मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश (9804)

पांचों राज्यों का चुनावी संग्राम खत्म होने के बाद अब सबकी निगाहें परिणामों पर हैं। मध्यप्रदेश में बीते 28 नवंबर को सभी 230 सीटों पर मतदान हुए थे। भाजपा की पिछले 15 साल से सूबे में सरकार है। शिवराज सिंह ने लगातार चौथी मुख्यमंत्री बनने के लिए पूरी ताकत लगा दी। चुनावी पंडित इस विधानसभा चुनाव को शिवराज को चुनने या नकारने के बीच जा चुनाव मान रहे हैं।

 

चुनाव के परिणाम तो 11 दिसंबर को जारी होंगे मगर उससे पहले नजर डालते हैं एग्जिट पोल के आंकड़ों पर- 

टाइम्स नाउ-सीएनएक्स एग्जिट पोल

भाजपा - 126
कांग्रेस - 89
बसपा - 06
अन्य - 09 

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल 

भाजपा 102-120 सीटें (40% वोट) 
कांग्रेस 104-122 सीटें (41% वोट) 
अन्य 04-11 सीटें (19% वोट) 

रिपब्लिक टीवी- सी वोटर एग्जिट पोल

भाजपा - 90-106 सीटें
कांग्रेस - 110-126 सीटें
अन्य - 6-22 सीटें

पिछले चुनाव में पार्टियों की स्थिति

मध्यप्रदेश

भाजपा  

165

कांग्रेस

58

अन्य

7


कांग्रेस ने चुनाव में मुख्यमंत्री के खिलाफ बुधनी से अरुण यादव को मैदान में उतारा।  भाजपा और कांग्रेस के अलावा इस चुनावों में बहुजन समाज पार्टी ने 227 और समाजवादी पार्टी ने 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने भी 208 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए। 

इस बार प्रदेश में कुल पांच करोड़ से मतदाताओं की संख्या थी। चुनाव आयोग ने पिछली बार से 21.24% ज्यादा 65,341 मतदान बूथ बनाए। 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान 21 जनसभाएं की और जमकर हमला बोला। फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी 25 सभाएं की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद 100 से ज्यादा सभाओं को संबोधित किया।

मध्यप्रदेश में लोकायुक्त पुलिस ने वरिष्ठ महिला अफसर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद कई ठिकानों पर छापे मारे हैं।

 

लोकायुक्त पुलिस की इंदौर इकाई के अधीक्षक दिलीप सोनी ने शुक्रवार को बताया कि जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर को जिले के किशनगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया। वह नजदीकी खरगोन जिले में पदस्थ हैं।

उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान डामोर की कार से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद की गयी जिसके स्त्रोत के बारे में वह पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। वह खरगोन से रतलाम जा रही थीं, जहां उनका परिवार रहता है।

सोनी ने बताया, 'हमें शक है कि महिला अफसर ने यह नकदी रिश्वत के रूप ली थी। हमने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है। विस्तृत जांच जारी है।'

इस बीच, लोकायुक्त पुलिस के अलग-अलग दलों ने डामोर के खरगोन और रतलाम स्थित घरों पर छापे मारे।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों स्थानों पर छापों के दौरान लोकायुक्त पुलिस को महिला अधिकारी और उनके परिजनों के एक मकान, दो भूखंडों, एक फ्लैट और कृषि भूमि के सुराग मिले हैं। उनके घरों में 5.5 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य का घरेलू सामान, सोने-चांदी के जेवरात और दो चारपहिया गाड़ियां भी मिली हैं।

अधिकारियों के मुताबिक डामोर और उनके परिजनों के बैंक खातों तथा लॉकरों की भी जांच की जा रही है। उनकी चल-अचल संपत्ति का विस्तृत मूल्यांकन जारी है।

भोपाल। कांग्रेस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा एवं इसमें की जाने वाली छेड़छाड़ का आरोप लगाने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा ईवीएम से छेड़छाड़ गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं। मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को हुए मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा एवं छेड़छाड़ पर कांग्रेस द्वारा उठाये जाने वाले सवाल के जवाब में चौहान ने यहां मुख्यमंत्री निवास पर संवाददाताओं को बताया, ‘‘मीडिया है, जागरूक लोग हैं, सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों में सब तरह के लोग हैं। कोई ईवीएम में छेड़छाड़ कर सकता है क्या? ये कोई गुड्डा-गुडिया का खेल है जो कोई भी छेड़छाड़ कर देगा।’’

न्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा भी नहीं होता। भारतीय राजनीति में कभी ऐसा नहीं हुआ कि चुनाव आयोग ने ईवीएम बदल दी हो। ये तकनीकी रूप से भी कहीं संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर संदेह करना ठीक नहीं है। एक नहीं, अनेक परिणाम ऐसे आये हैं कि उसी ईवीएम ने दूसरी पार्टी को भी जिताया है। चौहान ने बताया कि कांग्रेस मतदान के दिन से ही अनर्गल प्रलाप कर रही है। मतदान के दिन तीन बजे ही मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को अपनी विजय का विश्वास नहीं है। वह हार की पूर्व भूमिका तैयार कर रही है। इसलिए बौखलाकर हार का ठीकरा अभी से ईवीएम के माथे पर फोड़ रही है।’’ चौहान ने बताया, ‘‘आज हमने कैबिनेट में कुछ जरूरी विषयों की समीक्षा की। अधिकारियों को बुलाया और बातचीत की। लेकिन उस कैबिनेट के बारे में भी कांग्रेस द्वारा ऐसा हंगामा मचाया गया, जैसे भाजपा की सरकार कोई बड़ा असंवैधानिक काम कर रही हो। हमने अपने कर्तव्यों का पालन किया है और लगातार करते रहेंगे।’’
 
न्होंने कहा कि कैबिनेट मीटिंग में नीतिगत फैसले नहीं हो सकते लेकिन रूटीन का काम हम करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यूनमत समर्थन मूल्य के मामले एवं उर्वरक आपूर्ति के साथ-साथ धान व सोयाबीन खरीदी की समीक्षा की गई। जीका वायरस के कारण जो आशंका पैदा हुई थी, उसके बारे में समीक्षा की गई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा शानदार बहुमत प्राप्त कर चौथी बार लगातार सरकार बनाएगी।

मध्यप्रदेश में चुनाव के नतीजे सामने आने में बस कुछ ही दिनों का समय बाकी है। इन चुनावों को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) की एंट्री ने कई सीटों पर त्रिकोणीय बना दिया। महाकौशल में कौशल दिखाने वाली पार्टी ही अक्सर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होती है। इस इलाके में जीजीपी का शुरुआत से ही असर देखा गया है। इस बार जीजीपी के तीनों धड़ों ने एक साथ चुनाव लड़ा। अब परिणाम के पहले ये समीकरण दूसरी पार्टियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं।

टूट से गिरा था जीजीपी का मत प्रतिशत 

इन चुनावों में जीजीपी ने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 2013 विधानसभा चुनाव में जब जीजीपी तीन टुकड़ों में टूट गई थी तब इसका मत प्रतिशत 1 फीसदी हो गया था।

 

2003 के चुनावों में जीजीपी ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसने महाकौशल के छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी में तीन सीटें जीती। अन्य तीन सीटों पर इसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। राजनीति के पंडितों को अचंभित करते हुए 3.23 फीसदी वोट हासिल किये।

2008 के चुनावों में पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) और गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) । जीजीपी ने 86 और जीजीएम ने 92 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इस टूट की वजह से जनजातीय पार्टी का जनाधार भी बंट गया और मत प्रतिशत 1.80% तक गिर गया। इन चुनावों में दोनों ही धड़ों का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया।

2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के एक धड़े ने अलग होकर भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) नाम की नई पार्टी बना ली और जीजीपी की मुश्किलें बढ़ गईं। चुनावों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 64,  गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) ने 6 और भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा।  नतीजा यह हुआ कि पार्टी का वोट प्रतिशत एक फीसदी हो गया।

एकता की ताकत को समझते हुए इस बार तीनों धड़ों ने एक होकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के पीछे पार्टी का उद्देश्य जनजाति मतदाताओं के अतिरिक्त वोट हासिल करना माना जा रहा है। जीजीपी इस बार के चुनाव में अपनी खोई साख वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। 

भोपाल. मध्य प्रदेश में वोटिंग के बाद अब ईवीएम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों की जानकारी मांगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भोजपुर से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पचौरी ने भोपाल और रायसेन जिलों में रविवार को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

 रविवार को पचौरी सबसे पहले रायसेन पहुंचे। उन्होंने वहां पर एसपी जगत सिंह के साथ स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने कहा कि मतदान के बाद प्रदेश भर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ईवीएम मशीनें जिन स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं, उनके मुख्य द्वार की विजिबिलिटी कैमरे के साथ प्रॉपर होनी चाहिए, जो कि रायसेन में नही है। 

 पत्र लिखकर मांगी आयोग से ईवीएम के नंबरों की जानकारी : कांग्रेस ने चुनाव आयोग से स्ट्रांग रूम के अंदर लैपटॉप ले जाने पर रोक लगाने की मांग की है। सागर, खंडवा, पंधाना की घटनाओं की जांच होनी चाहिए। सुरेश पचौरी ने आयोग को पत्र लिखकर ईवीएम की जानकारी मांगी गई है। पूरे चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम, उपयोग में लाई गई ईवीएम और बिना उपयोग वाली ईवीएम समेत खराब हुई ईवीएम के नंबरों की जानकारी मांगी गई है। आयोग को लिखे गए पत्र में पचौरी ने आशंका जताई गई है कि ईवीएम के जरिए गड़बड़ी हो सकती है। 

 बंद हो गई एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे: रायसेन जिला मुख्यालय पर बनाए गए स्ट्रांग रूम में एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे लाइट नहीं होने के कारण करीब आधे घंटे के लिए शाम 6 बजे बंद हो गए, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने स्ट्रांग रूम के बाहर हंगामा शुरू कर दिया था।

 प्रदेश के कई जिलों से मिली शिकायतें: पचौरी ने कहा कि भोपाल, अनूपपुर, सागर में भी मशीनों के मूवमेन्ट को लेकर शिकायतें मिली हैं। इससे सब से साफ है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और गड़बड़ी होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, उन्होंने कहा कि 2013 में जिस तरह स्ट्रांग रूम के बाहर सोने की इजाजत थी, वैसी ही व्यवस्था इस बार भी की जाए। 

 मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया निरीक्षण : ईवीएम पर लगातार खड़े होते संदेह के सवालों के बीच आखिरकार चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कांताराव ने भी भोपाल में स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। स्ट्रांग रूम के निरीक्षण के बाद कांताराव ने कहा कि चुनाव आयोग के 100 फीसदी नियमों का पालन ईवीएम की सुरक्षा में किया जा रहा है। 

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर स्ट्रांग रूम और मतगणना के दौरान ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनावों और मतगणना के दौरान फूलप्रूफ व्यवस्था की जाए। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को चुनाव आयोग से मिला।

 

 प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ में स्ट्रांगरूम के आसपास अनाधिकृत रूप से सीसीटीवी ठीक करने के बहाने लोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ आते हैं और घंटों तक वहीं रहते हैं। उन्होंने आयोग से इस पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आयोग को सुझाव दिया है कि ईवीएम मशीनों को स्ट्रांगरूम से मतगणना टेबल तक पहुंचाने के रास्ते तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को निगरानी करने का अधिकार दिया जाए। साथ ही, यह भी सुझाव दिया है कि पहले चरण की मतगणना में मिले वोटों की संख्या प्रत्याशियों बताई जाए जिसके बाद ही दूसरे चरण की मतगणना शुरू हो। साथ ही, मतगणना स्थल पर कलेक्टरो को मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी विवेक तन्खा ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि शुक्रवार को भोपाल के स्ट्रांग रूम में डेढ़ घंटे तक बिजली नहीं थी। उनका कहना है कि इससे मतदाताओं और राजनीतिक दलों में ईवीएम गड़बड़ी का संदेह पैदा होता है। वहीं उन्होंने एमपी के खुरई विधानसभा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वोटिंग के 48 घंटे बाद वह बस में भरककर लाए जाते हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना था कि वे ईवीएम रिजर्व थे और पुलिस कस्ट़डी में थे। तन्खा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ईवीएम को पुलिस स्टेशन में रखने की बजाय डीआरओ की कस्टडी में रहते हैं। उन्होंने इस मामले पर आयोग से कार्रवाई करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप

कांग्रेस नेता मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि यूपी के सहारनपुर में 167 मतदान केन्द्रों में कई में नाम हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक खास वर्ग विशेष के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। सिंघवी का कहना है कि अगर एक पोलिंग बूथ में 100 नाम हटाए जाते हैं, तो पूरे जिले में यह संख्या 16 हजार तक पहुंच सकती है, वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में 67 लाख वोटों का फर्क पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग ने भरोसा दिलाया है कि वह इस पर कार्रवाई करेंगे।

मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसका फैसला जनता जनार्दन कर चुकी है। 11 दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे। इसी बीच पुलिस ने एक सरपंच को लोगों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज करके गिरफ्तार किया है। सरपंच पर आरोप है कि उसने स्थानीय नागरिकों को कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की धमकी दी थी। यह घटना राजनगर विधानसभा क्षेत्र के छतरपुर जिले के जौराहा गांव की है। 

 

आश्चर्य की बात यह है कि आरोपी सरपंच का नाता भाजपा से है। गांववालों का आरोप है कि सरपंच ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि वह 13 दिसंबर तक के लिए कहीं दूर चले जाएं। वरना उन्हें जान से मार दिया जाएगा। सरंपच ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। शिकायकर्ता भगीरथ कुशवाहा ने एसपी को दी शिकायत में कहा है कि सरपंच प्रदीप सिंह उसे मारने की धमकी दे रहा है।

आरोपी सरपंच और शिकायतकर्ता की कथित बातचीत का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अरविंद पटेरिया की कांग्रेस उम्मीदवार नाती राजा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धीरज चतुर्वेदी सीधी लड़ाई है। धीरज राज्यसभा के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे हैं। आरोपी सरपंच प्रदीप सिंह के भाई भाजपा नेता हैं। मगर उसपर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करवाने के लिए लोगों को धमकी देने का आरोप लगा है।

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने कहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन रही है। गौर ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता और दिग्विजय मंत्रिमंडल में सदस्य रहे आरिफ अकील से मुलाकात के दौरान की। अकील बृहस्पतिवार को गौर से मुलाकात करने उनके बंगले पहुंचे थे। दोनों ने मीडिया के सामने ही कुछ समय चर्चा की। गौर ने अकील से कहा कि कांग्रेस की सरकार बन रही है और आप मंत्री बन रहे हो। उल्लेखनीय है कि लगातार दस विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले गौर का इस बार पार्टी ने टिकट काटकर उनकी बहू कृष्णा गौर को उम्मीदवार बनाया है। दोनों के बीच बातचीत का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

 

दिग्विजय का दावा, कांग्रेस ला रही 132 सीटें

दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह - फोटो : PTI
उधर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में 132 से अधिक सीट जीतकर अपनी सरकार बनाएगी। राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं। बुधवार को हुए मतदान में 75 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था।

मतों की गिनती 11 दिसंबर को होगी। राज्य में 1993 से 2003 तक 10 साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह से जब कहा गया कि कांग्रेस की 132 सीटें आ रही हैं तो उन्होंने कहा, प्रदेश में हम 132 से अधिक सीटों पर विजय हासिल कर सरकार बनाएंगे। बता दें कि प्रदेश में भाजपा पिछले 15 साल से सत्तारूढ़ है।

सिंह ने कहा, वर्ष 2013 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में लगभग तीन फीसदी फर्जी मतदाता थे। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले हमने मतदाता सूची से इनकी लगभग छंटनी करवा दी। उन्होंने कहा कि इस बार हुए चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना दिल, दिमाग, शरीर और आत्मा सब कुछ लगा दिया, कोई कसर नहीं छोड़ी।

भोपाल। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार के ‘समग्र पोर्टल’ के रिकॉर्ड के अनुसार ‘मामा’ नाम से लोकप्रिय प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पैतृक गांव जैत में 90 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2017 के मुताबिक 2006 से 2016 तक मध्य प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों में 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

 
सुरजेवाला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘शिवराज सिंह चौहान ने षड्यंत्र कर सबसे पहले ‘मामा’ के नाम का मुखौटा लगाया, फिर खुद को ‘किसान पुत्र’ बताया। फिर बने घोषणावीर, फिर आदिवासियों के भाई और टैक्स के सैकड़ों करोड़ खर्च कर कोरी प्रसिद्धि कमाई। लेकिन मामा ने जिस-जिस नाम से प्रसिद्धि कमाई, उन्हीं को धोखा दिया और उनकी लुटिया डुबाई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मामा आये दिन ‘स्वर्णिम से समृद्ध’ मध्यप्रदेश का झूठा ढोल पीट रहे हैं। जानिए, करोड़पति मामा के दीये तले कितनी गरीबी का अंधेरा फैला है। करोड़पति मामा जिस जैत गांव (बुधनी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत) से आते हैं, वहीं गांव के 90 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रह रहे हैं।’’
 
सुरजेवाला ने कहा, ‘‘यह मैं नहीं कह रहा हूं। यह मध्यप्रदेश के ‘समग्र पोर्टल’ पर बताया गया है कि जैत गांव में कुल 327 परिवार हैं, जिनमें से 258 परिवार बीपीएल नीला कार्डधारी व 36 परिवार अंत्योदय अर्थात पीला बीपीएल कार्डधारी हैं। कुल मिलाकर जैत गांव में 327 परिवारों में से 294 परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं।’’ उन्होंने कहा कि यहां तक कि मामा की बुधनी विधानसभा का ‘बकतरा सेक्टर’, जिसमें जैत गांव भी आता है, की 32 में से 31 आंगनवाड़ियों में अभी भी बिजली नहीं है एवं 17 आंगनवाड़ियों में खाना पकाने के बर्तन नहीं हैं। यदि मामा के गांव व विधानसभा में ही बदहाली का यह आलम है, तो कल्पना कीजिए कि राज्य की स्थिति क्या होगी?
 
कांग्रेस पार्टी की 28 नवंबर को होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा, ‘’15 साल से चल रही ऐसी भाजपानीत सरकार को एक सेकेन्ड सत्ता में रहने की आवश्यकता नहीं है।’’ सुरजेवाला ने बताया कि रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) की स्टैटिकल हैंडबुक-2017 की रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश में 2.34 करोड़ लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, जो प्रदेश की जनसंख्या का एक तिहाई यानी 33 प्रतिशत है।
 
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ पर निशाना साधते हुए सुरजेवाला ने कहा, ‘‘चौहान ने ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ के माध्यम से बेटियों का मामा बन खूब ढोल पीटा। यह कहा कि हर बेटी, जो 12वीं कक्षा में जाएगी व 18 वर्ष की आयु तक शादी नहीं करेगी, उसे 1,18,000 रुपये का नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) मिलेगा। मगर उनकी निगाह लाडलियों की एनएससी में जमा लक्ष्मी पर पड गयी। उन्होंने (चौहान ने) 24 दिसंबर 2014 को अपनी कैबिनेट में यह षड्यंत्र किया कि अब एनएससी सर्टिफिकेट की बजाय ‘कागजी प्रमाण पत्र’ जारी किया जायेगा।’’
 
उन्होंने आरोप लगाया कि चौहान की सरकार आदिवासियों के विकास के बजट पर भी कुठाराघात कर रही है। मध्यप्रदेश में 21 प्रतिशत आदिवासी हैं, जिसमें उनके बजट की हिस्सेदारी को 21 प्रतिशत से घटाकर वित्तीय वर्ष 2016-17 में मात्र 14 प्रतिशत कर दिया गया। सुरजेवाला ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान पूरे प्रदेश के एकमात्र ऐसे तथाकथित किसान पुत्र हैं, जो कभी फसल बेचने के लिए मंडी की कतारों में नहीं देखे गये। वहीं, मध्यप्रदेश में विशेषरूप से मंदसौर में हजारों किसान अपनी प्याज एवं लहसुन को 50 पैसे प्रति किलो में बेचने के लिए मजबूर हैं।
 

इंदौर। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये प्रचार के अंतिम समय में सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को सूबे की आर्थिक राजधानी इंदौर में रोड शो किया। उन्होंने राज्य में लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने की चुनौती से जूझ रही अपनी पार्टी के लिये मतदाताओं से समर्थन मांगा। 

शाह यहां चिकमंगलूर चौराहे से रथ की शक्ल वाले भाजपा के विशेष वाहन पर सवार हुए। यह काफिला जुलूस के रूप में खातीपुरा, राजबाड़ा और सर्राफा बाजार समेत अलग-अलग वाणिज्यिक इलाकों से गुजरते हुए सीतलामाता कपड़ा बाजार में खत्म हुआ। ये इलाके शहर के दो विधानसभा क्षेत्रों-क्रमांक तीन और क्रमांक-चार का हिस्सा हैं। करीब दो घंटे चले रोड शो के दौरान भाजपा अध्यक्ष ने हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया। 
 
भाजपा के स्थानीय उम्मीदवारों के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राकेश सिंह भी शाह के करीब तीन किलोमीटर लम्बे रोड शो में शामिल हुए। शाह ने प्रदेश में भाजपा के चुनावी "महा जनसम्पर्क अभियान" की शुरूआत भी इंदौर से ही छह अक्टूबर को थी। इंदौर सत्तारूढ़ भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसकी शहरी सीमा में विधानसभा की कुल पांच सीटें हैं। वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पांचों सीटें जीती थीं। 
 
बहरहाल, सत्ताविरोधी लहर को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बीच शहर में बदले सियासी समीकरणों के कारण इस बार कांटे की चुनावी टक्कर है। इसके मद्देनजर सत्तारूढ़ भाजपा को अपना गढ़ बचाने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगाते देखा गया है। प्रदेश में चुनाव प्रचार मतदान के 48 घंटे पहले सोमवार शाम पांच बजे थम गया। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 28 नवम्बर को मतदान होना है। मतों की गिनती 11 दिसंबर को की जाएगी।

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