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पंजाब के अमृतसर में दशहरा के दिन हुए दर्दनाक हादसे हो लेकर लोग गुस्से में हैं। शनिवार दोपहर गुस्साए लोगों ने शिवाला फाटक के गेटमैन निर्मल सिंह की पिटाई की और उन्हें रेलवे के केबिन (एस-26-ई3) से नीचे फेंक दिया। उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। लोगों ने शनिवार को शवों को साथ लेकर प्रदर्शन किया और बस स्टैंड मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया।
  पुलिस प्रशासन को जाम खुलवाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया जा सका। पुलिस की तरफ से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल मंगवा लिया गया है। वहीं आयोजक सौरव मदान और उसके परिजन घर में ताला लगाकर भूमिगत हो गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी कि प्रबंधकों का कसूर है या नहीं। 

 बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को भी नाराज लोगों का गुस्सा शिक्षा मंत्री पर भड़का था। बचाव में मंत्री के गनर को हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। स्थानीय लोग हादसे के बाद से ही प्रशासन पर काफी खफा हैं। घटना स्थल पर पहुंची रिलीफ ट्रेन पर भी लोगों ने हमला कर दिया था। जिससे ट्रेन के शीशे टूट गए थे। रावण दहन देख रहे लोगों पर से तेज रफ्तार डीएमयू ट्रेन कुचलते हुए गुजर गई थी। इस हादसे में अभी तक 59 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। वहीं 9 शवों की पहचान बाकी है और सात लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों का इलाज अमृतसर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। 

दिल्ली में दशहरे की रात रावण का पुतला जब्त कर लिया गया। दिल्ली पुलिस पुतले को जब्त कर अपने साथ थाने ले आई। ये घटना पूर्वी दिल्ली में शुक्रवार देर रात की है। यहां कुछ लोग रावण दहन की तैयारी कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इन लोगों को पुतला दहन की मंजूरी नहीं मिली थी। इसलिए इन्हें मौके पर जाकर रोका गया। समझाने के बावजूद विवाद बढ़ने पर पुलिस ने यह कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि पुतले को लेकर कोर्ट के निर्देश पर ही जमानत मिल सकेगी। 

 

सुख विहार तिकोना पार्क रोड स्थित सामुदायिक भवन के पास 40 फुट ऊंचा रावण का पुतला दहन किया जाने वाला था। फ्रेंडस यूनियन रामलीला ड्रामेटिक क्लब के सदस्यों द्वारा मुख्य मार्ग पर ये पुतला खड़ा किया गया था। इनका कहना है कि हर वर्ष पार्क में रामलीला होने के बाद अबकी बार पुलिस ने मंजूरी नहीं दी थी। यही वजह थी कि लोगों ने सड़क किनारे का सहारा लिया। 

उधर, पुलिस का कहना है कि मुख्य मार्ग पर पुतला दहन की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इससे बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए पुलिस ने पुतले को जब्त किया है। पुलिस के समझाने के बाद भी लोग नहीं माने तो पुतले को कब्जे में ले लिया। इस घटना को लेकर लोगों ने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। उन्होंने मांग की है कि पुलिस ने पुतला नहीं दिया तो उनके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर ही अब पुतले को छोड़ा जाएगा। 

श्रीनगर में शुक्रवार को प्रशासन ने सभी हायर सेकेंडरी स्कूल सहित कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय में भी शिक्षण कार्य ठप रहेगा। बुधवार और गुरुवार को सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाकर कुल आठ आतंकी मार गिराए। जिसमें फतेहकदल में लश्कर के टॉप कमांडर मेहराजुद्दीन बांगरू समेत तीन आतंकियों को बुधवार को, वहीं गुरुवार सुबह पुलवामा में सुरक्षा बलों ने तहरीक ए मुजाहिदीन संगठन के आतंकवादी अहमद भट्ट को मार गिराया।

 

उधर देर रात उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के बोनियार जंगल क्षेत्र में सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया। सेना के अनुसार इस दौरान हुई मुठभेड़ के दौरान चार आतंकियों को ढेर कर दिया गया है, लेकिन फिलहाल किसी का शव बरामद नहीं किया जा सका है।   

ऐसे में जुमे की नमाज के बाद हिंसा भड़कने की आशंका में प्रशासन ने एहतियातन स्कूल-कॉलेज को बंद रखने का फैसला किया है।

आतंकी के मारे जाने पर कश्मीर विवि में प्रदर्शन
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में बी फार्मेसी के छात्र से आतंकी बने शौकत के मारे जाने के विरोध में कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्रों ने वीरवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने सर सैय्यद गेट तक मार्च निकाला और जनाजा पढ़ा। बी फार्मेसी विभाग के बाहर श्रद्धांजलि भी दी। ज्ञात हो कि दो अक्तूबर को ही शौकत तहरीक-उल-मुजाहिदीन में शामिल हुआ था।

अमृतसर। दशहरा के एक समारोह के दौरान एक ट्रेन की चपेट में आने के कारण 61 लोगों की मौत वाले दुर्घटनास्थल के पास शनिवार को सैकड़ों लोगों ने धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और ट्रेन के चालक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि ट्रेन तेज गति से निकली और भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद चालक ने ट्रेन की रफ्तार कम नहीं की।

अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर में जोड़ा फाटक के निकट शुक्रवार शाम को रावण दहन देखने के लिए रेल की पटरियों पर खड़े लोग एक ट्रेन की चपेट में आ गए जिसमें कम से कम 61 लोगों की मौत हो गई और 72 अन्य घायल हो गए। दुर्घटनास्थल पर सुबह से हजारों लोग जुटे हुये हैं। पुलिस ने भीड़ प्रबंधन करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है।

नयी दिल्ली। पंजाब के अमृतसर में हुये रेल हादसे के आलोक में रेलवे ने शनिवार को वहां से गुजरने वाली 37 रेलगाडि़यों को निरस्त कर दिया है जबकि 16 अन्य का मार्ग परिवर्तित कर दिया है। इसके साथ ही जालंधर अमृतसर रेलमार्ग पर आवाजाही रोक दी गई है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि 10 मेल/एक्सप्रेस और 27 पैसेंजर रेलगाडि़यों को निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा 16 अन्य गाडियों को दूसरे मार्ग से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है जबकि 18 ट्रेनों को बीच में ही रोक कर उनकी यात्रा समाप्त कर दी गयी।

दशहरे के मौके पर अमृतसर के पास हुए हादसे को लेकर रेलवे का कहना है कि पुतला दहन देखने के लिए लोगों का वहां पटरियों पर एकत्र होना ‘‘स्पष्ट रूप से अतिक्रमण का मामला’’ था और इस कार्यक्रम के लिये रेलवे द्वारा कोई मंजूरी नहीं दी गई थी। अमृतसर प्रशासन पर इस हादसे की जिम्मेदारी डालते हुए आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों को दशहरा कार्यक्रम की जानकारी थी और इसमें एक वरिष्ठ मंत्री की पत्नी ने भी शिरकत की।

 
रेलवे अधिकारियों ने कहा, ‘‘हमें इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी और हमारी तरफ से कार्यक्रम के लिये कोई मंजूरी नहीं दी गई थी। यह अतिक्रमण का स्पष्ट मामला है और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’’ इतनी भीड़ होने के बावजूद रेल चालक द्वारा गाड़ी नहीं रोके जाने को लेकर सवाल उठने पर अधिकारी ने कहा, ‘‘वहां काफी धुआं था जिसकी वजह से चालक कुछ भी देखने में असमर्थ था और गाड़ी घुमाव पर भी थी।’’ 
उ.प्र. सरकार ने संगम नगरी के युगों-युगों से प्रचलित पुराने नाम ‘प्रयागराज’ को बहाल कर दिया है। आजादी के बाद से सभी देशभक्त यह मांग कर रहे थे। लोगों को लगता था कि नेहरू का संबंध यहां से खास है। पर वे ठहरे परम सेक्यूलर। उन्होंने इस पर कान नहीं दिया। 

 
इसके बाद उ.प्र. में भा.ज.पा सरकारों के समय इस मांग ने जोर पकड़ा। पर कभी प्रदेश में गठबंधन सरकार होती थी, तो कभी केन्द्र में। अब दोनों जगह भा.ज.पा. की पूर्ण बहुमत की सरकार है। अतः योगी ने निर्णय ले लिया। पर इससे सेक्यूलरों के पेट में दर्द होने लगा है। उन्हें लगता है कि यदि अभी वे चुप रहे, तो न जाने प्रदेश और देश में कितने नाम बदल दिये जाएं ? अतः इस पर कोई सर्वसम्मत नीति बननी चाहिए। 
 
असल में नाम परिवर्तन के पीछे राजनीतिक और सामाजिक कारण हैं। जब विदेशी व विधर्मी हमलावर आये, तो उन्होंने कई स्थानों के नाम बदल दिये। इसका पहला उद्देश्य तो हिन्दुओं का अपमान था। अतः प्रयाग और अयोध्या को इलाहबाद और फैजाबाद किया गया। कोशिश तो उन्होंने हरिद्वार, मथुरा, काशी और दिल्ली को बदलने की भी की; पर वह चाल विफल हो गयी। 

 
दूसरा उद्देश्य खुद को या अपने किसी पूर्वज को महिमामंडित करना था। जिस नाम के साथ ‘बाद’ लगा हो, उसकी यही कहानी है। अकबराबाद, औरंगाबाद, हैदराबाद, सिकंदराबाद, गाजियाबाद, तुगलकाबाद, रोशनाबाद, अहमदाबाद..जैसे हजारों नाम हैं। जैसे फैजाबाद अर्थात् फैज द्वारा आबाद; पर सच ये है कि ये स्थान उन्होंने आबाद नहीं बरबाद किये हैं। इसलिए ‘फैजाबाद’ को ‘फैज बरबाद’ कहना चाहिए। 
 
कुछ अति बुद्धिवादी कहते हैं कि मुस्लिम शासकों ने सैंकड़ों साल राज किया है। अतः उन्होंने नये गांव और नगर बसाये ही होंगे। उनके नाम पर प्रचलित महल, मकबरे और मस्जिदों के लिए भी यही कहा जाता है; पर वे यह नहीं बताते कि यदि सब स्मारक उन्होंने बनाये हैं, तो हिन्दू शासक क्या जंगल में रहते थे ? यदि नहीं, तो उनके महल और मंदिर कहां हैं ?

 
सच ये है कि इस्लामी हमलावर सदा हिन्दू राजाओं से या फिर आपस में ही लड़ते-मरते रहे। उन्हें नये निर्माण की फुरसत ही नहीं थी ? उनके साथ लड़ाकू लोग आये थे, वास्तुकार और कारीगर नहीं। अतः उन्होंने तलवार के बल पर पुराने नगर और गांवों के नाम बदल दिये। महल और मंदिरों में थोड़ा फेरबदल कर, उन पर आयतें आदि खुदवा कर उन्हें इस्लामी भवन बना दिया। प्रसिद्ध इतिहासकार पी.एन. ओक ने इस पर विस्तार से लिखा है।
 
जब अंग्रेज आये, तो कई शब्द वे ठीक से बोल नहीं पाते थे। अतः शासक होने के कारण उनके उच्चारण के अनुरूप मैड्रास, कैलकटा, बंबई, डेली.. आदि नाम चल पड़े। अब इन्हें चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और दिल्ली कहते हैं। कानपुर (Cawnpore), लखनऊ (Lucknow), बनारस (Benares) आदि की वर्तनी (स्पैलिंग) भी अंग्रेजों ने बिगाड़ दी। कांग्रेस राज में नामों की धारा एक परिवार की बपौती बन गयी। अतः हर ओर गांधी, नेहरू, इंदिरा, संजय, राजीव और सोनिया नगरों की बहार आ गयी। 

 
यहां यह पूछा जा सकता है कि आजादी के बाद अंग्रेजों द्वारा बदले नाम ठीक करने में ही शासन ने रुचि क्यों ली ? असल में भारत में ईसाई वोटों की संख्या बहुत कम है। उनसे सत्ता के फेरबदल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता; पर मुस्लिम वोटों के साथ ऐसा नहीं है। इसलिए राजनीतिक दल मुस्लिम शासकों द्वारा बदले गये नामों को नहीं छेड़ते। 
 
उ.प्र. में मायावती ने ऊधमसिंह नगर, ज्योतिबाफुले नगर, गौतमबुद्ध नगर आदि कई नये जिले बनाये; पर लोग इन्हें यू.एस. नगर, जे.पी. नगर और जी.बी. नगर ही कहते हैं। हाथरस बनाम महामाया नगर और लखनऊ के किंग जार्ज बनाम छत्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल कॉलिज के बीच तो कई बार कुश्ती हुई। अब भा.ज.पा. सरकार ने उ.प्र. में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन’ किया है। क्योंकि 11 फरवरी, 1968 को दीनदयाल जी का शव वहां पर ही मिला था। पर खतरा ये है कि यह समय के प्रवाह में कहीं डी.डी. जंक्शन न हो जाए।
 
कई नामों के पीछे इतिहास और भाषायी गौरव जुड़ा होता हैं; पर जुबान का भी एक स्वभाव है। वह कठिन की बजाय सरल शब्द अपनाती है। इसलिए भोजपाल, जाबालिपुरम् और गुरुग्राम क्रमशः भोपाल, जबलपुर और गुड़गांव हो गये। मंगलौर (मंगलुरू), बंगलौर (बंगलुरू), मैसूर (मैसुरू), बेलगांव (बेलगावि), त्रिवेन्द्रम (तिरुवनंतपुरम्), तंजौर (तंजावूर), कालीकट (कोझीकोड), गोहाटी (गुवाहाटी), इंदौर (इंदूर), कोचीन (कोच्चि), पूना (पुणे), बड़ोदा (बड़ोदरा), पणजी (पंजिम), उड़ीसा (ओडिसा), पांडिचेरी (पुड्डुचेरी) आदि की भी यही कहानी है। अब शासन भले ही इन्हें बदल दे; पर लोग पुराने और सरल नाम ही सहजता से बोलते हैं। 
 
अतः विदेशी हमलावरों द्वारा बिगाड़े नाम हटाकर ऐतिहासिक नाम फिर प्रचलित करने चाहिए। इससे अपने इतिहास का पुनर्स्मरण भी होगा; पर सहज बोलचाल के कारण प्रचलित हो गये नाम बदलने की जिद ठीक नहीं है। 
 
-विजय कुमार

 

लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने पर खुशी जाहिर करते हुये फैजाबाद का नाम बदलने की मांग की है। विहिप की ओर से कहा गया है कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुये फैजाबाद जिले का नाम बदलकर 'श्री अयोध्या' किया जाए। विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि ‘‘योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करके संतों की मांग का सम्मान किया है। यह कदम स्वागत योग्य है, जैसे सरकार ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया है, उसी तरह फैजाबाद का नाम भी बदलकर 'श्री अयोध्या' कर देना चाहिए।' उन्होंने कहा कि 'आज देश में अनेक सड़कें, भवन, जनपद, गुलामी का बोध कराते आ रहे हैं। देश को अंग्रेज दासता से मुक्ति जरूर प्राप्त हुई है परन्तु उनके प्रतीक आज भी हर हिन्दुस्तानी के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं। वर्तमान सरकारें भावनाओं को समझें और भविष्य की पीढ़ी को इन गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति दिलायें।' शर्मा ने कहा कि योगी सरकार दीपावली पर दीपोत्सव महोत्सव के दौरान साधु संतों के समक्ष नाम बदलने की घोषणा कर सकते हैं। गौरतलब है कि इस सप्ताह मंगलवार को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का प्रस्ताव किया था जिसको कैबिनेट से पास कर दिया था।

 

नई दिल्ली.  आयकर विभाग ने दुबई में महंगी प्रॉपर्टी खरीदने वाले 7500 भारतीयों के खिलाफ जांच शुरू की है। इस विभाग की खुफिया और आपराधिक शाखा ने उन भारतीयों का डेटा निकला है, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में दुबई के रियल एस्टेट में निवेश किया। इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि इस निवेश के फंड का सोर्स क्या रहा और क्या इन लोगों ने आयकर विभाग को जानकारी दी?
तीन महीने में 6006 करोड़ रुपए का निवेश
इंडियन एक्सप्रेस ने दुबई लैंड डेवलपमेंट के हवाले से बताया कि साल के शुरुआती तीन महीनों में कम से कम 1,387 भारतीयों ने दुबई में 6006 करोड़ रुपए (3 बिलियन दिरहम) का निवेश किया। वहीं, 2017 में भारतीयों ने 31221 करोड़ (15.6 बिलियन दिरहम) का निवेश किया।
दुबई लैंड डेवलपमेंट के मुताबिक, 2013 से 2017 के बीच भारतीयों ने करीब 1.67 लाख करोड़ रुपए (83.65 बिलियन दिरहम) की प्रॉपर्टी खरीदी। भारतीय कानून के मुताबिक, दुबई में प्रॉपर्टी खरीदना गैर-कानूनी नहीं है। फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 1999 के मुताबिक, भारतीय प्रवासी और अप्रवासी विदेश में अचल संपत्ति खरीद सकता है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के मुताबिक, एक नागरिक विदेशी प्रॉपर्टीज और सिक्युरिटीज में सालाना 2,50,000 डॉलर का निवेश कर सकता है। हालांकि, नियमों के मुताबिक, ऐसे व्यक्ति को आईटी रिटर्न्स में विदेशी संपत्ति को घोषित करना होगा।
काला धन रोकथाम अधिनियम के तहत, अघोषित विदेशी आय और संपत्ति पर 30% टैक्स लगता है। रिटर्न्स में डिसक्लोज नहीं करने पर आपराधिक केस तो बनता ही है साथ ही 300% जुर्माने का भी प्रावधान है।

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