मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश (9804)

आम चुनाव के शंखनाद के साथ ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश में अधिक से अधिक सीटें जीतने की कवायद तो कर रही है, मगर वह अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से उलझ गई है। किसानों की कर्जमाफी, युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, कर्मचारियों को डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी और अन्य मुद्दों के दम पर चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में विरोधी भाजपा ने घेर लिया है। सोशल मीडिया में कांग्रेस को वायदे न निभाने पर जमकर घेरा जा रहा है और उसे इसका जवाब नहीं सूझ रहा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के दो दिन पहले ही कमलनाथ सरकार को पिछड़ों के लिए आरक्षण का दायरा 14 से 27 प्रतिशत बढ़ाने का अध्यादेश लाना पड़ा, ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके। अपने अनुकूल वातावरण बनाने के लिए कमलनाथ सरकार ने प्रिंट और इलेक्टानिक मीडिया को सिर से पांव तक विज्ञापनों से लाद दिया, बावजूद इसके वह अपने खिलाफ पनपे एंटी इनकंबैंसी फैक्टर को कंट्रोल नहीं कर पा रही है।
10 दिनों में पूरा करना था वादा
 
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के मुताबिक सरकार बनते ही 10 दिनों के भीतर ही किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाना था मगर तीन महीने होने को हैं किसानों का कर्जा माफ नहीं किया जा सका है। सिर्फ कागजी कार्यवाही से किसान खुश नहीं हैं। बता दें कि किसानों को दो लाख रूपए तक कर्जा माफ किया जाना था। अभी तक सिर्फ बैंकों से डिफाल्टर किसानों की सूची ही जारी की गई है और जो किसान सूचियों में स्थान नहीं पा सके उनसे आवेदन भरवाए गए हैं। कई किसानों को कार्यक्रमों के जरिए कर्जमाफी के प्रमाणपत्र दिए तो गए हैं, मगर वास्तविकता इससे एकदम उलट है, क्योंकि कर्जमाफी की राशि किसानों के केसीसी खातों में स्थानांतरित नहीं की गई है। समय पर कर्जमाफी न होने से किसान खफा हैं। राजनीति विश्लेषक मानते हैं कि ये किसान भाजपा के पाले में जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को अत्यधिक नुकसान हो सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश में इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है और उसने प्रदेश स्तर पर धिक्कार दिवस का आयोजन करके कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है। हालांकि कमलनाथ ने किसानों को शांत करने के लिए लोकसभा चुनाव की घोषणा के दिन मोबाइल फोन पर मैसेज करके वादा किया है कि आदर्श आचार संहिता लगने के कारण कर्जमाफी चुनाव के तत्काल बाद की जाएगी, लेकिन कांग्रेस के हाथों से किसानों का बड़ा मुद्दा भाजपा ने एक तरह से लपक ही लिया है।
 
युवा और कर्मचारी भी रूठे
 
कमलनाथ और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं और कर्मचारियों को बेरोजगारी भत्ता और 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देना का वायदा किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यह मुद्दा भी कमलनाथ सरकार के लिए गले की फांस की तरह बन गया है। अभी तक न तो बेरोजगार युवाओं को 4 हजार रूपए बेराजगारी भत्ता दिया गया है और न ही कर्मचारियों को 2 प्रतिशत डीए।
 
पिछड़ों को साधने की कोशिश
 
हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने किसानों की नाराजगी से बचने के लिए पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण की सौगात देकर साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा कम ही मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। जिस तरह से किसानों के साथ कमलनाथ सरकार ने वादाखिलाफी की है उसका खामियाजा उसे भुगतने के लिए तैयार रहना ही होगा और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। मप्र में अभी तक पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है जिसे अब अध्यादेश लाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही मोदी सरकार द्वारा लाए गए गरीब सवर्ण आरक्षण के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण को भी मंजूरी दे गई है, इस पर भी कांग्रेस ने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।
 
ब्यूरोक्रेसी भी नाराज
 
अहम् बात यह भी है कि कमलनाथ सरकार ने जिस तरह से पदारूढ़ होते ही ताबड़तोड़ तबादलों की झड़ी लगा दी है, उससे भी ब्यूरोक्रेसी नाराज देखी जा रही है, जिसका नुकसान कांग्रेस को होगा। अफसरशाही इस बात को लेकर नाराज है कि बदले की भावना से तबादले किए जा रहे हैं। कमलनाथ को लगता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने हर जगह अपने आदमी बैठा रखे थे, जिन्हें चुन-चुनकर स्थानांतरित किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि वे तो सरकार के आदमी हैं, जैसा सरकार चाहेगी वैसा वे काम करेंगे, ऐसे में उनका क्या दोष। नतीजतन, कांग्रेस को तीन महीने के कार्यकाल में ही एंटीइनकंबैंसी का सामना करना पड़ रहा है। ऐन चुनाव के मौके पर और उस पर आदर्श आचार संहिता लग जाने की वजह से वह कोई निर्णय भी नहीं ले पा रही है जिससे वह धर्मसंकट में है कि किसानों व प्रदेश की जनता से किए गए वायदों को किस तरह निभाए।
 
-राजेन्द्र तिवारी

मध्य प्रदेश के सतना में कांग्रेस नेता अजय सिंह ने वायु सेना द्वारा पीओके में किए गए हवाई हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है, "कुछ दिन पहले, पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में बम गिराए गए। उन्होंने (प्रधानमंत्री) कहा कि बालाकोट में सबकुछ नष्ट हो गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि हवाई हमले से वहां कुछ नष्ट नहीं हुआ है। आज नहीं, तो अगले 10 दिनों में, घटनाओं का पूरा क्रम खुद ही सामने आ जाएगा।"

 


किसने बताई मारे गए लोगों की संख्या

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि भारत के एक गौरवान्वित नागरिक के तौर पर उन्हें पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर की गई वायु सेना की करवाई पर पूरा विश्वास है, लेकिन वहां 300-350 लोगों के मारे जाने की यह संख्या किसने बताई है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया वायु सेना के इस अभियान पर यकीन करे, इस बारे में सरकार को प्रयास करने चाहिए।

चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, "वायु सेना की कार्रवाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले वायुसेना को सलाम किया। मोदी जी यह क्यों भूल जाते हैं?' 

उन्होंने कहा, 'वायुसेना के वायस एयर मार्शल ने कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कोई आम व्यक्ति और सैनिक हताहत नहीं हुआ। फिर किसने मारे गए लोगों की संख्या 300-350 बताई?" 

चिदंबरम ने यह भी कहा, 'एक गौरवान्वित नागरिक के तौर पर मुझे अपनी सरकार में भरोसा है। लेकिन अगर हम चाहते हैं कि दुनिया इस पर विश्वास करे तो सरकार को विपक्ष पर निशाना साधने के बजाय इस दिशा में प्रयास करने चाहिए।'

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में इस बार शिवरात्रि के पर्व पर अधिकारियों की अपरिपक्वता देखने को मिली है। यहां भगवान महाकाल के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आए हुए हैं। लेकिन परिसर में प्रवेश के बाद भी वो परिसर के मंदिरों में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

 

यहां जगह के खाली होने के बावजूद भी लोगों की ढाई किलोमीटर लंबी लाइन बनाई गई है। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केवल इतना ही नहीं दोपहर डेढ़ से साढ़े तीन बजे तक वीआईपी दर्शन के लिए भी नियम बनाया गया है।

मंदिर में इस बार की गई व्यवस्था से ना केवल आम लोग परेशान हैं बल्कि यहां के पुजारी पुरोहित भी नाराज हैं। बताया जा रहा है कि सिंहस्थ के समय भी लाखों लोगों के आने के दौरान ऐसी समस्या नहीं आई थी। 

इंदौर. कमोडिटी कारोबारी संदीप सोहनलाल अग्रवाल उर्फ संदीप तेल की बुधवार शाम 7 बजे विजय नगर थाने से करीब 150 मीटर दूर तीन बदमाशों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। मामले में गुरुवार दोपहर तक पुलिस को आरोपियों का सुराग नहीं लग सका था। वहीं एमवाय अस्पताल में कारोबारी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने दावा किया है कि हत्या के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने 7 टीम गठित की है। वहीं आरोपियों पर 20 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। मामले में 30 से अधिक संदिग्ध लोगों से पुलिस द्वारा पूछताछ की गई है। पुलिस के अनुसार बदमाश सफेद रंग की कार से मृतक कारोबारी के ऑफिस के बाहर रैकी कर रहे थे। जैसे ही संदीप मोबाइल चलाते हुए सीढ़ियों से उतरकर अपनी मर्सिडीज के पास पहुंचे, तभी बदमाशों ने एक के बाद एक 5 फायर किए। पुलिस को घटना स्थल से सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं। अग्रवाल को गंभीर हालत में बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां उनकी मौत हो गई। 0:00 केबल में संदीप ने 20 करोड़ रु. लगाए थे एसपी पूर्व अवधेश गोस्वामी ने बताया कि हत्या जी. सच्चानंद शोरूम के सामने हुई। एक गोली संदीप के चेहरे पर, दूसरी गर्दन के पास, तीसरी पसली, चौथी व पांचवीं गोली पैर में लगी। गोली लगते ही वह ड्राइवर सीट वाले गेट के पास जमीन पर गिर गए। इसके बाद बदमाश कट्टे व पिस्टल लहराते हुए पहले सड़क की ओर भागे फिर वापस एक बदमाश लौटा और दो गोलियां और दागीं। वहीं पुलिस अधिकारी तीन गोली लगना बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि एसआर केबल में संदीप ने 20 करोड़ रु. लगाए थे। पार्टनरों से विवाद के बाद वे अलग हो गए थे। उनके इसमें करीब 19 करोड़ रुपए फंसे थे। दो माह पूर्व हटा दिए थे सुरक्षा गार्ड केबल विवाद के चलते परिवार के कहने पर संदीप ने दो बाउंसर साथ रखे थे। करीब दो माह पूर्व ही संदीप ने उन्हें हटा दिया था और अकेले ही घूमने लगे थे। एसआर केबल में 20 करोड़ का निवेश किया था संदीप का तेल, प्रॉपर्टी, ब्याज पर रुपए चलाने और कमोडिटी का कारोबार है। कम समय में ही एक युवा कारोबारी की पहचान बनाकर वह मीडिया लाइन में भी जुड़ गए थे। कुछ समय पूर्व उन्होंने एसआर केबल में रोहित सेठी और सुशील बजाज के साथ पार्टनशिप कर ली थी। बताते हैं इसमें 20 करोड़ का निवेश कर चुके थे, लेकिन कुछ माह पूर्व पार्टनरों से हुए विवाद के बाद वे केबल लाइन से अलग हो गए थे। बताते हैं उनका पार्टनरों से कागज पर सेटलमेंट हो गया था, लेकिन करीब 19 करोड़ नहीं मिले थे। इसे लेकर पार्टनरों से विवाद चल रहा था। ये बात पुलिस को परिजन ने बताई है। पुलिस पार्टनरों की भूमिका भी जांच रही है। शीर्ष पुलिस अफसर के फेयरवेल में साजिश की बात शहर के एक बड़े पुलिस अफसर के तबादले के बाद उनकी फेयरवेल पार्टी, जो होटल मेरियट में आयोजित हुई थी, उसमें संदीप के कुछ विरोधी भी पुलिस अफसरों के साथ मौजूद थे। बताते हैं इस पार्टी में ही कुछ गुंडा प्रवृत्ति के लोग भी गोपनीय ढंग से पहुंचे थे और यहीं पर संदीप पर हमले की साजिश रच ली गई थी, लेकिन अफसरों को इसकी जानकारी थी या नहीं ये भी एक बड़ा सवाल है। कई भाजपा नेताओं के बड़े फाइनेंसर थे संदीप संदीप के बारे में कहा जाता है कि उसके कई भाजपा नेताओं से घनिष्ट संबंध थे। वह कई नेताओं के लिए चुनाव व अन्य कार्यक्रमों में फंडिंग भी करते रहे हैं। उनके भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं से भी सीधे संपर्क थे।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बारे में उनकी सरकार सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय करेगी। जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी सरकार सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण कब से देगी, तो इस पर कमलनाथ ने यहां संवाददाताओं को बताया कि इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले मध्य प्रदेश सरकार समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेगी।

 

 उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पर विचार कर रहे हैं कि कैसे लागू करें……समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेंगे। हमें यह देखना है कि किसी के हितों को नुकसान न हो।’’ कमलनाथ ने कहा, ‘‘ओबीसी का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुझसे मिलने आया था और कह रहा था कि उनके लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम है।’’ इससे पहले कमलनाथ ने प्रदेश के 55 लाख किसानों की दो लाख रूपये तक की अपनी सरकार की 50,000 करोड़ रूपये के फसल ऋण माफ करने वाली ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’ में आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। 
इस दौरान उन्होंने कहा, ‘‘निवेश आने से रोजगार का निर्माण होता है और विश्वास से ही निवेश आता है । निवेश आए बिना रोजगार के अवसर पैदा करना संभव नहीं है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जल्दी ही प्रदेश में निवेश आने का सिलसिला शुरू होगा।’ उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश लाने के बारे में देश के उद्योगपतियों से उनकी बात चल रही है और एक महीने में बताऊंगा की कितना निवेश मध्य प्रदेश में आया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी सरकार के परफार्मेंस के बारे में भी मीडिया से हर महीने जानकारी साझा करूंगा।

भोपाल। अगले वित्त वर्ष में बिजली की कीमतें बढ़ने के आसार कम हैं। तीनों विद्युत वितरण कंपनियों ने एनुअल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) के लिए कोई अतिरिक्त राशि की मांग नहीं की है। वितरण कंपनियों की ओर से पॉवर मैनेजमेंट कंपनी विद्युत नियामक आयोग में एआरआर जमा कराती है। आयोग ने 22 जनवरी तक एआरआर जमा करने को कहा है।
एआरआर के आधार पर ही आयोग टैरिफ तय करता है। बिजली कंपनी के अफसर अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार कर रहे हैं कि मई में लोकसभा चुनाव और साल के अंत में नगरीय निकाय के चुनाव देखते हुए बिजली दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है। फरवरी तक घोषित नहीं हुआ तो जून के बाद ही घोषित होगा टैरिफ: विद्युत नियामक आयोग मार्च के अंतिम सप्ताह में बिजली टैरिफ जारी करता है। यदि इस बार फरवरी तक टैरिफ घोषित नहीं हुआ तो यह जून के बाद ही घोषित होगा। लोकसभा चुनाव के लिए फरवरी अंत से लेकर मार्च के पहले सप्ताह के बीच कभी भी आचार संहिता लागू होने की संभावना है। 2014 में 5 मार्च को आम चुनाव की घोषणा हुई थी और 16 मई तक चुनाव की प्रक्रिया चली थी। आचार संहिता के दौरान न तो जन सुनवाई हो पाएगी और न टैरिफ घोषित हो सकेगा। लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के करीब एक महीने बाद यानी जून में टैरिफ घोषित हो पाएगा।

भोपाल. ग्वालियर। मकर संक्रांति के बाद सर्दी से राहत की बात सोच रहे हैं तो ये बाद दिमाग से निकाल दे। क्योंकि इस बार संक्रांति के बाद भी कड़ाके की सर्दी के दो से तीन दौर और आ सकते हैं। इसका कारण, कश्मीर घाटी में बर्फबारी का दौर जारी है। सोमवार से हवाओं का रुख बदलने से एक बार फिर कंपाने वाली सर्दी का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक दो दिन बाद उत्तरी हवा एक बार फिर पारे को गिराएगी। प्रति चक्रवात के कारण शनिवार को पूर्वी और दक्षिण पूर्वी हवा चलने से रात के तापमान में जरूर थोड़ा सा इजाफा हुआ है। क्या कहते हैं वैज्ञानिक: मौसम विज्ञानी डॉ. डीपी दुबे के अनुसार चक्रवात में हवाएं चारों तरफ से आकर एक जगह एकत्रित होती हैं। अगर कहीं से इन हवा के साथ नमी आ रही है तो वह बादल बन जाते हैं और बरसात की संभावना बढ़ जाती है। प्रति चक्रवात में हवा दूर-दूर हो जाती हैं। इससे बादल नहीं बनते तथा मौसम में गरमाहट आ जाती है। 

भोपाल: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पीके साहा ने बताया कि शनिवार को दिन का तापमान 25.1 डिग्री दर्ज किया गया। इसमें 1.3 डिग्री का इजाफा हुआ। यह सामान्य रहा। दिन में हल्की धूप निकली, लेकिन शाम चार बजे तक ठंडी हवा नहीं चली। शुक्रवार को दिन का तापमान 23.8 डिग्री दर्ज किया गया था। रात का तापमान 10.1 डिग्री दर्ज किया गया। इसमें भी 1.3 डिग्री की बढ़ोतरी हुई। यह छह दिन बाद 10 डिग्री के पार पहुंचा। एक दिन पहले रात का तापमान 8.8 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विशेषज्ञ एसके नायक का कहना है कि 15- 16 और इसके एक दिन बाद 18 जनवरी को हिमालय के पश्चिमी हिस्से में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के पहुंचने का अनुमान है। अभी तापमान में ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है, लेकिन 19 जनवरी से यहां ठंड बढ़ सकती है। मिल रहे ट्रेंड के मुताबिक अभी आने वाले दिनों में ठंड के एक दो दौर और आ सकते हैं।

ग्वालियर: पूर्वी और दक्षिण- पूर्वी हवा चलने के कारण शनिवार को सुबह 8:30 बजे तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस रहा। बीते रोज सुबह 8:30 बजे तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। इसी तरह शाम 5:30 बजे तापमान 19 डिग्री रहा है जबकि शुक्रवार को शाम 5:30 बजे तापमान 18.8 डिग्री रहा था। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

इंदौर: अभी हवा का रुख दक्षिण-पूर्व बना हुआ है। इस कारण दिन-रात का तापमान सामान्य से ज्यादा हो गया। शनिवार को अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा रहा। वहीं शुक्रवार रात न्यूनतम तापमान 2 डिग्री बढ़कर 11.1 डिग्री रहा जो सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा है। सुबह 9 बजे तक ठंड रही, लेकिन दिन चढ़ते ही इसमें कमी आई। मौसम सुधरने से लोगों को राहत मिली। तेज ठंड होने से पत्ती, फली जलने की स्थिति में आ जाती है। सामान्य तापमान रहने से फसलों को फायदा होता है। हालांकि मावठा नहीं गिरने से किसानों को सिंचाई के इंतजाम करना पड़ रहे हैं। ठंड में भी देर रात से अलसुबह के बीच सिंचाई करने खेत में जाना पड़ता है। मौसम विभाग का मानना है 14 जनवरी के बाद ठंड का दौर फिर आएगा। उत्तर में बर्फबारी शुरू होने से मालवा में भी ठंडक बढ़ेगी। प्रदेश की बात की जाए तो खजुराहो में सबसे कम 3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ।

भोपाल . सात जनवरी से शुरू हो रहे मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के पहले हॉर्स ट्रेडिंग की खबरों से सियासी गलियारों में शनिवार को सुबह से लेकर रात तक खलबली मची रही। कांग्रेस राजधानी के बाहरी हिस्सों के होटलों में रुके अपने विधायकों को एकजुट करने में जुटी रही। पार्टी महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दिन में कई बार इन होटलों में विधायकों से मिलने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार जिन विधायकों पर कांग्रेस को आशंका है कि वे अध्यक्ष के चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं, दिग्विजय उनसे ही बात करते रहे। वहीं सरकार को समर्थन देने वाले दो निर्दलीय विधायकों केदार डाबर और विक्रम सिंह राणा से दिनभर कांग्रेस नेता संपर्क करते रहे, पर देर रात तक दोनों विधायकों से संपर्क नहीं हो सका।
शेरा को बनाया जा सकता है मंत्री
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर (शेरा) से संपर्क किया है और उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है। इसके अलावा असंतुष्टों में पार्टी के करीब एक दर्जन ऐसे विधायक हैं जो पहली बार जीतकर आए हैं और उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के दिग्गजों को हराया है, इनमें कई विधायक बुंदेलखंड से भी हैं।
नाथ ने कहा- विधायक जानते हैं उन्हें क्या करना
दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा के दो पूर्व मंत्रियों नरोत्तम मिश्रा और भूपेंद्र सिंह पर लगाए गए हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को जवाब दिया। पार्टी दफ्तर में भाजयुमो की बैठक में पहुंचे शिवराज ने कहा कि कांग्रेस सरकार अल्पमत की है। लेकिन यह भी सही है कि उनका संख्या बल भाजपा से ज्यादा है। इसलिए हमने पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा सरकार नहीं बनाएगी। सीएम कमलनाथ ने कहा कि विरोधी दल कितना भी प्रयास कर लें, मध्यप्रदेश में विधायक समझदार हैं, उन्हें पता है क्या करना है।

भोपाल . खुशबू खान...हां, मैं उसी जूनियर महिला हॉकी टीम की सदस्य हूं जिसने अर्जेंटीना के यूथ ओलिंपिक में अपने देश का नाम रोशन किया था। अब भारतीय महिला हाॅकी की टीम में सिलेक्शन को लेकर प्रयास कर रही हूं। हमारा शहर देश के सबसे स्वच्छ शहर में दूसरे पायदान पर है। मेरा दर्द इतना है कि ओडीएफ का तमगा मिलने के बाद भी यहां कई जगह अनदेखी है। मैं और मेरा परिवार अाज भी खुले में टॉयलेट जाने को मजबूर है। क्योंकि ठीक एक साल पहले जनवरी में ही नगर निगम ने मेरे घर(जहांगीराबाद स्थित वेटनरी कॉलोनी परिसर) के सामने बने टॉयलेट को अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया था। इंटरनेशनल खिलाड़ी होने के बावजूद निगम को मुझपर और मेरे परिवार पर तरस नहीं आया। निगम का अमला तो मेरे पूरे घर को ही तोड़ने पर आमदा था, लेकिन मैंने इसका विरोध किया और एडीएम दिशा नागवंशी, तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवड़े आैर भोपाल की चौपाल में अपनी परेशानी बताई। उन्हें बताया कि मैं अपनी प्रैक्टिस के लिए हॉकी कैंप में हिस्सा लेने के लिए शहर से बाहर रहती हूं। इस हर वक्त यह चिंता सताती है कि निगम मेरा आशियाना न तोड़ दे। इसलिए कहीं पर मुझे पक्का मकान दिला दिया जाए ताकि मै बेफिक्र होकर प्रैक्टिक कर सकूं। महापौर ने आश्वासन दिया था कि मुझे पक्का मकान टीटी नगर स्टेडियम के पास दिलाया जाएगा। बकायदा निगम के अपर आयुक्त प्रदीप जैन ने हाउसिंग फॉर ऑल के तहत मकान देने की पात्रता का सर्टिफिकेट भी दिया। उस बात को एक साल बीत चुका है। न मकान मिला और न ही घर के बाहर तोड़ा गया टॉयलेट निगम ने दोबारा बनाया।
खुशबू को मकान क्यों नहीं मिला, इसकी जांच होगी
शहर की बेटी खुशबू को मकान देने के लिए जो वादा मैंने किया था। उसे पूरा करुंगा। अभी तक मकान क्यों नहीं मिला। इसकी जानकारी भी ले रहा हूं। इसकी जांच होगी। खुशबू को जल्द घर दिलाने के लिए अफसरों से बात की जाएगी। आलोक शर्मा, महापौर

मध्यप्रदेश में साल 2005 में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वंदे मातरम गाने की परंपरा शुरू की थी। सरकारी कर्मचारी महीने के पहले कार्यदिवस पर राष्ट्रीय गीत गाया करते थे। इस परंपरा को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद खत्म करने का आदेश दिया था। जिसपर की भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि वह इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेंगे। अमित शाह ने भी राहुल गांधी से पूछा था कि क्या यह उनका आदेश है।
 
 
 
काफी विरोध के बाद कमलनाथ सरकार ने यू टर्न लेते हुए आदेश वापस ले लिया है। सरकार का कहना है कि अब केवल सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि आम जनता भी वंदे मातरम गाएगी। इसके लिए पुलिस बैंड का मार्च निकाला जाएगा। जिसमें आगे बैंड, पीछे कर्मचारी और सबसे पीछे आम जन शामिल होंगे। यह कार्यक्रम महीने के पहले कार्यदिवस पर आयोजित किया जाएगा।

वंदे मातरम को लेकर विवाद की शुरुआत नए साल पर हुई थी जब कमलनाथ ने हर महीने की एक तारीख को मंत्रालय में गाए जाने वाले वंदे मातरम को बंद करने का फैसला लेकर सियायत गर्म कर दी थी। इस परंपरा के तहत मंत्रालय के सभी कर्मचारी महीने की पहली तारीख को परिसर में इकट्ठा होकर एकसाथ मिलकर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया करते थे। इससे पहले भी वंदे मातरम को लेकर सियासत होती रही है।

क्या है पूरा मामला

एक जनवरी मंगलवार को वंदे मातरम का गायन होना था। मगर इसकी सूचना न तो बैंड वालों को और न ही कर्मचारियों को दी गई। जबकि सामान्य प्रशासन एक हफ्ते पहले ही इसकी रूपरेखा तय करने के साथ गायन के लिए मुख्य अतिथि का भी निर्धारण करता था। कांग्रेस सरकार के इस कदम ने राज्य की सियासत में भूचाल लाने का काम किया। भाजपा ने कांग्रेस पर तुरंत हमला बोलते हुए पूछा कि क्या अब भारत माता की जय बोलने से भी रोका जाएगा।

कांग्रेस सरकार द्वारा वंदे मातरम् का गायन बंद करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस बारे में बात करेंगे। इसे बंद करना ठीक नहीं है। सियासी घमासान मचने पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल को वंदेमातरम की फाइल सहित बुलाया। थोड़ी देर बाद मुख्य सचिव एसआर मोहंती भी वहां पहुंचे।

फाइल में गायन के शुरू किए जाने से लेकर अभी तक का ब्यौरा दिया गया था। अधिकारियों की तरफ से मुख्यमंत्री को तर्क दिया गया कि मंत्रालय में 3,000 कर्मचारी और अधिकारी हैं जिसमें से मुश्किल से 200-300 लोग गायन के लिए पहुंचते हैं। ऐसी राष्ट्रवादिता का क्या मतलब है? कमलनाथ सरकार सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगान को अनिवार्य करने की तैयारी में है। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार इसपर फैसला करके लागू करेगी।

इसके बाद सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने एलान किया था कि भाजपा के सारे विधायक सचिवालय में वंदे मातरम गाएंगे। उन्होंने कहा था, 'हमारे सभी 109 विधायक 7 जनवरी 2019 को मध्यप्रदेश सचिवालय में वंदे मातरम गाएंगे।' वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने ट्वीट करते हुए कहा था कि राष्ट्र गीत गाए जाने की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग की है जो फिलहाल सीएम के पास है।
 

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