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बीजिंग। चीन ने हुआवेई पर आरोप लगाने को लेकर अमेरिका की आलोचना की और कहा कि वह अपने देश की कंपनियों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिये हर आवश्यक कदम उठाएगा। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अमेरिका ने ईरान पर लगाये प्रतिबंधों के उल्लंघन को लेकर हुआवेई और इसके एक वरिष्ठ कार्यकारी के खिलाफ आरोप लगाया है। वहीं अमेरिका के कई पश्चिमी सहयोगी देशों ने सुरक्षा की चिंताओं को लेकर हुआवेई पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।
वांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह किसी भी ईमानदार और पक्षपात से मुक्त व्यक्ति के लिये स्पष्ट है कि किसी विशेष कंपनी और चीन के नागरिकों के खिलाफ उठाये गये हालिया कदम न सिर्फ वैधानिक मामला है बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक प्रताड़ना है।’’ उन्होंने चीन के संभावित कदमों के बारे में कोई जानकारी दिये बिना कहा, ‘‘हमने कदम उठाये हैं और हम हर आवश्यक कदम उठाना जारी रखेंगे।

हम चीन की कंपनियों और लोगों के वैधानिक अधिकारों की मजबूती से रक्षा करते रहेंगे।’’ उल्लेखनीय है कि हुआवेई ने चीन की खुफिया एजेंसी की मदद करने के अमेरिका के आरोप के खिलाफ कानूनी मुकदमा शुरू किया है। वांग ने कंपनी के मुकदमे का समर्थन किया और कहा कि उसे चुपचाप कटने वाला भेड़ बनकर नहीं रह जाना चाहिये।
आखिरकार इस बात का पटाक्षेप हो ही गया कि अयोध्या विवाद आम चुनाव से पहले नहीं सुलझेगा। पूर्व में चार बार बातचीत की नाकाम कोशिशों के बाद अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के तहत अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले को मध्यस्थ के जरिए बातचीत से सुलझाने का प्रयास होगा। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आज (08 मार्च 2019) ये फैसला लिया। कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए तीन लोगों का पैनल गठित किया है। इस पैनल में श्री श्री रविशंकर, जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्ला और श्री राम पंचू मध्यस्थता करेंगे। कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी रोक लगाई है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 06 मार्च 2019 को मामला मध्यस्थता को भेजे जाने के मुद्दे पर सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुनाया। मध्यस्थता के लिए कुल 8 हफ्तों का वक्त निश्चित किया गया है। मध्यस्थता पीठ फैजाबाद में बैठेगी। राज्य सरकार, मध्यस्थता पीठ को सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी। कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता शुरू होने में एक सप्ताह से अधिक का समय न लगे। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता पैनल को 4 हफ्तों में मामले की रिपोर्ट देनी होगी।
गौरतलब है कि कोर्ट ने इससे पहले मध्यस्थता के प्रस्ताव पर पक्षकारों की राय पूछी थी, जिसमें मुस्लिम पक्ष और निर्मोही अखाड़ा की ओर से सहमति जताई गई थी। रामलला, महंत सुरेश दास और अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रस्ताव से असहमति जताते हुए कोर्ट से ही जल्द फैसला सुनाने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि इस प्रकार के प्रयास पूर्व में भी हो चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपीलें दायर की गई हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर−बराबर बांटने का आदेश दिया था।
 
सूत्र बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता के फैसले का यह मतलब नहीं निकाला जा सकता है कि अयोध्या विवाद की तारीख बढ़ गई है। दरअसल, जब तक सभी दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हो जाएगा, तब तक सुनवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती है और अनुवाद में करीब दो माह का समय लग सकता है।
बहरहाल, बात पूर्व में अयोध्या मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की कोशिशों की कि जाए तो इसके लिए पहली कोशिश 90 के दशक में वीपी सिंह सरकार के समय में हुई थी। विवाद हल होता दिख भी रहा था। समझौते का ऑर्डिनेंस भी आ गया, लेकिन सियासत ने ऐसी करवट ली कि वीपी को अयोध्या विवाद को सुलझाने वाला ऑर्डिनेंस वापस लेना पड़ गया। दूसरी पहल चंद्रशेखर सरकार के दौरान हुई। मामला समाधान के करीब था लेकिन दुर्भाग्य था कि उनकी सरकार चली गई। नरसिम्हा राव की सरकार ने भी समझौते का प्रयास किया था, लेकिन फिर भी अंतिम हल तक नहीं पहुंचा जा सका। अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में कांची पीठ के शंकराचार्य के जरिए भी अयोध्या विवाद सुलझाने की कोशिश की थी। तब दोनों पक्षों से मिलकर जयेंद्र सरस्वती ने भी भरोसा दिलाया था, मसले का हल महीने भर में निकाल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा तब भी कुछ नहीं हुआ।
 
व्यक्तिगत स्तर पर भी अयोध्या मामले की कई बार समझौते की पहल की जा चुकी हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने पिछले दिनों हिंदू−मुस्लिम दोनों पक्षकारों से मिलकर मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन बात बनी नहीं। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गये मध्यस्थों में श्री श्री रविशंकर का नाम शामिल है।
 
जानिए मध्यस्थों को
 
अयोध्या में बाबरी मस्जिद−राममंदिर विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन मध्यस्थों के नाम तय किए हैं। इन नामों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस फकीर मुहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर और सीनियर अधिवक्ता श्रीराम पंचू शामिल हैं। तीन सदस्यों के इस पैनल के सामने दोनों पक्षकार अपनी बात रखेंगे और ये मध्यस्थता फैजाबाद में होगी।
 
फकीर मुहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला
 
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता के लिए बनी कमेटी के चेयरमैन पूर्व जस्टिस फकीर मुहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला होंगे। जबकि श्री श्री रविशंकर और श्री राम पंचू इसके सदस्य होंगे। इस कमेटी के सामने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षकार अपनी बातें रखेंगे। इसके बाद ये कमेटी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगी। पूर्व जस्टिस फकीर मुहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला मूल रूप से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में कराईकुडी के रहने वाले हैं। खलीफुल्ला का जन्म 23 जुलाई 1951 को हुआ था। उन्होंने 20 अगस्त 1975 को अपने वकालत कॅरियर की शुरुआत की। वह श्रम कानून से संबंधित मामलों में सक्रिय वकील रहे थे। खलीफुल्ला को पहले मद्रास हाईकोर्ट में स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्हें जम्मू−कश्मीर हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्हें 2000 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर नियुक्त किया गया और 2011 में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
 
श्रीराम पंचू 
 
अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए बनी कमेटी के तीसरे सदस्य हैं श्रीराम पंचू। श्रीराम पंचू वरिष्ठ वकील हैं। श्रीराम पंचू मध्यस्थता के जरिए केस सुलझाने में माहिर रहे हैं। उन्होंने मध्यस्थता कर केस सुलझाने के लिए एक कानूनी संस्था भी गठित की है। इस संस्था का काम ही आपसी सुलह के जरिए कोर्ट से बाहर मुद्दों को सुलझाना है। श्रीराम पंचू एसोसिएशन ऑफ इंडियन मीडिएटर्स के अध्यक्ष हैं। वह बोर्ड ऑफ इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट के बोर्ड में भी शामिल रहे हैं। भारत की न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता को शामिल करने में उनका अहम योगदान रहा है। श्रीराम पंचू देश के कई जटिल और वीवीआईपी मामलों में मध्यस्थता कर चुके हैं। इनमें कमर्शियल, कॉरपोरेट, कॉन्ट्रैक्ट के मामले जुड़े हैं। असम और नागालैंड के बीच 500 किलोमीटर भूभाग का मामला सुलझाने के लिए उन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। इसके अलावा बंबई में पारसी समुदाय के मामले का निपटारा करने में भी वह मध्यस्थ रह चुके हैं।
 
श्री श्री रविशंकर
 
आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर देश के प्रमुख आध्यात्मिक गुरुओं में से एक हैं। इससे पहले भी उन्होंने अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश की थी, इसके लिए वह अयोध्या भी गए थे और पक्षकारों से मुलाकात की थी। श्री श्री रविशंकर का नाम जैसे ही मध्यस्थ के रूप में सामने आया तो कई पक्षों और बड़े साधु−संतों ने उनका विरोध किया।
 
आपको बता दें कि इससे पहले भी कई बार मध्यस्थता की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार ये कोशिश असफल रही है। हालांकि, ये पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस मसले को मध्यस्थता के लिए भेजा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों− सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर−बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था।
 
-अजय कुमार
नयी दिल्ली। भारत ने बृहस्पतिवार को 10 वर्ष की अवधि के लिए भारतीय नौसेना के लिए परमाणु क्षमता से संपन्न हमलावर पनडुब्बी पट्टे पर लेने के लिए रूस के साथ तीन अरब डॉलर का समझौता किया। सैन्य सूत्रों ने यह जानकारी दी। दोनों देशों ने कई महीनों तक कीमतों और समझौते के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करने के बाद इस अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किये।
सूत्रों ने बताया कि इस समझौते के तहत रूस अकुला वर्ग के पनडुब्बी को भारतीय नौसेना को 2025 तक सौंपेगा । उन्होंने बताया कि अकुला वर्ग पंडुब्बी को चक्र III नाम दिया गया है। यह भारतीय नौसेना को पट्टे पर दी जाने वाली तीसरी रूसी पनडुब्बी होगी।
रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता से जब इस समझौते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया। पहली रूसी परमाणु संचालित पनडुब्बी आईएनएस चक्र को तीन वर्ष की लीज पर 1988 में लिया गया था। दूसरी आईएनएस चक्र को लीज पर दस वर्षों की अवधि के लिए 2012 में हासिल किया गया था। सूत्रों ने बताया कि चक्र II की लीज 2022 में समाप्त होगी और भारत लीज को बढ़ाने की ओर देख रहा है।

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर वाराणसी के सौंदर्यीकरण की परियोजना को समय से शुरू कराने में सहयोग नहीं देने का शुक्रवार को आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर संपर्क मार्ग का शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पहले तीन सालों में प्रदेश सरकार ने हमें सहयोग नहीं किया। वाराणसी में विकास की परियोजनाएं तभी शुरू हुई जब प्रदेश की जनता ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। अगर पिछली सरकार से सहयोग मिला होता तो हम इन परियोजनाओं को पहले शुरू कर सकते थे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 70 साल के दौरान किसी ने भी बाबा विश्वनाथ के बारे में नहीं सोचा। सब ने अपनी-अपनी चिंता की। मगर काशी की फिक्र नहीं की।  मोदी ने कहा कि उन्हें काशी विश्वनाथ के लिए निर्माण कार्य शुरू करने पर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मेरा सपना था कि इस स्थान के लिए कुछ काम करूं। जब मैं राजनीति में नहीं था तब अक्सर यहां आया करता था और सोचता था कि यहां कुछ न कुछ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भोले बाबा ने तय किया होगा, बातें बहुत करते हो। यहां आओ कुछ करके दिखाओ। 

वाराणसी के सौंदर्यीकरण के बारे में मोदी ने कहा कि यह काशी विश्वनाथ विश्वनाथ धाम की मुक्ति की परियोजना है जो पहले अतिक्रमण से घिरा हुआ था। उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहली बार हुआ है जब हमने काशी विश्वनाथ धाम के आसपास की इमारतों का अधिग्रहण किया और अतिक्रमण को हटाया, जिसके बाद 40 प्राचीन मंदिर सामने आए। उनमें से अनेक पर अतिक्रमण कर लिया गया था और लोगों ने अपनी रसोई घर बना लिए थे।’ प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि मैंने अनेक सरकारी कर्मचारियों को देखा है, क्योंकि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री भी रहा लेकिन मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यहां जिन अधिकारियों की टीम को काम सौंपा गया वह भक्ति और सेवा भाव से काम कर रही है। 

उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी संपत्ति देने के लिए मनाना और इसे राजनीतिक रंग ना लेने देना एक बहुत बड़ा काम था। मैं काशी के लोगों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने अपनी संपत्ति बाबा विश्वनाथ को दे दी। यह उनका सबसे बड़ा दान है। मोदी ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर को शत्रुओं ने निशाना बनाया था और इसे नष्ट करने की कोशिश की थी लेकिन लोगों की आस्था के कारण इसमें पुनर्जन्म लिया। जब महात्मा गांधी यहां आए थे तो उन्होंने इस स्थान की दुर्दशा पर दुख जताया था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दिए गए अपने संबोधन में अपने इन विचारों को व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि वह इस संपूर्ण परियोजना को एक केस स्टडी बनाकर उस पर शोध करें ताकि जब यह परियोजना पूरी हो तो पूरी दुनिया इसके बारे में जाने। 

मोदी ने कहा कि हम खुदाई में अतिक्रमण हटाने के दौरान मिले 40 प्राचीन मंदिरों के इतिहास के बारे में पता लगाने की भी कोशिश करेंगे और सरकार इन मंदिरों का पूरा ख्याल रखेगी। यह परियोजना मंदिरों के संरक्षण कार्य का मॉडल होगा, जिसमें प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक का संयोजन होगा इससे काशी को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘यह काम मेरे ही नसीब में लिखा था। वर्ष 2014 में जब मैं यहां आया था तो कहा था कि मैं यहां आया नहीं बल्कि लाया गया हूं। हो सकता है कि भोले बाबा ने मुझे यहां बुलाया हो।’ इसके पूर्व प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए।

लोकसभा चुनावों में पार्टी की तैयारियों को लेकर भाजपा संसदीय बोर्ड की अहम बैठक आज शाम पार्टी मुख्यालय में होगी। इस बैठक में लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के चयन, चुनाव प्रचार की रणनीति, नेताओं को चुनावी जिम्मेदारियों के वितरण आदि पर भी चर्चा होगी। सूत्रों ने बताया है कि आज की बैठक में यह भी तय होगा कि उम्मीदवारों के चयन का आधार क्या होगा। इस बारे में भी आज फैसला किये जाने की उम्मीद है कि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं। संसदीय बोर्ड की बैठक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में होगी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्य भाग लेंगे।

बैठक से पहले पार्टी ने भाजपा के सभी सांसदों से अपने कामकाज का ब्यौरा पार्टी को सौंपने के लिए कहा है। पार्टी में इस बात को लेकर राय बन रही है कि मौजूदा सांसदों के बड़ी संख्या में टिकट काटे जाएं ताकि सांसदों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर जो माहौल है उसका असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर नहीं पड़े। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जब-जब पार्टी ने ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशी बदलने के फॉर्मूले को अपनाया है तब-तब पार्टी को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
जिन सांसदों को अपने टिकट कटने की भनक लग रही है उन्होंने आला नेताओं के यहां चक्कर लगाना भी शुरू कर दिया है। इधर दिल्ली में भी माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए भाजपा सातों सीटों पर अपनी रणनीति बदलने में लगी है। अभी तक चांदनी चौक सीट से सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पूर्वी दिल्ली भेजा जा रहा है और पूर्वी दिल्ली के वर्तमान में सांसद महेश गिरी को दिल्ली से बाहर भेजा जा रहा है। राज्यसभा सांसद विजय गोयल को चांदनी चौक सीट से लड़ाये जाने के आसार हैं। सबसे चौंकाने वाला नाम क्रिकेटर गौतम गंभीर का है जोकि नई दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी बनाये जा सकते हैं। उनको मीनाक्षी लेखी की जगह मैदान में उतारा जायेगा। हालांकि लेखी का टिकट काटना आसान नहीं है क्योंकि संसद में उनका प्रदर्शन बहुत बेहतरीन रहा है। गंभीर वित्त मंत्री अरुण जेटली के काफी करीबी माने जाते हैं। इसी तरह पूर्व विधायक रामवीर सिंह विधूड़ी का नाम दक्षिणी दिल्ली सीट से सबसे आगे माना जा रहा है। मनोज तिवारी, प्रवेश वर्मा और उदित राज की उम्मीदवारी पर अभी तक कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है।
 

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर मामले में मध्यस्थता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया है। बता दें कि मध्यस्थता के लिए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 3 लोगों का पैनल बनाया है। साथ ही साथ मध्यस्थता की कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाई है। एक हफ्ते के भीतर मध्यस्थता पैनल की कार्यवाही शुरू होगी और इसे सुप्रीम कोर्ट ने 8 हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

मुस्लिम और हिन्दु पक्षकारों से बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में मध्यस्थता  होगी। इस मामले की मध्यस्थता के लिए जस्टिस इब्राहिम, श्री श्री रविशंकर प्रसाद, श्री राम पंचू पैनल में शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 6 फरवरी को मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट में डेढ़ घंटे तक सुनवाई हुई थी और दोनों पक्षों ने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट के फैसले से आज यह स्पष्ट हो गया है कि अब अयोध्या मामले में कोर्ट फैसला नहीं करेगा और हल मध्यस्थता के जरिए ही निकलेगा। 

लखनऊ। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। जिसमें सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का नाम शीर्ष पर है। बता दें कि 2014 में मैनपुरी और आजमगढ़ से चुनाव लड़ने वाले मुलायम सिंह यादव को इस बार पार्टी ने मैनपुरी से टिकट दिया है। हालांकि, 2014 में हुए आम चुनावों में दो सीटों से जीतने के बाद उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी।

उत्तर प्रदेश में बसपा और आरएलडी के साथ लोकसभा चुनाव में उतर रही समाजवादी पार्टी के पास 80 सीटों में से 37 सीटें हैं। जिसमें से 6 सीटों पर उम्मीदवार के नाम की घोषणा हो गई है। मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, बदायूं से धर्मेंद यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, इटावा से कमलेश कठेरिया, राबर्ट्सगंज से भाईलाल कोल और बहराइच से शब्बीर बाल्मीकि मैदान में उतरेंगे।

उल्लेखनीय है कि 2014 में हुए आम चुनाव में समाजवादी पार्टी को 80 में से महज 5 सीटें ही हासिल हुई थी। जिसमें मुलायम सिंह यादव, धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, तेज प्रताप यादव और डिंपल यादव शामिल थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव ने चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जताई थी और वर्तमान में मुलायम आजमगढ़ से ही सांसद हैं। लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश आजमगढ़ से खुद ही चुनाव लड़ सकते हैं। अब देखना होगा कि मैनपुरी से वर्तमान सांसद तेज प्रताप यादव को कौन सी सीट से लड़ाया जाता है।

बेंगलुरु। रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में मध्यस्थता के लिये उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने शुक्रवार को कहा कि लंबे समय से चले आ रहे विवादों को खत्म करने के लिये हर किसी को निश्चित रूप से मिलकर कदम उठाना चाहिए। शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति में श्री श्री के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू भी शामिल हैं।

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श्री श्री रविशंकर ने कहा, ‘लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने की दिशा में हम सभी को निश्चित रूप से समाज में सौहार्द बनाये रखते हुए खुशी-खुशी मिलकर कदम उठाना चाहिए।’ उन्होंने ट्वीट किया, ‘लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने की दिशा में निश्चित रूप से हम सभी को खुशी-खुशी हर किसी का सम्मान करते हुए, सपनों को हकीकत में बदलते हुए और समाज में सौहार्द बरकरार रखते हुए मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करना चाहिए।’

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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले को मध्यस्थता के लिये भेज दिया और समिति को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिये आठ हफ्तों का समय दिया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि यह समिति चार सप्ताह के अंदर इसकी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे और आठ सप्ताह के अंदर प्रक्रिया पूरी कर ले।

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपनी सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह यह सब इसलिये कर पा रहे हैं क्योंकि बिचौलियों और भ्रष्टाचारियों का खात्मा हो चुका है और देश की पाई-पाई सिर्फ जनता पर ही खर्च हो रही है। मोदी ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में राष्ट्रीय महिला आजीविका मीट को सम्बोधित करते कहा कि उनकी सरकार महिला सशक्तीकरण के लिये हर तरह से संवेदनशील है। उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना, स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले कर्ज में बढ़ोतरी, उज्ज्वला योजना, दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय आजीविका मिशन, आयुष्मान योजना और पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा देने जैसी तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा  यह सारे काम हम इसलिये कर पा रहे हैं, क्योंकि केन्द्र में एक ऐसी सरकार है जो पाई-पाई का सही उपयोग कर रही है। मोदी ने कहा अब बिचौलिए और भ्रष्टाचारी नहीं हैं। मोदी को अपने लिये कुछ नहीं ले जाना है। ले जाएगा तो करेगा क्या.... यह सवा सौ करोड़ का देश ही मेरा परिवार है। मुझ पर विश्वास बनाये रखियेगा। 

उन्होंने कहा कि महिलाएं नये भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। यह सुखद है कि महिला सशक्तीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बहन-बेटियों की भागीदारी को सुनिश्चित कर रहा है। अस्पतालों में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित कराने की योजना हो, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान हो, मुफ्त गैस कनेक्शन हो, या बच्चियों के साथ राक्षसी कृत्य करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान हो, हम बेटियों और बहनों का कल्याण सुनिश्चित कर रहे हैं। हम ऐसा कानून लाये हैं कि शादी के बाद पत्नी को विदेश ले जाकर धोखा देने वाले बच नहीं पाएंगे। मातृत्व अवकाश को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों में भी ऐसा कानून नहीं है।’’  मोदी ने कहा कि हाल ही में यह भी फैसला किया गया कि भारतीय सैन्य सेवाओं के कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को स्थायी कमिशन दिया जाएगा। उन्होंने पूछा  हमारी सेना के लिये आपको गर्व होता है क्या, आपका भी मन करता है कि आपकी बेटी भी ऐसे ही खड़ी हो जाए। आज भारत में बेटियां फाइटर जेट उड़ा रही है तो नाव से समुद्र की पूरी परिक्रमा भी कर रही हैं। 



मोदी ने कहा कि स्वावलम्बन से सशक्तीकरण की यात्रा अब नये दौर में प्रवेश करने वाली है। केन्द्र में आपने हमारी सरकार को जब से मौका दिया तब से हमने स्वयं सहायता समूहों के लिये काम किया। पांच साल पहले इन समूहों को हर साल 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाता था। मेरे आने के बाद यह 44 हजार करोड़ रुपये हो गए। पूरे पांच वर्षों के दौरान दो लाख करोड़ से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। मोदी ने कहा कि इस वक्त देश में छह करोड़ महिलाएं स्वयंसहायता समूहों से जुड़ी हैं। प्रयास है कि आने वाले 5-6 साल में आठ से 10 करोड़ परिवारों को इस अभियान से जोड़ा जाए। वर्ष 2022 तक हम अपने स्वयं सहायता समूहों को इतना ताकतवर बनाएंगे कि उनसे जुड़ी कोई महिला गरीब ना रहे। आप यह काम करिये, मैं आपके साथ हूं। कोशिश हो कि गरीब, शोषित, वंचित वर्ग के घर की एक-एक महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़े। प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये जाने वाले उत्पादों की बिक्री का दायरा बढ़ाये जाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हमें नये-नये क्षेत्रों में भी जाना होगा। आतिथ्य और मेडिकल के क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूहों की हिस्सेदारी बढ़ायी जा सकती है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जिनमें काम किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने इससे पूर्व अपने ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ मंदिर संपर्क मार्ग का शिलान्यास किया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के मिर्जापुर मठ की जमीन पर प्रधानमंत्री ने फावड़ा चलाकर और पांच ख़ास शिलाओं को विधिवत पूजन के बाद स्थापित कर शिलान्यास किया।
 


 
मोदी ने शिलान्यास एवं भूमि पूजन से पूर्व बाबा दरबार में हाजिरी लगाते हुए श्री काशी विश्वनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन व रुद्राभिषेक किया। उन्होंने प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर वाराणसी के सौंदर्यीकरण की परियोजना को समय से शुरू कराने में सहयोग न करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 70 साल के दौरान किसी ने भी बाबा विश्वनाथ के बारे में नहीं सोचा। सब ने अपनी-अपनी चिंता की। मगर काशी की फिक्र नहीं की। मोदी ने कहा कि उन्हें काशी विश्वनाथ के लिए निर्माण कार्य शुरू करने पर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा  लंबे समय से मेरा सपना था कि इस स्थान के लिए कुछ काम करूं। जब मैं राजनीति में नहीं था तब अक्सर यहां आया करता था और सोचता था कि यहां कुछ न कुछ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा भोले बाबा ने तय किया होगा, बातें बहुत करते हो। यहां आओ कुछ करके दिखाओ। वाराणसी के सौंदर्यीकरण के बारे में मोदी ने कहा कि यह काशी विश्वनाथ धाम की मुक्ति की परियोजना है जो पहले अतिक्रमण से घिरा हुआ था। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब हमने काशी विश्वनाथ धाम के आसपास की इमारतों का अधिग्रहण किया और अतिक्रमण को हटाया, जिसके बाद 40 प्राचीन मंदिर सामने आए। उनमें से अनेक पर अतिक्रमण कर लिया गया था और लोगों ने अपनी रसोई घर बना लिए थे।

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और कवि डॉ. कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली स्थित उनके आवास में मुलाकात की। नाम न लिखने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि यह अनौपचारिक मुलाकात थी, जिसमें विश्वास टिकट के सिलसिले में राजनाथ सिंह के आवास पर पहुंचे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी से नाराज चल रहे कुमार विश्वास की अब पार्टी के नेताओं के साथ बनती नहीं है। 

वर्तमान की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कहा जा रहा है कि अब कुमार विश्वास किसी भी हालत में 'आप' (Aam Aadmi Party) से चुनाव नहीं लड़ेंगे। दरअसल, कुमार विश्वास पार्टी से राज्यसभा का टिकट मांग रहे थे मगर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। जिसके बाद से उनकी पार्टी में कुछ खास बनती नहीं है। 

मीडिया में ऐसी भी रिपोर्टें है कि कुमार विश्वास से बीजेपी पहले से ही संपर्क साधना चाहती थी। ताकि वह लोकसभा चुनाव के दरमियान बीजेपी का प्रचार-प्रसार कर सकें। वहीं, कुमार विश्वास के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रिश्ते किसे से छिपे नहीं हैं। ऐसी अटकलें लग रहीं है कि बीजेपी विश्वास को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से टिकट दे सकती है। हालांकि, विश्वास गाजियाबाद के रहने वाले हैं और यह सीट विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह की है, जिनका टिकट कटना नामुमकिन है। 

उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कुमार विश्वास ने आम आदमी पार्टी की टिकट पर अमेठी से चुनाव लड़ा था और ऐसी भी खबरें थी कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत कर सकती है। 

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