 के राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 8.97 प्रतिशत रहा था, जो 2013 में करीब ढाई प्रतिशत गिरकर 6.29 प्रतिशत रह गया। अहिरवार ने इस बार पार्टी को 10 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने का दावा किया। 
 
इसकी वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया, ‘‘फिलहाल माहौल अलग है। दलित वर्ग अपने अधिकारों के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक है और अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए वह बसपा पर भरोसा करेंगे। राज्य में पिछले वर्ष के किसान आंदोलन के खिलाफ भाजपा सरकार ने जो कदम उठाए थे, उसकी वजह से किसान भी इस सरकार के खिलाफ हैं।’’ 
 
प्रदेश में जबर्दस्त सत्ता विरोधी लहर का दावा करते हुए अहिरवार ने कहा कि पिछले 13 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सरकार की हालत खराब है। चौहान दो सीटों से चुनाव लड़ने वाले हैं। चौहान जिस बुधनी विधानसभा सीट से जीतते हैं, वहां वह मतदाताओं की नाराजगी के चलते चुनाव सभा तक नहीं कर पा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि हम पहली बार मध्य प्रदेश में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ना ही पार्टी का इतिहास रहा है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि विपक्षी दल जहां अपनी-अपनी मिल्कियत बचाने के लिए आपस में हाथ मिला रहे हैं, वहीं भाजपा ने देश की तकदीर बदलने के लिए काम किया है। उन्होंने कुछ विपक्षी नेताओं को ‘‘झूठ की मशीन’’ करार दिया और कहा कि "वे एके-47 के फायर की तरह झूठ दागते हैं।" मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे विपक्षी दलों के गठबंधन से चिंतित न हों क्योंकि लोग उन्हें स्वीकार नहीं करते और यहां तक कि उनके नकारात्मक कार्यों, देश के अच्छे कार्यों को नकारने और सेना के लिए ‘‘अपशब्द तथा अपमानजनक शब्दों’’ के चलते उनसे "नफरत" करते हैं।

प्रधानमंत्री ने हालांकि किसी विपक्षी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन भाजपा अकसर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल सौदे पर उनके कथित झूठ को लेकर हमला बोलती रही है। पार्टी गांधी पर प्राय: देश तथा सेना का अपमान करने का आरोप भी लगाती रही है।विपक्षी दलों को निशाना बनाने वाली मोदी की यह टिप्पणी तब आई जब एक भाजपा कार्यकर्ता ने वीडियो वार्ता के दौरान वामपंथी और कांग्रेस जैसे ‘‘राष्ट्र विरोधी’’ दलों के एकजुट होने पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछा था।पांच लोकसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं से बातचीत में एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने विपक्षी दलों पर अपनी सरकार के खिलाफ झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों के पास अब सही सूचना पाने के लिए अनेक साधन हैं।
 
मोदी ने कहा, ‘‘कुछ नेता झूठ की मशीन की तरह हैं। वे जब भी अपना मुंह खोलते हैं, एके-47 के फायर की तरह झूठ दागते हैं।’’ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों तक सही सूचना पहुंचाकर उनके (विपक्षी नेताओं) झूठ का खुलासा करें।कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की ऊंची छलांग और अपने द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए कुछ कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि ‘‘एक अच्छे’’ समय की शुरुआत हुई है और प्रदर्शन तथा प्रगति के मामले में भारत की क्षमता अब बढ़ रही है।प्रधानमंत्री ने कहा कि करोबार सुगमता में भारत की रैंकिंग 142वें स्थान से 77वें स्थान पर आ गई है और यह देश के विकास और सुधारों को एक मान्यता है।

लखनऊ। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने अयोध्‍या में राम मंदिर के निर्माण के लिये वर्ष 1992 जैसा ही आंदोलन शुरू करने के राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के इरादे को मुल्‍क के लिये बेहद खतरनाक बताते हुए आज कहा कि मंदिर को लेकर अचानक तेज हुई गतिविधियां पूरी तरह राजनीतिक हैं। एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने बातचीत में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर हिन्‍दूवादी संगठनों द्वारा अचानक तेज की गयी गतिविधियों के बारे में कहा कि जहां तक मंदिर निर्माण को लेकर तथाकथित हिन्‍दूवादी संगठनों में बेचैनी का सवाल है, तो साफ जाहिर है कि यह सियासी है। आगामी लोकसभा चुनाव को सामने रखकर यह दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन वे संगठन दरअसल क्‍या करेंगे, अभी तक इसका सही अंदाजा नहीं है।

 
मंदिर निर्माण के लिये वर्ष 1992 जैसा व्‍यापक आंदोलन छेड़ने के संघ के इशारे के बारे में रहमानी ने कहा कि संघ अगर आंदोलन शुरू करता है तो यह बहुत खतरनाक होगा। इससे मुल्‍क में अफरातफरी का माहौल पैदा हो जाएगा। इस आशंका का कारण पूछे जाने पर उन्‍होंने बताया कि वर्ष 1992 में हिन्‍दुओं और मुसलमानों के बीच नफरत इतनी ज्‍यादा नहीं थी। हाल के सालों में दोनों के बीच खाई बहुत गहरी हो गयी है।
 
विश्‍व हिन्‍दू परिषद, अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दू परिषद समेत तमाम हिन्‍दूवादी संगठनों और साधु-संतों द्वारा मंदिर निर्माण के लिये अध्‍यादेश लाने या कानून बनाने को लेकर सरकार पर दबाव बनाये जाने के बारे में पूछे गये सवाल पर मौलाना रहमानी ने कहा कि कुछ कानूनविदों के मुताबिक इस मसले पर अभी कोई अध्‍यादेश या संसद का कानून नहीं आ सकता। अब सरकार क्‍या करेगी और उसके क्‍या नतीजे होंगे, यह नहीं कहा जा सकता।
 
हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि हाल में सेवानिवृत्‍त हुए न्‍यायमूर्ति जे. चेलमेश्‍वर ने चंद दिन पहले मुम्‍बई में एक कार्यक्रम में कहा था कि मंदिर निर्माण को लेकर अध्‍यादेश लाना या संसद से कानून पारित कराया जाना नामुमकिन नहीं है। बोर्ड का शुरू से ही स्‍पष्‍ट नजरिया है कि आपसी सहमति से मसला हल करने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद वह अयोध्‍या विवाद पर उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय को ही मानेगा।
 
इस बीच, देश में मुसलमानों के सबसे बड़े सामाजिक संगठन माने जाने वाले जमीयत उलमा-ए-हिन्‍द की उत्‍तर प्रदेश इकाई के अध्‍यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने कहा कि अयोध्‍या मामले को लेकर तेज हुई गतिविधियों पर उनका एक ही जवाब है कि मामला अदालत में है इसलिये सभी को सब्र से काम लेते हुए अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिये। उसका जो भी निर्णय हो, उसे कुबूल करना चाहिये। मुल्‍क में अमन और सलामती इसी तरह रहेगी। उन्‍होंने कहा कि हठधर्मिता से देश को नुकसान होगा। हमारी अपील है कि इस मामले में जज्‍बात से काम न लेकर हालात की नजाकत को समझते हुए काम किया जाए।
पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय ज्ञानकुंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उद्घाटन किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 9 बजकर 15 मिनट पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। जहां से वह एमआई-17 हेलीकॉप्टर से पतंजलि के लिए रवाना हो गए। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इसके बाद हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ पहुंचकर राष्ट्रपति ने ज्ञानकुंभ का उद्घाटन किया। मंच का संचालन श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने किया। राष्ट्रपति के साथ देश की प्रथम महिला सविता कोविंद भी हरिद्वार पहुंची हैं।
 
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कार्यक्रम में कहा देवभूमि उत्तराखंड के खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण के बीच ज्ञानकुंभ में आकर हर्ष महसूस हो रहा है। हरिद्वार कुंभ के आयोजन की पावन भूमि रही है। आधुनिक ज्ञान और शिक्षा में योग के महत्व को बढ़ाने में स्वामी रामदेव का योगदान महत्वपूर्ण है। आज भारत और विश्व में योग को घर-घर अपनाया जा रहा है। शिक्षा से मेरा आत्मिक जुड़ाव रहा है। इस आयोजन का मकसद उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। यहां दो दिन में उच्च शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सार्थक विमर्श के लिए मेरी शुभकामनाएं हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूचि में शिक्षा को अनिवार्य स्थान दिया गया है। यह केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारी है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की अहम जिम्मेदारी प्रबंधन और शिक्षकों पर अधिक होती है। हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा जरूर होती है। बच्चों को ज्ञान देने के साथ ही संस्कार देना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। हमारे देश मे आदर्श शिक्षकों के अनेक प्रेरक उदाहरण मौजूद हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को शिक्षा और शिक्षा के महत्व की जीती जागती मिसाल हैं। डॉ. कलाम के अंदर का शिक्षक सदैव सक्रिय रहा। राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होते ही वह दोबारा अपने शिक्षण के काम के लग गए। महामना मदन मोहन मालवीय के बिना उच्च शिक्षा को सोचना अधूरा है।उन्होंने कहा किभारतीय विश्विद्यालय में भी रशियन स्टडीज़ आदि के केंद्र स्थापित किये जाने की आवश्यकता है।
इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि ज्ञानकुंभ के माध्यम से हमें भारत को वैभवशाली बनाना है। उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ से पहले ज्ञानकुंभ पर सभी का स्वागत किया। कहा कि इस ज्ञानकुंभ से देश मे एक नए प्रकाश का आरोहण होगा। जैसे हमने योग की क्रांति की है, वैसे ही ज्ञान की क्रांति से भारत का डंका पूरी दुनिया में बजाना है।
 

केंद्र सरकार पर लगातार राम मंदिर निर्माण के लिए साधु-संत दबाव बना रहे हैं। शुक्रवार को आरएसएस के सरकार्यवाह ने भी सरकार से इस मसले पर अध्यादेश लाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय से न्याय मिलने में देरी हो रही है और सभी चाहते हैं कि राम मंदिर बने। इस मामले पर अब उच्चतम न्यायालय के पूर्व जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर का बयान आया है। उनका कहना है कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार इसपर कानून बना सकती है।

 

जस्टिस चेलमेश्वर ने कांग्रेस पार्टी से जुड़े संस्थान ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस की एक परिचर्चा सत्र के दौरान कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं। जस्टिस चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है।

इस साल की शुरुआत में जस्टिस चेलमेश्वर उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को परिचर्चा सत्र में जब चेलमेश्वर से पूछा गया कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान क्या संसद राम मंदिर के लिए कानून पारित कर सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘यह एक पहलू है कि कानूनी तौर पर यह हो सकता है (या नहीं)। दूसरा यह है कि यह होगा (या नहीं)। मुझे कुछ ऐसे मामले पता हैं जो पहले हो चुके हैं, जिनमें विधायी प्रक्रिया ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में अवरोध पैदा किया था।’ चेलमेश्वर ने कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय का आदेश पलटने के लिए कर्नाटक विधानसभा द्वारा एक कानून पारित करने का उदाहरण दिया। उन्होंने राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद से जुड़ी ऐसी ही एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘देश को इन चीजों को लेकर बहुत पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था। यह (राम मंदिर पर कानून) संभव है, क्योंकि हमने इसे उस वक्त नहीं रोका।’

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