मध्य प्रदेश

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शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए राज्यपाल के पास जा रहे हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि हम सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेंगे और हम संख्या बल के आगे सिर झुकाते हैं। 

शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार सुबह मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है इसलिए हम सरकार बनाने का दावा पेश करने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपना इस्तीफा गवर्नर को देने जा रहा हूं। और शिवराज सिंह यह कहते ही गवर्नर को इस्तीफा देने राजभवन गए और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शिवराज सिंह के इस्तीफे के बाद से यह साफ हो चुका है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। आज कांग्रेस नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

एक ओर जहां जनमत आते ही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी हार स्वीकरा करते हुए कल ही इस्तीफा सौंप दिया था लेकिन शिवराज सिंह मंगलवार रात सरकार बनाने की जुगत में लगे रहे। और जब उन्हें कहीं से भी कोई आस दिखाई नहीं दी तब उन्होंने बुधवार सुबह अपनी हार स्वीकारी और राज्यपाल को इस्तीफा देने सौंपे। शिवराज सिंह ने कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ को शुभकामनाएं दीं और कहा कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है।  

बता दें कि 11 दिसंबर को आए परिणामों में शिवराज सरकार को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा को 109 सीट आई है जबकि कांग्रेस बहुमत 116 से महज दो कदम दूर 114 सीटों पर ही ठिठक गई है। शिवराज पिछले 13 सालों से मुख्यमंत्री पद पर थे। 

बता दें कि एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच कड़े मुकाबले का अनुमान जताए गए थे जिसके बाद भाजपा ने इसे सच्चाई से दूर बताया था। भाजपा ने इस बार बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को पार्टी के हक में बताया था। पार्टी ने कहा कि जो ढाई प्रतिशत मतदान बढ़ा है वह भाजपा सरकारों की नीतियों और योजनाओं को स्पष्ट समर्थन है और भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव (165) से भी अधिक सीटें जीतने जा रही है। लेकिन वह 109 सीट पर ही ठिठक गई है। 

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद अब तेज हो गई है। एक तरफ 3 बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठकें कर रहे हैं। तो वहीं, दूसरी तरफ अब खबर आ रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बहुमत जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पार्टी सूत्रों से पता चला है कि दिग्विजय सिंह को आलाकमान ने सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी है। 

इससे पहले बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा था कि वह किसी भी हालत में बीजेपी को समर्थन नहीं देगी। इसी के साथ ही उन्होंने उन उम्मीदवारों को दिल्ली बुलाया है जो अपनी-अपनी सीटों से आगे चल रहे है ताकि खरीद-फरोख्त की राजनीति न हो पाए।

वहीं, खबर ये भी है कि मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के जो नेता आगे चल रहे हैं उनमें से कुछ नेता कांग्रेस छोड़ कर बसपा में शामिल हुए थे। इसी बात को ध्यान में रखकर पार्टी ने यह जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह को सौंपी है। 

मंगलवार 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जीत का दावा कर रहे हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से पूछा गया कि यदि राज्य में कांग्रेस जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम 140 से ज्यादा सीटे जीतेंगे। कल तक का इंतजार कीजिए उसके बाद सबकुछ साफ हो जाएगा। 

 

7 दिसंबर को मतदान खत्म होने के बाद सभी राज्यों के एग्जिट पोल आए थे। आठ में से चार एग्जिट पोल में राज्य की सत्ता की चाबी कांग्रेस के हाथ में जाती हुई बताई गई थी। वहीं चार में भाजपा के ही सर्वेसर्वा बने रहने की भविष्यवाणी की गई थी। कल नतीजे आने से तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन राज्य में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 

एग्जिट पोल उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर कुछ नेता इसे गलत तो वहीं कुछ पोल में मिली सीटों से भी अधिक सीटें जीतने का अनुमान लगाते हुए दिखे थे। चुनावी पंडितों की मानें तो प्रदेश की 54 सीटें ऐसी हैं जहां कब्जा करने वाला ही प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सकता है। वहीं कई एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं। 

यदि यह एग्जिट पोल सही साबित हुए तो दोनों ही पार्टियां कहीं न कहीं टिकट बंटवारे की प्रकिया को दोष देंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट ना मिलने से नाराज दोनों ही पार्टी के बागी नेताओं ने 30 सीटों पर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरी पार्टी के टिकट पर या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी।

दोनों ही पार्टियों ने बागियों को मनाने का प्रयास किया। कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजय सिंह तो भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन नेताओं को मानने और उम्मीदवारी वापस कराने के लिए मोर्चा संभाला था।

पांचों राज्यों का चुनावी संग्राम खत्म होने के बाद अब सबकी निगाहें परिणामों पर हैं। मध्यप्रदेश में बीते 28 नवंबर को सभी 230 सीटों पर मतदान हुए थे। भाजपा की पिछले 15 साल से सूबे में सरकार है। शिवराज सिंह ने लगातार चौथी मुख्यमंत्री बनने के लिए पूरी ताकत लगा दी। चुनावी पंडित इस विधानसभा चुनाव को शिवराज को चुनने या नकारने के बीच जा चुनाव मान रहे हैं।

 

चुनाव के परिणाम तो 11 दिसंबर को जारी होंगे मगर उससे पहले नजर डालते हैं एग्जिट पोल के आंकड़ों पर- 

टाइम्स नाउ-सीएनएक्स एग्जिट पोल

भाजपा - 126
कांग्रेस - 89
बसपा - 06
अन्य - 09 

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल 

भाजपा 102-120 सीटें (40% वोट) 
कांग्रेस 104-122 सीटें (41% वोट) 
अन्य 04-11 सीटें (19% वोट) 

रिपब्लिक टीवी- सी वोटर एग्जिट पोल

भाजपा - 90-106 सीटें
कांग्रेस - 110-126 सीटें
अन्य - 6-22 सीटें

पिछले चुनाव में पार्टियों की स्थिति

मध्यप्रदेश

भाजपा  

165

कांग्रेस

58

अन्य

7


कांग्रेस ने चुनाव में मुख्यमंत्री के खिलाफ बुधनी से अरुण यादव को मैदान में उतारा।  भाजपा और कांग्रेस के अलावा इस चुनावों में बहुजन समाज पार्टी ने 227 और समाजवादी पार्टी ने 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने भी 208 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए। 

इस बार प्रदेश में कुल पांच करोड़ से मतदाताओं की संख्या थी। चुनाव आयोग ने पिछली बार से 21.24% ज्यादा 65,341 मतदान बूथ बनाए। 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान 21 जनसभाएं की और जमकर हमला बोला। फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी 25 सभाएं की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद 100 से ज्यादा सभाओं को संबोधित किया।

मध्यप्रदेश में लोकायुक्त पुलिस ने वरिष्ठ महिला अफसर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद कई ठिकानों पर छापे मारे हैं।

 

लोकायुक्त पुलिस की इंदौर इकाई के अधीक्षक दिलीप सोनी ने शुक्रवार को बताया कि जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर को जिले के किशनगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया। वह नजदीकी खरगोन जिले में पदस्थ हैं।

उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान डामोर की कार से 1.60 लाख रुपये की नकदी बरामद की गयी जिसके स्त्रोत के बारे में वह पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। वह खरगोन से रतलाम जा रही थीं, जहां उनका परिवार रहता है।

सोनी ने बताया, 'हमें शक है कि महिला अफसर ने यह नकदी रिश्वत के रूप ली थी। हमने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है। विस्तृत जांच जारी है।'

इस बीच, लोकायुक्त पुलिस के अलग-अलग दलों ने डामोर के खरगोन और रतलाम स्थित घरों पर छापे मारे।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों स्थानों पर छापों के दौरान लोकायुक्त पुलिस को महिला अधिकारी और उनके परिजनों के एक मकान, दो भूखंडों, एक फ्लैट और कृषि भूमि के सुराग मिले हैं। उनके घरों में 5.5 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य का घरेलू सामान, सोने-चांदी के जेवरात और दो चारपहिया गाड़ियां भी मिली हैं।

अधिकारियों के मुताबिक डामोर और उनके परिजनों के बैंक खातों तथा लॉकरों की भी जांच की जा रही है। उनकी चल-अचल संपत्ति का विस्तृत मूल्यांकन जारी है।

भोपाल। कांग्रेस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा एवं इसमें की जाने वाली छेड़छाड़ का आरोप लगाने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा ईवीएम से छेड़छाड़ गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं। मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को हुए मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा एवं छेड़छाड़ पर कांग्रेस द्वारा उठाये जाने वाले सवाल के जवाब में चौहान ने यहां मुख्यमंत्री निवास पर संवाददाताओं को बताया, ‘‘मीडिया है, जागरूक लोग हैं, सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों में सब तरह के लोग हैं। कोई ईवीएम में छेड़छाड़ कर सकता है क्या? ये कोई गुड्डा-गुडिया का खेल है जो कोई भी छेड़छाड़ कर देगा।’’

न्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा भी नहीं होता। भारतीय राजनीति में कभी ऐसा नहीं हुआ कि चुनाव आयोग ने ईवीएम बदल दी हो। ये तकनीकी रूप से भी कहीं संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर संदेह करना ठीक नहीं है। एक नहीं, अनेक परिणाम ऐसे आये हैं कि उसी ईवीएम ने दूसरी पार्टी को भी जिताया है। चौहान ने बताया कि कांग्रेस मतदान के दिन से ही अनर्गल प्रलाप कर रही है। मतदान के दिन तीन बजे ही मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को अपनी विजय का विश्वास नहीं है। वह हार की पूर्व भूमिका तैयार कर रही है। इसलिए बौखलाकर हार का ठीकरा अभी से ईवीएम के माथे पर फोड़ रही है।’’ चौहान ने बताया, ‘‘आज हमने कैबिनेट में कुछ जरूरी विषयों की समीक्षा की। अधिकारियों को बुलाया और बातचीत की। लेकिन उस कैबिनेट के बारे में भी कांग्रेस द्वारा ऐसा हंगामा मचाया गया, जैसे भाजपा की सरकार कोई बड़ा असंवैधानिक काम कर रही हो। हमने अपने कर्तव्यों का पालन किया है और लगातार करते रहेंगे।’’
 
न्होंने कहा कि कैबिनेट मीटिंग में नीतिगत फैसले नहीं हो सकते लेकिन रूटीन का काम हम करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यूनमत समर्थन मूल्य के मामले एवं उर्वरक आपूर्ति के साथ-साथ धान व सोयाबीन खरीदी की समीक्षा की गई। जीका वायरस के कारण जो आशंका पैदा हुई थी, उसके बारे में समीक्षा की गई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा शानदार बहुमत प्राप्त कर चौथी बार लगातार सरकार बनाएगी।

मध्यप्रदेश में चुनाव के नतीजे सामने आने में बस कुछ ही दिनों का समय बाकी है। इन चुनावों को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) की एंट्री ने कई सीटों पर त्रिकोणीय बना दिया। महाकौशल में कौशल दिखाने वाली पार्टी ही अक्सर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होती है। इस इलाके में जीजीपी का शुरुआत से ही असर देखा गया है। इस बार जीजीपी के तीनों धड़ों ने एक साथ चुनाव लड़ा। अब परिणाम के पहले ये समीकरण दूसरी पार्टियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं।

टूट से गिरा था जीजीपी का मत प्रतिशत 

इन चुनावों में जीजीपी ने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 2013 विधानसभा चुनाव में जब जीजीपी तीन टुकड़ों में टूट गई थी तब इसका मत प्रतिशत 1 फीसदी हो गया था।

 

2003 के चुनावों में जीजीपी ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसने महाकौशल के छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी में तीन सीटें जीती। अन्य तीन सीटों पर इसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। राजनीति के पंडितों को अचंभित करते हुए 3.23 फीसदी वोट हासिल किये।

2008 के चुनावों में पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) और गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) । जीजीपी ने 86 और जीजीएम ने 92 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इस टूट की वजह से जनजातीय पार्टी का जनाधार भी बंट गया और मत प्रतिशत 1.80% तक गिर गया। इन चुनावों में दोनों ही धड़ों का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया।

2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के एक धड़े ने अलग होकर भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) नाम की नई पार्टी बना ली और जीजीपी की मुश्किलें बढ़ गईं। चुनावों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 64,  गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) ने 6 और भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा।  नतीजा यह हुआ कि पार्टी का वोट प्रतिशत एक फीसदी हो गया।

एकता की ताकत को समझते हुए इस बार तीनों धड़ों ने एक होकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के पीछे पार्टी का उद्देश्य जनजाति मतदाताओं के अतिरिक्त वोट हासिल करना माना जा रहा है। जीजीपी इस बार के चुनाव में अपनी खोई साख वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। 

भोपाल. मध्य प्रदेश में वोटिंग के बाद अब ईवीएम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों की जानकारी मांगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भोजपुर से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पचौरी ने भोपाल और रायसेन जिलों में रविवार को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

 रविवार को पचौरी सबसे पहले रायसेन पहुंचे। उन्होंने वहां पर एसपी जगत सिंह के साथ स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था देखी। उन्होंने कहा कि मतदान के बाद प्रदेश भर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ईवीएम मशीनें जिन स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं, उनके मुख्य द्वार की विजिबिलिटी कैमरे के साथ प्रॉपर होनी चाहिए, जो कि रायसेन में नही है। 

 पत्र लिखकर मांगी आयोग से ईवीएम के नंबरों की जानकारी : कांग्रेस ने चुनाव आयोग से स्ट्रांग रूम के अंदर लैपटॉप ले जाने पर रोक लगाने की मांग की है। सागर, खंडवा, पंधाना की घटनाओं की जांच होनी चाहिए। सुरेश पचौरी ने आयोग को पत्र लिखकर ईवीएम की जानकारी मांगी गई है। पूरे चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम, उपयोग में लाई गई ईवीएम और बिना उपयोग वाली ईवीएम समेत खराब हुई ईवीएम के नंबरों की जानकारी मांगी गई है। आयोग को लिखे गए पत्र में पचौरी ने आशंका जताई गई है कि ईवीएम के जरिए गड़बड़ी हो सकती है। 

 बंद हो गई एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे: रायसेन जिला मुख्यालय पर बनाए गए स्ट्रांग रूम में एलईडी टीवी और सीसीटीवी कैमरे लाइट नहीं होने के कारण करीब आधे घंटे के लिए शाम 6 बजे बंद हो गए, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने स्ट्रांग रूम के बाहर हंगामा शुरू कर दिया था।

 प्रदेश के कई जिलों से मिली शिकायतें: पचौरी ने कहा कि भोपाल, अनूपपुर, सागर में भी मशीनों के मूवमेन्ट को लेकर शिकायतें मिली हैं। इससे सब से साफ है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ और गड़बड़ी होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, उन्होंने कहा कि 2013 में जिस तरह स्ट्रांग रूम के बाहर सोने की इजाजत थी, वैसी ही व्यवस्था इस बार भी की जाए। 

 मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया निरीक्षण : ईवीएम पर लगातार खड़े होते संदेह के सवालों के बीच आखिरकार चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कांताराव ने भी भोपाल में स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। स्ट्रांग रूम के निरीक्षण के बाद कांताराव ने कहा कि चुनाव आयोग के 100 फीसदी नियमों का पालन ईवीएम की सुरक्षा में किया जा रहा है। 

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर स्ट्रांग रूम और मतगणना के दौरान ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनावों और मतगणना के दौरान फूलप्रूफ व्यवस्था की जाए। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को चुनाव आयोग से मिला।

 

 प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ में स्ट्रांगरूम के आसपास अनाधिकृत रूप से सीसीटीवी ठीक करने के बहाने लोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ आते हैं और घंटों तक वहीं रहते हैं। उन्होंने आयोग से इस पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आयोग को सुझाव दिया है कि ईवीएम मशीनों को स्ट्रांगरूम से मतगणना टेबल तक पहुंचाने के रास्ते तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को निगरानी करने का अधिकार दिया जाए। साथ ही, यह भी सुझाव दिया है कि पहले चरण की मतगणना में मिले वोटों की संख्या प्रत्याशियों बताई जाए जिसके बाद ही दूसरे चरण की मतगणना शुरू हो। साथ ही, मतगणना स्थल पर कलेक्टरो को मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी विवेक तन्खा ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि शुक्रवार को भोपाल के स्ट्रांग रूम में डेढ़ घंटे तक बिजली नहीं थी। उनका कहना है कि इससे मतदाताओं और राजनीतिक दलों में ईवीएम गड़बड़ी का संदेह पैदा होता है। वहीं उन्होंने एमपी के खुरई विधानसभा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वोटिंग के 48 घंटे बाद वह बस में भरककर लाए जाते हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना था कि वे ईवीएम रिजर्व थे और पुलिस कस्ट़डी में थे। तन्खा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ईवीएम को पुलिस स्टेशन में रखने की बजाय डीआरओ की कस्टडी में रहते हैं। उन्होंने इस मामले पर आयोग से कार्रवाई करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप

कांग्रेस नेता मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि यूपी के सहारनपुर में 167 मतदान केन्द्रों में कई में नाम हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक खास वर्ग विशेष के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। सिंघवी का कहना है कि अगर एक पोलिंग बूथ में 100 नाम हटाए जाते हैं, तो पूरे जिले में यह संख्या 16 हजार तक पहुंच सकती है, वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में 67 लाख वोटों का फर्क पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग ने भरोसा दिलाया है कि वह इस पर कार्रवाई करेंगे।

मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसका फैसला जनता जनार्दन कर चुकी है। 11 दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे। इसी बीच पुलिस ने एक सरपंच को लोगों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज करके गिरफ्तार किया है। सरपंच पर आरोप है कि उसने स्थानीय नागरिकों को कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की धमकी दी थी। यह घटना राजनगर विधानसभा क्षेत्र के छतरपुर जिले के जौराहा गांव की है। 

 

आश्चर्य की बात यह है कि आरोपी सरपंच का नाता भाजपा से है। गांववालों का आरोप है कि सरपंच ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि वह 13 दिसंबर तक के लिए कहीं दूर चले जाएं। वरना उन्हें जान से मार दिया जाएगा। सरंपच ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। शिकायकर्ता भगीरथ कुशवाहा ने एसपी को दी शिकायत में कहा है कि सरपंच प्रदीप सिंह उसे मारने की धमकी दे रहा है।

आरोपी सरपंच और शिकायतकर्ता की कथित बातचीत का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अरविंद पटेरिया की कांग्रेस उम्मीदवार नाती राजा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धीरज चतुर्वेदी सीधी लड़ाई है। धीरज राज्यसभा के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे हैं। आरोपी सरपंच प्रदीप सिंह के भाई भाजपा नेता हैं। मगर उसपर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करवाने के लिए लोगों को धमकी देने का आरोप लगा है।

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