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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने रक्षा मंत्रालय से राफेल सौदे के अहम एवं गोपनीय दस्तावेजों के गायब हो जाने की खबर को अति-दुर्भाग्यपूर्ण, अति-शर्मनाक और अति-गै़रज़िम्मेदाराना बताया है। मायावती ने कहा, ‘‘केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई के दौरान यह सनसनीखेज रहस्योद्घाटन करने से पहले नरेन्द्र मोदी सरकार को देश से माफी माँगनी चाहिये थी कि देशहित और देश सुरक्षा के मामले में वह विफल साबित हुई है।' 

 

 
रक्षा मंत्रालय से राफेल के दस्तावेज गायब होने संबंधी खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि 'देश की सुरक्षा के साथ इस प्रकार का गम्भीर व घातक खिलवाड़ नरेन्द्र मोदी सरकार में ही मुमकिन हो पाया है और अगर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई नहीं हो रही होती तो शायद देश को कभी यह पता ही नहीं चल पाता कि ऐसी गम्भीर घटना केन्द्र सरकार की नाक के नीचे हुई है।' उन्होंने कहा,‘‘यह सरकार को पूरी तरह से शर्मिन्दा करने वाली अति-गम्भीर घटना है जो देश की 130 करोड़ आमजनता को चिन्तित कर रही है और अब खासकर लोकसभा चुनाव के समय में वे यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वाकई देशहित और देश की सुरक्षा सुरक्षित और मजबूत हाथों में है जैसा कि दावा किया जा रहा है?' 
 
बसपा प्रमुख ने कहा कि राफेल विमान सौदे के संबंध में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जाँच कराने की विपक्ष की मांग को बीजेपी संसद के भीतर और बाहर भी लगातार ठुकराती रही है, इसलिए अब नई बदली हुई परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में समुचित जाँच अवश्य करानी चाहिये ताकि देश को संतुष्टि मिल सके वरना देश सुरक्षा के मामले में भी आमजनता को गंभीर आशंका बनी रहेगी।'

नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी होने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला है और इसके लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी किया कि अगर प्रधानमंत्री मोदी पाक साफ हैं तो जांच से क्यों भाग रहे हैं?

गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि एक नई लाइन सामने आई है-गायब हो गया। दो करोड़ रोजगार गायब हो गया। किसानों के बीमा का पैसा गायब हो गया। 15 लाख रुपया गायब हो गया। अब राफेल की फाइलें गायब हो गईं। उन्होंने दावा किया कि कोशिश यह कि जा रही है कि किसी भी तरह से नरेंद्र मोदी का बचाव करना है। सरकार का एक ही काम है कि चौकीदार का बचाव करना है। 

गांधी ने कहा कि न्याय सबके लिए होना चहिए। एक तरफ आप कह रहे हैं कि कागज गायब हो गए हैं । इसका मतलब है कि ये सच्चे हैं। इन कागजों में साफ है कि प्रधानमंत्री ने समानांतर बातचीत की है। इनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राफेल की आपूर्ति समय पर नहीं हुई क्योंकि मोदी जी अनिल अंबानी को पैसा देना चाहते थे। एक सवाल के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘आपकी सरकार है जिस पर चाहिए कार्रवाई करिये। लेकिन प्रधानमंत्री पर कार्रवाई करिये। प्रधानमंत्री ने राफेल सौदे में देरी की, अनिल अंबानी की जेब में 30 हजार करोड़ रुपये डाले।’

उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है और इसमें आपराधिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर प्रधानमंत्री दोषी नहीं हैं तो फिर जांच क्यों नहीं कराते? जेपीसी की जांच से क्यों भाग गए? दरअसल, सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राफेल विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की खरीद के खिलाफ याचिकायें रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार चाहते हैं।


इसे भी पढ़ें: अब राफेल मामले में प्रधानमंत्री पर मुकदमा चलाने के पर्याप्त सबूत: राहुल

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने अपने दिसंबर, 2018 के फैसले पर पुनर्विचार के लिये पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। पुनर्विचार याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि शीर्ष अदालत में जब राफेल सौदे के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया तो केन्द्र ने महत्वपूर्ण तथ्यों को उससे छुपाया था।

नयी दिल्ली। लोगों को सस्ती एवं वहनीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव पर काम कर रही है और इसमें हमारा मंत्र ‘‘ बाधा नहीं, केवल समाधान’ है। जन औषधि दिवस पर वीडिया कांफ्रेंसिग के जरिये प्रधानमंत्री ने जन औषधि परियोजना के लाभार्थियों से चर्चा करते हुए कहा, ‘‘ कोई इलाज से वंचित न रहे, इसके लिए हमारी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम ‘ बाधा नहीं, केवल समाधान’ की पहल के आधार पर काम कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस क्षेत्र में सभी पक्षकार मिलकर काम करें। ’’ 

 

 
मोदी ने कहा, ‘‘हमारी सरकार कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध करा रही है।’’ उन्होंने कहा कि इस योजना से 850 से ज्यादा दवाओं का मूल्य नियंत्रित किया है। हार्ट स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण से जुड़े उपकरणों के दाम कम किए गये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए दो बड़े कदम उठाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे देश में जन औणधि केंद्र की श्रृंखला स्थापित की गई है जबकि 2008 से लेकर 2014 तक 6 वर्षों में केवल 80 दुकानें खोली गयी थीं। उन्होंने कहा कि वहीं 2014 के बाद पांच साल से भी कम अवधि में हमारी सरकार द्वारा पांच हजार से अधिक जन औषधि केंद्र खोले गए।
 
मोदी ने कहा कि आजादी के 65 वर्ष में देश में सात एम्स बने थे। हमारी सरकार के बीते पांच साल में 15 एम्स या तो बन चुके हैं या बनने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि सभी जन औषधि केंद्र संचालकों को मेरा कहना है कि आपको साल में एक बार अपने ग्राहकों का छोटा सा सम्मेलन करना चाहिए, जिससे वो और लोगों को भी इस विषय में बताएं और जागरूक करें।  प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना से बीमारी के कारण संकट में फंसे परिवारों को मदद पहुंचाई जा रही है। 

जम्मू। जम्मू शहर के बीचों-बीच स्थित भीड़-भाड़ वाले बस स्टैंड इलाके में संदिग्ध आतंकी धमाके में कम से कम 28 लोग घायल हो गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। पिछले साल मई से लेकर अब तक बस स्टैंड इलाके में आतंकवादियों की तरफ से हथगोले के जरिए किया गया यह तीसरा हमला है। सुरक्षा एजेंसियां इसे शहर में शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल की प्रधानाचार्या सुनंदा रैना ने बताया, “अब तक 28 घायलों को यहां लाया गया है। इनमें से एक की मौत हो गई है जबकि दो अन्य की हालत गंभीर है और दो का ऑपरेशन किया जा रहा है।” 

 

 
जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एम के सिन्हा ने बताया कि प्रारंभिक जांच से लगता है कि किसी ने दोपहर के वक्त बस स्टैंड इलाके में हथगोला फेंका जिसके चलते विस्फोट हुआ। तत्काल मौके पर पहुंचे एवं स्थिति का जायजा लेने वाले सिन्हा ने बताया कि विस्फोट के बाद बी सी रोड के आसपास के इलाके की घेराबंदी कर दी गई और हथगोला फेंकने वाले को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर तलाश अभियान चलाया जा रहा है।  पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि विस्फोट में बस स्टैंड पर खड़ी सरकारी बस को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ। आईजी ने कहा, “जब भी चौकसी ज्यादा होती है, हम जांच-पड़ताल सख्त कर देते हैं लेकिन किसी-किसी के उससे बच निकलने की आशंका रहती है और यह ऐसा ही मामला लग रहा है।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा, “निश्चित तौर पर मंशा सांप्रदायिक शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की थी।” 
 
 
उन्होंने बताया कि पुलिस सबूत इकठ्ठे कर रही है और “हम निश्चित तौर पर उसे (हमलावर को) ढूंढ निकालेंगे।” धमाके के फौरन बाद लोग सुरक्षित स्थानों पर दौड़े और स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें निकाला गया एवं घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस गश्त दल फॉरेन्सिक विशेषज्ञों एवं खोजी कुत्तों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और हमलावर को पकड़ने के लिए तलाश अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि अंतिम खबर आने के वक्त तक तलाश अभियान जारी था। हालांकि विस्फोट के संबंध में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 

 

रायपुर- पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक को क्या बीजेपी लोकसभा चुनाव में भुनाने जा रही है? दरअसल यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी डाक्टर अनिल जैन ने अपने एक बयान में कहा है कि- ‘निश्चित तौर पर हम इसे एक उपलब्धि के तौर पर लेंगे’ सरकार यदि अच्छा काम नहीं करती तो इस्तीफा किससे मांगा जाता है? ठीक ऐसे ही यदि सरकार अच्छा काम कर रही है तो वाहवाही किसकी होनी चाहिए”
 
अनिल जैन का यह बयान यह बताने के लिए काफी है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी बालकोट एयर स्ट्राइक को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है. स्ट्राइक के जरिए बीजेपी एग्रेसिव कैंपेनिंग कर सियासी फायदा ढूंढ रही है. अनिल जैन मानते हैं कि यह एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से निर्लज्जता के साथ सेना के शौर्य की खिल्ली उड़ाई जा रही है. इसे हम देश के सामने लाएंगे. जिन लोगों ने सेना के शौर्य को नगण्य करने की कोशिश की है. ऐसे लोग पाकिस्तान में जाकर बैठ जाएं. अनिल जैन कहते हैं कि  सेना का शौर्य है, सेना मजबूत है लेकिन इसके पीछे जो मजबूत राजनीतिक शक्ति की जरूरत है वह मोदी के पास है. 
 
भूपेश बघेल पर पलटवार
 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस बयान पर भी अनिल जैन ने टिप्पणी की, जिसमें सवाल उठाते हुए पूछा गया था कि मुंबई हमले में ड्रेस बदलने पर तत्कालीन गृहमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था, तो पुलवामा की घटना के बाद फोटोशूट करा रहे मोदी पर बीजेपी खामोश क्यों है? जैन ने कहा कि यह बयान हास्यास्पद है. प्रधानमंत्री का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था. घटना जब घटी, तो इसकी तात्कालीन सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री को क्या दिग्विजय सिंह और भूपेश बघेल को बताना चाहिए कि उन्हें क्या करना है. इन लोगों के नेता जो महीनों छुट्टियां मनाते हैं, वे लोग परिश्रम की पराकाष्ठा पर उंगली उठाते हैं. मोदी ने एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार साबित किया है कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए मजबूत राजनीतिक शक्ति किसके पास है. जितनी बार मोदी पर उंगली उठेगी, उतनी बार ये एक्सपोज होंगे. 
 
सेना की कार्यवाही पर श्रेय लेना सेना का अपमान- कांग्रेस
 
इधर बीजेपी प्रदेश अनिल जैन के बयान पर कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यह बेहद बचकाना और स्तरहीन बयान है. सेना की कार्यवाही पर श्रेय लेना सेना का अपमान है. मोदी के फैसले सही भी हो सकते हैं और गलत भी हो सकते हैं. मोदी सरकार अपने राजनीतिक फैसले पर बात करे. सेना की कार्यवाहियों पर नहीं. पुलवामा में जिस तरह से इंटेलीजेंस फेल हुआ, उसकी बात करनी चाहिए, जिसकी वजह से 40 जवानों की शहादत हो गई. नरेंद्र मोदी गलती स्वीकार करने की बजाए सिर्फ अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने की चाल चल रहे हैं. जनता इसे समझ रही है. 

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को फिर साढ़े सात सौ करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के माध्यम से लिए गए इस लोन को सरकार तीन वर्ष में चुकाएगी।

वह भी करीब साढ़े सात फीसद ब्याज दर पर। दो महीने में यह छठवां मौका है, जब सरकार ने अपनी प्रतिभूति (सिक्योरिटी बांड) बेची है। इससे राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 58 हजार करोड़ के पार पहुंच गया है।

तीन महीने में बेच दिए 7 हजार करोड़ से अधिक का बांड

तीन महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अपने इस छोटे कार्यकाल में अब तक सात हजार करोड़ से अधिक का बांड बेच चुकी है। छह बार में लिए गए इस कर्ज के लिए सरकार औसत आठ फीसद ब्याज भरेगी और दो से लेकर छह वर्ष में चुकाएगी।

कर्ज लेना सरकार की मजूबरी

अर्थशास्त्री डॉ. हुनमंत यादव कहते हैं कि बजट की व्यवस्था के लिए सरकार के पास बांड बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों के पास टैक्स का विकल्प ज्यादा नहीं बचा है। पेट्रोल जैसी कुछ वस्तुएं हैं जिन पर राज्य टैक्स लगा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार इससे बचती है।

कर्ज माफी का बोझ 10 हजार करोड़

सत्ता में आने के लिए सरकार ने राज्य के किसानों से कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था। इसके तहत अब तक सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ कर चुकी है। इसमें ग्रामीण और सहकारी बैंकों का 62 सौ करोड़ तथा व्यवसायिक बैंकों का चार हजार 17 करोड़ रुपये शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। इसकी वजह से सरकार पर करीब 54 सौ करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है।

विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

सरकार के दनादन कर्ज लेने का असर राज्य में अधोसंरचना विकास समेत अन्य विकास कार्यों पर पड़ रहा है। हाल ही में संपन्न् हुए विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों ने मनरेगा का काम तक ठप होने का आरोप लगाया था। अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि कर्ज की राशि ब्याज के साथ चुकाना है तो इसका असर कहीं न कहीं पड़ेगा ही।

जनवरी से अब तक

तारीख कर्ज की राशि ब्याज दर अवधि (वर्ष)

01 जनवरी 2000 7.94 04

15 जनवरी 1500 7.64 02

 

05 फरवरी 1000 8.4 06

12 फरवरी 1000 7.93 05

 

26 फरवरी 1000 8.18 06

05 मार्च 750 7.48 03

 

(नोट- राशि करोड़ रुपये में)

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है। 15 वर्षों के भाजपा के कार्यकाल के बाद अब कांग्रेस की सरकार यहां बनी है। दोनों सरकारों की विकास को लेकर नीतियां काफी अलग रही हैं। विपक्ष में रहते कांग्रेस ने जिन बातों को विरोध किया, अब सरकार में आने के बाद कांग्रेस ने उन नीतियों और योजनाओं को ही बंद कर दिया। नई सरकार ने पुरानी सरकार की विभिन्न विकास की योजनाओं पर पूर्ण वीराम लगा दिया, इसके साथ ही अपनी नीति से राज्य के विकास के प्रयास शुरू किए हैं।

राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति इस वक्त ठीक नहीं है। पुराने डैमेज कंट्रोल के लिए राजकोष से बड़ी राशि का उपयोग किया गया है। किसानों की कर्जमाफी सहित कई बड़े आर्थिक फैसले सरकार ने लिए हैं। इससे 10 हजार करोड़ का आर्थिक भार सरकार पर आया है।

इसके बाद इस खर्च की पूर्ति के लिए राज्य सरकार पिछले दो महीनों में केंद्रीय रिजर्व बैंक से अब तक 6 बार कर्ज ले चुकी है। करीब तीन महीने में सरकार ने 7 हजार करोड़ से अधिक के बांड बेचे हैं। अब सरकार इन सब से उबरने के लिए आर्थिक विकास के गांधीवादी मॉडल को अपना रही है। नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी का कंसप्ट वास्तव में पूरी तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित गांधी जी के विचारों पर टिका है।

क्या है नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी कंसप्ट

कृषि और पशुपालन हमारी ग्रामीण संस्कृति का अटूट हिस्सा है। जीवन की निरंतरता प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण पर निर्भर करती है। ये संसाधन प्रतिदिन हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। राज्य की नई कांग्रेस सरकार का मत यह है कि प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ही कृषि और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

नरवा, गरुआ, घुरवा और बारी गांवों को सुदृढ़, स्वावलंबी व संपन्न बनाने का देशी फार्मूला है। इसी अवधारणा को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान संसाधनों के समुचित संरक्षण व सदुपयोग के लिए काम करना शुरू किया है।

वास्तव में ये चार चिन्हारी ही हमारी कृषि संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था की निशानी भी हैं। इस योजना से जलस्त्रोतों का सरंक्षण-सवर्धन, पशुधन प्रबंधन व उन्नयन, चरागाहों का विकास और जैविक खाद व बायोगैस इकाइयों की स्थापना होगी। इसी के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर दो लाख से ज्यादा रोजगार श्रृजन का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। इस योजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों को मनरेगा से जोड़ा जाएगा।

गांधीवादी अर्थव्यवस्था का ऐसा है मॉडल

महात्मा गांधी ने अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संकल्पना में कहा था कि भारत गांवों को देश है और गांवों के विकास से ही शहरों और पूरे देश का विकास होगा। गांधीजी के आर्थिक दर्शन पर आधारित गांधीवादी योजना श्रीमन्नारायण ने अप्रैल 1944 में प्रस्तुत की थी।

इस योजना को शुरूआती दौर की पंचवर्षीय योजनाओं में भी शामिल किया गया था। गांधी जी का मानना था कि गांवों में खेती का विकास, पशुपालन, ग्रामीण संसाधनों से रोजगार और इसी के आधार पर आर्थिक विकास किया जा सकता है। गांधी जी का यह आर्थिक दर्शन काफी व्यापक है।

इस समय विकास के लिए यही रास्ता

छत्तीसगढ़ राज्य एक विकसित होता राज्य है। इसमें एक तरफ आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं हैं जो दूसरी तरफ सामाजिक विकास की कई चुनौतियां भी हैं। बड़ी तादात में प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में संसाधनों के व्यापक उपयोग के जरिए तेज विकास की नीति पिछली सरकार ने अपनाई थी, लेकिन इसकी वजह से टाटा के भूमिअधिग्रहण की वजह से स्थानीय लोगों के विस्थापन, किसानों की आर्थिक स्थिति का खराब होना। गांवों में विकास का कजोर होना जैसे कारक पैदा हुए। इस समय राज्य सरकार राज्य के विकास के लिए आर्थिक रूप से कोई बड़ी योजना नहीं ला सकती, और ऐसे में गांधीवादी आर्थिक विकास मॉडल ही राज्य सरकार के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।

 कर्ज लेने की मजबूरी के साथ आर्थिक विकास की चुनौती

अर्थशास्त्री डॉ. हुनमंत यादव कहते हैं कि बजट की व्यवस्था के लिए सरकार के पास बांड बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों के पास टैक्स का विकल्प ज्यादा नहीं बचा है। पेट्रोल जैसी कुछ वस्तुएं हैं जिन पर राज्य टैक्स लगा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा।

 ऐसे में सरकार इससे बचती है। तीन महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अपने इस छोटे कार्यकाल में अब तक सात हजार करोड़ से अधिक का बांड बेच चुकी है। छह बार में लिए गए इस कर्ज के लिए सरकार औसत आठ फीसद ब्याज भरेगी और दो से लेकर छह वर्ष में चुकाएगी। इस अवधी में राज्य सरकार को आर्थिक विकास की ऐसी नीति का सहारा लेना होगा, जिससे अर्थव्यवथा को तेज नहीं, बल्कि संतुलित विकास का रास्ता मिले।

तेवाड़ा/नारायणपुर। देश के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र माढ़ के तुलारधाम का ऐतिहासिक शिवलिंग चोरी हो गया है। महाशिवरात्री के मौके पर जब श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे तो देखा कि शिवलिंग अपनी जगह पर है ही नहीं।

यह शिवलिंग बेहद प्राचीन माना जाता है। अति संवेदनशील नक्सल क्षेत्र होने की वजह से सिर्फ शिवरात्रि के दिन ही आम लोग यहां आते हैं। एक दंतकथा के मुताबिक असुरराज बाणासुर ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था और वह यहां भगवान शिव की आराधना करता था।

शिवलिंग के इस तरह यहां से गायब हो जाने की वजह से रहस्य का माहौल बना हुआ है। इस संवेदनशील इलाके में पुलिस की पहुंच भी नहीं है। शिवलिंग के गुम होने की कोई रिपोर्ट भी संबंधित थाने में दर्ज नहीं की गई है। नारायणपुर जिले का यह इलाका अत्यंत दुर्गम होने की वजह से जिला मुख्यालय से भी कटा हुआ है और दंतेवाड़ा के रास्ते लोग यहां तक पहुंचते हैं।

प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर में शुमार नारायणपुर के तुलारधाम का यह डेढ़ फीट का शिवलिंग वर्षों से यहां स्थापित था। शिवरात्रि के दिन हजारों की संख्या में श्रद्घालु इंद्रावती नदी पार कर उबड़ खाबड़ रास्ते से लगभग 40 किलोमीटर सफर कर यहां पहुंचे, लेकिन उन्हें इस बार शिवलिंग के दर्शन नहीं हुए। पुजारी ने स्थापित स्थल पर चांदी का छत्र बनाकर पूजा की वैकल्पिक व्यवस्था की। इस इलाके में नक्सलियों का एकाधिकार है।

एक टाइम था जब ऐसी चर्चा थी कि ऐक्ट्रेस श्रद्धा कपूर फरहान अख्तर को डेट कर रही हैं, ये दोनों फिल्म 'रॉक ऑन 2' के दौरान एक दूसरे के करीब आए थे। आपको बता दें की दोनों के रिलेशनशिप की खबरों का बाजार कुछ ऐसा गर्म था कि ये दोनों लगातार सुर्खियों में बने रहते थें। खबरें यहां तक आई की श्रद्धा कपूर अपना घर छोड़ कर फरहान अख्तर के साथ लीव-इन में रहने जा रही हैं। लेकिन श्रद्धा कपूर फरहान अख्तर के बीच कुछ ऐसा हुआ कि ये दोनों एक दूसरे से अलग हो गये। वैसे फरहान अख्तर इन दिनों शिबानी दांडेकर को डेट कर रहे हैं और श्रद्धा कपूर फटॉग्रफर बॉयफ्रेंड रोहन श्रेष्ठ के साथ रिलेशनशिप में हैं। दोनों के रास्ते अब अलग हो चुके है। फरहान लगातार अपनी गर्लफ्रेंड टीवी सेलेब्रिटी शिबानी दांडेकर के साथ स्पॉट किए जाते हैं। 

हाल ही में फरहान अख्तर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो शेयर की है जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे है कि इस कपल ने सगाई कर ली हैं। इस फोटो में फरहान और शिबानी का सिर्फ हाथ दिख रहा है। दोनों एक दूसरे की उंगली पकड़े हुए हैं। खास बात ये है कि दोनों ने रिंग फिंगर में अंगुठी पहनी है। फोटो शेयर करने के साथ फरहान ने कैप्शन में लिखा, 'हाथ पकड़ने के बारे में बहुत कुछ वास्तविक है, एक प्रकार की जटिल सादगी, थोड़ा सा कर बहुत सारी चीजें कह देना।' 

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अब खबर है कि फरहान और शिबानी जल्द ही शादी के बंधन में बंधन वाले हैं। इसका खुलासा खुद फरहान ने एक टॉक शो में किया है। हाल ही में एक टॉक शो में फरहान और भूमि पेडनेकर बतौर गेस्ट बनकर पहुंचे। शो में फरहान ने शिबानी दांडेकर के साथ अपने रिलेशनशिप और पर्सनल लाइफ को लेकर खुलकर बात की। इस दौरान जब भूमि ने फरहान से पूछा कि वे कब शादी कर रहे हैं तो उन्होंने कहा था- मुझे पता नहीं, शायद अप्रैल या  फिर मई में।
शाओमी ने Redmi Note 7 और Redmi Note 7 Pro स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च कर दिया है। रेडमी नोट 7 प्रो स्मार्टफोन में क्वालकॉम ऑक्टा-कोर स्नैपड्रैगन 675 प्रोसेसर का इस्तेमाल हुआ है। जबकि Redmi Note 7 में स्नैपड्रैगन 660 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है। दोनों ही स्मार्टफोन में जान फूंकने के लिए 4,000 एमएएच की बैटरी और क्वालकॉम क्विक चार्ज 4.0 सपोर्ट शामिल है। आइये जानते हैं इन दोनों स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन के बारे में।
Redmi Note 7 Pro के स्पेसिफिकेशन
 
यह फोन एंड्रॉयड 9 पाई पर आधारित मीयूआई 10 पर रन करता है।
स्मार्टफोन में 6.3 इंच का फुल HD+ डॉट नॉच डिस्प्ले दिया गया है। इसका पिक्सल रेजोल्यूशन 2340 × 1080 है। 
फोन के  बैक पैनल पर नया Aura डिजाइन दिया गया है। 
स्मार्टफोन के फ्रंट और बैक पैनल पर 2.5डी कर्व्ड गोरिल्ला ग्लास 5 का इस्तेमाल हुआ है।
रेडमी नोट 7 प्रो स्मार्टफोन में क्वालकॉम ऑक्टा-कोर स्नैपड्रैगन 675 प्रोसेसर का इस्तेमाल हुआ है। 

 

रैम और स्टोरेज के दो विकल्प हैं- 4 जीबी रैम के साथ 64 जीबी स्टोरेज और 6 जीबी रैम के साथ 128 जीबी स्टोरेज। फोन में 256 जीबी तक के माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज को बढ़ाया जा सकता है। 
कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर (सोनी आईएमएक्स586) है। इसके साथ 5 मेगापिक्सल का सेकेंडरी डेप्थ सेंसर दिया गया है।
सेल्फी के शौकीनों के लिए फोन में 13 मेगापिक्सल का सेल्फी सेंसर है।
फोन में 4000mah की बैटरी दी गई है। 
फोन क्वालकॉम क्विक चार्ज 4.0 सपोर्ट सपोर्ट करता है। 


Redmi Note 7 के स्पेसिफिकेशन
 
स्मार्टफोन एंड्रॉयड 9 पाई पर आधारित मीयूआई 10 पर काम करता है।
स्मार्टफोन में 6.3 इंच का फुल HD+ डॉट नॉच डिस्प्ले दिया गया है। 
Redmi Note 7 में स्नैपड्रैगन 660 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है।
फोन को दो वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। पहला वेरिएंट 3 जीबी रैम और 32 जीबी स्टोरेज से लैस है। वहीं, दूसरा वेरिएंट 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज से लैस है।
कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 12 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर दिया गया है। 
सेल्फी के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है।
स्मार्टफोन में जान फूंकने के लिए 4,000 एमएएच की बैटरी और क्वालकॉम क्विक चार्ज 4.0 सपोर्ट शामिल है। 
कीमत और उपलब्धता
 
Redmi Note 7 की भारत में शुरुआती कीमत 9,999 रुपये है और यह हैंडसेट 6 मार्च 2019 से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। वहीं, दूसरी तरफ पावरफुल रेडमी नोट 7 प्रो स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत 13,999 रुपये है और यह हैंडसेट 13 मार्च से बिकने लगेगा।

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