ईश्वर दुबे
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Bhilai
शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए राज्यपाल के पास जा रहे हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि हम सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेंगे और हम संख्या बल के आगे सिर झुकाते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार सुबह मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है इसलिए हम सरकार बनाने का दावा पेश करने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपना इस्तीफा गवर्नर को देने जा रहा हूं। और शिवराज सिंह यह कहते ही गवर्नर को इस्तीफा देने राजभवन गए और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शिवराज सिंह के इस्तीफे के बाद से यह साफ हो चुका है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। आज कांग्रेस नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
एक ओर जहां जनमत आते ही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी हार स्वीकरा करते हुए कल ही इस्तीफा सौंप दिया था लेकिन शिवराज सिंह मंगलवार रात सरकार बनाने की जुगत में लगे रहे। और जब उन्हें कहीं से भी कोई आस दिखाई नहीं दी तब उन्होंने बुधवार सुबह अपनी हार स्वीकारी और राज्यपाल को इस्तीफा देने सौंपे। शिवराज सिंह ने कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ को शुभकामनाएं दीं और कहा कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है।
बता दें कि 11 दिसंबर को आए परिणामों में शिवराज सरकार को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा को 109 सीट आई है जबकि कांग्रेस बहुमत 116 से महज दो कदम दूर 114 सीटों पर ही ठिठक गई है। शिवराज पिछले 13 सालों से मुख्यमंत्री पद पर थे।
बता दें कि एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच कड़े मुकाबले का अनुमान जताए गए थे जिसके बाद भाजपा ने इसे सच्चाई से दूर बताया था। भाजपा ने इस बार बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को पार्टी के हक में बताया था। पार्टी ने कहा कि जो ढाई प्रतिशत मतदान बढ़ा है वह भाजपा सरकारों की नीतियों और योजनाओं को स्पष्ट समर्थन है और भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव (165) से भी अधिक सीटें जीतने जा रही है। लेकिन वह 109 सीट पर ही ठिठक गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद अब तेज हो गई है। एक तरफ 3 बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठकें कर रहे हैं। तो वहीं, दूसरी तरफ अब खबर आ रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बहुमत जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पार्टी सूत्रों से पता चला है कि दिग्विजय सिंह को आलाकमान ने सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी है।
इससे पहले बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा था कि वह किसी भी हालत में बीजेपी को समर्थन नहीं देगी। इसी के साथ ही उन्होंने उन उम्मीदवारों को दिल्ली बुलाया है जो अपनी-अपनी सीटों से आगे चल रहे है ताकि खरीद-फरोख्त की राजनीति न हो पाए।
वहीं, खबर ये भी है कि मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के जो नेता आगे चल रहे हैं उनमें से कुछ नेता कांग्रेस छोड़ कर बसपा में शामिल हुए थे। इसी बात को ध्यान में रखकर पार्टी ने यह जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह को सौंपी है।
मंगलवार 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जीत का दावा कर रहे हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से पूछा गया कि यदि राज्य में कांग्रेस जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम 140 से ज्यादा सीटे जीतेंगे। कल तक का इंतजार कीजिए उसके बाद सबकुछ साफ हो जाएगा।
7 दिसंबर को मतदान खत्म होने के बाद सभी राज्यों के एग्जिट पोल आए थे। आठ में से चार एग्जिट पोल में राज्य की सत्ता की चाबी कांग्रेस के हाथ में जाती हुई बताई गई थी। वहीं चार में भाजपा के ही सर्वेसर्वा बने रहने की भविष्यवाणी की गई थी। कल नतीजे आने से तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन राज्य में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
एग्जिट पोल उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर कुछ नेता इसे गलत तो वहीं कुछ पोल में मिली सीटों से भी अधिक सीटें जीतने का अनुमान लगाते हुए दिखे थे। चुनावी पंडितों की मानें तो प्रदेश की 54 सीटें ऐसी हैं जहां कब्जा करने वाला ही प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सकता है। वहीं कई एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं।
यदि यह एग्जिट पोल सही साबित हुए तो दोनों ही पार्टियां कहीं न कहीं टिकट बंटवारे की प्रकिया को दोष देंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट ना मिलने से नाराज दोनों ही पार्टी के बागी नेताओं ने 30 सीटों पर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरी पार्टी के टिकट पर या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी।
दोनों ही पार्टियों ने बागियों को मनाने का प्रयास किया। कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजय सिंह तो भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन नेताओं को मानने और उम्मीदवारी वापस कराने के लिए मोर्चा संभाला था।
पांचों राज्यों का चुनावी संग्राम खत्म होने के बाद अब सबकी निगाहें परिणामों पर हैं। मध्यप्रदेश में बीते 28 नवंबर को सभी 230 सीटों पर मतदान हुए थे। भाजपा की पिछले 15 साल से सूबे में सरकार है। शिवराज सिंह ने लगातार चौथी मुख्यमंत्री बनने के लिए पूरी ताकत लगा दी। चुनावी पंडित इस विधानसभा चुनाव को शिवराज को चुनने या नकारने के बीच जा चुनाव मान रहे हैं।
चुनाव के परिणाम तो 11 दिसंबर को जारी होंगे मगर उससे पहले नजर डालते हैं एग्जिट पोल के आंकड़ों पर-
भाजपा - 126
कांग्रेस - 89
बसपा - 06
अन्य - 09
भाजपा 102-120 सीटें (40% वोट)
कांग्रेस 104-122 सीटें (41% वोट)
अन्य 04-11 सीटें (19% वोट)
भाजपा - 90-106 सीटें
कांग्रेस - 110-126 सीटें
अन्य - 6-22 सीटें
भाजपा |
165 |
कांग्रेस |
58 |
अन्य |
7 |
मध्यप्रदेश में लोकायुक्त पुलिस ने वरिष्ठ महिला अफसर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद कई ठिकानों पर छापे मारे हैं।
लोकायुक्त पुलिस की इंदौर इकाई के अधीक्षक दिलीप सोनी ने शुक्रवार को बताया कि जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर को जिले के किशनगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया। वह नजदीकी खरगोन जिले में पदस्थ हैं।
उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान डामोर की कार से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद की गयी जिसके स्त्रोत के बारे में वह पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। वह खरगोन से रतलाम जा रही थीं, जहां उनका परिवार रहता है।
सोनी ने बताया, 'हमें शक है कि महिला अफसर ने यह नकदी रिश्वत के रूप ली थी। हमने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है। विस्तृत जांच जारी है।'
इस बीच, लोकायुक्त पुलिस के अलग-अलग दलों ने डामोर के खरगोन और रतलाम स्थित घरों पर छापे मारे।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों स्थानों पर छापों के दौरान लोकायुक्त पुलिस को महिला अधिकारी और उनके परिजनों के एक मकान, दो भूखंडों, एक फ्लैट और कृषि भूमि के सुराग मिले हैं। उनके घरों में 5.5 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य का घरेलू सामान, सोने-चांदी के जेवरात और दो चारपहिया गाड़ियां भी मिली हैं।
अधिकारियों के मुताबिक डामोर और उनके परिजनों के बैंक खातों तथा लॉकरों की भी जांच की जा रही है। उनकी चल-अचल संपत्ति का विस्तृत मूल्यांकन जारी है।
भोपाल। कांग्रेस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा एवं इसमें की जाने वाली छेड़छाड़ का आरोप लगाने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा ईवीएम से छेड़छाड़ गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं। मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को हुए मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा एवं छेड़छाड़ पर कांग्रेस द्वारा उठाये जाने वाले सवाल के जवाब में चौहान ने यहां मुख्यमंत्री निवास पर संवाददाताओं को बताया, ‘‘मीडिया है, जागरूक लोग हैं, सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों में सब तरह के लोग हैं। कोई ईवीएम में छेड़छाड़ कर सकता है क्या? ये कोई गुड्डा-गुडिया का खेल है जो कोई भी छेड़छाड़ कर देगा।’’
न्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा भी नहीं होता। भारतीय राजनीति में कभी ऐसा नहीं हुआ कि चुनाव आयोग ने ईवीएम बदल दी हो। ये तकनीकी रूप से भी कहीं संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर संदेह करना ठीक नहीं है। एक नहीं, अनेक परिणाम ऐसे आये हैं कि उसी ईवीएम ने दूसरी पार्टी को भी जिताया है। चौहान ने बताया कि कांग्रेस मतदान के दिन से ही अनर्गल प्रलाप कर रही है। मतदान के दिन तीन बजे ही मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियानमध्यप्रदेश में चुनाव के नतीजे सामने आने में बस कुछ ही दिनों का समय बाकी है। इन चुनावों को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) की एंट्री ने कई सीटों पर त्रिकोणीय बना दिया। महाकौशल में कौशल दिखाने वाली पार्टी ही अक्सर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होती है। इस इलाके में जीजीपी का शुरुआत से ही असर देखा गया है। इस बार जीजीपी के तीनों धड़ों ने एक साथ चुनाव लड़ा। अब परिणाम के पहले ये समीकरण दूसरी पार्टियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं।
इन चुनावों में जीजीपी ने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 2013 विधानसभा चुनाव में जब जीजीपी तीन टुकड़ों में टूट गई थी तब इसका मत प्रतिशत 1 फीसदी हो गया था।
2003 के चुनावों में जीजीपी ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसने महाकौशल के छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी में तीन सीटें जीती। अन्य तीन सीटों पर इसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। राजनीति के पंडितों को अचंभित करते हुए 3.23 फीसदी वोट हासिल किये।
2008 के चुनावों में पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) और गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) । जीजीपी ने 86 और जीजीएम ने 92 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इस टूट की वजह से जनजातीय पार्टी का जनाधार भी बंट गया और मत प्रतिशत 1.80% तक गिर गया। इन चुनावों में दोनों ही धड़ों का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया।
2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के एक धड़े ने अलग होकर भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) नाम की नई पार्टी बना ली और जीजीपी की मुश्किलें बढ़ गईं। चुनावों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 64, गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) ने 6 और भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा। नतीजा यह हुआ कि पार्टी का वोट प्रतिशत एक फीसदी हो गया।
एकता की ताकत को समझते हुए इस बार तीनों धड़ों ने एक होकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के पीछे पार्टी का उद्देश्य जनजाति मतदाताओं के अतिरिक्त वोट हासिल करना माना जा रहा है। जीजीपी इस बार के चुनाव में अपनी खोई साख वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
भोपाल. मध्य प्रदेश में वोटिंग के बाद अब ईवीएम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों की जानकारी मांगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भोजपुर से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पचौरी ने भोपाल और रायसेन जिलों में रविवार को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रविवार को पचौरी सबसे पहले रायसेन पहुंचे। उन्होंने वहां पर एसपी जगत सिंह के साथ स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने कहा कि मतदान के बाद प्रदेश भर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ईवीएम मशीनें जिन स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं, उनके मुख्य द्वार की विजिबिलिटी कैमरे के साथ प्रॉपर होनी चाहिए, जो कि रायसेन में नही है।
पत्र लिखकर मांगी आयोग से ईवीएम के नंबरों की जानकारी : कांग्रेस ने चुनाव आयोग से स्ट्रांग रूम के अंदर लैपटॉप ले जाने पर रोक लगाने की मांग की है। सागर, खंडवा, पंधाना की घटनाओं की जांच होनी चाहिए। सुरेश पचौरी ने आयोग को पत्र लिखकर ईवीएम की जानकारी मांगी गई है। पूरे चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम, उपयोग में लाई गई ईवीएम और बिना उपयोग वाली ईवीएम समेत खराब हुई ईवीएम के नंबरों की जानकारी मांगी गई है। आयोग को लिखे गए पत्र में पचौरी ने आशंका जताई गई है कि ईवीएम के जरिए गड़बड़ी हो सकती है।
बंद हो गई एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे: रायसेन जिला मुख्यालय पर बनाए गए स्ट्रांग रूम में एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे लाइट नहीं होने के कारण करीब आधे घंटे के लिए शाम 6 बजे बंद हो गए, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने स्ट्रांग रूम के बाहर हंगामा शुरू कर दिया था।
प्रदेश के कई जिलों से मिली शिकायतें: पचौरी ने कहा कि भोपाल, अनूपपुर, सागर में भी मशीनों के मूवमेन्ट को लेकर शिकायतें मिली हैं। इससे सब से साफ है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और गड़बड़ी होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, उन्होंने कहा कि 2013 में जिस तरह स्ट्रांग रूम के बाहर सोने की इजाजत थी, वैसी ही व्यवस्था इस बार भी की जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया निरीक्षण : ईवीएम पर लगातार खड़े होते संदेह के सवालों के बीच आखिरकार चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कांताराव ने भी भोपाल में स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। स्ट्रांग रूम के निरीक्षण के बाद कांताराव ने कहा कि चुनाव आयोग के 100 फीसदी नियमों का पालन ईवीएम की सुरक्षा में किया जा रहा है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर स्ट्रांग रूम और मतगणना के दौरान ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनावों और मतगणना के दौरान फूलप्रूफ व्यवस्था की जाए। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को चुनाव आयोग से मिला।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ में स्ट्रांगरूम के आसपास अनाधिकृत रूप से सीसीटीवी ठीक करने के बहाने लोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ आते हैं और घंटों तक वहीं रहते हैं। उन्होंने आयोग से इस पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आयोग को सुझाव दिया है कि ईवीएम मशीनों को स्ट्रांगरूम से मतगणना टेबल तक पहुंचाने के रास्ते तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को निगरानी करने का अधिकार दिया जाए। साथ ही, यह भी सुझाव दिया है कि पहले चरण की मतगणना में मिले वोटों की संख्या प्रत्याशियों बताई जाए जिसके बाद ही दूसरे चरण की मतगणना शुरू हो। साथ ही, मतगणना स्थल पर कलेक्टरो को मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी विवेक तन्खा ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि शुक्रवार को भोपाल के स्ट्रांग रूम में डेढ़ घंटे तक बिजली नहीं थी। उनका कहना है कि इससे मतदाताओं और राजनीतिक दलों में ईवीएम गड़बड़ी का संदेह पैदा होता है। वहीं उन्होंने एमपी के खुरई विधानसभा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वोटिंग के 48 घंटे बाद वह बस में भरककर लाए जाते हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना था कि वे ईवीएम रिजर्व थे और पुलिस कस्ट़डी में थे। तन्खा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ईवीएम को पुलिस स्टेशन में रखने की बजाय डीआरओ की कस्टडी में रहते हैं। उन्होंने इस मामले पर आयोग से कार्रवाई करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि यूपी के सहारनपुर में 167 मतदान केन्द्रों में कई में नाम हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक खास वर्ग विशेष के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। सिंघवी का कहना है कि अगर एक पोलिंग बूथ में 100 नाम हटाए जाते हैं, तो पूरे जिले में यह संख्या 16 हजार तक पहुंच सकती है, वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में 67 लाख वोटों का फर्क पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग ने भरोसा दिलाया है कि वह इस पर कार्रवाई करेंगे।
मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसका फैसला जनता जनार्दन कर चुकी है। 11 दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे। इसी बीच पुलिस ने एक सरपंच को लोगों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज करके गिरफ्तार किया है। सरपंच पर आरोप है कि उसने स्थानीय नागरिकों को कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की धमकी दी थी। यह घटना राजनगर विधानसभा क्षेत्र के छतरपुर जिले के जौराहा गांव की है।
आश्चर्य की बात यह है कि आरोपी सरपंच का नाता भाजपा से है। गांववालों का आरोप है कि सरपंच ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि वह 13 दिसंबर तक के लिए कहीं दूर चले जाएं। वरना उन्हें जान से मार दिया जाएगा। सरंपच ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। शिकायकर्ता भगीरथ कुशवाहा ने एसपी को दी शिकायत में कहा है कि सरपंच प्रदीप सिंह उसे मारने की धमकी दे रहा है।
आरोपी सरपंच और शिकायतकर्ता की कथित बातचीत का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अरविंद पटेरिया की कांग्रेस उम्मीदवार नाती राजा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धीरज चतुर्वेदी सीधी लड़ाई है। धीरज राज्यसभा के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे हैं। आरोपी सरपंच प्रदीप सिंह के भाई भाजपा नेता हैं। मगर उसपर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करवाने के लिए लोगों को धमकी देने का आरोप लगा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने कहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन रही है। गौर ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता और दिग्विजय मंत्रिमंडल में सदस्य रहे आरिफ अकील से मुलाकात के दौरान की। अकील बृहस्पतिवार को गौर से मुलाकात करने उनके बंगले पहुंचे थे। दोनों ने मीडिया के सामने ही कुछ समय चर्चा की। गौर ने अकील से कहा कि कांग्रेस की सरकार बन रही है और आप मंत्री बन रहे हो। उल्लेखनीय है कि लगातार दस विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले गौर का इस बार पार्टी ने टिकट काटकर उनकी बहू कृष्णा गौर को उम्मीदवार बनाया है। दोनों के बीच बातचीत का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।
भोपाल। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार के ‘समग्र पोर्टल’ के रिकॉर्ड के अनुसार ‘मामा’ नाम से लोकप्रिय प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पैतृक गांव जैत में 90 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2017 के मुताबिक 2006 से 2016 तक मध्य प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों में 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इंदौर। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये प्रचार के अंतिम समय में सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को सूबे की आर्थिक राजधानी इंदौर में रोड शो किया। उन्होंने राज्य में लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने की चुनौती से जूझ रही अपनी पार्टी के लिये मतदाताओं से समर्थन मांगा।
छतरपुर/निवाड़ी। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आज मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छतरपुर और निवाड़ी से अपनी सभाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मध्यप्रदेश वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पिछले कार्यकाल में सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया है। और अब समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए हम कटिबद्ध हैं। मैंने जो कुछ भी अपने प्राणों से प्यारी जनता से कहा है उसे मैं जरूर पूरा करूंगा, यह मेरा वादा है। मुख्यमंत्री द्वारा यह कहे जाते समय सभा पांडाल में उपस्थित हजारों लोग भावुक हो उठे और गगनभेदी नारों के साथ उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के प्रति अपनी आस्था का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेसियों को हमारी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर जमकर गुस्सा आ रहा है। सत्ता से दूर रहने पर गुस्सा आ रहा है। वे अपने गुस्से का इजहार टीवी कलाकारों के माध्यम से टेलीविजन पर दिखा रहे हैं और सभाओं में भी उनका गुस्सा साफ झलक रहा है। वे फर्जी वीडियो जारी करके भी मुझ पर गुस्सा उतार रहे हैं, लेकिन उनके गुस्से से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे गुस्सा करते रहे, मैं तो विकास कार्य करता रहूंगा। यह बात मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने छतरपुर जिले की विधानसभा बड़ा मलहरा के घुवारा में पार्टी प्रत्याशी श्रीमती ललिता यादव और विधानसभा निवाड़ी में पार्टी प्रत्याशी अनिल जैन के समर्थन में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए कही।
कांग्रेस बकवास करती है, हम वायदों को पूरा करते हैं
चौहान ने कहा है कि कांग्रेस ने कभी भी अपने वादे पूरे नहीं किए। उनके नेता बकवास करने में ज्यादा भरोसा रखते हैं, लेकिन भाजपा की सरकार ने जो भी वादा किया है, उसको हर हाल में पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मैंने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान यहां के लोगों से वादा करके गया था कि क्षेत्र को कॉलेज और अस्पताल दूंगा तो उस वादे को पूरा करके बताया भी है। अब वादा पूरा करने की बारी आप लोगों की है।
किसानों को मिलेगा सिंचाई के लिए पानी
CM शिवराज ने कहा कि किसान हमेशा से भाजपा सरकार की पहली प्राथमिकता रहा है। हमने पिछले 15 वर्षों में किसानों के हितों में कई योजनाएं चलाईं हैं, आगे भी काम होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जमाने में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता था। खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र की स्थिति तो बेहद दयनीय थी, लेकिन भाजपा की सरकार ने बुंदेलखंड के विकास में कोई कमी नहीं रखी और यहां पर किसानों के लिए कई सिंचाई परियोजनाओं का काम किया है। इससे यहां के क्षेत्रों की लाखों एकड़ जमीन पर सिंचाई हो सकेगी।
कांग्रेस को आ रहा गुस्सा
शिवराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकार तो 54 वर्षों में कुछ कर नहीं पाई, लेकिन हमने 15 वर्षों में मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से निकालकर विकसित राज्य बना दिया है तो इस पर उन्हें गुस्सा आ रहा है। उन्होंने कहा कि हम बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी बना रहे हैं तो इस पर भी उन्हें गुस्सा आ रहा है, हम बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन करा रहे हैं तो इस पर भी उन्हें गुस्सा आ रहा है, हम गरीबों को अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रूपए उपलब्ध करा रहे हैं, तो इस पर भी कांग्रेस के लोगों को गुस्सा आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सबसे ज्यादा गुस्सा उन्हें 15 वर्षों से सत्ता से दूर रहने पर आ रहा है। इसके लिए वे रातभर करवटें बदलते रहते हैं कि ये कुर्सी हमें कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि रातभर में भी नहीं सोता हूं, लेकिन मैं जनता की सेवा के लिए नहीं सोता हूं, और वे मेरे कारण रातभर जागते रहते हैं।
जिला बनाकर पूरा किया वचन
मुख्यमंत्री ने निवाड़ी की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमने निवाड़ी को जिला बनाकर अपना वचन पूरा किया है। अब बारी यहां की जनता की है। जनता अपने वचन को पूरा करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बार वचन-पत्र लेकर आई है, लेकिन वे सिर्फ वचन देते हैं उनको पूरा करने का काम भाजपा की सरकार करती है। उन्होंने पंजाब, कर्नाटक में भी किसानों को कई वचन दिए थे, लेकिन उनके वचन आज तक पूरे नहीं हुए हैं। अब वे मध्यप्रदेश की जनता के लिए वचन पत्र लेकर आए हैं, लेकिन उनके वचनों को पूरा भाजपा की सरकार ही करेगी। मुख्यमंत्री की सभा के दौरान घुवारा में देवेंद्र यादव, सुरेंद्र राय, प्रवीण नापित, विश्वनाथ सिंह, सुनील मिश्रा, ताज मोहम्मद कादरी, निवाड़ी में अखिलेश अयासी, नंदकिशोर नापित, कमलेश्वर देवलिया सहित बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।