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  • एस्कोर्ट्स मुजेसर से बल्लभगढ़ तक हाई स्पीड में मेट्रो का किया अंतिम ट्रॉयल

फरीदाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 नवंबर काे दोपहर 1.11 बजे गुड़गांव के सुल्तानपुर से रिमोट के जरिए बल्लभगढ़ मेट्राे सेवा का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम का यहां लाइव प्रसारण किया जाएगा। तैयारियों को लेकर सोमवार को बल्लभगढ़ के विधायक मूलचंद शर्मा, हुडा के मुख्य प्रशासक जी. गणेशन, डीसी अतुल कुमार, नगर निगम के चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर समेत अन्य अधिकारियों ने मेट्रो स्टेशन का  दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया।  

 सोमवार को एस्कोर्ट्स मुजेसर से बल्लभगढ़ तक हाई स्पीड में मेट्रो का अंतिम ट्रॉयल किया गया। ट्रॉयल पूरी तरह से सफल रहा। करीब 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 4 से 5 बार ट्रॉयल किया गया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण बल्लभगढ़ में भी किया जाएगा।

 कार्यक्रम स्थल पर प्रोजेक्टर के जरिए प्रसारण होगा। लाइव प्रसारण दोपहर 12.30 बजे से शुरू कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री 12.30 बजे मंच पर पहुंच जाएंगे। करीब एक घंटे 1.30 बजे तक प्रधानमंत्री मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मग्गू सिंह, विधायक मूलचंद शर्मा शिरकत करेंगे। 

 12 से 15 हजार यात्री करेंगे सफर : रेलवे सूत्रों के मुताबिक बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए रोज करीब 13 हजार दैनिक यात्रियों का दिल्ली आना-जाना है। जबकि रोडवेज बसों से करीब 10 से 12 हजार यात्री आते जाते हैं। मेट्रो सेवा शुरू होने से रेलवे और रोडवेज बसों के करीब 8 से 10 हजार यात्री मेट्रो की ओर मुड़ेंगे।

मेट्रो अधिकारियों का अनुमान है कि बल्लभगढ़ से रोज 12 से 15 हजार यात्री मेट्रो से सफर करेंगे। इनमें निजी साधनों से दिल्ली जाने वाले लोग भी शामिल होंगे। इस मेट्रो का फायदा बल्लभगढ़ ब्लॉक से जुड़े 67 ग्राम पंचायतों के यात्रियों को भी होगा। 

 छह से सात मिनट की रहेगी फ्रीक्वेंसी : मेट्रो सूत्रों का कहना है कि बल्लभगढ़ मेट्रो रेल की फ्रीक्वेंसी छह से आठ मिनट के बीच होगी। अभी वाईएमसीए से चलने वाली मेट्रो रेल की फ्रीक्वेंसी पीक आवर्स (सुबह 8 से 11 बजे, शाम 5 से 8 बजे) में 6 मिनट 40 सेकेंड और नॉन पीक आवर्स में 7 मिनट 30 सेकेंड की होती है।बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन पहला एेसा स्टेशन होगा जिसके 300 मीटर के दायरे में लोगों को रोडवेज, रेलवे और मेट्रो परिवहन की सुविधा मिलेगी।

 
  • सूत्रों के मुताबिक पिछले शुक्रवार को दिल्ली में बैठक हुई
  • एमएसएमई को कर्ज के मुद्दे पर सहमति के संकेत, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के मुद्दे पर स्थिति साफ नहीं
  • आरबीआई और सरकार के बीच कैपिटल फ्रेमवर्क, केंद्रीय बैंक की स्वायतत्ता को लेकर विवाद
     

नई दिल्ली. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल पिछले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले। सूत्रों से हवाले से सोमवार को यह जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि मोदी और उर्जित पटेल की मीटिंग में सरकार और रिजर्व बैंक के बीच चल रहे विवाद सुलझाने पर चर्चा हुई। 

 

सूत्रों के मुताबिक ऐसे संकेत मिले हैं कि आरबीआई लघु और मध्यम उद्योगों को कर्ज देने के लिए विशेष इंतजाम कर सकता है। नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने और आरबीआई के सरप्लस में से सरकार को रकम जारी करने के मुद्दे पर स्थिति साफ नहीं हो पाई।

आरबीआई का सरप्लस हो सकता है विवाद की वजह

  1.  

    पिछले हफ्ते कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने आरबीआई के सरप्लस में से 3.6 लाख करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन, आरबीआई ने इसे नहीं माना। उसका कहना था कि इससे माइक्रो इकोनॉमी को खतरा हो सकता है।

     

  2.  

    आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने जवाब देते हुए कहा था कि सरकार को फंड की कोई जरूरत नहीं है। आरबीआई को 3.6 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

     

  3.  

    पिछले दिनों सरकार ने आरबीआई की धारा 7 का इस्तेमाल करते हुए रिजर्व बैंक को तीन पत्र भेजे थे। इसके बाद सरकार और आरबीआई के बीच विवाद बढ़ गया। यह खबर भी आई कि सरकार धारा 7 लागू करती है तो उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं।

     

  4.  

    अक्टूबर में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि सरकार को केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता बढ़ानी चाहिए। जो सरकार इसका ध्यान नहीं रखती उसे नुकसान उठाना पड़ता है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि मौजूदा विधानसभा चुनाव साधारण चुनाव नहीं हैं बल्कि देश के लिए "बहुत महत्वपूर्ण" हैं क्योंकि इनमें पार्टी की जीत से नरेंद्र मोदी सरकार की 2019 में सत्ता में वापसी के लिए मजबूत नींव तैयार होगी और पार्टी लंबे समय के लिए "अजेय" हो जाएगी। शाह ने चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को वीडियो के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि भारत को महान और विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए भाजपा का पंचायत से लेकर संसद तक लंबा और निर्बाध शासन होना चाहिए जैसा कांग्रेस को 30 साल से ज्यादा समय तक मिला था।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बहुत कुछ किया लेकिन दशकों के लंबे कांग्रेस शासनकाल के बाद ‘‘कुव्यवस्था’’ से देश को बाहर निकालने के लिए तथा इसे आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बनाने के लिए पांच साल पर्याप्त नहीं हैं। विधानसभा चुनाव पांच राज्यों में हो रहे हैं और इनमें से तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा सत्ता में है तथा उसका काफी कुछ दांव पर है। भाजपा 2003 से ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता में है। उसके प्रतिद्वंद्वियों का मानना ​​है कि तीन राज्यों में उसके प्रदर्शन में ज्यादा गिरावट आने से अगले साल के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष को नयी ऊर्जा मिल जाएगी।
 
तेलंगाना और मिजोरम दो अन्य चुनावी राज्य हैं। शाह ने मध्य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सिर्फ जीत के लिए काम नहीं करें बल्कि ऐसी भारी जीत के लिए काम करें जिससे मतों की गिनती के दिन भाजपा के प्रतिद्वंद्वियों का जोश ठंडा हो जाए। उन्होंने कहा कि 2018 के चुनावों को सामान्य चुनाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण चुनाव हैं क्योंकि इसके बाद 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्र में दो बार सत्ता में रही है- पहले अटल बिहारी वाजपेयी के तहत और अब मोदी के तहत। मौजूदा सरकार को पुननिर्वाचित करने से देश तेजी से आगे बढ़ेगा। 
 
शाह ने कहा कि 2019 के चुनावों में जीत से भाजपा लंबे समय तक पंचायत से लेकर संसद तक अजेय हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें पक्का भरोसा है कि अजेय भाजपा से खुशहाल, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद पार्टी को कई चुनावों में मिली जीत का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि यह मोदी के नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं की कठोर मेहनत का नतीजा है।
 
उन्होंने कांग्रेस पर घुसपैठियों और नक्सलियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया तथा कहा कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को इन मुद्दों पर अपनी पार्टी का रूख स्पष्ट करना चाहिए। शाह ने कहा कि यदि 2019 में भाजपा सत्ता में आयी तो उसकी सरकार घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है कि राज्य को कैसे चलाया जाना चाहिए। शाह ने कहा कि चौहान ने "बीमारू" मध्य प्रदेश को एक विकसित राज्य में बदल दिया और उनकी सरकार का मकसद अपने अगले कार्यकाल में इसे देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक बनाना है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भाजपा के विकास एजेंडे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राज्य सरकार के कार्यों, मोदी के संदेश और पार्टी की विचारधारा को हर घर तक पहुंचाने को कहा।
 

भारत की राजनीति में राफेल विवाद ने भूचाल मचा कर रख दिया है। लड़ाकू विमान राफेल की खरीदारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। राहुल ने कहा की मोदी जी ने राफेल डील में बड़ा घोटाला किया है उन्होंने अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाया और अंबानी से बड़ी डील की। विपक्ष ने राफेल को लेकर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। राहुल गांधी ने फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसके बाद दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर खुद सामने आये और उन्होंने  राहुल गांधी के सभी आरोपो को खारिज करते हुए राहुल गांधी के सभी आरोपो का करारा जबाव दिया।

समाचार एजेंसी एनएनआई के साथ दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कई खुलासे भी किये। ट्रैपियर ने कहा कि राफेल डील में दसॉल्ट एविएशन और रिलायंस ज्वाइंट वेंचर के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर मैंने झूठ नहीं बोला। इसके साथ ही ट्रैपियर ने साफ किया कि हमने रिलायंस को खुद चुना, इसके अलावा 30 साझेदार और हैं। राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ''मैं झूठ नहीं बोलता. मैंने जो बात पहले कही और जो बयान दिया बिल्कुल सही हैं। मैं झूठ बोलने के लिए नहीं जाना जाता। मेरे पद पर आप झूठ नहीं बोल सकते।''

 
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने आगे कहा कि हमाने पहले कांग्रेस पार्टी के साथ भी सौदा किया था लेकिन जो राहुल गांधी ने आरोप लगाए है उससे हमें दुख पहुंचा है। ट्रैपियर ने कहा, ''कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का हमारा लंबा अनुभव है। हमारी पहली डील 1953 में प्रधानमंत्री नेहरू के साथ थी। इसके बाद भी हमने कई प्रधानमंत्रियों के साथ डील की। हम भारत के साथ काम कर रहे हैं, किसी पार्टी के साथ नहीं. हम भारतीय वायुसेना और भारत सरकार को सामरिक उत्पाद जैसे लड़ाकू विमान सप्लाई कर रहे हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण है।''
 
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के बयान सामने आने के बाद राफेल विवाद एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है कि अब कौन सच्चा है और कौन झूठा। 
 
 
आपको बता दें कि केन्द्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि फ्रांस से 36 लड़ाकू राफेल विमानों की खरीद में 2013 की ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’ का पूरी तरह पालन किया गया और "बेहतर शर्तों" पर बातचीत की गयी थी। इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि इस सौदे से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने भी अपनी मंजूरी प्रदान की। गौरतलब है कि राफेल सौदे को लेकर देश में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है और कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष भाजपा नीत केंद्र सरकार पर लगातार हमले बोल रहा है। सरकार ने 14 पृष्ठों के हलफनामे में कहा है कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। इस हलफनामे का शीर्षक ‘‘36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का आदेश देने के लिये निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों का विवरण’’ है। केन्द्र ने राफेल विमानों की खरीद के सौदे की कीमत से संबंधित विवरण सीलबंद लिफाफे में न्यायालय में पेश किया। केन्द्र विमानों की कीमतों का विवरण देने को लेकर अनिच्छुक था और उसने कहा था कि इनकी कीमतों को संसद से भी साझा नहीं किया गया है। शीर्ष अदालत के 31 अक्टूबर के आदेश का पालन करते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया और कीमत का ब्यौरा पेश किया गया। न्यायालय अब दोनों दस्तावेजों पर गौर करेगा और बुधवार को सुनवाई करेगा। एक वरिष्ठ विधि अधिकारी ने बताया कि विभिन्न आपत्तियों के मद्देनजर सौदे के मूल्य का ब्यौरा न्यायालय में एक सीलबंद लिफाफे में दायर किया गया। अधिकारी अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे।

 दस्तावेज में कहा गया है कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है और मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने 24 अगस्त, 2016 को उस समझौते को मंजूरी दी जिस पर भारत और फ्रांस के वार्ताकारों के बीच हुयी बातचीत के बाद सहमति बनी थी। 2013 में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार थी। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इसके लिये भारतीय वार्ताकार दल का गठन किया गया था जिसने करीब एक साल तक फ्रांस के दल के साथ बातचीत की और अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सक्षम वित्तीय प्राधिकारी, मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति, की मंजूरी भी ली गयी। 23 सितंबर 2016 को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
 
राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राजग सरकार हर विमान को करीब 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि संप्रग सरकार जब 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर रही थी तो उसने इसे 526 करोड़ रुपये में अंतिम रूप दिया था। दस्तावेज में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दोहराए गए आरोपों का भी जिक्र किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑफसेट पार्टनर के रूप में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की एक कंपनी का चयन करने के लिए फ्रेंच कंपनी दसाल्ट एविएशन को मजबूर किया ताकि उसे 30,000 करोड़ रुपये ‘‘दिए जा सकें।’’ इसमें कहा गया है कि रक्षा ऑफसेट दिशानिर्देशों के अनुसार, कंपनी ऑफसेट दायित्वों को लागू करने के लिए अपने भारतीय ऑफसेट सहयोगियों का चयन करने के लिए स्वतंत्र है।

 दस्तावेज में विस्तार से कहा गया है कि क्यों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस सौदे में ऑफसेट पार्टनर बनने में नाकाम रही क्योंकि दसाल्ट के साथ उसके कई अनसुलझे मुद्दे थे। कांग्रेस ने कहा था कि राफेल मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में सरकार के जवाब से साबित हो गया कि सौदे को अंतिम रूप देने से पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी नहीं ली गई। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एक तरह से सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से विचार-विमर्श नहीं किया गया है।
 
क्या अनुबंध देने के बाद विचार-विमर्श करेंगे या पहले करेंगे?’’। सिंघवी ने आरोप लगाया कि सरकार राफेल मामले पर लोगों को गुमराह कर रही है। राफेल सौदे की जांच के लिये अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और फिर अधिवक्ता विनीत ढांडा ने याचिकाएं दायर कीं। इसके बाद, आप पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी अलग से एक याचिका दायर की। पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में एक संयुक्त याचिका दायर की है। 

वाराणसी. वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनगर में बने देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। मल्टी मॉडल टर्मिनल के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर गंगा में बने जेटी पर उतरा। यहां से वो पैदल चलते हुए बंदरगाह के टर्मिनल पर पहुंचे।उनके साथ सीएम योगी ओर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी रहे। इस दौरान उन्होंने  निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन को भी देखा।  इससे पहले वाराणसी एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व सत्यपाल सिंह के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय ने उनका स्वागत किया। 

जनसभा के बाद देर शाम वह दिल्ली रवाना हो जाएंगे। पीएम के हाथों लोकार्पित होने वाली परियोजनाओं के साथ ही शहर के प्रमुख स्थानों को सजाया संवारा गया है। वाराणसी का मल्टी मॉडल टर्मिनल नदियों पर बना पहला ऐसा टर्मिनल है, जो कंटेनर कार्गो हैंडलिंग में सक्षम होगा।
रामनगर से पीएम मोदी हेलीकॉप्टर से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से वो काफिले के साथ लोकार्पित होने वाली बाबतपुर फोरलेन को देखते हुए वाजिदपुर गांव में सभा स्थल पहुंचेंगे। बाबतपुर से वाजिदपुर के बीच रोड शो में प्रधानमंत्री जनता का अभिवादन करेंगे।
इस दौरान वहां मौजूद लोग पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत करेंगे। रोड शो की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जानकारी के मुताबिक करीब साढे़ तीन बजे प्रधानमंत्री का काफिला बाबतपुर से चलेगा और धीमी रफ्तार से आगे बढ़ेगा। सूत्रों की मानें तो पीएम इस दौरान गाड़ी से उतर कर कुछ दूर तक सड़क पर चहलकदमी भी कर सकते हैं।

काशीवासी प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए तैयार

अपने संसदीय क्षेत्र में 2413 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए काशी पूरी तरह तैयार है। दिवाली जैसा माहौल बनाने के लिए शहर में जगह-जगह एलईडी, फसाड और फोकस लाइट लगाई गई हैं। बड़ी इमारतों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों पर लाइटिंग कर उनकी खूबसूरती निखारी गई है। घाटों पर फसाड लाइट लगाई गई हैं। बाबतपुर फोरलेन, रिंग रोड, रामनगर के मल्टी मॉडल टर्मिनल और दीनापुर एसटीपी को रंगीन लाइट से जगमग कर दिया गया है।
बाबतपुर फोरलेन के पोल पर तिरंगी लाइट लगाई गई है। इसके अलावा फ्लाईओवर के नीचे के फव्वारे चला दिए गए हैं। बनारस की खूबसूरत तस्वीरों को भी जगह-जगह होर्डिंग के माध्यम से दिखाने की कोशिश की गई है। बनारस के पुल, पोल सहित अन्य जगहों पर एलईडी लाइटिंग की गई है। रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने चौराहों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के पास साफ-सफाई की।  इस बीच रविवार को गांव और शहर में जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को प्रधानमंत्री की वाजिदपुर में होने वाली सभा के लिए निमंत्रण पत्र दिए गए। 

पटना। केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के समर्थकों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान के विरोध में शनिवार को पटना में ‘‘आक्रोश मार्च’’ निकाला। गांधी मैदान से शुरू हुए मार्च को राज भवन पहुंचना था लेकिन पुलिस ने इसे गंतव्य से करीब दो किलोमीटर पहले डाक बंगला रोड चौराहे पर रोक दिया। इस दौरान हुई झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारी कुमार की कथित ‘‘नीच’’ टिप्पणी के खिलाफ बिहार के राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

यह मार्च तब आयोजित किया गया जब एक दिन पहले कुशवाहा ने यह स्पष्ट किया कि रालोसपा ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है ना कि जनता पार्टी (यूनाइटेड) के साथ। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कुमार ने रालोसपा प्रमुख को ‘‘नीच’’ कहा तथा उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग करते हुए नारे लगाए।

नयी दिल्ली। अयोध्या मामले से जुड़े प्रतिवेदनों पर 14 नवंबर को विचार करने से कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी ने कहा है कि विवादित स्थान पर राम मंदिर बनना चाहिए ताकि देश का मुसलमान ‘सुकून, सुरक्षा और सम्मान’ के साथ रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय को जल्द फैसला करना चाहिए ताकि देश में शांति और भाईचारा मजबूत हो सके। दरअसल, कुछ मुस्लिम संगठनों ने अयोध्या मामले का हवाला देते हुए आयोग के समक्ष प्रतिवेदन दे रखा है और इस मामले में आयोग से पहल करने की मांग की है।

अल्पसंख्यक आयोग 14 नवंबर को अपनी मासिक बैठक में इन प्रतिवेदनों पर विचार करेगा और फिर देश की शीर्ष अदालत से अयोध्या मामले पर जल्द फैसला सुनाने का आग्रह कर सकता है। रिजवी ने ‘भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘नेशनल माइनॉरिटी वेलफेयर आर्गनाइजेशन तथा कुछ अन्य संगठनों ने हमारे पास प्रतिवदेन देकर कहा है कि इस वक्त मुस्लिम समाज में डर का माहौल है और ऐसे में आयोग अयोध्या के मामले को लेकर पहल करे ताकि माहौल बेहतर हो सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन संगठनों का कहना है कि मुस्लिम समाज राम मंदिर बनने दे तथा आगे यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ऐसा कोई दूसरा कोई विवाद खड़ा नहीं होगा।’’

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मेरी भी यह राय है कि अयोध्या में न कभी मस्जिद बन सकती है, न नमाज हो सकती है। वह स्थान 100 करोड़ हिंदुओं की भावना से जुड़ा है। इसलिए वह जमीन राम मंदिर के लिए हिंदुओं को सौंप दी जानी चाहिए ताकि मुसलमान सुकून, सुरक्षा और सम्मान के साथ रहे सकें और देश के विकास में बराबर की भागीदारी कर सकें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘14 नवंबर की बैठक में हम इन प्रतिवेदनों पर चर्चा करेंगे। यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और ऐसे में आयोग सिर्फ यही आग्रह कर सकता है कि मामले में जल्द फैसला सुनाया जाए।’’रिजवी ने कहा, ‘‘इस मामले में मेरा भी यह मानना है कि न्यायालय को जल्द फैसला सुनाना चाहिए ताकि समाज में शांति और भाईचारा मजबूत हो सके।’’

गोण्डा (उ.प्र.)। अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने के लिये कानून लाने की तेज होती मांग और उस पर भाजपा नेताओं की प्रतिबद्धतापूर्ण प्रतिक्रियाओं के बीच इसी पार्टी की सांसद सावित्री बाई फुले ने उस स्थान पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा प्रतिष्ठापित करने की मांग की है। बहराइच से भाजपा की सांसद सावित्री ने शुक्रवार रात यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर अयोध्या में जब विवादित स्थल पर खुदाई की गयी थी, तो वहां तथागत से जुड़े अवशेष निकले थे। इसलिए अयोध्या में तथागत बुद्ध की ही प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं साफ करना चाहती हूँ कि बुद्ध का भारत था। अयोध्या बुद्ध का स्थान है। इसलिए वहां तथागत बुद्ध की ही प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए।’’
 
संघ के प्रचारक एवं भाजपा के राज्य सभा सदस्य राकेश सिन्हा द्वारा राम मंदिर निर्माण के पक्ष में एक निजी विधेयक लाए जाने संबंधी सवाल पर पार्टी सांसद ने कहा, ‘‘भारत का संविधान धर्म निरपेक्ष है, जिसमें सभी धर्मों की सुरक्षा की गारंटी दी गयी है। संविधान के तहत ही देश चलना चाहिए। सांसद या विधायक को भी संविधान के तहत ही चलना चाहिए।’’ भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब साधु-संत तथा विभिन्न तथाकथित हिन्दूवादी संगठन अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये कानून बनाने के लिये सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा अयोध्या के विवादित स्थल मामले पर नियमित सुनवाई अगले साल जनवरी तक टाले जाने के बाद से शुरू हुई इस कवायद के बाद भाजपा नेता राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी संकल्पबद्धता जाहिर करने वाले बयान दे रहे हैं। 

 

भारतीय पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी को साहस के लिए लंदन प्रेस फ्रीडम अवार्ड 2018 से सम्मानित किया गया है। सत्ताधारी भाजपा की आईटी सेल को लेकर खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें इस अवार्ड के लिए चुना गया।

 

‘आई एम ट्रोल: इनसाइड द सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ द बीजेपी डिजिटल आर्मी’ की लेखिका स्वतंत्र पत्रकार स्वाति ने इटली, मोरक्को और तुर्की के पत्रकारों को हराकर यह पुरस्कार जीता। 
पुरस्कार जीतने पर स्वाति ने कहा, ‘यह मेरे लिए काफी अहमियत रखता है। मुझे नहीं लगता कि पत्रकारों ने अपना काम करना बंद कर दिया है, लेकिन पूरे दुनिया की सरकारें अपनी आलोचना को लेकर असहिष्णु हो गई हैं।

मुझे ऑनलाइन काफी धमकियां दी गईं, लेकिन मैंने इसकी परवाह नहीं की। अगर मैं ऐसा करती तो अपना काम नहीं कर पाती।’ इस कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार रात रिपोर्ट्स सैंस फ्रंटियर्स (आरएसएफ) और रिपोर्ट्स विदआउट बॉर्ड्स ने किया था। 

  • एम-777 होवित्जर तोप रासायनिक हमले को भांपने में सक्षम
  • पाकिस्तान और चीन की सीमा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में होवित्जर बेहद कारगर
  • सेना में के-9 वज्र तोप भी शामिल, इसे भारतीय निजी क्षेत्र ने बनाया

मुंबई. भारतीय सेना की ताकत में और इजाफा हो गया है। महाराष्ट्र के दवलाली में शुक्रवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में सेना को एम-777 होवित्जर तोप और के-9 वज्र तोप सौंपी गईं। इस मौके पर सेना प्रमुख विपिन रावत भी मौजूद रहे। होवित्जर तोप की मारक क्षमता 40-50 किलोमीटर है। इसी तरह के-9 28 से 38 किलोमीटर तक की रेंज में सटीक निशाना साध सकती है।

 होवित्जर की 7 रेजीमेंट बनेंगी

थल सेना 145 एम 777 होवित्जर की सात रेजीमेंट भी बनाने जा रही है। इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी। इसे हेलीकॉप्टर या विमान के जरिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। होवित्जर अमेरिका में बनी बेहद हल्की तोप है। इसे अफगानिस्तान और इराक युद्ध में इस्तेमाल किया जा चुका है। अभी इसका इस्तेमाल अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया कर रहे हैं।

 2020 तक सौंपी जाएंगी 100 के-9

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने संवाददाताओं से कहा कि के-9 वज्र के प्रोजेक्ट पर 4,366 करोड़ रुपए और एम-777 होवित्जर के प्रोजेक्ट पर 5070 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। यह काम नवंबर 2020 तक पूरा होगा। सेना को के-9 श्रेणी की 100 तोपें सौंपी जानी है। इस महीने 10 तोपें सौंपी जाएंगी। अगली 40 तोपें नवंबर 2019 में और बाकी 50 तोपें नवंबर 2020 तक सौंपी जाएंगी।

 जुलाई तक पूरी हो जाएगी रेजीमेंट

के-9 वज्र 30 सेकेंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। इसकी पहली रेजीमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसे भारतीय निजी क्षेत्र ने तैयार किया है।

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