मध्य प्रदेश

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देवेंद्र फडणवीस इंदौर में भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी के समर्थन में प्रचार करने आए थे
उज्जैन. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मंगलवार काे महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा महाकाल का अभिषेक किया और आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बाबा महाकाल से इस वर्ष महाराष्ट्र समेत देशभर में अच्छी बारिश की कामना की है। बाबा से देश में समृद्ध सरकार बनने के साथ ही खुशहाली कायम रहे, यही प्रार्थना की।
शिंदे, पवार और दिग्विजय ने वाेट बैंक की राजनीति के लिए दिया था हिंदू आतंकवाद नाम : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इंदाैर में मीडिया से चर्चा में कहा कि मालेगांव और समझाैता ब्लास्ट के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने वाेट बैंक की राजनीति के चलते हिंदू आतंकवाद नाम दिया था। हकीकत यह है कि आतंक का काेई धर्म नहीं हाेता, लेकिन वाेट बैंक की राजनीति के चलते साजिश के तहत यह नाम दिया गया था। उन्हाेंने कहा 2014 के मुकाबले इस बार भाजपा और ज्यादा सीटें जीतेगी।
साध्वी प्रज्ञा काे भाेपाल से उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि यह फैसला केंद्रीय नेतृत्व ने बेहद साेच-समझकर लिया है। भाजपा में संसदीय बाेर्ड ही इस तरह के बड़े निर्णय लेता है। वहीं लाेस स्पीकर सुमित्रा महाजन काे लेकर कहा - ताई इंदाैर का गाैरव हैं। उन्हाेंने 30 साल इस शहर की सेवा की। खूब काम किए। वही काम हमारी जीत का आधार बनेंगे।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने गलत दावे और भ्रामक विज्ञापन करने वाली कंपनियों पर नकेल कसने के लिए उत्पाद के साथ नेचुरल, शुद्ध, पारंपरिक आदि जैसे शब्दों की परिभाषा तय की है। अगर कोई कंपनी गलत दावे और भ्रामक विज्ञापन करती है तो उसे 10 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि 1 जुलाई 2019 से ये नए नियम लागू कर दिए जाएंगे।
 
बताया जा रहा है कि कंपनियां खाद्य पदार्थों को लेकर झूठे दावे करती आ रही हैं। कंपनी के लोक-लुभावन विज्ञापन को देखकर लोग उत्पाद खरीद लेते हैं, लेकिन विज्ञापन में जो बताया जाता है उत्पाद में ग्राहक को वो क्वालिटी नहीं मिलती। इन्हीं लोक-लुभावन विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए एफएसएसएआई पिछले एक साल से काम कर रही है। अब उसने हर तरह के खाद्य पदार्थ के लिए परिभाषा तय कर दी है। किसी भी तरह के खाने के उत्पाद से संबंधित हर कंपनी को इसका पालन करना अनिवार्य होगा। 

एफएसएसएआई की नई परिभाषा

नेचुरल- एफएसएसएआई की परिभाषा में कहा गया है कि अब सिर्फ उन खाद्य पदार्थों के साथ नैचुरल यानी प्राकृतिक शब्द का इस्तेमाल होगा जो सीधे तौर पर पौधे, मिनरल या जानवरों से प्राप्त होंगे। इन खाद्य पदार्थों में किसी तरह की मिलावट नहीं होनी चाहिए।

ओरिजनल- जिन खाद्य पदार्थों के स्रोत की जानकारी आसानी से ग्राहक को मिल सकती है उसी उत्पाद के साथ इस शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा उत्पाद की क्वालिटी और टेस्ट में वर्षों बाद भी कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। 

पारंपरिक- एफएसएसएआई की परिभाषा के अनुसार पारंपरिक उत्पाद बताकर बेचने वाली कंपनियों के लिए 30 साल की समय सीमा निर्धारित की गई है। जिन खाद्य पदार्थों को पारंपरिक कह कर बेचा गया है उसके लिए कंपनी को साबित करना होगा कि पिछले 30 वर्षों से उत्पाद को उसी फार्मूले और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बनाया जा रहा है।

जबलपुर के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह को कमलनाथ सरकार के मंत्री लखन घनघोरिया के साथ एक शादी में नाचना भारी पड़ गया। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। 

भाजपा ने मंत्री से एसपी की नजदीकी के आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से लिखित शिकायत की थी। जिसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीएल कांताराव ने इस मामले में रिपोर्ट भी तलब की थी। एसपी अमित सिंह की जगह निमिष अग्रवाल को जबलपुर एसपी बनाया गया है। जबकि, दीपक शुक्ला को सिंगरौली का एसपी बनाया गया है। 

यह था मामला

21 फरवरी को जबलपुर के एक मैरिज गार्डन में आईपीएस अधिकारी विवेकराज सिंह कुकरेले के भाई विनयराज की शादी थी। आमंत्रण पर जबलपुर एसपी अमित कुमार सिंह विवाह समारोह में पहुंचे थे। वहां मंत्री और अन्य अधिकारियों के साथ उन्होंने डांस किया था। उसी समारोह का वीडियो वायरल किया गया है।

भाजपा ने सीईसी को सौंपा था शिकायती पत्र

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लूणावत की अगुवाई में मंगलवार को भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा था। इस पत्र में लिखा गया था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जबलपुर एसपी अमित सिंह प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया के साथ नाच रहे हैं। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि इस तरह नृत्य करने से मंत्री के साथ एसपी साहब की नजदीकियां दिख रही हैं।

इसके अलावा इस पत्र में 2018 के विधानसभा चुनाल के दौरान प्रशासन द्वारा जबलपुर पूर्व से भाजपा प्रत्याशी और समर्थकों पर झूठे मुकदमें दर्ज करने के भी आरोप लगाए गए। भाजपा ने कहा कि यह कार्य कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव के दौरान लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। भाजपा ने तब एसपी के तबादले की मांग की थी।

आम चुनाव के शंखनाद के साथ ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश में अधिक से अधिक सीटें जीतने की कवायद तो कर रही है, मगर वह अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से उलझ गई है। किसानों की कर्जमाफी, युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, कर्मचारियों को डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी और अन्य मुद्दों के दम पर चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में विरोधी भाजपा ने घेर लिया है। सोशल मीडिया में कांग्रेस को वायदे न निभाने पर जमकर घेरा जा रहा है और उसे इसका जवाब नहीं सूझ रहा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के दो दिन पहले ही कमलनाथ सरकार को पिछड़ों के लिए आरक्षण का दायरा 14 से 27 प्रतिशत बढ़ाने का अध्यादेश लाना पड़ा, ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके। अपने अनुकूल वातावरण बनाने के लिए कमलनाथ सरकार ने प्रिंट और इलेक्टानिक मीडिया को सिर से पांव तक विज्ञापनों से लाद दिया, बावजूद इसके वह अपने खिलाफ पनपे एंटी इनकंबैंसी फैक्टर को कंट्रोल नहीं कर पा रही है।
10 दिनों में पूरा करना था वादा
 
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के मुताबिक सरकार बनते ही 10 दिनों के भीतर ही किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाना था मगर तीन महीने होने को हैं किसानों का कर्जा माफ नहीं किया जा सका है। सिर्फ कागजी कार्यवाही से किसान खुश नहीं हैं। बता दें कि किसानों को दो लाख रूपए तक कर्जा माफ किया जाना था। अभी तक सिर्फ बैंकों से डिफाल्टर किसानों की सूची ही जारी की गई है और जो किसान सूचियों में स्थान नहीं पा सके उनसे आवेदन भरवाए गए हैं। कई किसानों को कार्यक्रमों के जरिए कर्जमाफी के प्रमाणपत्र दिए तो गए हैं, मगर वास्तविकता इससे एकदम उलट है, क्योंकि कर्जमाफी की राशि किसानों के केसीसी खातों में स्थानांतरित नहीं की गई है। समय पर कर्जमाफी न होने से किसान खफा हैं। राजनीति विश्लेषक मानते हैं कि ये किसान भाजपा के पाले में जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को अत्यधिक नुकसान हो सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश में इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है और उसने प्रदेश स्तर पर धिक्कार दिवस का आयोजन करके कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है। हालांकि कमलनाथ ने किसानों को शांत करने के लिए लोकसभा चुनाव की घोषणा के दिन मोबाइल फोन पर मैसेज करके वादा किया है कि आदर्श आचार संहिता लगने के कारण कर्जमाफी चुनाव के तत्काल बाद की जाएगी, लेकिन कांग्रेस के हाथों से किसानों का बड़ा मुद्दा भाजपा ने एक तरह से लपक ही लिया है।
 
युवा और कर्मचारी भी रूठे
 
कमलनाथ और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं और कर्मचारियों को बेरोजगारी भत्ता और 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देना का वायदा किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यह मुद्दा भी कमलनाथ सरकार के लिए गले की फांस की तरह बन गया है। अभी तक न तो बेरोजगार युवाओं को 4 हजार रूपए बेराजगारी भत्ता दिया गया है और न ही कर्मचारियों को 2 प्रतिशत डीए।
 
पिछड़ों को साधने की कोशिश
 
हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने किसानों की नाराजगी से बचने के लिए पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण की सौगात देकर साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा कम ही मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। जिस तरह से किसानों के साथ कमलनाथ सरकार ने वादाखिलाफी की है उसका खामियाजा उसे भुगतने के लिए तैयार रहना ही होगा और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। मप्र में अभी तक पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है जिसे अब अध्यादेश लाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही मोदी सरकार द्वारा लाए गए गरीब सवर्ण आरक्षण के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण को भी मंजूरी दे गई है, इस पर भी कांग्रेस ने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।
 
ब्यूरोक्रेसी भी नाराज
 
अहम् बात यह भी है कि कमलनाथ सरकार ने जिस तरह से पदारूढ़ होते ही ताबड़तोड़ तबादलों की झड़ी लगा दी है, उससे भी ब्यूरोक्रेसी नाराज देखी जा रही है, जिसका नुकसान कांग्रेस को होगा। अफसरशाही इस बात को लेकर नाराज है कि बदले की भावना से तबादले किए जा रहे हैं। कमलनाथ को लगता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने हर जगह अपने आदमी बैठा रखे थे, जिन्हें चुन-चुनकर स्थानांतरित किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि वे तो सरकार के आदमी हैं, जैसा सरकार चाहेगी वैसा वे काम करेंगे, ऐसे में उनका क्या दोष। नतीजतन, कांग्रेस को तीन महीने के कार्यकाल में ही एंटीइनकंबैंसी का सामना करना पड़ रहा है। ऐन चुनाव के मौके पर और उस पर आदर्श आचार संहिता लग जाने की वजह से वह कोई निर्णय भी नहीं ले पा रही है जिससे वह धर्मसंकट में है कि किसानों व प्रदेश की जनता से किए गए वायदों को किस तरह निभाए।
 
-राजेन्द्र तिवारी

मध्य प्रदेश के सतना में कांग्रेस नेता अजय सिंह ने वायु सेना द्वारा पीओके में किए गए हवाई हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है, "कुछ दिन पहले, पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में बम गिराए गए। उन्होंने (प्रधानमंत्री) कहा कि बालाकोट में सबकुछ नष्ट हो गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि हवाई हमले से वहां कुछ नष्ट नहीं हुआ है। आज नहीं, तो अगले 10 दिनों में, घटनाओं का पूरा क्रम खुद ही सामने आ जाएगा।"

 


किसने बताई मारे गए लोगों की संख्या

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि भारत के एक गौरवान्वित नागरिक के तौर पर उन्हें पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर की गई वायु सेना की करवाई पर पूरा विश्वास है, लेकिन वहां 300-350 लोगों के मारे जाने की यह संख्या किसने बताई है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया वायु सेना के इस अभियान पर यकीन करे, इस बारे में सरकार को प्रयास करने चाहिए।

चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, "वायु सेना की कार्रवाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले वायुसेना को सलाम किया। मोदी जी यह क्यों भूल जाते हैं?' 

उन्होंने कहा, 'वायुसेना के वायस एयर मार्शल ने कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कोई आम व्यक्ति और सैनिक हताहत नहीं हुआ। फिर किसने मारे गए लोगों की संख्या 300-350 बताई?" 

चिदंबरम ने यह भी कहा, 'एक गौरवान्वित नागरिक के तौर पर मुझे अपनी सरकार में भरोसा है। लेकिन अगर हम चाहते हैं कि दुनिया इस पर विश्वास करे तो सरकार को विपक्ष पर निशाना साधने के बजाय इस दिशा में प्रयास करने चाहिए।'

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में इस बार शिवरात्रि के पर्व पर अधिकारियों की अपरिपक्वता देखने को मिली है। यहां भगवान महाकाल के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आए हुए हैं। लेकिन परिसर में प्रवेश के बाद भी वो परिसर के मंदिरों में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

 

यहां जगह के खाली होने के बावजूद भी लोगों की ढाई किलोमीटर लंबी लाइन बनाई गई है। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केवल इतना ही नहीं दोपहर डेढ़ से साढ़े तीन बजे तक वीआईपी दर्शन के लिए भी नियम बनाया गया है।

मंदिर में इस बार की गई व्यवस्था से ना केवल आम लोग परेशान हैं बल्कि यहां के पुजारी पुरोहित भी नाराज हैं। बताया जा रहा है कि सिंहस्थ के समय भी लाखों लोगों के आने के दौरान ऐसी समस्या नहीं आई थी। 

इंदौर. कमोडिटी कारोबारी संदीप सोहनलाल अग्रवाल उर्फ संदीप तेल की बुधवार शाम 7 बजे विजय नगर थाने से करीब 150 मीटर दूर तीन बदमाशों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। मामले में गुरुवार दोपहर तक पुलिस को आरोपियों का सुराग नहीं लग सका था। वहीं एमवाय अस्पताल में कारोबारी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने दावा किया है कि हत्या के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने 7 टीम गठित की है। वहीं आरोपियों पर 20 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। मामले में 30 से अधिक संदिग्ध लोगों से पुलिस द्वारा पूछताछ की गई है। पुलिस के अनुसार बदमाश सफेद रंग की कार से मृतक कारोबारी के ऑफिस के बाहर रैकी कर रहे थे। जैसे ही संदीप मोबाइल चलाते हुए सीढ़ियों से उतरकर अपनी मर्सिडीज के पास पहुंचे, तभी बदमाशों ने एक के बाद एक 5 फायर किए। पुलिस को घटना स्थल से सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं। अग्रवाल को गंभीर हालत में बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां उनकी मौत हो गई। 0:00 केबल में संदीप ने 20 करोड़ रु. लगाए थे एसपी पूर्व अवधेश गोस्वामी ने बताया कि हत्या जी. सच्चानंद शोरूम के सामने हुई। एक गोली संदीप के चेहरे पर, दूसरी गर्दन के पास, तीसरी पसली, चौथी व पांचवीं गोली पैर में लगी। गोली लगते ही वह ड्राइवर सीट वाले गेट के पास जमीन पर गिर गए। इसके बाद बदमाश कट्टे व पिस्टल लहराते हुए पहले सड़क की ओर भागे फिर वापस एक बदमाश लौटा और दो गोलियां और दागीं। वहीं पुलिस अधिकारी तीन गोली लगना बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि एसआर केबल में संदीप ने 20 करोड़ रु. लगाए थे। पार्टनरों से विवाद के बाद वे अलग हो गए थे। उनके इसमें करीब 19 करोड़ रुपए फंसे थे। दो माह पूर्व हटा दिए थे सुरक्षा गार्ड केबल विवाद के चलते परिवार के कहने पर संदीप ने दो बाउंसर साथ रखे थे। करीब दो माह पूर्व ही संदीप ने उन्हें हटा दिया था और अकेले ही घूमने लगे थे। एसआर केबल में 20 करोड़ का निवेश किया था संदीप का तेल, प्रॉपर्टी, ब्याज पर रुपए चलाने और कमोडिटी का कारोबार है। कम समय में ही एक युवा कारोबारी की पहचान बनाकर वह मीडिया लाइन में भी जुड़ गए थे। कुछ समय पूर्व उन्होंने एसआर केबल में रोहित सेठी और सुशील बजाज के साथ पार्टनशिप कर ली थी। बताते हैं इसमें 20 करोड़ का निवेश कर चुके थे, लेकिन कुछ माह पूर्व पार्टनरों से हुए विवाद के बाद वे केबल लाइन से अलग हो गए थे। बताते हैं उनका पार्टनरों से कागज पर सेटलमेंट हो गया था, लेकिन करीब 19 करोड़ नहीं मिले थे। इसे लेकर पार्टनरों से विवाद चल रहा था। ये बात पुलिस को परिजन ने बताई है। पुलिस पार्टनरों की भूमिका भी जांच रही है। शीर्ष पुलिस अफसर के फेयरवेल में साजिश की बात शहर के एक बड़े पुलिस अफसर के तबादले के बाद उनकी फेयरवेल पार्टी, जो होटल मेरियट में आयोजित हुई थी, उसमें संदीप के कुछ विरोधी भी पुलिस अफसरों के साथ मौजूद थे। बताते हैं इस पार्टी में ही कुछ गुंडा प्रवृत्ति के लोग भी गोपनीय ढंग से पहुंचे थे और यहीं पर संदीप पर हमले की साजिश रच ली गई थी, लेकिन अफसरों को इसकी जानकारी थी या नहीं ये भी एक बड़ा सवाल है। कई भाजपा नेताओं के बड़े फाइनेंसर थे संदीप संदीप के बारे में कहा जाता है कि उसके कई भाजपा नेताओं से घनिष्ट संबंध थे। वह कई नेताओं के लिए चुनाव व अन्य कार्यक्रमों में फंडिंग भी करते रहे हैं। उनके भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं से भी सीधे संपर्क थे।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बारे में उनकी सरकार सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय करेगी। जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी सरकार सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण कब से देगी, तो इस पर कमलनाथ ने यहां संवाददाताओं को बताया कि इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले मध्य प्रदेश सरकार समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेगी।

 

 उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पर विचार कर रहे हैं कि कैसे लागू करें……समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेंगे। हमें यह देखना है कि किसी के हितों को नुकसान न हो।’’ कमलनाथ ने कहा, ‘‘ओबीसी का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुझसे मिलने आया था और कह रहा था कि उनके लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम है।’’ इससे पहले कमलनाथ ने प्रदेश के 55 लाख किसानों की दो लाख रूपये तक की अपनी सरकार की 50,000 करोड़ रूपये के फसल ऋण माफ करने वाली ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’ में आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। 
इस दौरान उन्होंने कहा, ‘‘निवेश आने से रोजगार का निर्माण होता है और विश्वास से ही निवेश आता है । निवेश आए बिना रोजगार के अवसर पैदा करना संभव नहीं है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जल्दी ही प्रदेश में निवेश आने का सिलसिला शुरू होगा।’ उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश लाने के बारे में देश के उद्योगपतियों से उनकी बात चल रही है और एक महीने में बताऊंगा की कितना निवेश मध्य प्रदेश में आया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी सरकार के परफार्मेंस के बारे में भी मीडिया से हर महीने जानकारी साझा करूंगा।

भोपाल। अगले वित्त वर्ष में बिजली की कीमतें बढ़ने के आसार कम हैं। तीनों विद्युत वितरण कंपनियों ने एनुअल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) के लिए कोई अतिरिक्त राशि की मांग नहीं की है। वितरण कंपनियों की ओर से पॉवर मैनेजमेंट कंपनी विद्युत नियामक आयोग में एआरआर जमा कराती है। आयोग ने 22 जनवरी तक एआरआर जमा करने को कहा है।
एआरआर के आधार पर ही आयोग टैरिफ तय करता है। बिजली कंपनी के अफसर अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार कर रहे हैं कि मई में लोकसभा चुनाव और साल के अंत में नगरीय निकाय के चुनाव देखते हुए बिजली दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है। फरवरी तक घोषित नहीं हुआ तो जून के बाद ही घोषित होगा टैरिफ: विद्युत नियामक आयोग मार्च के अंतिम सप्ताह में बिजली टैरिफ जारी करता है। यदि इस बार फरवरी तक टैरिफ घोषित नहीं हुआ तो यह जून के बाद ही घोषित होगा। लोकसभा चुनाव के लिए फरवरी अंत से लेकर मार्च के पहले सप्ताह के बीच कभी भी आचार संहिता लागू होने की संभावना है। 2014 में 5 मार्च को आम चुनाव की घोषणा हुई थी और 16 मई तक चुनाव की प्रक्रिया चली थी। आचार संहिता के दौरान न तो जन सुनवाई हो पाएगी और न टैरिफ घोषित हो सकेगा। लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के करीब एक महीने बाद यानी जून में टैरिफ घोषित हो पाएगा।

भोपाल. ग्वालियर। मकर संक्रांति के बाद सर्दी से राहत की बात सोच रहे हैं तो ये बाद दिमाग से निकाल दे। क्योंकि इस बार संक्रांति के बाद भी कड़ाके की सर्दी के दो से तीन दौर और आ सकते हैं। इसका कारण, कश्मीर घाटी में बर्फबारी का दौर जारी है। सोमवार से हवाओं का रुख बदलने से एक बार फिर कंपाने वाली सर्दी का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक दो दिन बाद उत्तरी हवा एक बार फिर पारे को गिराएगी। प्रति चक्रवात के कारण शनिवार को पूर्वी और दक्षिण पूर्वी हवा चलने से रात के तापमान में जरूर थोड़ा सा इजाफा हुआ है। क्या कहते हैं वैज्ञानिक: मौसम विज्ञानी डॉ. डीपी दुबे के अनुसार चक्रवात में हवाएं चारों तरफ से आकर एक जगह एकत्रित होती हैं। अगर कहीं से इन हवा के साथ नमी आ रही है तो वह बादल बन जाते हैं और बरसात की संभावना बढ़ जाती है। प्रति चक्रवात में हवा दूर-दूर हो जाती हैं। इससे बादल नहीं बनते तथा मौसम में गरमाहट आ जाती है। 

भोपाल: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पीके साहा ने बताया कि शनिवार को दिन का तापमान 25.1 डिग्री दर्ज किया गया। इसमें 1.3 डिग्री का इजाफा हुआ। यह सामान्य रहा। दिन में हल्की धूप निकली, लेकिन शाम चार बजे तक ठंडी हवा नहीं चली। शुक्रवार को दिन का तापमान 23.8 डिग्री दर्ज किया गया था। रात का तापमान 10.1 डिग्री दर्ज किया गया। इसमें भी 1.3 डिग्री की बढ़ोतरी हुई। यह छह दिन बाद 10 डिग्री के पार पहुंचा। एक दिन पहले रात का तापमान 8.8 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विशेषज्ञ एसके नायक का कहना है कि 15- 16 और इसके एक दिन बाद 18 जनवरी को हिमालय के पश्चिमी हिस्से में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के पहुंचने का अनुमान है। अभी तापमान में ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है, लेकिन 19 जनवरी से यहां ठंड बढ़ सकती है। मिल रहे ट्रेंड के मुताबिक अभी आने वाले दिनों में ठंड के एक दो दौर और आ सकते हैं।

ग्वालियर: पूर्वी और दक्षिण- पूर्वी हवा चलने के कारण शनिवार को सुबह 8:30 बजे तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस रहा। बीते रोज सुबह 8:30 बजे तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। इसी तरह शाम 5:30 बजे तापमान 19 डिग्री रहा है जबकि शुक्रवार को शाम 5:30 बजे तापमान 18.8 डिग्री रहा था। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

इंदौर: अभी हवा का रुख दक्षिण-पूर्व बना हुआ है। इस कारण दिन-रात का तापमान सामान्य से ज्यादा हो गया। शनिवार को अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा रहा। वहीं शुक्रवार रात न्यूनतम तापमान 2 डिग्री बढ़कर 11.1 डिग्री रहा जो सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा है। सुबह 9 बजे तक ठंड रही, लेकिन दिन चढ़ते ही इसमें कमी आई। मौसम सुधरने से लोगों को राहत मिली। तेज ठंड होने से पत्ती, फली जलने की स्थिति में आ जाती है। सामान्य तापमान रहने से फसलों को फायदा होता है। हालांकि मावठा नहीं गिरने से किसानों को सिंचाई के इंतजाम करना पड़ रहे हैं। ठंड में भी देर रात से अलसुबह के बीच सिंचाई करने खेत में जाना पड़ता है। मौसम विभाग का मानना है 14 जनवरी के बाद ठंड का दौर फिर आएगा। उत्तर में बर्फबारी शुरू होने से मालवा में भी ठंडक बढ़ेगी। प्रदेश की बात की जाए तो खजुराहो में सबसे कम 3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ।

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